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Sunday, September 13, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में गाजियाबाद में समर्थन जुटाने की अजय सिन्हा की कोशिशों को विफल होता देख दीपक गुप्ता को अपना 'गणित' बिगड़ता नजर आ रहा है; और इन दोनों की असफलता प्रियतोष गुप्ता के लिए वरदान बनती दिख रही है

गाजियाबाद । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने और 'दिखाने' के लिए अजय सिन्हा और दीपक गुप्ता द्वारा की जा रही पार्टियों को लगातार जो झटके पर झटके लग रहे हैं, उससे प्रियतोष गुप्ता की उम्मीदवारी को समर्थन की और मजबूती मिलती लग रही है । अजय सिन्हा ने पिछले दिनों अपने घर और अपने ऑफिस में छोटे-छोटे समूहों में गाजियाबाद के रोटेरियंस के लिए पार्टियाँ आयोजित कीं, लेकिन उनमें भी इक्का-दुक्का लोग ही पहुँचे । दीपक गुप्ता ने गाजियाबाद में आयोजित की गई पिछली पार्टी की असफलता से सबक लेकर, और ज्यादा तैयारी के साथ एक और पार्टी आयोजित की - लेकिन उसका हाल पिछली वाली पार्टी से भी बुरा हुआ । अजय सिन्हा की तरफ से आयोजित हुई पार्टियों का तो लोगों के बीच खासा मजाक भी बना । अजय सिन्हा ने अपने घर और ऑफिस में छोटे-छोटे समूहों में जो पार्टियाँ आयोजित कीं, उन्हें लेकर लोगों का कहना रहा कि उन्हें तो यही समझ में नहीं आया कि अजय सिन्हा अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के लिए पार्टी कर रहे हैं, या अपनी उम्मीदवारी के श्राद्ध का भोज दे रहे हैं ।
अजय सिन्हा को इस बीच दोहरी मुसीबतों ने घेर लिया है । एक तरफ तो उनके द्वारा दी गई पार्टियों में आमंत्रित किए गए लोग पहुँचे नहीं तथा उनकी पार्टियों का मजाक बना, तो दूसरी तरफ उनके क्लब में अगले रोटरी वर्ष के लिए प्रेसीडेंट तय नहीं हो पा रहा है । अगले रोटरी वर्ष में गवर्नर बनने की तैयारियों में जुटे अशोक अग्रवाल बेचारे पेम वन के लिए अजय सिन्हा के क्लब के प्रेसीडेंट का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अजय सिन्हा उन्हें अपने क्लब के प्रेसीडेंट का नाम ही नहीं दे पा रहे हैं । अजय सिन्हा का क्लब एक बड़ा क्लब है, और बहुत सक्रिय रहा है । पिछले दो वर्षों में राकेश छारिया और उनके बेटे क्लब के प्रेसीडेंट रहे, और उन्होंने अपनी अपनी सक्रियता से क्लब का नाम खूब रोशन किया तथा दोनों ने ही बड़े अवॉर्ड प्राप्त किए । लेकिन इस वर्ष अजय सिन्हा ने अप्रत्यक्ष रूप से क्लब की बागडोर सँभाली, और दो महीनों में ही क्लब के माहौल का ऐसा कबाड़ा कर दिया है कि कोई क्लब का अगला प्रेसीडेंट बनने को तैयार नहीं है । अजय सिन्हा अपने एक रिश्तेदार सहित दो/तीन लोगों को बारी बारी से प्रेसीडेंट बनने के लिए राजी करने का प्रयास कर चुके हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली है । 

लोगों ने इसे अजय सिन्हा की लीडरशिप की असफलता के रूप में देखा/पहचाना है, और माना/कहा है कि अजय सिन्हा को पहले अपने क्लब में अपनी लीडरशिप बनानी चाहिए, और उसके बाद डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने के बारे में सोचना चाहिए । गाजियाबाद में समर्थन जुटाने की अजय सिन्हा की कोशिशों को विफल होता देख दीपक गुप्ता को अपना 'गणित' बिगड़ता नजर आ रहा है । उन्हें लगता था कि अजय सिन्हा की उम्मीदवारी गाजियाबाद में प्रियतोष गुप्ता के समर्थन-आधार को कमजोर करने का काम करेगी, और इससे उन्हें प्रियतोष गुप्ता के साथ अपनी दूरी को कम करने का मौका मिलेगा । दीपक गुप्ता को लेकिन यह देख कर झटका लगा है कि गाजियाबाद में न उन्हें समर्थन मिल पा रहा है, और न अजय सिन्हा को । ऐसे में, इन दोनों के नजदीकियों को ही लगने लगा है कि प्रियतोष गुप्ता की उम्मीदवारी को उनकी खुद की सक्रियता से जितना जो फायदा हो रहा है, उससे कहीं ज्यादा फायदा उन्हें अजय सिन्हा तथा दीपक गुप्ता की गतिविधियों को लगातार मिल रही असफलताओं से हो रहा है । दरअसल जब तक अजय सिन्हा और दीपक गुप्ता की सक्रियता नहीं थी, तब तक उनकी मुट्ठी बंद थी और कुछेक लोगों को लगता था कि उनकी मुट्ठी में बंद समर्थन प्रियतोष गुप्ता के लिए चुनौती सकता है - लेकिन अब जब अजय सिन्हा और दीपक गुप्ता की मुट्ठी खुलती जा रही है, तो पता चल रहा है कि जिसे 'लाख की समझा जा रहा था, वह तो खाक की है ।'  

Monday, August 10, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट अशोक अग्रवाल के चुनावी राजनीति के पचड़े में न पड़ने तथा अपनी गवर्नरी पर ध्यान देने के रवैये के चलते अजय सिन्हा और दीपक गुप्ता की उम्मीदों पर पानी फिरा, तथा प्रियतोष गुप्ता की उम्मीदवारी के लिए रास्ता साफ हुआ

गाजियाबाद । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशों का कोई फायदा न मिलता देख अजय सिन्हा के साथ जुड़े लोगों ने अब उनसे दूर हटना और 'दिखना' शुरू कर दिया है । इन पंक्तियों के लेखक से अजय सिन्हा की उम्मीदवारी को लेकर बेहद उत्साह के साथ बात करते रहने वाले लोगों ने सुर/स्वर बदलते हुए कहना/बताना शुरू किया है कि अजय सिन्हा ने हालाँकि पिछले दिनों अच्छा संपर्क अभियान चलाया, लेकिन वह लोगों के बीच अपनी उम्मीदवारी को लेकर कोई जोश पैदा करने में विफल रहे हैं - और कारण से उनका हौंसला भी टूटता हुआ लग रहा है । अजय सिन्हा को सबसे बड़ा झटका डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट अशोक अग्रवाल के रवैये से लगा है । अजय सिन्हा को उम्मीद थी कि डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में जिस तरह का समीकरण बन रहा है, उसमें अशोक अग्रवाल का समर्थन उन्हें मिल जायेगा - और फिर अशोक अग्रवाल ही उन्हें कुछेक अन्य गवर्नर्स का समर्थन दिलवा देंगे । अजय सिन्हा को ऐसी उम्मीद इसलिए भी थी, क्योंकि उन्हें लगता था कि उन्होंने अशोक अग्रवाल के बहुत कुछ किया है - इसलिए अशोक अग्रवाल अवश्य ही उनका साथ देंगे । अजय सिन्हा को लेकिन यह देख कर खासा झटका लगा है कि उनकी उम्मीद के विपरीत अशोक अग्रवाल उनकी उम्मीदवारी में कोई दिलचस्पी ही नहीं ले रहे हैं ।
अशोक अग्रवाल के नजदीकियों का कहना/बताना है कि अशोक अग्रवाल का सारा ध्यान दरअसल अपनी गवर्नरी पर है, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति के चक्कर में वह अपनी गवर्नरी खराब करने का खतरा नहीं उठाना चाहते हैं । कोरोना प्रकोप के चलते बने हालात के कारण अशोक अग्रवाल के लिए गवर्नरी 'करना' और गवर्नर पद की जिम्मेदारियाँ निभाना वैसे भी खासा चुनौतीपूर्ण हो गया है, और इस चुनौती से निपटने के लिए उन्हें डिस्ट्रिक्ट में हर किसी का सहयोग व समर्थन चाहिए होगा: अशोक अग्रवाल भी समझ रहे हैं कि ऐसे में वह यदि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति के चक्कर में पड़े - तो उन्हें अपनी गवर्नरी को ही दाँव पर लगाना होगा । अशोक अग्रवाल के नजदीकियों के ही अनुसार, अशोक अग्रवाल को यह भी 'दिख' रहा है तथा समझ में आ रहा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी दौड़ में प्रियतोष गुप्ता चूँकि काफी आगे हैं, तथा बाकी अन्य उम्मीदवारों के लिए उनका मुकाबला कर पाना मुश्किल क्या - असंभव ही लग रहा है, इसलिए भी अशोक अग्रवाल ने अजय सिन्हा की उम्मीदवारी को तवज्जो देने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है । इस कारण से, अशोक अग्रवाल के समर्थन का दावा करके अजय सिन्हा ने अपनी उम्मीदवारी के पक्ष में जो गुब्बारा फुलाने की तैयारी की थी, उसकी सारी हवा निकल गई है । 

मजे की बात यह सुनने/देखने में आ रही है कि अजय सिन्हा की उम्मीदवारी के गुब्बारे की हवा निकलते देख डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के तीसरे उम्मीदवार दीपक गुप्ता को सबसे ज्यादा निराशा हो रही है, और उन्हें अपना 'खेल' बिगड़ता नजर आ रहा है । दरअसल दीपक गुप्ता को अजय सिन्हा की उम्मीदवारी में अपना फायदा दिख रहा था; उनका सोचना था कि अशोक अग्रवाल के समर्थन के सहारे अजय सिन्हा गाजियाबाद में प्रियतोष गुप्ता के वोट काटेंगे - और उस स्थिति में उनका फायदा होगा । दिलचस्प बात यह हुई कि अजय सिन्हा के चुनावी मुकाबले में कूद पड़ने से पहले प्रियतोष गुप्ता के सामने दीपक गुप्ता जब अकेले थे, तब दीपक गुप्ता ने अपने आप को प्रियतोष गुप्ता का मुकाबला करने में असमर्थ पाया और वह चुनावी सीन से हटते हुए लगे थे - किंतु अचानक से प्रस्तुत हुई अजय सिन्हा की उम्मीदवारी दीपक गुप्ता को संजीवनी की तरह लगी और वह पुनः चुनावी ताल ठोकने लगे । लेकिन अशोक अग्रवाल के चुनावी राजनीति के पचड़े में न पड़ने तथा अपनी गवर्नरी पर ध्यान देने के चलते अजय सिन्हा की उम्मीदों पर पानी पड़ने से प्रियतोष गुप्ता की उम्मीदवारी के लिए रास्ता जिस तरह से साफ हुआ है - उससे दीपक गुप्ता का 'फायदे का गणित' गड़बड़ा गया है और उनके लिए पहले वाली स्थिति ही बन गई है - जहाँ कि वह प्रियतोष गुप्ता का मुकाबला करने में अपने को असमर्थ पा रहे थे । 

Friday, June 19, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अचानक से प्रस्तुत हुई अजय सिन्हा की उम्मीदवारी को अगले दो/तीन वर्षों में संभावित राकेश छारिया की उम्मीदवारी का रास्ता रोकने की कोशिश के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है; तथा इस कारण कोई भी अजय सिन्हा की उम्मीदवारी को गंभीरता से लेता नहीं दिख रहा है 

गाजियाबाद । अजय सिन्हा की तरफ से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार के रूप में सक्रियता दिखाने के कारण उनके अपने क्लब - रोटरी क्लब साहिबाबाद - के कई सदस्य हैरान हुए हैं । उनका कहना है कि क्लब में निवर्त्तमान प्रेसीडेंट राकेश छारिया को अगले दो/तीन वर्ष में उम्मीदवार बनाने की बात चल रही है, हालाँकि राकेश छारिया उम्मीदवार बनने से इंकार कर रहे हैं - लेकिन क्लब के सदस्यों को उम्मीद है कि वह राकेश छारिया को उम्मीदवारी के लिए राजी कर लेंगे । क्लब के सदस्यों का कहना है कि इसीलिए उन्हें हैरानी है कि अजय सिन्हा अपनी उम्मीदवारी को बीच में कहाँ ले आए हैं ? क्लब के कुछेक सदस्यों का तो यहाँ तक कहना है कि अजय सिन्हा दरअसल राकेश छारिया की उम्मीदवारी की संभावना को रोकने के लिए अपनी उम्मीदवारी की बात करने लगे हैं; उन्हें डर है कि लोगों के दबाव के चलते कहीं राकेश छारिया ने अपना मन बदल लिया और उम्मीदवार बनने के लिए राजी हो गए - तो उनके लिए तो रास्ता बंद ही हो जायेगा । मजे की बात यह है कि अजय सिन्हा पिछले वर्षों में दो/तीन बार अपनी उम्मीदवारी को लेकर उत्सुकता दिखा चुके हैं - लेकिन वास्तव में वह उम्मीदवार कभी नहीं बने । किन्हीं किन्हीं मौकों पर उनकी तरफ से सुना गया कि उम्मीदवार की सक्रियता को वह समय और पैसे की बर्बादी समझते/मानते हैं, इसलिए ही इच्छा रखने के बावजूद वह उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की हिम्मत नहीं कर सके । वास्तव में, इसीलिए क्लब के सदस्यों ने उम्मीद छोड़ दी थी कि अजय सिन्हा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी पचड़े में कभी पड़ेंगे - और इसी कारण से अजय सिन्हा के उम्मीदवार के रूप में 'टेलीफोनिक सक्रियता' दिखाने पर क्लब के सदस्यों को हैरानी है ।
अजय सिन्हा की उम्मीदवारी ने उनके नजदीकियों को भी आश्चर्य में डाला है । नजदीकियों के अनुसार, अजय सिन्हा की अपने प्रोफेशन में जैसी सक्रियता है, उसके चलते उनके पास रोटरी की चुनावी प्रक्रिया के लिए समय निकाल पाना संभव ही नहीं है । रोटरी में काम करना एक अलग बात है, लेकिन एक उम्मीदवार से होने वाली अपेक्षाओं को पूरा कर पाना उनके लिए बहुत ही मुश्किल है । नजदीकियों का कहना है कि असल में उन मुश्किलों का ख्याल करके ही अजय सिन्हा पिछले वर्षों में उम्मीदवार बनने की ओर बढ़ते कदमों को फिर वापस पीछे खींचते रहे हैं । इस बात को जानते/पहचानते रहे नजदीकियों को इसीलिए आश्चर्य है कि इस बार आखिर अजय सिन्हा ने उम्मीदवार बनने का फैसला क्या सोच कर, कर लिया है ? कई लोगों को लग रहा है कि अजय सिन्हा ने शायद यह सोचा होगा कि कोरोना के प्रकोप के चलते बने हालात में चूँकि मिलने/जुलने तथा इकट्ठा होने की स्थितियाँ नहीं बनेंगी, इसलिए इस बार उम्मीदवार को लोगों की अपेक्षाओं का ज्यादा सामना नहीं करना पड़ेगा - और इस कारण से इस बार चुनाव लड़ना आसान होगा और पैसा भी खर्च नहीं होगा, इसलिए वह चुनावी मैदान में कूद पड़े हैं । 
अजय सिन्हा के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि एक तरफ तो उनकी उम्मीदवारी को डिस्ट्रिक्ट में कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है, और दूसरी तरफ उनके अपने क्लब के सदस्य उनकी उम्मीदवारी को राकेश छारिया की उम्मीदवारी का रास्ता रोकने की कोशिश के रूप में देख और प्रचारित कर रहे हैं । पिछले रोटरी वर्ष में, प्रेसीडेंट के रूप में राकेश छारिया के कामों की चूँकि व्यापक तारीफ हुई है और उन्हें कई अवॉर्ड मिले हैं - इसलिए उनके अपने क्लब में भी और डिस्ट्रिक्ट के दूसरे क्लब्स के लोगों के बीच भी चर्चा चली है कि अगले दो/तीन वर्षों में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए राकेश छारिया को उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए तैयार करना चाहिए । अजय सिन्हा के उम्मीदवार बन जाने से लेकिन राकेश छारिया को उम्मीदवार बनने/बनाने की तैयारी करने वाले लोगों को झटका लगा है । लोगों का कहना है कि अजय सिन्हा की कोशिश दरअसल यह है कि आने वाले वर्षों में उनके क्लब से कोई और उम्मीदवार न बन सके । लोगों का कहना है कि अजय सिन्हा को यदि सचमुच उम्मीदवार बनना होता, तो पिछले वर्षों में वह बन गए होते; वह अपनी उम्मीदवारी को लेकर यदि  इस बार भी गंभीर होते, तो पहले से उम्मीदवारी के लिए माहौल बनाने का काम शुरू करते - लेकिन उन्होंने अब जब देखा कि कोरोना के प्रकोप के चलते हालात जल्दी सुधरने वाले नहीं हैं, और ऐसे में उम्मीदवार के रूप में उन्हें कुछ करना ही नहीं पड़ेगा, तो वह उम्मीदवार बन गए हैं । लोगों के बीच इस तरह की 'सोच' होने के कारण कोई भी अजय सिन्हा की उम्मीदवारी को गंभीरता से लेता नहीं दिख रहा है, और अचानक से अपनी उम्मीदवारी को लेकर बनी अजय सिन्हा की सक्रियता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी परिदृश्य में कोई हलचल पैदा करती हुई नहीं लग रही है ।