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Tuesday, September 5, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में सुशील अग्रवाल की सरपरस्ती में हुए जेपी सिंह के अपमान के घाव पर एपी सिंह के रवैये ने मरहम लगाने का काम किया

नई दिल्ली । पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील अग्रवाल की सरपरस्ती में नियमों का उल्लंघन करते हुए मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में पदों की बंदरबाँट में हुई हेकड़ी की एक दूसरे पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर एपी सिंह ने जैसी हवा निकाली है, उससे सुशील अग्रवाल और उनके साथ लगे लग्गे-भग्गे हैरान/परेशान हैं और मनमसोसे हुए हैं । इस सारे किस्से में फजीहत का शिकार बने हैं बेचारे गुरचरण घई; और खुश होने का मौका मिला है इंटरनेशनल डायरेक्टर एंडॉर्सी जेपी सिंह को ! अभी हाल ही में आगरा में संपन्न हुई मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की मौजूदा वर्ष की पहली मीटिंग में बेइज्जती का शिकार बन कर लौटे जेपी सिंह को यह सुन/जान कर बड़ी राहत मिली कि एपी सिंह ने अपने एक स्ट्रोक से ही सुशील अग्रवाल और उनकी सरपरस्ती में जुटे लोगों को उनकी 'औकात' दिखा दी है । मामला 14 अक्टूबर को दिल्ली में होने जा रहे ऑल इंडिया साईट फर्स्ट कॉन्क्लेब का है, जिसकी तैयारी में मुख्य और केंद्रीय भूमिका निभाते हुए एपी सिंह ने मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट विजन चेयरपरसन के रूप में गुरचरण घई को तवज्जो देना तो दूर रिकॉगनाइज तक करने से इंकार किया हुआ है ।
दिल्ली में होने वाले साईट फर्स्ट कॉनक्लेब की तैयारी के लिए एपी सिंह दरअसल डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री के पूर्व गवर्नर दीपक तलवार पर निर्भर हैं । यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट विजन चेयरपरसन का पद नियमानुसार तीन वर्ष के लिए दीपक तलवार के पास ही था, और नियमानुसार इस वर्ष भी उन्हें ही इस पद पर रहना था । लेकिन हमेशा नियमों की बात और वकालत करते रहने वाले सुशील अग्रवाल ने नियमों को धता बताते हुए दीपक तलवार की जगह गुरचरण घई को इस पद पर बैठवा दिया । गुरचरण घई को पद रूपी झुनझुना तो मिल गया है, लेकिन उसे बजाने का उन्हें कोई मौका नहीं मिल रहा है । मल्टीपल के डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारी ही उन्हें गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, और इस चक्कर में डिस्ट्रिक्ट्स के विजन चेयरपर्सन्स के नाम उन्हें नहीं मिल पा रहे हैं । इससे भी बड़ी चोट उन्हें लेकिन एपी सिंह की तरफ से मिली है । उन्होंने खुद ही लोगों को बताया है कि दिल्ली में होने वाले साईट फर्स्ट कॉन्क्लेब के मुखिया एपी सिंह को मेल लिख कर उन्होंने बताया कि दिल्ली में साईट फर्स्ट से जुड़े कामकाज को देखने की जिम्मेदारी उन्हें मिली है, इसलिए कॉन्क्लेब से संबंधित किसी भी जिम्मेदारी को निभाने के लिए उन्हें कहा/बताया जाए । गुरचरण घई लेकिन यह देख कर हैरान/परेशान हो उठे कि एपी सिंह ने उनकी मेल का जबाव तक नहीं दिया, और कॉन्क्लेब के काम के लिए वह दीपक तलवार से ही संपर्क कर रहे हैं । गुरचरण घई ने दीपक तलवार से भी बात की और उन्हें कहा कि ऑल इंडिया साईट फर्स्ट कॉन्क्लेब के काम अब आपको नहीं, बल्कि मुझे करने हैं । दीपक तलवार ने उन्हें टका-सा जबाव दे दिया कि यह बात मुझसे नहीं, बल्कि एपी सिंह से कहो ।
एपी सिंह और दीपक तलवार के इस रवैये की शिकायत गुरचरण सिंह ने सुशील अग्रवाल से की और मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के अन्य पदाधिकारियों के बीच भी रखी - मल्टीपल के बड़बोले और बद्तमीज किस्म के सदस्यों की तरफ से सुझाव भी आया कि एपी सिंह को बता देना चाहिए कि उनके रवैये के चलते दिल्ली में उक्त कॉन्क्लेब नहीं होने दिया जायेगा । सुशील अग्रवाल लेकिन इस मामले में चुप ही रहे और उनकी तरफ से यही सुझाव सुनने को मिला कि जैसे चल रहा है, वैसे ही चलने दो - अन्यथा और ज्यादा फजीहत होगी । सुशील अग्रवाल ने मल्टीपल काउंसिल के पदाधिकारियों की जैसी जो 'बारात' तैयार की/करवाई है, जिसमें लायंस इंटरनेशनल के पैसों को हड़प जाने वाले चोट्टे के रूप में पहचाने जाने वाले तक को शामिल कर लिया गया है - उसके कारण वैसे ही मल्टीपल के लोगों के साथ-साथ बड़े लायन लीडर्स के बीच भी सुशील अग्रवाल की खासी फजीहत हो रही है । वीएस कुकरेजा जिस तरह से एरिया लीडर के पद पर रहने के बाद मल्टीपल लीडर बनने को राजी हो गए, उससे उन्होंने यही साबित किया है कि वह पद के कितने बड़े लालची हैं; उनके लालच को पूरा करने/करवाने में भूमिका निभाने के चलते भी सुशील अग्रवाल को निशाना बनना पड़ रहा है । उल्लेखनीय है कि मल्टीपल जीएलटी कोऑर्डीनेटर पद के लिए डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री के पूर्व गवर्नर अरुण पुरी के नाम पर सहमति बनी थी । अरुण पुरी फैकल्टी डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षित वरिष्ठ और अनुभवी फैकल्टी हैं, और इसी कारण से उक्त पद के लिए उनके चयन को सभी का समर्थन था - लेकिन ऐन मौके पर वीएस कुकरेजा का पद का लालच हावी हो गया और सुशील अग्रवाल ने भी वीएस कुकरेजा के लालच के सामने समर्पण कर दिया ।
सुशील अग्रवाल ने चोट्टे, पदों के लालची और नाकारा लोगों की बारात तो तैयार कर/करवा दी; लेकिन अब एपी सिंह के एक स्ट्रोक से बारातियों की फजीहत हो रही है - तो वह मुँह छिपा रहे हैं । गुरचरण घई के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि न तो एपी सिंह उन्हें रिकॉगनाइज कर रहे हैं, और उन्हें रिकॉग्नीशन दिलवाने के लिए न सुशील अग्रवाल कोई प्रयत्न कर रहे हैं । नियमों की अनदेखी करके बड़बोले और बद्तमीज और बेईमान लोगों को लेकर मनमाने तरीके से बनाई गई मल्टीपल पदाधिकारियों की टीम की इस फजीहत और बेचारगी को देख कर जेपी सिंह को बड़ी राहत मिली है । उल्लेखनीय है कि जेपी सिंह को आगरा में हुई मल्टीपल की मीटिंग में दोहरी फजीहत का शिकार होना पड़ा था - सुशील अग्रवाल की सलाहानुसार हो रही मीटिंग में जेपी सिंह को मंच पर जगह न देकर मल्टीपल के सत्ताधारियों ने तो उन्हें बेइज्जत किया ही, केएम गोयल और जगदीश गुलाटी जैसे पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर्स तक ने जेपी सिंह को इज्जत दिलवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया । ऐसे में, एपी सिंह का रवैया जेपी सिंह को अपने घाव पर मरहम लगाता हुआ महसूस हो रहा है ।

Wednesday, July 26, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल के प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल के धंधेबाजों, दंगाईयों और ब्लैकमेलरों के सामने कमजोर पड़ने से डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री से निकाले गए विक्रम शर्मा को लायनिज्म में वापसी का मौका मिला

नई दिल्ली । विक्रम शर्मा के वीएस कुकरेजा के क्लब का सदस्य बनने के जरिए लायनिज्म को पुलिस थानों और अदालतों तक ले जाने वाले लोगों ने एक बार फिर लायंस इंटरनेशनल की लीडरशिप को तमाचा जड़ा है - और लायंस इंटरनेशनल की लीडरशिप तमाचे की चोट को चुपचाप सहलाने पर मजबूर हुई है । उल्लेखनीय है कि विक्रम शर्मा डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री में थे, जहाँ उन्होंने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने के लिए तीन-चार बार प्रयास किये थे । उनके आखिरी प्रयास में ही जो भीषण ड्रामा हुआ था, उसकी सजा के कारण डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री फिर डिस्ट्रिक्ट नहीं रहा - और अभी तक डिस्ट्रिक्ट का अधिकार प्राप्त नहीं कर सका है । डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री में अपने आपको महारथी समझने वाले पूर्व गवर्नर्स डीके अग्रवाल और हर्ष बंसल ने लायंस इंटरनेशनल के नियमों और कायदों से बेईमानी और धोखाधड़ी करते हुए विक्रम शर्मा को फर्जी तरीके से गवर्नर तो 'चुनवा' दिया था, लेकिन लायंस इंटरनेशनल के प्रकोप से वह उन्हें नहीं बचवा सके - बल्कि डीके अग्रवाल, हर्ष बंसल और विक्रम शर्मा की कारस्तानी ने डिस्ट्रिक्ट को ही 'सड़क' पर ला दिया । पहले चुनावी लड़ाई में और फिर नियम-कायदों की लड़ाई में हार का मुँह देखने वाले विक्रम शर्मा ने उस प्रकरण में फिर थाना और अदालत का सहारा लेने का प्रयास भी किया था - नतीजा लेकिन यह हुआ कि उन्हें लायनिज्म से ही निकाल दिया गया था । डीके अग्रवाल और हर्ष बंसल ने अपने अपने तरीके से प्रयास तो बहुत किए कि विक्रम शर्मा को लायनिज्म में फिर से शामिल कर लिया जाए, लेकिन डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री की जिम्मेदारी संभाल रहे पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर केएम गोयल ने उनके प्रयासों को सफल नहीं होने दिया ।
लेकिन यह तब तक की बात थी, जब कि लायंस इंटरनेशनल की लीडरशिप में दम होता और 'दिखता' था ! नरेश अग्रवाल के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने के साथ लायंस इंटरनेशनल की लीडरशिप ने जिस तरह अपाहिज होना शुरू किया और धंधेबाजों, दंगाईयों और ब्लैकमेलरों के सामने समर्पण करना शुरू किया - तो विक्रम शर्मा को लायनिज्म में लौटने का सुनहरा मौका दिखा । यह एक मजेदार तुलना होगी कि करीब दो वर्ष पहले लायनिज्म की चुनावी लड़ाई को थाना और अदालत ले गए विक्रम शर्मा को लायंस इंटरनेशनल की तत्कालीन लीडरशिप ने एक झटके में बाहर का रास्ता दिखा दिया था, लेकिन ठीक वही हरकत करने वाले वीएस कुकरेजा के खिलाफ कार्रवाई करने में नरेश अग्रवाल के नेतृत्व वाली लीडरशिप की कंपकंपी छूट गयी है । ऐसे में, डीके अग्रवाल और हर्ष बंसल ने भी समझ लिया कि विक्रम शर्मा से लायनिज्म की 'सेवा' करवाने के लिए उन्हें वीएस कुकरेजा की शरण में ही भेजना उचित होगा । लायनिज्म से बाहर कर दिए गए विक्रम शर्मा की चोर दरवाजे से हुई वापसी ने लोगों को कहने का मौका दिया है कि डिस्ट्रिक्ट 321 ए वन में वीएस कुकरेजा के क्लब में विक्रम शर्मा की मौजूदगी लायन राजनीति में मात और लताड़ खाने वाले लोगों को थानों और अदालतों में जाने के लिए प्रेरित करने का काम भी करेगी । यह प्रसंग इस बात का भी उदाहरण बन गया है कि नरेश अग्रवाल की स्वार्थपूर्ण 'कमजोरी' लायनिज्म को पता नहीं कैसे कैसे दिन दिखवाएगी ?
विक्रम शर्मा को वीएस कुकरेजा के क्लब में प्रवेश दिलवाने में सफल हो कर डीके अग्रवाल और हर्ष बंसल ने अपने लिए भी मल्टीपल में अहम् पद पाने की उम्मीद बढ़ा ली है । दरअसल इन दोनों के लिए ही समस्या और चुनौती की बात यह हो गयी है कि वैसे तो यह बड़े नेता हैं लेकिन मल्टीपल में इनकी कोई पूछ ही नहीं हो रही है । मल्टीपल में राजनीति का जो खाका बना है और नए नए लोग मुखर व सक्रिय हैं - वह इन्हें या तो पहचानते ही नहीं हैं और पहचानते भी हैं तो कोई तवज्जो नहीं देते हैं । अपने लिए जगह बनाने के लिए इन्हें तेजपाल खिल्लन की शरण में आना जरूरी लगा होगा और इसके लिए ही इन्होंने विक्रम शर्मा रूपी अपने मोहरे के जरिए पहली चाल चली है । इस चाल के सफल हो जाने से डीके अग्रवाल और हर्ष बंसल को भी उम्मीद बँधी है कि जैसे विक्रम शर्मा को दोबारा से लायनिज्म की 'सेवा' करने का मौका मिल गया है, ठीक उसी तरह से उन्हें भी नेतागिरी करने/दिखाने का मौका मिल जायेगा । धंधेबाजों, दंगाईयों और ब्लैकमेलरों के सामने नरेश अग्रवाल ने जिस तरह से अपने आप को कमजोर और असहाय साबित किया है - उससे विक्रम शर्मा, डीके अग्रवाल और हर्ष बंसल को भी अपने दिन फिरने का संकेत मिला है; और उन्होंने प्रयास शुरू कर दिए हैं ।

Wednesday, June 7, 2017

लायंस मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव करने के लिए दोबारा हो रही मल्टीपल कन्वेंशन के बीच तेजपाल खिल्लन क्या चमनलाल गुप्ता के मार्फ़त नरेश अग्रवाल को 'ब्लैकमेल' करने का काम भी कर रहे हैं ?

नई दिल्ली । लायंस इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव करवाने के लिए 17 जून को मल्टीपल कन्वेंशन होने के फैसले तथा लायंस इंटरनेशनल की अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचने के लिए तेजपाल खिल्लन की नरेश अग्रवाल के 'घर' फिर से घुसने की कोशिशों की खबरों ने वीएस कुकरेजा को निराश करते हुए इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने की उनकी हसरत और तैयारी को हवा में उड़ा दिया है । वीएस कुकरेजा ने अपने नजदीकियों से आशंका व्यक्त की है कि तेजपाल खिल्लन अपने आप को बचाने के लिए तो नरेश अग्रवाल से माफी भी माँग लेंगे तथा उनके साथ सौदेबाजी भी कर लेंगे, लेकिन उन्हें बीच मँझदार में छोड़ देंगे । अपनी इस आशंका को विश्वसनीय साबित करने के लिए वीएस कुकरेजा ने बताया है कि नरेश अग्रवाल के नजदीकियों से उन्हें जानकारी मिली है कि अभी तो तेजपाल खिल्लन ने नरेश अग्रवाल को फोन पर यह समझाने/जताने की कोशिश की है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट की कॉन्फ्रेंस और कन्वेंशन में जो उत्पात हुआ - उसमें उनकी कोई भूमिका नहीं थी । तेजपाल खिल्लन ने नरेश अग्रवाल से बात करते हुए स्वीकार किया कि मल्टीपल काउंसिल के पदाधिकारियों के कुछेक फैसलों को लेकर उनका विरोध जरूर था, और मल्टीपल की चुनावी राजनीति में वह एक पक्ष जरूर थे - लेकिन अपने विरोध और अपने पक्ष को स्वीकार करवाने के लिए हिंसा का सहारा लेने की किसी योजना में उनकी कोई भूमिका नहीं थी । वीएस कुकरेजा को तगड़ा झटका यह जानकर लगा है कि तेजपाल खिल्लन ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को रोकने के लिए अदालती कार्रवाई में अपनी मिलीभगत या सहमति की बात से भी पल्ला झाड़ लिया है । वीएस कुकरेजा को नरेश अग्रवाल के नजदीकियों से पता चला है कि तेजपाल खिल्लन ने नरेश अग्रवाल को कहा/बताया है कि कन्वेंशन से पंद्रह दिन पहले उनके साथियों ने इंटरनेशनल डायरेक्टर के चुनाव को रोकने के लिए अदालती कार्रवाई करने का सुझाव दिया था, जिसे लेकिन उन्होंने तुरंत खारिज कर दिया था; उन्हें नहीं पता कि तब फिर किसके कहने पर किसने अदालती कार्रवाई की ? तेजपाल खिल्लन की इन बातों से वीएस कुकरेजा ने समझ लिया है कि तेजपाल खिल्लन अपने आपको बचाने के लिए उनके साथ धोखा करने जा रहे हैं ।
वीएस कुकरेजा की बदकिस्मती यह है कि वह जिन लोगों से तेजपाल खिल्लन से धोखा मिलने का रोना रो रहे हैं, उनसे भी उन्हें सहानुभूति नहीं मिल रही है । वीएस कुकरेजा को लोगों से यही सुनने को मिल रहा है कि वह क्या तेजपाल खिल्लन को जानते नहीं हैं क्या ? उन्हें नहीं पता क्या कि तेजपाल खिल्लन तो लोगों को इस्तेमाल ही करते हैं, और जब कोई उनके काम का नहीं रह जाता - तो वह उसे बीच मँझदार में छोड़ ही देते हैं । वीएस कुकरेजा को क्या इतनी सी बात समझ में नहीं आ रही है कि वह अब तेजपाल खिल्लन के लिए काम के तो नहीं ही रह गए हैं, उनके लिए परेशानी का कारण भी बन गए हैं । अदालती कार्रवाई में वीएस कुकरेजा की मिलीभगत के जो तथ्य जानकारी में आए हैं, उसमें यदि तेजपाल खिल्लन की मिलीभगत भी साबित हुई तो लायंस इंटरनेशनल की अनुशासनात्मक कार्रवाई से बच पाना तेजपाल खिल्लन के लिए भी मुश्किल होगा । तेजपाल खिल्लन के लिए अपने आप को लायंस इंटरनेशनल की कार्रवाई से बचाना बहुत ही जरूरी है, अन्यथा उनका तो धंधा ही चौपट हो जाएगा । अब इसके लिए उन्हें यदि वीएस कुकरेजा की बलि चढ़ाने की जरूरत पड़ती है, तो वह ज्यादा सोचें-विचारें क्यों ? धंधे के लिए ही तो उन्होंने वीएस कुकरेजा की उम्मीदवारी का झंडा उठाया हुआ था - अब वह झंडा ही उनके धंधे में बाधा बनेगा, तो वह उसे क्यों उठाए चलेंगे ? धंधे के लिए ही तेजपाल खिल्लन ने नरेश अग्रवाल के प्रति अपने रवैये में भी यू-टर्न ले लिया है । मल्टीपल कॉन्फ्रेंस में हिंसक उत्पात होने से पहले तक तेजपाल खिल्लन लोगों के बीच नरेश अग्रवाल और उनकी पत्नी के खिलाफ भद्दी और अपमानजनक टिप्पणियाँ किया करते थे; लोगों को अपना फोन दिखा दिखा कर बताते थे कि नरेश अग्रवाल और उनकी पत्नी उन्हें फोन कर कर के उन्हें अपनी तरफ मिलाने और पटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वह उनके फोन उठा नहीं रहे हैं; किंतु अब वह नरेश अग्रवाल को फोन कर कर के अपने आप को निर्दोष दिखाने/जताने का प्रयास कर रहे हैं । 
तेजपाल खिल्लन हालाँकि सिर्फ इसी भरोसे नहीं हैं कि वह नरेश अग्रवाल को अपनी निर्दोषता का भरोसा दिला कर ही लायंस इंटरनेशनल की कार्रवाई से अपने को बचा लेंगे; एक कुशल धंधेबाज की तरह एक तरफ वह वीएस कुकरेजा से पीछा छुड़ा कर नरेश अग्रवाल से संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ चमनलाल गुप्ता के मार्फ़त उन्हें 'ब्लैकमेल' करने का काम भी कर रहे हैं । उनकी इसी रणनीति के कारण मल्टीपल काउंसिल में हुए झगड़े/टंटे के चलते दर्ज हुईं एफआईआर को वापस कराने के लिए मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन जेसी वर्मा ने पिछले दिनों जो प्रयास किए, वह ऐन मौके पर चमनलाल गुप्ता के पलट जाने से खटाई में पड़ गए हैं । दरअसल एक एफआईआर डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चमनलाल गुप्ता की तरफ से दर्ज करवाई गई है, जिसमें नरेश अग्रवाल का भी नाम है । मल्टीपल काउंसिल की कॉन्फ्रेंस में जो झगड़ा/टंटा हुआ, उसमें सबसे ज्यादा खामियाजा डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के पदाधिकारियों व नेताओं को भुगतना पड़ रहा है । अपनी हरकतों के चलते उन्हें लोगों से मुँह तक छिपाना पड़ रहा है, जिसके चलते भुवनेश्वर में एक से पाँच जून के बीच आयोजित हुई ऑल इंडिया स्कूलिंग में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट इंद्रजीत सिंह तथा फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रवि मेहरा को अनुपस्थित होना पड़ा । लायनिज्म में इसे बहुत ही महत्त्वपूर्ण और जरूरी कार्यक्रम के रूप में देखा/पहचाना जाता है, जिसे डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारियों के लिए उपयोगी माना जाता है । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट की कॉन्फ्रेंस में हुई घटनाओं के कारण मिली बदनामी के कारण इंद्रजीत सिंह और रवि मेहरा की लेकिन इसमें शामिल होने की हिम्मत ही नहीं हुई । डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारियों को इस फजीहत से बचाने के लिए चमनलाल गुप्ता ने जेसी वर्मा को आश्वस्त किया था कि वह अपनी पुलिस रिपोर्ट वापस ले लेंगे । लेकिन जेसी वर्मा जब रिपोर्ट वापसी की कार्रवाई को पूरा करवाने पहुँचे, तब चमनलाल गुप्ता अपनी ही बात से यह कहते हुए पीछे हट गए कि इस मामले में वह कोई भी अंतिम फैसला अपने साथियों से सलाह करने के बाद ही करेंगे ।
समझा जाता है कि चमनलाल गुप्ता ने अपनी ही बात से पलटी मारने का काम तेजपाल खिल्लन के कहने में आकर किया है । चर्चा है कि तेजपाल खिल्लन उक्त पुलिस रिपोर्ट के जरिए नरेश अग्रवाल पर दबाव बनाए रख कर उनके साथ सौदेबाजी करना चाहते हैं । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के मामले में तो तेजपाल खिल्लन ने हार स्वीकार कर ली है, लेकिन वह पूरी तरह समर्पण करते हुए न दिखें - इसके लिए वह विनय गर्ग को मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनवाने के मामले को जिंदा रखना चाहते हैं । डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के पदाधिकारियों को उन्होंने समझाया है कि उक्त पुलिस रिपोर्ट को बनाए रख कर नरेश अग्रवाल से सौदेबाजी करना और उन्हें विनय गर्ग को मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनाने के लिए राजी करना आसान होगा । इसी कारण से चमनलाल गुप्ता अपनी पुलिस रिपोर्ट को वापस लेने के लिए राजी हो जाने बाद फिर अपनी बात से पलट गए । कई लोगों को लग रहा है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस और कन्वेंशन में जो हिंसक हंगामा हुआ, उसके लिए किसी के खिलाफ कहीं कोई कार्रवाई नहीं होगी - और नेता लोग अपने अपने पाप छिपाने तथा अपनी अपनी 'दुकान' बचाने के लिए आपस में सौदेबाजी कर लेंगे ।
17 जून को इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव करने के लिए हो रही मल्टीपल कन्वेंशन ने नेताओं के बीच हो सकने वाली सौदेबाजी के लिए रास्ता खोल भी दिया है ।

Friday, June 2, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में हिंसक हंगामों के जरिए नरेश अग्रवाल और विजय राजु को निशाना बनाने वाले आरोपियों को बचाने में पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट अशोक मेहता सचमुच मदद करेंगे क्या ?

नई दिल्ली । तेजपाल खिल्लन ने लायंस इंटरनेशनल की अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचने और अपनी सदस्यता बचाने के लिए पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट अशोक मेहता का हाथ पकड़ा है; खबर लेकिन यह है कि अशोक मेहता ने उन्हें दिलासा तो दी है, पर कोई पक्का आश्वासन नहीं दिया है । उल्लेखनीय है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की कॉन्फ्रेंस और फिर कन्वेंशन में जो हंगामा, गाली-गलौच और मार-पिटाई का कार्यक्रम हुआ - उसे लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारियों ने खासी गंभीरता से लिया है, और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निश्चय किया है । इस बात को खासतौर से रेखांकित किया गया है कि इस मामले में यदि कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो लायंस पदाधिकारियों के भेष में जो लफंगे और गुंडे किस्म के लोग हैं, उनके हौंसले और मजबूत होंगे तथा आगे फिर वह इससे भी बड़े कांड करेंगे - और कहीं गुंडागर्दी से तो कहीं अदालती कार्रवाई से लायनिज्म को बंधक बनाने का काम करेंगे । ऐसे में, वर्ष 2022 में दिल्ली में होने वाली इंटरनेशनल कन्वेंशन में भी बाधा खड़ी होगी, और लायनिज्म का नाम भी खराब होगा । इसलिए लायंस इंटरनेशनल की व्यवस्था तथा उसके नियम-कानून का और उसके वरिष्ठ पदाधिकारियों का सम्मान न करने वाले उत्पाती लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना जरूरी समझा जा रहा है; और चर्चा है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की कॉन्फ्रेंस व कन्वेंशन में उत्पात मचाने वाले लोगों के खिलाफ लायंस इंटरनेशनल कार्यालय द्वारा कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है - जिसमें कुछेक लोगों की लायंस इंटरनेशनल की प्राथमिक सदस्यता ही समाप्त कर देने की भी तैयारी है ।
इस तैयारी की जानकारी रखने वाले लोगों का अनुमान है कि तेजपाल खिल्लन और वीएस कुकरेजा सहित डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के कुछेक पूर्व गवर्नर्स की लायंस इंटरनेशनल की सदस्यता खत्म की जा सकती है । दरअसल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की कॉन्फ्रेंस व कन्वेंशन में जो ऐतिहासिक हिंसक उत्पात हुआ, उसके पीछे इन्हीं लोगों का दिमाग और सोची-समझी तैयारी देखी/पहचानी जा रही है । लायंस इंटरनेशनल की तरफ से आने वाले इस खतरे को उत्पात मचाने वाले लोगों ने भी पहचाना है, और इसीलिए उन्होंने अपने को बचाने के लिए जुगाड़ लगाने शुरू कर दिए हैं । तेजपाल खिल्लन ने दूसरे उत्पातियों को आश्वस्त किया है, कि वह उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने देंगे - और उनकी सदस्यता तो खत्म नहीं ही होने देंगे । तेजपाल खिल्लन ने यह आश्वासन पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट अशोक मेहता से अपनी नजदीकियत के भरोसे दिया है; अपने नजदीकियों से उन्होंने कहा भी है कि वह बराबर से अशोक मेहता के संपर्क में हैं और अशोक मेहता ने उन्हें निश्चिन्त रहने के लिए कहा है - हालाँकि अशोक मेहता ने उन्हें यह भी कहा है कि मामला खासा गंभीर है । तेजपाल खिल्लन के सामने समस्या यह भी है कि उन्हें अपने साथ-साथ दूसरे लोगों को भी बचाना है; वह खुद यदि बच गए, और दूसरे लोग नप गए - तो यह उनकी राजनीति के लिए और भी बुरा होगा । अशोक मेहता की तरफ से उन्हें संकेत दिया गया है कि लायंस इंटरनेशनल ने मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की घटनाओं को गंभीरता से लिया है, और कड़ी कार्रवाई तो होगी ही - अब इस कड़ी कार्रवाई में कौन बचेगा और कौन नपेगा, यह अभी से कहना मुश्किल है । अशोक मेहता की इस तरह की बातों से तेजपाल खिल्लन को यह भी शक हुआ है कि अशोक मेहता इस मामले में कहीं उनसे पीछा छुड़ाने की कोशिश तो नहीं कर रहे हैं ? इस मामले में तेजपाल खिल्लन को पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील अग्रवाल से भी मदद मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सुशील अग्रवाल ने उनसे पहले ही किनारा कर लिया है ।
दरअसल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की कॉन्फ्रेंस तथा कन्वेंशन में जो कुछ भी हुआ, उसके गवाह नरेश अग्रवाल और विजय राजु के रूप में इंटरनेशनल बोर्ड के दो प्रमुख सदस्य हैं ही - इसलिए लायंस इंटरनेशनल को कार्रवाई करने के लिए कोई लंबी-चौड़ी प्रक्रिया अपनाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी । अशोक मेहता ने तेजपाल खिल्लन को बताया है कि इसीलिए इस मामले में उनके और या किसी अन्य के ज्यादा कुछ कर पाने के लिए कोई मौका ही नहीं है । जो कुछ हुआ और जिन जिन ने जो कुछ किया, वीडियो रिकॉर्डिंग के रूप में उसका आँखों देखा विवरण उपलब्ध है; मल्टीपल काउंसिल पदाधिकारियों की विस्तृत रिपोर्ट है; नरेश अग्रवाल और विजय राजु की रिपोर्ट्स हैं - जो कुछ हुआ, वह न सिर्फ उनके सामने हुआ, बल्कि उनके साथ हुआ । लायंस इंटरनेशनल को कार्रवाई करने के लिए इससे ज्यादा और क्या चाहिए ? समझा जा रहा है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर विजय राजु और फर्स्ट इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल के गवाह के साथ-साथ भुक्तभोगी होने तथा घटनाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग होने के कारण लायंस इंटरनेशनल को जाँच-पड़ताल की औपचारिकता में ज्यादा समय लगाने की भी जरूरत नहीं होगी । चर्चा है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद का चुनाव रोकने के लिए अदालती कार्रवाई करने वाले क्लब और उसके पदाधिकारी के साथ वीएस कुकरेजा के संबंध की पड़ताल कर ली गई है और अदालती कार्रवाई में वीएस कुकरेजा की संलग्नता के पुख्ता सुबूत जुटा लिए गए हैं ।
वीएस कुकरेजा की हरकत को लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारियों ने दरअसल बहुत ही गंभीरता से लिया है : इस बात पर आश्चर्य जताया गया है कि जो लायन सदस्य इंटरनेशनल डायरेक्टर बनना चाहता है, उसे इंटरनेशनल डायरेक्टर के चुनाव से संबंधित लायंस इंटरनेशनल की नियमावली का पहला नियम ही ज्ञात नहीं है, जिसमें कहा गया है कि अपने डिस्ट्रिक्ट में 'नोटिस ऑफ इंटेंशन' देने के साथ-साथ ही उसे मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में भी इंटेशन दे देना चाहिए । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद में गंभीरता से दिलचस्पी रखने वाले सारी दुनिया के लायन सदस्य इस नियम का ध्यान रखते हैं, और जो उस समय मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट को इंटेंशन नहीं भी भेज पाते हैं, वह अपने डिस्ट्रिक्ट की कॉन्फ्रेंस हो जाने के तुरंत बाद तो भेज ही देते हैं - इस बात की परवाह किए बिना कि मल्टीपल में चुनाव होगा भी या नहीं । यह एक अलग मुद्दा है कि पहले कहा/बताया जा रहा था कि मल्टीपल में इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव नहीं होगा, और फिर चुनाव करवाया जाने लगा; इस मुद्दे पर तथ्यात्मक तरीके से 'लड़ाई' लड़ने का हर किसी को हक है - लेकिन इस आधार पर कोई अपनी बेवकूफी को तो जस्टीफाई नहीं कर सकता है । एक कॉमनसेंस की बात भी है कि वीएस कुकरेजा ने मल्टीपल में इसलिए इंटेंशन नहीं दिया हुआ था, क्योंकि उन्हें पता था कि मल्टीपल में चुनाव होना ही नहीं है; तब फिर सवाल यह पैदा होता है कि यह पता होने के बाद भी डिस्ट्रिक्ट में एंडोर्समेंट उन्होंने क्या उसकी बत्ती बनाने के लिए लिया हुआ था ? इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने की इच्छा रखने वाला एक वरिष्ठ लायन बचकाने, बेवकूफीभरे और नियमविरुद्ध कार्य-व्यवहार के कारण जब उम्मीदवार बनने की पात्रता खो देता है - तब वह धोखाधड़ी का सहारा लेकर चुनाव की प्रक्रिया को ही रोक देता है । लायंस इंटरनेशनल कार्यालय के पदाधिकारियों का मानना है कि वीएस कुकरेजा के खिलाफ यदि कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो उनके जैसी सोच रखने वाले लोगों का हौंसला बढ़ेगा, और फिर वह अदालती कार्रवाइयों के जरिए लायंस इंटरनेशनल का कोई काम होने ही नहीं देंगे ।
मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की कॉन्फ्रेंस और कन्वेंशन में जो हुआ, उसे अंजाम देने वाले लोगों के लिए समस्या की बात यह भी हो गई है कि उनकी करतूतों की हर कोई भर्त्सना ही कर रहा है, और उनके समर्थक भी पीछे हटते तथा चुप होते जा रहे हैं । इससे उनके खिलाफ कार्रवाई करना/करवाना चाह रहे लोगों को बल मिला है । उनके खिलाफ कार्रवाई करने/करवाने की प्रक्रिया को पुख्ता व तेज करने/करवाने के लिए उन पूर्व गवर्नर्स से इंटरनेशनल कार्यालय को कार्रवाई की अनुशंसा करते पत्र लिखवाए/भिजवाए जा रहे हैं, जो मौके पर मौजूद थे । मल्टीपल कॉन्फ्रेंस व कन्वेंशन में हुए हिंसक हंगामों में आगे आगे रहने वाले लोग अपने आप को कार्रवाई से बचाने की कोशिशों में तो जुटे हैं, लेकिन सभी की उम्मीदें तेजपाल खिल्लन पर ही टिकी हैं - और तेजपाल खिल्लन की उम्मीद पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट अशोक मेहता पर टिकी है । उन्हें विश्वास है कि उनकी और उनके साथियों की जो भी और जैसी भी हरकतें रही हैं, उसके बावजूद अशोक मेहता उन्हें और उनके साथियों को अवश्य ही बचा लेंगे ।

Thursday, May 25, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की चुनावी राजनीति में नरेश अग्रवाल और उनकी पत्नी का नाम घसीट कर तेजपाल खिल्लन ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के चुनाव को दिलचस्प बनाया

जीरकपुर । नरेश अग्रवाल और उनकी पत्नी द्वारा पड़ने वाले दबावों को बता बता कर तेजपाल खिल्लन अपने 'ग्रुप' को एकजुट रखने की जो कोशिश कर रहे हैं, उसने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के चुनाव को खासा उलझनभरा और दिलचस्प बना दिया है । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए अपने उम्मीदवार विनय गर्ग के समर्थन में पाँच वोटों के होने का दावा करते हुए तेजपाल खिल्लन आजकल लोगों को बता रहे हैं कि नरेश अग्रवाल उन्हें लगातार फोन कर रहे हैं, कुछेक बार तो उनकी पत्नी ने भी उन्हें फोन किया है । तेजपाल खिल्लन के एक नजदीकी ने इन पंक्तियों के लेखक से बात करते हुए बताया कि उन्हें खुद तेजपाल खिल्लन ने बताया कि उन्होंने लेकिन दोनों लोगों से यह कहते हुए बात करने से इंकार कर दिया कि उन्हें यदि बिजनेस की बात करना है, तो मेरे बेटे से करो - और यदि राजनीति की बात करना है, तो मैं 28 मई के बाद करूँगा । इस तरह की बातों से तेजपाल खिल्लन दरअसल यह जताने/दिखाने का प्रयास कर रहे हैं कि मल्टीपल की चुनावी राजनीति में उन्होंने जो गोलबंदी की है, उससे नरेश अग्रवाल तक परेशान हो उठे हैं और वह भी उन्हें अपनी तरफ खींचने में लग गए हैं - लेकिन वह उनकी बातों में नहीं आ रहे हैं । नरेश अग्रवाल तक की बात तो लोगों को हजम हो रही थी, लेकिन तेजपाल खिल्लन ने जिस तरह से नरेश अग्रवाल की पत्नी का नाम भी घसीट लिया है - उससे मामला खासा दिलचस्प हो उठा है । लोगों को लग रहा है कि इन बातों के जरिए तेजपाल खिल्लन एक तरफ तो अपने 'ग्रुप' को एकजुट करने/रखने की कोशिश कर रहे हैं, और दूसरी तरफ लोगों के बीच वह अपना 'कद' ऊँचा बनाने/दिखाने का प्रयास कर रहे हैं ।
उल्लेखनीय है कि तेजपाल खिल्लन के लीडरशिप - और खासतौर से नरेश अग्रवाल के साथ कभी सर्द तो कभी गर्म किस्म के संबंध रहे हैं, और लोगों के बीच धारणा यह बनी है कि लायन राजनीति में सर्द/गर्म होने का खेल वास्तव में वह अपने धंधे को बढ़ाने के लिए करते हैं । मल्टीपल की इस वर्ष की चुनावी राजनीति में तेजपाल खिल्लन ने जिस तरह से अपनी सक्रियता को दिखाया/बढ़ाया हुआ है, उसे राजनीति की आड़ में व्यावसायिक फायदा उठाने की उनकी योजना के रूप में देखा/पहचाना गया है । लायनिज्म में अगले पाँच-छह वर्ष दरअसल उनके धंधे के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हैं । अगले लायन वर्ष में नरेश अग्रवाल इंटरनेशनल प्रेसीडेंट होंगे, उसके अगले वर्ष भी वह इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्य रहेंगे; उसके बाद वर्ष 2022 में दिल्ली में होने वाली इंटरनेशनल कन्वेंशन का काम शुरू जायेगा । खुद तेजपाल खिल्लन ने ही अपने नजदीकियों को बताया है कि लायंस इंटरनेशनल में पिन्स और मैडल्स के हर वर्ष करीब 50 करोड़ रुपए के ऑर्डर मिलते/निकलते हैं । नरेश अग्रवाल के कारण उन्हें यदि चौथाई ऑर्डर भी मिल जाएँ, तो अगले पाँच-छह वर्षों में उनके तो बारे-न्यारे हो जायेंगे । काम-धंधा बेटे के जिम्मे कर तेजपाल खिल्लन जिस तरह से राजनीति में 'व्यस्त' हो गए हैं, उससे लोगों को यह लगा है कि उनकी इस राजनीतिक सक्रियता के पीछे उनका वास्तविक उद्देश्य ऑर्डर्स का जुगाड़ करना ही है । एक कुशल बिजनेसमैन होने के नाते तेजपाल खिल्लन इस तरह की बातों पर गौर नहीं करते हैं, और इस तरह की बातों को अनसुना करने की समझदारी ही दिखाते हैं । इस बार समस्या लेकिन यह हुई है कि तेजपाल खिल्लन को डर हुआ है कि इस तरह की बातों से उनका राजनीतिक प्लान कहीं फेल न हो जाए । तेजपाल खिल्लन को डर है कि जो लोग उनके साथ और उनके भरोसे हैं, वह कहीं इस बात को गंभीरता से न ले लें कि तेजपाल खिल्लन उनके नाम पर राजनीति करें सो करें - धंधा भी कर ले जाएँ ! इसीलिए तेजपाल खिल्लन को लोगों के बीच विश्वास और भरोसा बनाए रखने के लिए उन्हें यह बताने की जरूरत महसूस हुई कि वह नरेश अग्रवाल की बातों में आने वाले नहीं हैं; और देखिए वह खुद तो उन्हें फोन  कर ही रहे हैं, बल्कि अपनी पत्नी से भी फोन करवा रहे हैं - लेकिन वह उनसे बात ही नहीं कर रहे हैं, क्योंकि इस बार उन्हें उनसे कोई समझौता नहीं करना है ।
तेजपाल खिल्लन को इस बार मल्टीपल की चुनावी राजनीति में किसी भी कीमत पर कामयाब होना ही है - उन्हें लगता है कि इस बार यदि वह सफल नहीं हो पाए, तो अगले पाँच-छह वर्ष में अपने बिजनेस में ऊँची छलाँग मारने का उनके सामने जो मौका है, उसे वह खो देंगे । इसीलिए मजे की बात यह देखने में आ रही है कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए विनय गर्ग की और इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए वीएस कुकरेजा की उतनी सक्रियता नहीं है, जितनी तेजपाल खिल्लन की है । उनके चुनाव को लेकर उनकी बजाए तेजपाल खिल्लन ने दिन-रात एक किया हुआ है । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद पर विनय गर्ग के लिए समर्थन और वोट जुटाने के लिए फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स से बात करने पर कई बार तेजपाल खिल्लन को सुनना पड़ा है कि - विनय गर्ग तो कुछ कहते नहीं हैं, आप ही कह रहे हैं; कहो तो आपको चेयरमैन बनवा देते हैं । विनय गर्ग और वीएस कुकरेजा की तरफ से पैसे खर्च न करने की भी शिकायतें तेजपाल खिल्लन को जब तब सुनने को मिलती रही हैं, और हर बार उन्होंने  लोगों को एक ही जबाव दिया है कि फिक्र मत करो, मैं पैसे खर्च करूँगा ! मल्टीपल काउंसिल की कॉन्फ्रेंस में रजिस्ट्रेशन व कमरों आदि पर जो पैसा खर्च हो रहा है, उसे लेकर भी तेजपाल खिल्लन ने यह दिखाने/जताने का कोई मौका नहीं छोड़ा है कि यह पैसा वह खर्च कर रहे हैं । इससे लोगों बीच यह सवाल भी उठ रहे हैं कि विनय गर्ग  वीएस कुकरेजा की बजाए तेजपाल खिल्लन क्यों पैसे खर्च कर रहे हैं ? दरअसल इसीलिए माना/समझा जा रहा है कि मल्टीपल में इस बार का चुनाव विनय गर्ग और वीएस कुकरेजा को नहीं जीतना है - बल्कि तेजपाल खिल्लन को जीतना है; और वह पैसे खर्च नहीं कर रहे हैं, बल्कि इन्वेस्ट कर रहे हैं - आज इन्वेस्ट करेंगे, तो कल उसका कई गुना प्राप्त करेंगे ।
मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए तेजपाल खिल्लन जो पाँच वोट अपने साथ मान रहे हैं, उनमें डिस्ट्रिक्ट 321 एफ के आनंद साहनी तथा डिस्ट्रिक्ट 321 डी के स्वर्ण सिंह खालसा पर उन्हें लगातार संदेह बना हुआ है । उन्हें डर है कि यह दोनों लोग लीडरशिप के साथ जाने के चक्कर में उन्हें धोखा दे सकते हैं; इसलिए तेजपाल खिल्लन ने इनकी पहरेदारी तो मजबूत लगाई हुई है - लेकिन फिर भी वह इन दोनों की तरफ से पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं । इन दोनों का भरोसा और समर्थन बनाए रखने के लिए ही तेजपाल खिल्लन ने दरअसल नरेश अग्रवाल और उनकी पत्नी द्वारा फोन करने की कहानी सुनाई है । तेजपाल खिल्लन ने दूसरों के साथ-साथ खास तौर से इन दोनों तक यह संदेश पहुँचाने तथा इन्हें यह दिखाने/जताने का प्रयास किया है कि नरेश अग्रवाल और उनकी पत्नी के हस्तक्षेप से भी वह प्रभावित नहीं हो रहे हैं - और नरेश अग्रवाल की 'राजनीति' से वह कोई समझौता नहीं करेंगे तथा उनसे भिड़ते रहेंगे । तेजपाल खिल्लन को भरोसा है कि इस तरह की बातों से वह अपने खेमे के लोगों को तथा अपने द्वारा जुटाए गए समर्थन को चुनाव के समय तक तो अपने पक्ष में बनाए रखने में सफल हो जायेंगे । लेकिन अपने बिजनेस और अपनी राजनीति के फायदे के लिए तेजपाल खिल्लन ने जिस तरह से नरेश अग्रवाल के साथ-साथ उनकी पत्नी के नाम को भी घसीट लिया है, उससे उनके नजदीक के ही कई लोग खफा भी हो रहे हैं । उनका कहना है कि तेजपाल खिल्लन को अपने बिजनेस और अपनी राजनीति के स्वार्थ में इस हद पर नहीं उतर आना चाहिए कि वह नरेश अग्रवाल और उनकी पत्नी को भी विवाद में घसीट लें ।

Wednesday, May 24, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में हो रहे इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव से वीएस कुकरेजा ने जब अपने आप को बाहर मान/समझ लिया है, तब भी तेजपाल खिल्लन फर्जी तौर-तरीके से उनकी उम्मीदवारी के बारे में झूठ फैलाने के काम में आखिर क्यों लगे हुए हैं ?

नई दिल्ली । वीएस कुकरेजा को इंटरनेशनल डायरेक्टर एंडॉर्सी चुनवाने/बनवाने की जिम्मेदारी लेकर तेजपाल खिल्लन ऐसी मुसीबत फँस गए हैं कि उनसे न निगलते बन रहा है, और न उगलते - इस मामले में मल्टीपल के अधिकतर डिस्ट्रिक्ट्स जिस तरह जेपी सिंह के प्रति समर्थन व्यक्त कर रहे हैं, उससे जेपी सिंह के सामने तेजपाल खिल्लन कच्चे खिलाड़ी भी साबित हो रहे हैं । तेजपाल खिल्लन के नजदीकियों के अनुसार, तेजपाल खिल्लन भी महसूस कर रहे हैं कि वीएस कुकरेजा के चक्कर में उन्होंने नाहक ही मल्टीपल में अपने लिए फजीहत का मौका बनवा लिया है । इन दोनों के डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 321 ए वन के लोगों का हालाँकि कहना है कि इस मामले में तेजपाल खिल्लन दरअसल अपने ही जाल में फँस गए हैं; तेजपाल खिल्लन अपनी राजनीति चलाने/बढ़ाने/दिखाने के लिए एक 'मुर्गा' खोजते हैं - इसी तर्ज पर उन्होंने वीएस कुकरेजा में हवा भरी, लेकिन वीएस कुकरेजा कुछ अपनी बेवकूफी में और कुछ अपने सयानेपन में उनका 'मुर्गा' नहीं बन पाए; और इस कारण तेजपाल खिल्लन के लिए चिकेन की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है । इसका नतीजा है कि मल्टीपल के दस में से जिन तीन डिस्ट्रिक्ट्स में तेजपाल खिल्लन ने एक एक ग्रुप का - यानि आधे/आधे लोगों का अलग अलग कारणों से जो समर्थन जुटाया भी है, उस 'समर्थन' को मौके पर पहुँचाने को लेकर ही उनके पसीने छूट रहे हैं ।
हद की बात तो यह है कि तेजपाल खिल्लन और वीएस कुकरेजा के अपने डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 321 ए वन से ज्यादा लोग मल्टीपल कन्वेंशन में जाने को लेकर उत्साहित नहीं दिख रहे हैं । इस तरह के मामलों में लोगों को उत्साहित करने के लिए दरअसल 'रिवाज' यह बना हुआ है कि लोगों को बताया जाये कि उनका रजिस्ट्रेशन करवा लिया गया है, और उनके ठहरने के लिए कमरे बुक हो चुके हैं । तेजपाल खिल्लन और वीएस कुकरेजा की तरफ से चूँकि ऐसा कुछ नहीं कहा जा रहा है, इसलिए अलग अलग कारणों से उनके समर्थन में बने दिख रहे लोग भी निराश हैं । दिलचस्प नजारा यह है कि इनके अपने डिस्ट्रिक्ट से ज्यादा उछल-कूद तो डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू और डिस्ट्रिक्ट 321 एफ के एक एक खेमे के गवर्नर्स दिखा रहे हैं - लेकिन उनके बीच भी इस बात को लेकर निराशा है कि तेजपाल खिल्लन और वीएस कुकरेजा की तरफ से कोई 'ऑफर' ही नहीं मिल रहा है; कुछेक लोगों ने तो इनसे शिकायत भी की है कि 'रिवाज' के अनुसार यदि ऑफर नहीं दोगे, तो लोग 'वोट, सपोर्ट और इलेक्ट' करवाने क्यों आयेंगे ? वीएस कुकरेजा का कहना है कि वह जब उम्मीदवार ही नहीं रह गए हैं, तो फिर उम्मीदवार द्वारा निभाया जाने वाला 'रिवाज' वह भला क्यों पूरा करें ? उनकी बात भी ठीक है, और उसमें दम है ।
लेकिन इस ठीक बात के चक्कर में डिस्ट्रिक्ट 321 ए वन व डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू और डिस्ट्रिक्ट 321 एफ के उन गवर्नर्स ने अपनी स्थिति हास्यास्पद बना ली है, जो सोशल मीडिया में वीएस कुकरेजा के लिए 'वोट-सपोर्ट-इलेक्ट' के पोस्टर लहरा रहे हैं । यह बेचारे पोस्टर तो लहरा रहे हैं, किंतु इनके पास इस बात का जबाव नहीं है कि वीएस कुकरेजा का जब नामांकन ही रिजेक्ट हो गया है, जिसके चलते वह उम्मीदवार ही नहीं रह गए हैं - तो उन्हें वोट कैसे दे पाओगे, कैसे उन्हें इलेक्ट करोगे ? जाहिर है कि वीएस कुकरेजा के समर्थन के नाम पर एक निर्लज्ज किस्म की मूर्खता का प्रदर्शन हो रहा है । कुछेक गवर्नर्स का गहरी नाराजगी के साथ हालाँकि कहना यह भी है कि उनके नाम से वीएस कुकरेजा को 'वोट-सपोर्ट-इलेक्ट' वाले पोस्टर उन्होंने नहीं निकाले हैं, बल्कि उनके नाम से किसी ने फर्जीवाड़ा किया है ।
इस फर्जीवाड़े के लिए तेजपाल खिल्लन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है । लोगों का कहना है कि तेजपाल खिल्लन दावा कर रहे हैं कि वीएस कुकरेजा अभी भी उम्मीदवार हैं और उनकी उम्मीदवारी को रद्द नहीं किया जा सकता है । वह तर्क दे रहे हैं कि दीपक तलवार की चेयरमैनी वाली नोमीनेशन कमेटी का गठन ही गैरकानूनी है, और इस कमेटी को नामांकन रद्द करने का अधिकार ही नहीं है । तेजपाल खिल्लन ने कोशिश की थी कि इस कमेटी के को-चेयरमैन राजीव मित्तल कमेटी के गैरकानूनी होने का वास्ता देकर कमेटी और अपने पद से इस्तीफा दे दें । राजीव मित्तल ने लेकिन उनकी बात मानने से साफ इंकार कर दिया । राजीव मित्तल, तेजपाल खिल्लन के डिस्ट्रिक्ट के ही पूर्व गवर्नर हैं; इसलिए उनके इंकार ने तेजपाल खिल्लन की और फजीहत कर दी है । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन जेसी वर्मा भी तेजपाल खिल्लन के डिस्ट्रिक्ट के ही हैं, लेकिन उनकी तरफ से भी तेजपाल खिल्लन की फजीहत करने/कराने का कोई मौका नहीं छोड़ा जा रहा है । दरअसल डिस्ट्रिक्ट में तेजपाल खिल्लन ने राजीव मित्तल और जेसी वर्मा की ऐसीतैसी कर रखी है, सो इन्हें अब तेजपाल खिल्लन से बदला लेने का मौका मिल रहा है - और यह कोई मौका छोड़ भी नहीं रहे हैं । इनके रवैये ने मल्टीपल में नेतागिरी जमाने/दिखाने की तेजपाल खिल्लन की कोशिशों को पलीता लगा दिया है ।
तेजपाल खिल्लन के लिए मुसीबत और फजीहत की बात यह भी हुई है कि वीएस कुकरेजा की उम्मीदवारी को लेकर वह दूसरों को तो आश्वस्त करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन खुद वीएस कुकरेजा को उनके दावे और उनकी बातों पर भरोसा नहीं हो रहा है - और यही कारण है कि अपनी उम्मीदवारी को लेकर वह खुद ही उत्साहित नहीं रह गए हैं, और लोगों से बचने/छिपने में ही लगे हुए हैं । अभी हाल ही में संपन्न हुई डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में उन्हें बड़े सम्मान के साथ आमंत्रित किया गया था; डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के निमंत्रण पत्र पर उनका नाम और फोटो था तथा बैकड्रॉप बैनर में भी उनका नाम और फोटो था - किंतु वीएस कुकरेजा कॉन्फ्रेंस में पहुँचे ही नहीं । उन्हें अपने उम्मीदवार होने का सचमुच भरोसा होता, तो क्या वह ऐसा कर सकते थे ? उनकी अनुपस्थिति में जेपी सिंह ने दोहरा फायदा उठाया - और उस एक आयोजन से मल्टीपल के डिस्ट्रिक्ट्स में यह साफ संदेश गया कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी दौड़ से वीएस कुकरेजा ने अपने आपको बाहर मान लिया है, और इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए एक अकेले उम्मीदवार जेपी सिंह ही हैं । 'मुद्दई सुस्त, गवाह चुस्त' वाली तर्ज पर मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव का दिलचस्प नजारा है कि वीएस कुकरेजा तो अपनी तथाकथित उम्मीदवारी को लेकर चुप बने हुए हैं और लोगों से बचते/छिपते फिर रहे हैं, जबकि तेजपाल खिल्लन फर्जी तौर-तरीके से उनकी उम्मीदवारी के बारे में झूठ फैलाने के काम में लगे हुए हैं ।

Saturday, May 6, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इंटरनेशनल डायरेक्टर के चुनाव में वीएस कुकरेजा सचमुच उम्मीदवार बने रहेंगे, या जेपी सिंह के साथ कोई सौदा करके तेजपाल खिल्लन उनकी उम्मीदवारी वापस करवा देंगे

नई दिल्ली । इंटरनेशनल डायरेक्टर एंडॉर्सी पद के लिए चुनाव अभियान पर निकलने की तैयारी कर रहे वीएस कुकरेजा के 'चुनावी रथ' के चोरी हो जाने को उनके शुभचिंतकों और समर्थकों ने एक बुरे संकेत के रूप में देखा/पहचाना है - और चुनाव के प्रति और गंभीर व सतर्क होने की जरूरत को रेखांकित किया है । उल्लेखनीय है कि अपनी जिस इनोवा कार के सहारे वीएस कुकरेजा को अपने चुनाव अभियान पर निकलना था, उसके चोरी हो जाने की खबर उन्होंने खुद ही लोगों को दी है । यह ठीक है कि उनके समर्थकों व शुभचिंतकों को विश्वास है कि चुनावी जरूरत के बीच इस मुसीबत को वीएस कुकरेजा हैंडल कर लेंगे और इसके कारण अपने चुनाव अभियान को प्रभावित नहीं होने देंगे, लेकिन फिर भी उन्हें यह भी आशंका हुई है कि किन्हीं अदृश्य शक्तियों ने वीएस कुकरेजा के चुनाव अभियान में बाधा खड़ी करने के उद्देश्य से तो उनकी इनोवा की चोरी नहीं करवा दी । हालाँकि लायन राजनीति बहुत गंदी होती जा रही है और उसमें बहुत बहुत घटियापन भी होने लगा है - किंतु शुक्र है कि वीएस कुकरेजा या उनके समर्थक/शुभचिंतक इनोवा की चोरी को दिल्ली में होने वाली वाहन-चोरी की घटनाओं की श्रृंखला के रूप में ही देख/पहचान रहे हैं और उनकी तरफ से इसके पीछे विरोधियों का हाथ होने का शक प्रकट नहीं किया गया है ।
इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए मल्टीपल में एंडोर्स होने के लिए यूँ तो कई उम्मीदवार हैं, लेकिन अभी मुख्य मुकाबला वीएस कुकरेजा और जेपी सिंह के बीच होने की संभावना व्यक्त की जा रही है । वीएस कुकरेजा को हालाँकि एक डमी उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जाता रहा है, और लोगों के बीच चर्चा रही है कि उन्हें तेजपाल खिल्लन ने अपने कई कई कारनामों को संभव करने के लिए विजुका के रूप में रूप 'खड़ा' किया हुआ है, और वह कभी भी वीएस कुकरेजा को पीछे खींच सकते हैं - लेकिन अभी उनकी तरफ से जिस तरह की तैयारी होती सुनी गई है, उससे लग रहा है कि तेजपाल खिल्लन इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट को लेकर गंभीर हैं । तेजपाल खिल्लन की गंभीरता को देखते हुए भी जेपी सिंह लेकिन चूँकि अभी तक गंभीर होते हुए नहीं दिख रहे हैं, इसलिए लोगों को हैरानी है । इस हैरानी में लोगों को लग रहा है कि जेपी सिंह ने शायद तेजपाल खिल्लन की 'गंभीरता' को खत्म करने का कोई रामबाण खोजा हुआ है, और उन्हें विश्वास है कि उचित समय पर वह उसका इस्तेमाल करेंगे - और तेजपाल खिल्लन का 'गुस्सा' शांत कर देंगे । जेपी सिंह अभी 'उस' रामबाण का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो शायद इसलिए कि वह देख लेना चाहते हैं कि तेजपाल खिल्लन के भरोसे वीएस कुकरेजा कितना ऊपर तक उड़ पाते हैं ? जेपी सिंह के नजदीकियों के अनुसार, जेपी सिंह को लगता है कि हो सकता है कि वीएस कुकरेजा ज्यादा ऊपर तक न उड़ पाएँ और खुद ही नीचे बैठ जाएँ ?
वीएस कुकरेजा को लेकर दरअसल उनके हो सकने वाले समर्थकों को भी शक है कि वह मुकाबले में बने भी रह सकेंगे क्या ? जो लोग उन्हें जानते हैं, उनका कहना है कि एक उम्मीदवार के रूप में व्यवहार कर सकना उनके लिए संभव ही नहीं है, और इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को अफोर्ड करना उनके बस की बात नहीं है । वीएस कुकरेजा के पास बस एक ही ताकत है - और वह है तेजपाल खिल्लन का संग/साथ । लेकिन चूँकि वह पूरी तरह से तेजपाल खिल्लन के भरोसे हैं - इसलिए लोगों के बीच लाख टके का सवाल यह है कि तेजपाल खिल्लन का संग/साथ वीएस कुकरेजा की ताकत साबित होगा, या उनकी कमजोरी । दरअसल हर किसी को लग रहा है कि वीएस कुकरेजा की उम्मीदवारी को तेजपाल खिल्लन अपने स्वार्थ के लिए बनाए हुए हैं, और जब भी उन्हें यह लगेगा कि वीएस कुकरेजा की उम्मीदवारी को छोड़ देने से उनका स्वार्थ पूरा हो जाएगा - वह वीएस कुकरेजा की उम्मीदवारी को छोड़ देने में देर नहीं लगायेंगे ।
तेजपाल खिल्लन का स्वार्थ क्या है - इसे लेकर जितने मुँह उतनी बातें हैं । तेजपाल खिल्लन के 'व्यवहार' को देखते रहे लोगों को कहना है कि वह वास्तव में हीनग्रंथि का शिकार हैं । उनके साथ बिडंवना यह है कि हालाँकि मल्टीपल में वह सबसे समर्थ लायन नेता हैं - लायन राजनीति करने के लिए जो कुछ भी चाहिए होता है, वह उनके पास प्रचुर मात्रा में है; लेकिन फिर भी उनकी राजनीतिक पहचान और हैसियत एक डिस्ट्रिक्ट के एक नेता भर की है - दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के साथ साथ उनके अपने डिस्ट्रिक्ट में लोग उन्हें लायनिज्म के एक व्यापारी के रूप में जानते/पहचानते हैं और इसी नाते लीडरशिप भी उन्हें कोई खास तवज्जो नहीं देती है । तेजपाल खिल्लन ने अपने डिस्ट्रिक्ट में पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर केएम गोयल की बुरी हालत कर रखी है; लायन राजनीति करने के लिए जो कुछ भी चाहिए होता है, केएम गोयल के पास उसमें से कुछ भी नहीं है - लेकिन फिर भी लोगों के बीच और लीडरशिप में केएम गोयल की पहचान और हैसियत तेजपाल खिल्लन से कहीं कहीं ज्यादा है । तेजपाल खिल्लन के फ्रस्ट्रेशन का आलम यह है कि अपने डिस्ट्रिक्ट में वह अपनी मर्जी से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनाते/बनवाते हैं, लेकिन फिर भी वह दोबारा से खुद डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने के लिए लाइन में लग गए हैं । यह बात वास्तव में उनकी छोटी सोच और विकल्पहीनता के शिकार होने का ही सुबूत है । दरअसल इसीलिए हर तरह से समर्थ होने के बावजूद वह ऐसा कोई काम नहीं कर सके हैं, जिससे लोगों के बीच उनकी खास पहचान बन सके और उनके लिए सम्मान बने । कुल मिलाकर लायन राजनीति में भी वह सिर्फ एक सौदागर ही बन सके हैं - राजनीति के खिलाड़ी जानते हैं कि राजनीति के सौदागरों के साथ कैसे सौदा किया जाता है ।
तेजपाल खिल्लन के तौर-तरीकों से परिचित लोगों को इसीलिए लगता है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में भी तेजपाल खिल्लन कोई न कोई सौदा कर लेंगे और तब वीएस कुकरेजा के सामने अपनी उम्मीदवारी से पीछे हटने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाएगा । जेपी सिंह जिस तरह से वीएस कुकरेजा की उम्मीदवारी के प्रति निश्चिन्त से बने नजर आ रहे हैं, उससे भी लोगों को लग रहा है कि उन्हें विश्वास है कि वीएस कुकरेजा के साथ चुनाव की नौबत नहीं आएगी । लोगों को भी लगता है कि जेपी सिंह जिस दिन नरेश अग्रवाल से तेजपाल खिल्लन की बात/मुलाकात करवा देंगे और उनसे तेजपाल खिल्लन को 'तवज्जो' दिलवा देंगे, उस दिन तेजपाल खिल्लन - वीएस कुकरेजा की उम्मीदवारी को वापस करवा कर जेपी सिंह की उम्मीदवारी का झंडा उठा लेंगे । हालाँकि तेजपाल खिल्लन के नजदीकियों का कहना है कि इस बार जेपी सिंह और या नरेश अग्रवाल के लिए तेजपाल खिल्लन से सौदा करना आसान नहीं होगा, और तेजपाल खिल्लन आसानी से जेपी सिंह को सफल नहीं होने देंगे । लोगों के अपने अपने दावे हैं - उन दावों की सच्चाई अगले कुछ दिनों में जेपी सिंह और वीएस कुकरेजा की तरफ की तैयारी को देख कर ही पहचानी जा सकेगी; और तभी संकेत मिलेगा कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी लड़ाई किस दिशा में आगे बढ़ती है ।

Monday, September 19, 2016

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में अपने पद की प्रतिष्ठा के साथ न्याय करने की अनुपम बंसल की कोशिश ने लीडरशिप इंस्टीट्यूट के नाम पर जगदीश गुलाटी, वीएस कुकरेजा और विशाल सिन्हा के तमाशे की पोल खोली

लखनऊ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विशाल सिन्हा के अपमानजनक रवैये के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनुपम बंसल ने ताशकंद में आयोजित हुए डिस्ट्रिक्ट लायंस लीडरशिप इंस्टीट्यूट का बहिष्कार किया । ताशकंद से लौटे लोगों से डिस्ट्रिक्ट के लोगों को यही एक महत्त्वपूर्ण खबर सुनने को मिली है । मजे की बात यह है कि अनुपम बंसल इसी इंस्टीट्यूट में शामिल होने के लिए लखनऊ से ताशकंद गए थे । उल्लेखनीय है कि ग्लोबल लीडरशिप टीम (जीएलटी) के डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डीनेटर होने के नाते अनुपम बंसल को उक्त कार्यक्रम में प्रमुख भूमिका निभानी थी, लेकिन वह पूरे कार्यक्रम से ही बाहर रहे । प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अनुपम बंसल के इस रवैए पर लोगों के सामने ही विशाल सिन्हा ने अनुपम बंसल को खूब कोसा; हालाँकि कार्यक्रम शुरू हो जाने के कुछ देर बाद तक भी विशाल सिन्हा फोन पर अनुपम बंसल से बात करने और उन्हें मनाने की कोशिश करते रहे - पर अनुपम बंसल कार्यक्रम में नहीं ही पहुँचे । वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर गुरनाम सिंह ने भी अनुपम बंसल को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राजी करने वास्ते प्रयास किया, किंतु उनका प्रयास भी अनुपम बंसल की नाराजगी को दूर नहीं कर सका । प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब खाना शुरू हुआ, अनुपम बंसल तब मौके पर पहुँचे ।
ताशकंद से लौटे लोगों के अनुसार, अनुपम बंसल ने दो कारणों से अपने आप को बहुत अपमानित महसूस किया और इसके चलते पैदा हुई नाराजगी के कारण उन्होंने डिस्ट्रिक्ट लायंस लीडरशिप इंस्टीट्यूट का बहिष्कार किया । पहला कारण तो यह रहा कि इस इंस्टीट्यूट का जो निमंत्रण पत्र छपा, उसमें अनुपम बंसल का नाम ही नहीं छपा । अनुपम बंसल यह देख कर बुरी तरह बौखलाए कि निमंत्रण पत्र में इंस्टीट्यूट के चेयरपरसन के रूप में संजय चोपड़ा का नाम छपा, लेकिन डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डीनेटर होने के बावजूद उनका नाम नहीं छपा । संजय चोपड़ा वैसे भी अनुपम बंसल से जूनियर पूर्व गवर्नर हैं । इसके अलावा, संजय चोपड़ा की तुलना में अनुपम बंसल को विशाल सिन्हा के ज्यादा नजदीक समझा/देखा जाता है । यानि हर तरह से संजय चोपड़ा से 'भारी' होने के बावजूद अनुपम बंसल का नाम विशाल सिन्हा ने निमंत्रण पत्र पर नहीं छापा । विशाल सिन्हा की तरफ से अनुपम बंसल को दूसरा झटका यह देख कर लगा कि विशाल सिन्हा खुद तो एक अच्छे होटल में ठहरे, किंतु उन्हें दूसरे अपेक्षाकृत सेकेंडग्रेड होटल में ठहरवा दिया । लोगों का कहना है कि इन दो बातों से अनुपम बंसल ने खुद को अपमानित महसूस किया और फिर विरोधस्वरूप उन्होंने उस कार्यक्रम से ही दूर रहने का फैसला किया, जिसके नाम पर वह ताशकंद गए/पहुँचे थे ।
डिस्ट्रिक्ट लायंस लीडरशिप इंस्टीट्यूट को विशाल सिन्हा ने जिस तरह से आयोजित किया, उसकी ऊपरी रूपरेखा को देख कर ही समझा जा सकता है कि इसके आयोजन को लेकर वह जरा भी गंभीर नहीं थे, और इस आयोजन के जरिए उन्होंने वास्तव में अपना और लायनिज्म का मज़ाक ही बनाया है । कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र ही बताता है कि इंस्टीट्यूट लीडरशिप को लेकर था, लेकिन उसके लिए फैकल्टी मेंबरशिप की बुलाई गई - और वह पट्ठे आकर भाषण भी पेल गए । यह क्या ऐसा ही मामला नहीं है कि चिकनगुनिया और डेंगू जैसी बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए किसी डॉक्टर की बजाए किसी चार्टर्ड एकाउंटेंट का भाषण करवा दिया जाए ? इस मामले में इसीलिए अकेले विशाल सिन्हा को ही दोष देने का क्या फायदा ? जगदीश गुलाटी और वीएस कुकरेजा को क्या यह कहते हुए कार्यक्रम में फैकल्टी के रूप में शामिल होने से इंकार नहीं कर देना चाहिए था कि हम लोग जीएमटी के लोग हैं - इस कार्यक्रम में जीएलटी के लोगों को बुलाया जाना चाहिए ? लेकिन जब पता हो कि विदेश घूमने का मौका मिल रहा हो, भाषण पेलने का और नेतागिरी दिखाने का अवसर मिल रहा हो, और बुलाने वाला बिलकुल मूर्खता दिखाने पर ही आमादा हो - तो फिर इंकार करने में कौन सी अक्लमंदी है ? इस तरह अपनी अपनी अक्लमंदी में जगदीश गुलाटी और वीएस कुकरेजा से मिली शह में विशाल सिन्हा ने फिर लायनिज्म का मज़ाक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी ।
जगदीश गुलाटी और वीएस कुकरेजा की सरपरस्ती में विशाल सिन्हा ने लीडरशिप इंस्टीट्यूट के नाम पर जो तमाशा किया, उसकी पोल शायद न खुलती - यदि वह अनुपम बंसल को नाराज न करते । ताशकंद में जो लोग उपलब्ध थे, उनमें लीडरशिप इंस्टीट्यूट के लिए अनुपम बंसल सबसे बड़े अधिकृत पदाधिकारी थे - विशाल सिन्हा ने लेकिन उन्हें ही कार्यक्रम की औपचारिक व्यवस्था से अलग-थलग रखा । अनुपम बंसल ने एक सामान्य प्रतिभागी की तरह कार्यक्रम में शामिल होना यदि उचित नहीं समझा, तो इस तरह उन्होंने अपने पद की प्रतिष्ठा के साथ वास्तव में न्याय ही किया है । अनुपम बंसल की इस न्यायप्रियता ने लेकिन लायनिज्म के नाम पर जगदीश गुलाटी, वीएस कुकरेजा और विशाल सिन्हा द्धारा किए गए तमाशे की असलियत को डिस्ट्रिक्ट व मल्टीपल के लोगों के सामने ला देने का काम कर दिया है ।

Tuesday, June 21, 2016

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने जा रहे शिव कुमार चौधरी की बदनामी व ठगी के किस्से लायंस इंटरनेशनल के 99वें अधिवेशन में फुकुओका में इकठ्ठा हुए लायन लीडर्स के बीच भी चर्चा का विषय बने

गाजियाबाद । जापान के फुकुओका में आयोजित हो रहे लायंस इंटरनेशनल के 99वें अधिवेशन में इकठ्ठा हुए लायन लीडर्स की परेड के लिए तो 24 जून का दिन सुनिश्चित किया गया है - लेकिन भारत से वहाँ पहुँचे हुए लायन लीडर्स ने, खासतौर से मल्टीपल 321 के लायन लीडर्स ने डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने जा रहे शिव कुमार चौधरी का 'जुलूस' वहाँ पहले से ही निकाला हुआ है । शिव कुमार चौधरी की कारस्तानियों के वहाँ खूब चर्चे हो रहे हैं; लायन लीडर्स हैरान हैं कि उनके बीच एक ऐसा व्यक्ति भी लीडर होने का दिखावा कर रहा है जो अपनी हरकतों के चलते अपने ही डिस्ट्रिक्ट में बुरी तरह से नापसंद किया जा रहा है; जो फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर तथा सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के साथ-साथ पूर्व गवर्नर्स के खिलाफ लगातार अशालीन तरीके से अपशब्दों का इस्तेमाल करता है, जो क्लब्स में जाकर बदतमीजी करता है - जिसका नतीजा यह दिख रहा है कि क्लब्स के कार्यक्रमों में शिव कुमार चौधरी को बुलाया तक नहीं जा रहा है; फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर और सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर तथा कई पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स शिव कुमार चौधरी के साथ खड़े तक नहीं दिखना चाह रहे हैं; और इस कारण से शिव कुमार चौधरी डिस्ट्रिक्ट में पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए हैं । फुकुओका में शिव कुमार चौधरी द्धारा लायन सदस्यों के पैसे दबा लेने की हरकतों की भी खूब चर्चा हो रही है । मल्टीपल 321 के कुछेक लायन लीडर्स दूसरे मल्टीपल के लायन लीडर्स को सावधान कर रहे हैं कि शिव कुमार चौधरी आकर्षक बिजनेस ऑफर दे कर लोगों से पैसे ठगने में बहुत माहिर हैं; अपने डिस्ट्रिक्ट में कई लायन सदस्यों से वह पैसे ठग चुके हैं । शिव कुमार चौधरी बिजनेस के नाम पर जिससे पैसे ले लेते हैं, फिर वापस करने में तरह तरह की बहानेबाजी करते हैं । पैसे वापस करने के नाम पर एक लायन सदस्य को जो चेक दिया, वह चेक बाउंस हो गया - जिसका केस अदालत में है । इस तरह, शिव कुमार चौधरी की जिस बदनामी के चर्चे अभी तक सिर्फ उनके अपने डिस्ट्रिक्ट तक ही सीमित थे, आज वह फुकुओका में हो रहे इंटरनेशनल अधिवेशन में चर्चा का विषय बने हुए हैं ।
मजे की बात यह है कि फुकुओका में शिव कुमार चौधरी ने अपनी फजीहत का यह मौका स्वयं ही बनाया है । फुकुओका में मौजूद कुछेक लायन लीडर्स ने भारत में अपने नजदीकियों को बताया कि दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के लायन लीडर्स के बीच शिव कुमार चौधरी ने अपने स्वभाव के अनुसार डींगें मारना शुरू कर दिया और अपने आप ही अपनी तारीफ करना शुरू कर दिया, जिस पर कुछेक लीडर्स ने उन्हें आईना दिखा दिया । इससे भड़क कर शिव कुमार चौधरी ने बकवासबाजी शुरू कर दी, तो फिर बात और बढ़ गई । शिव कुमार चौधरी को शायद इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनकी हरकतों की जानकारी दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के लायन लीडर्स को भी होगी, उन्हें लगा कि वह जैसा जो कहेंगे/बतायेंगे - लोग उसे ही सच मान लेंगे; लेकिन जब बातें होना शुरू हुईँ तो पता चला कि मल्टीपल के लायन लीडर्स को शिव कुमार चौधरी की हर एक कारस्तानी के बारे में विस्तार से पता है । शिव कुमार चौधरी ने इसका ठीकरा फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अजय सिंघल के सिर फोड़ने की कोशिश की, लेकिन जो कोशिश उन्हें और उल्टी पड़ी । शिव कुमार चौधरी ने आरोप लगाया कि मल्टीपल के लायन लीडर्स के बीच उन्हें बदनाम करने का काम अजय सिंघल ने किया है । मल्टीपल के लायन लीडर्स ने लेकिन जब अजय सिंघल की तारीफ की और शिव कुमार चौधरी की बदनामी व फजीहत के लिए शिव कुमार चौधरी की हरकतों को ही जिम्मेदार ठहराया - तो शिव कुमार चौधरी को और मिर्ची लगी । मल्टीपल के लायन लीडर्स पर लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ा, उन्होंने बल्कि दूसरे मल्टीपल के लायन लीडर्स को भी शिव कुमार चौधरी की असलियत से परिचित कराना शुरू कर दिया । इस कार्रवाई पर ही एक वरिष्ठ लायन लीडर ने चुटकी ली कि लायंस इंटरनेशनल की तरफ से तो फुकुओका में लायन लीडर्स की परेड अभी बाद में निकलेगी, मल्टीपल के लायन लीडर्स ने शिव कुमार चौधरी का 'जुलूस' लेकिन पहले ही निकाल दिया है ।
फुकुओका में शिव कुमार चौधरी को अपनी पीएसटी स्कूलिंग पर भी लायन लीडर्स की भारी लताड़ सुनने को मिली । पीएसटी स्कूलिंग डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में शिव कुमार चौधरी का पहला कार्यक्रम था, जो बुरी तरह से फ्लॉप हुआ - न केवल फ्लॉप हुआ, बल्कि जिसने यह भी 'दिखाया' और साबित किया कि शिव कुमार चौधरी को लायंस इंटरनेशनल के नियमों की तथा व्यवस्था की बुनियादी जानकारी भी नहीं है । उल्लेखनीय है कि पीएसटी स्कूलिंग को लेकर आरोप यह है कि शिव कुमार चौधरी के आचरण/व्यवहार के प्रति विरोध दर्ज कराने के उद्देश्य से अधिकतर क्लब्स के पदाधिकारियों ने उनकी पीएसटी स्कूलिंग का बहिष्कार किया, जिस कारण उनकी पीएसटी स्कूलिंग में एक चौथाई पीएसटी भी नहीं पहुँचे । शिव कुमार चौधरी की तरफ से इस आरोप को झूठा बताते हुए कभी कार्यक्रम-स्थल की हाउसफुल की तस्वीरें पेश की जा रही हैं, तो कभी बताया जा रहा है कि पीएसटी स्कूलिंग में 'इतने' क्लब की भागीदारी हुई । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने जा रहे शिव कुमार चौधरी को क्या सचमुच इस बात का पता नहीं है, या वह झूठ बोल कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं कि पीएसटी स्कूलिंग के सफल होने का पैमाना सिर्फ यह होगा कि उसमें पी(प्रेसीडेंट), एस(सेक्रेटरी) टी(ट्रेजरार) कितने थे - यह नहीं होगा कि कार्यक्रम में कितनी भीड़ थी और वहाँ कितने क्लब्स का प्रतिनिधित्व था । शिव कुमार चौधरी की तरफ से पीएसटी स्कूलिंग को सफल बताने के लिए बकवासबाजी तो खूब की गई है, लेकिन आरोप का सीधा जबाव देते हुए यह नहीं बताया गया है कि उनकी पीएसटी स्कूलिंग में पीएसटी कितने शामिल हुए । आरोप तो यही है कि पीएसटी ने उनकी पीएसटी स्कूलिंग का बहिष्कार किया । पीएसटी स्कूलिंग के नाम पर शिव कुमार चौधरी ने एक और धोखाधड़ी की : लायंस इंटरनेशनल के नियम व व्यवस्था के अनुसार पीएसटी स्कूलिंग में प्रेसीडेंट, सेक्रेटरी व ट्रेजरार की अलग अलग ग्रुप में स्कूलिंग होनी चाहिए । शिव कुमार चौधरी ने ऐसा न करके सभी को एक साथ भाषण सुनवा दिया - और इस तरह वास्तव में पीएसटी स्कूलिंग का मजाक बना दिया । शिव कुमार चौधरी ने इसके लिए फैकल्टी वीएस कुकरेजा को यह कहते हुए जिम्मेदार ठहरा दिया कि उन्होंने जैसा करने को कहा, हमने तो वैसा कर दिया । किंतु सच यह है कि यदि प्रेसीडेंट्स, सेक्रेटरीज व ट्रेजरार्स को अलग अलग बैठा कर स्कूलिंग कराई जाती, तो पीएसटी की उपस्थिति की पोल खुल जाती । इन तर्कों के साथ फुकुओका में लायन लीडर्स ने शिव कुमार चौधरी को लताड़ लगाई, तो शिव कुमार चौधरी को जबाव देते नहीं बना ।
पैसे ठगने की बातों ने तो फुकुओका में शिव कुमार चौधरी के लिए बहुत ही शर्मिंदगी की स्थिति पैदा की हुई है । शिव कुमार चौधरी की लोगों से पैसों की ठगी की जो बात अभी तक डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन में ही लोगों को पता थी, अब वह लायन समाज के लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है । इस मामले में शिव कुमार चौधरी के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि अपनी इस हरकत के लिए वह किसी दूसरे को जिम्मेदार भी नहीं ठहरा सकते हैं । किसी किसी से उन्होंने यह कहा/बताया भी कि वह जल्दी ही लोगों से लिए पैसे वापस करेंगे, तो उन्हें यह और सुनने को मिला कि - हाँ, डिस्ट्रिक्ट टीम के पद 'बेच' कर बहुत पैसे जुटा लिए होंगे, उससे कुछेक लोगों के पैसे तो वापस कर ही सकते हो । फुकुओका में इकठ्ठा हुए भारत के विभिन्न मल्टीपल्स के लायन लीडर्स शिव कुमार चौधरी को लेकर जब इस तरह की बातें करते हुए सुने जाते हैं, तो इससे सिर्फ शिव कुमार चौधरी की ही बदनामी नहीं हो रही है - बल्कि डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन की और लायनिज्म की भी बदनामी हो रही है ।