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Sunday, May 14, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में हो रहे इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव पर अवैध और मनमाने तरीके से होने का आरोप लगा और इसके पीछे नरेश अग्रवाल की मिलीभगत को देखा/पहचाना जा रहा है

नई दिल्ली । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए होने वाला चुनाव क्या अवैध रूप से किया/करवाया जा रहा है - जो कि लायंस इंटरनेशनल के नियमों की खुल्लम-खुल्ला अवहेलना है ? यह सवाल मल्टीपल के कई पदाधिकारियों और नेताओं को मथ रहा है । इससे भी ज्यादा महत्त्व का सवाल यह खड़ा हुआ है कि इस मामले में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट होने जा रहे नरेश अग्रवाल की भी मिलीभगत है क्या ? क्योंकि कोई भी इस बात पर तो यकीन नहीं ही करेगा कि नरेश अग्रवाल को विश्वास में लिए बिना - और या उनकी अनुमति लिए बिना तो इतना बड़ा 'खेल' नहीं ही हो रहा होगा । उल्लेखनीय है कि मल्टीपल काउंसिल की 6 से 8 मार्च के बीच शिमला में हुई तीसरी कैबिनेट मीटिंग में पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील अग्रवाल ने मल्टीपल की रिऑर्गेनाइजेशन रिपोर्ट पेश करते हुए साफ शब्दों में बताया था कि नरेश अग्रवाल के जून 2019 तक इंटरनेशनल बोर्ड का सदस्य होने के कारण मल्टीपल में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए एंडोर्समेंट नहीं दिया जा सकता है । यह बात उक्त मीटिंग के जारी किए गए मिनिट्स में भी दर्ज है । इसके बावजूद मल्टीपल की चौथी कैबिनेट मीटिंग के साथ ही होने वाली मल्टीपल कॉन्फ्रेंस में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए एंडोर्समेंट देने की तैयारी की जा रही है । आरोप यह सुना जा रहा है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के दूसरे संभावित उम्मीदवारों को धोखे में रखकर उन्हें जेपी सिंह के 'सामने' से हटाने और इस तरह जेपी सिंह के लिए मुकाबले को आसान बनाने की खातिर यह 'खेल' रचा गया है । 'नोटिस ऑफ इन्टेंशन' तथा नोमीनेशन के नियमों का हवाला देते हुए जिस तरह से इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के दूसरे अधिकतर उम्मीदवारों के नामांकन रद्द कर दिए गए हैं, उससे भी जाहिर हो रहा है कि मनमाने तरीके से इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव करवाने के पीछे जेपी सिंह को फायदा पहुँचाने की नीयत काम कर रही है ।
मल्टीपल में इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव करवाने की तैयारी में लगे मल्टीपल काउंसिल के पदाधिकारी तथा दूसरे नेता इस तैयारी को जायज ठहराने के लिए लायंस इंटरनेशनल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 24 से 27 मार्च के बीच ग्रीक के एथेंस में हुई मीटिंग में लिए फैसले का हवाला दे रहे हैं । उनका कहना है कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने अपनी इस मीटिंग में नियमों में जो फेरबदल करने का फैसला लिया है, उसके चलते मल्टीपल में इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव करवाया जा सकता है । लेकिन एथेंस में हुई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग के जो तथ्य 'रचनात्मक संकल्प' को मिले हैं, वह एक अलग और विपरीत कहानी ही कहते हैं । उक्त मीटिंग में कॉन्स्टीट्यूशन व बाई-लॉज कमेटी के जिन दस मामलों में फैसला हुआ है, उसमें नौवें और दसवें नंबर पर इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को लेकर होने वाले संशोधनों का जिक्र है - जिनमें 2017 की इंटरनेशनल कन्वेंशन में इंटरनेशनल बाई-लॉज के आर्टिकल II के सेक्शन 5 (C) और सेक्शन 4 में संशोधन करने के लिए प्रस्ताव रखने की बात स्वीकार की गई है । (स्नैपशॉट देखें) यानि नियमों में फेरबदल करने की बात इंटरनेशनल बोर्ड ने अभी सिद्धांततः स्वीकार की है, और इस फेरबदल को इंटरनेशनल कन्वेंशन में रखने की बात स्वीकार की है - इंटरनेशनल कन्वेंशन में यह फेरबदल स्वीकार होंगे, तब यह नियम/कानून का रूप बनेंगे, और उसके बाद से लागू होंगे । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की कॉन्फ्रेंस, जिसमें इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव होना है - शिकागो में होने वाली 2017 की इंटरनेशनल कन्वेंशन से करीब एक महीने पहले ही हो जाएगी । ऐसे में सवाल यही है कि 30 जून से 4 जुलाई के बीच होने वाली इंटरनेशनल कन्वेंशन में जो नियम 'बनेगा', उस नियम के अनुसार 26 से 28 मई के बीच होने वाली मल्टीपल कॉन्फ्रेंस में कार्रवाई कैसे हो सकती है - 26 से 28 मई के बीच होने वाली मल्टीपल कॉन्फ्रेंस में तो लायंस इंटरनेशनल के मौजूदा नियमों के अनुसार ही कार्रवाई हो सकती है ।
मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के पदाधिकारी और पर्दे के पीछे से उन्हें कठपुतली की तरह चलाने वाले नेताओं ने लेकिन यह कमाल कर दिखाने की तैयारी शुरू कर दी है कि - लायंस इंटरनेशनल में नियम बाद में बनेगा, उस पर अमल पहले ही कर लिया जाएगा । सामान्य स्थितियों में ऐसा हो सकना असंभव ही होता है, किंतु मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के नेताओं और उनके कठपुतले पदाधिकारियों ने ऐसा करने की तैयारी शुरू कर दी है - तो माना जाना चाहिए कि उनका कॉन्फीडेंस लेबल काफी ऊँचा है । उनके इस ऊँचे और मनमाने कॉन्फीडेंस लेबल को नरेश अग्रवाल की 'ताकत' से खाद-पानी मिलता नजर आ रहा है । समझा जाता है कि 'सैयां भये कोतवाल, तो फिर डर काहे का' वाली तर्ज पर मल्टीपल में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद का चुनाव करवाने वाले लोगों को पूरा पूरा भरोसा है कि अगले लायन वर्ष में चूँकि नरेश अग्रवाल ही इंटरनेशनल प्रेसीडेंट के पद पर होंगे, इसलिए वह उनकी नियम-विरुद्ध हुई मनमानी कार्रवाई पर लायंस इंटरनेशनल की मुहर लगवा कर उनकी अवैध कार्रवाई को वैध बनवा ही देंगे । 
लेकिन मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 317 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए एंडोर्समेंट लेने वाले डिस्ट्रिक्ट 317 बी के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर वासुदेव वलवलकर का इंटरनेशनल बोर्ड द्वारा जो हाल हुआ है, वह एक सबक भी है कि नियम विरुद्ध मनमानियाँ फजीहत का कारण भी बन जाती हैं । दिलचस्प संयोग की और मजे की बात है कि वासुदेव वलवलकर के मामले में भी फैसला 24 से 27 मार्च के बीच एथेंस में हुई उसी बोर्ड मीटिंग में हुआ है, जिसके संदर्भित फैसलों की मनमानी व्याख्या करते हुए मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है । इस दिलचस्प संयोग में कहीं यह संकेत तो नहीं छिपा है कि इंटरनेशनल बोर्ड का मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 317 के झंझट से पीछा छूटने के साथ साथ ही मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के संभावित झंझट की नींव पड़ गई है - क्योंकि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में कुछेक लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि मल्टीपल में इस बार इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव सचमुच यदि हुआ, तो वह उसके खिलाफ इंटरनेशनल बोर्ड में अपील करेंगे और देखेंगे कि नरेश अग्रवाल के नाम पर कुछ लोग मल्टीपल में कैसे मनमानी करते हैं ?

Sunday, January 15, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल के आयोजनों में रजिस्ट्रेशन न कराने के मुद्दे पर हो रही नरेश अग्रवाल की फजीहत का ठीकरा शान ट्रैवल्स के सिर फोड़ कर केएम गोयल एक तीर से दो शिकार करने का काम कर रहे हैं क्या ?

नई दिल्ली । लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 डी के लायन सदस्यों व पदाधिकारियों के इसामे फोरम में रजिस्ट्रेशन न कराने के मामले में नरेश अग्रवाल की हो रही फजीहत का ठीकरा क्या शान ट्रैवल्स पर फोड़ने की तैयारी की जा रही है; और क्या पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर केएम गोयल इस मामले को वास्तव में हवा दे रहे हैं ? उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट 321 डी इस समय इसलिए निशाने पर है, क्योंकि अभी पिछले दिनों ही कोलम्बो में हुई इसामे फोरम की मीटिंग में इस डिस्ट्रिक्ट से गए तो डेढ़ सौ से अधिक लोग - लेकिन वहाँ रजिस्ट्रेशन करीब बीस/पच्चीस लोगों का ही हुआ । मल्टीपल के लोगों के बीच सवाल यह चर्चा में है कि डिस्ट्रिक्ट के जो लोग इसामे फोरम की मीटिंग में शामिल होने के नाम पर कोलम्बो गए थे - उन्होंने वहाँ हुई मीटिंग के लिए जब रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया, यानि जब वह मीटिंग में शामिल ही नहीं हुए, तो वह वहाँ आखिर करने क्या गए थे ? यह प्रश्नाकुल आरोप भी सुनने को मिले कि लायनिज्म के नाम पर कहीं 'कबूतरबाजी' तो नहीं हो रही है । मामला इतना गंभीर हो उठा कि मल्टीपल काउंसिल की दिल्ली में हुई मीटिंग में मल्टीपल के इसामे चेयरमैन मुकुंदलाल टंडन ने अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए इस मामले को उठाया, और इस तरह की हरकतों को रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की जरूरत को रेखांकित किया । इस मामले में लायंस इंटरनेशनल के प्रेसीडेंट बनने जा रहे नरेश अग्रवाल की भारी फजीहत हुई, क्योंकि डिस्ट्रिक्ट 321 डी उन्हीं का डिस्ट्रिक्ट है । उनके डिस्ट्रिक्ट से इस बार शिकागो में हो रही इंटरनेशनल कन्वेंशन में काफी लोगों के जाने की चर्चा है । इसामे फोरम में जो हुआ, उसके हवाले से सवाल उठे कि नरेश अग्रवाल के डिस्ट्रिक्ट से शिकागो जाने वालों में कितने लोग सचमुच में वहाँ रजिस्ट्रेशन करवायेंगे ? इस तरह के सवालों से जाहिर हुआ कि इसामे फोरम में जाने वाले डिस्ट्रिक्ट 321 डी के सदस्यों व पदाधिकारियों की हरकतों के कारण नरेश अग्रवाल निशाने पर आ रहे हैं, और वह फजीहत का शिकार बन रहे हैं ।
नरेश अग्रवाल को फजीहत से बचाने के लिए उनके कुछेक नजदीकी आगे आए और उनकी तरफ से सुझाव दिए/सुने गए कि लायन सदस्यों व पदाधिकारियों की यात्रा की व्यवस्था करने वाली कंपनी शान ट्रैवल्स को ही रजिस्ट्रेशन करवाने की जिम्मेदारी सौंप दी जानी चाहिए । उल्लेखनीय है कि शान ट्रैवल्स लायंस सदस्यों व पदाधिकारियों की अधिकृत ट्रैवल एजेंट है और वही शिकागो के लिए बुकिंग कर रही है । लायंस इंटरनेशनल के आयोजनों में लायंस सदस्यों व पदाधिकारियों के रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी शान ट्रैवल्स को सौंपने की बात कई लायन सदस्यों व पदाधिकारियों को नागवार गुजरी है । इनका कहना है कि नरेश अग्रवाल में क्या इतनी नैतिक अपील भी नहीं है कि वह यह सुनिश्चित कर सकें कि उनके डिस्ट्रिक्ट के जो लोग लायंस इंटरनेशनल के आयोजनों के नाम पर बाहर जायेंगे, वह अपना रजिस्ट्रेशन जरूर करवायेंगे । यह समस्या सिर्फ डिस्ट्रिक्ट 321 डी की ही नहीं है; जानकारों का कहना है कि इस तरह की हरकतें दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के लोग भी करते हैं - यह जरूर है कि दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स में ऐसी हरकतें गिने-चुने लोग करते हैं, जबकि नरेश अग्रवाल के डिस्ट्रिक्ट में इस तरह की हरकतें करने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा होती है । लायंस सदस्यों व पदाधिकारियों का मानना और कहना है कि इस समस्या को हल करने की जिम्मेदारी शान ट्रैवल्स पर थोपने की बजाए लायंस पदाधिकारियों को ही लेनी चाहिए; वही इस समस्या को हल भी कर सकते हैं ।
मजे की बात यह हुई है कि इस मामले में शान ट्रैवल्स की तरफदारी करने वाले लायंस सदस्यों व पदाधिकारियों की नाराजगी नरेश अग्रवाल के साथ-साथ केएम गोयल पर भी निकल रही है । नरेश अग्रवाल को तो यह कहते हुए निशाना बनाया जा रहा है कि नरेश अग्रवाल अपनी नाकामी और फजीहत से बचने के लिए शान ट्रैवल्स को बलि का बकरा बनाने की कोशिश कर रहे हैं; और केएम गोयल पर आरोप यह सुना जा रहा है कि इस मामले की आड़ में शान ट्रैवल्स को परेशान करके वह अपनी बेटी की ट्रैवल कंपनी के लिए काम निकालने का मौका देख रहे हैं । केएम गोयल के डिस्ट्रिक्ट के लोगों का ही कहना/बताना है कि केएम गोयल को इस बात का बड़ा अफसोस है कि पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर होने के बावजूद वह अपनी बेटी की कंपनी को लायंस में काम नहीं दिलवा सके हैं; वह कई बार विभिन्न मौकों पर इस बात पर हैरानी जता चुके हैं और लोगों से पूछ चुके हैं कि लायंस का सारा काम शान ट्रैवल्स को ही क्यों मिल जाता है ? इस वर्ष उनके डिस्ट्रिक्ट के जगदीश वर्मा मल्टीपल काउंसिल के चेयरमैन हैं; लेकिन जगदीश वर्मा ने भी शान ट्रैवल्स को ही वरीयता दी और उसे ही काम सौंपा ।
केएम गोयल के डिस्ट्रिक्ट के लोगों को ही लगता है कि ऐसे में, लायंस इंटरनेशनल के आयोजनों में रजिस्ट्रेशन न कराने के मुद्दे पर जो बबाल मचा है - उसकी आड़ में केएम गोयल को शान ट्रैवल्स को फँसाने का अच्छा मौका मिला है । लोगों को लगता है कि रजिस्ट्रेशन कराने की जिम्मेदारी शान टैवल्स के माथे मढ़ने की बात करके केएम गोयल एक तीर से दो शिकार करने का काम कर रहे हैं - एक तरफ तो उन्हें शान ट्रैवल्स के खिलाफ मोर्चा खोलने का मौका मिला है, और दूसरी तरफ ऐसा करके उन्होंने नरेश अग्रवाल के और नजदीक होने का प्रयास किया है । लोगों का कहना है कि नरेश अग्रवाल के साथ इन दिनों हालाँकि केएम गोयल की ठीक बनी हुई है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि नरेश अग्रवाल की फजीहत का ठीकरा शान ट्रैवल्स के सिर फोड़ कर वह नरेश अग्रवाल के और नजदीक हो जायेंगे । यानि समस्या को ठीक से समझने/पहचानने तथा उसे हल करने में किसी की दिलचस्पी नहीं है, और जिन पर समस्या को हल करने की जिम्मेदारी है - वह अपने अपने तरीके से मामले को अपने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने में लगे हैं ।