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Monday, December 9, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 के निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुभाष जैन को इंदौर इंस्टीट्यूट में मिले पाँच अवॉर्ड उनके साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट का सम्मान बढ़ाने वाले साबित हुए हैं और यह तथ्य उन्हें पूर्व गवर्नर्स के बीच विशेष पहचान देता/दिलाता है

गाजियाबाद । निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (आईपीडीजी) सुभाष जैन के कार्यकाल की उपलब्धियों व खूबियों को विभिन्न मौकों पर डिस्ट्रिक्ट के लोग तो याद करते ही रहते हैं, इंदौर में संपन्न हुए रोटरी जोन इंस्टीट्यूट में भी रोटरी इंटरनेशनल के बड़े पदाधिकारियों व नेताओं के बीच उनके कामों तथा उनकी उपलब्धियों का विशेष रूप से गुणगान हुआ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुभाष जैन की पाँच उपलब्धियों को जोन में सर्वश्रेष्ठ उपलब्धियों के रूप में रेखांकित किया गया और उन्हें अवॉर्ड के लिए चुना गया । सुभाष जैन के कामों तथा उनकी उपलब्धियों के चलते डिस्ट्रिक्ट 3012 जोन में अकेला डिस्ट्रिक्ट बना/रहा जिसे पाँच महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में अवॉर्ड मिला । सुभाष जैन डिस्ट्रिक्ट के पहले और अकेले पूर्व गवर्नर हैं, जिनके कार्यकाल को इतने अवॉर्ड एकसाथ मिले हैं । किसी भी डिस्ट्रिक्ट और उसके सदस्यों के लिए वास्तव में यह गर्व की बात होती है कि उसके गवर्नर को रोटरी के एक बड़े आयोजन में भूतपूर्व, मौजूदा व भावी पदाधिकारियों की मौजूदगी में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट उसके कार्यों के लिए सम्मानित करे और अवॉर्ड दे । इंदौर इंस्टीट्यूट में चार जोन - जोन 4, जोन 5, जोन 6 व जोन 7 - के पिछले/अगले पदाधिकारियों तथा बड़े पदाधिकारियों व नेताओं की मौजूदगी में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट मार्क डेनियल मलोनी द्वारा सुभाष जैन को अवॉर्ड देने का दृश्य डिस्ट्रिक्ट 3012 के सदस्यों के लिए निश्चित ही एक अविस्मरणीय दृश्य है ।
इससे भी 'बड़ा' और अविस्मरणीय दृश्य वह है, जिसमें अपने कार्यकाल को मिले पाँचों अवॉर्ड्स सुभाष जैन इंस्टीट्यूट के आयोजन स्थल पर अपनी कोर टीम के सदस्यों के साथ लिए हुए हैं । अपनी कोर टीम के सदस्यों को किसी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर द्वारा रोटरी के एक बड़े आयोजन में इस तरह का सम्मान देना भी रोटरी जगत की शायद पहली घटना होगी । सुभाष जैन का अपनी कोर टीम के सदस्यों के साथ जैसा संबंध है, और जो बार-बार दिखता भी रहता है - वह अपने आप में अनोखी बात है । किसी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का अपनी कोर टीम के सदस्यों के साथ ऐसा आत्मीय, गहरा, लगाव व संलग्नताभरा संबंध इससे पहले शायद ही कभी देखा गया हो । यहाँ तो ऐसे गवर्नर देखने को मिलते हैं, जिनकी कोर टीम के सदस्य उन्हें दो/तीन महीने भी नहीं झेल पाते हैं और जिनके व्यवहार व रवैये से तंग आकर उनकी कोर टीम के सदस्य इस्तीफा देकर उनसे अलग ही हो जाते हैं । दरअसल डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुभाष जैन यदि ऐसे उल्लेखनीय काम कर सकें हैं, जो डिस्ट्रिक्ट के सदस्यों की यादों में भी बस गए हैं और जो सुभाष जैन को जोन स्तर पर अवॉर्ड भी दिलवा सकें हैं - तो उसका एक कारण उनकी कोर टीम के सदस्यों की तरफ से उन्हें मिला सहयोग भी रहा है । ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती है - सुभाष जैन को यदि अपनी कोर टीम के सदस्यों से अनुकरणीय सहयोग मिला, तो इसलिए भी कि सुभाष जैन ने उनके साथ पारदर्शिता रखी और उन्हें उचित सम्मान दिया ।
 डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुभाष जैन द्वारा किए गए कामों ने यदि डिस्ट्रिक्ट के सदस्यों से लेकर रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों तक को प्रभावित किया है, तो वास्तव में यह उनकी कार्यप्रणाली का भी नतीजा है । दरअसल अपनी कार्यप्रणाली के कारण ही सुभाष जैन रोटरी के मुख्य लक्ष्यों व उद्देश्यों पर अपना ध्यान केंद्रित कर सके और उल्लेखनीय रिकॉर्ड बना सके । रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों ने जोन में श्रेष्ठ काम करने के लिए तो सुभाष जैन को चुना ही, साथ ही इस बात के लिए भी सुभाष जैन की प्रशंसा की कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुभाष जैन ने रोटरी के बुनियादी कामों को प्राथमिकता दी । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुभाष जैन ने पोलियो उन्मूलन के लिए रोटरी फाउंडेशन में धन जुटाने के, प्रिंट मीडिया में रोटरी की पब्लिक इमेज को लेकर, सदस्यता वृद्धि के साथ-साथ महिला सदस्यता वृद्धि के लिए जो काम किए और रिकॉर्ड बनाए - उसके लिए उन्हें अवॉर्ड के लिए चुना गया । सदस्यता वृद्धि में पर्सेंटेज की गणना में भी सुभाष जैन की उपलब्धी उल्लेखनीय पाई गई, और पाँच अवॉर्ड में से उनके एक अवॉर्ड का कारण बनी । सुभाष जैन को मिले पाँच अवॉर्ड उनका खुद का मान बढ़ाने के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट 3012 का सम्मान बढ़ाने वाले भी साबित हुए हैं और यह तथ्य सुभाष जैन को पूर्व गवर्नर्स के बीच विशेष पहचान देते/दिलाते हैं । 

Friday, June 21, 2019

रोटरी इंटरनेशनल के पूर्व प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन से संबंध 'सुधारने' की तमाम कोशिशों के बावजूद इंदौर इंस्टीट्यूट में बड़ी भूमिका न मिलने से निराश और परेशान डिस्ट्रिक्ट 3011 के पूर्व गवर्नर विनोद बंसल को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की अपनी तैयारियों पर पानी फिरता नजर आ रहा है

नई दिल्ली । इंदौर में 3 से 8 दिसंबर के बीच हो रहे रोटरी जोन इंस्टीट्यूट में बड़ी भूमिका न मिल पाने के कारण विनोद बंसल इंस्टीट्यूट के कन्वेनर भरत पांड्या और चेयरमैन टीएन सुब्रमणियन से खासे नाराज हैं । विनोद बंसल के लिए झटके वाली बात यह है कि इस मामले में उन्हें इंस्टीट्यूट के चीफ काउंसलर कमल सांघवी से मदद मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कमल सांघवी भी उनकी कोई मदद नहीं कर रहे हैं । इंदौर इंस्टीट्यूट की कमेटियों में हालाँकि उन लोगों की ही भरमार है, जो राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू, अशोक महाजन व केआर रवींद्रन के 'खेमे' में देखे/पहचाने जाते हैं और जिन्होंने भरत पांड्या को इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव जितवाने में मदद की थी; इसलिए विनोद बंसल को इंदौर इंस्टीट्यूट में कोई तवज्जो न मिलना कोई 'राजनीतिक हैरानी' की बात नहीं है, लेकिन फिर भी विनोद बंसल परेशान हैं - तो इसका कारण यह है कि पिछले कुछेक महीनों में उन्होंने उक्त खेमे के साथ नजदीकी बनाने की बहुतेरी कोशिशें की हैं, और फिर भी उन्हें अपनी कोशिशों का फल मिलता हुआ नहीं दिख रहा है । उल्लेखनीय है कि विनोद बंसल को सुशील गुप्ता वाले खेमे के सदस्य के रूप में देखा/पहचाना जाता है; और इसी नाते इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के पिछले चुनाव में उन्हें अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थन में देखा/पहचाना गया था; बाद में हालाँकि उनकी तरफ से भरत पांड्या और उनके नजदीकियों को बताने/समझाने के काफी प्रयास हुए कि वह तो चुनाव में तटस्थ थे और उन्होंने अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी के पक्ष में कोई काम नहीं किया था । इंदौर इंस्टीट्यूट में लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद विनोद बंसल तवज्जो पाने में विफल रहे हैं, उससे लगता है कि उनकी समझाइस भरत पांड्या को समझ में आई नहीं है ।  
विनोद बंसल को दरअसल इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की अपनी उम्मीदवारी के संबंध में इंदौर इंस्टीट्यूट में बड़ी भूमिका निभाना जरूरी लगता है । यह इसलिए क्योंकि पिछले दिनों उन्होंने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स इलेक्ट व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स नॉमिनी के साथ साथ प्रमुख रोटेरियंस के साथ तार जोड़ने का काम खासी प्रमुखता के साथ किया है; उन्हें लगता है कि उनका यह काम सचमुच में तब प्रभावी बन सकेगा, जब यह लोग इंदौर इंस्टीट्यूट में उन्हें कोई बड़ी भूमिका निभाते हुए देखेंगे; ऐसे में उन्हें डर है कि जब ऐसा नहीं होगा, तो उनके सारे किये-धरे पर पानी ही फिर जाएगा । लेकिन इंदौर इंस्टीट्यूट के कन्वेनर भरत पांड्या और चेयरमैन टीएन सुब्रमणियन उन्हें कोई भूमिका निभाने का मौका देने को तैयार ही नहीं हो रहे हैं । विनोद बंसल को अब यह भी लगने लगा है कि भरत पांड्या और टीएन सुब्रमणियन यह व्यवहार खेमे के बड़े नेताओं के इशारे पर ही कर रहे हैं । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के संदर्भ में विनोद बंसल के लिए यह बात और भी ज्यादा झटके वाली है । 
दरअसल विनोद बंसल देखे/पहचाने भले ही सुशील गुप्ता वाले खेमे में हैं, और सुशील गुप्ता के साथ उनके नजदीक के संबंध भी रहे - लेकिन सुशील गुप्ता खेमे के समर्थन के भरोसे इंटरनेशनल डायरेक्टर बन पाने का उन्हें भरोसा नहीं हो पाया । सुशील गुप्ता वाले खेमे में अशोक गुप्ता और रंजन ढींगरा का पलड़ा उनसे भारी है । कई मौकों पर सुशील गुप्ता उन्हें झटका देते हुए अशोक गुप्ता और रंजन ढींगरा को आगे बढ़ाते हुए नजर आए । यह देखने के बाद विनोद बंसल ने दूसरे खेमे के नेताओं के साथ पींगें बढ़ाना शुरू किया । कुछेक लोगों को लगता है और उनका कहना है कि विनोद बंसल ने पहले से ही दूसरे खेमे के नेताओं के साथ संबंध जोड़ने/बनाने शुरू कर दिए थे, और इस बात को देखते/समझते हुए ही सुशील गुप्ता के यहाँ उनकी भूमिका संदेहास्पद हो गई थी और इस कारण सुशील गुप्ता वाले खेमे में उनकी वैसी जगह नहीं बन पाई जैसी अशोक गुप्ता और या रंजन ढींगरा की है । विनोद बंसल के लिए लगता है कि बदकिस्मती की बात यह रही है कि वह दूसरे खेमे के लोगों के बीच भी अपनी विश्वसनीयता नहीं बना सके हैं । उल्लेखनीय है कि पिछले काफी समय से विनोद बंसल पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन के साथ नजदीकी बनाने और 'दिखाने' की खूब कोशिशें करते आ रहे हैं; अपने डिस्ट्रिक्ट में उन्होंने केआर रवींद्रन का बड़े जोरशोर से एक कार्यक्रम भी करवाया ।  विनोद बंसल को उम्मीद रही कि केआर रवींद्रन से नजदीकी बना और 'दिखा' कर वह  उनके वाले खेमे के नेताओं और 'सदस्यों' का सहयोग/समर्थन पा लेंगे; लेकिन इंदौर इंस्टीट्यूट में बड़ी भूमिका पाने की उनकी कोशिशों को जो झटका लगा है, उससे इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के संदर्भ में उन्हें अपनी उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है ।

Monday, April 8, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3054 में बूढ़ों, बीमारों, गरीबों और अनपढ़ों की मदद के नाम पर ली गई ग्लोबल ग्रांट की रकम को हड़पने के मामले में रोटरी फाउंडेशन को गच्चा देने की पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल अग्रवाल की कोशिशों को इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या की मदद मिलेगी क्या ?

जयपुर । डिस्ट्रिक्ट ग्रांट के हड़पे गए करीब 20 लाख रुपए वापस करने के लिए रोटरी फाउंडेशन की तरफ से मिली समय-सीमा को पूरा होने में मुश्किल से दो दिन बचे हैं, लेकिन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल अग्रवाल पैसा वापस करते हुए 'लग' नहीं रहे हैं । रोटरी फाउंडेशन को गच्चा देने की अनिल अग्रवाल की कोशिश ने इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या को खासी मुश्किल में डाल दिया है । उल्लेखनीय है कि बूढ़ों, बीमारों, गरीबों और अनपढ़ों की मदद के नाम पर ली गई ग्लोबल ग्रांट की करीब 20 लाख रुपए की रकम को हड़पने के मामले में रोटरी इंटरनेशनल ने यह अनोखा फैसला लिया है कि घपले के किस्से के 'साइड हीरोज' को तो सजा दे दी गई है, लेकिन किस्से के मुख्य 'हीरो' अनिल अग्रवाल को बचने का मौका दिया गया । अनिल अग्रवाल के नजदीकियों का ही कहना/बताना रहा है कि बचने का यह मौका उन्हें भरत पांड्या की 'कोशिशों' से ही मिला है । रोटरी फाउंडेशन की तरफ से अनिल अग्रवाल को बचने का मौका मिला, तो ऐसा लगा कि अनिल अग्रवाल घपलेबाजी की रकम वापस करके अपने ऊपर लगे दाग को धोने/मिटाने की कोशिश करेंगे; उन्होंने दावे/वायदे भी किए कि वह चार/पाँच किस्तों में उक्त रकम वापस कर रहे हैं - लेकिन रोटरी फाउंडेशन से मिली समय-सीमा में वह इकन्नी भी जमा करने की कोशिश करते नहीं नजर आए हैं । इससे लग रहा है कि डिस्ट्रिक्ट ग्रांट के हड़पे गए करीब 20 लाख रुपए वापस करने के मामले में अनिल अग्रवाल रोटरी फाउंडेशन को धोखा दे रहे हैं । ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि भरत पांड्या आगे भी उन्हें 'सजा' से बचा पायेंगे और/या उनकी मदद से हाथ खींच लेंगे ।
मामला अनिल अग्रवाल के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर-काल - वर्ष 2013-14 में मंजूर हुई डिस्ट्रिक्ट स्पोंसर्ड ग्लोबल ग्रांट (नंबर 1420550) का है, जिसके तहत 32169 अमेरिकी डॉलर की रकम डिस्ट्रिक्ट अकाउंट में आई । इस रकम को एक ओल्ड ऐज होम, एक कम्प्यूटर एजुकेशन सेंटर, एक टेलरिंग ट्रेनिंग सेंटर, एक प्रौढ़ शिक्षा केंद्र तथा प्राकृतिक चिकित्सा सुविधाओं से परिपूर्ण एक आयुर्वेदिक क्लीनिक खोलने में खर्च होना था; लेकिन इसमें बंदरबाँट हो गई और आरोपों के अनुसार यह कुछेक लोगों की जेबों में चली गई । रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों की पकड़ में मामला आया, और उन्होंने अनिल अग्रवाल से जबाव-तलब किया तो अनिल अग्रवाल ने यह तर्क देते हुए अपने आपको बचाने की कोशिश की कि आरोपित ग्रांट वास्तव में क्लब ग्रांट है, इसलिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उनका उससे कोई लेनादेना नहीं है । हालाँकि तथ्य बताते हैं कि रोटरी फाउंडेशन को उक्त ग्रांट के लिए आवेदन डिस्ट्रिक्ट ग्रांट के नाम से दिया गया था; स्वीकृत रकम डिस्ट्रिक्ट अकाउंट में आई थी और जो अनिल अग्रवाल के हस्ताक्षर से ही अकाउंट से ली जा सकती थी और ली गई - और 'बँटी' । रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों के सामने मामले से अपने आपको बचाने की अनिल अग्रवाल की चालबाजियाँ काम नहीं आईं और उन्होंने अनिल अग्रवाल को जिम्मेदार ठहराते हुए ग्रांट की पूरी रकम रोटरी फाउंडेशन को वापस करने के लिए कहा । रोटरी फाउंडेशन की सिफारिश पर रोटरी इंटरनेशनल ने उक्त घपलेबाजी के मामले में डिस्ट्रिक्ट के दो क्लब्स को ग्रांट्स के लिए प्रतिबंधित कर देने का फैसला किया है; और साथ ही उनके दो पूर्व प्रेसीडेंट्स तथा एक वरिष्ठ रोटेरियंस को रोटरी में किसी भी अवॉर्ड तथा पोजीशन से प्रतिबंधित कर दिया गया है । रोटरी इंटरनेशनल की इस कार्रवाई से घबराए और परेशान हुए अनिल अग्रवाल ने इसके बाद दूसरा नाटक शुरू कर दिया ।
अनिल अग्रवाल ने रोटरी फाउंडेशन को विश्वास दिलाया कि वह 31 मार्च तक चार/पाँच किस्तों में उक्त रकम वापस कर देंगे । रोटरी फाउंडेशन ने उन्हें 10 अप्रैल तक पैसा जमा करा कर मामला क्लियर करने की समय-सीमा तय कर दी । अनिल अग्रवाल ने इस बीच तमाशेबाजी तो खूब की, जिसके तहत उन्होंने डिस्ट्रिक्ट के विभिन्न पदाधिकारियों को समय समय पर मेल लिखी कि मैं आपको चेक देने कब आ जाऊं - हर किसी ने उन्हें जबाव दिया कि उन्हें चेक किसी को देना नहीं है बल्कि संबंधित एकाउंट में जमा करवाना है, जिससे कि मामला सुलटे । रोटरी फाउंडेशन द्वारा दी गई समय सीमा समाप्त होने में अभी जब दो कार्यदिवस बचे हैं, अनिल अग्रवाल ने लेकिन एक किस्त का चेक भी संबंधित एकाउंट में जमा नहीं करवाया है । इससे लग रहा है कि रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों द्वारा मिली रियायत का फायदा उठाते हुए अनिल अग्रवाल ने मामले को उलझाने की ही कोशिश की है, और पैसा वापस/जमा करने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है । अनिल अग्रवाल की इस हरकत ने इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या के सामने गंभीर समस्या खड़ी कर दी है । भरत पांड्या ने अनिल अग्रवाल को इंदौर में होने वाली रोटरी जोन इंस्टीट्यूट में वीआईपी हॉस्पिटिलिटी कमेटी का चेयरमैन बनाया हुआ है; इंस्टीट्यूट में लेकिन लोग जब पूछेंगे कि रोटरी फाउंडेशन के साथ 'ठगी' करने वाले को उक्त कमेटी का चेयरमैन क्यों बनाया गया है - तो भरत पांड्या के लिए जबाव देना मुश्किल तो होगा ही । अनिल अग्रवाल के नजदीकियों को ही डर है कि भरत पांड्या ने अभी तक तो अनिल अग्रवाल को बचाया है; लेकिन पैसा वापस करने के मामले में अनिल अग्रवाल द्वारा की गई तमाशेबाजी से पैदा हुई स्थिति के चलते उनके लिए आगे अनिल अग्रवाल का बचाव कर पाना मुश्किल होगा । अनिल अग्रवाल हालाँकि अपने नजदीकियों को आश्वस्त कर रहे हैं कि रोटरी फाउंडेशन की तमाम कार्रवाई के बावजूद जैसे अभी तक उनका कुछ नहीं हुआ है, वैसे ही आगे भी उनका कुछ नहीं होगा । 

Tuesday, October 16, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने जा रहे भरत पांड्या द्वारा अगले रोटरी वर्ष में होने वाले इंदौर इंस्टीट्यूट के पदाधिकारियों की सूची डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल अग्रवाल की उम्मीदों व अपेक्षाओं का गला घोटती सी दिख रही है

जयपुर । अगले रोटरी वर्ष में इंदौर में होने वाले रोटरी जोन इंस्टीट्यूट के लिए भरत पांड्या द्वारा घोषित की गई पदाधिकारियों की सूची में नाम न देख कर डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल अग्रवाल को जोर का झटका लगा है, और इस झटके ने अनिल अग्रवाल और उनके साथियों को तो निराश किया ही है - साथ ही अन्य कई लोगों को हैरान भी किया है । दरअसल अनिल अग्रवाल ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में भरत पांड्या की जैसी मदद की थी, उसके चलते अनिल अग्रवाल को ही नहीं - बल्कि अन्य कई लोगों को पूरी/पक्की उम्मीद थी कि इंटरनेशनल डायरेक्टर के रूप में भरत पांड्या जब भी पदों की बंदरबाँट करेंगे - अनिल अग्रवाल का नंबर अवश्य ही लगेगा । चेन्नई इंस्टीट्यूट में भरत पांड्या ने लेकिन जब इंदौर में होने वाली अगली इंस्टीट्यूट के लिए प्रमुख पदों की घोषणा की, तो घोषणा को सुनने वालों को अनिल अग्रवाल का नाम न लिए जाने पर हैरानी हुई । चेन्नई इंस्टीट्यूट में अनुपस्थित रहे अनिल अग्रवाल के नजदीकियों से बाद में सुनने को मिला कि भरत पांड्या के इस 'व्यवहार' से अनिल अग्रवाल खुद भी बहुत आहत महसूस कर रहे हैं । हालाँकि अनिल अग्रवाल ने अपने नजदीकियों के बीच यह कहते/बताते हुए अपना हौंसला और अपनी उम्मीद भी बनाये रखी/दिखाई कि भरत पांड्या ने स्वयं कहा है कि वह अभी चेन्नई इंस्टीट्यूट में मौजूद लोगों के नामों की ही घोषणा कर रहे हैं, इसलिए उनका नाम अभी घोषित नहीं हुआ है । अनिल अग्रवाल ने उम्मीद जताई है कि इंदौर इंस्टीट्यूट के लिए भरत पांड्या जब अपनी पूरी टीम की घोषणा करेंगे, तो टीम में उनका नाम अवश्य ही होगा । 
अनिल अग्रवाल के नजदीकियों के लिए, भरत पांड्या की टीम में अनिल अग्रवाल का नाम होने या न होने की बात का रोमांच लेकिन अब खत्म हो गया है । उनका कहना है कि महत्त्वपूर्ण पद तो बँट गए हैं, अब तो बस टीम में खुरचन वाले पद ही बचे हैं - जिनका मिलना या न मिलना एक बराबर ही है । भरत पांड्या ने इंदौर इंस्टीट्यूट के पदाधिकारियों की सूची में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में अपने मददगार रहे लोगों को जिस दिल-खोल तरीके से उपकृत किया है, उसे देखते हुए अनिल अग्रवाल को उक्त सूची में नाम न होने का झटका कुछ ज्यादा ही जोर से लग गया 'सुना' जा रहा है । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के जिन सदस्यों ने भरत पांड्या की उम्मीदवारी का समर्थन किया था, उन सभी को भरत पांड्या ने इंदौर इंस्टीट्यूट की टीम में प्रमुख पदों से सुसज्जित कर दिया है । इंस्टीट्यूट के चेयरमैन और सेक्रेटरी जैसे महत्त्वपूर्ण पद तक उन्होंने चुनाव में मदद करने के 'गणित' के आधार पर बाँट दिए हैं । अनिल अग्रवाल को वास्तव में इसी बात से झटका लगा है, और अन्य कई लोगों को हैरानी हुई है । इनको लगता है कि मदद करने के 'गणित' के आधार पर ही भरत पांड्या ने जब पदों की बंदरबाँट की है, तब तो अनिल अग्रवाल को महत्त्वपूर्ण पद अवश्य ही मिलना चाहिए था । वास्तव में, इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में अनिल अग्रवाल ने भरत पांड्या की जैसी मदद की थी, वैसी मदद भरत पांड्या को किसी और से मिल ही नहीं सकती थी । कई लोगों का मानना और कहना है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में चेलैंजिंग उम्मीदवार अशोक गुप्ता के डिस्ट्रिक्ट में होते हुए भी अनिल अग्रवाल ने जिस हिम्मत के साथ भरत पांड्या की उम्मीदवारी का झंडा उठाया हुआ था - उसके लिए वह भरत पांड्या से एक अच्छे 'अवॉर्ड' का हक रखते हैं, लेकिन भरत पांड्या ने लगता है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की कुर्सी पर बैठने से पहले ही अनिल अग्रवाल के उपकार को भुला दिया है ।
भरत पांड्या के नजदीकियों का कहना लेकिन यह है कि भरत पांड्या की नजर में अनिल अग्रवाल की मदद वास्तव में कोई मदद थी ही नहीं - वह तो बस अशोक गुप्ता के प्रति अपनी खुन्नस निकालने के लिए उनकी उम्मीदवारी का झंडा उठाये हुए थे । भरत पांड्या के समर्थक नेताओं का भी मानना/कहना रहा है कि अनिल अग्रवाल अपने डिस्ट्रिक्ट की राजनीति के चलते अशोक गुप्ता का विरोध करने के अभियान पर थे - न कि भरत पांड्या की उम्मीदवारी का समर्थन व सहयोग कर रहे थे; और इसीलिए भरत पांड्या को उनसे वोटों का कोई सहयोग नहीं मिला । भरत पांड्या के लोगों का तो बल्कि यहाँ तक कहना है कि भरत पांड्या की उम्मीदवारी के समर्थन की बात कहते/करते हुए अनिल अग्रवाल कई बार अशोक गुप्ता को आश्वस्त करते हुए भी सुने/देखे गए कि मैं तो आपके ही साथ हूँ, और लोग झूठे ही अफवाह उड़ा रहे हैं कि मैं आपका विरोध कर रहा हूँ । दरअसल इस तरह के नजारों को देख कर ही भरत पांड्या के खेमे में अनिल अग्रवाल की भूमिका के प्रति संदेह पैदा हो गया था और उन्हें भरोसे के साथी के रूप में स्वीकार किए जाने से बचा गया था । किसी भी चुनाव में उम्मीदवारों के समर्थकों और विरोधियों की एक 'श्रेणी' स्वतः बन जाती है, और उसके बनने को व्यापक स्तर पर 'स्वीकार' भी कर लिया जाता है - लेकिन जोन चार में हुए रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल अग्रवाल की भूमिका ने एक अलग ही 'श्रेणी' बनाई, जिसके चलते वह किसी भी तरफ 'स्वीकार' नहीं हुए । कुछेक लोगों का यह भी मानना और कहना है कि भरत पांड्या यदि अनिल अग्रवाल को ज्यादा तवज्जो देते हैं, तो लोगों के बीच यह समझा जायेगा कि वह अशोक गुप्ता को नीचा दिखाने और उन्हें चिढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं; भरत पांड्या अपने समर्थकों को उपकृत करने का काम तो खुल कर करना चाहते हैं, लेकिन विरोधी रहे लोगों से सीधे-सीधे पंगा लेने से भी बचने का प्रयास कर रहे हैं - ताकि उनकी डायरेक्टरी में कोई बखेड़ा खड़ा न हो । भरत पांड्या की यह 'सावधानी' अनिल अग्रवाल की उम्मीदों व अपेक्षाओं का गला घोटती सी दिख रही है । 

Sunday, August 19, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर इलेक्ट भरत पांड्या खुद को टॉर्चबियरर कहने के बावजूद इंदौर में अगले वर्ष होने वाली अपनी इंस्टीट्यूट के लिए तय किए गए चेयरमैन व सेक्रेटरी के नामों पर रोशनी डालने से आखिर बच क्यों रहे हैं ?

मुंबई । इंटरनेशनल डायरेक्टर इलेक्ट भरत पांड्या ने रोटरी इंस्टीट्यूट 2019 के इंदौर में होने की घोषणा तो कर दी है, लेकिन इंस्टीट्यूट के चेयरमैन व सेक्रेटरी पद को लेकर सस्पेंस बनाए हुए हैं । कोचीन में अभी हाल ही में संपन्न हुई डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स इलेक्ट मीटिंग में भरत पांड्या ने अपने डायरेक्टर-वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के साथ अन्य कई मुद्दों के साथ-साथ 'अपनी' इंस्टीट्यूट को लेकर भी गंभीर चर्चा तो की, लेकिन इंस्टीट्यूट के चेयरमैन व सेक्रेटरी पद पर कौन रहेगा - इसे लेकर चुप्पी साध गए । कुछेक वरिष्ठ रोटेरियंस का हालाँकि दावा है कि भरत पांड्या ने अपने ही डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर टीएन उर्फ राजु सुब्रमणियन को चेयरमैन तथा डिस्ट्रिक्ट 3070 के पूर्व गवर्नर गुरजीत सिंह को सेक्रेटरी नियुक्त कर लिया है । लोगों को हैरानी है कि खुद को टॉर्चबियरर कहने वाले भरत पांड्या अपनी इंस्टीट्यूट के मुख्य पदाधिकारियों के नाम पर रोशनी डालने से बच/छिप क्यों रहे हैं ? कोचीन में हुई मीटिंग से लौटे जिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स इलेक्ट से इन पंक्तियों के लेखक की बात हो सकी है, उन सभी ने बताया कि भरत पांड्या ने वहाँ यह तो बताया कि वर्ष 2019 की इंस्टीट्यूट दिसंबर में इंदौर में होगी, लेकिन चेयरमैन और सेक्रेटरी के बारे में वहाँ कोई घोषणा नहीं की । इंदौर इंस्टीट्यूट की घोषणा होते ही इंस्टीट्यूट के चेयरमैन या सेक्रेटरी पद पाने की हसरत पाले नेताओं ने तुरंत से सक्रियता दिखाई, ताकि कोई एक पद वह हासिल कर सकें - लेकिन जल्दी ही उनके चेहरे लटके दिखाई दिए, क्योंकि उन्हें पता चला कि दोनों प्रमुख पदों पर तो भरत पांड्या ने पहले ही नियुक्ति कर ली है । यह जानकारी मिलने से चौंके लोगों को हैरानी लेकिन इस बात की है कि भरत पांड्या दोनों महत्त्वपूर्ण पदों पर की गई नियुक्तियों को छिपाने का प्रयास क्यों कर रहे हैं ? भरत पांड्या के इस 'प्रयास' के कारण कुछेक लोगों को उम्मीद बंधी है कि उनकी दाल शायद अभी भी गल सकती है ।
भरत पांड्या के नजदीकियों का कहना/बताना है कि दोनों पदों को लेकर भरत पांड्या पर दरअसल कई लोगों की तरफ से सिफारिशों का भारी दबाव रहा; कई लोग इंटरनेशनल डायरेक्टर के चुनाव में की गई उनकी मदद की 'कीमत' के रूप में उक्त पद हथियाने की कोशिश में थे । जिन लोगों को भविष्य में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद का चुनाव लड़ना है, उनकी तो खास निगाह इन पदों पर थी । रोटरी की चुनावी राजनीति में इंस्टीट्यूट का चेयरमैन बनना इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के संदर्भ में अच्छा संकेत माना जाता है । इसीलिए भरत पांड्या के डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर विजय जालान की इंस्टीट्यूट के चेयरमैन पद पर खास निगाह थी; विजय जालान के लिए बदकिस्मती की बात लेकिन यह रही कि डिस्ट्रिक्ट के ही कई लोग विजय जालान को चेयरमैन बनाये जाने का विरोध भी कर रहे थे । भरत पांड्या के डिस्ट्रिक्ट में गुलाम वहनवती को भी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के भावी उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जाता है । पीछे हुए चुनाव में वह उम्मीदवार थे ही, रोटरी फाउंडेशन में ट्रस्टी बन जाने से लेकिन उन्होंने भरत पांड्या के लिए अंततः रास्ता साफ कर दिया । रोटरी फाउंडेशन में ट्रस्टी बन जाने से गुलाम वहनवती का कद बढ़ भी गया है, इसलिए वह और उनके साथी नहीं चाहते हैं कि डिस्ट्रिक्ट में कोई और उनके लिए चुनौती बने । इसी उठापटक में कोशिश की गई कि विजय जालान को इंस्टीट्यूट का चेयरमैन नहीं बनने दिया जाए । डिस्ट्रिक्ट 3012 के पूर्व गवर्नर रमेश अग्रवाल की भी कोशिश थी कि भरत पांड्या अपनी इंस्टीट्यूट का उन्हें चेयरमैन न सही, तो सेक्रेटरी ही बना दें । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करने वाले रमेश अग्रवाल को उम्मीद थी कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी में उन्होंने भरत पांड्या का जो समर्थन किया था, उसके ईनाम के रूप में भरत पांड्या उन्हें इंस्टीट्यूट का सेक्रेटरी तो बना ही देंगे । रमेश अग्रवाल के लिए बदकिस्मती की बात लेकिन यह रही कि वह तो नोमीनेटिंग कमेटी में भरत पांड्या की उम्मीदवारी का समर्थन करने का दावा करते रहे, लेकिन भरत पांड्या और उनके साथियों ने सुशील गुप्ता के साथ उनकी नजदीकी को देखते हुए उनके दावे पर भरोसा नहीं किया ।
इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करने वाले विनोद बंसल ज्यादा होशियार निकले । सुशील गुप्ता के नजदीकी के रूप में पहचाने जाने के कारण उन्होंने समझ लिया था कि भरत पांड्या इंस्टीट्यूट के चेयरमैन या सेक्रेटरी पद के लिए तो उनके नाम पर विचार नहीं ही करेंगे, सो उन्होंने कोई प्रयास भी नहीं किया; लेकिन दूसरे इंटरनेशनल डायरेक्टर इलेक्ट कमल सांघवी के साथ उनके अच्छे संबंधों को ध्यान में रखते हुए दूसरे - खासतौर से उनके प्रतिद्धंद्धी लोगों को यह डर जरूर रहा कि कहीं कमल सांघवी उन्हें 'फिट' न करवा दें । भरत पांड्या और कमल सांघवी के बीच एक एक इंस्टीट्यूट का जिम्मा लेने की जो सहमति बनी है - जिसके अनुसार वर्ष 2019 की इंस्टीट्यूट भरत पांड्या और 2020 की इंस्टीट्यूट कमल सांघवी करवायेंगे - उससे उक्त संभावना और लोगों का डर लेकिन स्वतः दूर हो गया । डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व गवर्नर अनिल अग्रवाल ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चैलेंजिंग उम्मीदवार अशोक गुप्ता के डिस्ट्रिक्ट में होते हुए भरत पांड्या की उम्मीदवारी का झंडा उठाया हुआ था, इस नाते वह भी उम्मीद में थे कि भरत पांड्या उनका 'ख्याल' रखेंगे ।  रोटरी की राजनीति तथा प्रशासनिक व्यवस्था में ऊँची छलाँग लगाने की इच्छा रखने वाले कुछेक और लोग भी भरत पांड्या से उम्मीद कर रहे थे कि वह उनकी छलाँग के लॉन्चिंग बेस बन जायेंगे । भरत पांड्या के नजदीकियों का कहना है कि तमाम लोगों से मिल रही सिफारिशों के दबाव के चलते ही भरत पांड्या ने राजु सुब्रमणियन को चेयरमैन तथा गुरजीत सिंह को सेक्रेटरी नियुक्त कर लेने के अपने फैसले को 'छिपाये' रखने का तरीका अपनाया है । इस तरह के फैसले लेकिन छिपते तो हैं नहीं, सो भरत पांड्या का यह फैसला भी लोगों के बीच चर्चा में आ ही गया है । भरत पांड्या ने यह देख कर राहत की साँस ली है कि लोगों को उनके फैसले की जानकारी भी मिल गई है और कोई बबाल भी नहीं हो रहा है । इंस्टीट्यूट के चेयरमैन व सेक्रेटरी पद पर निगाह लगाए कुछेक लोगों को हालाँकि अभी भी उम्मीद है, और इस उम्मीद में वह अभी भी प्रयासरत हैं कि भरत पांड्या चूँकि दोनों पदों के पदाधिकारियों की घोषणा स्वयं से नहीं कर रहे हैं, इसलिए हो सकता है कि विभिन्न दबावों में वह अपना फैसला शायद बदल भी लें ।