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Sunday, October 18, 2020

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की सेंट्रल काउंसिल के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की तैयारी शुरू कर चुके पंकज पेरिवाल अपनी बिल्डिंग के किरायेदार एक उद्यमी की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने के आरोप में फँसे

लुधियाना । नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल के पूर्व चेयरमैन पंकज पेरिवाल के बारे में चर्चा तो यह सुनी/सुनाई जा रही थी कि वह इंस्टीट्यूट की सेंट्रल काउंसिल में जाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन अखबारों में पढ़ने को मिल रहा है कि लुधियाना पुलिस उन्हें जेल ले जाने के लिए खोज रही है और वह बचते/छिपते फिर रहे हैं । अखबारी खबरों के अनुसार, पंकज पेरिवाल को एक उद्यमी सुरिंदर सिंह को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने का आरोपी बताया जा रहा है । मृतक की बेटी द्वारा लिखवाई रिपोर्ट में पंकज पेरिवाल पर आरोप है कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर सुरिंदर सिंह का पैसा और जमीन हड़प लिया, जिससे परेशान और निराश होकर उन्होंने अपनी जान दे दी । यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि दो वर्ष पहले भी लगभग इन्हीं दिनों पंकज पेरिवाल के ऑफिस पर पड़े इनकम टैक्स विभाग के छापे की खबरें प्रकाशित हुई थीं । उस समय पंकज पेरिवाल नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल के चेयरमैन थे । अपने ऑफिस पर पड़े छापे की खबर के अखबारों में छपने से पंकज पेरिवाल इस कदर फजीहत का शिकार बने थे, कि रीजनल काउंसिल के चेयरमैन पद की जिम्मेदारियों का वह ठीक से निर्वाह नहीं कर पाए थे । 
अपने ऑफिस पर पड़े छापे की खबर के अखबारों में छपने के कारण हुई फजीहत के चलते पंकज पेरिवाल उस वर्ष हुए सेंट्रल काउंसिल का चुनाव भी नहीं लड़ पाए थे । वर्ष 2018 में पंकज पेरिवाल ने रीजनल काउंसिल का चेयरमैन बनने की तिकड़म दरअसल की ही इसलिए थी, क्योंकि उन्हें सेंट्रल काउंसिल का चुनाव लड़ना था - और इसीलिए अपनी तिकड़म में कामयाब होने पर वह खासे उत्साहित थे और सेंट्रल काउंसिल पद के लिए उन्होंने जोरशोर से तैयारी शुरू कर दी थी । लेकिन ऑफिस पर पड़े इनकम टैक्स विभाग के छापे की खबरों ने उनकी तैयारी पर पानी फेर दिया था । उन्होंने छापे की खबरों को एक अलग रूप देने तथा अपने आप को पाकसाफ दिखाने/बताने का प्रयास तो खूब किया, लेकिन उन्होंने खुद महसूस किया कि उनके प्रयास ज्यादा सफल नहीं हो सके हैं - और इसलिए उन्होंने उस वर्ष सेंट्रल काउंसिल के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करने का विचार छोड़ दिया । दो वर्ष पहले हुए सेंट्रल काउंसिल के चुनाव में उम्मीदवार न बन सकने की कमी को पंकज पेरिवाल ने इंस्टीट्यूट की सेंट्रल काउंसिल के लिए अगले वर्ष होने वाले चुनाव में दूर करने की बात करना शुरू कर दिया था और उन्हें अगले चुनाव के संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जाने लगा था ।
लेकिन, पंकज पेरिवाल ने अपनी उम्मीदवारी की चर्चा अभी शुरू ही की/करवाई थी कि वह एक बार फिर अखबारी सुर्खियों में छा गए । इस बार का मामला बल्कि ज्यादा गंभीर बताया/समझा जा रहा है ।पंकज पेरिवाल को एक उद्यमी की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है । मामला हालाँकि अभी आरोप की शक्ल में है, और जाँच के बाद ही सारी सच्चाई सामने आ सकेगी - लेकिन आरोप चूँकि संगीन प्रकृति के हैं, इसलिए पंकज पेरिवाल के लिए मुसीबत की बात तो है ही । पंकज पेरिवाल पर आरोप है कि पहले तो उन्होंने सुरिंदर सिंह की कंपनी में तीन-तिकड़म से चार्टर्ड एकाउंटेंट का काम लिया । सुरिंदर सिंह की कंपनी का ऑफिस चूँकि पंकज पेरिवाल की बिल्डिंग में किराए पर है, इसलिए पंकज पेरिवाल के लिए उनका विश्वास जीतना आसान हुआ । विश्वास जीत कर पंकज पेरिवाल ने कंपनी के कामकाज तथा हिसाब-किताब में गड़बड़ियाँ करना शुरू किया, जिसके चलते कंपनी का घाटा बढ़ता गया । घाटे की भरपाई के लिए पंकज पेरिवाल ने सुरिंदर सिंह पर दबाव बना कर उनकी संपत्ति के कागज ले लिए । इसी बात से परेशान व निराश होकर सुरिंदर सिंह ने आत्महत्या कर ली । सुरिंदर सिंह की बेटी द्वारा लिखवाई गई पुलिस रिपोर्ट में पंकज पेरिवाल को ही सुरिंदर सिंह की आत्महत्या के लिए दोषी ठहराया गया है । पंकज पेरिवाल के नजदीकियों को भी लग रहा है कि इस मामले के चलते लगता है कि पंकज पेरिवाल की सेंट्रल काउंसिल की उम्मीदवारी अबकी बार भी खतरे में पड़ गई है । 

Tuesday, February 5, 2019

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल के चेयरमैन पंकज पेरिवाल के यहाँ पड़े छापे की खबर का हवाला देते हुए वित्त मंत्रालय को भेजी चिट्ठी ने रीजनल कॉन्फ्रेंस में खिंची तस्वीरों के जरिये केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ नजदीकी दिखाने का पंकज पेरिवाल का 'टशन' सचमुच हवा कर दिया है क्या ?

नई दिल्ली/लुधियाना । नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल की रीजनल कॉन्फ्रेंस में जुगाड़बाजी से केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल का सम्मान करने का कार्यक्रम करके पंकज पेरिवाल ने करीब सात महीने पहले लुधियाना स्थित अपने ऑफिस में पड़े इनकम टैक्स विभाग के छापे के मामले को लोगों के बीच एक बार फिर चर्चा में ला दिया है । दिलचस्प नजारा यह देखने/सुनने में आया है कि पंकज पेरिवाल अपने एक कार्यक्रम में पीयूष गोयल को बुलवा कर जब 'टशन' दिखा रहे थे, लगभग तभी पीयूष गोयल को संबोधित एक चिट्ठी भेजी गई थी जिसमें पंकज पेरिवाल के यहाँ पड़े छापे का हवाला देकर आशंका व्यक्त की गई कि केंद्रीय मंत्री के साथ अपनी नजदीकी दिखा कर पंकज पेरिवाल अपने मामले को प्रभावित करने की 'व्यवस्था' तो नहीं कर रहे हैं ? पीयूष गोयल को संबोधित तथा वित्त मंत्रालय को भेजी चिट्ठी में जुलाई महीने में लुधियाना में पंकज पेरिवाल के ऑफिस पर पड़े छापे का पूरा विवरण दिया गया है तथा उक्त छापे को लेकर स्थानीय मीडिया में प्रकाशित हुई खबरों की क्लीपिंग्स भी नत्थी की गई हैं । उक्त चिट्ठी की फोटो प्रतिलिपि 'रचनात्मक संकल्प' को भी प्राप्त हुई है । चिट्ठी में अनुरोध किया गया है कि वित्त मंत्री और मंत्रालय के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रीजनल कॉन्फ्रेंस में खिंची/खिंचवाई गई तस्वीरों के जरिये पंकज पेरिवाल वित्त मंत्री के साथ अपनी नजदीकी का संकेत और 'सुबूत' दिखा कर अपने मामले की जाँच को कहीं प्रभावित न कर/करवा लें ।
वित्त मंत्री को संबोधित और वित्त मंत्रालय को भेजी गई चिट्ठी में व्यक्त की गई आशंका इसलिए और गंभीर दिख रही है क्योंकि पंकज पेरिवाल ने कार्यक्रम में वित्त मंत्री पीयूष गोयल के साथ खिंची अपनी तस्वीरों को बड़े पैमाने पर प्रसारित किया है और इसके लिए सोशल मीडिया से लेकर रीजनल काउंसिल के संसाधनों का भरपूर उपयोग किया है । मजे की बात यह है कि रीजनल कॉन्फ्रेंस में पीयूष गोयल के सम्मान का कार्यक्रम पहले से प्रस्तावित नहीं था, और रीजनल काउंसिल के पदाधिकारियों व सदस्यों तक को उसकी भनक भी नहीं थी । खुद पंकज पेरिवाल ने काउंसिल के सदस्यों को बताया कि रीजनल कॉन्फ्रेंस जहाँ हो रही थी, उसके नजदीक ही हो रहे एक अन्य कार्यक्रम में पीयूष गोयल मौजूद थे; इसे जान/देख कर उनसे अनुरोध किया गया कि कुछ देर के लिए वह रीजनल कॉन्फ्रेंस में भी आ जाएँ - जहाँ उनका सम्मान किया जा सके, और पीयूष गोयल इसके लिए राजी हो गए । यानि पीयूष गोयल का रीजनल कॉन्फ्रेंस में आना पंकज पेरिवाल और सेंट्रल काउंसिल सदस्य राजेश शर्मा जैसे उनके साथी की जुगाड़बाजी के चलते हुआ । लोगों को शक है कि यह जुगाड़बाजी करते हुए पीयूष गोयल से इस तथ्य को भी अवश्य ही छिपाया गया होगा कि रीजनल कॉन्फ्रेंस करने वाली संस्था - नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल के प्रमुख पंकज पेरिवाल, जिनके साथ उनकी तस्वीरें भी खिंचेंगी, इनकम टैक्स विभाग की जाँच-पड़ताल के 'राडार' पर हैं और जाँच-पड़ताल की प्रक्रिया में विभाग की एक टीम उनके यहाँ छापा मार चुकी है । 
जुगाड़बाजी से और पीयूष गोयल को अँधेरे में रख कर पंकज पेरिवाल ने पीयूष गोयल के साथ तस्वीरें तो खिंचवा लीं और उन्हें बड़े पैमाने पर प्रसारित भी करवा लिया, लेकिन इसके साथ ही करीब सात महीने पहले अपने यहाँ पड़े इनकम टैक्स विभाग के छापे की खबर को भी फिर से जीवित कर दिया - अन्यथा लोग उस बात को भूलभाल गए थे । पंकज पेरिवाल के नजदीकियों का कहना है कि छापे की खबर के फिर से जीवित हो उठने से अपने कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल को बुलवाने से बने/बनाये गए पंकज पेरिवाल के 'टशन' में खलल पड़ गया है । दरअसल, जैसा कि इन्हीं नजदीकियों का बताना/कहना है कि रीजनल कॉन्फ्रेंस में पीयूष गोयल के आने और तस्वीरें खिंचने/मिलने के बाद पंकज पेरिवाल खासे जोश में थे, और इतराते हुए बार बार कह रहे थे कि जिन केंद्रीय वित्त मंत्री को इंस्टीट्यूट के प्रेसीडेंट अपने कार्यक्रम में नहीं बुलवा सके, उन्हें मैंने अपने कार्यक्रम में बुलवा लिया । इस बात से पंकज पेरिवाल इतने जोश और घमंड में थे कि रीजनल काउंसिल के अपने साथी पदाधिकारियों और सदस्यों की आपत्तियों/शिकायतों को लेकर बेपरवाह बने हुए थे । नजदीकियों का कहना/बताना है कि लेकिन जैसे ही पंकज पेरिवाल को अपने यहाँ पड़े छापे का हवाला देते हुए वित्त मंत्री को संबोधित तथा वित्त मंत्रालय को भेजी गई चिट्ठी का पता चला, उनका 'टशन' और घमंड जैसे हवा हो गया और उन्होंने अपने आप को फजीहत का शिकार बनते हुए पाया । 

Friday, September 21, 2018

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल के चेयरमैन पंकज पेरिवाल द्वारा अपने ऑफिस में पड़े छापे की खबरों से होने वाली फजीहत से बचने के लिए रीजनल काउंसिल की बजाये एक्जीक्यूटिव कमेटी की बुलाई मीटिंग में नितिन कँवर और राजिंदर अरोड़ा के बीच हुई तू-तड़ाक ने काउंसिल में चलने वाली कमीशनखोरी की पोल खोली

नई दिल्ली । नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल की एक्जीक्यूटिव कमेटी की आज हुई मीटिंग में वाइस चेयरमैन नितिन कँवर तथा ट्रेजरर राजिंदर अरोड़ा ने एक-दूसरे के साथ पहले गाली-गलौच और फिर हाथा-पाई करते हुए एक-दूसरे की बेईमानियों की जिस तरह पोल खोली, उससे एक बार फिर साबित हुआ कि इन दोनों की बदतमीजियों और बेईमानियों ने काउंसिल में किस तरह की गंदगी मचाई हुई है । मजे की बात यह है कि यह दोनों ही नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल में तीनों ही वर्ष सत्ता खेमे में साथ-साथ रहे हैं, और दूसरों के साथ लगातार बदतमीजियाँ करते रहे हैं । इन पर बेईमानी करने और काउंसिल में लूट-खसोट मचाने के आरोप तो लगते ही रहे हैं, लेकिन आज की मीटिंग में पहली बार दोनों को एक-दूसरे पर कमीशनखोरी करने के आरोप लगाते सुना गया । एक दूसरे पर हिसाब-किताब में बेईमानी करने तथा वेंडर्स से कमीशन उगाहने के आरोप लगाते हुए शुरू में तो इन्होंने एक-दूसरे के साथ खुल कर गाली-गलौच की, और फिर मामला हाथा-पाई तक जा पहुँचा । काउंसिल के स्टॉफ के लोगों का कहना/बताना है कि चेयरमैन पंकज पेरिवाल तथा स्टॉफ के वरिष्ठ सदस्यों ने बीच-बचाव न किया होता तो दोनों के कपड़े फटने और शारीरिक चोट लगने की स्थिति बन रही थी । हाथापाई करते हुए दोनों ही बार-बार पुलिस में रिपोर्ट करने और पुलिस बुलाने की बात करते हुए भी सुने गए । किसी तरह मामला तो शांत हो गया, लेकिन यह पोल जरूर खुल गई कि पदाधिकारियों के रूप में नितिन कँवर और राजिंदर अरोड़ा नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल का कामकाज करने वाले वेंडर्स से कमीशन खाते हैं, और कमीशन की बंदरबाँट करने के लिए एक-दूसरे के सिर फोड़ने को भी तैयार हो सकते हैं ।
उल्लेखनीय है कि आज हुई एक्जीक्यूटिव कमेटी की मीटिंग का मुख्य एजेंडा वेंडर्स के बकाये के भुगतान को लेकर ही था । दरअसल पिछले कई महीनों से वेंडर्स के भुगतान नहीं हो रहे हैं, जिसके चलते वेंडर्स ने सर्विस देना बंद करने की धमकी दी हुई थी । नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल के सेमीनार आयोजित करने वाले होटलों के प्रबंधकों ने धमकी दी हुई थी कि उनके भुगतान यदि जल्दी ही नहीं किए गए तो वह नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल को ब्लैक-लिस्ट कर देंगे और तब काउंसिल को अपने कार्यक्रमों के लिए होटल्स में जगह नहीं मिल सकेगी । चर्चा रही कि काउंसिल के चेयरमैन पंकज पेरिवाल लुधियाना में अपने ऑफिस में पड़े इनकम टैक्स विभाग के छापे के कारण मुसीबत में फँसे होने के चलते चेयरमैन पद की जिम्मेदारियाँ निभाने के लिए समय नहीं निकाल पाए और इसलिए वेंडर्स व होटलों के भुगतान अटके/फँसे । समस्या को हल करने के लिए काउंसिल की सेक्रेटरी पूजा बंसल ने रीजनल काउंसिल की मीटिंग बुलाने के लिए नोटिस निकाला, लेकिन चेयरमैन के रूप में पंकज पेरिवाल ने नियमों की दुहाई देते हुए उनके नोटिस को रद्द कर/करवा दिया । लोगों के बीच चर्चा रही कि पंकज पेरिवाल को डर रहा कि लुधियाना के अखबारों में प्रकाशित हुईं उनके ऑफिस पर पड़े इनकम टैक्स विभाग के छापे की खबरों को लेकर मीटिंग में किसी ने यदि सवाल पूछ लिया तो उन्हें जबाव देना पड़ जायेगा और तब उनके यहाँ पड़े छापे की बात काउंसिल के रिकॉर्ड पर आ जाएगी, इसलिए पंकज पेरिवाल ने रीजनल काउंसिल की मीटिंग से बचने की हर संभव कोशिश की । वेंडर्स के भुगतान के मामले को हल करने का भी दबाव लेकिन बढ़ता जा रहा था, इसलिए पंकज पेरिवाल ने बीच का रास्ता निकालते हुए एक्जीक्यूटिव कमेटी की मीटिंग बुला ली । एक्जीक्यूटिव कमेटी में सब 'अपने' ही लोग हैं, इसलिए पंकज पेरिवाल निश्चिंत रहे कि लुधियाना के अखबारों में छपी खबरों के हवाले से कोई उनके ऑफिस में पड़े इनकम टैक्स विभाग के छापे के बारे में सवाल नहीं पूछेगा ।
पंकज पेरिवाल ने रीजनल काउंसिल की बजाये एक्जीक्यूटिव कमेटी की मीटिंग करके अपने आप को तो बचा लिया, लेकिन नितिन कँवर और राजिंदर अरोड़ा के बीच हुई धींगामुश्ती के चलते प्रोफेशन और इंस्टीट्यूट को कलंकित होने से वह नहीं बचा सके । दरअसल वेंडर्स और होटलों के भुगतान में होने वाली देरी पर बात शुरू हुई तो भेद खुला कि ट्रेजरर के रूप में राजिंदर अरोड़ा भुगतान में जानबूझ कर इसलिए देरी कर रहे थे, क्योंकि उन्हें वेंडर्स से कमीशन नहीं मिल रहा था । वेंडर्स की तरफ से कहा/सुना गया कि वह आखिर किस किस को कमीशन दें ? बात खुली कि पिछले वर्ष ट्रेजरर के रूप में नितिन कँवर वेंडर्स से कमीशन लेते रहे थे, और वह चाहते थे कि चूँकि वेंडर्स को उन्होंने काम दिलवाया है, इसलिए उन्हें इस वर्ष भी कमीशन मिलता रहे । इस कमीशन खोरी के मास्टरमाइंड के रूप में पिछले वर्ष के चेयरमैन राकेश मक्कड़ को देखा/पहचाना गया । काउंसिल के स्टॉफ का कहना/बताना है कि काउंसिल में राकेश मक्कड़ अकेले ऐसे सदस्य हैं, जो सुबह प्रायः स्टॉफ के आने से भी पहले ऑफिस आ जाते हैं और देर शाम तक ऑफिस में रहते हैं और काउंसिल के पैसे से ही दिन भर चाय-नाश्ता और खाना-पीना करते हैं । इस वर्ष भी राकेश मक्कड़ अपने आपको 'चेयरमैन' ही मानते/समझते हैं । नितिन कँवर और राजिंदर अरोड़ा को उनके दो नवरत्नों के रूप में देखा/पहचाना जाता है । लगातार आरोप लगते रहे हैं कि इन तीनों ने काउंसिल को तरह तरह से जी भर कर लूटा है । लूट के माल पर बढ़े लालच के चलते वेंडर्स के भुगतान रुके तो समस्या खड़ी हुई, और समस्या को हल करने की कोशिश में नितिन कँवर और राजिंदर अरोड़ा की कारस्तानियों की पोल खुलना शुरू हुई तो फिर दूसरे की करतूत को अपनी करतूत से बड़ा साबित करने की कोशिश में नितिन कँवर और राजिंदर अरोड़ा एक दूसरे की कारस्तानियों का कच्चा-चिट्ठा खोलने लगे - और उनकी इस कोशिश में नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल की एक्जीक्यूटिव कमेटी की मीटिंग में सड़कछाप माहौल बन गया, जिसमें गाली-गलौच सुनी गईं और हाथा-पाई का नजारा देखा गया ।
मजे की बात यह है कि नितिन कँवर और राजिंदर अरोड़ा नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल में अपने अपने पुनर्निर्वाचन के लिए फिर से चुनावी मैदान में हैं, और इन्हें पूरा विश्वास है कि इनकी हरकतों और कारस्तानियों को जानने के बावजूद चार्टर्ड एकाउंटेंट्स इन्हें वोट देंगे और यह फिर से रीजनल काउंसिल में सदस्य और पदाधिकारी बनेंगे ।

Tuesday, June 5, 2018

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की दो कमेटियों की तरफ से लुधियाना में आयोजित हो रही नेशनल कॉन्फ्रेंस के सहारे समर्थन जुटाने की राजेश शर्मा की कोशिशें, विशाल गर्ग और उनके समर्थकों के आक्रामक रवैये को देखते हुए अभी तो सफल होती नहीं नजर आ रही हैं

लुधियाना । चार्टर्ड एकाउंटेंट्स इंस्टीट्यूट की कैपिटल मार्किट एंड इन्वेस्टर्स प्रोटेक्शन कमेटी द्वारा लुधियाना में आयोजित की जा रही दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस इंस्टीट्यूट की सेंट्रल काउंसिल के दो संभावित उम्मीदवारों - राजेश शर्मा व विशाल गर्ग के बीच के चुनावी झगड़े में फँसती और विवादित होती नजर आ रही है । इंस्टीट्यूट की एक अन्य कमेटी - कैपेसिटी बिल्डिंग ऑफ मेंबर्स इन प्रैक्टिस के साथ मिलकर आयोजित की जा रही नेशनल कॉन्फ्रेंस की मुख्य आयोजक कमेटी के चेयरमैन चूँकि राजेश शर्मा हैं, इसलिए विशाल गर्ग और उनके समर्थकों का आरोप है कि लुधियाना में अपने लिए वोट जुटाने तथा विशाल गर्ग को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से राजेश शर्मा नेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन लुधियाना में कर/करवा रहे हैं । दरअसल राजेश शर्मा के सामने इस बार के चुनाव में अपनी सीट बचाने की गंभीर चुनौती है । एक तरफ तो पिछले वर्ष हुए सीए डे के फंक्शन की बदइंतजामी को लेकर उनके माथे पर लगा कलंक हल्का पड़ने का नाम ही नहीं ले रहा है, और दूसरी तरफ चरनजोत सिंह नंदा की उम्मीदवारी ने उनके लिए मुसीबत खड़ी कर दी है । राजेश शर्मा सेंट्रल काउंसिल की अपनी सीट बचाने के लिए लुधियाना पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं; उनके नजदीकियों का कहना है कि उन्हें लग रहा है कि पंकज पेरिवाल के सहयोग से वह विशाल गर्ग को पीछे धकेल देंगे और लुधियाना में अपने लिए अच्छा समर्थन जुटा लेंगे । पिछली बार के चुनाव में हालाँकि पहली वरीयता के वोटों की गिनती में राजेश शर्मा को विशाल गर्ग से कम वोट मिले थे । पहली वरीयता के वोटों की गिनती में विशाल गर्ग 1412 वोटों के साथ छठे नंबर पर थे, जबकि 1361 वोटों के साथ राजेश शर्मा आठवें नंबर पर थे - दूसरी वरीयता के वोटों के सहारे राजेश शर्मा गिरते-पड़ते किसी तरह सातवें नंबर पर पहुँचने में हालाँकि सफल हो गए थे । पिछली बार जैसे-तैसे मिली सफलता को इस बार दोहरा पाना उनके लिए मुश्किल माना/समझा जा रहा है । पिछले वर्ष आयोजित हुए सीए डे से जुड़ी उनकी बदनामी के चलते पहली वरीयता के वोटों की गिनती में उनके पिछड़ने का अनुमान लगाया जा रहा है ।
राजेश शर्मा ने पिछले कुछ दिनों में पिछले वर्ष के सीए डे से जुड़ी बदनामी के दागों को धोने की यह कहते/बताते हुए हालाँकि कोशिश तो बहुत की कि उन्होंने तो अपना काम बहुत जिम्मेदारी से किया था और बदइंतजामी के लिए उन्हें नाहक ही जिम्मेदार ठहराया गया - लेकिन उनकी यह कोशिश सफल होती दिख नहीं रही है । इसके लिए दरअसल राजेश शर्मा का व्यवहार भी जिम्मेदार है - चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के सामने वह डींगें तो बहुत मारते/दिखाते हैं कि उनकी तमाम मंत्रियों और नेताओं के साथ निकटता है और सरकारी विभागों में अच्छी पैठ है, लेकिन लोगों के काम करवाने में कोई दिलचस्पी नहीं लेते हैं; लोगों के अनुभव तो यहाँ तक हैं कि वह अक्सर फोन ही नहीं उठाते हैं, बाद में कभी मिलने या बात होने पर शिकायत करो तो उनसे रटा-रटाया यही जबाव सुनने को मिलता है कि अरे, उस समय मैं फलाँ मंत्री के साथ मीटिंग में था । इस तरह के रवैये से राजेश शर्मा ने लोगों को बुरी तरह से नाराज तो किया हुआ ही है, साथ ही पिछले वर्ष के सीए डे से जुड़ी बदनामी के दाग को भी और गहरा बनाया है । ऐसे में उनकी सारी उम्मीद लुधियाना पर टिकी हुई है । उन्हें उम्मीद है कि पंकज पेरिवाल को नॉर्दन इंडिया रीजनल काउंसिल का चेयरमैन बनवाने का श्रेय लेकर वह लुधियाना में अपने लिए अच्छा समर्थन जुटा सकते हैं । पंकज पेरिवाल के हालाँकि सेंट्रल काउंसिल के एक अन्य सदस्य विजय गुप्ता के साथ भी अच्छे और विश्वासपूर्ण संबंध हैं; और उनके नजदीकियों का मानना/कहना है कि पंकज पेरिवाल यदि राजेश शर्मा के ही भरोसे रहते तो राजेश शर्मा की बदनामी की चलते हरगिज चेयरमैन न बन पाते, वह तो विजय गुप्ता ने जुगाड़ बैठाये और तब पंकज पेरिवाल के लिए चेयरमैन बन पाना संभव हुआ । नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल के सदस्यों का भी कहना/बताना है कि पंकज पेरिवाल के चेयरमैन-काल में राजेश शर्मा की उतनी मनमानी नहीं चल पा रही है, जितनी मनमानी राकेश मक्कड़ के चेयरमैन-काल में उन्होंने चला ली थी । इसका कारण यह भी माना/समझा जाता है कि पिछले वर्ष रीजनल काउंसिल में चेयरमैन रहे राकेश मक्कड़ चूँकि एक नाकारा और हद दर्जे के लालची/बेईमान व्यक्ति हैं, इसलिए राजेश शर्मा ने उनका जैसा मनमाना इस्तेमाल कर लिया, वैसा इस्तेमाल वह पंकज पेरिवाल का नहीं कर पा रहे हैं ।
जहाँ तक राजेश शर्मा के चेयरमैन वाली कमेटी द्वारा लुधियाना में नेशनल कॉन्फ्रेंस करने वाली बात है, तो पंकज पेरिवाल के नजदीकियों के अनुसार इसमें चूँकि पंकज पेरिवाल को भी अपना 'फायदा' नजर आ रहा है - इसलिए इस कॉन्फ्रेंस के लिए वह भी सहज रूप से इसे लुधियाना में आयोजित करने के लिए तैयार हो गए । पंकज पेरिवाल का विशाल गर्ग के साथ विरोध का संबंध है, यह बात भी पूरी तरह सच है - और विरोध के इसी संबंध का फायदा उठाने के लिए ही राजेश शर्मा ने अपने चेयरमैन वाली कमेटी द्वारा नेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित करने के लिए लुधियाना को चुना है । विशाल गर्ग और उनके समर्थक भी राजेश शर्मा के इस खेल को समझ रहे हैं और कॉन्फ्रेंस के दौरान जुटे लोगों को राजेश शर्मा की कारस्तानियों से अवगत कराने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं । नेशनल कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में राजेश शर्मा का उपस्थित चार्टर्ड एकाउंटेंट्स को संबोधित करने का प्रोग्राम है; सुना जा रहा है कि इसी सत्र में जुटे लोगों को राजेश शर्मा की कारगुजारियों से अवगत करवाया जायेगा । विशाल गर्ग और उनके समर्थकों ने पंकज पेरिवाल को भी निशाने पर लिया हुआ है; उनका गंभीर आरोप है कि रीजनल काउंसिल के चेयरमैन बनने के लिए की गई सौदेबाजी में वह लुधियाना में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स सदस्यों की एकजुटता को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं और बाहरी लोगों के प्यादे बने हुए हैं । विशाल गर्ग और उनके समर्थकों के आक्रामक रवैये को देखते हुए पंकज पेरिवाल के सहारे लुधियाना में समर्थन जुटाने की राजेश शर्मा की कोशिशें सफल होती हुई अभी तो नहीं नजर आ रही हैं ।

Thursday, November 9, 2017

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स में नीलेश विकमसे के प्रेसीडेंट-काल में बना अराजकता और अनिर्णय का माहौल, नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल में राकेश मक्कड़ एंड टीम की मनमानियों और लूट-खसोट के लिए वरदान बना

नई दिल्ली । नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल के चेयरमैन राकेश मक्कड़ और उनके साथी पदाधिकारियों ने स्टूडेंट कन्वेंशन के नाम पर रुपए हड़पने की योजना पर काम करना शुरू किया है, और इसके तहत करीब 35 लाख रुपए का बजट बना कर तैयार किया है । पिछले वर्ष स्टूडेंट कन्वेंशन में करीब 20 लाख रुपए खर्च हुए थे । इसी से लोगों को लगता है कि राकेश मक्कड़ एंड टीम के सदस्यों के पेट कुछ ज्यादा बड़े हैं, और इसीलिए उन्होंने स्टूडेंट कन्वेंशन के खर्चे में जोर का उछाल 'पैदा' कर दिया है । इस उछाल को तर्कसंगत बनाने/दिखाने के लिए कन्वेंशन में दो हजार छात्रों की भागीदारी होने/कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष एक हजार छात्रों का था । अब पिछले वर्ष यदि एक हजार छात्रों के लिए इंतजाम करने में 20 लाख रुपए खर्च हुए थे, तो इस वर्ष दो हजार छात्रों के लिए इंतजाम करने में 35 लाख का खर्चा तो उचित ही लगता है । लेकिन यहाँ एक पेंच है - पिछले वर्ष इंतजाम भले ही एक हजार छात्रों के लिए किया गया था, लेकिन कन्वेंशन में छात्र कुल 400/500 के बीच ही पहुँचे थे । पिछले वर्ष की कन्वेंशन के लिए तैयार की/करवाई गयी तमाम स्टेशनरी अभी भी धूल खा रही है । पिछले वर्ष की कन्वेंशन आयोजित करने वाले भी राकेश मक्कड़ और उनके संगी-साथी ही थे - इसलिए एक स्वाभाविक सा सवाल बनता है कि पिछले वर्ष यही लोग स्टूडेंट कन्वेंशन में जब एक हजार छात्रों को जुटाने का लक्ष्य ही पूरा नहीं कर पाए थे, तब इस वर्ष दो हजार छात्रों का लक्ष्य क्यों निर्धारित कर लिया गया है ? राकेश मक्कड़ तथा काउंसिल में पदाधिकारी उनके साथियों की हरकतों को देखते/पहचानते हुए लोगों को इस सवाल का उचित जबाव यही समझ में आता है कि इंस्टीट्यूट के पैसे की ज्यादा से ज्यादा लूट को संभव बनाने के लिए ही राकेश मक्कड़ एंड टीम ने यह ऊँचा लक्ष्य निर्धारित किया है ।
उल्लेखनीय है कि नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल के पदाधिकारियों के रूप में राकेश मक्कड़ एंड टीम पर काउंसिल के हिसाब-किताब में गड़बड़ियाँ करने तथा हिसाब-किताब को काउंसिल सदस्यों से ही छिपाने को लेकर गंभीर आरोप और भारी विवाद रहे हैं; जिन्हें लेकर चारों तरफ से घिर जाने के बाद वह जो थोड़ा-बहुत हिसाब दिखाने को मजबूर हुए तो उसमें बहुत सी 'हेरा-फेरियाँ' पकड़ी गईं - और जिसके चलते पूर्व चेयरमैन दीपक गर्ग और मौजूदा ट्रेजरर सुमित गर्ग काउंसिल के 'लूटे गए' पैसे काउंसिल को वापस करने के लिए मजबूर तक हुए । पोल खुलती तथा लूटे गए पैसे वापस करने की नौबत आते देख राकेश मक्कड़ और उनके साथी पदाधिकारियों ने हिसाब-किताब फिर से छिपा लिया और बेईमानीपूर्ण तरीके से 'जबरदस्ती' बजट पास करवाया, और षड्यंत्रपूर्ण तरीके से डेढ़ मिनट में एजीएम कर ली । राकेश मक्कड़ एंड टीम की इन हरकतों पर काउंसिल के ही सदस्यों की तरफ से इंस्टीट्यूट के प्रेसीडेंट को शिकायत की हुई है । इंस्टीट्यूट के प्रेसीडेंट नीलेश विकमसे की तरफ से कई कारणों से चूँकि कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए राकेश मक्कड़ एंड टीम को मनमानियाँ करने का और बल मिला है । नीलेश विकमसे के प्रेसीडेंट-काल में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स इंस्टीट्यूट में जो अराजकता और अनिर्णय का माहौल बना है, वह नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल में राकेश मक्कड़ एंड टीम की मनमानियों और लूट-खसोट के लिए वरदान बना है ।
इसी वरदान का प्रसाद पाने के लिए, पिछले वर्ष एक हजार छात्रों की भागीदारी के लक्ष्य-निर्धारण के साथ की गई स्टूडेंट कन्वेंशन में मुश्किल से 400/500 छात्रों को इकट्ठा कर पाने वाली राकेश मक्कड़ एंड टीम ने इस वर्ष की स्टूडेंट कन्वेंशन के लिए दो हजार छात्रों की भागीदारी का लक्ष्य निर्धारित कर अपनी अपनी जेबें भरने का इंतजाम कर लिया है । मजे की बात यह है कि काउंसिल के चेयरमैन के रूप में राकेश मक्कड़ ने स्टूडेंट कन्वेंशन के लिए काउंसिल सदस्यों तक से बात करने की जरूरत तक नहीं समझी है । उनकी मनमानी का इससे भी बड़ा सुबूत यह मिला है कि कन्वेंशन के लिए जगह बुक करवाने का काम गुपचुप रूप से जून में ही कर लिया गया था, और जिसके लिए किसी से पूछे या किसी को बताए बिना ही तीन लाख रुपए एडवांस के रूप में भी दे दिए गए थे । राकेश मक्कड़ और काउंसिल में पदाधिकारी उनके साथियों की सोच और उनके व्यवहार का दिलचस्प नजारा यह है कि पदाधिकारी के रूप में उनके पास लाइब्रेरीज के खर्चे पूरे करने के लिए पैसे नहीं हैं, और इसलिए पिछले दिनों उन्होंने लाइब्रेरीज को बंद कर देने के फैसले कर लिए - लेकिन फालतू के कामों में खर्च करने के लिए उनके पास पैसे की कोई कमी नहीं है । दरअसल फालतू के कामों में खर्च हुए 'दिखाए' गए पैसे से चूँकि अपनी अपनी जेबें भरने का मौका मिलता है, इसलिए चेयरमैन राकेश मक्कड़ और उनके साथी पदाधिकारियों का सारा ध्यान जरूरी कामों की बजाए उन्हीं पर रहता है ।
राकेश मक्कड़ के चेयरमैन-काल में नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल में सिर्फ पैसों की ही बेईमानी नहीं हो रही है, बल्कि प्रोफेशन के नाम पर भी जमकर धोखाधड़ी हो रही है । इसका बिलकुल नया उदाहरण लुधियाना में होने वाला सेमीनार है - जिसके लिए पहले तो बताया गया था कि सेमीनार में 'एमिनेंट' स्पीकर्स आयेंगे, लेकिन जब स्पीकर्स के नाम सामने आए तो 'खोदा पहाड़, निकला चूहा' वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए काउंसिल में पदाधिकारी नितिन कँवर और राजेंद्र अरोड़ा के नाम सामने आए । इस हरकत को सरासर धोखाधड़ी मानते/बताते हुए राकेश मक्कड़ को लोगों की तरफ से जब लताड़ पड़ी, तो उन्होंने बहानेबाजी लगाई कि उन्हें कोई एमिनेंट स्पीकर मिला ही नहीं, इसलिए ऐन मौके पर उन्हें काउंसिल के इन पदाधिकारियों को ही स्पीकर्स के रूप में तय करना पड़ा है । यह हरकत कोई पहली बार नहीं हुई है; काउंसिल पदाधिकारी ब्रांचेज के कार्यक्रमों में स्पीकर्स के रूप में पहले भी जाते रहे हैं - काउंसिल के सदस्यों के आरोपों के ही अनुसार, वह इसलिए स्पीकर बनते रहे हैं, ताकि आने/जाने/ठहरने/खाने का खर्चा वह काउंसिल से बसूल सकें । राकेश मक्कड़ और उनके साथी पदाधिकारी अपनी छोटी छोटी जरूरतों और स्वार्थों को पूरा करने के लिए सेमिनार्स के आयोजन तक में जिस तरह की हेराफेरियाँ कर रहे हैं, उससे सेमिनार्स के स्तर बुरी तरह से घटे हैं और वह मजाक बन कर रह गए हैं ।