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Wednesday, January 10, 2018

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री में फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवारों के चयन को लेकर दिखाए गए डीके अग्रवाल के 'डुप्लीकेट' रवैये को लेकर योगेश भसीन की नाराजगी ने डिस्ट्रिक्ट के माहौल में बदमजगी पैदा की

नई दिल्ली । फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया में डीके अग्रवाल और - पहले उनके चेले रहे लेकिन अब गुरु 'बनने' की कोशिश कर रहे - अजय बुद्धराज ने जो खेल किया है, उससे योगेश भसीन तथा उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स भड़के हुए हैं । डीके अग्रवाल और अजय बुद्धराज हालाँकि इसकी कोई परवाह करते हुए नहीं दिख रहे हैं । उनकी तरफ से कहा जा रहा है कि उन्हें पता है कि योगेश भसीन को कौन भड़का रहा है, लेकिन वह यह भी जानते हैं कि योगेश भसीन और उन्हें भड़काने वाले लोग कुछ कर नहीं पायेंगे । योगेश भसीन की शिकायत है कि पूर्व गवर्नर्स की मीटिंग में इस वर्ष और अगले वर्ष के लिए फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार का चयन होना था, और वह हुआ भी - लेकिन इस प्रक्रिया को पूर्णता तक नहीं पहुँचाया गया है । योगेश भसीन का कहना है कि उक्त प्रक्रिया को यदि पूर्णता तक पहुँचाया जाए, तो अगले वर्ष के लिए उनकी उम्मीदवारी घोषित होती है - लेकिन जिन डीके अग्रवाल पर उक्त प्रक्रिया को पूर्णता तक पहुँचाने की जिम्मेदारी है, वह चूँकि उनके प्रति निजी खुन्नस रखते हैं इसलिए उन्होंने उक्त प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया है; और कोई फैसला भी नहीं दे रहे हैं । उल्लेखनीय है कि फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवारों का चयन करने के लिए तीन जनवरी को डिस्ट्रिक्ट के दिल्ली के पूर्व गवर्नर्स की मीटिंग हुई, जिसमें 14 पूर्व गवर्नर्स ने हिस्सा लिया । मीटिंग की संचालन व्यवस्था डीके अग्रवाल के हाथ में थी, जिनकी तरफ से सभी पूर्व गवर्नर्स को आरके अग्रवाल, आनंद दुआ और योगेश भसीन के नाम लिखे कागज दिए गए - जिसमें पूर्व गवर्नर्स को तीनों नामों को अपनी पसंद के अनुसार वरीयता क्रम देने थे । फिर यह कागज वापस डीके अग्रवाल के पास पहुँचने थे, और उन्हें प्रत्येक उम्मीदवार को मिले वोटों की गणना करके इस वर्ष और अगले वर्ष के लिए उम्मीदवार की घोषणा करना थी । गणना करके डीके अग्रवाल ने इस वर्ष के लिए आरके अग्रवाल को और अगले वर्ष के लिए आनंद दुआ को उम्मीदवार घोषित किया ।
योगेश भसीन के अनुसार, यहाँ तक तो सब ठीक हुआ - लेकिन डीके अग्रवाल का असली रंग इसके बाद देखने को मिला । योगेश भसीन का कहना है कि फैसला सुनने के बाद आनंद दुआ ने तुरंत मौके पर ही चूँकि अगले वर्ष उम्मीदवार होने से साफ इंकार कर दिया, इसलिए अगले वर्ष उम्मीदवार बनने का मौका उन्हें मिलना चाहिए था । डीके अग्रवाल ने लेकिन ऐसा करने में कोई दिलचस्पी नहीं ली । अजय बुद्धराज ने आनंद दुआ को विचार करने के लिए चौबीस घंटे का समय देने की बात कही । योगेश भसीन ने इसे भी स्वीकार कर लिया था । उनका कहना है कि आनंद दुआ को विचार करने के लिए दिए गए चौबीस घंटों को बीते हुए भी अब तो डेढ़ सौ घंटे से भी ऊपर हो गए हैं, आनंद दुआ ने लेकिन अपना फैसला बदलने की घोषणा नहीं की है - फिर भी डीके अग्रवाल तीन जनवरी की मीटिंग की प्रक्रिया को पूर्ण करते हुए अगले वर्ष के उम्मीदवार के रूप में उनके नाम की घोषणा नहीं कर रहे हैं । योगेश भसीन के दावे और उनकी माँग का समर्थन करते हुए एक पूर्व गवर्नर ने बताया कि इसी तरह का दोहरा रवैया अपनाने के कारण बड़े नेताओं ने डीके अग्रवाल का नाम 'डुप्लीकेट कुमार' रखा हुआ है । डीके अग्रवाल का पूरा नाम दरअसल धीरज कुमार अग्रवाल है, जिसे बिगाड़ कर कुछेक बड़े नेताओं ने डुप्लीकेट कुमार अग्रवाल किया हुआ है । योगेश भसीन का दावा यह भी है कि तीन जनवरी की मीटिंग में उपस्थित हुए पूर्व गवर्नर्स से उनकी जो अलग अलग बात हुई है, उसके अनुसार आठ/नौ पूर्व गवर्नर्स ने अगले वर्ष के उम्मीदवार के रूप में उन्हें वोट दिया था; इस आधार पर उनका गंभीर आरोप यह भी है कि डीके अग्रवाल ने वोटों की गिनती में भी धोखाधड़ी की है ।
योगेश भसीन और उनके समर्थक - और या उन्हें भड़काने में लगे - पूर्व गवर्नर्स अजय बुद्धराज के रवैये पर और भी ज्यादा खफा हैं । खफा होने का कारण अजय बुद्धराज की योगेश भसीन के स्वास्थ्य को लेकर की गई टिप्पणी है । तीन जनवरी की मीटिंग में अगले वर्ष के लिए आनंद दुआ के इंकार के बाद जब योगेश भसीन अपनी उम्मीदवारी घोषित किये जाने की माँग कर रहे थे, तब अजय बुद्धराज ने यह कहते हुए उन्हें हतोत्साहित किया कि आपके कमजोर स्वास्थ्य को देखते हुए आपकी उम्मीदवारी पर फैसला करना अभी उचित नहीं होगा । यह सुनकर योगेश भसीन भड़क गए और उन्होंने अजय बुद्धराज से पूछा कि मेरे स्वास्थ्य का हाल पूछने कितनी बार मेरे यहाँ आए हो - जो अब मेरे स्वास्थ्य की चिंता कर रहे हो । योगेश भसीन के स्वास्थ्य को मुद्दा बनाने की अजय बुद्धराज की कोशिश को लेकर अन्य कुछेक पूर्व गवर्नर्स ने भी अपनी नाराजगी व्यक्त की । उनका कहना रहा कि योगेश भसीन अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से जब उनके यहाँ महँगी घड़ी का गिफ्ट लेकर आए थे, तब अजय बुद्धराज ने उनसे क्यों नहीं कहा कि आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं है और अब आपको उम्मीदवारी के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए । उल्लेखनीय है कि उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले योगेश भसीन दिल्ली के सभी पूर्व गवर्नर्स के यहाँ महँगी घड़ी का गिफ्ट लेकर गए थे; उनके अनुसार, जिस पर उन्होंने दो/ढाई लाख रुपए खर्च किए । योगेश भसीन के समर्थक पूर्व गवर्नर्स का कहना है कि महँगा गिफ्ट लेने के बावजूद अजय बुद्धराज को योगेश भसीन की उम्मीदवारी का समर्थन नहीं करना था, तो न करते - उसमें शिकायत की कोई बात नहीं है; लेकिन योगेश भसीन के स्वास्थ्य को मुद्दा बनाने का उनका प्रयास बहुत ही अशोभनीय, अमानवीय व आपत्तिजनक है ।
योगेश भसीन और उनके समर्थकों की नाराजगीभरी बातें डीके अग्रवाल और अजय बुद्धराज तक भी पहुँची हैं । दोनों ही लेकिन उनकी बातों की परवाह करते हुए नहीं नजर आ रहे हैं । गिफ्ट की बात पर अजय बुद्धराज की तरफ से कहा/सुना गया है कि उन्होंने - या अन्य किसी ने भी योगेश भसीन से गिफ्ट माँगा था क्या; अब वह क्यों बखान कर रहे हैं कि उन्होंने कितना महँगा गिफ्ट दिया और उस पर कितने रुपए खर्च किए । डीके अग्रवाल और अजय बुद्धराज की तरफ से कहा/सुना जा रहा है कि उन्हें पता है कि योगेश भसीन को भड़का कर, उनकी आड़ में कौन क्या राजनीति कर रहा है - लेकिन इससे कुछ होगा नहीं । लोगों का कहना लेकिन यह है कि डीके अग्रवाल और अजय बुद्धराज का यह विश्वास हो सकता है कि सही साबित हो कि योगेश भसीन व उनके समर्थक होने का दिखावा करने वाले पूर्व गवर्नर्स की बातों से कुछ होगा नहीं - लेकिन उनकी बातों ने लोगों के बीच डीके अग्रवाल व अजय बुद्धराज के पक्षपातपूर्ण तथा दोहरे रवैये को बेनकाब करने का काम तो किया ही है; और इससे डिस्ट्रिक्ट में बदमजगी तो पैदा हुई ही है ।

Tuesday, December 12, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री में आनंद दुआ के नाम पर बिछाई जा रही दिल्ली के पाँच सदस्यीय गुट की राजनीतिक बिसात को सुरेश बिंदल और केएल खट्टर की मिलीजुली चाल ने सचमुच पलट दिया है क्या ?

नई दिल्ली । आनंद दुआ की परेशानी और बेचैनी यह देख/जान कर बढ़ती जा रही है कि फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की उम्मीदवारी के लिए संपर्क अभियान शुरू कर देने के बाद भी उनके समर्थक नेता उनकी उम्मीदवारी को हरी झंडी नहीं दे रहे हैं, जिसके चलते उनकी उम्मीदवारी का मामला उलझता ही जा रहा है । आनंद दुआ ने अपने नजदीकियों से यह कहते/बताते हुए अपना संपर्क अभियान शुरू किया था कि दिल्ली के पाँच पूर्व गवर्नर्स - डीके अग्रवाल, दीपक तलवार, अजय बुद्धराज, अरुण पुरी और दीपक टुटेजा - के गुट ने उनकी उम्मीदवारी को समर्थन घोषित करने का भरोसा उन्हें दिया है । दरअसल इस भरोसे के बाद ही आनंद दुआ ने अपनी उम्मीदवारी के लिए संपर्क अभियान शुरू किया था । आनंद दुआ के नजदीकियों का कहना/बताना है कि उक्त पाँच पूर्व गवर्नर्स ने आनंद दुआ की उम्मीदवारी का झंडा उठाने का फैसला कर लिया है, और अपने इस फैसले की घोषणा सार्वजनिक करने के लिए वह बस 'उचित समय' का इंतजार कर रहे हैं । 'उचित समय' का इंतजार लेकिन जिस तरह से बढ़ता जा रहा है, उसे 'देख' कर आनंद दुआ की बेचैनी और परेशानी बढ़ने लगी है । उनके नजदीकियों ने भी उनसे पूछना शुरू कर दिया है कि जिन पूर्व गवर्नर्स ने उन्हें समर्थन देने का भरोसा दिया था, वह कहीं उनका पोपट तो नहीं बना रहे हैं । इस गुट का समर्थन पाने के लिए योगेश भसीन द्वारा शुरू की गई कोशिशों को तथा योगेश भसीन की कोशिशों के शुरू होने के बाद गुट के नेताओं के बदले हुए तथा टालमटोल वाले रवैये को देखते हुए आनंद दुआ का माथा ठनका है और वह असमंजस में पड़ गए हैं ।
आनंद दुआ के नजदीकियों के अनुसार, आनंद दुआ की उम्मीदवारी का झंडा उठाने का वायदा करने वाले पूर्व गवर्नर्स अपना वायदा पूरा करने के लिए तैयार तो हैं, लेकिन वह इस बात से डरे हुए भी हैं कि चुनाव की नौबत आने पर आनंद दुआ कहीं मैदान तो नहीं छोड़ जायेंगे - और इस तरह कहीं उनकी फजीहत तो नहीं करा बैठेंगे ? इसी डर के कारण दिल्ली के उक्त पाँच पूर्व गवर्नर्स का गुट वायदा करने के बावजूद आनंद दुआ की उम्मीदवारी को अपने समर्थन की घोषणा करने से अभी बच रहा है । दरअसल सुरेश बिंदल की राजनीतिक चाल और हरियाणा में मची उथल-पुथल ने उन्हें बचाव की मुद्रा में ला दिया है । उल्लेखनीय है कि अभी करीब दस दिन पहले तक दिल्ली में उम्मीदवारों का जो राजनीतिक समीकरण था, वह दिल्ली के उक्त पाँच पूर्व गवर्नर्स के गुट के अनुकूल था । आनंद दुआ और आरके अग्रवाल के रूप में जिन दो उम्मीदवारों को सशक्त उम्मीदवारों के रूप में देखा/पहचाना जा रहा था, वह इस गुट के भरोसे ही आगे कदम बढ़ाने का संकेत दे चुके थे । इस गुट के नेताओं को जिन सुरेश बिंदल से चुनौती मिलने का डर था, उन सुरेश बिंदल ने आरके अग्रवाल की उम्मीदवारी के प्रति अपनी नापसंदगी जाहिर कर दी थी - जिसके बाद उक्त गुट ने आनंद दुआ की उम्मीदवारी को हरी झंडी देने का फैसला कर लिया था । इस फैसले के तहत ही आनंद दुआ को सक्रिय होने की सलाह दी गई, और आनंद दुआ ने भी अपने आप को उम्मीदवार मानते हुए संपर्क अभियान शुरू कर दिया । आनंद दुआ और उन्हें उम्मीदवार बनाने का फैसला करने वाले पाँच पूर्व गवर्नर्स के गुट को विश्वास था कि दिल्ली में कोई भी पूर्व गवर्नर आनंद दुआ की उम्मीदवारी का विरोध नहीं करेगा, और उस स्थिति में कोई दूसरा उम्मीदवार अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत नहीं करेगा - इसलिए फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए आनंद दुआ को रास्ता पूरी तरह साफ मिलेगा ।
लेकिन सुरेश बिंदल की राजनीतिक चाल ने आनंद दुआ और उनकी उम्मीदवारी का झंडा उठाने को तैयार बैठे पाँच पूर्व गवर्नर्स के गुट की तैयारी को झटका दे दिया । आरके अग्रवाल की उम्मीदवारी के प्रति नापसंदगी जाहिर करने के बावजूद, आरके अग्रवाल की उम्मीदवारी को समर्थन देने के क्लब के फैसले का वास्ता देकर सुरेश बिंदल ने आरके अग्रवाल की उम्मीदवारी का झंडा उठाने का संकेत देकर उक्त गुट को आनंद दुआ की उम्मीदवारी की घोषणा करने से पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया । दरअसल उक्त गुट के नेताओं को यह भरोसा नहीं है कि चुनाव की स्थिति आने पर भी आनंद दुआ उम्मीदवार बने रहेंगे, और चुनाव लड़ने को तैयार होंगे ? आरके अग्रवाल की उम्मीदवारी को लेकर सुरेश बिंदल ने यदि पलटी मारी है, तो इसे एक बड़ी राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । सुरेश बिंदल के चूँकि हरियाणा की राजनीति की कमान सँभाले बैठे केएल खट्टर के साथ नजदीकी संबंध हैं, इसलिए आशंका व्यक्त की जा रही है कि आरके अग्रवाल को लेकर सुरेश बिंदल ने जो चाल चली है - कहीं सुरेश बिंदल और केएल खट्टर की मिलीजुली चाल तो नहीं है ? हरियाणा में हरदीप सरकारिया की उम्मीदवारी को लेकर जो बवाल मचा हुआ है, केएल खट्टर को उसके पीछे दिल्ली के उक्त पाँच सदस्यीय गुट का हाथ दिखता है - इसलिए भी दिल्ली की राजनीति में केएल खट्टर के नाक घुसाने को बदला लेने की करवाई के रूप में देखा/समझा जा रहा है । इससे डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति एक बड़ी लड़ाई की तरफ बढ़ती दिख रही है । दिल्ली के उक्त पाँच सदस्यीय गुट को राजनीतिक लड़ाई लड़ने में तो परहेज नहीं है, राजनीतिक लड़ाई में उसे अपना पलड़ा भारी ही नजर आ रहा है - लेकिन उस लड़ाई के लिए जो 'ईंधन' चाहिए होगा, आनंद दुआ की तरफ से उसकी 'सप्लाई' को लेकर वह आशंकित हैं । इसी आशंका के चलते उन्होंने फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए आनंद दुआ की उम्मीदवारी को समर्थन देने की घोषणा को रोक दिया है ।
आनंद दुआ की उम्मीदवारी का झंडा उठाने को तैयार बैठे दिल्ली के पाँच सदस्यीय गुट के लिए बदकिस्मती की बात यह रही कि हरदीप सरकारिया की उम्मीदवारी को लेकर हरियाणा में जो उबाल आ रहा था, वह ठंडा पड़ता दिख रहा है; पाँच सदस्यीय गुट के नेताओं को उम्मीद थी कि उक्त उबाल के कारण केएल खट्टर उनके सामने समर्पण करेंगे और उनके साथ जुड़ेंगे, केएल खट्टर ने लेकिन सुरेश बिंदल के साथ जुड़ने को महत्ता दी है । इससे दिल्ली के पाँच सदस्यीय गुट को अपनी राजनीति फेल होती हुई नजर आ रही है । मजे की बात यह है कि जमीनी स्थिति अभी भी उनके अनुकूल है; हरियाणा में लोग हरियाणा की लीडरशिप के फैसले के खिलाफ बगावत करने को तैयार बैठे हैं, और इसके लिए दिल्ली के उक्त पाँच सदस्यीय गुट के इशारे का इंतजार कर रहे हैं - दिल्ली में भी बाकी नेताओं के बीच चूँकि बिखराव की स्थिति है, इसलिए इस गुट के पास समर्थन जुटाने का अच्छा मौका है । लेकिन इन नेताओं को ही यह भी लग रहा है कि इस अच्छे मौके को हथियाने/पाने के लिए जो कसरत करना पड़ेगी, वह आनंद दुआ के भरोसे/सहारे नहीं सकती है । ऐसे में, लगता है कि दिल्ली का पाँच सदस्यीय गुट अपने ही बिछाए राजनीतिक जाल में खुद फँस गया है । इस स्थिति में योगेश भसीन को अपने लिए मौका नजर आया है; उन्हें लगा है कि अपने आप को मुसीबत से बचाने/निकालने के लिए दिल्ली का उक्त पाँच सदस्यीय गुट शायद उन्हें ही सहारा बना ले - इसलिए योगेश भसीन ने फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए अपनी सक्रियता दिखा/बढ़ा कर अपनी तरफ से सहारा बनने का संकेत दे दिया है । योगेश भसीन की सक्रियता ने आनंद दुआ तथा उनके नजदीकियों को और चिंतित कर देने के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के ताने-बाने को और दिलचस्प बना दिया है ।