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Friday, July 21, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की कुर्सी तक पहुँचने के लिए कमल सांघवी को पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन सबसे बड़ी बाधा क्यों लग रहे हैं ?

धनबाद । कमल सांघवी ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव की गहमागहमी के बीच अचानक से पर्दे के पीछे छिप कर अपने समर्थकों के साथ-साथ अपने विरोधियों को भी खासे अचरज में डाल दिया है । रोटरी जोन 6 ए के चुनावबाज नेताओं के लिए भी यह समझना मुश्किल हो रहा है कि ऐसे समय जबकि कमल सांघवी को सबसे ज्यादा सक्रिय होना चाहिए था, वह बिलकुल चुपचाप क्यों बैठ गए हैं ? कमल सांघवी बहुत ही सक्रिय रोटेरियन रहे हैं, और फिर अब तो इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए होने वाला उनका चुनाव बिलकुल सिर पर है - ऐसे में अपनी स्वाभाविक सक्रियता और चुनावी जरूरत को दरकिनार करके चुपचाप बैठ जाने की उनकी कार्रवाई ने हर किसी को हैरान किया हुआ है । ऐसे में उनके विरोधियों को कहने का मौका मिला है कि कमल सांघवी को लगता है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के सदस्यों को चूँकि उन्होंने साध ही लिया है, और वह पक्का उन्हें ही चुनेंगे - इसलिए अब उन्हें सक्रिय होने/दिखने की कोई जरूरत नहीं है । लेकिन जो लोग कमल सांघवी को जानते हैं, उनका कहना है कि कमल सांघवी इतने अवसरवादी नहीं हैं कि अपनी जीत को सुनिश्चित समझ लेने के बाद वह सक्रियता छोड़ दें - दरअसल इसीलिए कमल सांघवी को जानने वालों को उनकी चुप्पी ज्यादा उलझाए हुए है ।
कमल सांघवी के नजदीकियों के बीच उनके इस अप्रत्याशित व्यवहार के लिए रोटरी इंटरनेशनल के पूर्व प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है । उनके कुछेक नजदीकियों की तरफ से सुनने को मिल रहा है कि रोटरी के बड़े नेताओं ने कमल सांघवी को आगाह किया है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में अपने प्रचार अभियान में वह ऐसा कोई काम न कर दें, जिससे कि केआर रवींद्रन को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का मौका मिल जाए । कमल सांघवी को साफ-साफ बता दिया गया है कि वह केआर रवींद्रन के 'राडार' पर हैं, और केआर रवींद्रन उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मौके की तलाश में हैं । उल्लेखनीय है कि रोटरी में केआर रवींद्रन एक बड़े सख्त प्रशासक के रूप में कुख्यात/विख्यात हैं; और उन्होंने कुछेक डिस्ट्रिक्ट्स तथा कई एक गवर्नर्स का बड़ी निर्ममता से 'शिकार' किया हुआ है । केआर रवींद्रन पिछले से पिछले रोटरी वर्ष में प्रेसीडेंट थे, लेकिन रोटरी में उनका जलवा और आतंक अभी भी बना हुआ है । रोटरी के बड़े नेताओं ने कमल सांघवी को समझाया है कि पता नहीं क्यों उन पर केआर रवींद्रन की कड़ी निगाह बनी हुई है, इसलिए इंटरनेशनल डायरेक्टर चुने जाने तक उन्हें बहुत ही सावधानी से रहने की जरूरत है ।
कमल सांघवी ने इसी जरूरत को पूरा करने के लिए अपनी सक्रियता को विराम दे दिया है । उनके नजदीकियों के अनुसार, उन्होंने समझा है कि वह जब कुछ करेंगे ही नहीं तो केआर रवींद्रन को उनके खिलाफ कार्रवाई करने का कोई मौका ही नहीं मिलेगा । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अपनी उम्मीदवारी के लिए कमल सांघवी को अब ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं लग रही है; उनके नजदीकियों का कहना है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के संदर्भ में उन्होंने अपने पक्ष में पक्का इंतजाम कर लिया है; इंटरनेशनल डायरेक्टर का चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स में या तो उनके 'आदमी' ही चुने गए हैं - और जिन डिस्ट्रिक्ट्स में दूसरे लोग चुने गए हैं, कमल सांघवी ने उनकी घेराबंदी कर/करवा ली है । कमल सांघवी ने अपनी कामयाबी के लिए जोन के डिस्ट्रिक्ट्स में जो फील्डिंग सजाई, उसे देख कर ही कई संभावशील उम्मीदवारों ने अपनी उम्मीदवारी से ही पीछे हटने में ही अपनी भलाई देखी/पहचानी । इस कारण से कमल सांघवी के लिए चुनावी मुकाबला और आसान हो गया है । उनके सामने बस केआर रवींद्रन के निशाने पर आने से बचने की ही चुनौती है, इसलिए उन्होंने तय किया है कि वह उड़ेंगे ही नहीं - वह जब उड़ेंगे नहीं, तो केआर रवींद्रन के राडार पर भी नहीं 'दिखेंगे' और बचे रहेंगे । केआर रवींद्रन के खौफ के चलते कमल सांघवी के सक्रियता से बचने और पीछे हटने ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी रौनक को खत्म करने के साथ-साथ चुनावी परिदृश्य को एक अलग तरीके से रोचक भी बना दिया है ।

Tuesday, January 3, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3250 की डिस्ट्रिक्ट कांफ्रेंस में राजा साबू तथा बासकर की उपस्थिति जोन 6ए की इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी राजनीति में कमल सांघवी की उम्मीदवारी को घेरने की रणनीति का संकेत है क्या ?

जमशेदपुर । कमल सांघवी के डिस्ट्रिक्ट - यानि डिस्ट्रिक्ट 3250 की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू तथा भावी इंटरनेशनल डायरेक्टर सी बासकर की उपस्थिति अगला इंटरनेशनल डायरेक्टर चुन जाने के लिए दौड़ रहे कमल सांघवी के लिए क्या स्पीड ब्रेकर का काम करती है ? उल्लेखनीय है कि अगले रोटरी वर्ष में जोन 6ए में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के लिए बिछ रही राजनीतिक बिसात में कमल सांघवी को पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर शेखर मेहता के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है, जबकि अजॉय छाबड़ा को शेखर मेहता के खेमे के प्रतिद्धंद्धी खेमे के नेताओं की 'प्रेरणा' के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । प्रतिद्धंद्धी खेमे के नेताओं में अलग अलग कारणों से राजा साबू और सी बासकर की विशेष हैसियत है । इसी नाते से डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में इन दोनों की उपस्थिति से अजॉय छाबड़ा और उनके समर्थकों को बल्ले-बल्ले वाले मूड में देखा गया, जबकि कमल सांघवी तथा उनके समर्थक निराश-से नजर आए । कमल सांघवी के कुछेक समर्थकों ने हालाँकि अपने आप को भी और दूसरों को भी यह समझाने की कोशिश तो बहुत की कि इन दोनों की उपस्थिति को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डॉक्टर भरत की अपनी कांफ्रेंस को बड़ा बनाने/दिखाने की निजी कोशिश के नतीजे के रूप में देखा जाना चाहिए, और इसमें कोई राजनीति - या राजनीतिक संदेश नहीं देखा/पढ़ा जाना चाहिए । कमल सांघवी के समर्थक नेताओं का तर्क रहा कि डॉक्टर भरत ने अपनी कांफ्रेंस को यादगार बनाने के लिए ही राजा साबू तथा सी बासकर की उपस्थिति के लिए प्रयास किया, और उनकी किस्मत अच्छी रही कि उनका प्रयास सफल रहा - बात बस इतनी सी है, इसमें राजनीति देखना ठीक नहीं है ।
बात बस इतनी सी है - कमल सांघवी के समर्थक नेता लोग दूसरों को तो यह बताने/समझाने का प्रयास करते रहे, किंतु अपने ही इस तर्क को वह खुद हजम नहीं कर पाए; और राजा साबू व सी बासकर की उपस्थिति से जले-भुने से रहे/दिखे । खासकर राजा साबू की उपस्थिति ने कई लोगों को चौंकाया । दरअसल राजा साबू के बारे में मशहूर है कि वह डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंसेस में नहीं जाते हैं । इसीलिए जमशेदपुर में डिस्ट्रिक्ट 3250 की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में उनकी उपस्थिति की बात जिसने भी सुनी, वह हैरान हुआ और उसने इस उपस्थिति के राजनीतिक 'इरादे' पढ़ने/समझने का प्रयास किया । राजा साबू अभी दुबई में आयोजित हुई रोटरी जोन इंस्टीट्यूट में नहीं गए थे, और उनकी तरफ से इसका कारण बताया गया था कि उनकी पत्नी ऊषा साबू को चूँकि बाहर आने-जाने में तकलीफ होने लगी है और उनको साथ लिए बिना वह कहीं आते-जाते नहीं हैं । जमशेदपुर लेकिन वह उनके बिना आ गए । दुबई इंस्टीट्यूट में राजा साबू की अनुपस्थिति के पीछे भी जिस तरह से 'राजनीति' देखी/पहचानी गई थी; ठीक उसी तरह से जमशेदपुर में उनकी उपस्थिति के पीछे भी राजनीति देखी गई । कमल सांघवी के समर्थकों व शुभचिंतकों ने इस राजनीति को पहचानने में लगता है कि कोई चूक नहीं की है ।
कमल सांघवी और उनके समर्थकों को दरअसल महसूस यह हो रहा है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी राजनीति में उनके डिस्ट्रिक्ट के नेताओं के साथ-साथ ऊपर के कुछेक नेता भी उनकी घेराबंदी करने की तैयारी कर रहे हैं । कमल सांघवी और उनके समर्थकों को अजॉय छाबड़ा की उम्मीदवारी प्रस्तुत होने की आशंका तो थी; किंतु उनका आकलन था कि अजॉय छाबड़ा की उम्मीदवारी को ज्यादा समर्थन नहीं मिलेगा और अजॉय छाबड़ा की उम्मीदवारी उनके लिए कोई चुनौती या समस्या खड़ी नहीं पायेगी । जोन 6ए की इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले दूसरे लोग भी इस आकलन से सहमत रहे हैं । असल में, रोटरी में अजॉय छाबड़ा की तुलना में कमल सांघवी की सक्रियता और संलग्नता बहुत ज्यादा रही है; डिस्ट्रिक्ट से बाहर तथा ऊपर की रोटरी में तो कमल सांघवी उनसे बहुत - बहुत आगे बने और 'दिखते' रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट से बाहर तथा ऊपर की रोटरी में पहचान के मामले में भी कमल सांघवी का पलड़ा हमेशा ही अजॉय छाबड़ा से भारी नजर आता रहा है । इसीलिए अजॉय छाबड़ा की तरफ से कमल सांघवी को ज्यादा समस्या होने का कोई डर नहीं था । लेकिन अब अचानक से अजॉय छाबड़ा की उम्मीदवारी के अभियान में जिस तरह की आक्रामकता देखी जा रही है, उससे कमल सांघवी के समर्थकों और शुभचिंतकों को लग रहा है कि अजॉय छाबड़ा की उम्मीदवारी की डोर कहीं और किन्हीं हाथों में है ।
इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए जोगेश गंभीर की उम्मीदवारी आने से कमल सांघवी के लिए मामला खासा गंभीर हो गया है । जोगेश गंभीर को अजॉय छाबड़ा के समर्थक के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । डिस्ट्रिक्ट में हालाँकि कई लोगों को लगता है कि नोमीनेटिंग कमेटी के लिए कमल सांघवी अपने उम्मीदवार के रूप में संजय खेमका को आराम से जितवा लेंगे; लेकिन ऐसा मानने वाले लोगों में भी कई एक को लगता है कि कमल सांघवी के लिए झंझट तो खड़ा हो ही गया है । जोन में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवार के रूप में और जो कुछ नाम सुने जा रहे हैं, उन्हें भी कमल सांघवी की उम्मीदवारी के लिए झंझट खड़ा करने के उद्देश्य को पाने की कार्रवाई के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । इसी सब नजारे को देखते हुए जोन 6ए में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में दिलचस्पी रखने वाले लोगों को लग रहा है कि रोटरी के किन्हीं बड़े नेताओं ने कमल सांघवी की उम्मीदवारी के खिलाफ जैसे 'सुपारी' ले ली है, और उन्होंने कमल सांघवी की उम्मीदवारी को चारों तरफ से घेरना शुरू कर दिया है । कमल सांघवी के डिस्ट्रिक्ट की डिस्ट्रिक्ट कांफ्रेंस में ही कमल सांघवी को जो झटका दिया गया है, वह इस बात का सुबूत है कि उनकी उम्मीदवारी के खिलाफ काम कर रहे लोग बहुत बारीकी और गंभीरता से अपनी चाल चल रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट में अजॉय छाबड़ा और जोगेश गंभीर के साथ ऐसे ऐसे लोग नजर आने लगे हैं, जो प्रायः इनके खिलाफ रहे हैं; जाहिर है कि जो इनके साथ सिर्फ कमल सांघवी का खेल बिगाड़ने के लिए खड़े हुए हैं या खड़े किये गए हैं । डिस्ट्रिक्ट के बाद जोन के दूसरे डिस्ट्रक्ट्स में भी जिस तरह से कमल सांघवी तथा उनके समर्थकों के खिलाफ लोगों को सक्रिय और इकट्ठा किया जा रहा है, उससे लग रहा है कि कमल सांघवी के लिए इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी लड़ाई खासी मुश्किल होने जा रही है ।

Friday, May 3, 2013

हैदराबाद में आयोजित हो रही 'रोटरी साउथ एशिया समिट 2013' के आयोजन के जरिये शेखर मेहता और कमल सांघवी क्या एक-दूसरे को इस्तेमाल कर रहे हैं

धनबाद/कोलकाता । कमल सांघवी हैदराबाद में आयोजित हो रही 'रोटरी साउथ एशिया समिट 2013' के जरिये क्या रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद तक पहुँचने की तिकड़म बना/लगा रहे हैं ? अभी तक यह सवाल उनके डिस्ट्रिक्ट के लोगों की जुबान पर था, लेकिन अब यह दूसरे डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच भी चर्चा का विषय है । कमल सांघवी खुशकिस्मत हैं कि जो लोग उन्हें नहीं भी जानते हैं और/या उनके इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने में जिनकी कहीं कोई भूमिका नहीं होनी है, वह भी इस सवाल के जबाव में उनके समर्थक बन जाते हैं और प्रश्न का जबाव देने की बजाये प्रतिप्रश्न करते हैं कि कमल सांघवी यदि ऐसा कर भी रहे हैं तो क्या गलत कर रहे हैं ? लेकिन इन नादान किस्म के लोगों की इस तरह की पैरवी कमल सांघवी की इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने की तिकड़म की बात को और पुष्ट करने का ही काम कर रही है । ऐसे में, कमल सांघवी के लिए इस 'आरोप' के घेरे से खुद को बाहर निकालना और मुश्किल हो गया है ।
हैदराबाद में आयोजित हो रही 'रोटरी साउथ एशिया समिट 2013' को कमल सांघवी की इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने की तिकड़म से जोड़ने की बात को दरअसल इसलिए हवा मिली क्योंकि रोटरी के तमाम बड़े नेता इस आयोजन की प्रासंगिकता और जरूरत को समझने/पहचानने में असफल रहे हैं । चूँकि इस तरह के किसी आयोजन की बात रोटरी इंटरनेशनल की व्यवस्था में नहीं है इसलिए तमाम बड़े नेताओं के लिए यह समझना बड़ा मुश्किल हुआ कि यह समिट आखिर हो किसलिए रही है । रोटरी के कई एक बड़े नेताओं ने इन पंक्तियों के लेखक का ध्यान इस तथ्य की तरफ दिलाया कि रोटरी इंटरनेशनल के प्रत्येक कार्यक्रम का एक खास डिजाइन है, उसका एक उद्देश्य है और इस कारण उसका एक टारगेट ऑडिएंस होता है । तथाकथित 'रोटरी साउथ एशिया समिट 2013' एक ऐसा आयोजन है, जिसका कोई डिजाइन नहीं है और इसलिए उसका कोई निश्चित उद्देश्य नहीं है और यही कारण है कि उसका कोई टारगेट ऑडिएंस नहीं है । समिट में कौन रोटेरियन शामिल होने का अधिकारी है, इसका कोई मापदण्ड तय नहीं किया गया है । यह इसीलिये नहीं किया गया क्योंकि इसका एकमात्र उद्देश्य यह 'दिखाना' है कि आयोजक लोग कितनी भीड़ इकट्ठी कर सकते हैं । इसी वजह से हैदराबाद में आयोजित हो रही समिट में ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा है, जिनके लिए रोटरी तफरीह का दूसरा नाम है । यहाँ तमाम लोग ऐसे हैं जो अपने क्लब की मीटिंग्स में ही कभी-कभार जाते हैं और डिस्ट्रिक्ट के आयोजनों में तो शायद ही कभी गए होंगे - यानि उन्हें न तो रोटरी में कोई दिलचस्पी है और न ही कभी उन्हें प्रेरित करने की जरूरत ही समझी गई ।
समझा जा सकता है कि जो रोटेरियन बेचारा कभी डिस्ट्रिक्ट के आयोजनों में नहीं गया वह यहाँ - तथाकथित रोटरी साऊथ एशिया समिट में क्या करने आया होगा ? जाहिर है कि वह आया नहीं है, उसे 'लाया गया' है । समिट के आयोजकों की तरफ से डिस्ट्रिक्ट के नेताओं से पूछा गया कि कितने लोग हैदराबाद लाओगे - डिस्ट्रिक्ट के नेताओं ने अपनी हैसियत और आयोजकों के निगाह में चढ़ने की जरूरत के हिसाब से लोगों की संख्या बता दी; कुछेक डिस्ट्रिक्ट के नेताओं ने अपनी बताई संख्या के हिसाब से रजिस्ट्रेशन का पैसा भी अपनी ही जेब से भर दिया । डिस्ट्रिक्ट 3120 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी सतपाल गुलाटी बेचारे को यह अहसान उतारने के एवज में करना पड़ा । उल्लेखनीय है कि सतपाल गुलाटी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी के लिए पिछले रोटरी वर्ष में हुए चुनाव में हार गए थे । उन्हें चुनाव लड़ाने वाले डिस्ट्रिक्ट के उनके आका जब उन्हें सीधे मुकाबले में चुनाव नहीं जितवा सके तो उन्होंने चोर दरवाजे से सतपाल गुलाटी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी बनवाने का बीड़ा उठाया । उनके आकाओं के तार चूँकि इंटरनेशनल डायरेक्टर शेखर मेहता से जुड़े हैं, इसलिए शेखर मेहता की मदद से एक 'शिकायती खेल' हुआ और सतपाल गुलाटी को हारी हुई बाजी जितवा दी गई । शेखर मेहता का उन पर यह अहसान था, इसलिए 'रोटरी साउथ एशिया समिट' के प्रमुख कर्ता-धर्ता के रूप में शेखर मेहता ने जब उनसे पूछा कि कितने लोग हैदराबाद लाओगे तो उन्होंने झट से कई लोगों के रजिस्ट्रेशन का पैसा उन्हें भेज दिया । बाद में वह उतने लोगों का जुगाड़ करने में जुटे । यह पता हालाँकि अभी नहीं लग पाया है कि उन्होंने जितने लोगों का रजिस्ट्रेशन करवाया था, उतने लोगों का जुगाड़ वह कर पाए या नहीं ? इस 'तरकीब' से जो आयोजन हो रहा हो उसके बारे में लोगों का यह सोचना स्वाभाविक ही है कि इसके पीछे असल उद्देश्य क्या है ?
हैदराबाद में आयोजित हो रही 'रोटरी साउथ एशिया समिट 2013' में जिस तरह से और जिस तरह के लोगों को जुटाया गया है उससे 'दिखा' यही है कि इस तथाकथित समिट के आयोजकों का मुख्य उद्देश्य भीड़ इकट्ठी करके अपना उल्लू सीधा करना है । यह समिट शेखर मेहता के दिमाग की उपज है और इसे संभव करने के लिए उन्होंने कमल सांघवी पर भरोसा किया । शेखर मेहता ने वर्ष 2011 में कोलकाता में आयोजित किये रोटरी इंस्टीट्यूट के आयोजन में भी कमल सांघवी पर भरोसा किया था । उस समय भी कुछेक लोगों के जहन में यह बात आई थी कि शेखर मेहता इंटरनेशनल डायरेक्टर पद का लालच दिखा कर कमल सांघवी को इस्तेमाल कर रहे हैं । इस समिट में शेखर मेहता ने जब एक बार फिर कमल सांघवी को 'आगे' रखा - तो वही बात साबित होती हुई दिखी । हालाँकि कमल सांघवी के नजदीकियों का कहना है कि शेखर मेहता उन्हें इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, बल्कि वह शेखर मेहता को इस्तेमाल कर रहे हैं । उनका कहना है कि कमल सांघवी ने रोटरी के बड़े नेताओं के बीच इतनी जड़ें जमाई हुई हैं कि वह इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने के लिए शेखर मेहता की मदद के मोहताज नहीं हैं । कई लोगों को लगता है कि दोनों को एक दूसरे की जरूरत है - शेखर मेहता को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनना है और कमल सांघवी को इंटरनेशनल डायरेक्टर बनना है, इसलिए दोनों एक दूसरे की मदद से आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं । हैदराबाद में आयोजित हो रही 'रोटरी साउथ एशिया समिट 2013' के आयोजन को उन दोनों के इसी संयुक्त प्रयास के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । 

Tuesday, April 23, 2013

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3250 में चर्चा है कि कमल सांघवी को रोटरी में इवेंट मैनेज करने का काम करना है या रोटरी के वास्तविक लक्ष्यों को प्राप्त करने का

धनबाद । रोटरी क्लब ऑफ धनबाद चेरीटेबल ट्रस्ट द्धारा पिछले तीस वर्ष से भी अधिक समय से चलाये जा रहे जीवन ज्योति स्कूल के मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर बच्चों को उनके घरों से लाने -लेजाने के लिए आवश्यक बस को खरीदने के लिए तैयार किये गए मैचिंग ग्रांट प्रोजेक्ट के निरस्त हो जाने के कारण कमल सांघवी गंभीर आरोपों में घिर गए हैं । उल्लेखनीय है कि कमल सांघवी का क्लब रोटरी क्लब धनबाद इस मैचिंग ग्रांट प्रोजेक्ट का प्राइमरी होस्ट पार्टनर था और खुद कमल सांघवी की देखरेख में यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया था और उनपर ही इस प्रोजेक्ट को संभव करने की जिम्मेदारी थी । इस प्रोजेक्ट से संबद्ध जो दस्तावेज 'रचनात्मक संकल्प' के पास हैं, उनके अनुसार 13286 अमेरिकी डॉलर के इस प्रोजेक्ट के लिए 500 अमेरिकी डॉलर रोटरी क्लब धनबाद से और 2000 अमेरिकी डॉलर डिस्ट्रिक्ट 3250 के डीडीएफ एकाउंट से लेने की संस्तुति प्राप्त कर ली गई थी । बाकी बची रकम में से 5095 अमेरिकी डॉलर रोटरी फाउंडेशन से लेने की बात तय हुई थी और 5691 अमेरिकी डॉलर के लिए मैचिंग पार्टनर खोजना था । इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी चूँकि कमल सांघवी ने ली थी, इसलिए किसी को भी इसके पूरा हो पाने को लेकर जरा सा भी संदेह नहीं था । कमल सांघवी की रोटरी में जैसी धाक है; कल्याण बनर्जी के 'ब्ल्यू-आयड ब्यॉय' की उनकी जैसी पहचान है - उसके बाद इस प्रोजेक्ट की सफलता को लेकर किसी के पास भी शक/संदेह की कोई गुंजाइश नहीं थी । लेकिन फिर भी प्रोजेक्ट ड्रॉप हो गया । मजे की बात यह है कि इस प्रोजेक्ट के ड्रॉप होने के लिए ट्रस्ट के, क्लब के और डिस्ट्रिक्ट के लोगों की तरफ से कमल सांघवी को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है । आरोप लगाया जा रहा है कि कमल सांघवी की रोटरी के वास्तविक कामों में नहीं बल्कि रोटरी के नाम पर इवेंट मैनेज करने में ज्यादा दिलचस्पी हो गई है ।
कमल सांघवी को लेकर लोगों के बीच चर्चा है कि कमल सांघवी को चूँकि इंटरनेशनल डायरेक्टर बनना है और उन्होंने समझ लिया है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने के लिए रोटरी के वास्तविक काम करना जरूरी नहीं है, बल्कि रोटरी के बड़े नेताओं को खुश करना/रखना जरूरी है इसलिए वह अब 'उसमें' जुट गए हैं । उनके डिस्ट्रिक्ट के लोगों का ही कहना है कि मौजूदा इंटरनेशनल डायरेक्टर शेखर मेहता को खुश करने/रखने के लिए उनके आयोजनों को सफल बनाने में कमल सांघवी ने जितनी सक्रियता दिखाई है, उसके सौवें अंश की सक्रियता भी वह यदि मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर बच्चों के स्कूल के लिए दिखा पाते तो उक्त प्रोजेक्ट सफल हो जाता । इससे भी ज्यादा मजे की और दुर्भाग्य की बात यह है कि अपने क्लब के अपनी ही देखरेख में बने प्रोजेक्ट के ड्रॉप होने का कमल सांघवी को कोई अफ़सोस भी नहीं है । उनका कहना है कि जीवन ज्योति स्कूल का काम सुचारू रूप से चल रहा है और इस प्रोजेक्ट के ड्रॉप होने से बच्चों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं हो रही है । यदि सचमुच ऐसा ही है तो फिर 13286 अमेरिकी डॉलर का यह प्रोजेक्ट बनाया ही क्यों गया था ? इस प्रोजेक्ट में बच्चों को लाने-लेजाने के लिए एक मिनी बस खरीदनी थी तथा विशेष सॉफ्टवेयर के साथ दो कंप्यूटर सिस्टम और एक एलसीडी प्रोजेक्टर भी खरीदा जाना था । उम्मीद की जानी चाहिए कि कमल सांघवी की देखरेख में यदि उक्त प्रोजेक्ट तैयार किया गया था तो सचमुच में शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही उक्त प्रोजेक्ट तैयार किया गया होगा । लेकिन अब कमल सांघवी कह रहे हैं कि प्रोजेक्ट ड्रॉप होने से बच्चों की जरूरतों पर कोई असर नहीं पड़ा है । कमल सांघवी का यह भी कहना है कि प्रोजेक्ट की रकम ऐसी नहीं है जिसे जुटाना उनके लिए मुश्किल हो - वह चार फोन घुमायेंगे, उक्त रकम इकठ्ठा हो जायेगी ।
कमल सांघवी की इस बात पर कोई भी शक नहीं कर सकता है - क्योंकि उनका रुतबा ऐसा ही है । सवाल लेकिन यही है कि शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर बच्चों के स्कूल की जरूरतों को पूरा करने के लिए जितनी रकम की गणना आपने की, उसे चार फोन घुमा कर ही जुटा लेना चाहिए था - उसके लिए मैचिंग ग्रांट जुटाने के पचड़े में पड़ने की कोशिश ही आपने क्यों की और जब की तो उसे सफल बनाने में दिलचस्पी क्यों नहीं ली ? कमल सांघवी के क्लब के ही ट्रस्ट द्धारा चलाये जा रहे जीवन ज्योति स्कूल के मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर बच्चों को उनके घरों से लाने -लेजाने के लिए आवश्यक बस को खरीदने के लिए तैयार किये गए मैचिंग ग्रांट प्रोजेक्ट के निरस्त हो जाने का कमल सांघवी को भले ही कोई अफ़सोस न हो, लेकिन इससे उनके डिस्ट्रिक्ट के उनके विरोधियों को अच्छा मसाला मिल गया है । कमल सांघवी ने पिछले कुछ वर्षों में रोटरी के बड़े नेताओं से अच्छे संबंध बना लिए हैं, जिसके चलते रोटरी में उनकी अच्छी साख और धाक बनी है - जो उनके डिस्ट्रिक्ट के कई लोगों को पसंद नहीं आ रही है । मौजूदा इंटरनेश्नल डायरेक्टर शेखर मेहता के साथ उनकी जो जोड़ी बनी है - वह कईओं की आँखों की किरकिरी बनी है । कोलकाता में वर्ष 2011 में शेखर मेहता की देखरेख में आयोजित हुए रोटरी इंस्टीट्यूट में तथा इस वर्ष हैदराबाद में शेखर मेहता की देखरेख में आयोजित हो रहे रोटरी साउथ एशिया सम्मिट में कमल सांघवी को जो प्रमुख जिम्मेदारी मिली है, वह कई प्रमुख रोटेरियंस को बुरी तरह खटक रही है ।
यह इसलिए भी खटक रही है क्योंकि कमल सांघवी उक्त जिम्मेदारियों को निभाने में बहुत सफल हो रहे हैं और उस सफलता के लिए उनकी तारीफ भी हो रही है । उनकी इस सफलता को लेकिन उनके क्लब के प्रोजेक्ट के ड्रॉप होने से जोड़ कर सवाल किया जा रहा है कि रोटरी में कमल सांघवी को इवेंट मैनेज करने का काम करना है या रोटरी के वास्तविक लक्ष्यों को प्राप्त करने का काम करना है ? इस सवाल का जबाव भी दिया जा रहा है और वह यह कि कमल सांघवी जानते हैं कि उनके क्लब के द्धारा तीस वर्षों से भी अधिक समय से चलाये जा रहे स्कूल के शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर बच्चे उन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर थोड़े ही बनवा सकते हैं, वह तो शेखर मेहता बनवा सकते हैं इसलिए उन्हें शेखर मेहता की 'सेवा' में जुटना ज्यादा जरूरी लगा है - इस चक्कर में उनके खुद के द्धारा तैयार किया गया प्रोजेक्ट ड्रॉप हो गया तो उनकी बला से ।