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Tuesday, March 13, 2018

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल के डायरेक्टर वीके लूथरा ने जेपी सिंह और इंद्रजीत सिंह के बीच हुए विवाद में मनमाने तरीके से कूद कर और विनय गर्ग को भी लपेटे में ले कर अपने बेटे का धंधा जमाने का जुगाड़ किया है क्या ?

नई दिल्ली । नरेश अग्रवाल और जेपी सिंह को खुश करने के चक्कर में इंटरनेशनल डायरेक्टर वीके लूथरा ने मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के चेयरमैन विनय गर्ग तथा डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इंद्रजीत सिंह को लेकर जो बयानबाजी की, उसके चलते वह भारी फजीहत का शिकार हो गए हैं । उनकी बयानबाजी पर विनय गर्ग ने सख्त आपत्ति करते हुए जो पत्र लिखा है, वह लायंस इंटरनेशनल के इतिहास की अनोखी घटना बन गया है । इससे पहले शायद ही कभी यह हुआ होगा कि किसी इंटरनेशनल डायरेक्टर को किसी मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन से फटकार खानी पड़ी हो । विनय गर्ग का कहना रहा कि इंटरनेशनल डायरेक्टर के पद को लेकर उनके मन में बहुत सम्मान है, लेकिन वीके लूथरा ने हरकत ही ऐसी की कि उन्हें उनके खिलाफ कठोर शब्दों का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ा । जिसने भी इस किस्से को जाना है, उसने यही माना है कि लालच के चक्कर में वीके लूथरा ने न तो अपने पद की गरिमा का ध्यान रखा और न ही लायन भावना की परवाह की - और दूसरे के फटे में टाँग अड़ा कर अपनी फजीहत करवा बैठे हैं ।
मामला डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू की तीसरी कैबिनेट मीटिंग में जेपी सिंह और इंद्रजीत सिंह के बीच हुई तू तू मैं मैं का है । उस मामले को लेकर इंद्रजीत सिंह ने लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारियों से जेपी सिंह के व्यवहार की शिकायत की है । इंद्रजीत सिंह का आरोप है कि जेपी सिंह ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और उनके हाथ से माइक छीना । इंद्रजीत सिंह ने अपने साथ हुई घटना का विवरण देते हुए लायन इंटरनेशनल के पदाधिकारियों से अनुरोध किया कि इस घटना का संज्ञान लेते हुए उन्हें जेपी सिंह को इंटरनेशनल डायरेक्टर के रूप में स्वीकार करने के बारे में विचार करना चाहिए । उनका कहना रहा कि जेपी सिंह इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने से पहले ही जब एक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के साथ इस तरह की हरकत कर सकते हैं, तो सोचने की बात यह है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने के बाद वह क्या क्या करेंगे ? डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में इंद्रजीत सिंह ने अपनी शिकायत में लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारियों से अनुरोध किया कि जेपी सिंह द्वारा उनके साथ किए गए व्यवहार को देखते हुए उन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर के रूप में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए ।
इंद्रजीत सिंह को लायंस इंटरनेशनल कार्यालय की तरफ से अपने शिकायती पत्र का तो कोई जबाव नहीं मिला, लेकिन उक्त मामले को लेकर इंटरनेशनल डायरेक्टर वीके लूथरा का एक पत्र जानकारी में आया है । इस पत्र में वीके लूथरा ने दावा किया कि उन्होंने उक्त घटना की अपने स्तर पर जाँच की है और पाया है कि जो हुआ उसमें गलती जेपी सिंह की नहीं, बल्कि इंद्रजीत सिंह और विनय गर्ग की है । इंद्रजीत सिंह और विनय गर्ग पर दोषारोपण करते हुए वीके लूथरा इस हद तक चले गए कि उन्होंने इन दोनों को लायनिज्म से निकालने तक की सिफारिश कर दी है । वीके लूथरा के इस पत्र ने इंद्रजीत सिंह और विनय गर्ग को बुरी तरह भड़का दिया है । विनय गर्ग की नाराजगी इसलिए भी है कि जिस घटना को लेकर बात की जा रही है, वह जेपी सिंह और इंद्रजीत सिंह के बीच घटी थी - वीके लूथरा ने उन्हें नाहक ही मामले में लपेट लिया है; वह घटनास्थल पर मौजूद तो थे, लेकिन न उन्होंने जेपी सिंह से कुछ कहा था और न जेपी सिंह ने उनसे कुछ कहा था । विनय गर्ग और इंद्रजीत सिंह का कहना/पूछना है कि वीके लूथरा अपने स्तर पर जाँच करने की जो बात कर रहे हैं, वह उन्होंने किस हैसियत से और किस आधार पर और या किसके कहने पर की है; और ऐसे कैसी जाँच की है जिसमें घटना के एक पक्ष के रूप में उनकी बात सुने बिना ही वह नतीजे पर पहुँच गए हैं ?
वीके लूथरा के इस पत्र और इसमें कही गईं बातों के सामने आने के बाद से वीके लूथरा लोगों के निशाने पर आ गए हैं । आरोप सुने जा रहे हैं कि वीके लूथरा ने मनमाने तरीके से विनय गर्ग और इंद्रजीत सिंह को निशाने पर लेकर दरअसल इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर होने जा रहे जेपी सिंह को खुश करने की कोशिश की है, ताकि लायनिज्म के नाम पर वह और उनका बेटा धंधा करता रह सकें । लोगों के बीच चर्चा सुनी जाती है कि वीके लूथरा का बेटा दिल्ली में ही लायंस प्रोजेक्ट्स के काम करने लगा है, और कुछेक प्रोजेक्ट्स में वीके लूथरा और उनके बेटे की सीधी संलग्नता है । यह संलग्नता बनी रहे, इसके लिए नरेश अग्रवाल और जेपी सिंह को खुश रखना उन्हें जरूरी लग रहा है । आरोप है कि इसीलिए जेपी सिंह और इंद्रजीत सिंह के बीच हुए विवाद में वीके लूथरा मनमाने तरीके से कूद पड़े हैं और उन्होंने इंद्रजीत सिंह के साथ-साथ विनय गर्ग को भी लपेटे में ले लिया है । वीके लूथरा की इस हरकत ने उनकी खुद की फजीहत तो की ही है, जेपी सिंह के लिए भी मामले को और मुश्किल बना दिया है । जेपी सिंह के शुभचिंतकों का कहना है कि वीके लूथरा जैसे उनके स्वार्थी हमदर्द उनके लिए परेशानी बढ़ाने का ही काम करेंगे - इसलिए जेपी सिंह को ऐसे लोगों से बच कर रहना चाहिए ।

Sunday, January 7, 2018

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में डायबिटीज की बेईमानी के भुगतान को लेकर इंटरनेशनल डायरेक्टर वीके लूथरा की धमकीभरी 'स्मार्टनेस' पर विनय गर्ग द्वारा किए गए पलटवार ने जगदीश गुलाटी और ग्रांट की रकम को ठिकाने लगा चुके उनके साथियों को सांसत में डाला

नई दिल्ली । इंटरनेशनल डायरेक्टर वीके लूथरा की झूठी धमकीभरी 'स्मार्टनेस' ने डायबिटीज प्रोजेक्ट के लिए एक करोड़ 31 लाख रुपए की रकम से जुड़े विवाद को और गंभीर बना दिया है । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के पदाधिकारियों की तरफ से स्पष्ट कर दिया गया है कि वीके लूथरा लायंस इंटरनेशनल के आदेश की झूठी व्याख्या करके उन पर दबाव नहीं बना सकते हैं, और डायबिटीज प्रोजेक्ट के नाम पर हुई लूट में मददगार बनने के लिए उन्हें मजबूर नहीं कर सकते हैं । उल्लेखनीय है कि डाटबिटीज प्रोजेक्ट के लिए आई एक करोड़ 31 लाख रुपए की ग्रांट के अनाप-शनाप खर्च को लेकर मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के पदाधिकारियों तथा बड़े नेताओं के बीच भुगतान को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा है । प्रोजेक्ट चेयरमैन जगदीश गुलाटी ने अपने साथी बड़े नेताओं के साथ मिल कर आनन-फानन में उक्त रकम ठिकाने लगा दी है और अब वह चाहते हैं कि मल्टीपल पदाधिकारी उक्त रकम का भुगतान कर दें । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन विनय गर्ग कह रहे हैं कि जहाँ जो रकम खर्च हुई है, उसका पूरा हिसाब दे कर उसकी जाँच करवा लें और भुगतान ले लें । जगदीश गुलाटी और उनके साथी बड़े नेता इसके लिए तैयार नहीं हैं; वह चाहते हैं कि वह जिस किसी को जितनी रकम देने को कहें, काउंसिल चेयरमैन विनय गर्ग बिना चूँ-चपड़ किए उतनी रकम उसे दे दें । विनय गर्ग इसके लिए तैयार नहीं हैं ।
विनय गर्ग का कहना है कि डायबिटीज प्रोजेक्ट के नाम पर जो खर्चा किया गया है और उसकी जो बिलिंग है, वह काफी संदेहास्पद है और प्रोजेक्ट की रकम में बड़ी लूट-खसोट का आभास देती है । विनय गर्ग ने यह कहते/बताते हुए मामले को खासा गंभीर बना दिया है कि प्रोजेक्ट के तहत जो उपकरण छह से आठ लाख रुपए में खरीदे दिखाए गए हैं, वह खुले बाजार में चार से पाँच लाख रुपए में उपलब्ध सुने जा रहे हैं । इसी तरह कई चीजों के खर्च अनाप-शनाप वृद्धि के साथ दिखाए/बताए गए हैं और ऐसा लगता है कि प्रोजेक्ट की रकम का एक बड़ा हिस्सा प्रोजेक्ट करने वालों ने अपनी जेबों में भर लिया है । विनय गर्ग का कहना है कि वह ऐसे किसी काम में सहभागी नहीं बनेंगे, जिसमें बेईमानी करने के आरोप लगें और लोग उन पर भी उँगलियाँ उठाएँ । विनय गर्ग ने प्रस्ताव रखा कि मल्टीपल में एक कमेटी बनाई जाए, जो खर्च हुए पैसे का वास्तविक मूल्याँकन करे - और वह जो रकम बताए, प्रोजेक्ट की रकम के अकाउंट से उसका भुगतान कर दिया जाए । प्रोजेक्ट चेयरमैन जगदीश गुलाटी और प्रोजेक्ट 'करने' में उनके सहयोगी रहे बड़े नेता इसके लिए राजी नहीं हैं । मजे की बात यह है कि उक्त प्रोजेक्ट मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के लिए ग्रांट हुआ था, लेकिन इस प्रोजेक्ट को करने में मल्टीपल के सभी डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारियों को शामिल नहीं किया गया, और मनमाने तरीके से कुछ ही लोगों ने इस प्रोजेक्ट की बंदरबाँट कर ली । प्रोजेक्ट को जल्दी से जल्दी पूरा करने की हड़बड़ी में प्रोजेक्ट पूरा करने की सामान्य प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया; जिसके चलते प्रोजेक्ट में हुए खर्च को एलसीसीआई से पैसा उधार लेकर पूरा किया गया । लायंस इंटरनेशनल के इतिहास में किसी प्रोजेक्ट को पूरा करने में ऐसी हड़बड़ी दिखाने का दूसरा उदाहरण शायद ही मिले, जिसमें प्रोजेक्ट ग्रांट की रकम आ चुकने के बावजूद - उसे खर्च करने की नियमबद्ध प्रक्रिया अपनाने की बजाए कहीं और से उधार लेकर प्रोजेक्ट का खर्च पूरा किया जाए । विवाद और झगड़ा वास्तव में इसी बात का है कि जगदीश गुलाटी और उनके साथी माँग कर रहे हैं कि ग्रांट का पैसा एलसीसीआई को दे दिया जाए, जो प्रोजेक्ट में खर्च हुआ है; विनय गर्ग कह रहे हैं कि पहली बात तो यह कि प्रोजेक्ट ग्रांट का पैसा इस तरह ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है, और दूसरी बात यह कि चलो इस बात का तो कोई तोड़ निकाल भी लिया जायेगा - लेकिन मनमाने तरीके से किए/हुए खर्च का आँख मूँद कर तो भुगतान किसी भी तरह से नहीं ही किया जा सकेगा ।
इस विवाद के लायंस इंटरनेशनल कार्यालय में पहुँच जाने से मामला थोड़ा ट्रिकी भी हो गया है । तकनीकी रूप से देखें तो तथ्य यह है कि डायबिटीज प्रोजेक्ट की ग्रांट की रकम अभी खर्च नहीं हुई है । इस तथ्य का संज्ञान लेते हुए एलसीआईएफ कार्यालय ने काउंसिल चेयरमैन विनय गर्ग को पत्र लिख कर उक्त रकम वापस करने के लिए कहा है । एलसीआईएफ कार्यालय की तरफ से लिखे पत्र में साफ कहा गया है कि उक्त ग्रांट की रकम यदि वापस नहीं की गई, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी और यह मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट को मिलने वाली ग्रांट्स पर पाबंदी के रूप में भी हो सकती है । एलसीआईएफ के इस पत्र की झूठी व्याख्या करते हुए इंटरनेशनल डायरेक्टर वीके लूथरा ने विनय गर्ग को पत्र लिख कर 'धमकाया' है कि उन्होंने यदि जल्दी ही ग्रांट का पैसा रिलीज नहीं किया, तो मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट पर पाबंदी लग जाएगी । विनय गर्ग ने उनकी इस धमकी पर कुछेक लोगों के बीच चुटकी लेते हुए कहा कि थोड़ी अंग्रेजी तो हमें भी आती है और हम भी समझ रहे हैं कि एलसीआईएफ ने मल्टीपल पर नहीं, बल्कि मल्टीपल को मिलने वाली ग्रांट्स पर पाबंदी लगाने की बात कही है । विनय गर्ग की तरफ से कहा जा रहा है कि प्रोजेक्ट के नाम पर हुए खर्च का उन्हें यदि उचित हिसाब-किताब नहीं मिला, तो वह ग्रांट की रकम एलसीआईएफ को वापस भेज देंगे । वीके लूथरा की 'स्मार्टनेस' पर विनय गर्ग द्वारा किए गए पलटवार ने जगदीश गुलाटी और ग्रांट की रकम को ठिकाने लगा चुके उनके साथियों को सांसत में डाल दिया है । उन्हें डर हुआ है कि विनय गर्ग ने यदि सचमुच ग्रांट की रकम को एलसीआईएफ को वापस कर दिया, तो फिर क्या होगा ? वीके लूथरा की धमकी का असर उल्टा पड़ने के बाद जगदीश गुलाटी और उनके संगी-साथी एक बार फिर तेजपाल खिल्लन के साथ सौदेबाजी करने का मौका बनाने की कोशिशों में जुटे हैं । तेजपाल खिल्लन चूँकि लायन लीडर के भेष में एक सौदेबाज व्यवसायी हैं - इसलिए जगदीश गुलाटी और उनके संगी-साथियों को लगता है कि तेजपाल खिल्लन से सौदेबाजी करके ही वह विनय गर्ग से भुगतान ले सकेंगे । ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि विनय गर्ग बिना उचित रिकॉर्ड मिले भुगतान न करने के अपने रवैये पर टिके/बने रहते हैं, और या जगदीश गुलाटी व तेजपाल खिल्लन के बीच होने वाली सौदेबाजी के शिकार बन जाते हैं ।
विनय गर्ग को एलसीआईएफ पदाधिकारी का पत्र :

Monday, September 25, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के गवर्नर इंद्रजीत सिंह की उनके अपने साथियों से सामने ही सौ रुपए के मुद्दे पर इंटरनेशनल डायरेक्टर वीरेंद्र लूथरा ने फजीहत कर डाली

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इंद्रजीत सिंह ने इंटरनेशनल डायरेक्टर वीरेंद्र लूथरा को आमंत्रित तो किया था डायबिटीज जागरूकता अभियान पर बोलने के लिए, लेकिन वीरेंद्र लूथरा ने तय विषय पर बोलने की बजाए वर्ष 2022 में दिल्ली में होने वाली इंटरनेशनल कन्वेंशन के खर्च के लिए प्रत्येक लायन सदस्य से सौ रुपए लिए जाने के मुद्दे पर इंद्रजीत सिंह की बुरी तरह 'धुलाई' ही कर डाली । कार्यक्रम में मौजूद जो लोग सौ रुपए लिए/दिए जाने का विरोध कर रहे हैं, उनके लिए वीरेंद्र लूथरा का एक एक शब्द दिल में शूल की तरह चुभने जैसा था - लेकिन इंद्रजीत सिंह को मनमसोस कर वीरेंद्र लूथरा की बातें सुननी पड़ी और कुछेक मौकों पर तो ताली बजा कर उनकी बात का - भले ही झूठा और मुँह दिखाऊ - समर्थन भी करना पड़ा । इंद्रजीत सिंह के लिए माहौल सचमुच बहुत ही कष्टपूर्ण और अपमानजनक रहा, तथा उनकी पीड़ा को उनके अलावा अन्य कोई समझ या महसूस नहीं ही कर पाया होगा - जिस मुद्दे पर वह डिस्ट्रिक्ट में क्लब्स के समारोहों में लगातार चीखते रहे हैं और जिन लोगों के सामने चीखते रहे हैं, उस मुद्दे पर उन्हीं लोगों के सामने इंटरनेशनल डायरेक्टर वीरेंद्र लूथरा ने जमकर उनकी ऐसी-तैसी की - और वह बेचारगी की मूरत बन चूँ तक नहीं कर पाए ।
वीरेंद्र लूथरा ने जैसे इंद्रजीत सिंह को सुनाते हुए उलाहना दिया कि लायंस इंटरनेशनल के इतिहास में पहली बार देश को और दिल्ली को इंटरनेशनल कन्वेंशन आयोजित करने का ऐतिहासिक मौका मिल रहा है, लेकिन छोटी सोच के कुछेक लोग इस मौके को यादगार बनाने में सहयोग करने की बजाए सौ रुपए जैसी मामूली रकम को मुद्दा बना रहे हैं । वीरेंद्र लूथरा ने नेपाल के लायंस सदस्यों का उदाहरण देते हुए इंद्रजीत सिंह तथा उनके संगी-साथियों को लज्जित भी किया; उन्होंने विस्तार से नेपाल में लायनिज्म के विस्तार की बात बताई और इस तथ्य को रेखांकित किया कि दिल्ली में होने वाली इंटरनेशनल कन्वेंशन को कामयाब बनाने के लिए किस तरह से वहाँ के लायंस सदस्यों ने अभी से कमर कस ली है । वीरेंद्र लूथरा ने सौ रुपए के मुद्दे पर पहले तो इंद्रजीत सिंह और उनके साथियों को जी भर कर 'जलाया' और फिर उनके जले पर नमक छिड़कते हुए यह और दावा किया कि कुछ लोग यदि सौ सौ रुपए नहीं देंगे तो क्या वह यह समझते हैं कि दिल्ली में इंटरनेशनल कन्वेंशन नहीं हो पाएगी - या अच्छे से नहीं हो पाएगी; वीरेंद्र लूथरा ने दावा किया कि दिल्ली में होनी वाली इंटरनेशनल कन्वेंशन को लेकर अपने देश में ही नहीं, बल्कि आस-पड़ोस के देशों के लायन पदाधिकारियों तथा सदस्यों तक में जैसा जोश और उत्साह है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि देश में और दिल्ली में पहली बार वर्ष 2022 में होने वाली इंटरनेशनल कन्वेंशन यादगार होगी ।
डायबिटीज जागरूकता अभियान को लेकर होने वाले कार्यक्रम में इंटरनेशनल डायरेक्टर वीरेंद्र लूथरा ने तय विषय पर बोलने की बजाए सौ रुपए के मुद्दे पर जैसी खरी-खोटी सुनाई, उससे आभास मिलता है कि यह सब उन्होंने इंद्रजीत सिंह को 'सुनाने' तथा उनकी 'धुलाई' करने के उद्देश्य से इरादतन ही किया । उल्लेखनीय है कि सौ रुपए के मुद्दे पर खुद इंद्रजीत सिंह का रवैया भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जैसा नहीं है - उनके रवैये के पीछे का उद्देश्य कुछ और ही नजर आता है । इस मुद्दे पर जैसी मुखरता और आक्रामकता वह दिखा रहे हैं, वैसी मल्टीपल का अन्य कोई डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नहीं दिखा रहा है । दरअसल यह मुद्दा डिस्ट्रिक्ट का मुद्दा है ही नहीं, यह तो मल्टीपल का मुद्दा है - डिस्ट्रिक्ट को तो मल्टीपल के फैसले का पालन भर करना है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में इंद्रजीत सिंह लेकिन क्लब्स के कार्यक्रमों में इस मुद्दे को लेकर जिस तरह की उत्तेजना भरी बातें करते रहते हैं, उससे लगता है कि जैसे उन्हें इस मुद्दे को लेकर ही गवर्नरी करनी है ।
सौ रुपए के मुद्दे पर डिस्ट्रिक्ट में इंद्रजीत सिंह द्वारा दिखाई जा रही आक्रामकता दरअसल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के चेयरमैन के रूप में विनय गर्ग की हो रही थुक्का-फजीहत से पैदा हुई बौखलाहट व खिसियाहट का नतीजा है । असल में, सौ रुपए के मुद्दे को लेकर मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के चेयरमैन के रूप में विनय गर्ग लायंस कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों के बीच पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए हैं । क्षेत्र के ग्यारह मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट्स में एक अकेला मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 ही है, जो वर्ष 2022 की इंटरनेशनल कन्वेंशन के खर्च के लिए प्रत्येक सदस्य से सौ रुपए लिए जाने के फैसले का विरोध कर रहा है । अभी हाल ही में दिल्ली में लायंस कोऑर्डीनेशन कमेटी ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों की मीटिंग हुई जिसमें मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के चेयरमैन के रूप में विनय गर्ग की इस मुद्दे पर भारी फजीहत हुई । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में भी, और खुद विनय गर्ग के अपने डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू में भी इस मामले को लेकर विनय गर्ग और इंद्रजीत सिंह को लोगों के ताने सुनने को मिल रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट के नए पदाधिकारियों का अधिष्ठापन समारोह इंद्रजीत सिंह ने अमृतसर में किया, जिसके लिए पूर्व गवर्नर्स और अपने खास खास लोगों से सात हजार रुपए तथा लायंस पदाधिकारियों से ग्यारह हजार रुपए के हिसाब से पैसे लिए - पहले तो इसी बात पर लोगों के बीच सवाल उठे कि यदि पूर्व गवर्नर्स और खास लोगों का काम सात हजार रुपए में हो गया, तो अन्य लोगों से ग्यारह हजार रुपए क्यों लिया गए; दूसरी बात यह कि इंटरनेशनल कन्वेंशन के लिए तो विनय गर्ग और इंद्रजीत सिंह को सौ रुपए भारी लग रहे हैं, और अपने काम में लोगों से हजारों रुपए बसूल कर रहे हैं ।
इस तरह की बातों के चलते मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के रूप में विनय गर्ग को दोहरी 'मार' पड़ रही है, एक तरफ तो लायंस कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इंडिया में वह पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए हैं - और दूसरी तरफ उनके अपने मल्टीपल व डिस्ट्रिक्ट में उनके और इंद्रजीत सिंह के खर्चीले आयोजनों पर सवाल उठ रहे हैं । समझा जा रहा है कि इस दोहरी मार की चोट से पैदा हुआ फ्रस्ट्रेशन ही है, जिसके चलते इंद्रजीत सिंह क्लब्स के अधिष्ठापन समारोहों में सौ रुपए के मुद्दे पर भाषणबाजी करते रहते हैं - जो वास्तव में डिस्ट्रिक्ट का नहीं, बल्कि मल्टीपल का मुद्दा है । लगता है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में इंद्रजीत सिंह की इस हरकत की जानकारी ऊपर के लायंस पदाधिकारियों को भी है - इसीलिए इंटरनेशनल डायरेक्टर वीरेंद्र लूथरा को जैसे ही मौका मिला, उन्होंने सौ रूपए के मुद्दे पर इंद्रजीत सिंह की उनके अपने साथियों के सामने ही फजीहत कर डाली, और इंद्रजीत सिंह के लिए मजबूरी की स्थिति यह बनी कि अपने लोगों के बीच अपनी ही फजीहत पर उन्हें खुद ताली भी बजानी पड़ी । जो हुआ, उससे आभास मिलता है कि सौ रुपए के मुद्दे पर मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के रूप में विनय गर्ग की और उनके सिपहसालार के रूप में इंद्रजीत सिंह की आगे अभी और किरकिरी होती रहेगी ।