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Sunday, July 23, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी के लिए उनके अपने डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर अनिल अग्रवाल क्या सचमुच बड़ी मुसीबत बन गए हैं ?

जयपुर । अशोक गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट में जिन अनिल अग्रवाल को ठुड्डे लाइन लगा रखा है, वही अनिल अग्रवाल इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी लड़ाई में अशोक गुप्ता के लिए मुसीबत बन गए हैं - और अशोक गुप्ता के लिए यह समझना मुश्किल बना हुआ है कि अनिल अग्रवाल से वह कैसे निपटें ? अभी पिछले दिनों ही रोटरी क्लब जयपुर बापूनगर के अधिष्ठापन समारोह में अशोक गुप्ता के 'मैन फ्राईडे' के रूप में पहचाने जाने वाले अजय काला ने अनिल अग्रवाल से इस मामले में बात करने का प्रयास भी किया, किंतु अजय काला का प्रयास सफल नहीं हो सका । मनीपाल यूनिवर्सिटी के ऑडीटोरियम में आयोजित हुए रोटरी क्लब जयपुर बापूनगर के अधिष्ठापन समारोह में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अजय काला इंस्टॉलेशन ऑफीसर के रूप में तथा तथा पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल अग्रवाल इंडक्शन ऑफीसर के रूप में मौजूद थे । अजय काला इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी में डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुने गए हैं । अजय काला और अनिल अग्रवाल की वैसे तो बिलकुल नहीं बनती है, लेकिन रोटरी क्लब जयपुर बापूनगर के आयोजन में जब दोनों के लिए एक दूसरे के नजदीक आने का मौका बना, तो अजय काला ने अशोक गुप्ता के प्रति अनिल अग्रवाल की नाराजगी को कम करने के लिए कोशिश की - लेकिन जैसा कि पहले ही बता दिया गया है कि उनकी कोशिश कामयाब नहीं हो सकी ।
अशोक गुप्ता और उनके संगी-साथी यूँ तो अनिल अग्रवाल को कुछ मानते/समझते नहीं हैं और लोगों के बीच लगातार यह बताते/जताते रहते हैं कि अनिल अग्रवाल के बस की कुछ है ही नहीं, और डिस्ट्रिक्ट से लेकर ऊपर की रोटरी तक में अनिल अग्रवाल के लिए कोई जगह नहीं है । पिछले रोटरी वर्ष में दुबई में हुए जोन इंस्टीट्यूट का निमंत्रण पाने के लिए अनिल अग्रवाल ने एड़ी-चोटी को जोर लगा लिया था, लेकिन अशोक गुप्ता ने उनकी ऐसी घेराबंदी करवाई हुई थी कि अनिल अग्रवाल इंस्टीट्यूट में फटक तक नहीं सके । अशोक गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट में और डिस्ट्रिक्ट के बाहर अनिल अग्रवाल को बेइज्जत तो बहुत किए रखा, लेकिन अब इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में उन्हीं अनिल अग्रवाल ने अशोक गुप्ता के लिए खासी फजीहत खड़ी की हुई है । अशोक गुप्ता को दरअसल उस समय तगड़ा झटका लगा, जब अलग अलग जगहों से उन्हें पता चला कि अनिल अग्रवाल अलग अलग डिस्ट्रिक्ट्स के लोगों से, खासतौर से इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए चुने गए पूर्व गवर्नर्स से बात कर रहे हैं और उन्हें अशोक गुप्ता के कई कारनामों से परिचित कराते हुए उनके खिलाफ भड़का रहे हैं । शुरू में तो अशोक गुप्ता ने इन बातों को ध्यान देने लायन नहीं समझा; उन्होंने माना/समझा कि अनिल अग्रवाल हैं क्या, जो लोग उनकी बात को गंभीरता से लेंगे - लेकिन उन्हें जब लगातार इस तरह की बातें सुनने को मिली हैं, तो उनका माथा ठनका है ।
अनिल अग्रवाल अपने आप को पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू के बड़े खासमखास के रूप में 'दिखाते' हैं, इससे कुछेक लोग उन्हें गंभीरता से ले भी लेते हैं । अशोक गुप्ता के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि अनिल अग्रवाल के छेड़े अभियान ने नोमीनेटिंग कमेटी के सदस्यों के बीच अजय काला को खासा बदनाम कर दिया हुआ है, जिस कारण बाकी सदस्य अजय काला को अशोक गुप्ता के जासूस के रूप में देखते हैं और उनसे राजनीतिक बात करने से बचते हैं, जिस कारण अशोक गुप्ता को उचित फीडबैक नहीं मिल पा रहा है । अशोक गुप्ता के साथ समस्या की बात यह है कि दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स में उनका कोई एक्सपोजर नहीं है; वहाँ बल्कि उनकी एक नकारात्मक पहचान है, उन्हें एक घमंडी व्यक्ति के रूप में देखा/पहचाना जाता है; हद की बात तो यह कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के मौके पर उनकी वकालत करने वाला कोई नहीं है । उनके अपने डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स उनके खिलाफ भले ही कुछ न कहते हों, लेकिन उनकी वकालत भी नहीं करते हैं । अशोक गुप्ता ने अजय काला को नोमीनेटिंग कमेटी के लिए जिस तरह चुनवाया है, उससे उनके अपने समझे जाने वाले कई पूर्व गवर्नर्स खफा हैं । उन्हें लगता है कि अशोक गुप्ता को हर जगह आगे करने के लिए अजय काला ही मिलते हैं, तो अजय काला से ही फिर अपना काम करवा लें । इस परिदृश्य के चलते अनिल अग्रवाल का अशोक गुप्ता विरोधी अभियान विश्वसनीय बन जाता है - और इस तरह अशोक गुप्ता को भी लग रहा है कि अनिल अग्रवाल कुछ न होते हुए भी उनके लिए बड़ी मुसीबत बन गए हैं ।

Wednesday, October 5, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए रंजन ढींगरा की उम्मीदवारी की सुशील गुप्ता द्धारा की जा रही वकालत में अशोक गुप्ता को अपने साथ धोखा क्यों नज़र आ रहा है ?

नई दिल्ली । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के संदर्भ में पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता के विरोधाभासी रवैये ने अशोक गुप्ता और उनके नजदीकियों व समर्थकों को चक्कर में डाला हुआ है । डिस्ट्रिक्ट 3052 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अशोक गुप्ता अगले रोटरी वर्ष में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की तैयारी करते हुए सुने/बताए जा रहे हैं, और इसके लिए वह पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट कल्याण बनर्जी, पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता और मौजूदा इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के समर्थन का दावा करते हैं । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए डिस्ट्रिक्ट 3011 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रंजन ढींगरा की उम्मीदवारी भी आने की चर्चा से सुशील गुप्ता का अशोक गुप्ता को समर्थन संदेह के घेरे में आ गया है । रंजन ढींगरा को सुशील गुप्ता के बड़े खास नजदीकियों के रूप में देखा/पहचाना जाता है; और इसी बिना पर माना/समझा गया कि रंजन ढींगरा यदि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए उम्मीदवार हो रहे हैं - तो निश्चित ही सुशील गुप्ता के साथ विचार-विमर्श करके और उनके समर्थन का आश्वासन मिलने के बाद ही हो रहे हैं । हालाँकि इस मानने/समझने को गलत साबित करने के लिए इस बीच सुशील गुप्ता ने रंजन ढींगरा के कुछेक असाइनमेंट दूसरे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को दिलवा दिए । सुशील गुप्ता की इस कार्रवाई ने लोगों को हैरान भी किया । दरअसल रोटरी में कोई इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकता कि सुशील गुप्ता, रंजन ढींगरा से असाइनमेंट वापस ले/लिबवा कर किसी दूसरे को दे/दिलवा देंगे । पर सुशील गुप्ता की इस कार्रवाई ने अशोक गुप्ता को राहत की साँस दी थी और उन्होंने विश्वास कर लिया था कि रंजन ढींगरा की उम्मीदवारी में सुशील गुप्ता का कोई हाथ नहीं है, और सुशील गुप्ता का समर्थन उनकी उम्मीदवारी को ही मिलेगा । अभी पिछले दिनों लेकिन अशोक गुप्ता को यह जान/सुन कर चक्कर सा आ गया कि सुशील गुप्ता रोटरी इंटरनेशनल के जोन 4 के विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स में रंजन ढींगरा की उम्मीदवारी की वकालत कर रहे हैं ।
अशोक गुप्ता दरअसल यह देख/जान कर हैरान हुए कि पिछले दिनों जोन 4 के कुछेक डिस्ट्रिक्ट्स के महत्त्वपूर्ण आयोजनों में रंजन ढींगरा को बहुत अहमियत देते हुए निमंत्रण मिले और रंजन ढींगरा उन आयोजनों में शामिल हुए । डिस्ट्रिक्ट 3080 का समर्थन एक अन्य संभावित उम्मीदवार दीपक कपूर को मिलने का अनुमान लगाया जाता है, किंतु उसके एक प्रमुख आयोजन में रंजन ढींगरा की उल्लेखनीय उपस्थिति और संलग्नता देखी गई । जोन 4 के डिस्ट्रिक्ट्स में रंजन ढींगरा की अचानक से बढ़ी सक्रियता के बारे में जान/सुन कर अशोक गुप्ता का माथा ठनका, तो उन्होंने अपने स्तर पर सारे माजरे को जानने/समझने की कोशिश की, और अपनी कोशिश में उन्हें पता चला कि रंजन ढींगरा की इस अचानक बढ़ी सक्रियता में सुशील गुप्ता का भी 'योगदान' है । यह पता चलने पर अशोक गुप्ता को सुशील गुप्ता के रवैये पर हैरानी भी हुई, और साथ ही उन्होंने यह भी समझ लिया कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी राजनीति में सुशील गुप्ता दोहरा खेल खेल रहे हैं ।
इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी राजनीति के समीकरण को जानने/समझने वाले तथा बदलते समीकरणों पर निगाह रखने वाले लोगों का मानना और कहना है कि अगले रोटरी वर्ष में होने वाला इंटरनेशनल डायरेक्टर पद का चुनाव सुशील गुप्ता के 'भविष्य' के लक्ष्य के लिहाज से बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं, और अपने 'भविष्य' के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ही वह इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में अपनी भूमिका निभायेंगे । इसी लिहाज से माना जा रहा है कि 'सारे अण्डे एक ही टोकरी में न रखने' के सिद्धांत पर विश्वास और अमल करते हुए सुशील गुप्ता किसी एक उम्मीदवार की ही सरपरस्ती नहीं करेंगे । सुशील गुप्ता के नजदीकियों का भी कहना है कि सुशील गुप्ता अभी अशोक गुप्ता और रंजन ढींगरा - दोनों के ही साथ खड़े हैं; और वह देखेंगे कि चुनाव अभियान में किसका पलड़ा भारी रहता है । स्वाभाविक रूप से जिसका पलड़ा भारी दिखेगा - अंततः वह उसके साथ हो लेंगे । अभी सुशील गुप्ता ने एक सुरक्षित रास्ता यह निकाला/बनाया हुआ है कि वह रंजन ढींगरा के प्रति हमदर्दी रखने वालों के सामने रंजन ढींगरा की बात करते हैं, और अशोक गुप्ता के प्रति सहानुभूति रखने वाले लोगों के सामने अशोक गुप्ता की बात करते हैं । उनकी इस रणनीति में वह यदि रंजन ढींगरा के ज्यादा समर्थन में दिख रहे हैं, तो इसका कारण यही माना/समझा जा रहा है कि जोन 4 के अधिकतर डिस्ट्रिक्ट्स में रंजन ढींगरा की उम्मीदवारी के प्रति हमदर्दी रखने वाले लोग ज्यादा हैं; और आश्चर्य की बात यह है कि कई डिस्ट्रिक्ट्स में लोग अशोक गुप्ता को ज्यादा जानते/पहचानते भी नहीं हैं ।
इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी राजनीति के समीकरणों पर निगाह रखने वाले लोगों का मानना और कहना है कि अशोक गुप्ता जिस तरह से अपनी उम्मीदवारी को बड़े नेताओं के भरोसे टिकाए/बनाए हुए हैं, और उम्मीद लगाए हुए हैं कि उन्हें तो मनोज देसाई ही इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवा देंगे - उसके कारण अशोक गुप्ता अपने समर्थन-आधार को और कमजोर करने का ही काम कर रहे हैं । लोगों को हैरानी है कि अशोक गुप्ता इंटरनेशनल डायरेक्टर बनना चाहते हैं, लेकिन जोन 4 के अधिकतर डिस्ट्रिक्ट्स में न तो उनकी कोई सक्रियता है, और न उनके भरोसे के कोई लोग हैं । आईआईएस यूनीवर्सिटी के स्वयंभू उपकुलपति के रूप में अशोक गुप्ता ने रोटरी के बड़े नेताओं को डॉक्टरेट बाँट कर उन्हें खुश करने का तो प्रयास किया, लेकिन रोटेरियंस के बीच जाने की उन्होंने कभी कोई कोशिश नहीं की । अशोक गुप्ता ने 'मैं तुम्हें डॉक्टरेट दूँगा, तुम मुझे इंटरनेशनल डायरेक्टर का पद देना' फार्मूले को अपना कर इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने की जो योजना बनाई थी, वह तो काम करती हुई दिख नहीं रही है; और भरत पांड्या के मुकाबले उनकी स्थिति को बहुत ही कमजोर माना/समझा जा रहा है । दरअसल इसी कारण से सुशील गुप्ता ने रंजन ढींगरा की उम्मीदवारी को हवा दी है । रोटरी के विभिन्न प्रोजेक्ट्स में अपनी संबद्धता के चलते रंजन ढींगरा का अपना जो काम है, तथा विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स में रोटेरियंस के बीच अपनी जो पहचान व सक्रियता है - उसमें सुशील गुप्ता के समर्थन के कारण और इजाफ़ा ही हुआ है । इस बात ने अशोक गुप्ता के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है; उन्हें और उनके समर्थकों को लग रहा है कि सुशील गुप्ता उनके साथ धोखा कर रहे हैं : सुशील गुप्ता एक तरफ तो अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी का समर्थन करने की बात कर रहे हैं; लेकिन व्यवहार में वह रंजन ढींगरा की उम्मीदवारी को प्रमोट कर रहे हैं । सुशील गुप्ता के इस विरोधाभासी व्यवहार का कारण दूसरों को भले ही समझ में आ रहा हो - किंतु अशोक गुप्ता और उनके नजदीकी इस 'कारण' को तो पहचानने/देखने को तैयार नहीं हैं । वह तो बस सुशील गुप्ता को ही कोसने में लगे हैं ।

Monday, August 3, 2015

रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन जब उदयपुर में राजा साबू से मिलेंगे तो क्या उनसे यह कहने का साहस करेंगे कि जब उनके जैसे वरिष्ठ लोग ही रोटरी में चुनावी आग भड़कायेंगे, तो फिर रोटरी में चुनावी झगड़ों पर लगाम कैसे लगेगी ? और क्या वह राजा साबू को अपनी वह चिट्ठी पढ़वाने की कोशिश करेंगे, जो उन्होंने क्लब-अध्यक्षों को लिखी है ?

उदयपुर । रोटरी क्लब उदयपुर मीरा द्वारा कुछेक अन्य क्लब के सहयोग से होटल शौर्यगढ़ में होस्ट की जा रही 4 अगस्त की इंटरसिटी मीटिंग में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन जब अपना भाषण दे रहे होंगे और उस भाषण को दूसरे लोगों के साथ पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू भी सुन रहे होंगे, तो वह क्षण 'विरोधाभासों के आमने-सामने होने' का एक विलक्षण क्षण होगा । केआर रवींद्रन व राजा साबू के इस समय आमने-सामने होने को 'विरोधाभासों के आमने-सामने होने' के रूप में इसलिए देखा जा रहा है - क्योंकि ये दोनों इस समय रोटरी को लेकर परस्पर विरोधी रवैया अपनाए हुए हैं : एक तरफ केआर रवींद्रन रोटरी में चुनाव संबंधी समस्याओं से दो-चार होते हुए भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका के क्लब-अध्यक्षों को चुनावी प्रक्रिया में हिस्सेदारी निभाने को लेकर हतोत्साहित कर रहे हैं; तो दूसरी तरह राजा साबू अपने ही डिस्ट्रिक्ट में चुनावी लड़ाई को संभव बनाने के लिए तन-मन से क्लब-अध्यक्षों को प्रोत्साहित करने में लगे हुए हैं । मौजूदा प्रेसीडेंट और भूतपूर्व प्रेसीडेंट के इस परस्पर विरोधी रवैये की टाइमिंग भी बिलकुल मैच करती है । केआर रवींद्रन ने करीब करीब जुलाई के दूसरे सप्ताह से भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका के क्लब-अध्यक्षों को चुनावी प्रक्रिया के प्रति आगाह करते हुए पत्र भेजना शुरू किया; और ठीक इसी समय राजा साबू ने अपने डिस्ट्रिक्ट के गवर्नर्स की फौज अपने डिस्ट्रिक्ट में चुनावी झमेला खड़ा करने के लिए उतार दी । राजा साबू के दिशा-निर्देशन में दूसरे पूर्व गवर्नर्स के साथ साथ निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दिलीप पटनायक, मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डेविड हिल्टन, पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास और खुद राजा साबू चुनावी प्रक्रिया को खुले आम प्रोत्साहित करने तथा संभव बनाने में जुट गए हैं । 
राजा साबू ने बता/दिखा दिया है कि रोटरी में चुनावी झमेलों को लेकर व्यक्त की जा रहीं केआर रवींद्रन की चिंताओं की उन्हें कोई परवाह नहीं है; और चुनावी झमेलों को रोकने के लिए केआर रवींद्रन जो उपाय तय कर रहे हैं, उन्हें उनकी भी चिंता नहीं है । मजे की बात यह है कि ऐसा करके राजा साबू सिर्फ केआर रवींद्रन की ही फजीहत नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपनी खुद की फजीहत भी कर रहे हैं । कुछ दिन पहले तक खुद राजा साबू ही उपदेश दिया करते थे कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए चुनाव की नौबत नहीं आने देना चाहिए, और नोमीनेटिंग कमेटी द्वारा चुने गए अधिकृत उम्मीदवार को ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी के रूप में स्वीकार कर लेना चाहिए । नोमीनेटिंग कमेटी द्वारा चुने गए अधिकृत उम्मीदवार को चेलैंज करने तथा चेलैंज को समर्थन देने का राजा साबू बड़ा विरोध किया करते थे । दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स में भाषण देते हुए राजा साबू जब तब अपने डिस्ट्रिक्ट में अधिकृत उम्मीदवार के चेलैंज न होने को लेकर अपनी ही पीठ थपथपाते रहते थे । लेकिन अब उन्हीं राजा साबू ने अपने डिस्ट्रिक्ट में चुने गए अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ न सिर्फ मोर्चा खोल दिया है, बल्कि मोर्चे की अगुवाई करने लगे हैं । नोमीनेटिंग कमेटी द्वारा चुने गए अधिकृत उम्मीदवार को चेलैंज करने वाले उम्मीदवार को कॉन्करेंस दिलवाने में राजा साबू ने न सिर्फ पूर्व गवर्नर्स की ड्यूटी लगाई, बल्कि खुद भी ड्यूटी निभाई । दरअसल राजा साबू अभी तक पर्दे के पीछे से चालें चल रहे थे - लेकिन मात पर मात खाए जा रहे थे; जिससे उन्होंने समझ लिया कि अब उन्हें पर्दा हटा कर खुद ही मोर्चा सँभालना होगा । इसे रोटरी की बदकिस्मती ही कहा जायेगा कि जिस समय मौजूदा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट माहौल को सुधारने तथा रोटरी की छवि को दाग-धब्बों से बचाने की चिंता और प्रयास कर रहा है, ठीक उसी समय एक पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट माहौल को बिगाड़ने तथा रोटरी की छवि पर कीचड़ मलने के काम में अपनी सारी ऊर्जा लगा रहा है । 
केआर रवींद्रन और राजा साबू जो कर रहे हैं, वह अपने आप में हालाँकि कोई नई बात नहीं है - लेकिन जिस तरीके से कर रहे हैं, वह अपने आप में विलक्षण जरूर है । रोटरी में हर इंटरनेशनल प्रेसीडेंट रोटरी में सद्भाव बनाए रखने की और चुनावी झगड़ों में न पड़ने की सलाह देता ही है, और प्रायः हर पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजनीति भी करता है - लेकिन रोटरी के 110 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट क्लब-अध्यक्षों को संबोधित करते हुए पत्र लिख कर चुनावी झमेलों से आगाह करे, उन्हें चेतावनी दे और सख्त कार्रवाई करने की धमकी दे; और इसी के साथ 110 वर्षों के इतिहास में शायद यह भी कभी नहीं हुआ होगा कि एक पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट अपनी सारी मर्यादा को ताक पर रख कर पूरी बेशर्मी के साथ चुनावी झगड़े को न सिर्फ प्रोत्साहित करे, बल्कि उसका सक्रिय हिस्सा और सरगना बन जाए । राजा साबू नियम-कानून की और आदर्श की ऊँची ऊँची बातें करते हुए शराफत का चोला तभी तक पहने हुए थे, जब तक उनकी इच्छा के अनुरूप काम हो रहे थे; इस बार लेकिन जैसे ही उनकी इच्छा के विपरीत काम हुआ, राजा साबू ने शराफत का चोला उतारने में जरा भी देर नहीं लगाई ।
राजा साबू को अपने ही डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में दरअसल पिछले रोटरी वर्ष में तब झटका लगा, जब डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में नोमीनेटिंग कमेटी ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के अधिकृत उम्मीदवार के रूप में रोटरी क्लब हिमालयन रेंजेस के टीके रूबी को चुन लिया । राजा साबू इस चुनाव से इतना भड़के कि षड्यंत्रपूर्ण तरीके से उन्होंने इस चुनाव को ही निरस्त करवा दिया । रोटरी क्लब हिमालयन रेंजेस ने इस निरस्तीकरण के खिलाफ रोटरी इंटरनेशनल में अपील की । राजा साबू ने इस अपील के समर्थन में दी गईं कॉन्करेंस को वापस कराने लिए पूर्व गवर्नर्स की फौज को मैदान में उतार दिया, जिससे कि अपील स्वतः खारिज हो जाए और विचार के लिए स्वीकार ही न हो । राजा साबू को दूसरा झटका यह लगा कि उनकी पूरी फौज एक भी कॉन्करेंस को वापस नहीं करवा सकी और उक्त अपील विचार के लिए स्वीकार हो गई । तब राजा साबू ने उक्त अपील पर सुनवाई करने वाली कमेटी के सदस्यों को प्रभावित करके अपील को खारिज कराने का प्रयास किया, लेकिन वहाँ भी उन्हें मुँह की खानी पड़ी । रोटरी इंटरनेशनल ने टीके रूबी के चुनाव को सही ठहराते हुए आगे की चुनावी प्रक्रिया को पूरा करने का फैसला सुनाया । रोटरी इंटरनेशनल के इस फैसले ने पर्दे के पीछे से की जा रही राजा साबू की राजनीति की सारी हवा निकाल दी । हवा निकली तो राजा साबू ने शराफत का चोला भी उतार फेंका; उन्होंने समझ लिया कि उनके पर्दे के पीछे रहने से काम नहीं चलेगा - और तब वह पर्दा हटा कर मैदान में सीधे उतर आए । अपनी इज्जत का वास्ता देकर राजा साबू ने चेलैंजर उम्मीदवार के पक्ष में कॉन्करेंस इकट्ठा करवाईं । चेलैंजर उम्मीदवार के पक्ष में कितनी कॉन्करेंस इकट्ठा हुई हैं, इसकी डिस्ट्रिक्ट के लोगों को अभी कोई आधिकारिक जानकारी तो नहीं मिली है - लेकिन चर्चा है कि 45 से 50 के बीच क्लब्स की कॉन्करेंस जुटा ली गईं हैं, जिनमें पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजा साबू तथा पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास के क्लब की भी कॉन्करेंस हैं । 
इसे रोटरी के लिए दुर्भाग्य का समय ही माना/कहा जायेगा कि मौजूदा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन क्लब-अध्यक्षों को चुनावी राजनीति से बचने व दूर रहने की सलाह दे रहे हैं, किंतु ठीक उसी समय एक पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजा साबू अपने डिस्ट्रिक्ट में चुनावी राजनीति के लिए मंच तैयार करने में जुटे हुए हैं । केआर रवींद्रन और राजा साबू ने चुनाव संबंधी जो परस्पर विरोधी स्टैंड लिए है, वह स्टैंड लेने के बाद दोनों एक दूसरे के सामने पहली बार अब उदयपुर में पड़ेंगे । डिस्ट्रिक्ट 3052 की इंटरसिटी मीटिंग में दोनों ही ऊँची ऊँची बातें तो हाकेंगे ही, उसके अलावा भी उदयपुर में दो-ढाई दिन रहते हुए वह रोटरी की समस्याओं पर बातें करेंगे । वह क्या बातें करेंगे, यह तो वह जानें - लेकिन रोटेरियंस क्या यह उम्मीद करें कि केआर रवींद्रन, राजा साबू से यह कहने का साहस करेंगे कि जब उनके जैसे वरिष्ठ लोग ही रोटरी में चुनावी आग भड़कायेंगे, तो फिर रोटरी में चुनावी झगड़ों पर लगाम कैसे लगेगी ? केआर रवींद्रन क्या राजा साबू को अपनी वह चिट्ठी पढ़वाने की कोशिश करेंगे, जो उन्होंने क्लब-अध्यक्षों को लिखी है ?
केआर रवींद्रन की चिट्ठी जो कोई पढ़ना चाहे, वह यहाँ पढ़ सकता है :