Tuesday, March 12, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए विनय गर्ग के 'इंटेंशन' देने के चलते छिड़े विवाद ने सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के अभियान को मुसीबत में फँसाया

पानीपत । विनय गर्ग के इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए एंडोर्समेंट लेने की 'इंटेंशन' प्रकट करने से डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति तो भड़क ही उठी है, उसकी आँच ने सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव को भी गर्मी दे दी है । मजे की बात यह है कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए विनय गर्ग का समर्थन प्राप्त कर रहे दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के समर्थक इस बात पर बँटे हुए हैं कि विनय गर्ग की यह इंटेंशन उन्हें फायदा पहुँचायेगी या नुकसान ? दिनेश जोशी के कुछेक समर्थकों को विनय गर्ग की इस इंटेंशन में दिनेश जोशी की उम्मीदवारी को फायदा पहुँचता 'दिख' रहा है; उनका दावा तो बल्कि यह है कि दिनेश जोशी की उम्मीदवारी को फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से ही विनय गर्ग ने यह चाल चली है - अन्यथा इस 'इंटेंशन' के लिए अभी किसी भी लिहाज से उचित समय नहीं है; दूसरी तरफ लेकिन दिनेश जोशी के अन्य कुछेक समर्थकों को लगता है और उनका कहना है कि विनय गर्ग की इस घोषणा ने पहले से ही मुसीबत का शिकार बनी दिनेश जोशी की उम्मीदवारी को और ज्यादा मुसीबत में फँसा दिया है । दरअसल सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के दूसरे उम्मीदवार दिनेश बत्रा के समर्थकों ने यह कहते हुए मामले को भड़काया है कि जिन विनय गर्ग की लायन सदस्यता तक खतरे में है और जो सिर्फ अदालती कार्रवाई के चलते बची हुई है, वह विनय गर्ग इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने का सपना क्यों और कैसे देख रहे हैं ? विनय गर्ग को लेकर कही/सुनाई जा रहीं इस तरह की बातें डिस्ट्रिक्ट के लोगों को नकारात्मक रूप में प्रभावित कर ही सकती हैं; और यह चीज दिनेश जोशी की सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने का काम कर सकती है ।
विनय गर्ग पिछले वर्ष मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन थे । चेयरमैन के रूप में उनके कुछेक फैसले और रवैये पर लायंस इंटरनेशनल के साथ उनका कुछ खटराग हुआ, जिसके चलते लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारी उनकी लायन सदस्यता के ही दुश्मन बन बैठे । लायंस इंटरनेशनल के मनमाने व तानाशाहीपूर्ण फैसले के खिलाफ विनय गर्ग ने अदालत की शरण ली, जिसके चलते लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारियों की मनमानी पर अमल करने की रोक तो लग गई - लेकिन विनय गर्ग की सदस्यता पर लटकी तलवार अभी भी लटकी हुई ही है । लायंस इंटरनेशनल की तरफ से लायंस को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इंडिया एसोसिएशन द्वारा भारत के लायन लीडर्स की जो डायरेक्टरी प्रकाशित है, उसमें विनय गर्ग की जहाँ फोटो छपना चाहिए थी, वहाँ इस आशय की जानकारी प्रकाशित की गई है । ऐसे में, इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए दी गई उनकी 'इंटेंशन' ने उनके विरोधियों को उनके खिलाफ बयानबाजी करने का मौका दिया है, और इस मौके के इस्तेमाल के चलते डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में गर्मी पैदा हो गई है । इस गर्मी ने लेकिन सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए विनय गर्ग के समर्थित उम्मीदवार दिनेश जोशी को मुसीबत में डाल दिया है । उनके लिए लोगों के इस सवाल का जबाव देना कई कारणों से मुश्किल बना हुआ है कि जब विनय गर्ग की लायन सदस्यता ही संकट में फँसी हुई है, तब विनय गर्ग आखिर किस बिना पर इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए एंडोर्समेंट लेने की सोच रहे हैं ?
विनय गर्ग के इस नए विवाद में फँस जाने से दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के अभियान पर भी प्रतिकूल असर पड़ने का डर पैदा हुआ है । दरअसल दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के दो ही बड़े समर्थक सक्रिय रहे हैं - एक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि मेहरा और दूसरे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर व निवर्त्तमान मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन विनय गर्ग; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि मेहरा थाईलैंड में हुए अधिष्ठापन समारोह में हुई बदइंतजामी और लूट-खसोट के झमेले से अभी तक उबर नहीं पाए हैं, इसलिए ले-दे कर एक अकेले विनय गर्ग ही दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के एक बड़े समर्थक बचे रह गए थे - लेकिन अब उनके भी खामख्वाह एक विवाद को आमंत्रित कर लेने से दिनेश जोशी के लिए मुसीबत की स्थिति बन गई है । दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के साथ यूँ तो सब कुछ अच्छा ही अच्छा है; दिनेश बत्रा के मुकाबले हर तुलना में दिनेश जोशी का पलड़ा भारी है, लेकिन फिर भी उनकी उम्मीदवारी की वैसी हवा नहीं बन पा रही है, जैसी कि बनना चाहिए थी - तो इसका एक ही कारण दिखता है और वह यह कि उनकी उम्मीदवारी के साथ चुनावी नजरिये से कोई बड़ा नाम सक्रिय नहीं है । दिनेश जोशी की उम्मीदवारी का सारा बोझ एक अकेले सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन गुप्ता के कंधे पर डला/पड़ा हुआ है । विनय गर्ग तथा खेमे के अन्य पूर्व गवर्नर्स की छत्रछाया में रमन गुप्ता अच्छे से दिनेश जोशी की उम्मीदवारी की कमान सँभाले हुए थे भी - लेकिन इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए विनय गर्ग के 'इंटेंशन' देने के चलते छिड़े विवाद ने दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के अभियान में अलग तरह की समस्या पैदा कर दी है ।

Monday, March 11, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में आयोजित हुए डिस्ट्रिक्ट टीम ट्रेनिंग सेमीनार में ललित खन्ना ने अपने आपको एक जिम्मेदार, प्रभावी और सक्रिय रोटेरियन के रूप में 'दिखाने' पर ध्यान देकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अपनी उम्मीदवारी के पक्ष में माहौल बनाया

नई दिल्ली । ललित खन्ना ने डिस्ट्रिक्ट टीम ट्रेनिंग सेमीनार में उपस्थित लोगों के बीच डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अपनी उम्मीदवारी का सक्रियताभरा प्रमोशन करके जो धाक बनाई, उससे उनकी उम्मीदवारी अचानक व तेजी से चर्चा का विषय बन गई है - और इसका नतीजा यह हुआ है कि उनकी उम्मीदवारी को लेकर लोगों के बीच बना संशय समाप्त हुआ है । उल्लेखनीय है कि पिछले कुछेक दिनों से उनके नजदीकियों की तरफ से तो दावा किया जा रहा था कि ललित खन्ना उम्मीदवार बनने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन ललित खन्ना खुद अपनी उम्मीदवारी को लेकर चुप्पी साधे हुए थे । उनके कुछेक नजदीकियों का कहना/बताना था कि ललित खन्ना खुद अपनी उम्मीदवारी घोषित करने से पहले डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक हालात और चुनावी समीकरणों को समझ लेना चाहते थे; और इसके बाद ही अपनी उम्मीदवारी को घोषित करना चाहते थे । मजे की बात यह थी कि ललित खन्ना ही नहीं, तीन-चार अन्य रोटेरियंस भी अपनी अपनी उम्मीदवारी की संभावनाओं को तलाश रहे थे और अपनी अपनी संभावित उम्मीदवारी के लिए समर्थन-आधार 'बनाने' का प्रयास कर रहे थे - जिसके चलते डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक माहौल में असमंजस बना हुआ था । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी को लेकर जो नाम चल रहे थे, उनमें हालाँकि एक अकेले ललित खन्ना ही ऐसे थे, जिन्हें अपनी उम्मीदवारी को प्रस्तुत करने को लेकर कोई निजी या संगठनात्मक समस्या नहीं थी - बाकी अन्य संभावित उम्मीदवारों में किसी को अपने क्लब से हरी झंडी पाने के लिए जूझना पड़ रहा था, तो कोई बिना किसी समर्थन-आधार के उम्मीदवार बनने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था और इस चक्कर में 'इस' या 'उस' नेता को अपनी उम्मीदवारी के समर्थन के लिए राजी करने के प्रयासों में लगा था । हालाँकि प्रयासों में लगे संभावित उम्मीदवारों में किसी उम्मीदवार के साथ पैसों की 'ताकत' देखी जा रही थी, तो किसी के पास लंबे रोटरी जीवन के अनुभवों की पूँजी थी, और किसी के पास सहानुभूति-कॉर्ड था । 
ऐसे माहौल में ललित खन्ना अपनी उम्मीदवारी का फैसला सोच-समझ कर ही लेना चाहते थे । उनके नजदीकी कहते/बताते थे कि उम्मीदवारी को लेकर ललित खन्ना को उस तरह की किसी समस्या से तो नहीं जूझना पड़ रहा था, जिस तरह की समस्याओं से दूसरे संभावित उम्मीदवार जूझ रहे थे - लेकिन फिर भी ललित खन्ना यह 'देख' लेना चाहते थे कि संभावित उम्मीदवारों में कौन सचमुच में चुनावी मैदान में बना/टिका रहता है और उसे किसका भरोसा/सहारा मिलता है ? संयोग से डिस्ट्रिक्ट टीम ट्रेनिंग सेमीनार के आयोजन से पहले ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद को लेकर डिस्ट्रिक्ट का चुनावी परिदृश्य स्पष्ट होने लगा और कई संभावित उम्मीदवारों की चुनावी दौड़ दम तोड़ती नजर आने लगी । एक अकेले सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी ने तो अपने क्लब में ही पैदा हुई मुसीबत से निपटने में सफलता प्राप्त की और अपनी उम्मीदवारी के लिए क्लब की हरी झंडी हासिल कर ली; लेकिन बाकी उम्मीदवार अपने लिए समर्थन-आधार नहीं खोज सके - और इसके चलते पीछे हटते हुए दिखे । ऐसे में, ललित खन्ना को डिस्ट्रिक्ट टीम ट्रेनिंग सेमीनार में अपनी उम्मीदवारी को लोगों के बीच प्रमोट करने का अच्छा मौका नजर आया, और उन्होंने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया । यह इत्तफाक रहा और या यह सोची-समझी रणनीति थी - यह तो अभी कोई समझ नहीं पाया है - लेकिन सेमीनार में ललित खन्ना को मंच पर आने/दिखने और और लोगों को संबोधित करने का जो मौका मिला, ललित खन्ना ने उस मौके का भी बड़ी होशियारी से अपनी उम्मीदवारी के संदर्भ में सदुपयोग किया ।
सेमीनार में मौजूद लोगों के अनुसार, ललित खन्ना ने ट्रेनिंग सेशन में भी अपनी सक्रियता दिखा/जता कर लोगों का ध्यान खींचने का जो प्रयास किया, उसका भी उन्हें सुफल मिला ।लोगों का कहना रहा कि ललित खन्ना को लोगों के बीच अपने आपको 'दिखाना' आता है और डिस्ट्रिक्ट टीम ट्रेनिंग सेमीनार में औपचारिक व अनौपचारिक रूप से उन्होंने अपनी इस खूबी का जमकर इस्तेमाल किया । लोगों के साथ अलग अलग ग्रुप्स में की जाने वाली अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने अपनी उम्मीदवारी की चर्चा की, और अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने/बनाने का माहौल बनाया; तो सेमीनार के औपचारिक सत्रों में ललित खन्ना ने अपने आपको एक जिम्मेदार, प्रभावी और सक्रिय रोटेरियन के रूप में 'दिखाने' पर ध्यान दिया । इस मिलीजुली रणनीति का ललित खन्ना को अच्छा फायदा मिलता भी नजर आया, और चुनावी राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले तथा भूमिका निभाने वाले डिस्ट्रिक्ट के नेताओं/लोगों ने ललित खन्ना की उपस्थिति का खास नोटिस लिया - जिसके कारण डिस्ट्रिक्ट टीम ट्रेनिंग सेमीनार में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए ललित खन्ना की उम्मीदवार के अभियान का जोरदार तरीके से श्रीगणेश हुआ । 

Sunday, March 10, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए प्रस्तुत जगदीश अग्रवाल की उम्मीदवारी को फर्जी तरीके से स्वीकृति दिलवाने की संजय चोपड़ा, विशाल सिन्हा व अनुपम बंसल की कोशिशों को देखते हुए लोगों को डर हुआ है कि कहीं डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह का हाल दीपक राज आनंद जैसा न हो जाए

लखनऊ । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के उम्मीदवार के रूप में जगदीश अग्रवाल के नामांकन पत्र में 'झूठे' और 'फर्जी' दावे पाए जाने के आरोपों से मुसीबत में पड़ी उनकी उम्मीदवारी को बचाने के लिए नोमीनेटिंग कमेटी के चेयरमैन संजय चोपड़ा ने लायंस इंटरनेशनल के नियमों की जो ऐसी-तैसी कर दी है, उसके चलते डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह भारी दबाव में आ गए हैं - जिस कारण डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में पिछले वर्ष डिस्ट्रिक्ट 321 बी टू में बने जैसे हालात पैदा हो गए हैं । डिस्ट्रिक्ट के बड़े नेताओं और पूर्व गवर्नर्स को डर हुआ है कि एके सिंह कहीं दीपक राज आनंद की दशा को प्राप्त न हो जाएँ । आरोपपूर्ण चर्चाओं के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में नोमीनेटिंग कमेटी की मीटिंग में झूठे व फर्जी दावों के आधार पर प्रस्तुत किया गया जगदीश अग्रवाल की उम्मीदवारी का नामांकन पत्र रद्द हो जाना चाहिए था, लेकिन मीटिंग में अनधिकृत रूप से उपस्थित पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स विशाल सिन्हा व अनुपम बंसल ने संजय चोपड़ा पर दबाव बना कर जगदीश अग्रवाल को अपने पेपर्स 'दुरुस्त' करने के लिए समय दिलवा दिया है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह ने हालाँकि यह कहते हुए इसका विरोध किया कि नोमीनेटिंग कमेटी जगदीश अग्रवाल का नामांकन या तो स्वीकार करे और या रिजेक्ट करे - पेपर दुरुस्त करने के लिए उन्हें समय देना लायंस इंटरनेशनल के नियमों का तथा उसकी व्यवस्था का मजाक बनाना होगा । विशाल सिन्हा और अनुपम बंसल के दबाव के सामने एके सिंह की लेकिन एक न चली - और संजय चोपड़ा ने जगदीश अग्रवाल को अपने पेपर 'दुरुस्त' करने के लिए समय दे दिया ।
उल्लेखनीय है कि जगदीश अग्रवाल के नामांकन पत्र के साथ प्रस्तुत किए गए पेपर 'पूरे' दो वर्ष क्लब में उनके डायरेक्टर रहने की शर्त को पूरा नहीं करते हैं । जगदीश अग्रवाल और विशाल सिन्हा व अनुपम बंसल ने तर्क दिया कि लायंस इंटरनेशनल किसी भी पद पर छह महीने से एक दिन भी अधिक रहने पर उस पद पर रहने की मान्यता देता है । लेकिन सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की उम्मीदवारी के लिए जो न्यूनतम शर्ते हैं, उनमें 'पूरे' दो वर्ष डायरेक्टर रहने की बात की गई है । इस पर विवाद बढ़ा तो तुरंत से ही पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर विनोद खन्ना से सलाह ली गई । विनोद खन्ना ने भी बताया कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार के लिए 'पूरे' दो वर्ष डायरेक्टर रहना/होना जरूरी है । विनोद खन्ना से मिले स्पष्टीकरण के बाद जगदीश अग्रवाल की उम्मीदवारी का नामांकन रद्द हो जाना चाहिए था, लेकिन नोमीनेटिंग कमेटी की मीटिंग में अनधिकृत रूप से बैठे विशाल सिन्हा और अनुपम बंसल द्वारा दिखाई दादागिरी का सहारा लेकर संजय चोपड़ा ने जगदीश अग्रवाल को अपने पेपर दुरुस्त करने के लिए समय दे दिया । इसका सीधा सा मतलब यही निकाला/लगाया जा रहा है कि जगदीश अग्रवाल को मौका दिया गया है कि वह किसी भी क्लब से 'पूरे' दो वर्ष डायरेक्टर होने के फर्जी कागजात तैयार करवा लें । इस पूरे प्रकरण में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह की भूमिका चुपचाप तमाशा देखने वाले पदाधिकारी की बन गई है । गौर करने वाली बात यह है कि इसी तरह से, पिछले वर्ष डिस्ट्रिक्ट 321 बी टू में तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक राज आनंद ने पूर्व गवर्नर्स के दबाव में कुछेक तरह की बेईमानियों को होने दिया और नतीजे में फजीहत का शिकार बन बैठे । डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में लोगों को डर हुआ है कि संजय चोपड़ा, विशाल सिन्हा व अनुपम बंसल के चक्कर में एके सिंह का भी कहीं दीपक राज आनंद जैसा हाल न हो जाए ।
जगदीश अग्रवाल का नामांकन रद्द हो सकने की संभावना ने पराग गर्ग और बीएम श्रीवास्तव के समर्थकों व शुभचिंतकों में अलग अलग कारणों से खासा जोश भर दिया है । पराग गर्ग के समर्थकों व शुभचिंतकों को उम्मीद बँधी है कि जगदीश अग्रवाल का नामांकन रद्द होने की स्थिति में जगदीश अग्रवाल की उम्मीदवारी का समर्थन करने वाले नेता पराग गर्ग की उम्मीदवारी का झंडा उठा लेंगे और तब पराग गर्ग की चुनावी नैय्या आराम से पार हो जायेगी । बीएम श्रीवास्तव की उम्मीदवारी के समर्थकों को लेकिन विश्वास है कि जगदीश अग्रवाल का नामांकन रद्द होने की स्थिति में विशाल सिन्हा और अनुपम बंसल जैसे नेता तो राजनीतिक रूप से 'अनाथ' ही हो जायेंगे - और तब बीएम श्रीवास्तव की उम्मीदवारी के लिए अच्छी बढ़त बना लेना आसान हो जायेगा । बीएम श्रीवास्तव की उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों को लगता है कि पराग गर्ग और बीएम श्रीवास्तव के बीच मुकाबला होने की स्थिति में बीएम श्रीवास्तव का पलड़ा और भारी हो जायेगा । संजय चोपड़ा, विशाल सिन्हा व अनुपम बंसल की तिकड़ी यदि झूठ/फरेब का इस्तेमाल करके और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह को दबाव में लेकर जगदीश अग्रवाल की उम्मीदवारी को हरी झंडी दे/दिलवा भी देते हैं, तो भी ताजा विवाद से जगदीश अग्रवाल की उम्मीदवारी की साख और विश्वसनीयता को जो चोट पहुँची है - उसका फायदा बीएम श्रीवास्तव की उम्मीदवारी को मिलता दिख रहा है । दरअसल पराग गर्ग की उम्मीदवारी के अभियान के लिए प्रभावी लोगों की कोई 'टीम' काम करती हुई नहीं 'दिख' रही है; इसलिए मुख्य चुनावी मुकाबला जगदीश अग्रवाल और बीएम श्रीवास्तव के बीच ही होता दिखता रहा है । ऐसे में, जगदीश अग्रवाल की उम्मीदवारी के हटने और या हटने की चर्चाओं के चलते कमजोर पड़ने का फायदा बीएम श्रीवास्तव के हिस्से में ही जुड़ता नजर आ रहा है । हालाँकि फिलहाल सभी की निगाह इस बात पर टिकी है कि संजय चोपड़ा, विशाल सिन्हा और अनुपम बंसल की तिकड़ी जगदीश अग्रवाल की उम्मीदवारी को मान्य करवाने के लिए क्या फरेब करती है - और उनके फरेब के बावजूद जगदीश अग्रवाल की उम्मीदवारी बची रह पाती है या रद्द हो जाती है ?

Saturday, March 9, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन में डिस्ट्रिक्ट व लायनिज्म के बेहतर भविष्य के लिए विनय मित्तल, संजीवा अग्रवाल और अश्वनी काम्बोज के बीच बने तालमेल को आगे भी जारी रखने के लिए सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद पर गौरव गर्ग का चुना जाना डिस्ट्रिक्ट के लोगों को जरूरी लग रहा है

मसूरी । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार के रूप में गौरव गर्ग ने जिस शालीनता और गरिमा के साथ अपना चुनाव अभियान चलाया हुआ है, उसके चलते उन्होंने उन लोगों को भी प्रभावित किया है, जो खेमेबाजी के नजरिये से उनके विरोधियों के रूप में देखे/पहचाने जाते हैं; और इस तरह से गौरव गर्ग ने अनुभव की कमी की शिकायत को निष्प्रभावी करने में भी सफलता प्राप्त की है । उल्लेखनीय है कि राजेश गुप्ता और उनके कुछेक समर्थकों व शुभचिंतकों ने सीनियर/जूनियर का हवाला देते हुए दोनों उम्मीदवारों के बीच तुलना करने की कोशिश की और तर्क दिया कि राजेश गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट व लायनिज्म में काफी समय हो गया है, जिस कारण उन्हें अच्छा अनुभव है - जबकि गौरव गर्ग को डिस्ट्रिक्ट व लायनिज्म में कम समय हुआ है और इस नाते उनका अनुभव कम है । इस तर्क से राजेश गुप्ता की उम्मीदवारी के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया गया; लेकिन यह प्रयास इसलिए कामयाबी की राह पर नहीं बढ़ सका क्योंकि लोगों ने यह देखने/समझने/परखने की कोशिश की कि ज्यादा अनुभवी होने के बावजूद राजेश गुप्ता ने दिया/किया क्या है - डिलीवर क्या किया है ? इस कोशिश में राजेश गुप्ता का ट्रेक रिकॉर्ड जब बहुत ही खराब देखा/पाया गया, तो उनके सीनियर होने के नाते बढ़त बनाने के प्रयास की सारी हवा निकल गई । हमारे यहाँ एक बड़ी मशहूर कहावत भी है - 'बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खुजूर/ पंछी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर ।' लोगों ने माना/पाया कि राजेश गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट और लायनिज्म में समय चाहें बहुत हो गया हो, पर उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया - जो दूसरों के लिए अनुकरणीय हो; और इस तरह वह डिस्ट्रिक्ट के लिए कोई 'ऐसेट' नहीं हैं, बल्कि एक 'लायबिलिटी' हैं - और ऐसा व्यक्ति यदि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बन भी गया तो वह डिस्ट्रिक्ट पर एक बोझ ही साबित होगा । 
दूसरी तरफ गौरव गर्ग को डिस्ट्रिक्ट व लायनिज्म में ज्यादा समय भले ही न हुआ हो, लेकिन उन्हें जितना भी समय हुआ है - उतने समय में उन्होंने अपने व्यवहार और अपने आचरण से लोगों के दिल में जगह बनाई है ।सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार में गौरव गर्ग के सामने आने के बाद कई लोगों ने जिक्र किया है कि मसूरी जाने पर गौरव गर्ग से मिलने पर गौरव गर्ग ने अपनी सामर्थ्यानुसार उनकी मदद की और उनका आदर-सत्कार किया था । लोगों का यह अनुभव इसलिए और ज्यादा महत्त्वपूर्ण है - क्योंकि गौरव गर्ग ने अपना दोस्तानापूर्ण और सहयोगात्मक व्यवहार उस समय दिखाया, जब अपनी उम्मीदवारी के बारे में उन्होंने सोचा भी नहीं था । निस्वार्थ भाव से दिखाए दोस्तानापूर्ण व सहयोगपूर्ण व्यवहार के कारण ही गौरव गर्ग ने लोगों के बीच अपनी एक सच्चे लायन की पहचान बनाई है । एक सच्चे लायन के साथ-साथ एक जेनुइन लीडर वाले गुण गौरव गर्ग ने पिछले दिनों तब दिखाए, जब अपनी उम्मीदवारी के समर्थन के लिए वह डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ और प्रभावी नेता मुकेश गोयल से मिलते थे । मुकेश गोयल ने खुद ही लोगों को बताया है कि दो/तीन महीने पहले तक वह गौरव गर्ग की उम्मीदवारी के पक्ष में नहीं थे; और इसलिए गौरव गर्ग जब भी उनसे मिलते - वह उन्हें हतोत्साहित ही करते थे; कुछेक बार तो मुकेश गोयल ने गौरव गर्ग को अपनी नाराजगी और गुस्से का भी शिकार बनाया - लेकिन मुकेश गोयल खुद ही कहते/बताते हैं कि गौरव गर्ग ने उन्हें कभी पलट कर जबाव नहीं दिया, और हमेशा ही उनके प्रति सम्मान प्रकट किया । दरअसल गौरव गर्ग के इसी गरिमापूर्ण और सम्मानपूर्ण रवैये ने मुकेश गोयल को अपना मन और अपनी राय बदलने के लिए मजबूर किया और सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए गौरव गर्ग की उम्मीदवारी का विरोध करने वाले मुकेश गोयल को डिस्ट्रिक्ट व लायनिज्म के बेहतर भविष्य के लिए गौरव गर्ग की उम्मीदवारी का समर्थन करना जरूरी लगा ।
विडंबना की बात यह रही कि मुकेश गोयल के प्रति राजेश गुप्ता के व्यवहार ने भी मुकेश गोयल को गौरव गर्ग की उम्मीदवारी के समर्थन के प्रति राय बदलने के लिए 'प्रेरित' किया । दरअसल तीन महीने पहले तक मुकेश गोयल ने तरह तरह से राजेश गुप्ता को उम्मीदवार बनने के लिए राजी करने का भरसक प्रयास किया था; लेकिन राजेश गुप्ता ने निहायत बदतमीजीपूर्ण तरीके से उनसे दो-टूक कह दिया कि उनके समर्थन के भरोसे तो वह उम्मीदवार हरगिज नहीं बनेंगे - और यह बदतमीजी करते हुए राजेश गुप्ता ने न तो मुकेश गोयल की वरिष्ठता व प्रभावी हैसियत का ख्याल किया; न मुकेश गोयल के साथ रहे अपने वर्षों के संबंधों का लिहाज किया; और न इस बात पर ध्यान दिया कि एक वरिष्ठ लायन होने के नाते उन्हें मुकेश गोयल जैसे नेता के साथ ही नहीं, बल्कि किसी के साथ भी ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए । आज/अब बार बार अपने साथ किए गए वायदे की याद दिलाने और संबंधित पत्रों की फोटो दिखाने वाले राजेश गुप्ता यदि लायन वर्ष के शुरु से उम्मीदवार के रूप में सक्रिय रहते, लोगों से मिलते/जुलते, विभिन्न क्लब्स तथा डिस्ट्रिक्ट के आयोजनों में अपनी उपस्थिति दिखाते - और समय रहते मुकेश गोयल की बात मान लेते, तो हो सकता है कि डिस्ट्रिक्ट का चुनावी परिदृश्य आज कुछ और होता । लेकिन राजेश गुप्ता ने अपने व्यवहार से बार बार दिखाया/जताया है कि सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता और समझ उनमें है ही नहीं; और वह सिर्फ अपने ही साथियों के साथ धोखेबाजी कर सकते हैं तथा अपने वरिष्ठों के साथ बदतमीजी कर सकते हैं । अपने साथ किए गए वायदे की बात बार बार करके राजेश गुप्ता वास्तव में अपने 'धोखेबाजी'भरे रवैये को ही दिखा/जता रहे हैं, और इसीलिए उनकी यह चालाकी उनकी उम्मीदवारी को कोई फायदा पहुँचाती हुई नहीं दिख रही है । डिस्ट्रिक्ट में लोगों को लग रहा है कि कुछेक लोगों की हरकतों के कारण डिस्ट्रिक्ट में जो बदमजगी फैली है और डिस्ट्रिक्ट की लायन समुदाय में जो भारी बदनामी हुई है; जिसे सुधारने की अजय सिंघल के गवर्नर-काल से शुरू हुई कोशिशों को विनय मित्तल के गवर्नर-काल में नई ऊँचाई व दृढ़ता मिली है - उन कोशिशों को जारी रखने के लिए गौरव गर्ग जैसे व्यक्ति को ही गवर्नर चुना जाना चाहिए । विनय मित्तल, संजीवा अग्रवाल, अश्वनी काम्बोज यूँ तो अलग अलग क्षमताओं व सोच के लोग हैं - लेकिन डिस्ट्रिक्ट व लायनिज्म की भलाई के लिए इन्होंने आपस में जिस तरह का तालमेल बनाया है; उस तालमेल को आगे भी जारी रखने के लिए - डिस्ट्रिक्ट के लोगों को लग रहा है कि गौरव गर्ग का सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुना जाना जरूरी है ।

Thursday, March 7, 2019

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल की एक्जीक्यूटिव कमेटी में शामिल होने के कारण, धोखाधड़ी से चेयरमैन बनने/बनवाने की हरकत में अविनाश गुप्ता को हरीश चौधरी के सहयोगी की भूमिका में 'पहचाना' गया

नई दिल्ली । नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल में बनी आठ सदस्यीय एक्जीक्यूटिव कमेटी में अविनाश गुप्ता के शामिल होने से हरीश चौधरी के धोखेबाजी से चेयरमैन बनने के किस्से में सातवें वोटर की पहचान से जुड़ी पहेली लोगों को हल होती हुई दिखी है । लोगों ने मान लिया है कि धोखेबाजी से चेयरमैन बनने/बनाने के खेल में हरीश चौधरी के अभी तक छिपे बैठे सहयोगी अविनाश गुप्ता ही हैं । उल्लेखनीय है कि नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल के अभी तक के इतिहास में इस वर्ष पहला मौका है, जबकि पक्के तौर पर यह स्पष्ट नहीं है कि चेयरमैन के चुनाव में जीते उम्मीदवार को काउंसिल के 13 सदस्यों में से किस किस के वोट मिले हैं । डेमोक्रेटिक सिस्टम में चुनाव की अवधारणा के नजरिये से देखें, तो यह अच्छी बात है - दरअसल इसीलिए चुनाव में गोपनीयता को महत्त्व दिया जाता है । उम्मीद की जाती है कि जीता हुआ पदाधिकारी सिर्फ अपने वोटरों का ही पदाधिकारी नहीं होता है, बल्कि सभी का पदाधिकारी होता है । किंतु यह बात आदर्श और नैतिकता की किताबी बात बन कर ही रह गई है । नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल में भी हर कोई हमेशा ही कुर्सी पाने की तिकड़मों में लगा नजर आता है और इसके चलते चुनाव से संबद्ध डेमोक्रेटिक वैल्यूज मजाक बन कर रह गए हैं । यहाँ ग्रुप बनाना, ईश्वर और बच्चों के नाम पर सौगंधे खाना, ग्रुप के सदस्यों को छिपा कर रखना, साजिशें करना, दोहरे खेल खेलना, धोखाधड़ी करना आदि आम बातें हैं । दरअसल इसीलिए करीब डेढ़ महीना पहले बन चुके ग्रुप के साथ धोखा करके हरीश चौधरी के चेयरमैन बनने की हरकत में उनके सहयोगी की पहचान का मामला महत्त्वपूर्ण हो उठा था - और हर कोई यह जानने को उत्सुक था कि धोखाधड़ी के खेल में उनका सहयोगी वास्तव में है कौन ?
हरीश चौधरी के धोखाधड़ी से चेयरमैन बनने की हरकत में उनके सहयोगी के रूप में दो लोगों - अविनाश गुप्ता और अजय सिंघल के नाम चर्चा में थे । रीजनल काउंसिल की कार्यप्रणाली से परिचित लोगों का मानना और कहना था कि धोखाधड़ी से चेयरमैन बने हरीश चौधरी का दूसरा सहयोगी छिपने की चाहें कितनी भी कोशिश करें - लेकिन अपराधशास्त्र के अनुसार जिस तरह हर अपराधी कोई न कोई सुबूत/संकेत छोड़ ही देता है - ठीक वैसे ही एक्जीक्यूटिव कमेटी का गठन होने पर हरीश चौधरी का दूसरा सहयोगी खुद-ब-खुद सामने आ ही जायेगा । ऐसा मानने और कहने वालों का तर्क रहा कि हरीश चौधरी को चेयरमैन बनवाने की धोखाधड़ी में शामिल उनका दूसरा सहयोगी खुद को एक्जीक्यूटिव कमेटी में रखने के लोभ से बच नहीं पायेगा । चूँकि हर 'अपराध' और या हर 'धोखे' के पीछे कोई ठोस कारण या स्वार्थ होता ही है; इसलिए माना/समझा गया कि धोखाधड़ी से चेयरमैन बनने की हरकत में हरीश चौधरी का साथ देने वाले का भी कोई बड़ा स्वार्थ होगा ही - जिसे वह सत्ता खेमे में शामिल होकर ही पूरा कर सकेगा; और इसके लिए उसे एक्जीक्यूटिव कमेटी में रहना ही होगा । इसीलिए एक्जीक्यूटिव कमेटी में अविनाश गुप्ता का नाम आते/देखते ही लोगों ने मान लिया कि धोखाधड़ी से चेयरमैन बनने की हरीश चौधरी की हरकत में अविनाश गुप्ता ही उनके सहयोगी हैं । अविनाश गुप्ता को चेयरमैन बनने की जल्दी में देखा/पहचाना जाता रहा है; इसलिए माना/समझा जाता है कि अविनाश गुप्ता ने इस उम्मीद में धोखाधड़ी से चेयरमैन बनने की हरीश चौधरी की हरकत में सहयोगी बनना स्वीकार कर लिया होगा - ताकि अगले वर्ष वह चेयरमैन बन सकें । एक्जीक्यूटिव कमेटी में शामिल होने के कारण, धोखाधड़ी से चेयरमैन बनने/बनवाने की हरकत में सहयोगी की भूमिका निभाते 'पहचाने' जाने से अविनाश गुप्ता के लिए अगले वर्ष चेयरमैन बनने का 'सपना' लेकिन फिलहाल मुसीबत में फँसता दिख रहा है ।

Wednesday, March 6, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के बाकी तीनों संभावित उम्मीदवारों को अलग अलग कारणों से बहुत ही खराब स्थिति में देखने के चलते अपनी स्थिति को मजबूत मानने के कारण ही रवि गुगनानी सलाह/सुझाव देने वाले अपने समर्थकों व शुभचिंतकों पर भड़क रहे हैं क्या ?

रोहतक । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी के अभियान को लेकर मिलने वाली सलाह पर नाराजगी प्रकट करके रविंदर उर्फ रवि गुगनानी अपने समर्थकों व शुभचिंतकों को ही नाराज करके अपने लिए मुश्किलों को बढ़ा रहे हैं क्या ? मजे की बात यह है कि यह सवाल रवि गुगनानी की उम्मीदवारी के समर्थकों के बीच ही उठ रहा है, और उन्हें परेशान कर रहा है । समर्थकों का मानना/कहना है कि रवि गुगनानी का रवैया उन्हें उनके संभावित सहयोगियों/समर्थकों से दूर करने का काम कर रहा है; और समस्या की बात यह है कि रवि गुगनानी इस बात को समझ/पहचान भी नहीं रहे हैं । पिछले दिनों दरअसल हुआ यह कि रवि गुगनानी को उनके कुछेक शुभचिंतकों ने बताने/समझाने की कोशिश की कि अपनी उम्मीदवारी के लिए लोगों के बीच माहौल बनाने तथा समर्थन जुटाने के लिए वह पर्याप्त सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं, और इस कारण लोग उनकी उम्मीदवारी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं । शुभचिंतकों की इस तरह की बातों को फीडबैक की तरह लेने तथा सावधान होने की बजाये रवि गुगनानी शुभचिंतकों पर ही यह कहते हुए भड़क उठे कि वह उन्हें डरा रहे हैं । रवि गुगनानी का कहना रहा कि उन्हें पता है कि उन्हें अपनी उम्मीदवारी के लिए कैसे अभियान चलाना है, और वह अपने अभियान पर पूरा ध्यान दिए हुए हैं; लेकिन उनके नजदीकी और शुभचिंतक जानते/समझते कुछ हैं नहीं - और उन्हें डराते रहते हैं । रवि गुगनानी के इस रवैये से नाराज उनके कुछेक नजदीकियों व शुभचिंतकों ने इन पंक्तियों के लेखक तक से बताया/कहा कि अब वह आगे से रवि गुगनानी को न कोई फीडबैक देंगे और न कोई सलाह या सुझाव !
विडंबना और मुसीबत की बात यह है कि रवि गुगनानी के कुछेक शुभचिंतकों की इस नाराजगी ने उनके अन्य समर्थकों व शुभचिंतकों को परेशान किया हुआ है; जिनका कहना है कि रवि गुगनानी का यह रवैया उनकी उम्मीदवारी को कैसा और कितना नुकसान पहुँचा सकता है - रवि गुगनानी इस बात को नहीं समझ रहे हैं । समर्थकों व शुभचिंतकों को लग रहा है कि रवि गुगनानी का यह मानना/समझना कि वह जो समझ रहे हैं और कर रहे हैं - वह ठीक है, तथा उन्हें किसी की सलाह की कोई जरूरत नहीं है, उनकी उम्मीदवारी के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है । उनके कुछेक शुभचिंतकों का ही कहना है कि अपने इसी रवैये के चलते रवि गुगनानी अभी पिछले दिनों ही विनोद बंसल और विनय भाटिया के हाथों 'इस्तेमाल' हो चुके हैं; हालाँकि कई लोगों ने उन्हें समझाया था कि यह दोनों अपने मतलब के लिए उन्हें इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन रवि गुगनानी ने पहले तो किसी की मानी/सुनी नहीं - और जब खुद उन्हें पता चला कि वह 'ठग' लिए गए हैं तो विनोद बंसल व विनय भाटिया की फजीहत करके डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में उन्होंने तमाशा और खड़ा कर दिया । उस पूरे एपीसोड में रवि गुगनानी ही हर तरह से घाटे में रहे - अपने शुभचिंतकों की चेतावनी और सलाह पर वह यदि समय रहते ध्यान देते तो उससे बच सकते थे । कुछेक लोगों का कहना है कि रवि गुगनानी को एक मोटी सी बात गाँठ बाँध लेनी चाहिए कि अब जब वह उम्मीदवार बन रहे हैं, तो लोग उन्हें तरह तरह की सलाह देंगे ही; बहुत संभव है कि उनमें से कई फालतू, बेमतलब और बेकार ही हों - लेकिन एक अच्छे 'लीडर' के रूप में उन्हें सभी को सुनना चाहिए और उन्हें महत्त्व देते हुए 'दिखना' चाहिए; करें/अपनाएँ वह जो उन्हें उचित जान पड़े । हमारे यहाँ सयानों ने कहा भी है कि 'सुनो सब की, करो मन की ।' रवि गुगनानी अभी लेकिन जिस तरह 'सुनने' से ही इंकार कर रहे हैं, और कुछ कहने/बताने वाले अपने समर्थकों व शुभचिंतकों पर ही भड़क रहे हैं - उससे वह अपनी स्थिति को ही कमजोर कर रहे हैं ।
रवि गुगनानी के नजदीकियों के अनुसार, रवि गुगनानी ऐसा दरअसल अति-आत्मविश्वासी होने के कारण भी कर रहे हैं । उन्हें लग रहा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के बाकी तीनों संभावित उम्मीदवारों की अलग अलग कारणों से बहुत ही खराब स्थिति है, इसलिए उम्मीदवार के रूप में उनकी स्थिति स्वतः ही मजबूत है - और इसलिए उन्हें ज्यादा कुछ करने की और या किसी के सलाह/मशविरे की जरूरत ही नहीं है । रवि गुगनानी के नजदीकियों का कहना/बताना है कि रवि गुगनानी को रोहतक व गुड़गाँव में एकतरफा समर्थन मिलने का विश्वास है; फरीदाबाद में भी करीब पचास प्रतिशत वोटों पर वह अपना हक दिखा/जता रहे हैं; ऐसे में उन्हें भरोसा है कि जीत के लिए बाकी जरूरी वोटों का इंतजाम दिल्ली में आसानी से हो ही जायेगा । रवि गुगनानी को अशोक कंतूर व अजीत जालान की आपसी भिड़ंत में अपनी उम्मीदवारी के लिए फायदा होता दिख रहा है, और महेश त्रिखा की उम्मीदवारी को वह गंभीरता से नहीं ले रहे हैं । महेश त्रिखा की उम्मीदवारी को लेकर रवि गुगनानी के नजदीकियों से बड़ा दिलचस्प किस्म का कमेंट सुनने को मिल रहा है - जिसमें कहा/बताया जा रहा है कि महेश त्रिखा के क्लब को 'अपने ही' उम्मीदवार को अकेला छोड़ देने और निपटा देने का अनोखा शौक है - जैसा कि क्लब के लोगों ने अमरजीत सिंह के साथ किया था, वैसा ही वह महेश त्रिखा के साथ करते हुए दिख रहे हैं; इस कहने/बताने में यह और जोड़ा जा रहा है कि महेश त्रिखा को जब अपने क्लब के ही प्रमुख लोगों/नेताओं का समर्थन मिलता नहीं दिख रहा है, तो डिस्ट्रिक्ट के बाकी लोगों को क्या जरूरत पड़ी है कि वह महेश त्रिखा की उम्मीदवारी के साथ जुड़े । उल्लेखनीय है कि महेश त्रिखा के क्लब में दो पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर - सुरेश जैन और संजय खन्ना सदस्य हैं, लेकिन दोनों में से किसी को भी महेश त्रिखा की उम्मीदवारी की वकालत करते हुए नहीं सुना/देखा गया है । ऐसे में, महेश त्रिखा की उम्मीदवारी को रवि गुगनानी अपने लिए किसी चुनौती के रूप में नहीं देख रहे हैं और इसीलिए रवि गुगनानी एक उम्मीदवार के रूप में अभी ज्यादा सक्रिय होने की जरूरत नहीं समझ रहे हैं - और ऐसे में रवि गुगनानी का कोई शुभचिंतकों जब उन्हें यह बताने/समझाने की कोशिश करता है कि वह अपनी उम्मीदवारी के लिए लोगों के बीच माहौल बनाने तथा समर्थन जुटाने के लिए पर्याप्त सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं, और इस कारण लोग उनकी उम्मीदवारी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं - तो रवि गुगनानी को लगता है कि वह उन्हें डरा रहा है ।

Monday, March 4, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स रंजीत भाटिया, प्रमोद विज व रमन अनेजा की तिकड़ी की तरफ से क्लब में मुसीबत खड़ी करने की आशंका के कारण ही नवीन गुलाटी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करने से बच रहे हैं क्या ?

पानीपत । अजय मदान की जोरदार तथा एकतरफा जीत से उत्साहित उनके समर्थकों व नेताओं ने अगले वर्ष होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के लिए रोटरी क्लब पानीपत मिडटाउन के वरिष्ठ सदस्य नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी को जोरशोर से घोषित कर दिया है । मजे की बात हालाँकि यह है कि नवीन गुलाटी अभी हालाँकि अपनी उम्मीदवारी को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं, और उनकी तरफ से उम्मीदवारी को लेकर अभी कोई बात सुनने को नहीं मिली है । नवीन गुलाटी के नजदीकियों का कहना है कि उन्होंने अपनी उम्मीदवारी को लेकर अपना मन तो बना लिया है, लेकिन चुनाव संबंधी सक्रियताओं की जरूरतों को एक बार वह अच्छे से समझ कर ही फाइनल फैसला करना चाहते हैं - इसलिए उनकी तरफ से अपनी उम्मीदवारी को लेकर सहमति 'घोषित' करने से अभी बचा जा रहा है । दरअसल कुछ समय पहले दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण ज्यादा ट्रैवलिंग कर सकना उनके लिए मुश्किल की बात है, इसलिए उनके लिए अभी से यह समझना बहुत जरूरी है कि पहले उम्मीदवार के रूप में और फिर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्हें आखिर कितनी ट्रैवलिंग करना पड़ेगी और उतनी ट्रैवलिंग वह सचमुच कर सकेंगे क्या ? इसके अलावा, उम्मीदवार बनने के लिए उन्हें अपने क्लब में भी हरी झंडी लेना है । नवीन गुलाटी के क्लब में रंजीत भाटिया, प्रमोद विज व रमन अनेजा के रूप में तीन तीन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स हैं - और यह बात नवीन गुलाटी के लिए मुसीबत और चुनौती की इसलिए है, क्योंकि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में बनी खेमेबाजी के नजरिये से यह तीनों नवीन गुलाटी के विरोधी हैं; और कुछेक लोगों को लगता है कि यह तीनों डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी को क्लब की हरी झंडी मिलने में रोड़ा अटकाने का काम कर सकते हैं ।
उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति जब आज जैसी/जितनी तल्ख़ और घमासानभरी नहीं थी, तब भी नवीन गुलाटी और रंजीत भाटिया व प्रमोद विज के रास्ते अलग अलग होते थे, और नवीन गुलाटी की इन लोगों से कभी नहीं बनी । करीब चार वर्ष पहले, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए नोमीनेटिंग कमेटी द्वारा अधिकृत उम्मीदवार के रूप में टीके रूबी के चुने जाने के बाद डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में तथा डिस्ट्रिक्ट के माहौल में जो गर्मी पैदा हुई, और जिसके चलते डिस्ट्रिक्ट दो खेमों में बँटता चला गया - उसमें टीके रूबी खेमे की पानीपत में बागडोर नवीन गुलाटी के हाथ में ही रही और टीके रूबी खेमे के मुख्य कर्ताधर्ताओं में नवीन गुलाटी की गिनती व पहचान होने लगी । दरअसल इसी पहचान के चलते कुछेक लोगों को आशंका है कि रंजीत भाटिया, प्रमोद विज व रमन अनेजा की तिकड़ी नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी को क्लब में ही रोकने की कोशिश करेगी । क्लब के कुछेक वरिष्ठ सदस्यों का यद्यपि यह भी कहना है कि खेमेबाजी के लिहाज से रंजीत भाटिया, प्रमोद विज और नवीन गुलाटी के बीच भले ही विरोध के संबंध रहे हों, लेकिन यह विरोध कटुता के स्तर पर पहुँचा हुआ कभी नहीं दिखा - इसलिए इस बात की संभावना दिखती नहीं है कि रंजीत भाटिया व प्रमोद विज की तरफ से नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी के सामने क्लब में कोई मुसीबत खड़ी करने की कोशिश की जाएगी । कुछेक लोगों का कहना है कि तीनों/चारों लोग सयाने लोग हैं, इसलिए लगता तो नहीं है कि नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी को क्लब में किसी भी तरह की समस्या और या अड़चन का सामना करना पड़ेगा - बाकी राजनीति तो राजनीति है, कौन दावा कर सकता है कि कल क्या होगा या नहीं होगा ? टीके रूबी को लेकर डिस्ट्रिक्ट में जो तमाशा हुआ, वह जब तक नहीं हुआ  था - तब तक कौन सोच भी सकता था कि ऐसा तमाशा हो सकता है ?
संभवतः इसीलिए अपनी उम्मीदवारी को घोषित करना और या उसे जताना/दिखाना नवीन गुलाटी ने टाला हुआ हो । वह पहले अपने क्लब में अपनी उम्मीदवारी को लेकर एक राय बना लेना चाहते होंगे और क्लब के सभी सदस्यों का समर्थन ले लेना चाहते होंगे - और उसके बाद ही एक उम्मीदवार के रूप में सामने आना चाहते होंगे । इसके साथ ही, नवीन गुलाटी अगले रोटरी वर्ष के संभावित राजनीतिक माहौल का भी आकलन कर लेना चाहते होंगे । इस वर्ष अजय मदान को जैसी धमाकेदार जीत मिली है, उसे देख कर अगले रोटरी वर्ष में दूसरे खेमे की तरफ से कोई चुनौती मिलने का डर या खतरा किसी को नहीं है । कपिल गुप्ता को लेकर भी लोगों को लग रहा है कि इस बार मिली करारी हार से कपिल गुप्ता ने सबक ले लिया होगा कि उनका जो रवैया है, उसके चलते और उसके कारण उनका डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुना जा पाना मुश्किल क्या, असंभव ही है । अजय मदान की भारी-भरकम जीत के बाद तो 'उस' तरफ जो थोड़े बहुत लोग बचे रह भी गए हैं, उनमें से कईयों के 'इस' तरफ आने के संकेत मिल रहे हैं; और यह सब देख कर माना जा रहा है कि 'इस' तरफ के उम्मीदवार को अगली बार तो अजय मदान से भी बड़ी जीत मिलेगी । इस कारण से, नवीन गुलाटी के नजदीकियों व शुभचिंतकों को लगता है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुने जाने के संदर्भ में अगला वर्ष नवीन गुलाटी के लिए सुनहरा मौका है, और उन्हें इस मौके का फायदा उठा लेना चाहिए । नवीन गुलाटी के नजदीकियों तथा उनके समर्थक व शुभचिंतक नेताओं के दावों पर यकीन करें, तो अगले रोटरी वर्ष में नवीन गुलाटी निश्चित ही उम्मीदवार हो रहे हैं - और खुद नवीन गुलाटी ही/भी जल्दी ही इस संबंध में घोषणा कर देंगे ।