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Monday, September 28, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3054 में अशोक गुप्ता की गुडबुक में होते हुए तथा शेखर मेहता के नजदीक होने की कोशिश करते हुए भरत पांड्या के नजदीकी जयप्रकाश व्यास को नोमीनेटिंग कमेटी की उम्मीदवारी के लिए प्रेरित करने की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर राजेश अग्रवाल की कोशिशों ने डिस्ट्रिक्ट में गर्मी पैदा की

अहमदाबाद । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन/चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जयप्रकाश व्यास को उम्मीदवार 'बनाने' के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर राजेश अग्रवाल के प्रयासों ने जयप्रकाश व्यास तथा उनके नजदीकियों को गफलत में डाल दिया है । जयप्रकाश व्यास के नजदीकियों का कहना/बताना है कि राजेश अग्रवाल ने जिस अचानक तरीके से जयप्रकाश व्यास को उम्मीदवार बनने के लिए 'प्रेरित' करना शुरू किया है, उससे उन्हें यह समझने में मुश्किल हो रही है कि इसके पीछे राजेश अग्रवाल की मंशा आखिर क्या है, और जयप्रकाश व्यास को उम्मीदवार बना/बनवा कर वह आखिर अपना कौन सा 'स्वार्थ' पूरा करना चाहते हैं ? उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में राजेश अग्रवाल लगातार यह दावा करते रहे हैं कि वह डिस्ट्रिक्ट में चुनावी राजनीति को किसी भी तरह से प्रश्रय नहीं देंगे, और कोशिश करेंगे कि चुनावी राजनीति के चक्कर में डिस्ट्रिक्ट का माहौल खराब न हो; लेकिन देखने/सुनने में आ रहा है कि राजेश अग्रवाल खुद चुनावी राजनीति में दिलचस्पी ले रहे हैं, और माहौल गर्म कर रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट के कई लोगों को यह बात भी मजे की लग रही है कि राजेश अग्रवाल एक तरफ तो तरह तरह के करतबों से अपने आप को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता के नजदीक 'दिखाने' की कोशिश करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ वह इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या के नजदीकी के रूप में देखे/पहचाने जाने वाले जयप्रकाश व्यास को डायरेक्टर पद की चुनावी राजनीति में 'आगे बढ़ाने' की कोशिश कर रहे हैं । 
दरअसल इसीलिए जयप्रकाश व्यास के नजदीकियों को राजेश अग्रवाल की 'राजनीतिक नीयत' पर शक हो रहा है । उन्हें लग रहा है कि राजेश अग्रवाल कहीं डबल गेम तो नहीं खेल रहे हैं । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट में पूर्व गवर्नर अशोक गुप्ता के इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए उम्मीदवार बनने की चर्चा है । अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी को मजबूती देने के उद्देश्य से नोमीनेटिंग कमेटी के लिए पूर्व गवर्नर्स अजय काला व आशीष देसाई में से किसी एक के उम्मीदवार होने का अनुमान लगाया जा रहा है । इन तीनों - अशोक गुप्ता, अजय काला व आशीष देसाई को शेखर मेहता ग्रुप के सदस्यों के रूप में देखा/पहचाना जाता है । डिस्ट्रिक्ट में कुछेक पूर्व गवर्नर्स विरोधी खेमे के नजदीक तो देखे/पहचाने जाते हैं, लेकिन अभी तक उनमें से किसी को अशोक गुप्ता के रास्ते में काँटे बोने का काम करते हुए नहीं देखा/सुना गया है । जैसे जयप्रकाश व्यास ही हैं; उन्हें भले ही भरत पांड्या वाले खेमे के नजदीक देखा/पहचाना जाता हो, लेकिन अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी के सामने वह कोई मुश्किल खड़ी करते हुए नहीं देखे/सुने गए हैं । असल में, जैसा कि जयप्रकाश व्यास के नजदीकियों का कहना/बताना है कि जयप्रकाश व्यास आगे आने वाले वर्षों में खुद इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवार होना चाहते हैं, इसलिए वह कोई ऐसा उदाहरण नहीं बनना/बनाना चाहते हैं जिससे कि उनकी बदनामी हो तथा आगे उनके सामने 'विरोध के नाम पर विरोध' की स्थिति पैदा हो ।
लेकिन राजेश अग्रवाल उन्हें समझा रहे हैं कि उन्हें अभी नोमीनेटिंग कमेटी के लिए उम्मीदवार बनना चाहिए, ताकि आगे आने वाले वर्षों में जब वह इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करें, तो उन्हें भावनात्मक फायदा मिले । जयप्रकाश व्यास के कुछेक नजदीकियों को राजेश अग्रवाल का यह तर्क समझ में आ रहा है, लेकिन उनके अन्य कुछेक नजदीकियों का मानना और कहना है कि जयप्रकाश व्यास यदि सचमुच आगे आने वाले वर्षों में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए उम्मीदवार होना चाहते हैं, तो उन्हें अभी नोमीनेटिंग कमेटी की उम्मीदवारी के पचड़े में नहीं पड़ना चाहिए । इन नजदीकियों का यह भी कहना है कि नोमीनेटिंग कमेटी के चुनाव में जयप्रकाश व्यास यदि हार गए, तो और किरकिरी होगी । जयप्रकाश व्यास के नजदीकियों को इस बात की भी हैरानी है कि राजेश अग्रवाल आखिरकार जयप्रकाश व्यास को नोमीनेटिंग कमेटी के लिए उम्मीदवार बनाने/बनवाने में दिलचस्पी क्यों ले रहे हैं ? उन्हें यह हैरानी इसलिए भी है, क्योंकि वह जानते हैं कि राजेश अग्रवाल खुद अशोक गुप्ता के नजदीक रहे हैं । तीन वर्ष पहले, वह अशोक गुप्ता के सहयोग/समर्थन के बल पर ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी 'चुने' गए थे । उनके क्लब के तथा कोटा के नेता लोग विक्रांत माथुर की उम्मीदवारी के पक्ष में थे, लेकिन राजेश अग्रवाल ने तीन-तिकड़म करके अपनी उम्मीदवारी की चर्चा चला दी, और गलतफहमियाँ पैदा करके अशोक गुप्ता का समर्थन जुटा लिया और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी बन गए । अशोक गुप्ता के इस अहसान का बदला चुकाने के लिए राजेश अग्रवाल ने उनके क्लब के सदस्य पूर्व गवर्नर रमेश अग्रवाल को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर भी बनाया हुआ है और उन्हें पूरा मान-सम्मान देते हैं । जयप्रकाश व्यास के नजदीकियों को इसीलिए यह सवाल परेशान कर रहा है कि अशोक गुप्ता की गुडबुक में होते हुए, शेखर मेहता के नजदीक होने की कोशिश करते हुए राजेश अग्रवाल आखिरकार जयप्रकाश व्यास को नोमीनेटिंग कमेटी की उम्मीदवारी के लिए प्रेरित क्यों कर रहे हैं ? 

Friday, November 16, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3054 में बीना देसाई की गवर्नरी से मिली ताकत के भरोसे आशीष देसाई ने अशोक मंगल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुनवाने का बीड़ा उठाया

अहमदाबाद । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर आशीष देसाई के अशोक मंगल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुनवाने के लिए प्रयासरत रहने के चलते 18 नवंबर को जयपुर में होने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की मीटिंग को महज खानापूर्ति के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है - क्योंकि सभी ने मान लिया हुआ है कि उक्त मीटिंग में अशोक मंगल को ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुना जाना है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए यूँ तो कई उम्मीदवार हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला रोटरी क्लब पालनपुर के अशोक मंगल और रोटरी क्लब अहमदाबाद वेस्ट के पवन चपलोत के बीच ही देखा/पहचाना जा रहा है । अशोक मंगल ने दूसरी बार और पवन चपलोत ने तीसरी बार अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत की है । सक्रियता के लिहाज से यूँ तो दोनों ही उम्मीदवारों का अच्छा रोटरी-रिकॉर्ड है, लेकिन अहमदाबाद में होने के कारण पवन चपलोत 'दिखाई' ज्यादा देते रहे हैं - जिस कारण से लोगों के बीच अशोक मंगल के मुकाबले उनकी ज्यादा पहचान है । पालनपुर में होने के कारण अशोक मंगल के लिए क्लब्स व डिस्ट्रिक्ट के आयोजनों में ज्यादा आना-जाना संभव नहीं हो पाता है, और इसलिए डिस्ट्रिक्ट में काफी लोग उन्हें नहीं पहचानते हैं - तथा वह भी कई लोगों को सिर्फ नाम से पहचानते हैं । इस कारण अधिकतर लोगों का मानना/कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की जिम्मेदारी सँभालना पवन चपलोत के लिए ज्यादा आसान होगा, और वह प्रभावी तरीके से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के कर्तव्यों का निर्वाह कर सकेंगे । लेकिन जैसा कि एक पुरानी मशहूर फिल्म में दो भाईयों के बीच होने वाली बहस में एक भाई कहता है कि उसके पास यह है, यह है, यह है; तुम्हारे पास क्या है - तो दूसरा भाई कहता है कि मेरे पास माँ है, और पलड़ा उसकी तरफ झुक जाता है; ठीक उसी तर्ज पर अशोक मंगल के पास चूँकि आशीष देसाई हैं - इसलिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की इस वर्ष की चुनावी होड़ में पलड़ा उनकी तरफ झुक जाता है ।
आशीष देसाई की तरफ से अशोक मंगल की तरफदारी करने के लिए तर्क दिया गया है कि छोटे शहरों के लोगों को भी गवर्नर बनने का मौका मिलना चाहिए, जिससे कि छोटे शहरों के लोगों के बीच भी रोटरी के लिए उत्साह पैदा हो और सभी को डिस्ट्रिक्ट का नेतृत्व करने का मौका मिले । आशीष देसाई का यह तर्क सचमुच में एक वाजिब तर्क है, और इसलिए ही उनके तर्क को डिस्ट्रिक्ट की लीडरशिप में व्यापक समर्थन मिला है । हालाँकि कुछेक लोगों का कहना है कि आशीष देसाई को यह समर्थन उनके तर्क के कारण नहीं, बल्कि उनकी पत्नी बीना देसाई के अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने के कारण मिला है । डिस्ट्रिक्ट में गुजरात के लोगों के बीच आशीष देसाई का यद्यपि विरोध रहा है, लेकिन अधिकतर लोग चूँकि सत्ता के नजदीक रहना चाहते हैं - इसलिए बीना देसाई की डिस्ट्रिक्ट गवर्नरी को देखते हुए आशीष देसाई के विरोधी रहे लोग अभी उनके समर्थक बन गए हैं । आशीष देसाई के लिए खुशकिस्मती की बात यह भी रही कि राजस्थान के नेताओं ने इस वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी पचड़े से अपने आपको दूर कर लिया हुआ है । उनका कहना है कि इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद पर चूँकि गुजरात का नंबर है, इसलिए गुजरात के लोग ही फैसला करें । राजस्थान के नेताओं के इस रवैये से आशीष देसाई को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी का चुनाव करने के लिए और बल मिला - तथा इससे अशोक मंगल के लिए रास्ता और आसान हुआ ।
अशोक मंगल के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुने जाने पर लोगों के ऐतराज का कोई बड़ा कारण वैसे है भी नहीं ।लोगों का ऐतराज सिर्फ इसलिए है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के चुनाव में क्षेत्रीय आधार पर 'आरक्षण व्यवस्था' बना देने से कई बार ऐसे लोग गवर्नर बन जाते हैं, जो गवर्नर पद केसाथ न्याय नहीं कर पाते हैं - और इस कारण से रोटरी व डिस्ट्रिक्ट को पिछड़ जाना पड़ता है । इसी वर्ष का उदाहरण देते हुए कहा जा रहा है कि आरक्षण व्यवस्था के चलते नीरज सोगानी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर तो बन गए, लेकिन कुछ उनकी बीमारी और कुछ उनके ढीलेढाले रवैये के चलते उनके लिए गवर्नर पद की जिम्मेदारियों का निर्वाह कर पाना मुश्किल बना हुआ है, और बहुत से काम समय से नहीं हो पा रहे हैं । लोगों का कहना है कि इस तरह के अनुभवों से सबक लिया जाना चाहिए और कम से कम इतना तो किया ही जाना चाहिए कि क्षेत्रीय आरक्षण के चलते जिन लोगों को गवर्नर बनना/बनाना है, उन्हें नेतृत्व के लिए तैयार करने के वास्ते उचित ट्रेनिंग भी दी जाए । लोगों का कहना है कि आशीष देसाई जिस भावना के साथ अशोक मंगल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुनवाना/बनवाना चाहते हैं, वह अपने आप में बहुत ही अच्छी बात है - लेकिन आशीष देसाई को साथ ही साथ अशोक मंगल को नेतृत्व के लिए तैयार व प्रेरित करने का काम भी करना चाहिए । कुछेक लोगों का यह भी कहना है कि आशीष देसाई ने जब यह तय कर दिया है कि 18 नवंबर की मीटिंग में नोमीनेटिंग कमेटी को अशोक मंगल को ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुनना है, तो फिर मीटिंग करने की जरूरत ही क्या है ? किंतु जो भी हो, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव भले ही नाटक लग रहा हो - नाटक में दिलचस्पी सभी की बनी हुई है, और सभी को 18 नवंबर की नोमीनेटिंग कमेटी की मीटिंग और उसके फैसले का इंतजार है ।

Wednesday, January 17, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी लड़ाई में अशोक गुप्ता की बढ़त रोकने तथा भरत पांड्या को वोट दिलवाने की तिकड़मों के चक्कर में रिसोर्स ग्रुप में दीपक तलवार, विनोद बंसल, ललित श्रीमाल और आशीष देसाई के पद खतरे में पड़े

नई दिल्ली । रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए जोन 4 में हो रहे चुनाव में भरत पांड्या को कड़े मुकाबले के चलते हार के कगार में फँसा देख, बचे-खुचे वोटों पर कब्जा जमाने के लिए भरत पांड्या के समर्थक बड़े नेताओं व पदाधिकारियों ने रिसोर्स ग्रुप के पदों को 'बेचने' की तैयारी की है । समस्या की बात लेकिन यह हुई है कि इस तैयारी की भनक मिलने पर रिसोर्स ग्रुप के मौजूदा पदाधिकारियों के बीच अपनी अपनी कुर्सी बचाने की दौड़ मच गई है, जिसके कारण एक तरफ तो गुपचुप रूप से की जा रही तैयारी की पोल खुल गई है - और दूसरी तरफ रिसोर्स ग्रुप के पदों पर काबिज होने के लिए भरत पांड्या के समर्थकों में होड़ मच गई है । इस दौड़/होड़ में रिसोर्स ग्रुप में दीपक तलवार, विनोद बंसल, ललित श्रीमाल, आशीष देसाई आदि के पदों पर खतरा मंडराता देखा जा रहा है । रिसोर्स ग्रुप के पदों के लिए यूँ तो लंबी लाइन है, लेकिन इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव की पृष्ठभूमि में रिसोर्स ग्रुप के पदों के लिए सबसे बड़े दावेदारों में गुरजीत सिंह, दीपक शिकारपुर, दीपक पुरोहित आदि हैं । इन्होंने भरत पांड्या के पक्ष में माहौल बनाने तथा उन्हें वोट दिलवाने के लिए अथक प्रयास किए हैं, लेकिन उन्हें लग रहा है कि भरत पांड्या की उम्मीदवारी के समर्थक बड़े नेताओं व पदाधिकारियों ने उन्हें इस्तेमाल कर लिया है - उनसे काम तो ले लिया, लेकिन उनके लिए कुछ करते हुए नहीं दिख रहे हैं । अपने आप को 'इस्तेमाल करो, और छोड़ दो' वाले फार्मूले का शिकार होता देख यह लोग भड़के हुए हैं । गुरजीत सिंह का तो काम पूरा हो गया है, इसलिए भरत पांड्या के समर्थक बड़े नेताओं व पदाधिकारियों को उनकी ज्यादा चिंता नहीं है; लेकिन दीपक शिकारपुर और दीपक पुरोहित के डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 3131 में अभी करीब पचास प्रतिशत वोटिंग बाकी है - इसलिए भरत पांड्या के समर्थक बड़े नेताओं व पदाधिकारियों को इनकी चिंता करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है ।
जोन 4 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए हो रहे चुनाव में 85 से 90 प्रतिशत के बीच वोटिंग हो चुकने का अनुमान लगाया जा रहा है । वोटिंग पैटर्न के जो तथ्य भरत पांड्या के समर्थकों को मिले हैं, या उन्होंने जुटाए हैं - उसने उन्हें निराश किया है । भरत पांड्या के कई एक समर्थकों का कहना है कि अभी तक जो वोट पड़े हैं, उनमें ही अशोक गुप्ता ने निर्णायक बढ़त बना ली है; हालाँकि अन्य कुछेक समर्थकों का कहना है कि अशोक गुप्ता को विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स में अच्छे वोट मिले हैं और वह बराबर की टक्कर पर हैं या थोड़ा बहुत आगे भी हैं - तो भी भरत पांड्या के लिए मुकाबला अभी खत्म नहीं हुआ है, और बाकी बचे वोटों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में कुल करीब 2300 वोट पड़ने हैं । अधिकतर डिस्ट्रिक्ट्स में इंटरनेट सुविधा से दूर और अलग-थलग रहने/पड़ने वाले क्लब्स के वोट अभी नहीं पड़ सके हैं, और या जिन्हें अभी तक भी लिंक व पासवर्ड नहीं मिले हैं - वह वोट डालने से बचे रह गए हैं । एक अकेले डिस्ट्रिक्ट 3131 में ही वोटिंग की रफ्तार ढीली है । इसका कारण यह सुना जा रहा है कि डिस्ट्रिक्ट के 'नेताओं' ने जानबूझ कर 'अपने अपने' क्लब्स को वोट डालने से रोका हुआ है - ताकि वह भरत पांड्या के समर्थक बड़े नेताओं व पदाधिकारियों से 'ठीक' से सौदेबाजी कर सकें । दरअसल भरत पांड्या के समर्थक नेताओं व पदाधिकारियों ने विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के प्रमुख 'नेताओं' को रिसोर्स ग्रुप में पद देने/दिलवाने का लालच देकर अपने पक्ष में किया हुआ था । वह तो जब कमल सांघवी के इस्तीफे से खाली हुए आरआरएफसी के पद पर भरत पांड्या के ही डिस्ट्रिक्ट के विजय जालान की नियुक्ति हो गई, तब नेताओं का माथा ठनका और उन्हें लगा कि उन्हें झूठे लालच देकर इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है ।
दरअसल विजय जालान को रिसोर्स ग्रुप में पद मिलने के साथ ही विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के नेताओं को जब अपने ठगे जाने तथा धोखे का शिकार होने का अहसास हुआ, तभी उनमें से अधिकतर ने भरत पांड्या की उम्मीदवारी के पक्ष में सक्रिय रहने तथा कुछ करने से मुँह मोड़ लिया - जिसका खामियाजा वोटिंग लाइन खुलने के बाद भरत पांड्या की उम्मीदवारी को उठाना पड़ा । भरत पांड्या के समर्थक बड़े नेताओं को विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स में जिन जिन नेताओं से 'सहयोग' मिलने की उम्मीद थी, उनमें से अधिकतर शांत बने रहे और उन्होंने कुछ किया ही नहीं - कुछेक ने तो अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी के लिए काम किया । स्वाभाविक रूप से इसका फायदा अशोक गुप्ता को मिला, और कई डिस्ट्रिक्ट्स में उन्हें उम्मीद से बढ़ कर समर्थन मिला । मामले की नजाकत भरा यह नजारा देख कर भरत पांड्या के समर्थक नेता और पदाधिकारी सावधान और सक्रिय हुए हैं, तथा उन्होंने समझ लिया है कि अब झूठे आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा - उन्हें ठोस रूप में कुछ करना पड़ेगा । ठोस रूप में कुछ करने की ज्यादा जरूरत उन्हें डिस्ट्रिक्ट 3131 में ही लग रही है - जहाँ कि अभी सौ के करीब वोट पड़ना बाकी हैं, और जहाँ दो/तीन नेता रिसोर्स ग्रुप में पद पाने के अभिलाषी हैं । रिसोर्स ग्रुप की विभिन्न कमेटियों में में इनके लिए जगह बनाने के लिए मौजूदा कुछेक कमेटियों के पदाधिकारियों की बलि चढ़ानी पड़ेगी - और जिसके तहत उन्हें उनके पदों से हटाना पड़ेगा ।
इस हलचल को देखते हुए रिसोर्स ग्रुप के पदाधिकारियों के बीच अपने अपने पद बचाने की होड़ मच गई है । रिसोर्स ग्रुप में दीपक तलवार, विनोद बंसल, ललित श्रीमाल और आशीष देसाई को कमजोर कड़ी के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है - और जिसके चलते इनकी कुर्सी को खतरे के निशाने पर चिन्हित किया गया है । कुछेक लोगों को लगता है कि आशीष देसाई को पद से हटाने का चूँकि गलत संदेश जायेगा और उससे अशोक गुप्ता को सहानुभूति मिल सकती है, इसलिए हो सकता है कि उनकी कुर्सी सुरक्षित बनी रहे - और बाकी लोग निशाना बने; जबकि अन्य कुछ लोगों को लगता है कि दीपक तलवार व विनोद बंसल के डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 3011 में, तथा ललित श्रीमाल के डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 3040 में अभी चूँकि थोड़ी बहुत वोटिंग बाकी है, इसलिए उन्हें न छेड़ कर आशीष देसाई का ही शिकार करने का निश्चय किया जाए । इसके अलावा, यह तय करने की भी चुनौती है कि रिसोर्स ग्रुप में किसे पद दिया जाए ? पद पाने के आकांक्षी चूँकि ज्यादा हैं, अंतिम चरण की वोटिंग के लिहाज से महत्त्वपूर्ण बने डिस्ट्रिक्ट 3131 में ही दो/तीन नेता पद के आकांक्षी हैं - इसलिए यह तय करना भी मुश्किलों भरा काम है कि अभी किसे संतुष्ट किया जाए । बीच वर्ष में पद खाली करवाने/भरवाने की कार्रवाई एक अलग तरह की बदनामी और मुसीबत का सबब बन सकती है, इसलिए ज्यादा कुछ करने से भी बचने की कोशिश होगी । बड़े नेताओं के बीच की चर्चाओं के अनुसार, ज्यादा नहीं तो - एक पद के लिए तो हटाने/भरने का खेल हो सकता है । अब लोगों के बीच सारी माथापच्ची इस बात पर है कि वह एक कौन होगा, जिसका पद छिनेगा और जिसे मिलेगा ? सारी माथापच्ची में यह मानने/समझने वाले लोगों की संख्या ज्यादा है कि भरत पांड्या को बाकी बचे वोटों की बड़ी संख्या दिलवाने के लिए उनके समर्थक नेता और पदाधिकारी रिसोर्स ग्रुप में रोटरी पब्लिक इमेज कोऑर्डीनेटर के पद से आशीष देसाई को हटा कर उनकी जगह दीपक शिकारपुर को बैठा दें - जिसके बदले में दीपक शिकारपुर डिस्ट्रिक्ट के बाकी बचे करीब पचास प्रतिशत वोट भरत पांड्या को दिलवाएँ । लोगों के बीच कयास बहुतेरे हैं; ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि आखिर होता क्या है ?