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Saturday, January 27, 2018

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर केएल खट्टर की दिल्ली में दिखाई जा रही नेतागिरी ने राजीव अग्रवाल के लिए तो मुश्किलें बढ़ाई ही हैं, हरदीप सरकारिया के खिलाफ नेगेटिव वोटिंग का खतरा भी पैदा किया

नई दिल्ली । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर केएल खट्टर की दिल्ली में भी दिखाई जा रही नेतागिरी पर भड़कती नजर आ रही डिस्ट्रिक्ट की राजनीति और उसका हरदीप सरकारिया की उम्मीदवारी पर पड़ते संभावित प्रतिकूल असर ने राजीव अग्रवाल को भी मुसीबत में डालने का काम शुरू कर दिया है । इस मुसीबत में राजीव अग्रवाल की उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं की आरके शाह के साथ सौदेबाजी करने की कोशिशों को लगे धक्के ने भी इजाफा किया है । दरअसल आरके शाह की सक्रियता को नेताओं ने अगले वर्ष के लिए समर्थन की हरी झंडी पाने की उनकी कोशिश के रूप में देखा/पहचाना है । अधिकतर नेताओं को लगता है कि आरके शाह को भी पता है कि उनके लिए चुनाव जीतना तो मुश्किल है, अपनी उम्मीदवारी से लेकिन वह राजीव अग्रवाल को और ज्यादा सक्रिय होने के लिए मजबूर जरूर कर देंगे - इसलिए अपनी सक्रियता के जरिये वह राजीव अग्रवाल के समर्थक नेताओं पर इस बात के लिए दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं कि वह अगले वर्ष के लिए उनकी उम्मीदवारी को समर्थन देने की घोषणा कर दें । मजे की बात यह सुनी जा रही है कि राजीव अग्रवाल खुद तो अपने समर्थक नेताओं पर आरके शाह के साथ 'समझौता' करने के लिए दबाव बना रहे हैं, ताकी उनकी मुसीबत टले - लेकिन उनके समर्थक नेता इसके लिए राजी नहीं हो रहे हैं । उनका मानना और कहना है कि आरके शाह को चुनाव लड़ने ही दिया जाए, ताकि उन्हें खुद भी पता चल जाए कि लोगों के बीच उनके लिए कितना समर्थन है ? आरके शाह को लेकर राजीव अग्रवाल और उनके समर्थक नेताओं के बीच का यह 'झगड़ा' अभी चल तो रहा है, लेकिन नेताओं को उम्मीद है कि वह आरके शाह को कोई तवज्जो नहीं देंगे - तो वह खुद ही चुनावी मैदान से हट जायेंगे ।
हालाँकि केएल खट्टर की दिल्ली में भी दिखाई जा रही नेतागिरी इस मामले को थोड़ा पेचीदा बना रही है । दिल्ली के कई नेता इस बात पर भड़के हुए हैं कि जब वह हरियाणा में किसी से बात नहीं कर रहे हैं, और हरियाणा की राजनीति का सारा दारोमदार उन्होंने हरियाणा के नेताओं के जिम्मे छोड़ दिया है - तब फिर केएल खट्टर दिल्ली में क्यों अपनी टाँग अड़ा रहे हैं ? केएल खट्टर ने दिल्ली में राजीव अग्रवाल के लिए समर्थन जुटाने के लिए कुछेक क्लब्स के पदाधिकारियों से बात की है । दिल्ली के नेताओं को जब इस बात का पता चला तो वह भड़के और कहने लगे कि दिल्ली में राजीव अग्रवाल को समर्थन दिलवाने का काम वह कर लेंगे; राजीव अग्रवाल की उन्हें ज्यादा ही चिंता है तो वह हरियाणा में उन्हें समर्थन दिलवाने का काम करें । केएल खट्टर की इस कार्रवाई को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर राजिंदर बंसल को नीचा दिखाने की कार्रवाई के रूप में भी देखा/पहचाना गया है । दरअसल राजिंदर बंसल को आरके शाह की उम्मीदवारी के समर्थन में समझा/पहचाना जा रहा है - हालाँकि राजिंदर बंसल ने अभी तक सार्वजनिक रूप से आरके शाह को समर्थन देने की कोई कोशिश की नहीं है । माना/समझा जा रहा है कि राजीव अग्रवाल की उम्मीदवारी के समर्थन में बात करके केएल खट्टर ने लोगों के बीच यह संदेश देने का प्रयास किया है कि राजिंदर बंसल की चिंता करने की जरूरत नहीं है - हरियाणा के नेता पूरी तरह राजीव अग्रवाल के साथ हैं । राजीव अग्रवाल के समर्थक नेताओं का कहना है कि प्रयास तो उनका अच्छा है, लेकिन यह प्रयास दिल्ली की बजाए वह यदि हरियाणा में करते/दिखाते तो उनके प्रयास पर सवाल खड़े नहीं होते - और राजीव अग्रवाल का ज्यादा भला होता ।
केएल खट्टर के इस 'प्रयास' ने हरियाणा में हरदीप सरकारिया को सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार चुनने के मनमाने तरीके से नाराज लोगों को भड़काने का काम किया है - और वहाँ हरदीप सरकारिया के खिलाफ नेगेटिव वोटिंग करने/करवाने की चर्चा शुरू हो गयी है । वहाँ लोगों का कहना है कि हरदीप सरकारिया के खिलाफ कोई उम्मीदवार यदि नहीं भी आ रहा है, तो भी इसका मतलब यह नहीं है कि नेताओं की मनमानियाँ लोग चुपचाप सहते जायेंगे और हरदीप सरकारिया आसानी से सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बन जायेंगे । हरियाणा में वास्तव में समस्या यह हुई है कि जो लोग हरदीप सरकारिया को मनमाने तरीके से उम्मीदवार चुने जाने से खफा हैं, वह नेताओं के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए राजीव अग्रवाल को निशाना बना रहे हैं । राजीव अग्रवाल भी चूँकि 'नेताओं के उम्मीदवार' के रूप में देखे/पहचाने जा रहे हैं, इसलिए हाल ही में हरियाणा में चलाए गए अपने संपर्क अभियान में उन्हें लोगों की बेरुखी और नाराजगी का शिकार बनना पड़ा । राजीव अग्रवाल के लिए मुसीबत की बात यह हुई कि अपने संपर्क अभियान में उन्हें नेताओं की तरफ से भी कोई मदद नहीं मिली । नेताओं ने वीके हंस पर दबाव बना कर उन्हें राजीव अग्रवाल के साथ जाने के लिए मजबूर तो कर दिया, लेकिन वीके हंस ने भी राजीव अग्रवाल के संपर्क अभियान को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया । उम्मीद तो हालाँकि की जा रही है कि धीरे-धीरे हालात सामान्य हो जायेंगे - लेकिन केएल खट्टर की दिल्ली में राजीव अग्रवाल को लेकर दिखाई गई सक्रियता ने अलग अलग कारणों से अलग अलग खेमों और समूहों में जो 'आग' लगाई है, उसने 'नेताओं के उम्मीदवार' के रूप में देखे/पहचाने जा रहे हरदीप सरकारिया और राजीव अग्रवाल के सामने मुश्किलें खड़ी करने और उन्हें बढ़ाने का ही काम किया है ।

Friday, December 29, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री में प्रवीन राजगढ़िया के मामले में और अपने गवर्नर-काल के अकाउंट्स न देने के किस्से के फिर से उठने के कारण पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर केएल खट्टर चौतरफा मुसीबत में फँसे

रोहतक । प्रवीन राजगढ़िया के साथ हरियाणा के लीडर्स की रोहतक में होने वाली मीटिंग के लगातार स्थगित होते जाने से प्रवीन राजगढ़िया के नजदीकियों और समर्थकों के बीच पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर केएल खट्टर के प्रति नाराजगी और विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है । प्रवीन राजगढ़िया के नजदीकियों की तरफ से केएल खट्टर पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं । रोहतक में पूर्व गवर्नर राजिंदर बंसल के क्लब के अधिष्ठापन समारोह का निमंत्रण न मिलने के बाद से तो प्रवीन राजगढ़िया और उनके समर्थक बुरी तरह भड़के हुए हैं । उल्लेखनीय है कि उक्त समारोह में हरियाणा के चारों-पाँचों लीडर्स उपस्थित हुए थे । प्रवीन राजगढ़िया ने प्रयास किया था कि जब सभी लीडर्स रोहतक में आ ही रहे हैं, तो समारोह से पहले प्रस्तावित मीटिंग हो सकती है । केएल खट्टर ने मीटिंग हो पाने में तो असमर्थता व्यक्त कर ही दी; प्रवीन राजगढ़िया को अधिष्ठापन समारोह का निमंत्रण तक नहीं मिला । प्रवीन राजगढ़िया के लिए यह घटना काफी झटके वाली रही । उनकी तरफ से लोगों के बीच माहौल तो यह बनाया/दिखाया गया था कि हरदीप सरकारिया को सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार चुनने के तरीके पर उनकी तरफ से नाराजगी व्यक्त किए जाने से हरियाणा की लीडरशिप बुरी तरह से 'हिल' गई है, लेकिन देखने में यह आया कि उनकी नाराजगी के बावजूद लीडरशिप के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगी है । प्रवीन राजगढ़िया के नजदीकियों का कहना है कि रोहतक में होने वाली मीटिंग को लेकर केएल खट्टर जिस तरह से टालमटोल करते नजर आ रहे हैं, और बार-बार तरह तरह की बहानेबाजी करके मीटिंग के दिन को आगे बढ़ाते नजर आ रहे हैं - उससे अब लगने लगा है कि केएल खट्टर सिर्फ टाइम पास कर रहे हैं, और प्रवीन राजगढ़िया को बेवकूफ बना रहे हैं ।
प्रवीन राजगढ़िया के नजदीकियों और समर्थको को अब महसूस हो रहा है कि केएल खट्टर की बातों में आकर उन्होंने बड़ी गलती कर दी और डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच अपनी जगहँसाई और फजीहत करवा ली है । प्रवीन राजगढ़िया के कुछेक नजदीकियों की तरफ से हालाँकि अभी भी दावा किया जा रहा है कि उनके चैप्टर को अभी बंद हुआ नहीं समझा जाए, और प्रवीन राजगढ़िया अपने साथ हुए 'खेल' का उचित समय पर बदला जरूर लेंगे । नजदीकियों का कहना है कि प्रवीन राजगढ़िया लीडर्स को पूरा समय देना चाहते हैं, ताकी बाद में वह यह न कह सकें कि वह तो बात करना चाहते थे - प्रवीन राजगढ़िया ने ही जल्दी मचा दी थी । इस मामले में केएल खट्टर भी खुद को बुरी तरह घिरा हुआ महसूस कर रहे हैं । दरअसल इस मामले में हरियाणा के बाकी लीडर्स ने केएल खट्टर को अकेला छोड़ दिया है । बाकी लीडर्स अभी हरदीप सरकारिया को और उनके बाद पुनीत बंसल को समर्थन देने के मुद्दे पर पुनर्विचार करने के मूड में बिलकुल भी नहीं हैं । उनकी तरफ से केएल खट्टर को बता दिया गया है कि प्रवीन राजगढ़िया से उन्होंने जो कहा है, उसे वह खुद ही देखें । बाकी लीडर्स के इसी रवैये के चलते, प्रवीन राजगढ़िया से रोहतक में मीटिंग करने के वायदे को निभा पाना केएल खट्टर के लिए मुश्किल हो रहा है । केएल खट्टर के लिए मुसीबत की बात यह है कि बाकी लीडर्स की तरफ से उन्हें यह और सुनने को मिल रहा है कि प्रवीन राजगढ़िया को उन्होंने नाहक ही ज्यादा तवज्जो दे दी है, और मामले को थोड़ा टेढ़ा कर दिया है - अन्यथा प्रवीण राजगढ़िया कुछ दिन शोर मचा कर खुद ही शांत हो जाते । बाकी लीडर्स की नसीहत सुनते हुए केएल खट्टर ने लगता है कि उन्हीं का फार्मूला अपना लिया है और प्रवीन राजगढ़िया को कभी इग्नोर करने तो कभी 'चिंता मत करो' का झाँसा देकर लटकाए हुए हैं । केएल खट्टर की इस झाँसेबाजी से प्रवीन राजगढ़िया और उनके नजदीकी व समर्थक भड़के हुए तो बहुत हैं, लेकिन उनकी समझ में आ नहीं रहा है कि इस स्थिति में वह करें, तो आखिर क्या करें ?

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नई दिल्ली । केएल खट्टर पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर तथा डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डीनेटर केएम गोयल के आक्रामक रवैये के कारण एक अलग तरह की फजीहत के दरवाजे पर पहुँच गए हैं । केएल खट्टर के लिए यह फजीहत पूर्व गवर्नर हर्ष बंसल द्वारा केएम गोयल पर लगाए एक आरोप के चलते पैदा हुई है । हर्ष बंसल ने डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डीनेटर के रूप में केएम गोयल पर डिस्ट्रिक्ट के हिसाब-किताब में हेराफेरी करने की आशंका व्यक्त करते हुए अकाउंट्स समय से न देने का आरोप लगाया है । हर्ष बंसल का कहना है कि केएम गोयल की इस हरकत पर उनकी तरफ से यदि उचित स्पष्टीकरण नहीं आया, तो वह इस मामले को आगे ले जायेंगे । केएम गोयल ने अधिकृत रूप से तो इस आरोप का जबाव नहीं दिया है, लेकिन अलग अलग मौकों पर कुछेक लोगों के बीच उन्होंने अपने आक्रामक तेवर दिखाए और कहा कि हर्ष बंसल को समय से अकाउंट्स लेने/पाने का इतना शौक है तो पहले राकेश त्रेहन और केएल खट्टर से अकाउंट्स माँगे, जो अभी तक नहीं मिले हैं । केएम गोयल की तरफ से यहाँ तक कहा गया कि हर्ष बंसल की हिम्मत केएल खट्टर से अकाउंट्स माँगने की नहीं होगी, जिनसे वह एक बार पिट चुके हैं । केएम गोयल की यह बात हर्ष बंसल और केएल खट्टर, दोनों के लिए चुनौती की तरह है । हर्ष बंसल भले ही एक बार केएल खट्टर से पिट चुके हैं, लेकिन वह इतने बेशर्म किस्म के व्यक्ति के रूप में देखे/पहचाने जाते हैं कि दोबारा भी पिटने के लिए तैयार हो जायेंगे । केएल खट्टर के लिए मुसीबत की बात यह है कि हर्ष बंसल यदि बेशर्मी पर सचमुच उतर ही आए तो उन्हें नाहक एक बार फिर फिजूल के विवाद और झगड़े में पड़ना पड़ेगा - और हो सकता है कि वह विवाद और झगड़ा खुद उनके लिए भी फजीहत का कारण बने, क्योंकि यदि अपने गवर्नर-काल के अकाउंट्स न देने का उन पर लगा केएम गोयल का आरोप सच है तो यह उनके लिए फजीहत का कारण तो बन ही जाएगा ।

Thursday, December 14, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री में हरदीप सरकारिया को सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद का उम्मीदवार चुनने के तरीके पर नाराजगी जाता रहे प्रवीन राजगढ़िया को 'समझाबुझा' कर मामला सचमुच सेटल कर लिया गया है, या पिक्चर अभी बाकी है ?

रोहतक । हरदीप सरकारिया को सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार चुनने के तरीके को लेकर बबाल करने वाले वरिष्ठ लायन प्रवीन राजगढ़िया अचानक से चुप्पी साध कर अब खुद ही बबाल का कारण बन गए हैं । उनकी चुप्पी को लेकर तरह तरह की बातें हो रही हैं, जिन्हें भड़काने का काम लीडरशिप की तरफ से आने वाली उन बातों ने भी किया है - जिनमें दावा किया गया है कि प्रवीन राजगढ़िया को समझा लिया गया है और मामला सेटल हो गया है । इन बातों से लोगों के बीच सवाल पैदा हुआ है कि प्रवीन राजगढ़िया को आखिर क्या समझाया गया है और मामला किस शर्त पर सेटल हुआ है ? लोगों का कहना/पूछना है कि प्रवीन राजगढ़िया और लीडरशिप के नेताओं के बीच आखिर क्या सौदा/समझौता हुआ है, यह बात तो पता चलना चाहिए ? प्रवीन राजगढ़िया के नजदीकियों ने यह तो बताया था कि हरदीप सरकारिया को सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार चुनने के तरीके पर प्रवीन राजगढ़िया द्वारा आपत्ति करने और नाराजगी दिखाने के बाद पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर केएल खट्टर ने प्रवीन राजगढ़िया को फोन किया था । उनके बीच क्या बात हुई, यह तो पता नहीं चल सका - लेकिन देखने में यह आया कि उसके बाद प्रवीन राजगढ़िया ने पूरी तरह चुप्पी साध ली । उनके चुप्पी साध लेने के साथ-साथ ही लीडरशिप की तरफ से सुनने को मिला कि प्रवीन राजगढ़िया को मना लिया गया है और मामला सेटल हो गया है । इससे लीडरशिप को निशाना बनाने वाले प्रवीन राजगढ़िया खुद लोगों के निशाने पर आ गए और उनके बीच सवाल उठे कि उन्होंने लीडरशिप से सौदेबाजी करने के लिए ही बबाल खड़ा किया था क्या ?
प्रवीन राजगढ़िया को लोगों की आलोचना का शिकार बनता देख उनके नजदीकियों ने कहा/बताया है कि वह पारिवारिक फंक्शन में शामिल होने के लिए बाहर गए हैं और वहाँ व्यस्त हैं, इसलिए उनकी तरफ से कुछ कहा/सुना नहीं जा पा रहा है; और इसलिए उनकी चुप्पी के कोई मनमाने अर्थ नहीं निकाले जाने चाहिए । नजदीकियों की तरफ से यह दावा भी किया गया है कि प्रवीन राजगढ़िया कोई छिप कर सौदेबाजी करने वाले व्यक्ति नहीं हैं, वह जो कुछ भी करेंगे सभी को बता कर और सभी को विश्वास में लेकर करेंगे । नजदीकियों ने यह भी बताया है कि केएल खट्टर से फोन पर उनकी जो बात हुई है, उसमें अभी यही तय हुआ है कि पारिवारिक फंक्शन से लौट कर उनकी लीडरशिप के नेताओं से रोहतक में मीटिंग होगी, जिसमें मामले पर विस्तृत विचार होगा । उल्लेखनीय है कि प्रवीन राजगढ़िया की मुख्य आपत्ति इस बात पर थी कि लीडरशिप के नाम पर पाँच लोग हरियाण के लायन सदस्यों की तरफ से फैसला नहीं ले सकते हैं, और सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार का फैसला हरियाणा फोरम की मीटिंग में होना चाहिए । दरअसल हरदीप सरकारिया को उम्मीदवार चुने जाने पर लोग भड़के इसीलिए क्योंकि हरदीप सरकारिया की लोगों के बीच कोई सक्रियता ही नहीं थी । मजे की बात यह रही कि हरदीप सरकारिया को चुनने के पहले भी उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स ने उन्हें सक्रिय करने तथा लोगों से मिल-जुल कर माहौल बनाने के लिए प्रेरित नहीं किया । इससे लोगों ने महसूस किया कि पूर्व गवर्नर्स ने मनमानी करते/दिखाते हुए एक ऐसा व्यक्ति उम्मीदवार के रूप में उनके सिर पर थोप दिया है, जो उन्हें तवज्जो देने की कोई जरूरत ही नहीं समझता है । प्रवीन राजगढ़िया ने लोगों की इसी भावना को अभिव्यक्त करते हुए लीडरशिप के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया ।
प्रवीन राजगढ़िया के मोर्चा खोलने के बाद लीडरशिप ने एक काम यह तो किया कि उन्होंने हरदीप सरकारिया को सक्रिय किया है, जिसके चलते हरदीप सरकारिया ने हरियाणा में लोगों से बात/मुलाकात करना शुरू किया है और वह दिल्ली के पूर्व गवर्नर्स से भी मिल गए हैं । इसी के साथ-साथ लीडरशिप की तरफ से यह कहना भी शुरू किया गया है कि उम्मीदवार का फैसला तो लीडरशिप को ही करना था, हरियाणा फोरम की मीटिंग में यह फैसला नहीं हो सकता है । प्रवीन राजगढ़िया तथा अन्य लोगों की हालाँकि माँग ही यह है कि उम्मीदवार का फैसला हरियाणा फोरम की मीटिंग में हो । हरदीप सरकारिया को उम्मीदवार चुनने वाले पूर्व गवर्नर्स भी जानते/समझते हैं कि हरियाणा फोरम की मीटिंग में यदि उम्मीदवार चुनने की बात हुई तो हरदीप सरकारिया कतई उम्मीदवार नहीं चुने जा सकेंगे । इसीलिए उनकी कोशिश है कि उम्मीदवार तो उन्होंने चुन लिया है, अब हरियाणा फोरम में उनके फैसले पर मोहर लगा दी जाए । समझा जाता है कि प्रवीन राजगढ़िया को इसी बात के लिए राजी करने का प्रयास किया जायेगा । हरदीप सरकारिया के समर्थक पूर्व गवर्नर्स को विश्वास है कि प्रवीण राजगढ़िया को बहला/फुसला कर और या अगली बार उम्मीदवार बनाने का लालच देकर चुप करा लिया गया, तो फिर हरियाणा में और कोई उनके फैसले का विरोध नहीं करेगा । समस्या की बात लेकिन यह है कि हरदीप सरकारिया के समर्थक पूर्व गवर्नर्स अगली बार की उम्मीदवारी के लिए पुनीत बंसल के साथ वायदा कर चुके हैं; इसलिए सार्वजनिक रूप से उनके लिए प्रवीन राजगढ़िया से अगली बार का वायदा कर पाना तो संभव नहीं होगा - यह काम गुपचुप रूप से ही होगा । गुपचुप रूप से किए वायदे पर प्रवीन राजगढ़िया कितना भरोसा करेंगे, यह एक अलग सवाल है ।
प्रवीन राजगढ़िया के नजदीकियों के अनुसार, रोहतक में प्रवीन राजगढ़िया की पूर्व गवर्नर्स के साथ जो मीटिंग होनी है - लोगों की नजर अब उसके नतीजे पर है । हरदीप सरकारिया को उम्मीदवार चुनने के तरीके पर प्रवीण राजगढ़िया ने जो आपत्ति और नाराजगी जाहिर की है तथा उम्मीदवार चुनने के लिए हरियाणा फोरम की मीटिंग बुलाने की जो माँग की हुई है - उसके पीछे उनका वास्तविक इरादा क्या है; क्या वह सचमुच हरियाणा के लायन सदस्यों की आवाज को सुनने की वकालत कर रहे हैं या अपने लिए कोई सौदेबाजी करने का मौका बना रहे हैं - यह जल्दी ही स्पष्ट हो जायेगा ।

Monday, December 4, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री में फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की उम्मीदवारी के लिए आरके अग्रवाल और आनंद दुआ के बीच चल रही होड़ में हालात बदलने के बाद भी असमंजसता अभी बनी हुई है

नई दिल्ली । सुरेश बिंदल द्वारा आरके अग्रवाल की उम्मीदवारी का झंडा उठा लेने तथा आनंद दुआ द्वारा अपनी उम्मीदवारी के लिए संपर्क अभियान शुरू कर देने से डिस्ट्रिक्ट में फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए गहमागहमी बढ़ भी गई है और थोड़ा उलझ भी गई है - इस उलझन में अपनी अलग अलख जलाए बैठे आरके शाह के लिए भी मौका बनता नजर आने लगा है । उल्लेखनीय है कि अभी तक फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की सर्वसम्मत उम्मीदवारी को लेकर दिल्ली में ऊपरी तौर पर तो अनिश्चितता नजर आ रही थी, लेकिन भीतर ही भीतर आरके अग्रवाल और आनंद दुआ के बीच होड़ भी छिड़ी हुई थी । आरके अग्रवाल का समर्थन करने वाले तो कई थे, लेकिन सुरेश बिंदल के विरोध के चलते उनके नाम पर पूर्ण सहमति बनने में दिक्कत आती दिख रही थी; आनंद दुआ के नाम पर विरोध करने वाला तो कोई नहीं था, लेकिन उनकी सक्रियता के अभाव में उनका नाम आगे बढ़ाने वाला - यानि उनकी जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं था । आनंद दुआ को एक आदर्श उम्मीदवार के रूप में तो देखा/पहचाना जा रहा था, लेकिन उन्हें व्यावहारिक उम्मीदवार के रूप में स्वीकार नहीं किया जा पा रहा था । इसका एक बड़ा कारण यह था कि वह खुद अपनी उम्मीदवारी को लेकर कोई उत्साह नहीं दिखा रहे थे । उनके नजदीकियों का कहना/बताना था कि आनंद दुआ उम्मीदवार तो बनना चाहते हैं, लेकिन वह किसी नेता से यह कहना नहीं चाहते हैं - क्योंकि वह जानते हैं कि वह यदि अपनी उम्मीदवारी के लिए पहल करेंगे और नेताओं से समर्थन मागेंगे, तो उम्मीदवार के रूप में उन्हें पैसे खर्च करने पड़ेंगे; वह लेकिन 'मुफ्त' में गवर्नर बनना चाहते हैं । इस चक्कर में कोई भी नेता आनंद दुआ की उम्मीदवारी का झंडा उठाने के लिए तैयार नहीं हुआ । आरके अग्रवाल और आनंद दुआ के बीच उलझे मामले को उलझा हुआ छोड़ कर नेताओं ने कोई और उम्मीदवार खोजने की कोशिश भी की, लेकिन जो मिला नहीं ।
इस बीच हालात ने पलटा खाया । आरके अग्रवाल की उम्मीदवारी का विरोध कर रहे सुरेश बिंदल ने अंततः मन बदला और आरके अग्रवाल की उम्मीदवारी का झंडा उठा लिया । इससे आरके अग्रवाल का पलड़ा भारी होता हुआ नजर आया, तो आनंद दुआ ने भी 'किसी से न कहने' की जिद छोड़ी और अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के लिए निकल पड़े । हालात बदलने के बाद भी नतीजा लेकिन अभी भी उलझन भरा ही है और नेताओं के लिए किसी भी नतीजे पर पहुँचना मुश्किल बना हुआ है । एक पूर्व गवर्नर का कहना है कि किसी उम्मीदवार पर सर्वसम्मति बनाने के लिए कोई पहल नहीं करना चाहता है । नेताओं की स्थिति की सच्चाई दरअसल इसी बात में छिपी हुई है । इस बात से लग रहा है कि नेताओं ने अपने अपने उम्मीदवार तो चुन लिए हैं, लेकिन वह अपने अपने उम्मीदवारों पर भरोसा नहीं कर रहे हैं  इसलिए वह अपने उम्मीदवार के साथ आगे नहीं बढ़ना चाहते हैं । असल में, आरके अग्रवाल और आनंद दुआ में से किसी ने भी यह संकेत नहीं दिए हैं कि उनके नाम पर नेताओं के बीच यदि सर्वसम्मति नहीं बनी - तो भी वह किसी एक खेमे के भरोसे ही उम्मीदवार बनने को तैयार हैं । इसलिए उनके समर्थक नेता उनके नाम पर ज्यादा आगे बढ़ने को तैयार नहीं हैं, और मामला जहाँ का तहाँ ही अटका पड़ा है । सुरेश बिंदल की चंद्र शेखर मेहता के साथ अच्छी बनती है; समझा जाता है कि चंद्र शेखर मेहता ने हरियाणा में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए हरदीप सरकारिया के नाम पर मोहर लगवाने से पहले सुरेश बिंदल सहित दिल्ली के दो-तीन अन्य नेताओं को विश्वास में ले लिया था - इससे एक संभावना यह बन रही है कि सुरेश बिंदल दिल्ली में फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए आरके अग्रवाल का नाम घोषित करवा लें । हालाँकि कइयों को इस बात पर शक भी है कि दिल्ली में सुरेश बिंदल की ऐसी स्थिति है कि वह अपनी बात मनवा लें, इसलिए शक यही है कि दिल्ली में फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए जो भी उम्मीदवार 'घोषित' होगा - वह वास्तव में एक खेमे का ही होगा, और दूसरे नेता तो उसे मजबूरी में ही समर्थन देंगे ।
इस स्थिति ने आरके शाह के लिए उम्मीदों के द्वार खोल दिए हैं । उल्लेखनीय है कि आरके शाह अकेले ऐसे उम्मीदवार हैं जो अपनी उम्मीदवारी के लिए डटे हुए हैं और उसके लिए समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं । समर्थन जुटाने की आरके शाह की कोशिशें हालाँकि अभी तक सफल नहीं हो सकी हैं, लेकिन जमीनी हालात उनके लिए अनुकूल बनते दिख रहे हैं । दरअसल हरियाणा में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए हरदीप सरकारिया का जिस मनमाने तरीके से चयन हुआ है, और जिसके चलते हरियाणा में लोग लीडरशिप के खिलाफ हो गए दिख रहे हैं - उसमें आरके शाह के लिए समर्थन बनने जैसे हालात छिपे नजर आ रहे हैं । हरियाणा में कई लोग लीडरशिप के नाम पर 'चार लोगों की मनमानी' के खिलाफ नाराजगी व्यक्त करते हुए सुने जा रहे हैं । दिल्ली में भी, फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए यदि 'सचमुच' सर्वसम्मति नहीं बनी, तो विरोधी नेता आरके शाह की उम्मीदवारी को समर्थन दे सकते हैं । आरके शाह के रवैये से यह तो तय ही माना जा रहा है कि फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए दिल्ली में दो उम्मीदवार तो होंगे ही, जिसके चलते हरियाणा की लीडरशिप पर दबाव होगा कि वह अपना ध्यान 'अपने' उम्मीदवार पर ही दे, और दिल्ली के झगड़े के पचड़े में न पड़े । यह स्थिति आरके शाह के अनुकूल बैठती है । स्थिति तो अनुकूल बैठी नजर आ रही है, लेकिन इस अनुकूल स्थिति को मैनेज करने तथा वोट में बदलने के लिए प्रेरित करने का काम आरके शाह कर पायेंगे या नहीं - यह सवाल जरूर लोगों को असमंजस में डाले हुए है । जाहिर है कि हालात साफ/स्पष्ट होने के लिए अभी थोड़ा और इंतज़ार करना पड़ेगा ।

Saturday, December 2, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री में पूर्व गवर्नर चंद्र शेखर मेहता की दिल्ली के लीडर्स के समर्थन के भरोसे सुरेश जिंदल और पुनीत बंसल का पत्ता कटवा कर हरदीप सरकारिया को सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद का उम्मीदवार बनवा लेने की कार्रवाई पर हरियाणा में नाराजगी और विरोध

सिरसा । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए हरदीप सरकारिया को उम्मीदवार घोषित करने के साथ ही हरियाणा लायंस फोरम में बिखराव और टकराव के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं । उल्लेखनीय है कि हरियाणा लायंस फोरम की मीटिंग में ही हरदीप सरकारिया को सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार चुना गया है, लेकिन इस फैसले के सार्वजनिक होने के साथ ही हरियाणा के लायंस सदस्यों की तरफ से न सिर्फ इस फैसले की आलोचना होने लगी है, बल्कि हरियाणा लायंस फोरम के सांगठनिक स्वरूप पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं । इस फैसले को लेकर सुरेश जिंदल और पुनीत बंसल के नजदीकियों व समर्थकों में गहरी नाराजगी है - और इनकी तरफ से हरदीप सरकारिया को उम्मीदवार बनाए जाने के फैसले को पक्षपातपूर्ण बताया जा रहा है । दिलचस्प नजारा यह देखने को मिल रहा है कि हरदीप सरकारिया के समर्थकों की तरफ से फैसले के विरोध में उठ रही आवाज़ों को दिल्ली के लायन नेताओं की शह और प्रेरणा के रूप में देखा/पहचाना और बताया जा रहा है । हरदीप सरकारिया के समर्थकों की तरफ से कहा/बताया जा रहा है कि दिल्ली के लायन लीडर्स हरियाणा में भी अपना दखल बनाए रखना चाहते हैं, और इसलिए वह नहीं चाहते हैं कि हरियाणा में लायंस सदस्यों के बीच एकता स्थापित हो - और इसीलिए वह हरदीप सरकारिया के नाम पर बनी एकता को तोड़ने की कोशिशों में जुट गए हैं । हालाँकि हरियाणा के ही कई नेताओं का मानना/कहना है कि दिल्ली के लायन लीडर्स का नाम लेकर हरदीप सरकारिया की उम्मीदवारी तय करने के मनमाने और पक्षपातपूर्ण फैसले को सही नहीं ठहराया जा सकता और हरियाणा की एकता के नाम पर इस फैसले को हरियाणा के लायंस सदस्यों के सिर जबर्दस्ती नहीं थोपा जा सकता है ।
उल्लेखनीय है कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए हरियाणा में सुरेश जिंदल और पुनीत बंसल के नाम चर्चा में थे । सुरेश जिंदल और उनके समर्थकों का तर्क था कि वह चूँकि एक बार चुनाव लड़ चुके हैं, इसलिए अब जब मौका आया है तब उन्हें उम्मीदवार होना चाहिए और पिछली बार जो चंद्रशेखर मेहता और केएल खट्टर जैसे पूर्व गवर्नर्स उन्हें सफलता नहीं दिलवा सके थे, उन्हें इस बार उनकी उम्मीदवारी की वकालत करना चाहिए । पुनीत बंसल पिछले दो-तीन वर्षों की अपनी निरंतर सक्रियता के भरोसे अपनी उम्मीदवारी का दावा ठोक रहे थे । उनका और उनके समर्थकों का कहना रहा कि डिस्ट्रिक्ट को इस समय ऐसे लीडर की जरूरत है, जिसका लोगों के बीच संपर्क और संलग्नता है -  इसलिए पुनीत बंसल ही उपयुक्त उम्मीदवार हो सकते हैं । इन दोनों की दावेदारी के बीच एक बात यह भी लोगों के बीच सुनी/कही जा रही थी कि पूर्व गवर्नर चंद्र शेखर मेहता किसी भी कीमत पर पुनीत बंसल को तो उम्मीदवार नहीं बनने देंगे । इस बात से सुरेश जिंदल और उनके समर्थकों को अपनी दाल गलती हुई दिख रही थी । लेकिन चंद्र शेखर मेहता ने अचानक से हरदीप सरकारिया का नाम आगे बढ़ा कर सुरेश जिंदल की दाल को गलने से पहले ही बिखेर देने का काम कर दिया । हरदीप सरकारिया का नाम आगे बढ़ा कर चंद्र शेखर मेहता ने पुनीत बंसल का शिकार करने के लिए घेराबंदी की । पुनीत बंसल की यह घेराबंदी करने के बाद भी उन्हें डर था कि दिल्ली के लायन लीडर्स पुनीत बंसल को शह और समर्थन देकर यदि उम्मीदवार बना/बनवा देते हैं, तब फिर उनके लिए मुसीबत हो जाएगी । वह भी मानते/जानते हैं कि चुनाव की नौबत यदि आई तो पुनीत बंसल और या सुरेश जिंदल के सामने हरदीप सरकारिया का टिक पाना मुश्किल क्या असंभव ही होगा ।
ऐसे में, हरदीप सरकारिया के जरिए पुनीत बंसल को 'ठिकाने' लगाने के लिए चंद्र शेखर मेहता को दिल्ली के लीडर्स के समर्थन की जरूरत थी । वह जान/समझ रहे थे कि दिल्ली के लीडर्स के समर्थन के बिना पुनीत बंसल या सुरेश जिंदल के लिए उम्मीदवार बनना असंभव होगा । चंद्र शेखर मेहता ने दिल्ली के लीडर्स का मूड भाँपने की जो कोशिश की, उसमें उन्हें यह जान/देख कर राहत मिली कि दिल्ली के हर प्रभावी लीडर ने उन्हें आश्वस्त किया कि हरियाणा को लेकर वह जो फैसला करेंगे, वह उन्हें मान्य होगा । दिल्ली के लायन लीडर्स से आश्वासन मिलने के बाद चंद्र शेखर मेहता निश्चिन्त हो गए और फिर उन्होंने सुरेश जिंदल को इग्नोर करके तथा पुनीत बंसल को फुसला करके हरदीप सरकारिया की उम्मीदवारी के नाम पर मोहर लगवा ली । हरियाणा लायंस फोरम के फैसले का दिलचस्प पक्ष यह है कि उसे फैसला अभी होने वाले सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए करना था, लेकिन उसने हरियाणा से अगले उम्मीदवार बारे में भी फैसला कर डाला । चंद्र शेखर मेहता ने पुनीत बंसल को फुसलाने के लिए उनसे वायदा कर दिया है कि हरियाणा का अगला नंबर जब आएगा, तब वह उनकी उम्मीदवारी को समर्थन देंगे - और इस वायदे के आधार पर हरियाणा लायंस फोरम ने अपने अगले उम्मीदवार के रूप में पुनीत बंसल के नाम की घोषणा कर दी है । यह कुछ कुछ ऐसा ही मामला है जैसे रोते बच्चे को चुप करवाने के लिए उसे झुनझुना पकड़ा दिया जाता है । पुनीत बंसल की भी मजबूरी है कि अगले उम्मीदवार रूपी झुनझुने को लेकर वह शांत हो जाएँ ।
हरदीप सरकारिया को उम्मीदवारी चुनने/बनाने के फैसले पर पुनीत बंसल और सुरेश जिंदल के समर्थकों व नजदीकियों के बीच तुरंत से जो नाराजगी देखने/सुनने को मिली है, वह हरदीप सरकारिया की उम्मीदवारी के लिए अभी तो कोई संकट बनती नहीं दिख रही है - दरअसल इसीलिए हरदीप सरकारिया के समर्थकों ने तुरंत से जबावी कार्रवाई करते हुए दिल्ली के लायन लीडर्स को निशाने पर ले लिया है । इसके जरिए उनकी कोशिश वास्तव में दिल्ली के लायन लीडर्स को हरियाणा से दूर करने/रखने की है । अपनी इस कोशिश में अभी वह सफल भी नजर आ रहे हैं । दिल्ली के लायन लीडर्स ने हरियाणा लायंस फोरम के फैसले का स्वागत ही किया है । लेकिन डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के खिलाड़ियों का मानना/कहना है कि यह 'स्वागत' तभी तक है, जब तक कि फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए दिल्ली वाले एक उम्मीदवार का चयन नहीं कर लेते हैं । राजनीति जानने/समझने वाले लोगों को लगता है कि दिल्ली में भी यदि एकमत से किसी उम्मीदवार के बारे में फैसला हो गया, तब तो बबाल नहीं होगा और हरदीप सरकारिया को कोई चुनौती नहीं मिलेगी । लेकिन यदि दिल्ली में दो उम्मीदवार हो गए, जिनके पीछे दो खेमे बने - तब हरियाणा की राजनीति में भी पलटी लगेगी । क्योंकि तब चंद्र शेखर मेहता के सामने किसी एक उम्मीदवार और उसके खेमे को समर्थन देने की मजबूरी पैदा होगी, और तब दूसरा खेमा हरियाणा में किसी दूसरे उम्मीदवार को शह और समर्थन दे देगा । हरियाणा में भी और दिल्ली में भी हर कोई जानता/समझता है कि हरियाणा में यदि दो उम्मीदवार हुए और चुनाव की नौबत आई तो हरदीप सरकारिया के लिए मामला खासा मुश्किल हो जाएगा । वास्तव में इसीलिए हरियाणा लायंस फोरम में उम्मीदवारी के लिए हरी झंडी मिल जाने के बाद भी हरदीप सरकारिया के लिए रास्ता अभी भी पूरी तरह क्लियर नहीं हुआ है ।