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Sunday, October 16, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में अपनी फजीहत का बदला लेने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी विनय भाटिया ने अपने ही क्लब में अध्यक्ष अनिल मग्गू के खिलाफ बबाल करवाया

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी विनय भाटिया अपने ही क्लब - रोटरी क्लब फरीदाबाद एनआईटी के अध्यक्ष अनिल मग्गू के खिलाफ षड्यंत्र करने/रचने तथा उन्हें अध्यक्ष पद से हटवाने की मुहिम चलवाने के आरोपों में 'पकड़े' गए हैं - और इस पकड़ से छूटने के चक्कर में उन्हें अपने ही क्लब के सदस्यों से बचना/छिपना पड़ रहा है । उनके इस रवैये से क्लब में घमासान और बढ़ गया है । रोटरी क्लब फरीदाबाद एनआईटी के कुछेक सदस्य पिछले करीब पंद्रह दिन से क्लब के सदस्यों के बीच तथा सोशल मीडिया पर क्लब के अध्यक्ष अनिल मग्गू के खिलाफ इस बात को लेकर अभियान चलाए हुए हैं कि उन्होंने अध्यक्ष पद से जब इस्तीफ़ा दे दिया है, तब फिर वह अध्यक्ष के रूप में काम/व्यवहार क्यों कर रहे हैं ? अनिल मग्गू की तरफ से भी इस अभियान का जोरदार जबाव दिया जा रहा है, और चुनौती दी जा रही है कि जिन लोगों को लगता है कि अनिल मग्गू अब क्लब के अध्यक्ष नहीं हैं - वह हिम्मत दिखाएँ और क्लब का नया अध्यक्ष चुन/चुनवा लें, फालतू की बयानबाजी क्यों कर रहे हैं ? दोनों तरफ की बयानबाजियों में क्लब की गतिविधियों के गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं, और एक दूसरे की पोल-पट्टी खोली जा रही है । इस सीन में लेकिन असली पोल-पट्टी विनय भाटिया की खुल रही है - जो इस क्लब के एक प्रमुख सदस्य होने के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी भी हैं । क्लब में मचे घमासान से दुखी क्लब के सदस्यों का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट का लीडर होने जा रहे विनय भाटिया के सामने जब क्लब में अपनी लीडरशिप क्षमता दिखाने का मौका आया है, तो वह मुँह छिपाते फिर रहे हैं; इससे समझा जा सकता है कि डिस्ट्रिक्ट में वह क्या करेंगे ?
विनय भाटिया पर इससे भी गंभीर आरोप यह है कि क्लब में मचे इस घमासान की जमीन उन्होंने ही तो तैयार की, और फिर उसे हवा भी दी - घमासान लेकिन चूँकि उनकी योजनानुसार नहीं चला, तो अब वह इससे मुँह चुरा रहे हैं । मामला रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के एक कार्यक्रम में विनय भाटिया के क्लब के को-होस्ट बनने को लेकर था । साऊथ वेस्ट के पदाधिकारियों ने इसके लिए विनय भाटिया से संपर्क किया था । विनय भाटिया की एक बड़ी खूबी यह बताई जाती है कि उनसे किसी काम के लिए कहो, तो वह कभी भी मना नहीं करेंगे; लेकिन उस काम की जिम्मेदारी तुरंत किसी दूसरे के सिर मढ़ देंगे - काम हो जायेगा, तो अपनी पीठ थपथपायेंगे; और यदि नहीं हो पायेगा, तो जिसके सिर मढ़ा था उसे जिम्मेदार ठहरा देंगे । इस मामले में भी यही हुआ । रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के पदाधिकरियों ने कहा, तो विनय भाटिया ने तुरंत अपने क्लब के को-होस्ट बनने के लिए हामी भर दी - और इस काम को करने की जिम्मेदारी उन्होंने क्लब के अध्यक्ष अनिल मग्गू को सौंप दी । अनिल मग्गू ने यह जिम्मेदारी ले तो ली, लेकिन उन्होंने विनय भाटिया से कहा कि को-होस्ट बनने के लिए जो पैसे देने होंगे, उसके लिए क्लब के लोगों को राजी करने का काम विनय भाटिया करें । विनय भाटिया लेकिन चूँकि काम नहीं करते हैं, वह सिर्फ काम का श्रेय लेते हैं - इसलिए उन्होंने कुछ नहीं किया और फलस्वरूप रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के पदाधिकारियों के साथ किया गया उनका वायदा पूरा नहीं हो सका । स्वाभाविक रूप से, इससे विनय भाटिया की भारी फजीहत हुई । अपनी इस फजीहत के लिए उन्होंने अपने क्लब के अध्यक्ष अनिल मग्गू को जिम्मेदार ठहराया ।
इसी के साथ अनिल मग्गू के लिए क्लब में मुसीबतें शुरू हुईं । समझा जाता है कि विनय भाटिया की शह पर कुछेक लोगों ने अनिल मग्गू के सामने तरह तरह की अड़चने खड़ी करना शुरू कर दिया । इससे परेशान हो कर अनिल मग्गू ने गुस्से में कहीं अध्यक्ष पद छोड़ने की बात कर/कह दी । क्लब में विनय भाटिया के चेलों के इससे हौंसले और बुलंद हो गए । अब वह अनिल मग्गू की गतिविधियों पर सवाल उठाने लगे । उनका कहना रहा कि अनिल मग्गू ने जब अध्यक्ष पद छोड़ दिया है, तो वह अध्यक्ष के रूप में काम/व्यवहार क्यों कर रहे हैं ? अनिल मग्गू के नजदीकियों ने जब देखा कि कुछेक लोगों की बद्तमीज़ियाँ बढ़ती ही जा रही हैं, तो उन्होंने भी कार्रवाई करते हुए जबाव देना शुरू किया । उनका कहना रहा कि गुस्से में कही गई बात को आधार बना कर कुछेक लोग यदि अनिल मग्गू को अध्यक्ष पद से हटाना/हटवाना चाहते हैं, तो वह भी देखते हैं कि उनके मंसूबे कैसे पूरे होते हैं ? दोनों तरफ के रवैये के चलते क्लब में भारी घमासान मच गया है और तरह तरह की बातों के जरिये कीचड़-उछाल कार्यक्रम चल पड़ा है । इस सारे प्रसंग का दिलचस्प पहलू लेकिन यह है कि विनय भाटिया पता नहीं कहाँ छुप बैठ कर तमाशा देख रहे हैं । क्लब के सदस्यों को उम्मीद थी कि विनय भाटिया डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी के रूप में अपनी जिम्मेदारी समझते हुए मामले में हस्तक्षेप करेंगे तथा मामले को बिगड़ने से बचायेंगे; लेकिन वह तो मामले से ऐसे दूर बने हुए हैं, जैसे कि उन्हें तो इससे कुछ लेना-देना ही नहीं है ।
विनय भाटिया के रवैये से हतप्रभ व निराश क्लब के सदस्यों ने क्लब ट्रेनर संदीप गोयल से गुहार लगाई है कि दोनों तरफ के कुछेक लोगों ने जिस तरह से क्लब में अराजकता-सी फैलाई हुई है, उसे नियंत्रित करने के लिए वही कुछ करें । पूर्व अध्यक्ष संदीप गोयल क्लब के वरिष्ठ और सक्रिय सदस्य हैं, तथा उनका अध्यक्ष-काल ऐसा उल्लेखनीय रहा था कि डिस्ट्रिक्ट के कई प्रमुख लोगों का ध्यान उन पर गया था । वास्तव में उनके अध्यक्ष-काल में ही रोटरी क्लब फरीदाबाद एनआईटी की पहचान डिस्ट्रिक्ट में बढ़ी थी, जिसका फायदा विनय भाटिया के चुनाव में मिला था । विनय भाटिया के चुनाव में फरीदाबाद के जिन कुछेक लोगों ने निर्णायक भूमिका निभाई थी, संदीप गोयल उनमें एक हैं । संदीप गोयल से कहा जा रहा है कि वह क्लब में यदि शांति स्थापित करवायेंगे, तो यह उनकी तरफ से विनय भाटिया की एक और मदद होगी । क्लब के सदस्यों ने संदीप गोयल से गुहार लगाई है कि क्लब में जो बबाल मचा है, उसे थामने तथा क्लब के सदस्यों के बीच पहले जैसा परस्पर सहयोग व सौहार्द बनाये रखने का उपाय करें । क्लब में कुछेक सदस्यों ने लेकिन जिस तरह की गर्मी पैदा की हुई है, उसे देखते हुए संदीप गोयल से की जा रही गुहार संदीप गोयल के लिए खासी बड़ी चुनौती है । विनय भाटिया ने क्लब में जो आग लगाई है, संदीप गोयल सचमुच उसे बुझा सकेंगे, या नहीं - यह देखना दिलचस्प होगा ।

Friday, October 2, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत विनय भाटिया की उम्मीदवारी की लगाम विनोद बंसल से छीनने की रवि चौधरी की कोशिशों ने विनय भाटिया के चुनाव अभियान को फजीहत में फँसाया

नई दिल्ली । विनय भाटिया की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी के अभियान की बागडोर विनोद बंसल के हाथ में आने के बाद से रवि चौधरी की बढ़ी सक्रियता ने विनय भाटिया के समर्थकों के बीच एक दिलचस्प किस्म की होड़ को जन्म दिया है । विनय भाटिया की उम्मीदवारी के एक बड़े समर्थक का कहना है कि विनय भाटिया के समर्थक नेता विनय भाटिया को समर्थन दिलवाने से ज्यादा विनय भाटिया की जीत का श्रेय 'लेने' के लिए काम कर रहे हैं । संदर्भ के साथ फिट बैठ रही कहावत 'सूत न कपास, जुलाहों में लठ्ठम-लठ्ठा' को याद करते हुए कहा कि विनय भाटिया की चुनावी जीत का अभी कोई अतापता नहीं है, किंतु उनकी जीत का श्रेय लेने के लिए उनके समर्थक नेताओं में होड़ जरूर मच गई है । उल्लेखनीय है कि विनय भाटिया की उम्मीदवारी की बागडोर पहले दीपक तलवार और सुशील खुराना के हाथ में थी, लेकिन जो अब विनोद बंसल के हाथों में नजर आ रही है । पिछले दिनों फरीदाबाद में विनय भाटिया और उनके समर्थकों के प्रयत्नों से पहले विनोद बंसल और फिर विन्स की डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर के नाते संगीता बंसल के जो कार्यक्रम हुए, उससे सुशील खुराना तथा दीपक तलवार का माथा ठनका; और उन्हें लगा कि विनय भाटिया कहीं विनोद बंसल के 'आदमी' तो नहीं बन गए । विनय भाटिया को विनोद बंसल के कब्जे से बचाने के लिए सुशील खुराना तथा दीपक तलवार ने अपने 'दूत' रवि चौधरी की ड्यूटी लगाई है । ड्यूटी निभाने की कोशिश करते रवि चौधरी को विनय भाटिया की उम्मीदवारी के लिए सबसे ज्यादा सक्रिय देखा जा रहा है । 
रवि चौधरी अपनी सक्रियता में लेकिन विनय भाटिया के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश करने की बजाये यह जताने/दिखाने का ज्यादा प्रयास कर रहे हैं कि  डिस्ट्रिक्ट में और खास कर दिल्ली में तो उनकी इतनी चलती है कि विनय भाटिया को तो वह घर बैठे ही चुनाव जितवा देंगे । इस तरह के दावों के जरिये वह वास्तव में विनोद बंसल को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं । विनय भाटिया की उम्मीदवारी को समर्थन दिलवाने के लिए पिछले दिनों विनोद बंसल खासे सक्रिय हुए हैं; और इस सक्रियता में उन्होंने अपने गवर्नर-काल के क्लब-अध्यक्षों के साथ मीटिंग्स की हैं । विनोद बंसल की इस रणनीति को बेकार की कार्रवाई बताते हुए रवि चौधरी ने कुछेक जगह कहा/बताया है कि विनोद बंसल के गवर्नर-काल के क्लब अध्यक्ष तो नोमीनेटिंग कमेटी के लिए अधिकृत ही नहीं होंगे; ऐसे में उनके साथ मीटिंग करके क्या मिलेगा ? विनोद बंसल के प्रति रवि चौधरी के इस विरोधी रवैये ने उन लोगों को चौंकाया है, जो जानते हैं कि रवि चौधरी के दोनों चुनावों में विनोद बंसल ने उनकी खासी मदद की थी; और उस मदद के चलते ही दोनों के बीच अच्छे संबंध रहे हैं । रवि चौधरी का विनोद बंसल के प्रति रवैया अब लेकिन यदि बदला हुआ लग रहा है, तो लोगों के बीच इसका कारण यही समझा जा रहा है कि रवि चौधरी ऐसा सुशील खुराना और दीपक तलवार की ड्यूटी जोरशोर से बजाने की कोशिश में कर रहे हैं । 
इस कोशिश में रवि चौधरी को चूँकि 'नेता' बनने का मौका भी दिख रहा है, इसलिए रवि चौधरी अपनी इस कोशिश को जोरशोर से लागू करने में लग गए हैं । रवि चौधरी अपना चुनाव भले ही दूसरी बार में बहुत मुश्किलों से जीते हों, लेकिन उन्हें यह दावा करने में कोई हिचक/संकोच नहीं है कि विनय भाटिया को तो वह घर बैठे ही चुनाव जितवा देंगे । दरअसल डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी बनने के बाद रवि चौधरी पर 'गॉडफादर' बनने का जो भूत सवार हुआ है, उसे सुशील खुराना और दीपक तलवार की शह ने और हवा दी है । रवि चौधरी की बदकिस्मती लेकिन यह है कि उन्हें कोई भी गंभीरता से नहीं लेता दिख रहा है । अपने ही क्लब के अशोक कंतूर को लेकर वह कई जगह शिकायत कर चुके हैं कि अशोक कंतूर उनकी सुन ही नहीं रहे हैं । उल्लेखनीय है कि अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की अशोक कंतूर द्वारा जाहिर की गई इच्छा को जानते हुए रवि चौधरी ने उन्हें इस वर्ष से सक्रियता दिखाने का सुझाव दिया है । अशोक कंतूर लेकिन उनके सुझाव पर कोई ध्यान देते हुए नहीं दिखे हैं । अशोक कंतूर ने कुछेक लोगों से कहा है कि वह रवि चौधरी के कहने से थोड़े ही अपनी संभावित उम्मीदवारी के लिए काम करना शुरू कर देंगे; वह बड़े नेताओं की सलाह से ही कुछ करेंगे । विनय भाटिया और उनके समर्थक भी दिल्ली में समर्थन जुटाने के लिए विनोद बंसल पर ज्यादा निर्भर हैं, और उन्हीं को तवज्जो दिए हुए हैं । 
विनय भाटिया की उम्मीदवारी की बागडोर विनोद बंसल के हाथ में वास्तव में आई ही इसलिए क्योंकि विनय भाटिया का पूरा प्रचार अभियान बहुत ही फूहड़ तरीके से चलता हुआ देखा जा रहा था, जिसमें हुड़दंगबाजी ज्यादा थी; और जिस कारण विनय भाटिया की उम्मीदवारी के प्रति लोगों के बीच नकारात्मक भाव बन रहा था । विनय भाटिया की उम्मीदवारी के जो ईमानदार टाइप के समर्थक हैं, उन्होंने ही इस बात को पहचाना तथा रेखांकित किया कि विनय भाटिया के प्रचार अभियान में यदि मैच्योरिटी नहीं आई तो उनकी उम्मीदवारी के लिए हो रहा सारा शोरशराबा ही उनका कबाड़ा कर देगा । इसी सोच के चलते विनोद बंसल की शरण ली गई । विनोद बंसल यूँ तो विनय भाटिया की उम्मीदवारी के शुरू से ही समर्थक रहे हैं; विनय भाटिया के नजदीकियों का तो कहना है कि विनय भाटिया को उम्मीदवार बनने के लिए प्रेरित ही विनोद बंसल ने किया था - लेकिन विनय भाटिया की उम्मीदवारी के प्रति समर्थन दिखाने के हुड़दंग में उनकी कोई भूमिका नहीं थी । विनय भाटिया की उम्मीदवारी की बागडोर विनोद बंसल के हाथ में आई, तो विनोद बंसल ने उम्मीदवारी के अभियान को जिम्मेदार बनाने का काम हाथ में लिया और एक उम्मीदवार के रूप में विनय भाटिया का मैकोवर करने का प्रयास शुरू किया । इस संदर्भ में फरीदाबाद के लोगों के साथ हुई उनकी मीटिंग की बड़ी चर्चा हुई । रोटरी क्लब फरीदाबाद एनआईटी द्वारा आयोजित सेमीनार में संगीता बंसल द्वारा दिए प्रेजेंटेशन को भी विनोद बंसल के चुनावी प्रयासों के रूप में देखा/पहचाना गया । उनके इन प्रयासों ने लेकिन विनय भाटिया की उम्मीदवारी के दूसरे समर्थक-नेताओं को भड़का दिया है । उन्हें डर हुआ है कि विनोद बंसल कहीं विनय भाटिया की उम्मीदवारी के अभियान को अकेले ही न हथिया लें ? विनोद बंसल को काबू में करने/रखने के लिए रवि चौधरी की ड्यूटी लगा तो दी गई है; किंतु रवि चौधरी द्वारा ड्यूटी निभाने के तहत की जा रही गतिविधियों से विनय भाटिया का चुनाव अभियान फजीहत में और जा फँसा है ।

Monday, July 27, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में रवि दयाल के क्लब के अधिष्ठापन समारोह की सफलता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में विनय भाटिया के लिए समस्या और चुनौती बनी

नई दिल्ली । रवि दयाल के क्लब - रोटरी क्लब दिल्ली मेगापोलिस के नए पदाधिकारियों के अधिष्ठापन समारोह में डिस्ट्रिक्ट के प्रमुख लोगों की जुटी भीड़ ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत रवि दयाल की उम्मीदवारी का 'वजन' बढ़ाने का काम तो किया ही है - साथ ही उनके संभावित प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवार विनय भाटिया के लिए खासी मुसीबत भी खड़ी कर दी है । हुआ दरअसल यह कि रवि दयाल के क्लब के अधिष्ठापन समारोह का जलवा देख कर लोगों के बीच चर्चा छिड़ी कि विनय भाटिया के क्लब - रोटरी क्लब फरीदाबाद एनआईटी में अधिष्ठापन समारोह कब होगा । इस बारे में पक्की जानकारी तो किसी के पास नहीं थी, किंतु अधिकतर लोगों ने एक बात यह बताई कि विनय भाटिया अपने क्लब का अधिष्ठापन समारोह सितंबर माह के अंत में करने की सोच रहे हैं । इसका कारण वह यह बता रहे हैं कि तब तक क्लब्स में नोमीनेटिंग कमेटी के सदस्यों के नाम तय हो जायेंगे और वह अधिष्ठापन समारोह में उन्हें भी खिला-'पिला' कर खुश कर लेंगे । यह जो 'कारण' सामने आया - उसने लेकिन एक उम्मीदवार के रूप में विनय भाटिया की किरकिरी कर दी । कई लोगों का कहना रहा कि देर से अधिष्ठापन समारोह करने का जो कारण विनय भाटिया बता रहे हैं - उसके जरिए वास्तव में वह यह दिखा/जता रहे हैं कि उन्हें न तो अधिष्ठापन समारोह की जरूरत व गरिमा का पता है, और न नोमीनेटिंग कमेटी के लिए चुने जाने वाले सदस्यों की इज्जत की परवाह है । लोगों का मानना और कहना है कि एक उम्मीदवार के रूप में विनय भाटिया की यह सोच ही उनकी उम्मीदवारी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है । 
उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार के रूप में विनय भाटिया को सबसे ज्यादा आलोचना अपने अपरिपक्व और बचकाने किस्म के व्यवहार के कारण ही झेलनी पड़ रही है । उनकी उम्मीदवारी के कई समर्थक व शुभचिंतक भी मानते/कहते हैं कि अपने व्यवहार के कारण विनय भाटिया अपने खेमे के लोगों का समर्थन भी खोते जा रहे हैं, लेकिन फिर भी कोई सबक नहीं सीख रहे हैं । उनके कुछेक समर्थकों ने बताया कि उन्होंने विनय भाटिया को जब समझाया, तो ऐसा लगा कि जैसे विनय भाटिया हालात की नाजुकता को समझ रहे हैं और एक उम्मीदवार के अनुरूप अपने आप को बदलने के लिए तैयार कर रहे हैं - लेकिन फिर देखने में आता है कि मामला जहाँ का तहाँ ही बना हुआ है । विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थक उनके व्यवहार से लोगों के बीच पड़ रहे नकारात्मक असर से निपटने का तरीका तो अभी खोज नहीं पाए हैं; कि उनके क्लब के अधिष्ठापन समारोह को लेकर मजाक और शुरू हो गए हैं । इन मजाकों में फरीदाबाद के भी लोगों के शामिल हो जाने से इन मजाकों को न सिर्फ और हवा मिली बल्कि विश्वसनीयता भी प्राप्त हुई । 
रोटरी की चुनावी राजनीति में उम्मीदवार के क्लब का अधिष्ठापन समारोह उम्मीदवार की 'ताकत' को नापने/आँकने का एक पैमाना बन गया है - हालाँकि इस पैमाने के फूलप्रूफ होने का कोई सुबूत नहीं है । यूँ तो उम्मीदवार के क्लब में हुए अधिष्ठापन समारोह के आधार पर उम्मीदवार के जीतने/हारने का अनुमान लगाना फिजूल की कसरत ही होगी - लेकिन फिर भी यह समारोह उम्मीदवार की सोच, उसके नजरिए और अपनी उम्मीदवारी के प्रति उसकी गंभीरता का पैमाना अवश्य ही है । देखने की बात यह नहीं होती है कि उम्मीदवार के क्लब का अधिष्ठापन समारोह किस तामझाम से हुआ है; देखने की बात यह होती है कि अधिष्ठापन समारोह के जरिए उम्मीदवार लोगों को दिखाता/बताता क्या है ? विनय भाटिया के क्लब का अधिष्ठापन समारोह बिना तामझाम के, सामान्य तरीके से हो जाता - तो इतना बबाल नहीं मचता; क्योंकि तब मान लिया जाता कि अपने चुनाव अभियान में वह अपने क्लब के अधिष्ठापन समारोह को कोई अहमियत नहीं दे रहे हैं । लेकिन अभी जो कहा/बताया जा रहा है, उससे लोगों के बीच संदेश यह गया है कि विनय भाटिया अपने क्लब के अधिष्ठापन समारोह का राजनीतिक उपयोग तो करेंगे, किंतु इस उपयोग को ढंग से करने के लिए उनके पास आवश्यक तैयारी नहीं है; और इस चक्कर में वह अधिष्ठापन समारोह की जरूरत व गरिमा के साथ साथ अपने क्लब के पदाधिकारियों तथा चुनावी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लोगों की इज्जत के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं । 
विनय भाटिया के समर्थक समझे जाने वाले लोगों ने ही बताया है कि विनय भाटिया तो चाहते थे कि उनके क्लब का अधिष्ठापन समारोह जल्दी हो; क्लब में उन्होंने सुझाव दिया था कि अधिष्ठापन समारोह क्लब के सदस्य करें, और फिर सितंबर माह के अंतिम सप्ताह में क्लब का एक बड़ा कार्यक्रम 'वह' करेंगे । क्लब के पदाधिकारियों ने लेकिन उन्हें स्पष्ट बता दिया कि अधिष्ठापन समारोह यदि बड़ा करना है, तो उसमें होने वाला अतिरिक्त खर्च उन्हें ही उठाना होगा । उनका तर्क रहा कि उम्मीदवार होने के नाते यह उनकी जरूरत है कि क्लब का अधिष्ठापन समारोह तामझाम से हो, लिहाजा इस तामझाम के चलते जो अतिरिक्त खर्चा आयेगा - उसे उन्हें ही उठाना पड़ेगा । क्लब के पदाधिकारियों का सुझाव था कि विनय भाटिया यदि अतिरिक्त खर्च उठाने के लिए तैयार नहीं हैं, तो फिर वह अपने सामान्य तरीके से ही अधिष्ठापन समारोह कर लेते हैं, किंतु विनय भाटिया इस बात के लिए भी राजी नहीं हुए । उनका कहना रहा कि इससे एक उम्मीदवार के रूप में उनकी बड़ी फजीहत होगी । विनय भाटिया ने तब 'बीच का' रास्ता निकाला और वह यह कि सितंबर माह के अंतिम सप्ताह में नोमीनेटिंग कमेटी के लिए क्लब्स में चुने गए सदस्यों को 'निपटाने' के लिए वह जिस आयोजन के बारे में सोच रहे हैं, उसे अधिष्ठापन समारोह के रूप में ही कर लेंगे । इस तरह विनय भाटिया ने अपना काम तो बना लिया, किंतु क्लब के पदाधिकारियों को फँसा दिया । किसी भी अच्छे क्लब में नए पदाधिकारियों का अधिष्ठापन रोटरी वर्ष के शुरू के दिनों में ही हो जाता है, या हो जाना चाहिए - किंतु विनय भाटिया के रवैये के चलते रोटरी क्लब फरीदाबाद एनआईटी के पदाधिकारियों को लंबे समय तक बिना अधिष्ठापित हुए लोगों के बीच रहना होगा । इस कारण से रोटरी क्लब फरीदाबाद एनआईटी के नए पदाधिकारियों का रोटरी के प्रति सारा उत्साह फीका पड़ता जा रहा है । 
विनय भाटिया के क्लब का यह सारा झमेला सामने न आया होता, यदि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार रवि दयाल के क्लब के अधिष्ठापन समारोह को लोगों के बीच चर्चा न मिली होती । उल्लेखनीय है कि अभी कुछ ही दिन पहले रवि दयाल के क्लब को प्लेटिनम क्लब का अवार्ड मिलने तथा खुद रवि दयाल को लीडरशिप एक्सीलेंस की ट्रॉफी मिलने के कारण लोगों के बीच व्यापक चर्चा मिली ही थी । और अब क्लब के अधिष्ठापन समारोह ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों को प्रभावित किया ।डिस्ट्रिक्ट के प्रमुख सदस्यों की उपस्थिति, इंतजाम, क्लब के पदाधिकारियों व सदस्यों की सक्रिय भागीदारी के लिहाज से हर किसी को अधिष्ठापन समारोह पूरी तरह परफेक्ट लगा और सभी ने माना कि इस आयोजन से रवि दयाल की उम्मीदवारी का वजन और बढ़ा ही है । इसी प्रक्रिया में विनय भाटिया की उम्मीदवारी का वजन नापने की कोशिश हुई, तो अधिष्ठापन समारोह को लेकर उनके क्लब में चल रहा झमेला सामने आया - जिससे उनके समर्थकों व शुभचिंतकों को खासा तगड़ा वाला झटका लगा है । विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थकों का ही कहना है कि क्लब के अधिष्ठापन समारोह को लेकर ही विनय भाटिया जब अपने क्लब को न तो प्रेरित कर पाए और न ही क्लब के सदस्यों का सहयोग जुटा पाए हैं, तब फिर अपनी उम्मीदवारी का अभियान वह कैसे संयोजित कर पायेंगे ? अधिष्ठापन समारोह के झमेले के बहाने से विनय भाटिया की उम्मीदवारी को लेकर जिस तरह की जो बातें सामने आईं हैं, उसके कारण फरीदाबाद के लोगों के बीच भी विनय भाटिया की उम्मीदवारी को लेकर गहरी नाराजगी और निराशा पैदा हुई है, और उनके बीच भी तरह तरह की बातें सुनाई देने लगी हैं - जो विनय भाटिया की उम्मीदवारी के संदर्भ में परेशानी खड़ी करने वाली हैं ।