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Tuesday, August 14, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में केरल के बाढ़/बारिश पीड़ितों के नाम पर डिस्ट्रिक्ट सर्विस ट्रस्ट के एकाउंट में पैसा इकट्ठा करने की यशपाल दास की तैयारी आरोपों के घेरे में

अंबाला । पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास उत्तराखंड व हिमाचल के बाढ़/बारिश पीड़ितों की बजाये केरल के बाढ़/बारिश पीड़ितों के लिए पैसे इकट्ठे करने के मामले में अपने डिस्ट्रिक्ट के लोगों के निशाने पर आ गए हैं, और लूट-खसोट के आरोपों में एक बार फिर से घिर गए हैं । उल्लेखनीय है कि देश के कई राज्य इन दिनों भारी बारिश और बाढ़ की चपेट में हैं; केरल, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा तबाही होने की खबरें आ रही हैं । आमतौर पर इस तरह की विपदा के शिकार लोगों की मदद के लिए सामाजिक संस्थाएँ आगे आती हैं । इस तरह के मौकों पर रोटरी भी अक्सर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाती है, और इसके लिए वरिष्ठ पदाधिकारी पहल करते हैं और रोटेरियंस को मदद करने के लिए प्रेरित करने का काम करते हैं । लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल को डिस्ट्रिक्ट की भौगोलिक सीमा में पड़ने वाले उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश के बाढ़/बारिश पीड़ितों की मदद के लिए कोई पहल करते हुए नहीं देखा गया; डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स भी उत्तराखंड व हिमाचल के बाढ़/बारिश पीड़ितों की तरफ से आँखें मूँदे रहे । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल और पूर्व गवर्नर्स के इस रवैये को लेकर डिस्ट्रिक्ट के रोटेरियंस के बीच रोष तो था, लेकिन वह मुखर रूप में प्रकट नहीं हो रहा था । लेकिन केरल के बाढ़/बारिश पीड़ितों की मदद की अपील करके यशपाल दास और उनकी अपील को आगे बढ़ा कर प्रवीन गोयल ने लोगों के 'जले' पर जैसे नमक रगड़ने का काम किया । डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ सदस्यों ने सीधे सीधे आरोप लगाए कि अपने 'घर' के लोगों की मुसीबतों की सुध लेने की बजाये दूसरों की मदद करने के नाम पर कुछेक लोग अपनी जेब भरने की तैयारी कर रहे हैं ।
इस मामले में यशपाल दास ने ज्यादा 'स्मार्ट' बनने/दिखने की कोशिश की, जिसके चलते वह लोगों के आरोपों के निशाने पर आ गए । यशपाल दास ने यह जो सक्रियता दिखाई, वह दरअसल डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को संबोधित इंटरनेशनल डायरेक्टर बासकर चॉकलिंगम की अपील आने के बाद दिखाई । मजे की बात यह रही कि बासकर चॉकलिंगम ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को मदद की जो अपील संबोधित की, डिस्ट्रिक्ट 3080 के गवर्नर प्रवीन गोयल ने उसका संज्ञान नहीं लिया - उन्होंने संज्ञान तब लिया जब यशपाल दास ने उन्हें 'जगाया' । लोगों ने सवाल उठाये कि यशपाल दास किस हैसियत से केरल के बाढ़/बारिश पीड़ितों के लिए पैसा इकट्ठा कर रहे हैं ? दरअसल यशपाल दास पर उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ फंड तथा रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3080 सर्विस ट्रस्ट के एकाउंट्स में हेराफेरी करने के गंभीर आरोप रहे हैं, जिन्हें लेकर रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड तक में शिकायत हुई है । उन्हीं आरोपों का हवाला देते हुए यशपाल दास को यह कहते हुए घेरा गया कि उनके जैसे लोग प्राकृतिक आपदा को अपने लिए पैसा इकट्ठा करने के मौके के रूप में देखते हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल की यह कहते हुए आलोचना की गई कि उन्होंने केरल में बाढ़/बारिश पीड़ितों की मदद के लिए सक्रिय हुए वहाँ के डिस्ट्रिक्ट्स - डिस्ट्रिक्ट 3201 तथा डिस्ट्रिक्ट 3202 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स से भी कोई सीख और प्रेरणा नहीं ली, और उत्तराखंड व हिमाचल के बाढ़/बारिश पीड़ितों के लिए कुछ करने को लेकर सक्रिय नहीं हुए । लोगों का कहना है कि प्रवीन गोयल को खुद से उत्तराखंड व हिमाचल के बाढ़/बारिश पीड़ितों की सुध लेना चाहिए थी, लेकिन उन्होंने खुद तो सुध नहीं ही ली - डिस्ट्रिक्ट 3201 तथा डिस्ट्रिक्ट 3202 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स से भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के कर्तव्य और जिम्मेदारियों का सबक नहीं सीखा । प्रवीन गोयल ने सिर्फ यह किया कि यशपाल दास ने उनसे केरल के बाढ़/बारिश पीड़ितों की मदद करने की अपील को दोहराने के लिए कहा, जिसे उन्होंने दोहरा दिया ।
यशपाल दास की केरल के बाढ़/बारिश पीड़ितों के लिए दी जाने वाली मदद के पैसे रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3080 सर्विस ट्रस्ट के एकाउंट में जमा करवाने की अपील ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों को और गुस्सा दिलाया है । दरअसल इस ट्रस्ट के एकाउंट पर यशपाल दास और डिस्ट्रिक्ट के तमाम फंड्स व प्रोजेक्ट के 'मास्टरमाइंड' पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू कुंडली मारे बैठे हैं । ट्रस्ट के नियमानुसार, ट्रस्ट का चेयरमैन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होता है, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट सेक्रेटरी तथा निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ट्रेजरर होता है - लेकिन राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स इस ट्रस्ट के एकाउंट पर कब्जा जमाये बैठे हैं, और ट्रस्ट के वाजिब पदाधिकारियों को उनका हक देने को तैयार नहीं हैं । पिछले रोटरी वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने इस मामले में रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड तक गुहार लगाई, लेकिन राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स बेशर्मी धारण करते हुए ट्रस्ट के एकाउंट पर कुंडली मारे बैठे हुए हैं । लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने ट्रस्ट का चेयरमैन पद का अधिकार पाने का प्रयास तो किया था, इस वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल से तो उस तरह का प्रयास किए जाने की उम्मीद करना/रखना ही बेकार है । ऐसे ही संदर्भों के साथ, लोगों को शक है और उनका आरोप है कि केरल के बाढ़/बारिश पीड़ितों के नाम पर पैसा इकट्ठा करने के पीछे असल उद्देश्य अपनी जेब भरना है । डिस्ट्रिक्ट के लोगों के लिए यह समझना भी मुश्किल हो रहा है कि राजा साबू और यशपाल दास तथा उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स अपने यहाँ के पीड़ितों की मदद करने की बजाये दूसरे दूसरे देशों और प्रदेशों के पीड़ितों की मदद करने में दिलचस्पी क्यों लेते हैं ? जिन लोगों ने इस बात को समझने की कोशिश की है, उन्हें लगता है कि राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स पीड़ितों की मदद के नाम पर अपनी ब्रॉन्डिंग करने, मौज-मजा करने, राजनीति करने, बिजनेस करने तथा अपनी जेब भरने का उद्देश्य पूरा करते हैं ।

Sunday, February 18, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट सर्विस सोसायटी के पैसे चोरीछिपे राजा साबू की चेयरमैनी वाले उत्तराखंड रिलीफ फंड के बंद घोषित कर दिए गए अकाउंट में ले जाए जाने के मामले के तूल पकड़ने से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में कपिल गुप्ता की उम्मीदवारी मुसीबत में पड़ी

चंडीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के गवर्नर-काल की मिड-ईयर रिव्यू मीटिंग में राजा साबू गिरोह की करीब साढ़े 21 लाख रुपए की 'लूट' और इस लूट को ठिकाने लगाने तथा छिपाने की कोशिशों को लेकर जो फजीहत हुई है, उसने कपिल गुप्ता की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी के लिए खासी समस्या पैदा कर दी है । उल्लेखनीय है कि कपिल गुप्ता अपनी उम्मीदवारी को कामयाबी दिलाने के लिए पूरी तरह से राजा साबू गिरोह के नेताओं पर निर्भर हैं, लेकिन नेताओं के लिए समस्या की बात यह हुई है कि वह किस मुँह से लोगों के बीच कपिल गुप्ता की उम्मीदवारी की सिफारिश और वकालत करें; बेशर्मी धारण करके यदि करें भी तो उनकी बेईमानियों के किस्से सुनने के बाद कौन उनकी सिफारिश व वकालत पर गौर करेगा ? कपिल गुप्ता के नजदीकियों ने भी मान लिया है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई - लड़ाई शुरू होने से पहले ही वह हार गए हैं । कुछेक लोगों को हालाँकि लग रहा है कि दूसरे उम्मीदवारों की तुलना में कपिल गुप्ता की सक्रियता का ग्राफ चूँकि बेहतर है, और दूसरे उम्मीदवारों की तुलना में उनका समर्थन आधार भी अपेक्षाकृत बड़ा है - इसलिए कपिल गुप्ता के लिए चुनावी मुकाबला मुश्किल नहीं होगा; किंतु चुनावी राजनीति के अनुभवी लोगों का मानना और कहना है कि इस बार का मुकाबला दो उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि दो खेमों के बीच है; और डिस्ट्रिक्ट में इस समय राजा साबू खेमे की हरकतों के खिलाफ जो गुस्सा है - उसे देखते हुए कपिल गुप्ता के लिए चुनावी मुकाबला कठिन ही होगा । टीके रूबी की मिड-ईयर रिव्यू मीटिंग में क्लब्स के प्रेसीडेंट्स तथा अन्य लोगों के बीच राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स सदस्यों की हरकतों के प्रति जो नाराजगी फूटी है, उसे देखते हुए कपिल गुप्ता के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का उनके भरोसे लड़ा जाने वाला चुनाव खासी मुश्किल में फंस गया है ।
टीके रूबी के गवर्नर-काल की मिड-ईयर रिव्यू मीटिंग में 'रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3080 सर्विस' सोसायटी के हिसाब-किताब और उसके रख-रखाव को लेकर जो गंभीर आरोप सामने आए, उससे राजा साबू गिरोह के सदस्य पूर्व गवर्नर्स की लूट-खसोट के तथ्य एक बार फिर उद्घाटित हुए हैं । सोसायटी के नियम के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सोसायटी का चेयरमैन होगा, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट सेक्रेटरी तथा निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ट्रेजरर होगा - लेकिन सोसायटी पर राजा साबू के मुँह लगे पूर्व गवर्नर्स मधुकर मल्होत्रा और चेतन अग्रवाल  ऐसी कुंडली मार कर बैठे हुए हैं कि इस नियम की बैंड बजाई हुई है । इनके बेशर्मी भरे दुस्साहस का आलम यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी ने जब सोसायटी के हिसाब-किताब देखने/माँगने की कोशिश की तो मधुकर मल्होत्रा ने उन्हें बाकायदा ईमेल लिख कर जबाव दिया कि आप तो सोसायटी के सदस्य ही नहीं हो, इसलिए आपको हिसाब माँगने/देखने का अधिकार ही नहीं है । नियम के अनुसार, जिस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को सोसायटी का चेयरमैन होना चाहिए, मधुकर मल्होत्रा उस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को सोसायटी का सदस्य तक मानने से इंकार कर रहे हैं और हिसाब-किताब देखने/माँगने के उसके अधिकार को ही चुनौती दे रहे हैं । टीके रूबी को सोसायटी के हिसाब-किताब को लेकर इन लोगों से जिस तरह की उलझन का सामना करना पड़ रहा है, उससे यह भी पोल खुली है कि चेतन अग्रवाल और मधुकर मल्होत्रा की जोड़ी ने पिछले वर्षों में गवर्नर रहे रमन अनेजा, डेविड हिल्टन, दिलीप पटनायक आदि को भी उनका अधिकार नहीं लेने दिया है; और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल को भी सेक्रेटरी का अधिकार नहीं दिया गया है ।
मिड-ईयर रिव्यू मीटिंग में प्रेसीडेंट्स व अन्य पदाधिकारियों के बीच जो पोल खुली उसमें इस सवाल का जबाव भी मिला, कि राजा साबू के सिपहसालारों के रूप में चेतन अग्रवाल और मधुकर मल्होत्रा के लिए नियमों की अनदेखी करते हुए जबर्दस्ती सोसायटी पर कब्जा जमाए रखने की जरूरत आखिर क्यों है ? पता चला कि सोसायटी के बैंक अकाउंट से चोरीछिपे और मनमाने तरीके से 21 लाख 44 हजार 900 रुपए 14 सितंबर 2017 को राजा साबू की चेयरमैनी वाले उत्तराखंड रिलीफ फंड अकाउंट में ट्रांसफर कर लिए गए; सोसायटी के चेयरमैन टीके रूबी को जिसकी भनक तक नहीं लगने दी गई । लगता है कि टीके रूबी को शक था कि सोसायटी के हिसाब-किताब में चोरी-चकारी हो सकती है, इसलिए उन्होंने पहले से ही अनुरोध किया हुआ था कि उनकी जानकारी के बिना सोसायटी के पैसों का कोई इस्तेमाल न हो । उनके इस अनुरोध के बावजूद, सोसायटी के अकाउंट से पैसे राजा साबू के चेयरमैनी वाले अकाउंट में ले जाए गए । इस मामले में और भी गंभीर बात यह भी है कि उत्तराखंड रिलीफ फंड को 17 अगस्त 2017 को ही बंद घोषित करते हुए उसका हिसाब-किताब दे दिया गया था । उल्लेखनीय है कि करीब पौने तीन करोड़ रुपए के घपले के आरोप राजा साबू की चेयरमैनी वाले उत्तराखंड रिलीफ फंड में भी हैं; उसके बावजूद उस फंड अकाउंट को बंद करने की घोषणा के बाद भी 'रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3080 सर्विस' सोसायटी के अकाउंट से चोरीछिपे 21 लाख से ज्यादा रुपए ले लिए गए । पैसों के इस ट्रांसफर की बात खुलने से उत्तराखंड रिलीफ फंड में हुई हेराफेरी के आरोप एक बार फिर ताजा हो गए हैं । हैरानी की बात यह है कि रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3080 सर्विस सोसायटी के हिसाब-किताब में व्यवस्था और नियमों के पालन की बात शुरू हुई तो चेतन अग्रवाल व मधुकर मल्होत्रा की जोड़ी ने 'चोरी और सीनाजोरी' वाला रवैया अपना लिया है ।
टीके रूबी के गवर्नर-काल की मिड-ईयर रिव्यू मीटिंग में राजा साबू गिरोह के सदस्यों की लूट-खसोट की पोल खुली, तो प्रेसीडेंट्स व अन्य पदाधिकारियों का गुस्सा फूटा । कुछेक लोगों ने कहा भी कि अभी तक वह यह विश्वास नहीं करते थे कि रोटरी के नाम पर पैसों की चोरी व हेराफेरी में राजा साबू की मिलीभगत भी हो सकती है - लेकिन जिस तरह के तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे तो लग रहा है कि राजा साबू की मिलीभगत के बिना इस तरह की हेराफेरी हो ही नहीं सकती है । मीटिंग में मौजूद कुछेक लोगों ने माँग भी की कि रोटरी के प्रोजेक्ट्स के नाम पर पैसों की लूट व हेराफेरी करने के आरोप में राजा साबू और दूसरे पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाना चाहिए ताकि आगे यह रोटरी के नाम पर लूट-खसोट न कर सकें । रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3080 सर्विस सोसायटी तथा उत्तराखंड रिलीफ फंड में हेराफेरियों के आरोपों व उसके दोषियों का वास्तव में क्या होगा, यह तो आगे पता चलेगा - अभी लेकिन इसका ठीकरा कपिल गुप्ता के सिर फूटता दिख रहा है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में राजा साबू गिरोह के भरोसे जीत हासिल करने की तैयारी कर रहे कपिल गुप्ता को यह मुसीबत बैठे-बिठाए ही मिल गई है ।

Saturday, October 28, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में रोटरी उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ ट्रस्ट के हिसाब-किताब को 'बताने से ज्यादा छिपाने की' यशपाल दास की कोशिश अंततः फेल हुई, और दो करोड़ 83 लाख रुपए का मिला हिसाब मोहिंदर पॉल गुप्ता की बड़ी जीत साबित हुई

अंबाला ।  मोहिंदर पॉल गुप्ता की मेहनत अंततः रंग लाई और उनके अभियान को एक बड़ी कामयाबी यह मिली है कि रोटरी उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ ट्रस्ट के दो करोड़ 83 लाख रुपए हड़पने की जो तैयारी की जा रही थी, वह फेल हो गई है । अभी तक इस रकम को स्कूल रिस्टेब्लिशमेंट फंड में ट्रांसफर दिखा कर इसे खर्च हुआ बताने/जताने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन मोहिंदर पॉल गुप्ता की लगातार कोशिशों के बाद ट्रस्ट की तरफ से यशपाल दास ने अब यह जानकारी दी है कि यह रकम अभी निपट नहीं गई है, बल्कि नौ वर्षों में खर्च होगी । यशपाल दास ने हालाँकि होशियारी और चालाकी बरतते हुए अभी भी यह नहीं बताया है कि इस रकम का रखवाला अब कौन है और यह रकम आखिर खर्च किस हिसाब से और किसके कहने से होगी ? मोहिंदर पॉल गुप्ता रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के पूर्व प्रेसीडेंट हैं और पिछले कुछ समय से उन्होंने डिस्ट्रिक्ट के कार्यक्रमों तथा प्रोजेक्ट्स के हिसाब-किताब में पारदर्शिता लाने तथा जिम्मेदार लोगों को जबावदेह बनाने के लिए अभियान छेड़ा हुआ है, जिसके तहत वह सवाल पूछते रहे हैं । मोहिंदर पॉल गुप्ता का सवाल पूछना विभिन्न ट्रस्टों और अभियानों के मालिक बने बैठे राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू और यशपाल दास को इतना बुरा लगता रहा है कि कई मौकों पर इन्होंने मोहिंदर पॉल गुप्ता को लोगों के बीच बदनाम व अपमानित करने तक का प्रयास किया - इस प्रयास के पीछे इनका उद्देश्य वास्तव में मोहिंदर पॉल गुप्ता का मुँह बंद करना था । मोहिंदर पॉल गुप्ता लेकिन इनकी चाल में नहीं फँसे और तथ्यों को 'बताने से ज्यादा छिपाने की' इनकी कोशिशों से पैदा होने सवालों को लगातार पूछते रहे - जिसका नतीजा एक बड़ी जीत के रूप में सामने आया है ।
'हार' से पैदा हुई बदहवासी और बौखलाहट यशपाल दास के पत्र में पढ़ी/देखी जा सकती है । मोहिंदर पॉल गुप्ता ने यशपाल दास की जिस ईमेल को लेकर शिकायत की, यशपाल दास ने शुरू में तो यह कहते हुए उसका बचाव किया कि उक्त ईमेल उन्होंने सिर्फ पूर्व गवर्नर्स को लिखी थी, जो सोशल मीडिया में आ रही गलत जानकारियों से भ्रमित हो रहे थे और सच्चाई जानना चाहते थे । पत्र के अंत में वह लेकिन यह दावा करने लगे कि जो लोग उन्हें जानते हैं उन्हें विश्वास है कि वह कुछ भी गलत नहीं कर सकते हैं । तो क्या डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स उन्हें नहीं जानते हैं और यदि 'जानते' हैं तो 'उन्हें' सफाई देने की जरूरत उन्हें क्यों पड़ी ? यशपाल दास को यदि सचमुच लगता है कि रोटरी उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ ट्रस्ट के हिसाब-किताब को लेकर गलत बयानी हो रही है, और लोग भ्रमित हो रहे हैं तो उन्हें सभी का भ्रम दूर करना चाहिए ! यशपाल दास के पत्र में ही उनकी बदहवासी का आलम यह देखने को मिलता है कि एक तरफ तो वह दावा करते हैं कि जो लोग उन्हें जानते हैं, वह उन पर विश्वास करते हैं और किसी भ्रम का शिकार नहीं होंगे, और अपनी तरफ से सफाई भी उन्हें ही देते हैं जो उन्हें जानते हैं । दरअसल यशपाल दास के इस 'व्यवहार' में ही वह सोच उद्घाटित होती है जो अपने आप को 'राजा' समझती है और डिस्ट्रिक्ट के लोगों को दोयम दर्जे का मानती है और जिन्हें जबाव देना जरूरी नहीं समझती है । सोशल मीडिया में सवाल डिस्ट्रिक्ट के सदस्य ही तो उठा रहे हैं; सवाल करने वाले मोहिंदर पॉल गुप्ता एक वरिष्ठ रोटेरियन और पूर्व अध्यक्ष हैं और पिछले एक वर्ष में पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजा साबू के हाथों से आउटस्टैंडिंग डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन का अवॉर्ड ले चुके हैं - वह यदि भ्रमित हैं, तो उनका भ्रम दूर करने में पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास की क्रीज क्यों खराब हो रही है ?
हिसाब-किताब संबंधी सवाल पूछने पर बदहवास और बौखलाने का व्यवहार सिर्फ यशपाल दास ने ही नहीं दिखाया है, इससे पहले निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन अनेजा की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में राजा साबू भी ऐसा ही व्यवहार दिखा चुके हैं । वहाँ मोहिंदर पॉल गुप्ता ने एक प्रोजेक्ट की फंडिंग के बारे में सवाल पूछा था, जिस पर राजा साबू बुरी तरह तमतमा गए थे और बौखलाए गुस्से में वह अपनी सीट छोड़ कर हॉल के बीच तक आ गए थे और लोगों को उकसाने के इरादे से सवाल करने लगे थे कि उन्हें प्रोजेक्ट करना चाहिए कि नहीं ? बेईमानीभरी चालाकी से पूछे गए इस सवाल में लोगों का ध्यान डायवर्ट करने की राजा साबू की कोशिश लेकिन छिपी नहीं रह सकी थी; क्योंकि लोगों का तुरंत ध्यान गया कि प्रोजेक्ट के होने या न होने को लेकर तो सवाल था ही नहीं - सवाल तो इस बारे में था कि किसी प्रोजेक्ट में पैसे कहाँ से आते हैं, कितने आते हैं और कैसे खर्च होते हैं ? राजा साबू के इस नाटक में राजा-भक्ति दिखाते हुए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेपीएस सिबिया ने भी अतिथि कलाकार की भूमिका निभाते हुए मोहिंदर पॉल गुप्ता को चुप करने/कराने की कोशिश की थी । सवाल का सीधा जबाव देने की बजाए, सवाल से राजा साबू का बुरी तरह बौखलाना लोगों को 'चोर की दाढ़ी में तिनका' वाला मुहावरा याद दिला गया था । मोहिंदर पॉल गुप्ता के एक सीधे-सादे से सवाल से यशपाल दास का बदहवास होना और बौखलाना उक्त मुहावरे की एक बार फिर याद दिलाता है ।
मोहिंदर पॉल गुप्ता के सवालों से राजा साबू और यशपाल दास तथा उनके 'नजदीकी' गवर्नर्स बौखलाएँ चाहें जितना, लेकिन वह हिसाब-किताब देने के लिए मजबूर भी हो रहे हैं । इस तरह मोहिंदर पॉल गुप्ता के अभियान ने डिस्ट्रिक्ट में हवा बदलने का काम किया है । डिस्ट्रिक्ट की हवा बदलने के काम को और हवा देने का काम मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी की उस घोषणा ने भी किया है, जिसमें उन्होंने रोटरी इंटरनेशनल से खर्चे के लिए मिलने वाली रकम को प्रोजेक्ट्स में देने की घोषणा की है । टीके रूबी की यह घोषणा दिखा/जता रही है कि डिस्ट्रिक्ट के नए पदाधिकारी ज्यादा पारदर्शी व जबावदेह तरीके से काम करने में यकीन कर रहे हैं । उल्लेखनीय है कि इससे पहले किसी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ने - यहाँ तक कि राजा साबू और यशपाल दास तक ने भी - लोगों को इस बात की हवा तक नहीं लगने दी कि उन्हें खर्चे के लिए रोटरी इंटरनेशनल से कितनी रकम मिली है । डिस्ट्रिक्ट में लोग याद करते हुए कह रहे हैं कि उन्होंने तो अभी तक यही देखा/पाया है कि किसी गवर्नर से यदि यह पूछ भी लो कि उन्हें खर्चे के नाम पर रोटरी से क्या मिला है, तो वह नाराज हो जाता रहा है । यशपाल दास ने भी मोहिंदर पॉल गुप्ता को लिखे पत्र में नाराजगी की बौखलाहट 'दिखाई' है । अच्छी बात लेकिन यह है कि यशपाल दास की नाराजगीभरी बौखलाहट के बावजूद मोहिंदर पॉल गुप्ता सवाल पूछने के अपने अभियान के प्रति संकल्पित नजर आ रहे हैं ।

Sunday, October 8, 2017

थैंक्यू मिस्टर राजा साबू और मिस्टर यशपाल दास, काफी हील-हुज्जत के बाद आखिरकार आपने रोटरी उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ ट्रस्ट के अकाउंट तो दे दिए हैं; लेकिन रिस्टेब्लिशमेंट के नाम पर 'निकाले' गए दो करोड़ 83 लाख रुपए कहाँ और कैसे खर्च हुए - यह आपने क्यों नहीं बताया ?

अंबाला । 'रचनात्मक संकल्प' को अंबाला के एक अज्ञात/अनजान नंबर से आई फोन कॉल पर थोड़ी खीज, थोड़े गुस्से और थोड़ी ठसक से भरी आवाज में बताया गया कि 'आपको रोटरी उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ ट्रस्ट के अकाउंट देखने हैं तो रोटरी न्यूज ऑनलाइन पर देख लीजिये ।' उक्त आवाज से अभी उसका परिचय ही पूछा गया था, कि फोन काट कर उक्त आवाज चुप हो गई । तब 'रचनात्मक संकल्प' के पास रोटरी न्यूज ऑनलाइन पर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा । 'रचनात्मक संकल्प' यूँ तो खोजबीन करने में अपने आप को बड़ा होशियार मानता/समझता है, लेकिन रोटरी न्यूज ऑनलाइन की भूल-भुलैय्या में रोटरी उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ ट्रस्ट के अकाउंट वाली पोस्ट खोजने में उसके लिए नाकों चने चबाने वाली स्थिति बन गई । खासी मशक्कत के बाद आखिरकार उक्त पोस्ट खोज ली गई । इस मशक्कत में बार बार इस सवाल ने भी परेशान किया कि उक्त ट्रस्ट के मुख्य कर्ताधर्ता पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास ने वायदा तो उक्त ट्रस्ट के हिसाब/किताब को जीएमएल में प्रकाशित करवाने का किया था, फिर उन्होंने हिसाब/किताब ऐसी भूल-भुलैय्या वाली जगह पर प्रकाशित क्यों किया/करवाया है - जहाँ उसे देख पाना आसान न हो । यशपाल दास ने आखिर यह परस्पर विरोधी रवैया क्यों अपनाया - जिसमें एक तरफ तो वह हिसाब/किताब प्रकाशित करवाने का दावा कर सकें; और दूसरी तरफ उन्होंने ऐसी जगह हिसाब/किताब प्रकाशित किए/करवाए, जहाँ कोई आसानी से देख न सके ।
रोटरी के बड़े नेताओं व पदाधिकारियों द्वारा संचालित एक बड़े और महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट के पूरे होने की खबर गुमनाम तरीके से प्रकाशित किए/करवाए जाने का नतीजा यह है कि खबर को प्रकाशित हुए एक सप्ताह से अधिक का समय हो जाने के बाद भी पोस्ट पर सिर्फ एक कमेंट आया है - और वह भी मधुकर मल्होत्रा का । उक्त ट्रस्ट को 33 डिस्ट्रिक्ट्स से पैसे मिले हैं । किसी डिस्ट्रिक्ट के किसी भी रोटेरियन ने उक्त हिसाब/किताब को नहीं देख पाया है क्या, या इस हिसाब/किताब को मधुकर मल्होत्रा के अलावा अन्य किसी ने तारीफ के लायक नहीं समझा है ? वास्तव में एक अकेले मधुकर मल्होत्रा के प्रशंसा भरे कमेंट ने हिसाब/किताब वाली उक्त पोस्ट को और भी संदेहास्पद बना दिया है । उल्लेखनीय है कि रोटरी उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ ट्रस्ट के हिसाब-किताब में हेराफेरी के आरोपों को लेकर जो राजा साबू और यशपाल दास लोगों के निशाने पर रहे हैं, मधुकर मल्होत्रा को उनके ही संगी-साथी के रूप में देखा/पहचाना जाता है । सेवा कार्यों की आड़ में मौज-मजा और तफ़रीह करने के आरोपों के घेरे में मधुकर मल्होत्रा का नाम भी सुना जाता रहा है । ऐसे में, रोटरी उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ ट्रस्ट की गुमनाम तरीके से प्रकाशित की/करवाई गई रिपोर्ट पर एक अकेले मधुकर मल्होत्रा द्वारा ही की गई प्रशंसा ने दाल में कुछ ज्यादा ही काला होने का संकेत दिया ।
यह संकेत रोटरी उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ ट्रस्ट के अकाउंट पर सरसरी निगाह डालते ही 'तथ्य' में बदलता हुआ नजर आया । और यह तथ्य इस बात का सुबूत भी है कि राजा साबू और यशपाल दास लोगों की आँखों में धूल झौंकने का कैसा कैसा साहस रखते हैं । वर्ष 2015-16 की बैलेंस शीट में दो करोड़ 83 लाख रुपए स्कूल रिस्टेब्लिशमेंट फंड में ट्रांसफर दिखाए गए हैं । रिस्टेब्लिशमेंट फंड में इससे पहले के दो वर्षों में क्रमशः 28 लाख रुपए तथा दो करोड़ 55 लाख रुपए, यानि कुल दो करोड़ 83 लाख रुपए 'खर्च' किए हुए दिखाए गए हैं । ऐसे में सवाल यह है कि वर्ष 2013-14 और वर्ष 2014-15 में रिस्टेब्लिशमेंट फंड में जब दो करोड़ 83 लाख रुपए के खर्च का हिसाब 'बराबर' हो गया था, तब वर्ष 2015-16 में उक्त मद में और दो करोड़ 83 लाख रुपए ट्रांसफर करने का क्या मतलब है ? यह 'क्या मतलब' इसलिए और बड़ा हो जाता है कि वर्ष 2015-16 की बैलेंस शीट में ट्रस्टियों में से किसी के हस्ताक्षर नहीं हैं । नियमानुसार, ट्रस्टियों के हस्ताक्षर के बिना बैलेंसशीट मान्य ही नहीं है । तो क्या यशपाल दास और राजा साबू ने जानबूझ वर्ष 2015-16 की बैलेंसशीट पर इसीलिए हस्ताक्षर नहीं किए हैं, कि कहीं दो करोड़ 83 लाख रुपए का मामला 'पकड़ा' गया तो वह अपने आप को बचा लें ? उल्लेखनीय है कि बाकी तीन वर्षों की बैलेंसशीट में यशपाल दास के तीन तथा दो में राजा साबू के हस्ताक्षर हैं ।
रोटरी उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ ट्रस्ट के हिसाब-किताब में एक और मजेदार चीज देखने को मिली - इसमें एक तरफ तो फोटोस्टेट करवाने में खर्च हुए 140 रुपए और बैंक चार्ज में खर्च हुए 56 रुपए तक का हिसाब देते हुए दिखाने/जताने का प्रयास किया गया है कि जैसे एक एक पैसे का हिसाब दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन और बिल्डिंग रिस्टेब्लिशमेंट के नाम पर बिना कोई डिटेल्स दिए हुए लाखों और करोड़ों रुपए खर्च हुए दिखा दिए गए हैं । उल्लेखनीय है कि रोटरी उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ ट्रस्ट के हिसाब/किताब में गड़बड़ी के जो संदेह पैदा हुए और आरोप लगने शुरू हुए, वह वास्तव में इसलिए ही गहराते गए क्योंकि हिसाब/किताब को छिपाने की कोशिश की जाती रही - और हिसाब/किताब पूछने वालों से चिढ़ने, नाराज होने तथा उनको 'दुश्मन' समझने का व्यवहार प्रदर्शित किया गया । तमाम हील-हुज्जत के बाद अब जब हिसाब/किताब सामने आए भी हैं, तो उनमें भी बताने/दिखाने से ज्यादा 'छिपाने' का प्रयास नजर आ रहा है । गुमनाम और भूल-भुलैय्या वाली जगह पर दिए गए हिसाब/किताब में ट्रस्ट को पैसे कहाँ कहाँ से और कितने कितने मिले हैं, इसका तो बड़ा विस्तृत विवरण दिया गया है, लेकिन पैसे खर्च कहाँ और कैसे हुए हैं - इसका विस्तृत विवरण छिपा लिया गया है । बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन और बिल्डिंग रिस्टेब्लिशमेंट के नाम पर विभिन्न वर्षों में जो लाखों और करोड़ों रुपए खर्च दिखाए गए हैं, उनके भी विस्तृत विवरण यदि दे दिए जाते, तो ट्रस्ट के पैसों में हेराफेरी और गड़बड़ी का संदेह करने वाले लोगों के मुँह अपने आप बंद हो जाते । इसकी बजाए, पहले तो हिसाब/किताब देने में तरह तरह की बहानेबाजी करने, दबाव पड़ने पर घोषित जगह की बजाए गुमनाम और भूल-भुलैय्या वाली जगह पर हिसाब/किताब देने, और वह भी आधे-अधूरे ढंग से और अमान्य बैलेंसशीट से देने की कोशिश ने ट्रस्ट के पैसों में गड़बड़ी और हेराफेरी के संदेहों और आरोपों को और हवा देने का ही काम किया है । ट्रस्टियों के हस्ताक्षर के बिना दिखाई जा रही वर्ष 2015-16 की बैलेंसशीट में दो करोड़ 83 लाख रुपयों के ट्रांसफर के तथ्य ने मामले को खासा गंभीर बना दिया है ।