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Wednesday, September 6, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में चुनाव पर लगी अदालती रोक ने दीपक जैन की चुनाव जीतने की व्यूह रचना को छिन्न भिन्न कर दिया, और श्रीहरी गुप्ता के समर्थकों को राहत दी

मेरठ । अदालती आदेश के कारण वर्ष 2018-19 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए हो रहे चुनाव पर लगी रोक ने दीपक जैन और उनके समर्थकों को निराश किया है, जबकि श्रीहरी गुप्ता और उनके समर्थकों ने राहत की साँस ली है । उल्लेखनीय है कि आज सुबह सुबह चुनावी माहौल में उस समय खासी गर्मी पैदा हो गई थी जब डिस्ट्रिक्ट के लोगों को दीपक जैन के समर्थकों की तरफ से सुनने को मिला कि उन्होंने मेरठ में श्रीहरी गुप्ता के पक्के समझे जाने वाले छह वोटों को 'तोड़' लिया है; और श्रीहरी गुप्ता के समर्थकों की तरफ से आरोप सुना गया कि दीपक जैन पचास हजार से लेकर एक लाख रुपए तक का ऑफर देकर वोट खरीद रहे हैं । इन दावों और आरोपों को लेकर माहौल गर्मा ही रहा था कि अदालती आदेश आ गया और चुनावी प्रक्रिया जहाँ की तहाँ थम गई । वोटिंग लाइंस करीब चालीस घंटे ही खुली रह पाईं । इन करीब चालीस घंटों में कितने क्लब्स के वोट पड़े, इसकी कोई अधिकृत जानकारी तो नहीं है - लेकिन अलग अलग लोगों की चर्चाओं के अनुसार, इन करीब चालीस घंटों में कुछ ही क्लब्स के वोट पड़ सके हैं ।
क्लब्स के प्रेसीडेंट्स के वोट देने में जल्दबाजी नहीं दिखाने को चुनाव के 'बाजार में' बदल जाने के संकेत और सुबूत के रूप में देखा जा रहा है । दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स में अमूमन देखा गया है कि वोटिंग लाइंस खुलने के पहले चौबीस घंटे में साठ प्रतिशत वोटिंग हो जाती है - लेकिन डिस्ट्रिक्ट 3100 की बात खासी निराली है, और इसी निरालेपन के कारण डिस्ट्रिक्ट नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस में है । उम्मीद की गई थी कि नॉन-डिस्ट्रिक्ट होने की फजीहत से डिस्ट्रिक्ट के लोग सबक लेंगे - लेकिन चुनावी गहमागहमी में हो रही चर्चाओं और लग रहे आरोपों से साफ हो गया है कि किसी ने कोई सबक नहीं सीखा है और पहले की ही तरह हरकतें लगातार जारी हैं और रोटरी इंटरनेशनल से 'सजा' तक पा चुके लोग ही पूरी बेशर्मी से अब भी अपनी हरकतों को जारी रखे हुए हैं । चुनावी बेईमानी के आरोप पर रोटरी इंटरनेशनल से 'सजा' पाए लोगों पर निर्भर होने/रहने के कारण दीपक जैन का उम्मीदवारी-अभियान लगातार चर्चा और आरोपों के घेरे में रहा, तथा उनके उम्मीदवारी-अभियान पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के चुनाव को वोटों की 'खरीद-फरोख्त का बाजार' बना देने के गंभीर आरोप सुनाई दिए ।
समझा जाता है कि संभवतः इसी कारण से प्रेसीडेंट्स ने वोट देने में जल्दबाजी नहीं दिखाई; उन्होंने इंतजार करना जरूरी समझा ताकि अपने वोट की वह और बढ़ी हुई कीमत पा सकें । दीपक जैन के नजदीकियों की तरफ से वोटिंग लाइन खुलने के समय प्रति वोट पचास से साठ हजार रुपए का जो रेट सुना जा रहा था, वह 24 घंटे बाद एक लाख रुपए तक जा पहुँचा था - प्रेसीडेंट्स को उम्मीद थी कि यह रेट अभी और बढ़ेगा । अदालती फैसले के कारण चुनाव पर लगी रोक ने लेकिन उनकी उम्मीदों पर फिलहाल पानी फेर दिया है । चुनाव पर लगी रोक ने दीपक जैन के समर्थकों को निराश किया है; उनकी तरफ से सुना जा रहा है कि चुनाव जीतने के लिए उन्होंने पूरी व्यूह रचना कर ली थी - और उसे सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया जा रहा था; लेकिन चुनाव पर लगी रोक ने उनकी सारी व्यूह रचना को छिन्न भिन्न कर दिया है । मजे की बात यह है कि चुनाव पर लगी रोक ने श्रीहरी गुप्ता के समर्थकों को खुश किया है । उनकी तरफ से सुना जा रहा है कि दीपक जैन की तरफ से उनके वोटों को छीनने/हथियाने की जिस तरह की जो कोशिश की गई, उससे निपटने की उनके पास कोई तैयारी नहीं थी - चुनाव स्थगित होने से उन्हें वह तैयारी करने का मौका मिल गया है । मेरठ के वोटों को लेकर दीपक जैन और श्रीहरी गुप्ता के बीच जो घमासान मचा है, उसे देख कर चक्रेश लोहिया के समर्थकों को अपनी राह आसान होती हुई दिखी है । दरअसल चक्रेश लोहिया के समर्थकों का मानना और कहना है कि वर्ष 2018-19 के गवर्नर पद का चुनावी मुकाबला वास्तव में चक्रेश लोहिया और श्रीहरी गुप्ता के बीच ही है; ऐसे में दीपक जैन की तरफ से श्रीहरी गुप्ता को जो नुकसान पहुँचाया जायेगा, उससे वास्तव में चक्रेश लोहिया का रास्ता आसान बनेगा । चुनाव को लेकर होने वाले तरह तरह के आकलनों के बीच, चुनाव पर लगी रोक ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के परिदृश्य को फिलहाल तो लेकिन और उलझा दिया है ।

Sunday, September 3, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में मुरादाबाद में आज हुई डिस्ट्रिक्ट इंटरसिटी में चारों उम्मीदवारों के शक्ति-प्रदर्शन में बाजी जीतने वाले चक्रेश लोहिया के सामने इस 'जीत' को चुनावी जीत में बदल पाने की चुनौती लेकिन अभी बाकी है

मेरठ । रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों की तरफ से मिले कड़े 'संदेशों' के कारण वोटों की खरीद-फरोख्त के भरोसे चुनाव जीतने की तैयारी कर रहे दीपक जैन की योजना को थोड़ा धक्का तो लगा है, लेकिन उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स उन्हें भरोसा दे रहे हैं कि वोटों की खरीद-फरोख्त को इतनी होशियारी से अंजाम दिया जायेगा कि कोई पकड़ ही नहीं पायेगा । दीपक जैन के कुछेक नजदीकी लेकिन उन्हें सलाह दे रहे हैं कि वोटों की खरीद-फरोख्त के आरोपों को रोटरी इंटरनेशनल ने यदि कहीं गंभीरता से ले लिया, और चुनाव के नतीजे को ही रद्द कर दिया - तो वोटों को खरीदने में खर्च हुए पैसे बेकार ही जायेंगे, इसलिए भलाई इसी में है कि चुनाव ईमानदारी से ही लड़ो । दीपक जैन के इन्हीं नजदीकियों का कहना है कि उन्होंने दीपक जैन को सलाह दी है कि कुछेक बदनाम पूर्व गवर्नर्स की बातों में आकर उन्होंने नाहक ही अपनी बदनामी करवा ली है; उन्हें सबसे पहले तो उन पूर्व गवर्नर्स की 'गिरफ्त' से बाहर निकलना चाहिए और अपनी एक स्वतंत्र पहचान बनानी चाहिए तथा गंभीरता के साथ अपनी उम्मीदवारी को लोगों के बीच रखना चाहिए - इससे निश्चित ही उन्हें फायदा होगा; उन्हें गौर करना चाहिए कि वह यदि इस बार के चुनाव में सफल नहीं भी हो पाते हैं तो अभी के क्लब-प्रेसीडेंट्स को ही एक या दो गवर्नर अभी और चुनने का मौका मिलेगा ।
नजदीकियों के ही दावे के अनुसार, उनकी समझाइस का दीपक जैन पर कुछ असर होता हुआ तो उन्हें दिखा है - लेकिन पक्के तौर पर वह नहीं कह सकते हैं कि दीपक जैन ने वोटों की खरीद-फरोख्त के जरिए जीत हासिल करने के कुछेक पूर्व गवर्नर्स के सुझाव से पूरी तरह किनारा कर लिया है। दरअसल, दीपक जैन को बताया गया है कि डिस्ट्रिक्ट में करीब आठ/दस क्लब्स तो अपने अपने वोट बेचने के लिए तैयार ही रहते हैं; चर्चा है कि दीपक जैन के साथ उन क्लब्स का 'सौदा' करवा भी दिया गया है - सौदा करवाने वाले पूर्व गवर्नर्स ने दीपक जैन को साफ साफ बता भी दिया है कि 'सौदे' पर यदि वह आगे नहीं बढ़े, तो फिर उनकी विश्वसनीयता संकट में पड़ेगी । दीपक जैन ने मुजफ्फरनगर के कुछेक क्लब्स को प्रोजेक्ट्स में 'सहयोग' करने तथा उनके ड्यूज चुकाने का ऑफर देकर, उनके वोट खरीदने का जो प्रयास किया था - उसका भी उल्टा असर हुआ है, और दीपक जैन की इस तरह की तरकीबों ने अच्छे क्लब्स के पदाधिकारियों को नाराज करने का ही काम किया है ।
दीपक जैन ने अपनी बढ़ती बदनामी से निपटने के लिए दूसरों पर आरोप लगाने का तरीका अपनाया - पर उनकी बदकिस्मती यह रही कि उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स पहले से ही खासे बदनाम रहे हैं, और रोटरी इंटरनेशनल से फटकार खा चुके हैं और उनकी कारस्तानियों के कारण ही डिस्ट्रिक्ट मौजूदा दुर्गति का शिकार है । इसलिए दूसरों पर आरोप लगा कर अपने 'अपराधों' पर पर्दा डालने की दीपक जैन की कोशिश कामयाब नहीं हो पा रही है । दीपक जैन की इस फजीहत का फायदा श्रीहरी गुप्ता को हो सकता है, लेकिन मेरठ के अधिकतर पूर्व गवर्नर्स ने चूँकि श्रीहरी गुप्ता के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है - इसलिए श्रीहरी गुप्ता को अपने ही क्षेत्र में गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है । इस स्थिति में चक्रेश लोहिया ने अपने समर्थन-आधार को बढ़ाने का जो प्रयास किया है, उन्हें उसका फायदा मिलता दिख रहा है । मुरादाबाद में आज हुई इंटरसिटी में चक्रेश लोहिया के समर्थकों की जैसी जो उपस्थिति रही, और रजिस्ट्रेशन व उपस्थिति के आधार पर उनके क्लब को जो अवॉर्ड मिला - उसके कारण चुनावी मुकाबले में चक्रेश लोहिया को बढ़त मिलने का आभास लोगों ने महसूस किया । दरअसल, आज हुई इंटरसिटी में चारों उम्मीदवारों ने अपना अपना जो शक्ति-प्रदर्शन किया, उसमें बाजी चक्रेश लोहिया ने जीती और उनकी इस जीत ने उन्हें बाकी तीनों उम्मीदवारों से आगे 'दिखाने' का काम किया । देखना दिलचस्प होगा कि आज की इस 'जीत' को वह चुनावी जीत में बदल पाते हैं या नहीं ?

Wednesday, August 30, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में वोटों की खरीद के जरिए दीपक जैन को चुनाव जितवाने की तैयारी करने वाले पूर्व गवर्नर्स की असली मंशा कहीं अपनी अपनी जेबें भरना तो नहीं हैं ?

मेरठ । दीपक जैन की उम्मीदवारी के लिए वोट जुटाने हेतु पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर योगेश मोहन गुप्ता तथा एमएस जैन ने वोटों की खरीद-फरोख्त का रास्ता अपनाने के जो संकेत दिए हैं, उसने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के परिदृश्य को रोचक तो बना दिया है, लेकिन साथ ही डिस्ट्रिक्ट को फिर से पहले वाली दलदल की ओर धकेलना भी शुरू कर दिया है । उल्लेखनीय है कि दीपक जैन की उम्मीदवारी के इन दोनों सक्रिय समर्थकों ने पहले श्रीहरी गुप्ता और राजकमल गुप्ता को चुनावी मुकाबले से बाहर करने के लिए तिकड़में की थीं, लेकिन उनकी तिकड़में बुरी तरह फेल रही हैं । श्रीहरी गुप्ता को डराने तथा दबाव में लेने के लिए इन्होंने दावा किया कि मेरठ के अधिकतर पूर्व गवर्नर्स दीपक जैन की उम्मीदवारी के साथ हैं, इसलिए मेरठ में श्रीहरी गुप्ता को खास समर्थन नहीं मिलेगा - और जब उन्हें मेरठ में समर्थन नहीं मिलेगा, तो फिर दूसरी जगह कहाँ/क्या समर्थन मिलेगा ? श्रीहरी गुप्ता और उनके समर्थकों ने लेकिन इस दावे को कोई तवज्जो नहीं दी; उनका कहना रहा कि रोटरी में नेतागिरी और रोटरी के नाम पर धंधा करने वाले पूर्व गवर्नर्स नेताओं की पोल पूरी तरह खुल गई है, और दीपक जैन की उम्मीदवारी को समर्थन देने की आड़ में अपनी राजनीति जमाने की कोशिश करने वाले पूर्व गवर्नर्स नेताओं को मेरठ में अपने ही क्लब्स का समर्थन मिल जाए - तो बहुत समझा जाए ।
दरअसल, दीपक जैन की उम्मीदवारी के समर्थक पूर्व गवर्नर्स नेताओं के क्लब्स के पदाधिकारियों को भी लगने लगा है कि दीपक जैन से पैसे ऐंठने के लिए इन पूर्व गवर्नर्स ने अपने-अपने क्लब्स को बेचने का सौदा कर लिया है । वास्तव में किसी के लिए भी यह समझना मुश्किल बना हुआ है कि दीपक जैन की जब रोटरी में और डिस्ट्रिक्ट में ज्यादा सक्रियता और संलग्नता नहीं रही है, जब न वह लोगों को जानते हैं और न लोग उन्हें जानते हैं - तब फिर कुछेक पूर्व गवर्नर्स उन्हें डिस्ट्रिक्ट का गवर्नर क्यों चुनवाना/बनवाना चाहते हैं ? डिस्ट्रिक्ट की अभी जो हालत है, उसमें डिस्ट्रिक्ट को एक ऐसे गवर्नर की जरूरत है जिसकी रोटरी और डिस्ट्रिक्ट में लंबी सक्रियता और संलग्नता रही हो, तथा जो डिस्ट्रिक्ट की तथा डिस्ट्रिक्ट के लोगों की जरूरतों व समस्याओं को जानता/पहचानता हो । इस लिहाज से लोगों को श्रीहरी गुप्ता और चक्रेश लोहिया ही उचित उम्मीदवार लग रहे हैं, लेकिन डिस्ट्रिक्ट की बर्बादी के लिए जिम्मेदार रहे पूर्व गवर्नर्स इन दोनों की बजाए अपने अपने 'कठपुतली-उम्मीदवार' लेकर चुनावी मैदान में आ डटे हैं ।
इसके चलते सबसे रोचक स्थिति राजकमल गुप्ता और उनके समर्थकों की बनी है । बेचारे राजकमल गुप्ता के समर्थकों को ही उनके मुकाबले में होने का कोई भरोसा नहीं है, और उनका साफ कहना है कि राजकमल गुप्ता की उम्मीदवारी तो उन्होंने चक्रेश लोहिया को नुकसान पहुँचाने के लिए प्रस्तुत की हुई है - उनका मानना/कहना है कि राजकमल गुप्ता की उम्मीदवारी के न रहने पर मुरादाबाद क्षेत्र के सभी वोट चक्रेश लोहिया को मिल जायेंगे । मजे की बात यह है कि राजकमल गुप्ता और उनके समर्थकों को उन पूर्व गवर्नर्स के नजदीक देखा/समझा जाता है, जो दीपक जैन की उम्मीदवारी का झंडा उठाए हुए हैं - इसके बावजूद उक्त पूर्व गवर्नर्स राजकमल गुप्ता की उम्मीदवारी को वापस नहीं करवा सके हैं । राजकमल गुप्ता और उनके समर्थकों का कहना है कि ऐन मौके पर वह अपना समर्थन उसे देंगे, जो चक्रेश लोहिया को हरा सकने में समर्थ दिखेगा । अभी चूँकि श्रीहरी गुप्ता के मुकाबले दीपक जैन की चुनावी स्थिति उन्हें बहुत ही कमजोर नजर आ रही है, इसलिए अभी से वह दीपक जैन की उम्मीदवारी का समर्थन करने की घोषणा करके अपने वोटों को खराब नहीं कर सकते हैं ।   
इस तरह दीपक जैन की उम्मीदवारी के समर्थक पूर्व गवर्नर्स को 'अपने' लोगों को ही दीपक जैन की उम्मीदवारी की मजबूती को लेकर आश्वस्त करना मुश्किल हो रहा है । उनकी यह मुश्किल इसलिए भी बढ़ी है, क्योंकि वह अपनी गवर्नरी को लेकर रोटरी इंटरनेशनल से कानूनी लड़ाई लड़ रहे डीके शर्मा का समर्थन पाने के अपने दावे को भी सच साबित करने में विफल रहे हैं । दीपक जैन की उम्मीदवारी के समर्थक पूर्व गवर्नर्स का दावा था कि कानूनी लड़ाई की तैयारी करने/करवाने में उन्होंने चूँकि डीके शर्मा की बहुत मदद की है, इसलिए डीके शर्मा का समर्थन उन्हें ही मिलेगा । डीके शर्मा के कहने में छह से आठ वोटों का अनुमान लगाया जा रहा है; और डीके शर्मा की तरफ से लोगों को जो संकेत मिल रहे हैं - उनमें यह तो साफ नहीं है कि उनका समर्थन किसे मिलेगा, लेकिन यह बहुत साफ है कि उनका समर्थन दीपक जैन को तो नहीं ही मिलेगा ।
दीपक जैन की उम्मीदवारी के समर्थक पूर्व गवर्नर्स को जिस तरह हर तरफ से धक्का और निराशा ही मिल रही है, उसके चलते उन्हें अब वोटों की खरीद-फरोख्त का ही विकल्प सूझ रहा है । उनके नजदीकियों का कहना है कि उन्होंने दीपक जैन को बता दिया है कि चुनाव जीतना है तो अब वोटों की खरीदारी ही करनी पड़ेगी । दीपक जैन के कुछेक शुभचिंतकों ने दीपक जैन को आगाह भी किया है कि वोटों की खरीदारी के नाम पर उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स अपनी अपनी जेबें भरने का काम कर सकते हैं, इसलिए जो भी करना - सोच/समझ कर और आँखें खोल कर करना । वोट खरीद कर दीपक जैन को चुनाव जितवाने की तैयारी शुरू हो जाने से रोटरी के बुनियादी सिद्धांतों तथा आदर्शों के साथ डिस्ट्रिक्ट में एक बार फिर खिलवाड़ तो शुरू हो ही गया है, साथ ही साथ डिस्ट्रिक्ट में चुनावी परिदृश्य खासा दिलचस्प हो उठा है ।

Friday, May 19, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को लेकर श्रीहरी गुप्ता की निश्चिंतता और एक उम्मीदवार के रूप में व्यवहार करने से बचने की उनकी कोशिशें ही उनकी मुसीबत बनीं

मेरठ । श्रीहरी गुप्ता और दीपक जैन के बीच समझौते की कोशिशों के फेल हो जाने के बाद श्रीहरी गुप्ता के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनावी मुकाबला खासी मुसीबत में फँस गया है । श्रीहरी गुप्ता के लिए मुसीबत इसलिए भी बढ़ी है, क्योंकि दीपक जैन की उम्मीदवारी को मेरठ के ही कुछेक पूर्व गवर्नर्स से खाद-पानी मिलता देखा/सुना जा रहा है; और समझा जा रहा है कि उनकी शह पर ही दीपक जैन ने अपनी उम्मीदवारी से पीछे हटने से साफ इंकार कर दिया । श्रीहरी गुप्ता के नजदीकियों को अब लग रहा है कि समझौते की बात कराने के पीछे भी मेरठ के उनके विरोधियों की एक चाल थी, जिसमें उन्हें कमजोर दिखाने का उद्देश्य छिपा हुआ था; श्रीहरी गुप्ता के नजदीकियों को अब लग रहा है कि उन्हें समझौते की बात करने के झाँसे में फँसना ही नहीं चाहिए था । मेरठ में मेरठ के पूर्व गवर्नर्स की पहल और मौजूदगी में हुई समझौते की बात में अपनी उम्मीदवारी से पीछे हटने को लेकर दीपक जैन के दो-टूक इंकार ने मनोवैज्ञानिक रूप से दीपक जैन की उम्मीदवारी को बल दिया है, जिसकी सीधी चोट श्रीहरी गुप्ता की उम्मीदवारी की संभावनाओं पर पड़ी महसूस हो रही है । मजे की बात यह है कि श्रीहरी गुप्ता के ही शुभचिंतक उनके लिए पैदा हुई मुसीबतों के लिए उन्हें ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । शुभचिंतकों के ही अनुसार, मुरादाबाद में दो उम्मीदवारों के होने से श्रीहरी गुप्ता ने मेरठ में अपने समर्थन-आधार को एकजुट करने/रखने के लिए कोई प्रयास ही नहीं किया; वह यह सोच कर आश्वस्त रहे कि मेरठ में तो उन्हें एकतरफा समर्थन अपने आप मिल जायेगा । पिछले वर्षों में यह देखा भी गया है कि मेरठ से यदि एक उम्मीदवार रहा है, तो चाहे/अनचाहे उसे मेरठ के सभी पूर्व गवर्नर्स का समर्थन मिल जाता रहा है । श्रीहरी गुप्ता के तो फिर अधिकतर पूर्व गवर्नर्स के साथ अच्छे संबंध रहे हैं, और उन्होंने अधिकतर पूर्व गवर्नर्स के लिए काम किया हुआ है । इसलिए श्रीहरी गुप्ता कुछ ज्यादा ही आश्वस्त रहे - और मेरठ में एक उम्मीदवार के रूप में 'व्यवहार' करने/रखने से बचते रहे । मेरठ के कुछेक पूर्व गवर्नर्स ने तो यहाँ तक महसूस किया और कहा कि श्रीहरी गुप्ता तो चुनाव होने और नतीजा आने से पहले ही अपने आप को गवर्नर मान बैठे हैं ।
दीपक जैन की उम्मीदवारी की चर्चाओं ने जब श्रीहरी गुप्ता की उम्मीदवारी के सामने खतरे की घंटी बजाना शुरू की, तब भी श्रीहरी गुप्ता निश्चिन्त बने रहे और यह सोचते/कहते/बताते रहे कि दीपक जैन को डिस्ट्रिक्ट में जानता ही कौन है ? दरअसल श्रीहरी गुप्ता इस खतरे की संभावना की कल्पना भी नहीं कर सके कि दीपक जैन को डिस्ट्रिक्ट में भले ही कोई न जानता हो, लेकिन मेरठ में अपने व्यवहार और अपने रवैये से वह जिन लोगों को अपना विरोधी बना रहे हैं, उन्होंने दीपक जैन को यदि 'गोद' ले लिया, तब क्या होगा ? और अब जब यही हुआ है, तो श्रीहरी गुप्ता और उनके समर्थक हक्के-बक्के रह गए हैं । मेरठ में ही श्रीहरी गुप्ता की उम्मीदवारी के प्रति जब विरोध पैदा हो गया है, और कुछेक पूर्व गवर्नर्स उनकी उम्मीदवारी के खिलाफ सक्रिय सुने/देखे जा रहे हैं - तब उनके लिए हालात सचमुच चुनौतीपूर्ण हो गए हैं । मेरठ में श्रीहरी गुप्ता के साथ हमदर्दी रखने वाले लोगों का ही मानना और कहना है कि दूसरी बड़ी गलती उन्होंने दीपक जैन के साथ समझौते की बात करने के लिए तैयार होने की कर दी - दरअसल इससे श्रीहरी गुप्ता ने एक उम्मीदवार के रूप में अपनी कमजोरी को जाहिर और साबित कर दिया । वास्तव में, इससे लोगों के बीच संदेश यह गया कि श्रीहरी गुप्ता चाहते हैं कि दीपक जैन अपनी उम्मीदवारी छोड़ दें, ताकि वह आराम से बिना कुछ किए-धरे चुनाव जीत जाएँ । मेरठ में श्रीहरी गुप्ता के समर्थकों व शुभचिंतकों का ही नहीं, बल्कि उनके विरोधियों का भी मानना और कहना है कि श्रीहरी गुप्ता के लिए चुनौती दीपक जैन नहीं, बल्कि उनका खुद का व्यवहार और रवैया है । लोगों का कहना है कि श्रीहरी गुप्ता यदि एक उम्मीदवार के रूप में 'सोचना' और व्यवहार करना शुरू करें, और इस बात पर ध्यान दें कि एक उम्मीदवार को समर्थन जुटाने के लिए किस तरह की 'फील्डिंग' सजानी/जमानी होती है - तो अभी भी वह हालात को अपने पक्ष में कर सकते हैं ।
राजकमल गुप्ता पर दीपक बाबु के दिशा-निर्देशन में और दीपक जैन पर योगेश मोहन गुप्ता के दिशा-निर्देशन में वोटों की खरीद-फरोख्त करने के काम में जुटने के आरोपों से डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में गर्मी तो आई है, लेकिन डिस्ट्रिक्ट में लोगों का एक बड़ा तबका राजकमल गुप्ता और दीपक जैन की इस तरह की कोशिशों को डिस्ट्रिक्ट के हक़ में नहीं मान/देख रहा है । इसी नाते से लोगों का मत है कि श्रीहरी गुप्ता और या चक्रेश लोहिया में से ही किसी को गवर्नर होना चाहिए । दरअसल यही दोनों पिछले वर्षों में डिस्ट्रिक्ट में सक्रिय रहे हैं, और डिस्ट्रिक्ट की कमजोरियों और खूबियों को अच्छे से जानते/समझते/पहचानते हैं । लोगों को लगता है कि अपने अपने व्यवहार के चलते श्रीहरी गुप्ता और चक्रेश लोहिया समय समय पर आलोचनाओं का शिकार भले ही होते रहे हों, लेकिन डिस्ट्रिक्ट इस समय जिस मुकाम पर है - वहाँ उसे श्रीहरी गुप्ता और या चक्रेश लोहिया जैसे अनुभवी लोग ही नेतृत्व के लिए चाहिए; राजकमल गुप्ता और दीपक जैन के मामले में तो 'बंदर के हाथ में उस्तरा पकड़ाने' जैसा मामला हो जायेगा । सुनील गुप्ता और दीपक बाबु जैसे अनुभवहीन ही नहीं, बल्कि खुन्नसी किस्म के लोगों को नेतृत्व सौंपने की सजा डिस्ट्रिक्ट पहले ही बहुत भुगत चुका है । गौर करने वाली बात यह है कि राजकमल गुप्ता और दीपक जैन की उम्मीदवारी उनकी नेतृत्व की स्वाभाविक आकांक्षा के चलते नहीं आई है, बल्कि उनके 'उन' नेताओं की खुन्नसी राजनीति के चलते प्रकट हुई है - जो डिस्ट्रिक्ट को बर्बाद करने के लिए जिम्मेदार माने/पहचाने और चिन्हित किए गए हैं । यही कारण है कि राजकमल गुप्ता और दीपक जैन की तरफ से वोटों की खरीद-फरोख्त करने के आरोप सुने जाने लगे हैं । वोटों की खरीद-फरोख्त के जरिए चुनाव जीतने की राजकमल गुप्ता और दीपक जैन की कोशिशों ने डिस्ट्रिक्ट के चुनावी परिदृश्य को रोचक तो बना दिया है, लेकिन साथ ही डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति को फिर से पहले वाली दलदल की ओर धकेलना भी शुरू कर दिया है। पता नहीं, डिस्ट्रिक्ट 3100 को अभी और क्या क्या देखना है ?

Wednesday, May 3, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 की पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संगीता कुमार के बेटे के विदेशी हथियारों का तस्कर होने के खुलासे के बाद डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए प्रस्तुत श्रीहरी गुप्ता की उम्मीदवारी के सामने दोहरा संकट खड़ा हुआ

मेरठ । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संगीता कुमार के बेटे के विदेशी हथियारों का तस्कर होने की बात सामने आने से मेरठ के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स जिस शर्मिंदगी में फँसे हैं, उसके कारण वर्ष 2018-19 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए होने वाले चुनाव में श्रीहरी गुप्ता की उम्मीदवारी के लिए अजीब सा संकट खड़ा हो गया है । दरअसल श्रीहरी गुप्ता को उम्मीद थी कि मेरठ के सभी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स उनकी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के अभियान में लगेंगे, तो उनकी उम्मीदवारी की नैय्या आसानी से पार हो जाएगी । पिछले वर्षों में यह देखा गया है कि मेरठ से यदि एक उम्मीदवार रहा है, तो चाहे/अनचाहे उसे मेरठ के सभी पूर्व गवर्नर्स का समर्थन मिला है । श्रीहरी गुप्ता के तो फिर अधिकतर पूर्व गवर्नर्स के साथ अच्छे संबंध रहे हैं, और उन्होंने अधिकतर पूर्व गवर्नर्स के लिए काम किया हुआ है । संजीव रस्तोगी की तो डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के वह चेयरमैन थे । संगीता कुमार के गवर्नर-काल में भी उन्होंने अत्यंत सक्रिय भूमिका निभाई थी । एक अच्छा कार्यकर्ता होने के कारण श्रीहरी गुप्ता उन गवर्नर्स के साथ भी तालमेल बैठाने में सफल रहे, जिनकी आपस में नहीं भी बनती थी और जो एक-दूसरे के धुर-विरोधी रहे थे । इस कारण से श्रीहरी गुप्ता को उम्मीद थी कि मेरठ के पूर्व गवर्नर्स उनकी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने हेतु अपने अपने तरीके से काम करेंगे श्रीहरी गुप्ता को चक्रेश लोहिया से मुकाबला करने के लिए मेरठ के पूर्व गवर्नर्स के समर्थन की जरूरत भी है । चक्रेश लोहिया भी डिस्ट्रिक्ट में एक अत्यंत सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में जाने/पहचाने जाते हैं । मेरठ के कुछेक पूर्व गवर्नर्स के लिए उन्होंने भी अपना खूब पसीना बहाया है । उनकी उम्मीदवारी के पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए मुरादाबाद के कुछेक पूर्व गवर्नर्स अपने अपने तरीके से काम करते हुए भी सुने गए हैं । ऐसे में, चक्रेश लोहिया की उम्मीदवारी को टक्कर देने के लिए श्रीहरी गुप्ता को अपनी उम्मीदवारी के लिए मेरठ के पूर्व गवर्नर्स के समर्थन की जरूरत है ही
श्रीहरी गुप्ता की यह जरूरत पूरी हो भी जाती, लेकिन संगीता कुमार के बेटे के विदेशी हथियारों तथा वन्य जीवों के अवशेषों के तस्कर होने की बात सामने आने से सब गुड़ गोबर हो गया । राजस्व गुप्तचर निदेशालय (डीआरआई) और वन विभाग की छापेमारी में पता चला कि संगीता कुमार का बेटा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हथियारों की तस्करी करने वाले सिंडीकेट से जुड़ा है । संगीता कुमार के बेटे की यह कारस्तानी सामने आने से आम तौर पर डिस्ट्रिक्ट 3100 के तथा खासतौर पर मेरठ के रोटेरियंस भौंचक रह गए । मेरठ में जो रोटेरियंस संगीता कुमार और उनके परिवार को नजदीक से जानते/देखते रहे हैं, उन्हें पिछले कुछ वर्षों में संगीता कुमार और उनके परिवार की अचानक और अप्रत्याशित रूप से बढ़ी समृद्धि को देख कर हैरानी तो हुई और कई एक को दाल में काला/पीला होने का भी शक हुआ - लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं हो सका कि अचानक और अप्रत्याशित रूप से बढ़ी उनकी तड़क-भड़क के पीछे उनके बेटे की तस्करी से मिली कमाई है । छापेमारी और जाँच में पता चला है कि संगीता कुमार के बेटे ने घर में ही कारतूस और हथियार बनाने का साजो-सामान फिट किया हुआ था । छापेमारी और जाँच में जिस तरह की सूचनाएँ आ रही हैं, उनसे साफ आभास मिल रहा है कि बेटे की कारस्तानियों की संगीता कुमार को न सिर्फ पूरी जानकारी रही होगी, बल्कि उनकी मिलीभगत भी रही होगी । इस तरह की चर्चाओं ने मेरठ के रोटेरियंस, खासकर पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के सामने एक बड़ा नैतिक संकट खड़ा कर दिया है । संगीता कुमार काफी सक्रिय पूर्व गवर्नर रही हैं, और प्रायः प्रत्येक गवर्नर के कार्यक्रमों में सक्रियता और दिलचस्पी के साथ भूमिका निभाती रही हैं । ऐसे में, संगीता कुमार के बेटे से जुड़े मामले में आम रोटेरियंस की तरफ से उनसे भी सवाल पूछे जाने लगे । पूर्व गवर्नर्स के लिए मुसीबत की बात यह हुई कि पूछे गए सवालों का वह क्या जबाव दें; लिहाजा उन्होंने चुप रहने और आम रोटेरियंस से बच कर रहने में ही अपनी अपनी भलाई देखी/पहचानी । पूर्व गवर्नर्स के इस रवैये ने श्रीहरी गुप्ता की उम्मीदों को तगड़ा झटका दिया है ।
संगीता कुमार के बेटे की कारस्तानी ने वर्ष 2018-19 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए होने वाले चुनाव को दिलचस्प तरीके से प्रभावित किया है । डिस्ट्रिक्ट 3100 में रोटेरियंस की जुबान पर संगीता कुमार के बेटे के कारनामे ही हैं - ऐसे में, मेरठ का होने के कारण श्रीहरी गुप्ता के लिए किसी से रोटरी की और चुनाव की बात तक कर पाना मुश्किल हो रहा है । उनके नजदीकियों के अनुसार, वह जिससे भी अपनी उम्मीदवारी के संबंध में बात करने की कोशिश करते हैं, संगीता कुमार के बेटे का जिक्र छेड़ देता है और उलटे श्रीहरी गुप्ता से ही सवाल पूछने लगता है । श्रीहरी गुप्ता को इस बात का भी ध्यान रखना पड़ता है कि वह किसी से कहीं कोई ऐसी बात न कह दें, जो उनकी चुनावी राजनीति के लिए मुसीबत बन जाए डिस्ट्रिक्ट 3100 की पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संगीता कुमार के बेटे की कारस्तानी के खुलासे ने देशभर में तो बबाल मचाया हुआ है, लेकिन डिस्ट्रिक्ट 3100 के प्रमुख लोगों ने मुँह पर ताले डाले हुए हैं । आम रोटेरियन लेकिन सवाल पूछना चाहता है और जब भी उसे मेरठ का कोई प्रमुख रोटेरियन हाथ लगता है, तो वह सवाल जरूर पूछता है । मेरठ के पूर्व गवर्नर्स तो आम रोटेरियंस के हाथ आने से बच रहे हैं, लेकिन श्रीहरी गुप्ता को तो आम रोटेरियंस के पास जाना ही है - आम रोटेरियंस से लेकिन उन्हें जब संगीता कुमार के बेटे के कारनामों से जुड़े सवाल सुनने को मिलते हैं, तो उन्हें अपनी उम्मीदवारी मुसीबत में फँसती हुई महसूस होती है इस तरह, संगीता कुमार के बेटे की पोल-पट्टी खुलने से डिस्ट्रिक्ट में जो माहौल बना है - उसके कारण श्रीहरी गुप्ता की उम्मीदवारी के सामने दोहरा संकट खड़ा हो गया है ।

Monday, February 20, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में दीपक बाबु ने चक्रेश लोहिया से निपटने के नाम पर डिस्ट्रिक्ट को संभलने से पहले ही फिर से मुसीबत में डालने/फँसाने की तैयारी कर ली है क्या ?

मुरादाबाद । डिस्ट्रिक्ट 3100 में लोगों को अच्छी खबर मिली, तो उसके पीछे पीछे बुरी खबर भी आ पहुँची है - और इस तरह डिस्ट्रिक्ट के नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस से बाहर आने के लोगों के सारे उत्साह पर पानी फिरता दिख रहा है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनते बनते रह गए जो दीपक बाबु डिस्ट्रिक्ट की बर्बादी के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार रहे, उन्हीं दीपक बाबु के नजदीकियों की तरफ से पटरी पर लौटते डिस्ट्रिक्ट में एक बार फिर बबाल मचाने की तैयारी शुरू हो गई है - और इस तरह उस उम्मीद का धुआँ निकलता नजर आ रहा है, जिसमें सबक सीखने का अहसास था । जून से पहले पहले वर्ष 2018-19 के गवर्नर पद के लिए चक्रेश लोहिया की उम्मीदवारी घोषित होने के बाद जिस तरह अंशुल शर्मा की उम्मीदवारी प्रस्तुत हुई है, उसमें डिस्ट्रिक्ट के लोगों को अनर्थ के पुनः उभरने के संकेत दिख रहे हैं । लगता है कि डिस्ट्रिक्ट में जिस चुनावी राड़ ने डिस्ट्रिक्ट को नॉन-डिस्ट्रिक्ट के स्टेटस में पहुँचाया, वह राड़ अभी भी जारी है और जो चक्रेश लोहिया व अंशुल शर्मा के बीच के संभावित चुनावी मुकाबले में एक बार फिर मुखर होगी । मजे की बात यह है कि अभी हालाँकि यही तय नहीं है कि जून से पहले वर्ष 2018-19 के गवर्नर पद के लिए होने वाला चुनाव मुरादाबाद क्षेत्र से ही होगा - यह तय भले ही न हुआ हो, लेकिन मुरादाबाद में चुनावी युद्ध के लिए सेनाएँ सजनी शुरू हो गई हैं ।
उल्लेखनीय है कि अभी सिर्फ यह तय हुआ है कि डिस्ट्रिक्ट 3100 का नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस 30 जून को खत्म हो जायेगा, तथा एक जुलाई से डिस्ट्रिक्ट - आधिकारिक रूप से डिस्ट्रिक्ट हो जायेगा । वर्ष 2017-18 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नहीं होगा, उसकी जगह रोटरी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि के रूप में डिस्ट्रिक्ट 3011 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजय खन्ना ही डिस्ट्रिक्ट की जिम्मेदारी संभालेंगे, जिनकी अथक कोशिशों का ही नतीजा है कि डिस्ट्रिक्ट एक वर्ष से भी कम समय में नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस से बाहर आ गया है । तय हुआ है कि वर्ष 2018-19 के गवर्नर के लिए जून से पहले चुनाव होगा, और उससे अलगे वर्ष के गवर्नर के लिए अगस्त/सितंबर तक चुनाव करा लिया जायेगा । यह भी तय हो गया है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के चुनाव जोन-वाइज होंगे और इसके लिए डिस्ट्रिक्ट को तीन जोन में बाँटा गया है - उल्लेखनीय है कि यह फैसला डिस्ट्रिक्ट की काउंसिल ऑफ गवर्नर्स ने पहले भी किया था, लेकिन जिसे दीपक बाबु ने अपने शातिरपने में लागू नहीं होने दिया था । एक बड़ी बात यह तय हुई है कि पिछले वर्षों में जो भी लोग उम्मीदवार बने हैं, वह तीन वर्षों के लिए उम्मीदवार नहीं हो सकेंगे । जो बात अभी तय होनी है, वह यह है कि जोन-वाइज जो चुनाव होंगे, उसमें जोन्स का क्रम क्या बनेगा । डिस्ट्रिक्ट के नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस में जाने से पहले लगातार दो वर्ष चूँकि मेरठ से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रहे हैं, इसलिए मुरादाबाद के लोग अपना पहला नंबर मान कर चल रहे हैं - और इसीलिए मुरादाबाद में चुनाव की तैयारी होने लगी है ।
चुनाव की तैयारी की शुरुआत चक्रेश लोहिया ने की, और उनकी तैयारी से मुरादाबाद के रोटरियंस के बीच जो गर्मी पैदा हुई - उसकी प्रतिक्रिया के रूप में अंशुल शर्मा की उम्मीदवारी सामने आई । इस घटनाचक्र ने लोगों को दिवाकर अग्रवाल और दीपक बाबु के बीच हुए चुनावी घमासान के परिदृश्य को याद करा दिया - जिसमें झगड़े का पड़ा बीज नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस के फल के रूप में पनपा । उल्लेखनीय है कि चक्रेश लोहिया, दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी के प्रमुख सेनापतियों में थे - तो अंशुल शर्मा, दीपक बाबु की उम्मीदवारी के सेनापतियों में थे । यूँ तो अंशुल शर्मा की उम्मीदवारी में कुछ भी गलत नहीं है; जितना हक चक्रेश लोहिया को उम्मीदवारी प्रस्तुत करने का है, उतना ही हक अंशुल शर्मा को भी है । लेकिन सामाजिक/राजनीतिक जीवन में जेस्चर जैसी चीज भी होती है तथा उसका एक संदेश और महत्त्व होता है । अंशुल शर्मा की उम्मीदवारी ने लोगों को बुरी खबर का अहसास इसलिए कराया, क्योंकि डिस्ट्रिक्ट में पिछले दो-तीन वर्षों में जो कुछ भी बुरा हुआ और डिस्ट्रिक्ट नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस में गया - उसके लिए प्रमुख रूप से दीपक बाबु और उनके नजदीकियों की राजनीति को जिम्मेदार माना/ठहराया गया और इसके लिए डिस्ट्रिक्ट व रोटरी में उनकी भारी फजीहत हुई । उम्मीद की जा रही थी कि अपनी फजीहत से सबक लेकर दीपक बाबु और उनके संगी-साथी अब जल्दी से ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे डिस्ट्रिक्ट में फिर से झगड़े-फसाद शुरू हों । अंशुल शर्मा की उम्मीदवारी से लेकिन डिस्ट्रिक्ट के लोगों की उक्त उम्मीद हवा हो गई है ।
अंशुल शर्मा को रोटरी में अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, और रोटरी में उनकी पहचान कुल मिला कर दीपक बाबु के चुनाव में निभाई गई उनकी भूमिका से ही है - लेकिन जिसने दीपक बाबु और डिस्ट्रिक्ट को सिर्फ बदनामी ही दिलवाई है । अंशुल शर्मा का अपने क्लब में भी झगड़ा हुआ, जिसके चलते उन्हें अपना क्लब छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा । चक्रेश लोहिया के नाम पर भी चुनावी झमेलों में शामिल होने के आरोप रहे हैं, लेकिन उनका प्रशासनिक अनुभव भी रहा है । कई डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के साथ उन्होंने औपचारिक तथा अनौपचारिक रूप से निर्णायक समझे जाने वाले काम किए हैं । जो लोग चक्रेश लोहिया को पसंद नहीं भी करते हैं, उनका मानना और कहना है कि चक्रेश लोहिया और अंशुल शर्मा के बीच कोई तुलना नहीं है - और अंशुल शर्मा की उम्मीदवारी में चक्रेश लोहिया के साथ उतावलेपूर्ण ढंग से दुश्मनी निकालने/दिखाने जैसा भाव है । मुरादाबाद में कई लोगों का मानना और कहना है कि अंशुल शर्मा की उम्मीदवारी प्रस्तुत करवा कर दीपक बाबु ने चक्रेश लोहिया की एक तरह से मदद ही की है - थोड़ा ठहर कर ठंडे दिमाग से एक बेहतर उम्मीदवार खोजा/लाया जाता, तो चक्रेश लोहिया को चुनावी मुसीबत में डाला जा सकता था । लोगों को लग रहा है कि चक्रेश लोहिया से निपटने की हड़बड़ी में दीपक बाबु और उनके संगी-साथियों ने अंशुल शर्मा की उम्मीदवारी को प्रस्तुत करके यही संकेत दिया है, कि पीछे जो कुछ हुआ है उससे उन्होंने कोई सबक नहीं सीखा है और उन्होंने डिस्ट्रिक्ट को संभलने से पहले ही फिर मुसीबत में डालने/फँसाने के लिए कमर कस ली है ।