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Wednesday, June 27, 2018

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल में मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की तरफ से डायरेक्टर बनने की जेपी सिंह की तैयारी को रोकने की अरविंद संगल की कोशिश फेल तो हुई ही, अदालत से अरविंद संगल को कड़ी फटकार और खानी पड़ी

नई दिल्ली । जेपी सिंह को इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने से रोकने की कोशिश में अरविंद संगल को अदालत से जो फटकार पड़ी है, उससे एक बार फिर साबित हो गया है कि झूठ और 'ठगी' के सहारे ज्यादा दिनों तक राजनीति नहीं की जा सकती है । लायंस इंटरनेशनल की कन्वेंशन में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए जेपी सिंह की उम्मीदवारी प्रस्तुत होने के खिलाफ बीती 31 मई को अदालत से स्टे ले कर अरविंद संगल ने जो बड़ा 'धमाका' करने का भ्रम फैलाया था, उसका नकली धुँआ 25 जून को आए एक अन्य अदालती फैसले से हवा हो गया है । इस मामले में गंभीर पहलू यह सामने आया है कि मामला सिर्फ कानूनी हार-जीत का ही नहीं है, कानूनी मामले में 'ठगी' करने का भी है । अरविंद संगल यदि सिर्फ कानूनी लड़ाई हारे होते, तो बात ज्यादा गंभीर नहीं बनती; अरविंद संगल के लिए फजीहत की बात यह हुई कि कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए उन्होंने जिस तरह के दाँव-पेंच इस्तेमाल किए, उसके चलते उन्हें अदालत की फटकार भी खानी पड़ी । अदालती फैसले में अरविंद संगल पर अदालत को गुमराह करने तथा अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगाया गया है । स्वयं अदालत के इस आरोप से साबित होता है कि अरविंद संगल एक पहले से ही हारी हुई लड़ाई लड़ रहे थे, जिसमें कुछ देर के लिए उन्होंने भले ही सनसनी पैदा कर दी थी - लेकिन जिसमें अंततः उन्हें कुछ मिलना नहीं था । लगता है कि जेपी सिंह और उनके पीछे खड़ी लीडरशिप का विरोध कर रहे तेजपाल खिल्लन और सुशील अग्रवाल को भी इस बात का आभास था, और इसीलिए वह अरविंद संगल से दूरी न सिर्फ बना चुके थे, बल्कि 'दिखा' भी रहे थे । जेपी सिंह को इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने से रोकने की लड़ाई में अरविंद संगल को लायंस लोगों के बीच 'चोट्टे' के रूप में कुख्यात एक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का ही सहयोग मिल पाया ।
25 जून के अदालती फैसले में अरविंद संगल को इस बात के लिए फटकार लगाई गई कि जिन तथ्यों और तर्कों के आधार पर जेपी सिंह को मिले मल्टीपल एंडोर्समेंट को रद्द करवाने की कार्रवाई करीब एक वर्ष पहले अदालती फैसले में असफल हो गई थी, उन्हीं तथ्यों और तर्कों के साथ करीब एक वर्ष बाद फिर अदालत का दरवाजा खटखटाया गया और पिछली अदालती कार्रवाई को छिपाया गया । उल्लेखनीय है कि पिछले लायन वर्ष में मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए हुए एंडोर्समेंट को लेकर खासे आरोप और हंगामे रहे थे; और इस हंगामे का कभी पर्दे के पीछे से तो कभी सामने आकर नेतृत्व करते हुए तेजपाल खिल्लन मामले को अदालत भी ले गए थे, लेकिन जल्दी ही उन्हें समझ में आ गया कि जेपी सिंह को मिले एंडोर्समेंट को अदालती कार्रवाई के जरिए रोका नहीं जा सकेगा - इसलिए जेपी सिंह के मामले को छोड़ दिया गया और मान लिया गया कि जेपी सिंह इंटरनेशनल डायरेक्टर बन ही जायेंगे । इस बीच लीडरशिप के खिलाफ मोर्चा खोले बैठे पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट अशोक मेहता तथा पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर राजू मनवानी के साथ विभिन्न कारणों से तेजपाल खिल्लन और सुशील अग्रवाल की नजदीकी बनी; अशोक मेहता और राजू मनवानी ने संतोष शेट्टी को इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवाने की लड़ाई के जरिये लीडरशिप को टक्कर देने की तैयारी की हुई थी । समझा जाता है कि उन्हें लगा कि जेपी सिंह को अदालती मामले में फँसा कर वह संतोष शेट्टी को कामयाबी दिलवा देंगे, और इसीलिए मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में जेपी सिंह के एंडोर्समेंट के मामले को फिर से 'जिंदा' कर दिया गया । यह काम अरविंद संगल को मोहरा बना कर किया गया । पिछले करीब एक महीने में पड़ी अदालती तारीखों में कई मौकों पर अरविंद संगल जिस तरह अनुपस्थित दिखे, उससे लोगों को आभास मिला कि यह मुकदमा अरविंद संगल को मोहरा बना कर वास्तव में 'कोई और' लड़ रहा है । यह 'कोई और' इतना होशियार भी था कि उसे पता था कि मामले में कुछ होना नहीं है और इसीलिए वह सामने भी नहीं आया ।
अरविंद संगल को मोहरा बना कर लड़ी गई इस लड़ाई में कोशिश सिर्फ यह 'दिख' रही थी कि अदालत को गुमराह करके तथा अदालती प्रक्रिया का दुरूपयोग करके जेपी सिंह का रास्ता यदि रोक लिया जाये, तो हो सकता है कि संतोष शेट्टी का 'काम' बन जाए । 25 जून के फैसले से साबित हुआ कि अदालत ने इस चालबाजी को पकड़ लिया । अदालती फैसले में अरविंद संगल को इस बात के लिए फटकार लगाई गई कि मामले से जुड़े सारे तथ्य पिछले करीब एक वर्ष से सभी की जानकारी में थे, और यदि अरविंद संगल को सचमुच न्याय चाहिए था तो वह पिछले एक वर्ष से क्या कर रहे थे; और वह 31 मई को ही अदालत क्यों आए, जो कि छुट्टियाँ शुरू होने से पहले का अंतिम कार्यदिवस था । इसमें भी, मामले से जुड़ी पिछली अदालती कार्रवाई और उसमें हुए फैसले को छिपाया गया । 25 जून के अदालती फैसले ने इस बात की पोल भी खोली है कि लीडरशिप से लड़ने की कोशिश करने वाले नेताओं के पास न तो पर्याप्त तथ्य हैं, और न उन तथ्यों को इस्तेमाल करने की समझ है और न लड़ाई में निरंतरता बनाए रखने का हौंसला है । इसके चलते वह अपनी कोई मजबूत टीम भी नहीं बना पाते हैं, और इस कारण जरूरत पड़ने पर मौकापरस्त व चोट्टे किस्म के लोगों पर उन्हें निर्भर होना पड़ता है । ऐसे में, लीडरशिप से बार बार उन्हें 'पिटना' पड़ता है, और लीडरशिप की मनमानियों तथा बेईमानियों के खिलाफ होने या हो सकने वाली लड़ाई कमजोर पड़ती है । 25 जून के अदालती फैसले में अरविंद संगल के लिए तो 'प्याज भी खाने और जूते भी खाने' वाला किस्सा ही चरितार्थ हुआ है ।

Friday, June 22, 2018

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल के इसामे एरिया में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए संतोष शेट्टी की उम्मीदवारी के चक्कर में अशोक मेहता और राजु मनवानी ने वास्तव में क्या नाहक ही अपनी फजीहत नहीं करवा ली है ?

मुंबई । लायंस इंडिया तथा इसामे एरिया लीडरशिप के चेयरमैन के रूप में इंटरनेशनल डायरेक्टर विजय कुमार राजु द्वारा पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर राजु मनवानी को धमकाने वाले अंदाज में लिखे पत्र ने तथा एक कारोबारी को भुगतान करने में संतोष शेट्टी द्वारा की जाने वाली आनाकानी को दर्शाते एक ऑडियो के सामने आने के बाद इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए प्रस्तुत की गई संतोष शेट्टी की उम्मीदवारी के गुब्बारे की हवा निकलती नजर आ रही है । संतोष शेट्टी की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए राजु मनवानी को धिक्कारते हुए विजय कुमार राजु ने इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल का नाम लेकर राजु मनवानी को साफ चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने संतोष शेट्टी का समर्थन करना बंद नहीं किया, तो इसके नतीजे को भुगतने के लिए तैयार रहें । विजय कुमार राजु के पत्र और उसके तेवर ने लायंस सदस्यों व पदाधिकारियों के बीच इस बहस को जन्म दिया है कि भारतीय क्षेत्र के लायंस सदस्य और पदाधिकारी क्या इसामे पदाधिकारियों के 'गुलाम' बन कर ही रहेंगे और इसामे के गिने-चुने पदाधिकारी ही भारत में लायनिज्म को चलायेंगे और अपनी मनमानी दूसरे लोगों पर थोपेंगे ? इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी दौड़ से पिछले वर्ष बाहर हो चुके संतोष शेट्टी को इस वर्ष अचानक से इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी दौड़ में जबर्दस्ती कुदवाया ही इसलिए गया, क्योंकि इसामे पदाधिकारियों ने फैसला करते समय पूर्व प्रेसीडेंट अशोक मेहता तक को विश्वास में नहीं लिया । समझा जाता है और मुंबई में लोगों के बीच चर्चा में सुना जाता है कि अपनी उपेक्षा से दुखी और निराश होकर ही अशोक मेहता ने मैदान छोड़ चुके संतोष शेट्टी को पुनः मैदान में ला खड़ा किया । इसामे पदाधिकारियों के साथ अलग किस्म की नाराजगी के चलते राजु मनवानी ने भी संतोष शेट्टी की उम्मीदवारी का झंडा उठा लिया । विजय कुमार राजु ने लेकिन जिस अंदाज में राजु मनवानी को धिक्कारा और धमकाया है, उससे अशोक मेहता और राजु मनवानी का खेल बिगड़ता हुआ दिख रहा है ।
विजय कुमार राजु के पत्र ने वास्तव में संतोष शेट्टी को मिल सकने वाले समर्थन पर रोक लगाने का काम किया है । दरअसल लायनिज्म की जैसी जो 'व्यवस्था' है, लायंस सदस्यों व पदाधिकारियों का जो माइंड-सेट है - उसमें हर कोई 'सत्ता' के साथ ही रहना चाहता है । राजु मनवानी को धिक्कारते और धमकाते पत्र के जरिए विजय कुमार राजु ने इसी माइंड-सेट को नियंत्रित करने की कोशिश की है । विजय कुमार राजु के पत्र ने यह जताने/दिखाने का प्रयास किया है कि भारतीय क्षेत्र की पूरी लीडरशिप इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवारों के मामले में इसामे पदाधिकारियों के फैसले के साथ है । विजय कुमार राजु अपने प्रयास में सफल भी दिखते हैं । पत्र में धमकी भरी भाषा को लेकर राजु मनवानी ने सहानुभूति और समर्थन जुटाने का प्रयास भी किया, लेकिन उनके प्रयासों को कोई कामयाबी मिलती हुई नहीं नजर आई है । इस स्थिति ने राजु मनवानी और अशोक मेहता का मनोबल पूरी तरह से तोड़ दिया है । वास्तव में उन्हें यह देख कर तगड़ा झटका लगा है कि संतोष शेट्टी के चक्कर में भारतीय क्षेत्र के लायन लीडर्स व पदाधिकारियों के बीच वह पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए हैं । उनके समर्थकों को भी लग रहा है कि संतोष शेट्टी के चक्कर में उन्होंने नाहक ही अपनी फजीहत करवा ली है ।
संतोष शेट्टी की आर्थिक हालत की पोल खोलते एक ऑडियो ने भी संतोष शेट्टी की उम्मीदवारी की आड़ लेकर राजनीति करने की अशोक मेहता व राजु मनवानी की कोशिशों को धक्का पहुँचाया है । असल में हवा बनाई गई थी कि संतोष शेट्टी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में अच्छा पैसा खर्च करेंगे, जिसके प्रभाव में वह अपनी उम्मीदवारी के लिए जोरदार समर्थन जुटा लेंगे । लायन राजनीति में पैसे का खासा बड़ा रोल तो होता ही है । इस नाते, संतोष शेट्टी की उम्मीदवारी को गंभीरता से लिया जाने लगा । लेकिन एक ऑडियो ने संतोष शेट्टी की आर्थिक हालत की पोल खोल दी, जिसके चलते संतोष शेट्टी की उम्मीदवारी को लेकर बनाई जा रही हवा - हवा हो गई । इस ऑडियो में एक लेनदार संतोष शेट्टी को अपने काम का भुगतान न करने तथा मामले को दो वर्षों से लटकाये रखने के लिए बुरी तरह लताड़ रहा है । करीब नौ मिनट के ऑडियो में संतोष शेट्टी की आर्थिक दशा सामने आ रही है, जिसमें किस्तों में पैसे अदा करने के अपने वायदे में भी उनके लगातार असफल रहने की बात सामने आ रही है, और एक लाख रुपए तक चुकाने में वह अपनी असमर्थता जता रहे हैं । इस ऑडियो के सामने आने के बाद लोगों के बीच सवाल उठा कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे संतोष शेट्टी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को भला कैसे अफोर्ड कर सकेंगे ? इसी तरह के सवालों के बीच संतोष शेट्टी की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशों में लगे लोगों ने अपने आप को पीछे कर लिया है । संतोष शेट्टी के समर्थकों व नजदीकियों को डर हुआ है कि वह संतोष शेट्टी की उम्मीदवारी के साथ लगे, तो कहीं ऐसा कि उन्हें पैसे भी अपनी जेब से भरने पड़े । समर्थकों व नजदीकियों के पीछे हटने से इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए प्रस्तुत संतोष शेट्टी की उम्मीदवारी के गुब्बारे की हवा पूरी तरह निकल गई दिख रही है । 
सामने आया राजु मनवानी को लिखा विजय कुमार राजु का पत्र :

Dear PID Lion Raju V Manwani,

Namaste!

I am appalled to receive an appeal from you requesting me and others to support the candidature of PCC Lion Santosh Shetty for the position of International Director at Las Vegas Convention.

You are well aware that Indian Leadership under the auspices of LCCIA had taken a unanimous decision to support the candidature of the following two Lion Leaders for the position of International Director from India:

1)      Lion JP Singh from MD 321, India 
2)      Dr. J Nawal Malu from MD 3234, India
 

You are also aware that ISAAME Area Leadership has decided to support two more Lion Leaders, namely:

1)      Lion Qazi Akramuddin Ahmed from MD 315, Bangladesh
2)      Lion Mian Muhammad Adrees from MD 305, Pakistan
 
in addition to the above two Lion Leaders from India.
 
You are also aware that there are only four seats for ISAAME Area to be chosen at Las Vegas Convention. When you attended the meeting at Delhi on June 13, 2018, our International President Lion Dr. Naresh Aggarwal, as well as other Directors and Past International Directors, have requested you to dissuade PCC Lion Santosh Shetty from contesting in Las Vegas Convention. A fervent appeal/plea was made to you to fall in line with the Indian Leadership in promoting the candidature of the four Lion Leaders as mentioned above in the International Convention at Las Vegas.
 
You were very kind and gracious enough to do the needful in this regard. Hope you will understand and appreciate that never in the past there was any rebellion in the promotion of candidates from India. All the candidates and all the  Leaders of various Regions in India have put their faith in the Indian Leadership and abided by their decision.  There is no room for any fissiparous tendency in promoting a dissident Lion Leader for a global position. Having listened to all these pleas and having agreed to dissuade PCC Lion Santosh Shetty from contesting in Las Vegas Convention, now it has come as a bolt from the blue to know that you are appealing to other Leaders of India to support the candidature of PCC Lion Santosh Shetty. We never expected that a committed and determined Lion Leader in the stature of Dr. Raju V Manwani to bow down to the local pressures disregarding the appeal of the Indian Leadership.
 
As the Chairman of LCCIA, I am really pained to know the deviation from the accepted path of our commitment to uphold the Leadership decision of India      
 
Even now it is not too late and I would once again appeal to you to kindly retrace your steps and refrain/restrain yourself from joining the chorus of supporting someone who is not selected by Indian Leadership.  Such a course would enhance the prestige of International President Lion Dr. Naresh Aggarwal as well as LCCIA.
 
For any reason, if you do not follow the path/decision, which all of us have jointly taken, then you will have to face the necessary consequences and you and other Leaders, who join you from that Region, will be held responsible for the same.
 
Kindly acknowledge receipt and confirm that you will uphold the decision arrived at by the Indian Leadership.
 
Thanks and regards,
 
Regards,


Vijay Kumar Raju
International Director,
Chairman, Lions India (LCCIA)​ ​
Chairman, ISAAME Area Leadership
+918388999999

Friday, June 2, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में हिंसक हंगामों के जरिए नरेश अग्रवाल और विजय राजु को निशाना बनाने वाले आरोपियों को बचाने में पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट अशोक मेहता सचमुच मदद करेंगे क्या ?

नई दिल्ली । तेजपाल खिल्लन ने लायंस इंटरनेशनल की अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचने और अपनी सदस्यता बचाने के लिए पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट अशोक मेहता का हाथ पकड़ा है; खबर लेकिन यह है कि अशोक मेहता ने उन्हें दिलासा तो दी है, पर कोई पक्का आश्वासन नहीं दिया है । उल्लेखनीय है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की कॉन्फ्रेंस और फिर कन्वेंशन में जो हंगामा, गाली-गलौच और मार-पिटाई का कार्यक्रम हुआ - उसे लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारियों ने खासी गंभीरता से लिया है, और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निश्चय किया है । इस बात को खासतौर से रेखांकित किया गया है कि इस मामले में यदि कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो लायंस पदाधिकारियों के भेष में जो लफंगे और गुंडे किस्म के लोग हैं, उनके हौंसले और मजबूत होंगे तथा आगे फिर वह इससे भी बड़े कांड करेंगे - और कहीं गुंडागर्दी से तो कहीं अदालती कार्रवाई से लायनिज्म को बंधक बनाने का काम करेंगे । ऐसे में, वर्ष 2022 में दिल्ली में होने वाली इंटरनेशनल कन्वेंशन में भी बाधा खड़ी होगी, और लायनिज्म का नाम भी खराब होगा । इसलिए लायंस इंटरनेशनल की व्यवस्था तथा उसके नियम-कानून का और उसके वरिष्ठ पदाधिकारियों का सम्मान न करने वाले उत्पाती लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना जरूरी समझा जा रहा है; और चर्चा है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की कॉन्फ्रेंस व कन्वेंशन में उत्पात मचाने वाले लोगों के खिलाफ लायंस इंटरनेशनल कार्यालय द्वारा कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है - जिसमें कुछेक लोगों की लायंस इंटरनेशनल की प्राथमिक सदस्यता ही समाप्त कर देने की भी तैयारी है ।
इस तैयारी की जानकारी रखने वाले लोगों का अनुमान है कि तेजपाल खिल्लन और वीएस कुकरेजा सहित डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के कुछेक पूर्व गवर्नर्स की लायंस इंटरनेशनल की सदस्यता खत्म की जा सकती है । दरअसल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की कॉन्फ्रेंस व कन्वेंशन में जो ऐतिहासिक हिंसक उत्पात हुआ, उसके पीछे इन्हीं लोगों का दिमाग और सोची-समझी तैयारी देखी/पहचानी जा रही है । लायंस इंटरनेशनल की तरफ से आने वाले इस खतरे को उत्पात मचाने वाले लोगों ने भी पहचाना है, और इसीलिए उन्होंने अपने को बचाने के लिए जुगाड़ लगाने शुरू कर दिए हैं । तेजपाल खिल्लन ने दूसरे उत्पातियों को आश्वस्त किया है, कि वह उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने देंगे - और उनकी सदस्यता तो खत्म नहीं ही होने देंगे । तेजपाल खिल्लन ने यह आश्वासन पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट अशोक मेहता से अपनी नजदीकियत के भरोसे दिया है; अपने नजदीकियों से उन्होंने कहा भी है कि वह बराबर से अशोक मेहता के संपर्क में हैं और अशोक मेहता ने उन्हें निश्चिन्त रहने के लिए कहा है - हालाँकि अशोक मेहता ने उन्हें यह भी कहा है कि मामला खासा गंभीर है । तेजपाल खिल्लन के सामने समस्या यह भी है कि उन्हें अपने साथ-साथ दूसरे लोगों को भी बचाना है; वह खुद यदि बच गए, और दूसरे लोग नप गए - तो यह उनकी राजनीति के लिए और भी बुरा होगा । अशोक मेहता की तरफ से उन्हें संकेत दिया गया है कि लायंस इंटरनेशनल ने मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की घटनाओं को गंभीरता से लिया है, और कड़ी कार्रवाई तो होगी ही - अब इस कड़ी कार्रवाई में कौन बचेगा और कौन नपेगा, यह अभी से कहना मुश्किल है । अशोक मेहता की इस तरह की बातों से तेजपाल खिल्लन को यह भी शक हुआ है कि अशोक मेहता इस मामले में कहीं उनसे पीछा छुड़ाने की कोशिश तो नहीं कर रहे हैं ? इस मामले में तेजपाल खिल्लन को पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील अग्रवाल से भी मदद मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सुशील अग्रवाल ने उनसे पहले ही किनारा कर लिया है ।
दरअसल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की कॉन्फ्रेंस तथा कन्वेंशन में जो कुछ भी हुआ, उसके गवाह नरेश अग्रवाल और विजय राजु के रूप में इंटरनेशनल बोर्ड के दो प्रमुख सदस्य हैं ही - इसलिए लायंस इंटरनेशनल को कार्रवाई करने के लिए कोई लंबी-चौड़ी प्रक्रिया अपनाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी । अशोक मेहता ने तेजपाल खिल्लन को बताया है कि इसीलिए इस मामले में उनके और या किसी अन्य के ज्यादा कुछ कर पाने के लिए कोई मौका ही नहीं है । जो कुछ हुआ और जिन जिन ने जो कुछ किया, वीडियो रिकॉर्डिंग के रूप में उसका आँखों देखा विवरण उपलब्ध है; मल्टीपल काउंसिल पदाधिकारियों की विस्तृत रिपोर्ट है; नरेश अग्रवाल और विजय राजु की रिपोर्ट्स हैं - जो कुछ हुआ, वह न सिर्फ उनके सामने हुआ, बल्कि उनके साथ हुआ । लायंस इंटरनेशनल को कार्रवाई करने के लिए इससे ज्यादा और क्या चाहिए ? समझा जा रहा है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर विजय राजु और फर्स्ट इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल के गवाह के साथ-साथ भुक्तभोगी होने तथा घटनाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग होने के कारण लायंस इंटरनेशनल को जाँच-पड़ताल की औपचारिकता में ज्यादा समय लगाने की भी जरूरत नहीं होगी । चर्चा है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद का चुनाव रोकने के लिए अदालती कार्रवाई करने वाले क्लब और उसके पदाधिकारी के साथ वीएस कुकरेजा के संबंध की पड़ताल कर ली गई है और अदालती कार्रवाई में वीएस कुकरेजा की संलग्नता के पुख्ता सुबूत जुटा लिए गए हैं ।
वीएस कुकरेजा की हरकत को लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारियों ने दरअसल बहुत ही गंभीरता से लिया है : इस बात पर आश्चर्य जताया गया है कि जो लायन सदस्य इंटरनेशनल डायरेक्टर बनना चाहता है, उसे इंटरनेशनल डायरेक्टर के चुनाव से संबंधित लायंस इंटरनेशनल की नियमावली का पहला नियम ही ज्ञात नहीं है, जिसमें कहा गया है कि अपने डिस्ट्रिक्ट में 'नोटिस ऑफ इंटेंशन' देने के साथ-साथ ही उसे मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में भी इंटेशन दे देना चाहिए । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद में गंभीरता से दिलचस्पी रखने वाले सारी दुनिया के लायन सदस्य इस नियम का ध्यान रखते हैं, और जो उस समय मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट को इंटेंशन नहीं भी भेज पाते हैं, वह अपने डिस्ट्रिक्ट की कॉन्फ्रेंस हो जाने के तुरंत बाद तो भेज ही देते हैं - इस बात की परवाह किए बिना कि मल्टीपल में चुनाव होगा भी या नहीं । यह एक अलग मुद्दा है कि पहले कहा/बताया जा रहा था कि मल्टीपल में इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव नहीं होगा, और फिर चुनाव करवाया जाने लगा; इस मुद्दे पर तथ्यात्मक तरीके से 'लड़ाई' लड़ने का हर किसी को हक है - लेकिन इस आधार पर कोई अपनी बेवकूफी को तो जस्टीफाई नहीं कर सकता है । एक कॉमनसेंस की बात भी है कि वीएस कुकरेजा ने मल्टीपल में इसलिए इंटेंशन नहीं दिया हुआ था, क्योंकि उन्हें पता था कि मल्टीपल में चुनाव होना ही नहीं है; तब फिर सवाल यह पैदा होता है कि यह पता होने के बाद भी डिस्ट्रिक्ट में एंडोर्समेंट उन्होंने क्या उसकी बत्ती बनाने के लिए लिया हुआ था ? इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने की इच्छा रखने वाला एक वरिष्ठ लायन बचकाने, बेवकूफीभरे और नियमविरुद्ध कार्य-व्यवहार के कारण जब उम्मीदवार बनने की पात्रता खो देता है - तब वह धोखाधड़ी का सहारा लेकर चुनाव की प्रक्रिया को ही रोक देता है । लायंस इंटरनेशनल कार्यालय के पदाधिकारियों का मानना है कि वीएस कुकरेजा के खिलाफ यदि कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो उनके जैसी सोच रखने वाले लोगों का हौंसला बढ़ेगा, और फिर वह अदालती कार्रवाइयों के जरिए लायंस इंटरनेशनल का कोई काम होने ही नहीं देंगे ।
मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की कॉन्फ्रेंस और कन्वेंशन में जो हुआ, उसे अंजाम देने वाले लोगों के लिए समस्या की बात यह भी हो गई है कि उनकी करतूतों की हर कोई भर्त्सना ही कर रहा है, और उनके समर्थक भी पीछे हटते तथा चुप होते जा रहे हैं । इससे उनके खिलाफ कार्रवाई करना/करवाना चाह रहे लोगों को बल मिला है । उनके खिलाफ कार्रवाई करने/करवाने की प्रक्रिया को पुख्ता व तेज करने/करवाने के लिए उन पूर्व गवर्नर्स से इंटरनेशनल कार्यालय को कार्रवाई की अनुशंसा करते पत्र लिखवाए/भिजवाए जा रहे हैं, जो मौके पर मौजूद थे । मल्टीपल कॉन्फ्रेंस व कन्वेंशन में हुए हिंसक हंगामों में आगे आगे रहने वाले लोग अपने आप को कार्रवाई से बचाने की कोशिशों में तो जुटे हैं, लेकिन सभी की उम्मीदें तेजपाल खिल्लन पर ही टिकी हैं - और तेजपाल खिल्लन की उम्मीद पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट अशोक मेहता पर टिकी है । उन्हें विश्वास है कि उनकी और उनके साथियों की जो भी और जैसी भी हरकतें रही हैं, उसके बावजूद अशोक मेहता उन्हें और उनके साथियों को अवश्य ही बचा लेंगे ।