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Friday, July 14, 2017

लायंस मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में अपने धंधे के लिए लीडरशिप से सौदेबाजी करने खातिर अभी तक वीएस कुकरेजा और चमनलाल गुप्ता को इस्तेमाल करते रहे तेजपाल खिल्लन अब विनय गर्ग को इस्तेमाल कर रहे हैं क्या ?

नई दिल्ली । विरोध के नाम पर एक दूसरे को गालियाँ देने, एक दूसरे के साथ धक्का-मुक्की करने तथा मार-पिटाई करने/कराने और पुलिस रिपोर्ट करने/करवाने के बाद लायंस नेताओं के बीच अब मेलमिलाप करने और मुस्कुराते हुए साथ-साथ फोटो खिंचवाने का मौसम है । यह तस्वीरें हालाँकि छलावा ही हैं, और इन्हें अपने अपने धंधे और अपनी अपनी पोजीशन बचाने के लिए लायन लीडर्स द्वारा किए जाने वाले नाटक के दृश्यों के रूप में ही देखा जाना चाहिए । इनके नजदीकियों का ही कहना/बताना है कि खुद नरेश अग्रवाल और उनके साथ के लोगों को तेजपाल खिल्लन और उनके लोगों से जो बेइज्जती झेलनी पड़ी है, उसे वह भूले नहीं हैं और तेजपाल खिल्लन से वह एक एक बात का बदला लेने की तैयारी में हैं । इसी तैयारी के तहत विनोद खन्ना को डायरेक्टर अपॉइन्टी बनाया गया है, तथा एसके मधोक को जीएलटी एरिया लीडर का पद दिया गया है - तेजपाल खिल्लन को और गहरी चोट देने के लिए जेसी वर्मा को भी मल्टीपल में महत्त्वपूर्ण पद देने की तैयारी की जा रही है । तेजपाल खिल्लन की तरफ से हालाँकि दावा किया जा रहा है कि जेसी वर्मा को मिलने वाला नियुक्ति पत्र उन्होंने रुकवा दिया है, लेकिन जेपी सिंह के नजदीकियों का कहना है कि जेसी वर्मा को मल्टीपल में महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी अवश्य ही मिलेगी ।
जेसी वर्मा के नाम पर होने वाली खींचतान में पलड़ा हल्का होने का अनुमान लगता है कि तेजपाल खिल्लन को भी हो गया है, इसलिए उन्होंने लीडरशिप के सामने फिलहाल समर्पित होने का ही आभास देना शुरू किया हुआ है । इस चक्कर में हाल ही में हुई एक मीटिंग में उन्हें डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के पूर्व गवर्नर सुभाष बत्रा को भी डाँट कर चुप कराना पड़ा । सुभाष बत्रा का गुनाह बस इतना था कि वह कह रहे थे कि विनय गर्ग के रूप में अब जब मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन उनका अपना है, तो मल्टीपल के पद 'वह' देंगे । सुभाष बत्रा की बात का और लोग भी समर्थन करते और मामला आगे बढ़ता - उससे पहले ही तेजपाल खिल्लन ने सुभाष बत्रा को डाँटते हुए चुप किया और साफ ऐलान किया कि मल्टीपल के पद लीडरशिप ही तय करेगी । दरअसल अपना धंधा बचाने के लिए, तेजपाल खिल्लन अभी लीडरशिप को यह संदेश नहीं देना चाहते हैं कि वह लीडरशिप के 'काम' में अड़ंगा डालने की कोशिश कर रहे हैं । सुभाष बत्रा ने इस 'तथ्य' पर तो गौर किया नहीं, और अपनी नेतागिरी दिखाने में लग गए । फलस्वरूप तेजपाल खिल्लन को सबके सामने उन्हें फटकारना पड़ा । तेजपाल खिल्लन के नजदीकियों का कहना है कि जेसी वर्मा को मल्टीपल में कोई पद न मिले, तेजपाल खिल्लन इसके लिए प्रयास तो करेंगे - लेकिन एक सीमा तक ही करेंगे । दरअसल तेजपाल खिल्लन इस बात को बहुत ही अच्छी तरह से समझ रहे हैं कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के रूप में जेसी वर्मा ने जिन लोगों के लिए कठपुतली बन कर काम किया, वह लोग उसका उन्हें ईनाम तो देंगे/दिलवायेंगे ही न - इसलिए जेसी वर्मा को लेकर टकराव का माहौल बनाना उन्हें उचित नहीं लग रहा है ।
तेजपाल खिल्लन को लीडरशिप के सामने समर्पित रूप में देखते/पहचानते हुए उनके साथियों को तगड़ा झटका लगा है । डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के जिन पूर्व गवर्नर्स ने तेजपाल खिल्लन पर भरोसा किया हुआ था, वह यह जान कर घोर निराश हो रहे हैं कि तेजपाल खिल्लन ही विनय गर्ग को उनसे बच कर तथा उनसे दूर रहने की सलाह दे रहे हैं । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के सुभाष बत्रा, अजय गोयल, चमनलाल गुप्ता जैसे पूर्व गवर्नर्स मल्टीपल की मीटिंग्स में विभिन्न मुद्दों पर बबाल मचाने के लिए बदनाम हैं; पिछले लायन वर्ष में इन लोगों ने पूर्व गवनर्स से खाने के पैसे लेने के मुद्दे पर खासा हंगामा किया था - उन्हीं बातों को रेखांकित करते हुए तेजपाल खिल्लन ने विनय गर्ग को समझाया है कि यह लोग जो माँग करते रहे हैं, उन्हें मानना संभव नहीं होगा; और इसलिए अच्छा होगा कि ऐसे लोगों से बच कर दूर ही रहो । डिस्ट्रिक्ट की राजनीति के चलते विनय गर्ग के लिए तेजपाल खिल्लन की इस सलाह को मान पाना मुश्किल तो होगा, लेकिन न मानने पर चेयरमैन के रूप में विनय गर्ग दूसरी तरह की मुसीबतों को आमंत्रित करेंगे । विनय गर्ग क्या करेंगे, यह तो आगे पता चलेगा - अभी लेकिन लोगों की जुबान पर यही बात है कि तेजपाल खिल्लन ने अपने धंधे के लिए लीडरशिप से सौदेबाजी करने के लिए अभी तक वीएस कुकरेजा और चमनलाल गुप्ता को इस्तेमाल किया था - और अब उन्हें भुला कर वह विनय गर्ग को इस्तेमाल कर रहे हैं ।

Wednesday, May 24, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में हो रहे इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव से वीएस कुकरेजा ने जब अपने आप को बाहर मान/समझ लिया है, तब भी तेजपाल खिल्लन फर्जी तौर-तरीके से उनकी उम्मीदवारी के बारे में झूठ फैलाने के काम में आखिर क्यों लगे हुए हैं ?

नई दिल्ली । वीएस कुकरेजा को इंटरनेशनल डायरेक्टर एंडॉर्सी चुनवाने/बनवाने की जिम्मेदारी लेकर तेजपाल खिल्लन ऐसी मुसीबत फँस गए हैं कि उनसे न निगलते बन रहा है, और न उगलते - इस मामले में मल्टीपल के अधिकतर डिस्ट्रिक्ट्स जिस तरह जेपी सिंह के प्रति समर्थन व्यक्त कर रहे हैं, उससे जेपी सिंह के सामने तेजपाल खिल्लन कच्चे खिलाड़ी भी साबित हो रहे हैं । तेजपाल खिल्लन के नजदीकियों के अनुसार, तेजपाल खिल्लन भी महसूस कर रहे हैं कि वीएस कुकरेजा के चक्कर में उन्होंने नाहक ही मल्टीपल में अपने लिए फजीहत का मौका बनवा लिया है । इन दोनों के डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 321 ए वन के लोगों का हालाँकि कहना है कि इस मामले में तेजपाल खिल्लन दरअसल अपने ही जाल में फँस गए हैं; तेजपाल खिल्लन अपनी राजनीति चलाने/बढ़ाने/दिखाने के लिए एक 'मुर्गा' खोजते हैं - इसी तर्ज पर उन्होंने वीएस कुकरेजा में हवा भरी, लेकिन वीएस कुकरेजा कुछ अपनी बेवकूफी में और कुछ अपने सयानेपन में उनका 'मुर्गा' नहीं बन पाए; और इस कारण तेजपाल खिल्लन के लिए चिकेन की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है । इसका नतीजा है कि मल्टीपल के दस में से जिन तीन डिस्ट्रिक्ट्स में तेजपाल खिल्लन ने एक एक ग्रुप का - यानि आधे/आधे लोगों का अलग अलग कारणों से जो समर्थन जुटाया भी है, उस 'समर्थन' को मौके पर पहुँचाने को लेकर ही उनके पसीने छूट रहे हैं ।
हद की बात तो यह है कि तेजपाल खिल्लन और वीएस कुकरेजा के अपने डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 321 ए वन से ज्यादा लोग मल्टीपल कन्वेंशन में जाने को लेकर उत्साहित नहीं दिख रहे हैं । इस तरह के मामलों में लोगों को उत्साहित करने के लिए दरअसल 'रिवाज' यह बना हुआ है कि लोगों को बताया जाये कि उनका रजिस्ट्रेशन करवा लिया गया है, और उनके ठहरने के लिए कमरे बुक हो चुके हैं । तेजपाल खिल्लन और वीएस कुकरेजा की तरफ से चूँकि ऐसा कुछ नहीं कहा जा रहा है, इसलिए अलग अलग कारणों से उनके समर्थन में बने दिख रहे लोग भी निराश हैं । दिलचस्प नजारा यह है कि इनके अपने डिस्ट्रिक्ट से ज्यादा उछल-कूद तो डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू और डिस्ट्रिक्ट 321 एफ के एक एक खेमे के गवर्नर्स दिखा रहे हैं - लेकिन उनके बीच भी इस बात को लेकर निराशा है कि तेजपाल खिल्लन और वीएस कुकरेजा की तरफ से कोई 'ऑफर' ही नहीं मिल रहा है; कुछेक लोगों ने तो इनसे शिकायत भी की है कि 'रिवाज' के अनुसार यदि ऑफर नहीं दोगे, तो लोग 'वोट, सपोर्ट और इलेक्ट' करवाने क्यों आयेंगे ? वीएस कुकरेजा का कहना है कि वह जब उम्मीदवार ही नहीं रह गए हैं, तो फिर उम्मीदवार द्वारा निभाया जाने वाला 'रिवाज' वह भला क्यों पूरा करें ? उनकी बात भी ठीक है, और उसमें दम है ।
लेकिन इस ठीक बात के चक्कर में डिस्ट्रिक्ट 321 ए वन व डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू और डिस्ट्रिक्ट 321 एफ के उन गवर्नर्स ने अपनी स्थिति हास्यास्पद बना ली है, जो सोशल मीडिया में वीएस कुकरेजा के लिए 'वोट-सपोर्ट-इलेक्ट' के पोस्टर लहरा रहे हैं । यह बेचारे पोस्टर तो लहरा रहे हैं, किंतु इनके पास इस बात का जबाव नहीं है कि वीएस कुकरेजा का जब नामांकन ही रिजेक्ट हो गया है, जिसके चलते वह उम्मीदवार ही नहीं रह गए हैं - तो उन्हें वोट कैसे दे पाओगे, कैसे उन्हें इलेक्ट करोगे ? जाहिर है कि वीएस कुकरेजा के समर्थन के नाम पर एक निर्लज्ज किस्म की मूर्खता का प्रदर्शन हो रहा है । कुछेक गवर्नर्स का गहरी नाराजगी के साथ हालाँकि कहना यह भी है कि उनके नाम से वीएस कुकरेजा को 'वोट-सपोर्ट-इलेक्ट' वाले पोस्टर उन्होंने नहीं निकाले हैं, बल्कि उनके नाम से किसी ने फर्जीवाड़ा किया है ।
इस फर्जीवाड़े के लिए तेजपाल खिल्लन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है । लोगों का कहना है कि तेजपाल खिल्लन दावा कर रहे हैं कि वीएस कुकरेजा अभी भी उम्मीदवार हैं और उनकी उम्मीदवारी को रद्द नहीं किया जा सकता है । वह तर्क दे रहे हैं कि दीपक तलवार की चेयरमैनी वाली नोमीनेशन कमेटी का गठन ही गैरकानूनी है, और इस कमेटी को नामांकन रद्द करने का अधिकार ही नहीं है । तेजपाल खिल्लन ने कोशिश की थी कि इस कमेटी के को-चेयरमैन राजीव मित्तल कमेटी के गैरकानूनी होने का वास्ता देकर कमेटी और अपने पद से इस्तीफा दे दें । राजीव मित्तल ने लेकिन उनकी बात मानने से साफ इंकार कर दिया । राजीव मित्तल, तेजपाल खिल्लन के डिस्ट्रिक्ट के ही पूर्व गवर्नर हैं; इसलिए उनके इंकार ने तेजपाल खिल्लन की और फजीहत कर दी है । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन जेसी वर्मा भी तेजपाल खिल्लन के डिस्ट्रिक्ट के ही हैं, लेकिन उनकी तरफ से भी तेजपाल खिल्लन की फजीहत करने/कराने का कोई मौका नहीं छोड़ा जा रहा है । दरअसल डिस्ट्रिक्ट में तेजपाल खिल्लन ने राजीव मित्तल और जेसी वर्मा की ऐसीतैसी कर रखी है, सो इन्हें अब तेजपाल खिल्लन से बदला लेने का मौका मिल रहा है - और यह कोई मौका छोड़ भी नहीं रहे हैं । इनके रवैये ने मल्टीपल में नेतागिरी जमाने/दिखाने की तेजपाल खिल्लन की कोशिशों को पलीता लगा दिया है ।
तेजपाल खिल्लन के लिए मुसीबत और फजीहत की बात यह भी हुई है कि वीएस कुकरेजा की उम्मीदवारी को लेकर वह दूसरों को तो आश्वस्त करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन खुद वीएस कुकरेजा को उनके दावे और उनकी बातों पर भरोसा नहीं हो रहा है - और यही कारण है कि अपनी उम्मीदवारी को लेकर वह खुद ही उत्साहित नहीं रह गए हैं, और लोगों से बचने/छिपने में ही लगे हुए हैं । अभी हाल ही में संपन्न हुई डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में उन्हें बड़े सम्मान के साथ आमंत्रित किया गया था; डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के निमंत्रण पत्र पर उनका नाम और फोटो था तथा बैकड्रॉप बैनर में भी उनका नाम और फोटो था - किंतु वीएस कुकरेजा कॉन्फ्रेंस में पहुँचे ही नहीं । उन्हें अपने उम्मीदवार होने का सचमुच भरोसा होता, तो क्या वह ऐसा कर सकते थे ? उनकी अनुपस्थिति में जेपी सिंह ने दोहरा फायदा उठाया - और उस एक आयोजन से मल्टीपल के डिस्ट्रिक्ट्स में यह साफ संदेश गया कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी दौड़ से वीएस कुकरेजा ने अपने आपको बाहर मान लिया है, और इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए एक अकेले उम्मीदवार जेपी सिंह ही हैं । 'मुद्दई सुस्त, गवाह चुस्त' वाली तर्ज पर मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव का दिलचस्प नजारा है कि वीएस कुकरेजा तो अपनी तथाकथित उम्मीदवारी को लेकर चुप बने हुए हैं और लोगों से बचते/छिपते फिर रहे हैं, जबकि तेजपाल खिल्लन फर्जी तौर-तरीके से उनकी उम्मीदवारी के बारे में झूठ फैलाने के काम में लगे हुए हैं ।

Saturday, May 20, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल के लीगल अधिकारी स्कॉट ड्रमहेलर के स्पष्टीकरण से मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के विवाद में अपनी भूमिका पर पर्दा डालने की कोशिश ने चेयरमैन जेसी वर्मा की कारस्तानी को और उभारने का ही काम किया है

नई दिल्ली । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन जेसी वर्मा लायंस इंटरनेशनल के लीगल डिपार्टमेंट की सबसे बड़ी 'तोप' स्कॉट ड्रमहेलर को आगे करके इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को लेकर अपनी शीर्षासनी कलाबाजी को छिपाने की जो कोशिश कर रहे हैं, उससे अपनी स्थिति को उन्होंने और हास्यास्पद बना लिया है । उल्लेखनीय है कि जेसी वर्मा दिखाने/जताने की कोशिश तो यह करते हैं कि वह बहुत नियमानुसार काम करने वाले व्यक्ति हैं, लेकिन इस मामले में उन्होंने जिस तरह से रंग बदले हैं - उससे वह कठपुतली चेयरमैन ही साबित हुए हैं । उनके लिए फजीहत की बात यह हुई है कि इस मामले में अपने आप को पाक-साफ दिखाने की वह जितनी ज्यादा कोशिश कर रहे हैं, उतने ही ज्यादा वह इसमें फँसते जा रहे हैं । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को लेकर सवाल उठा रहे लायन सदस्यों और पदाधिकारियों का मुँह बंद करने के लिए जेसी वर्मा ने अब स्कॉट ड्रमहेलर का एक तथाकथित स्पष्टीकरण पेश किया है, इस स्पष्टीकरण ने लेकिन जेसी वर्मा की मुश्किलों को कम करने की बजाए बढ़ा और दिया है । दरअसल स्कॉट ड्रमहेलर के इस स्पष्टीकरण में ऐसी कोई नई बात सामने नहीं आई है, जो पहले से ही लोगों की - और या खुद जेसी वर्मा की जानकारी में नहीं थी । स्कॉट ड्रमहेलर ने अपने इस स्पष्टीकरण में साफ कहा है कि मौजूदा इंटरनेशनल कॉन्स्टीट्यूशन तथा बाई-लॉज और बोर्ड पॉलिसी के अनुसार इंटरनेशनल बोर्ड के किसी सदस्य के मल्टीपल से कोई दूसरा बोर्ड का सदस्य नहीं हो सकता है ।
इसमें नई बात भला क्या है ? वास्तव में तो इसी नियम का हवाला देते हुए मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के रूप में जेसी वर्मा ने इस वर्ष इंटरनेशनल डायरेक्टर पद का चुनाव कराने से इंकार किया हुआ था । उल्लेखनीय है कि मल्टीपल काउंसिल की 6 से 8 मार्च के बीच शिमला में हुई तीसरी कैबिनेट मीटिंग में पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील अग्रवाल ने मल्टीपल की रिऑर्गेनाइजेशन रिपोर्ट पेश करते हुए साफ शब्दों में बताया था कि नरेश अग्रवाल के जून 2019 तक इंटरनेशनल बोर्ड का सदस्य होने के कारण मल्टीपल में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए एंडोर्समेंट नहीं दिया जा सकता है । यह बात उक्त मीटिंग के जारी किए गए मिनिट्स में भी दर्ज है । अब नियम तो जो पहले था, वही अब भी है - स्कॉट ड्रमहेलर जो नियम बता रहे हैं, उसी नियम का हवाला देते हुए ही तो जेसी वर्मा पहले बता रहे थे कि इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव नहीं हो सकता है, और अब जब चुनाव करवाया जा रहा है तब भी जेसी वर्मा स्पष्टीकरण के नाम पर उसी नियम को रेखांकित करता स्कॉट ड्रमहेलर का मेल-संदेश लोगों के मुँह पर चिपकाने की कोशिश कर रहे हैं । जेसी वर्मा की इस हरकत से ऐसा लगता है कि जैसे मल्टीपल के लायन सदस्यों और पदाधिकारियों को उन्होंने 'शिकारपुर' का समझा हुआ है ।
पहले इंकार करने - और फिर अचानक से कलाबाजी खाते हुए इंटरनेशनल डायरेक्टर पद का चुनाव कराए जाने को लेकर जो भी सवाल उठ रहे हैं, उनका जबाव मल्टीपल चेयरमैन होने के नाते जेसी वर्मा को देना है; इंटरनेशनल कार्यालय से स्पष्टीकरण लेने की आड़ में वह अपनी कलाबाजी की हरकत पर पर्दा नहीं डाल सकते हैं । यह उन्हें ही बताना है कि पिछले दो महीने में जब इंटरनेशनल कॉन्स्टीट्यूशन तथा बाई-लॉज और बोर्ड पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं हुआ है, तब मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव करवाने को लेकर उनके रवैये में ठीक शीर्षासनी बदलाव कैसे और क्यों हो गया है ? आखिर किसने उनकी गर्दन पकड़ कर उनसे यह शीर्षासन करवा दिया है, और क्यों वह इसके लिए तैयार हो गए हैं ?
मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में अचानक से इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव करवाने के फैसले को लेकर बबाल दरअसल इसलिए भी ज्यादा मचा हुआ है, क्योंकि इस अचानक लिए फैसले के बाद एक जेपी सिंह को छोड़ कर बाकी सभी उम्मीदवार - चुनावी मुकाबले से बाहर खड़े कर दिए गए हैं । इसी से लोगों के बीच संदेह पैदा हुआ है कि जेसी वर्मा की देख-रेख में यह सारी कलाबाजी जेपी सिंह को बिना चुनावी मुकाबले के इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवाने/बनवाने की कवायद का हिस्सा है । अब इसे मजाक कहा जायेगा या सोची/समझी साजिश माना जायेगा कि मल्टीपल के पदाधिकारी साठ दिन पहले तक कह रहे थे कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव नहीं होगा; और अब वह उम्मीदवारों के नामांकन इस आधार पर खारिज कर रहे हैं कि उन्होंने साठ दिन पहले अपनी उम्मीदवारी के लिए इन्टेंशन नहीं दी । दावा किया जा रहा है कि एक अकेले जेपी सिंह ने साठ दिन पहले इन्टेंशन दी थी, और इस आधार पर उनका नामांकन सही है; सवाल यह है कि साठ दिन पहले जब मल्टीपल के पदाधिकारी इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव न होने की बात कह रहे थे, तब साठ दिन पहले जेपी सिंह की इन्टेंशन वह स्वीकार क्यों कर रहे थे ? इन सवालों का जबाव मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के रूप में जेसी वर्मा को देना है; स्कॉट ड्रमहेलर को नहीं देना है - और उन्होंने दिया भी नहीं है ।
स्कॉट ड्रमहेलर ने लगता है कि समझ लिया है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को लेकर जो नाटक हो रहा है, उसके असली सूत्रधार अगले लायन वर्ष में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट होने जा रहे नरेश अग्रवाल हैं; इसलिए जेसी वर्मा को संबोधित मेल के अंत में उन्होंने नरेश अग्रवाल को भी मामले में घसीट लिया है । स्कॉट ड्रमहेलर का मेल-संदेश लोगों को भेज कर जेसी वर्मा ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के विवाद में अपनी भूमिका पर पर्दा डालने की जो कोशिश की है, वह उल्टी ही पड़ी है - और स्टॉक ड्रमहेलर के तथाकथित स्पष्टीकरण ने जेसी वर्मा की कारस्तानी को और उभारने का ही काम किया है ।
जेसी वर्मा को संबोधित स्कॉट ड्रमहेलर का मेल-संदेश :

Wednesday, May 10, 2017

लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर शिव कुमार चौधरी की डिस्ट्रिक्ट अकाउंट में चोरी-चकारी करने की हरकतों के खुलासे ने डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन ही नहीं, बल्कि लायनिज्म की भी साख व प्रतिष्ठा को दाँव पर लगाया

गाजियाबाद । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर शिव कुमार चौधरी ने दूसरों के बैंक अकाउंट की डिटेल्स देने/बताने का जो खेल शुरू किया, उसमें अब वह खुद ही बुरी तरह फँस गए हैं । उन्होंने दूसरों के बैंक अकाउंट के कुछेक डिटेल्स दिए, तो दूसरों ने डिस्ट्रिक्ट अकाउंट के डिटेल्स खंगाल डाले । डिस्ट्रिक्ट अकाउंट के जो डिटेल्स अभी तक सामने आए हैं, उससे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में शिव कुमार चौधरी द्वारा पैसों की हेराफेरी करने के बड़े संगीन भेद खुले हैं - और पता चला है कि उन्होंने मल्टीपल ड्यूज और लायंस क्लब्स इंटरनेशनल फाउंडेशन के साथ-साथ एमजेएफ के कुल मिलाकर करीब 19 लाख रुपए डकार लिए हैं । उन्हें डिस्ट्रिक्ट की तरफ से इन 19 लाख रुपयों का भुगतान अभी करना है, जबकि डिस्ट्रिक्ट अकाउंट में अभी कुल एक लाख तीस हजार रुपए ही हैं । गंभीर बात यह है कि पिछले कई दिनों से मल्टीपल और फाउंडेशन की तरफ से ड्यूज चुकाने के लिए उन्हें लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं, जिनका न वह जबाव दे रहे हैं और न ड्यूज जमा कर रहे हैं । मल्टीपल और फाउंडेशन को ड्यूज देने की बजाए डिस्ट्रिक्ट अकाउंट से उन्होंने किसी विशाल चौधरी को फरवरी, मार्च और अप्रैल में कुल मिला कर करीब साढ़े छह लाख रुपए दिए हैं । डिस्ट्रिक्ट अकाउंट से ही एक वस्त्र भंडार को करीब सवा दो लाख रुपए दिए गए हैं । जबसे यह पोल खुली है, तभी से लोग मजाक उड़ा रहे हैं और पूछ रहे हैं कि शिव कुमार चौधरी ने डिस्ट्रिक्ट अकाउंट में जमा हुए मल्टीपल और फाउंडेशन के ड्यूज के पैसों से अपने और अपने परिवार के सदस्यों के लिए कपड़े खरीद लिए हैं क्या ?
डिस्ट्रिक्ट अकाउंट में 9 दिन पहले की, एक मई की करीब साढ़े तीन लाख रुपए की एंट्री भी रहस्यमयी है । इस एंट्री में लेह में हो रही डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को देहरादून में शिफ्ट कर देने का राज छिपा है । उल्लेखनीय है कि पहले से चर्चा रही है कि लेह में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस करने का शिगुफा छोड़ने के पीछे शिव कुमार चौधरी का असल उद्देश्य उम्मीदवारों को ब्लैकमेल करके उनसे पैसे ऐंठना था । देहरादून में डिस्ट्रिक्ट अकाउंट में करीब साढ़े तीन लाख रुपए किसने जमा करवाए हैं और क्यों जमा करवाए हैं - शिव कुमार चौधरी इस बात को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे लोगों के बीच अनुमान लगाया जा रहा है कि उक्त रकम देहरादून से सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार अश्वनी काम्बोज की तरफ से जमा करवाई हो सकती है । लोगों के बीच सवाल चर्चा में है कि तो क्या शिव कुमार चौधरी ने खुद को अश्वनी काम्बोज को करीब साढ़े तीन लाख रुपए में बेच दिया है ? डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की मर्यादा को छिन्न-भिन्न करते हुए शिव कुमार चौधरी जिस तरह से अश्वनी काम्बोज के लिए समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं, उससे भी लोगों को विश्वास हो रहा है कि अश्वनी काम्बोज ने पैसे देकर शिव कुमार चौधरी को ड्यूटी पर लगा दिया है, शिव कुमार चौधरी भी और कुछ ईनाम/विनाम की उम्मीद में अश्वनी काम्बोज की ड्यूटी को बहुत मेहनत से कर रहे हैं । लायन राजनीति में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर और पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के 'इस' या 'उस' उम्मीदवार के समर्थन में होने की बात बहुत आम है, यह कोई आरोप वाली बात भी नहीं रह गई है - लेकिन शिव कुमार चौधरी इस काम को जिस निर्लज्जता के साथ अंजाम दे रहे हैं, वह डिस्ट्रिक्ट ही नहीं - लायनिज्म के इतिहास में जरूर नयी बात है । लोगों का मानना और कहना है कि उनकी इस नयी बात में एक मई को डिस्ट्रिक्ट एकाउंट में देहरादून में जमा हुए करीब साढ़े तीन लाख रुपयों का बड़ा योगदान है ।
डिस्ट्रिक्ट अकाउंट में हुए फर्जीवाड़े के तथ्य सामने आने के बाद शिव कुमार चौधरी ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों से वायदा किया है कि वह उचित समय पर अपने गवर्नर-काल का हिसाब देंगे । लोगों का कहना है कि शिव कुमार चौधरी के वायदों की असलियत जाननी हो तो लोगों को लायंस क्लब मसूरी के अध्यक्ष सतीश अग्रवाल से मिल लेना चाहिए, जिनके पैसे वह बार-बार तकादा करने के बावजूद नहीं लौटा रहे हैं । जो सतीश अग्रवाल से न मिल सकें, वह मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन जेसी वर्मा और या इंटरनेशनल डायरेक्टर तथा लायंस को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन जीएस होरा से मिल लें - जिनके बार बार लिखने के बावजूद शिव कुमार चौधरी मल्टीपल और फाउंडेशन के ड्यूज नहीं दे रहे हैं । हिसाब देने के वायदे की बात जाने दो, क्योंकि हिसाब तो कोई माँग ही नहीं रहा - हिसाब की बात तो शिव कुमार चौधरी ने मूल मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए कर दी है । मूल मुद्दे की बात तो यह है कि मल्टीपल ड्यूज, फाउंडेशन और एमजेएफ के जो करीब 19 लाख रुपए डिस्ट्रिक्ट में जमा हुए, वह शिव कुमार चौधरी ने आखिर कहाँ ठिकाने लगा दिए हैं - क्योंकि उक्त रकम न तो वहाँ पहुँची है, जहाँ उसे पहुँचना चाहिए था; और न वह डिस्ट्रिक्ट एकाउंट में है । मुद्दे का सवाल यह है कि डिस्ट्रिक्ट अकाउंट से मल्टीपल को और फाउंडेशन को पैसा देने की बजाए किसी विशाल चौधरी को तीन बार में करीब साढ़े छह लाख रुपए तथा किसी वस्त्र भंडार को करीब सवा दो लाख रुपए का भुगतान क्यों और कैसे किया गया ?
शिव कुमार चौधरी ने अपने आपको जब गंभीर आरोपों के घेरे में फँसा पाया, तो आरोपों का जबाव देने की बजाए वह दूसरों पर आरोप लगाने लगे । दूसरों पर आरोप लगा कर अपने आपको आरोपों से बचाने की उनकी कोशिश ने उन्हें और भी हास्यास्पद बना दिया है । उनकी हरकतों को लायनिज्म के लिए बहुत ही शर्मनाक घटना-चक्र के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । देश में और खासतौर से मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में नरेश अग्रवाल के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने को लेकर जहाँ उत्साह का माहौल है, वहाँ एक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में शिव कुमार चौधरी की डिस्ट्रिक्ट अकाउंट में चोरी-चकारी करने की हरकतों के खुलासे ने डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन ही नहीं, बल्कि लायनिज्म की भी साख व प्रतिष्ठा को दाँव पर लगा दिया है ।

Tuesday, February 21, 2017

लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर शिव कुमार चौधरी मल्टीपल ड्यूज के लिए जेसी वर्मा को तो झाँसा दिए ही हुए हैं, डिस्ट्रिक्ट के एमजेएफ लोगों को भी फूल देकर 'फूल' बनाने की तैयारी कर रहे हैं

देहरादून । एमजेएफ बनने के लिए आवश्यक रकम देने वाले कई लायन सदस्य एमजेएफ प्लेट और पिन न मिलने के कारण इस बात से डरे हुए हैं कि कहीं उनके द्धारा दी गई रकम डिस्ट्रिक्ट गवर्नर शिव कुमार चौधरी ने अपनी जेब में तो नहीं कर ली है ? पैसे ऐंठने और हड़पने के मामले में शिव कुमार चौधरी ने चूँकि काफी नाम कमाया हुआ है, इसलिए एमजेएफ बनने के लिए रकम देने वाले लोग और ज्यादा डरे हुए हैं । लायंस इंटरनेशनल फाउंडेशन की डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन के एमजेएफ की जो लिस्ट है, उसमें भी चूँकि इस वर्ष किसी का नाम नहीं जुड़ा है - इसलिए भी लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि एमजेएफ के लिए दिया गया पैसा आखिर गया कहाँ ? शिव कुमार चौधरी लोगों को लगातार आश्वासन तो देते रहे हैं कि एमजेएफ की आधिकारिक लिस्ट में नाम भी आ जायेगा, और प्लेट व पिन भी मिल जाएगी - लेकिन उनका आश्वासन पूरा होने में ही नहीं आ रहा है । ऐसे में लोगों को अपना हाल लायंस क्लब मसूरी के सतीश अग्रवाल जैसा होता हुआ दिख रहा है - जिनके पैसे लौटाने का शिव कुमार चौधरी आश्वासन तो कई बार दे चुके हैं, लेकिन सतीश अग्रवाल को अपने पैसे मिले नहीं हैं । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन जेसी वर्मा तक के साथ शिव कुमार चौधरी यही हरकत रहे हैं । जेसी वर्मा मल्टीपल ड्यूज के लिए कई बार तकादा कर चुके हैं, लेकिन शिव कुमार चौधरी के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगी है, और उन्होंने मल्टीपल ड्यूज के खाते में एक पैसा तक जमा नहीं कराया है ।
मल्टीपल ड्यूज जमा करने की अंतिम तारीख 15 जनवरी थी । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन जेसी वर्मा ने कई रिमाइंडर भेजे । उन्होंने यहाँ तक कहा कि मल्टीपल के नरेश अग्रवाल इंटरनेशनल प्रेसीडेंट होने जा रहे हैं, इसलिए मल्टीपल में ऐसी कोई हरकत नहीं होनी चाहिए जिससे मल्टीपल का और नरेश अग्रवाल का नाम खराब हो - इस नाते ड्यूज समय पर जमा होना जरूरी है, लेकिन शिव कुमार चौधरी ने न उनके रिमाइंडर की परवाह की और न मल्टीपल व नरेश अग्रवाल का नाम खराब होने की चिंता की । उल्लेखनीय तथ्य यह है कि मल्टीपल के बाकी सभी डिस्ट्रिक्ट्स ने अपने अपने हिस्से के मल्टीपल ड्यूज की आधे से ज्यादा और कुछेक डिस्ट्रिक्ट्स ने तो पूरी रकम जमा करा दी है, लेकिन डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन ने मल्टीपल ड्यूज के खाते में इकन्नी भी जमा नहीं करवाई है । प्राकृतिक आपदा का शिकार हुए लोगों की मदद के लिए लायंस इंटरनेशनल से मिली इमरजेंसी ग्रांट को लेकर शिव कुमार चौधरी ने कैसी घपलेबाजी की है, यह बात अब जगजाहिर है ।
इन्हीं बातों/तथ्यों के आलोक में एमजेएफ बनने के लिए पैसा देने वालों को डर हुआ है कि गरीबों और पीड़ितों की मदद के लिए दिया गया उनका पैसा कहीं शिव कुमार चौधरी ही तो नहीं हड़प जायेंगे ? एमजेएफ बनने के लिए पैसा देने वाले लायन सदस्यों का कहना है कि शिव कुमार चौधरी ने उनसे 900 डॉलर के बराबर रुपये यह बताते हुए लिए हैं कि बाकी के सौ डॉलर फाउंडेशन के लिए इकट्ठा हुए पैसों से दिए जायेंगे । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन में पिछले कुछेक वर्षों से एमजेएफ बनने/बनाने को लेकर यही व्यवस्था चली आ रही है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में शिव कुमार चौधरी ने इसी व्यवस्था को अपनाने की कोई सार्वजनिक घोषणा तो नहीं की है, लेकिन व्यक्तिगत रूप से एमजेएफ बनने वालों को उन्होंने यही व्यवस्था बताई है, और इसी के अनुसार पैसे लिए हैं । लोगों से लिए गए पैसे लेकिन उन्होंने अभी तक लायंस इंटरनेशनल फाउंडेशन को नहीं भेजे हैं, इसी से लोगों को डर लगा है कि उनके पैसे आखिर गए कहाँ ? एमजेएफ के पैसे लेने/देने की प्रक्रिया से परिचित जानकारों का कहना है कि लायंस इंटरनेशनल फाउंडेशन को पैसे मिलते ही आठ/दस दिन में पैसे देने वाले का नाम एमजेएफ लिस्ट में दर्ज हो जाता है, और तुरंत ही एमजेएफ की प्लेट व पिन रिलीज हो जाती है । इस आधार पर एमजेएफ बनने के लिए पैसे दे चुके लोगों का नाम लिस्ट में आ जाने के साथ साथ उनके नाम की प्लेट व पिन आ जाना चाहिए थी, लेकिन लोगों को सिर्फ शिव कुमार चौधरी का आश्वासन मिल रहा है ।
शिव कुमार चौधरी का आश्वासन इसलिए भी डरा रहा है, क्योंकि वह लायंस इंटरनेशनल फाउंडेशन के लिए प्रत्येक सदस्य से कम से कम दो डॉलर के अपेक्षित दान को जबरन बसूलने की कोशिश कर रहे हैं । उल्लेखनीय है कि लायंस इंटरनेशनल फाउंडेशन लायन सदस्यों से अनुरोध करता है कि वह कम से कम दो डॉलर तो फाउंडेशन के लिए दान करें ही । जाहिर है कि यह अनुरोध है, जिसे मानने और पूरा करने के लिए सदस्यों पर बाध्यता नहीं है । लेकिन शिव कुमार चौधरी ने इसे जरूरी बना दिया है । उन्होंने कहा है कि जो क्लब्स दो डॉलर प्रति सदस्य के हिसाब से लायंस इंटरनेशनल फाउंडेशन के लिए पैसे नहीं देंगे, वह उन क्लब्स को नो-ड्यूज सर्टीफिकेट नहीं देंगे । उनकी इस कार्रवाई को लायंस इंटरनेशनल फाउंडेशन के पैसों में हेराफेरी करने की तिकड़म के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । आरोप है कि इसीलिए वह एमजेएफ के लिए मिली रकम को दबा कर बैठे हैं । कहा जा रहा है कि प्रत्येक सदस्य से दो दो डॉलर लेकर इकट्ठा हुई रकम से वह एमजेएफ के लिए पैसा देने वालों को एमजेएफ बनवा देंगे, और उनसे मिली हुई रकम को अपनी जेब में कर लेंगे । यह 'खेल' और इस खेल का 'हिसाब-किताब' चूँकि बाद में ही हो पायेगा, इसलिए एमजेएफ बनने के लिए मिली रकम को उन्होंने अभी लायंस इंटरनेशनल फाउंडेशन को नहीं भेजा है ।
एमजेएफ बनने के लिए पैसा देने वाले लोग ज्यादा परेशान न हों और शोर न करें - इसके लिए शिव कुमार चौधरी ने उनका सम्मान करने का एक कार्यक्रम करने की बात शुरू की है - जिसमें गेंदे के फूलों की माला पहना कर वह एमजेएफ बनने के लिए पैसा देने वालों को 'फूल' बनाने का काम करेंगे ।  

Saturday, April 25, 2015

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में लायनिज्म से जुड़े अपने बिजनेस को बचाने तथा खर्चों के मामले में राजीव मित्तल द्वारा दिखाई गई 'होशियारी' का बदला लेने के लिए तेजपाल सिंह खिल्लन ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए राजीव मित्तल की कोशिशों को तगड़ा झटका दिया

    
नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट 321 ए वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर राजीव मित्तल को अपने ही 'लायन-फादर' तेजपाल सिंह खिल्लन के साथ होशियारी दिखाना भारी पड़ गया है; और इसके चलते मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनने का उनका सपना टूटता सा दिखने लगा है । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए प्रस्तुत की जाने वाली राजीव मित्तल की उम्मीदवारी में उनके अपने फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेसी वर्मा ने प्रस्तावक बनने से इंकार करके राजीव मित्तल को तगड़ा झटका दिया है । यह तगड़ा झटका जेसी वर्मा के उस उद्घाटन से और तगड़ा हो गया है, जिसमें उन्होंने बताया है कि प्रस्तावक के रूप में उनके हस्ताक्षर तेजपाल सिंह खिल्लन ने एक ब्लैंक फार्म पर उनसे करवा लिए हैं । तेजपाल सिंह खिल्लन ने यह 'काम' चूँकि राजीव मित्तल को अँधेरे में रख कर किया है, इसलिए जाहिर यही है कि तेजपाल सिंह खिल्लन ने जेसी वर्मा को किसी और के लिए प्रस्तावक बनाने का विचार किया हुआ हो; और या प्रस्तावक के रूप में जेसी वर्मा की भूमिका को ही खत्म कर देने का हथकंडा अपनाया हो । दोनों में से चाहे कोई सी भी बात सच हो, राजीव मित्तल के लिए तो प्रस्तावक जुटाने की समस्या पैदा हो गई है । राजीव मित्तल के लिए अपने ही डिस्ट्रिक्ट में प्रस्तावक मिलने का रास्ता बंद हुआ, तो उन्होंने दूसरे डिस्ट्रिक्ट के अपने समर्थकों से प्रस्तावक बनने का जुगाड़ बैठाना शुरू किया । किंतु अभी तक कोई उनका प्रस्तावक बनने को राजी नहीं हुआ है । उनके जो समर्थक हैं, उनका उनसे साफ कहना है कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के चुनाव में वह उनका समर्थन तो करेंगे, लेकिन उनकी उम्मीदवारी के प्रस्तावक नहीं बनेंगे । 
प्रस्तावक न मिलने के कारण स्वाभाविक रूप से मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए राजीव मित्तल का दावा कमजोर पड़ता दिख रहा है । राजीव मित्तल ने हालाँकि अपने समर्थकों व शुभचिंतकों को आश्वस्त किया है कि तेजपाल सिंह खिल्लन अभी भले ही उनसे नाराज हों; लेकिन उन्हें तेजपाल सिंह खिल्लन की 'कमजोरियों' का पता है और उन्हें मालूम है कि तेजपाल सिंह खिल्लन को कैसे मनाया जा सकता है - इसलिए वह जल्दी ही उन्हें मना लेंगे, और जेसी वर्मा द्वारा हस्ताक्षरित फार्म पर उनका नाम चढ़ जायेगा । अपने समर्थकों व शुभचिंतकों को दिया जा रहा राजीव मित्तल का यह आश्वासन कब पूरा होगा; पूरा होगा भी या नहीं - यह तो आगे पता चलेगा; लेकिन अभी सभी को यह सवाल जरूर हैरान कर रहा है कि तेजपाल सिंह खिल्लन आखिरकार राजीव मित्तल से नाराज क्यों हो गए हैं ? 
इस बारे में डिस्ट्रिक्ट व मल्टीपल के लोगों के बीच कई तरह की बातें चर्चा में हैं । कुछेक लोगों का कहना है कि राजीव मित्तल ने अवार्ड देने में तथा खर्चे करने में मनमानियाँ की हैं और कई मौकों पर उन्होंने तेजपाल सिंह खिल्लन की भी नहीं सुनी/मानी है, इसलिए तेजपाल सिंह खिल्लन उनसे बुरी तरह नाराज हो गए हैं । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार बीएम शर्मा से अनाप-शनाप खर्चे करवाने के मामले में राजीव मित्तल पहले से ही कुछेक लोगों के निशाने पर हैं । चर्चा है कि तेजपाल सिंह खिल्लन कुछेक खर्चे राजीव मित्तल से करवाना चाहते थे, राजीव मित्तल ने होशियारी दिखाते हुए वह खर्चे बीएम शर्मा के सिर मढ़ दिए । राजीव मित्तल की इसी होशियारी को देखकर तेजपाल सिंह खिल्लन उनसे नाराज हो गए हैं । तेजपाल सिंह खिल्लन इस बात पर भी ख़फ़ा हैं कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की उम्मीदवारी से जुड़े खर्चों को लेकर राजीव मित्तल बातें तो बड़ी ऊँची-ऊँची करते रहे हैं, लेकिन जब सचमुच खर्चा करने को कहे तो वह दाएँ-बाएँ देखने लगते हैं । इसीलिए तेजपाल सिंह खिल्लन ने उनकी उम्मीदवारी से हाथ खींच लिए हैं । 
मल्टीपल के नेताओं को यह भी लगता है कि तेजपाल सिंह खिल्लन मल्टीपल की राजनीति में नरेश अग्रवाल की गुडबुक में रहना चाहते हैं, और इसके लिए वही कुछ करना चाहते हैं जो नरेश अग्रवाल को पसंद हो । पिछले वर्षों में अपनी अलग राजनीति करने के चक्कर में नरेश अग्रवाल से हुए झंझट के कारण तेजपाल सिंह खिल्लन को लायनिज्म से होने वाले अपने बिजनेस में काफी नुकसान उठाना पड़ा था । उन्हें डर है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट के रूप में नरेश अग्रवाल कहीं लायनिज्म से जुड़े उनके बिजनेस को पूरी तरह ही न ले डूबें; इसलिए तेजपाल सिंह खिल्लन ने नरेश अग्रवाल के सामने पूरी तरह से समर्पण करने की तैयारी की हुई है । मल्टीपल काउंसिल की चुनावी राजनीति में नरेश अग्रवाल की 'इच्छा' को पूरा करना तेजपाल सिंह खिल्लन के समर्पणकारी रवैये का एक उदाहरण भर है । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के चुनाव में नरेश अग्रवाल ने चूँकि अभी तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है, इसलिए तेजपाल सिंह खिल्लन ने भी राजीव मित्तल की उम्मीदवारी से हाथ खींच लिया हुआ है ।
तेजपाल सिंह खिल्लन ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के चुनाव के संदर्भ में राजीव मित्तल की संभावनाओं को जो झटका दिया है, उसने चेयरमैन पद की चुनावी राजनीति को दिलचस्प तो बना ही दिया है ।