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Wednesday, July 1, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में अवॉर्ड देने/बाँटने में बंदरबाँट करने के साथ-साथ रोटरी फाउंडेशन के लिए पैसे इकट्ठे करने के लिए अपनाई गई तिकड़मों को देख/सुन कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता को लोग 'रोटरी का नटवरलाल' कहने लगे हैं

गाजियाबाद । रोटरी और समाज के लिए बेहतर काम करने वाले रोटेरियंस की पहचान करने तथा उन्हें पुरुस्कृत करने के - डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अपने अंतिम - कार्यक्रम में दीपक गुप्ता ने अवॉर्ड्स की जो बंदरबाँट की है, उसने डिस्ट्रिक्ट में काम करने वाले रोटेरियंस को न सिर्फ निराश व हतोत्साहित किया है, बल्कि पूरे कार्यक्रम का मजाक ही बना दिया । 'आउटस्टैंडिंग रोटेरियन' का अवॉर्ड पाने वाले एक रोटेरियन की शिकायत है कि उन्होंने इस वर्ष काफी काम किया, जिसमें उनके करीब दस लाख रुपये खर्च हुए - इसलिए उन्हें जब उक्त अवॉर्ड मिला तो उन्हें बड़ा गर्व हुआ; लेकिन उनका गर्व यह देख/जान कर हवा हो गया कि यही अवॉर्ड उनके ही क्लब के एक ऐसे सदस्य को भी मिला है, जिसने इकन्नी भी खर्च नहीं की और काम के नाम पर सिर्फ दीपक गुप्ता की चमचागिरी ही की । उसके बाद से, उनके क्लब के साथ-साथ दूसरे क्लब के लोग भी उनका मजाक उड़ा रहे हैं कि उनसे ज्यादा होशियार तो 'वह' निकला, जिसने रोटरी में 'न हींग लगाई, न फिटकरी' और अवॉर्ड ले बैठा । यह देख/सुन कर उन्हें भी पछतावा हो रहा है कि उन्होंने दीपक गुप्ता के साथ रोटरी और डिस्ट्रिक्ट में नाहक ही काम किया, और मोटी रकम खर्च की । सचिन वत्स को 'बेस्ट रोटेरियन' के अवॉर्ड से नवाजे जाने को लेकर लोगों ने 'अँधा बाँटे रेवड़ी, अपनों अपनों को दे' कहावत को याद किया । सचिन वत्स को दीपक गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट इवेंट चेयरमैन बनाया था; एक इवेंट के आयोजन में सचिन वत्स द्वारा किए गए एक फर्जीवाड़े के कारण दीपक गुप्ता को अपनी पत्नी के साथ एक कानूनी झमेले में फँसना पड़ा - इसके बाद भी, सचिन वत्स का 'बेस्ट रोटेरियन' घोषित होना 'अंधा कानून' ही कहा/माना जायेगा । दीपक गुप्ता की हरकतों से तंग आकर मनीष गोयल ने डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी के पद से इस्तीफा दिया था, और तब सचिन वत्स ने उक्त पद की भी कुछ जिम्मेदारी संभाली । कुल मिला कर सचिन वत्स ने जो कुछ भी किया, उसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता की मदद के रूप में ही देखा/पहचाना जा सकता है - उसे रोटरी के और या समाज के लिए किए गए काम के रूप में नहीं देखा जा सकता है । रोटरी और समाज के लिए तो एक रोटेरियन के रूप में सचिन वत्स ने इकन्नी का भी काम नहीं किया । डिस्ट्रिक्ट के लोगों का कहना है कि इसलिए सचिन वत्स को 'बेस्ट रोटेरियन' बताना वास्तव में डिस्ट्रिक्ट के उन लोगों का अपमान है, जिन्होंने रोटरी के लिए अपनी जेबें ढीली कीं ।
इसी तरह के उदाहरणों के हवाले से, अवॉर्ड देने के मामले में दीपक गुप्ता को 'नटवरलाल' का नाम दिया गया । मजे की बात है कि अपना 'नटवरलाली' रूप दीपक गुप्ता ने सिर्फ अवॉर्ड देने के मामले में ही नहीं दिखाया है, बल्कि रोटरी फाउंडेशन के लिए पैसे इकट्ठे करने के काम में भी उन्होंने अपनी इसी रूप का जमकर इस्तेमाल किया । पिछले दस/पंद्रह दिनों से वह लगातार झूठ पर झूठ बोल कर रोटरी फाउंडेशन के लिए पैसे देने को लेकर लोगों पर दबाव बनाते रहे हैं - किसी से कहा कि रोटरी फाउंडेशन में साढ़े नौ लाख डॉलर हो गए हैं, आप पचास हजार डॉलर दे दो, पूरे दस लाख डॉलर हो जायेंगे । उस समय जबकि वास्तव में थे करीब पाँच/छह लाख डॉलर ही । 28 जून तक का जो आँकड़ा अभी उपलब्ध है, उसके अनुसार रोटरी फाउंडेशन के लिए साढ़े सात लाख डॉलर से कुछ अधिक रकम ही जमा हुई है । दीपक गुप्ता के 'नटवरलाली' रूप का आलम यह रहा कि वह खुद तो रकम पूरी करके एकेएस सदस्य नहीं बने, लेकिन अपना रिकॉर्ड बनाने के लिए उन्होंने रोटरी क्लब दिल्ली सिटी की प्रेसीडेंट अमिता मोहिंद्रु पर तरह तरह से दबाव डाल और डलवा कर उनकी एकेएस सदस्यता की रकम पूरी जमा करवा ली । दीपक गुप्ता ने अनीता मोहिंद्रु को संकेत दिया था कि वह उन्हें वह उन्हें 'बेस्ट प्रेसीडेंट' का अवॉर्ड देंगे - दीपक गुप्ता ने उन्हें उक्त अवॉर्ड दिया भी, लेकिन अनीता मोहिंद्रु के साथ उन्होंने 'धोखा' यह किया कि उनके साथ एक अन्य प्रेसीडेंट को भी उक्त अवॉर्ड में साझेदार बना दिया ।
दीपक गुप्ता ने सिर्फ अनीता मोहिंद्रु के साथ ही 'धोखा' नहीं किया, बल्कि रोटरी फाउंडेशन के साथ भी वह मजाक कर रहे हैं । रोटरी फाउंडेशन के लिए वह जो मोटी रकम जुटाने के प्रयासों में रहे, रोटरी को तो वास्तव में उसका करीब चौथा हिस्सा ही मिलेगा - उस रकम का तीन चौथाई हिस्सा तो दरअसल गिफ्ट टर्म के रूप में है, जो रोटरी को 'देने' के लिए नहीं, बल्कि रोटरी से 'लेने' के लिए दिया गया है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता की क्या उपलब्धियाँ हैं, यह मेंबरशिप में हुई तथाकथित बढ़ोतरी से जाना/समझा जा सकता है । पिछले वर्ष, एक जुलाई को जब दीपक गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार संभाला था, तब डिस्ट्रिक्ट में 3769 सदस्य थे, जो उनके पदभार छोड़ते समय 3842 हैं - यानि 73 सदस्य बढ़े हैं । लेकिन इस वृद्धि को रेखांकित करते समय यह ध्यान करना मामले को दिलचस्प बना देता है कि दीपक गुप्ता के गवर्नर-वर्ष में 12 नए क्लब बने हैं, जिनकी कुल सदस्यता के साथ 375 नए सदस्य जुड़े हैं । इस तरह से देखें, तो वास्तव में दीपक गुप्ता के गवर्नर-वर्ष में कई सदस्य रोटरी और डिस्ट्रिक्ट छोड़ गए हैं । दीपक गुप्ता लगातार रोटरी के प्रति अपना गहरा लगाव दिखाते/जताते रहे हैं, और समय समय पर जाहिर करते रहे हैं कि वह रोटरी के बड़े जानकार हैं - जिस कारण से लोगों को उम्मीद थी कि उनका गवर्नर-वर्ष खास रहेगा; लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता ने लोगों को बुरी तरह निराश किया है । उनका गवर्नर-वर्ष अपनी ही टीम के बड़े पदाधिकारियों तथा कलीग गवर्नर्स के साथ-साथ बाहर के प्रोफेशनल्स के साथ 'बेईमानी' और 'धोखाधड़ी' करने के लिए बदनाम हुआ, और रोटरी के आदर्शों व नियमों के साथ खिलवाड़ करने वाला साबित हुआ है । यही सब देख/जान कई लोग उन्हें 'रोटरी का नटवरलाल' भी कहने लगे हैं । 

Sunday, November 10, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता की तरफ से 'चोरी और सीनाजोरी' वाला रवैया देख कर डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले में अपने साथ हुई बेईमानी के मामले में उनके और उनकी पत्नी रीना गुप्ता के खिलाफ डांस स्मिथ कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू की

गाजियाबाद । देश की एक प्रमुख डांस परफॉर्मेंस व प्रोडक्शन कंपनी डांस स्मिथ ने डिस्ट्रिक्ट 3012 के डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले में ठगी का शिकार होने का आरोप लगाते हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता तथा उनकी पत्नी रीना गुप्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है । डांस स्मिथ के पदाधिकारियों का आरोप है कि उन्हें सूचित किए बिना तथा उनसे कोई अनुमति लिए बिना डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले के निमंत्रण पत्र में, प्रचार में और प्रस्तुति के दौरान कंपनी की प्रस्तुतियों के चित्र तथा उसके रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क लोगो का इस्तेमाल किया गया, जो इंटेक्चुयल प्रॉपर्टी राइट्स का आपराधिक उल्लंघन है । ऐसे समय में, जबकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता के स्वागत/सम्मान के कार्यक्रम को लेकर व्यस्त हैं, तब देश की एक नामी संस्था डांस स्मिथ के साथ की गई बेईमानी का मामला सामने आने से दीपक गुप्ता और डिस्ट्रिक्ट के लिए खासी फजीहत वाली स्थिति बनती नजर आ रही है । उल्लेखनीय है कि डांस स्मिथ के पदाधिकारियों ने पहले दीपक गुप्ता के साथ बातचीत करके अपनी शिकायत के निपटारे के लिए प्रयास किया था, लेकिन दीपक गुप्ता की तरफ से उन्हें जब 'चोरी और सीनाजोरी' वाला रवैया देखने को मिला, तब वह कानूनी कार्रवाई करने के लिए मजबूर हुए । दरअसल दीपक गुप्ता ने मामले का ठीकरा डिस्ट्रिक्ट इवेंट्स चेयरमैन सचिन वत्स के सिर फोड़ा । उनका कहना रहा कि डांस स्मिथ का नाम क्यों और कैसे इस्तेमाल हुआ, यह सचिन वत्स ही बता सकते हैं । सचिन वत्स लेकिन अपनी हरकत पर पर्दा डालने के लिए डांस स्मिथ के पदाधिकारियों के साथ बदतमीजी पर उतर आये और धमकी देने लगे कि उन्होंने यदि मामले को ज्यादा आगे बढ़ाया, तो रोटरी में डांस स्मिथ को काम मिलना मुश्किल हो जायेगा । इसके बाद, डांस स्मिथ के पदाधिकारियों के सामने कन्वेनर के रूप में दीपक गुप्ता और रीना गुप्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा ।
डांस स्मिथ के संस्थापक व मुख्य कर्ताधर्ता सुजित कयाल का कहना है कि रोटरी के प्रति उनके मन में बहुत सम्मान है और रोटरी के लिए हालाँकि उन्होंने कम ही कार्यक्रम किए हैं, लेकिन जिन भी रोटेरियंस के साथ उन्होंने कार्यक्रम किए हैं - उनके साथ उनके अनुभव बहुत ही अच्छे तथा प्रेरणापूर्ण रहे हैं । इसलिए दीपक गुप्ता और सचिन वत्स के व्यवहार से उन्हें गहरा सदमा लगा है । वह सोच भी नहीं सकते थे कि रोटरी में उनके साथ - और उनके साथ क्या, किसी के भी साथ - इस तरह की ठगी हो सकती है । वास्तव में, सुजित कयाल को क्या, किसी को भी यह उम्मीद नहीं रही कि दीपक गुप्ता व सचिन वत्स की जोड़ी को जब डांस स्मिथ से कोई परफॉर्मेंस करवाना ही नहीं था, और इसके लिए उन्होंने कोई प्रयास भी नहीं किया था - तब फिर डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले के निमंत्रण में, उसके प्रचार में और प्रस्तुति में डांस स्मिथ के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क लोगो को इस्तेमाल करने की उन्हें आखिर क्यों सूझी ? इस 'क्यों' के जबाव में कुछेक लोगों को एक बड़ी बेईमानी के संकेत छिपे दिखते हैं । उन्हें लगता है कि कार्यक्रम कम पैसे लेने वाले कलाकारों से करवा लिया गया है और डांस स्मिथ के नाम पर मोटी रकम जेब में डाल ली गई है; कुछेक लोगों को लगता है कि यह बेईमानी सचिन वत्स ने की है और उन्होंने दीपक गुप्ता को अँधेरे में रख कर अपनी जेब गर्म कर ली है, लेकिन अन्य कुछेक लोग इसमें सचिन वत्स और दीपक गुप्ता की मिलीभगत देखते हैं और दीपक गुप्ता को बराबर का हिस्सेदार मानते हैं ।
उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले में दीपक गुप्ता और मेले के इंतजाम से जुड़े लोगों पर पैसे बनाने के गंभीर आरोप चर्चा में रहे हैं । लोगों का कहना रहा है कि पैसे बचाने/बनाने की जुगाड़बाजियों के चलते ही मेले की व्यवस्था से समझौते किए गए, और बेईमानियाँ की गईं - जिसके नतीजे में मेले की व्यवस्था का कबाड़ा हुआ और लोगों ने अपने आप को ठगा हुआ पाया । रोटेरियंस ने इस पर खुलकर अपनी नाराजगी और विरोध भी जताया है । 'रचनात्मक संकल्प' ने इस संबंध में 20 अक्टूबर को एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी । डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले में बेईमानियाँ करके पैसे बनाने के आरोपों को लोगों ने हालाँकि टुच्ची हरकतों के रूप में ही देखा/पहचाना था; लेकिन डांस स्मिथ के साथ की गई बेईमानी की बात सामने आने से पोल खुली है कि दीपक गुप्ता और उनकी टीम के लोगों ने डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले में बड़े ही सुनियोजित तरीके से पैसे बनाए हैं । डांस स्मिथ कोई छोटी-मोटी कंपनी नहीं है । देश के मनोरंजन उद्योग में उसे उसके प्रोफेशनल रवैये के कारण भी जाना/पहचाना जाता है और उसकी खासी पहचान व प्रतिष्ठा है; अभी तक के पिछले करीब सात वर्षों के अपने कार्यकाल में उसने तीन हजार से ज्यादा प्रस्तुतियाँ दी हैं, जिनके आधार पर उसे कई पुरुस्कार तथा प्रमुख सरकारी संस्थाओं से विशेष अनुबंध मिले हैं  । लोगों को लग रहा है कि दीपक गुप्ता और उनकी टीम के सदस्यों ने जब डांस स्मिथ जैसी कंपनी के नाम पर ठगी करने की हरकत कर ली है, तो समझा जा सकता है कि उन्होंने बेईमानी के कैसे कैसे तरीके इस्तेमाल किए होंगे ? डांस स्मिथ के साथ दीपक गुप्ता द्वारा की गई बेईमानी की चर्चा रोटरी के बड़े नेताओं के बीच भी है, जिससे लग रहा है कि उनकी यह बेईमानी उन्हें और डिस्ट्रिक्ट को भारी पड़ने वाली है ।