Wednesday, September 11, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता ने अपने जीएमएल में रोटरी फाउंडेशन के लिए 50 लाख अमेरिकी डॉलर से ज्यादा रकम इकट्ठा करने का दावा करके अपने झूठे व बड़बोले होने का एक बार फिर सुबूत दिया

गाजियाबाद । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता के 50 लाख अमेरिकी डॉलर से ज्यादा रकम टीआरएफ डिनर में जमा होने के दावे को रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने झूठा बताया है । रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा है कि यह दीपक गुप्ता कैसा व्यक्ति है, जो इतने बड़े बड़े झूठ धड़ल्ले से बोलता है । उनका दावा रहा कि रोटरी के इतिहास में इतनी रकम किसी एक दिन रोटरी फाउंडेशन को कभी नहीं मिली है । उनका पूछना रहा कि दीपक गुप्ता क्या इस तरह का झूठ बोल कर रोटरी के इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाना चाहते हैं ? रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि दीपक गुप्ता को क्या सचमुच भरोसा है कि वह कोई भी झूठ बोलेंगे, और रोटरी फाउंडेशन तथा रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारी उसे सच मान लेंगे और उनके नाम से रिकॉर्ड दर्ज कर लेंगे ? लोगों की दिलचस्पी अब यह जानने में है कि अपने झूठे दावे पर 'रंगे हाथ' पकड़े जाने के बाद दीपक गुप्ता अब क्या बहाना लगा कर इस झूठे दावे से पीछा छुड़ाने की कोशिश करेंगे ? उल्लेखनीय है कि दीपक गुप्ता द्वारा प्रकाशित अगस्त माह के जीएमएल में दीपक गुप्ता की तरफ से उक्त दावा करते हुए एक पूरे पृष्ठ का फीचर प्रकाशित हुआ है । जीएमएल में प्रकाशित फीचर में, इतनी बड़ी रकम इकट्ठा करने/करवाने में सहयोग करने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता ने अपने डिस्ट्रिक्ट के रोटेरियंस को शुक्रिया भी कहा है ।
जीएमएल में प्रकाशित फीचर में दीपक गुप्ता द्वारा किए गए इस दावे को जिसने भी पढ़ा, वह हैरान रह गया । उक्त टीआरएफ डिनर कार्यक्रम में मौजूद रहे रोटेरियंस ही नहीं, बल्कि जो रोटेरियंस उक्त कार्यक्रम में नहीं भी थे - उन्होंने भी दीपक गुप्ता के इस दावे को सरासर झूठा बताया । रोटेरियंस का कहना रहा कि उन्हें यह तो ठीक ठीक नहीं पता है कि उक्त कार्यक्रम में वास्तव में कुल कितनी रकम इकट्ठा हुई है, लेकिन वह यह जरूर कह सकते हैं कि 50 लाख अमेरिकी डॉलर की रकम तो नहीं ही इकट्ठा हुई है ।किसी की भी समझ में नहीं आ रहा है कि दीपक गुप्ता को इतना बड़ा झूठ बोलने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी है ? दीपक गुप्ता को जानने वालों का कहना/बताना है कि दीपक गुप्ता थोड़े बड़बोले तो हैं और उन्हें लंबी लंबी छोड़ने/फेंकने की बहुत ही बुरी आदत है; लेकिन छोड़ने/फेंकने के मामले में वह इतना आगे बढ़ जायेंगे - यह उन्होंने नहीं सोचा था । उनके नजदीकियों को लगता है कि चूँकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता का गवर्नर-वर्ष बहुत ही बुरे अनुभवों से गुजर रहा है, जिसके चलते वह भारी दबाव में हैं और कुछ बड़ा करना चाहते हैं, जिससे उनकी कमियों पर पर्दा पड़ जाए और रोटरी के बड़े पदाधिकारियों व नेताओं के बीच उनका नाम हो जाए - हो सकता है कि इसी चक्कर में वह 50 लाख अमेरिकी डॉलर से ज्यादा रकम इकट्ठा करने का दावा कर बैठे हों ।
दीपक गुप्ता ने कुछ 'बड़ा करने' के चक्कर में यदि यह दावा किया है, तो इस दावे ने उल्टा ही असर किया है और इसने उनकी फजीहत में और इजाफा ही किया है । मेंबरशिप सेमीनार जैसे महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम को घोषित करने के बावजूद न करने के चलते दीपक गुप्ता पहले से ही मुसीबत में घिरे हुए थे, कि उनकी इस हरकत ने उनकी मुसीबतों को और बढ़ा दिया है । इससे पहले डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में ढाई सौ डॉलर देने की शर्त के नाम पर दीपक गुप्ता डिस्ट्रिक्ट के सदस्यों, रोटरी फाउंडेशन तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी गुलाम वाहनवती के साथ 'धोखाधड़ी' करने के आरोप में फँस चुके हैं । क्लब्स के प्रेसीडेंट्स की तरफ से दीपक गुप्ता को तब तगड़ी चोट पड़ी, जब उन्होंने क्लब्स के प्रेसीडेंट्स पर यह दबाव बनाने की कोशिश की कि अपने इंस्टॉलेशन कार्यक्रमों में वह किसे किसे आमंत्रित करें; प्रेसीडेंट्स ने उनकी यह बात मानने से साफ इंकार कर दिया और तब दीपक गुप्ता को मनमसोस कर रह जाना पड़ा - और क्लब्स के कार्यक्रमों में उन्हें उन लोगों के साथ मंच पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिन्हें वह कार्यक्रम से ही बाहर रखना चाहते थे । अपनी बातों और अपनी हरकतों के चलते डिस्ट्रिक्ट में प्रेसीडेंट्स तथा वरिष्ठ रोटेरियंस के बीच दीपक गुप्ता कई मौकों पर लज्जित हो चुके हैं, तो रोटरी के बड़े पदाधिकारियों व नेताओं के बीच कई बार मजाक का विषय बन चुके हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने कोई सबक नहीं सीखा है । रोटरी फाउंडेशन के लिए एक ही कार्यक्रम में 50 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की रकम इकट्ठा करने के दावे के जरिये दीपक गुप्ता ने एक बार फिर दिखाया/बताया है कि उनके गवर्नर-वर्ष में बेवकूफियों, अराजकता तथा झूठे दावों का ही जोर रहेगा; और वह अपनी हरकतों से अपने साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट व रोटरी का भी मजाक बनाते रहेंगे । 

Monday, September 9, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी चक्कर से बचने के लिए नवीन गुलाटी चाहते हैं कि उनके समर्थक नेता पंकज डडवाल की उम्मीदवारी को वापस करवाएँ, लेकिन नेता लोग इसमें दूसरी मुसीबतें देख रहे हैं और चाहते हैं कि चुनाव हो ही जाए

पानीपत । नवीन गुलाटी अपने समर्थक नेताओं से इस बात पर कुछ खफा खफा नजर आ रहे हैं कि वह उन्हें निर्विरोध डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुनवाने/बनवाने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं । उल्लेखनीय है कि नवीन गुलाटी इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवार हैं, और उन्हें टीके रूबी व जितेंद्र ढींगरा के नेतृत्व वाले सत्ता खेमे के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । सत्ता खेमे के समर्थन के चलते उनकी चुनावी स्थिति को खासा मजबूत माना/समझा जा रहा है । उनकी मजबूत स्थिति को देखते हुए ही पूर्व प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू के नेतृत्व वाले खेमे ने अपना उम्मीदवार न लाने में ही भलाई देखी है । राजा साबू ने हालाँकि अपनी तरह से नवीन गुलाटी के रास्ते में रोड़े अटकाने के प्रयास तो किए थे, और महिला गवर्नर लाने/बनवाने की चर्चा चला कर चालाकी खेलने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी चालाकी चली नहीं । कपिल गुप्ता की उम्मीदवारी आने की आशंका के चलते चुनावी लड़ाई थोड़ी दिलचस्प होने की उम्मीद थी, लेकिन कपिल गुप्ता के मैदान छोड़ देने से नवीन गुलाटी के लिए मामला और आसान हो गया । रोटरी क्लब शिमला मिडटाऊन की तरफ से पंकज डडवाल की उम्मीदवारी के प्रस्तुत होने से चुनावी लड़ाई के हालात तो बन गए हैं, लेकिन नवीन गुलाटी व पंकज डडवाल के बीच होने वाले चुनावी मुकाबले को हर कोई एक बेमेल मुकाबले के रूप में ही देख/समझ रहा है, और मान रहा है कि नवीन गुलाटी बड़े अंतर से आसानी से चुनाव जीत जायेंगे ।
नवीन गुलाटी की समस्या लेकिन दूसरी है । वह चाहते हैं कि उन्हें चुनावी मुकाबले का सामना न करना पड़े और वह निर्विरोध ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुन लिए जाएँ । उन्हें भी लगता है और कई लोगों ने उन्हें समझाया भी है कि उनके समर्थक नेता यदि पंकज डडवाल व उनके नजदीकियों से बात करें तो पंकज डडवाल को अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के लिए राजी किया जा सकता है और उनके निर्विरोध चुने जाने का रास्ता बन सकता है । नवीन गुलाटी के नजदीकियों के अनुसार, नवीन गुलाटी लेकिन यह देख कर हैरान/परेशान हैं कि उनके समर्थक नेता पंकज डडवाल की उम्मीदवारी वापस करवाने में कोई दिलचस्पी ही नहीं ले रहे हैं । नेताओं का मानना/कहना है कि वह यदि पंकज डडवाल की उम्मीदवारी वापस करवाने के लिए प्रयास करेंगे तो इससे दो नुकसान होंगे; एक नुकसान तो यह होगा कि डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच संदेश जायेगा कि वह चुनाव से डर रहे हैं और इस कारण उनकी राजनीतिक साख व धाक को चोट पहुँचेगी; तथा दूसरा नुकसान यह होगा कि उन्हें अगले रोटरी वर्ष में पंकज डडवाल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुनवाने/बनवाने का वायदा करना होगा और फिर उस वायदे को पूरा करने में जुटना होगा । इस कारण से नेता लोग चाहते हैं कि चुनाव हो और बुरी हार के बाद पंकज डडवाल का चक्कर आगे के लिए भी पूरी तरह से खत्म हो - इस कारण से वह पंकज डडवाल से या उनके 'गॉडफादर' से कोई समझौता करने के लिए मजबूर भी नहीं होंगे ।
नेताओं को भी और दूसरे लोगों को भी यह समझने में मुश्किल हो रही है कि तमाम अनुकूल स्थितियों के बावजूद नवीन गुलाटी चुनाव से बचने की कोशिश क्यों कर रहे हैं । नवीन गुलाटी के नजदीकियों के अनुसार, नवीन गुलाटी को अपनी चुनावी जीत को लेकर कोई शक/संदेह नहीं है; वह तो चुनाव से इसलिए बचना चाहते हैं ताकि चुनावी चक्कर में होने वाली उनकी भागदौड़ बच जाए । नवीन गुलाटी समझ रहे हैं कि पंकज डडवाल उम्मीदवार के रूप में उनके सामने टिक भले ही न पा रहे हों, लेकिन उम्मीदवार बने रह कर वह नवीन गुलाटी को भागदौड़ करने के लिए तो मजबूर कर ही देंगे । चुनाव होने की स्थिति में तमाम अनुकूल स्थितियों के बावजूद नवीन गुलाटी को क्लब्स के प्रेसीडेंट्स तथा अन्य प्रमुख लोगों से मिलना-जुलना तो पड़ेगा ही और इसके लिए जगह जगह आना-जाना भी पड़ेगा । इस चक्कर में पैसे भी खर्च होंगे । ऐसे में नवीन गुलाटी को लगता है कि पंकज डडवाल की उम्मीदवारी को यदि वापस करवा दिया जाए, और उनके लिए निर्विरोध डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुने जाने का रास्ता बन जाए - तो फिर वह सारे झंझट से बच जायेंगे । नवीन गुलाटी को विश्वास है कि उनके समर्थक नेता लोग यदि प्रयास करेंगे तो पंकज डडवाल को अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के लिए राजी कर लेंगे । नेता लोगों को लेकिन लगता है, जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है, कि पंकज डडवाल की उम्मीदवारी को वापस करवाने के चक्कर में पड़ेंगे, तो और कई मुसीबतों को आमंत्रित कर बैठेंगे । समर्थक नेताओं के इस तर्क के चलते नवीन गुलाटी अपनी 'माँग' पर ज्यादा जोर तो नहीं दे पा रहे हैं, लेकिन अपने समर्थक नेताओं के रवैये से वह संतुष्ट व खुश भी नहीं हैं ।

Sunday, September 8, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा का पहला ही कार्यक्रम प्रमुख पदाधिकारियों व वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स की बेइज्जती करने तथा पैसा कमाने का जरिया बनने के आरोपों के चलते बदनामी व फजीहत का शिकार हुआ

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा की अपने पहले कार्यक्रम - पेम वन में मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अनूप मित्तल, पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रंजन ढींगरा व विनय अग्रवाल की एक साथ 'बेइज्जती' करने के मुद्दे पर जैसी फजीहत हुई है, वैसी डिस्ट्रिक्ट में इससे पहले शायद ही कभी किसी की हुई होगी । फजीहत का शिकार होने के बाद संजीव राय मेहरा ने सारी कमियों/गलतियों का ठीकरा डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर रवि चौधरी के सिर फोड़ कर अपने को बचाने की कोशिश की है; लेकिन इसके लिए भी उन्हें लोगों से सुनने को मिल रहा है कि छोटी और घटिया सोच रखने वाले रवि चौधरी को उन्होंने जब डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बना लिया है, तो उन्हें उस पर लगाम रखना भी तो सीखना पड़ेगा । संजीव राय मेहरा के नजदीकियों व शुभचिंतकों ने उन्हें आगाह किया है कि उन्होंने यदि रवि चौधरी की हरकतों पर लगाम नहीं लगाई तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्हें सिर्फ फजीहत और बदनामी ही झेलने को मिलेगी । पेम वन के आयोजन के नाम पर तथा डिस्ट्रिक्ट टीम के प्रमुख पदों को 'बेचने' के जरिये मोटी रकम कमाने/बनाने के आरोप भी संजीव राय मेहरा पर लग रहे हैं; हालाँकि कई लोग यह कहते हुए भी सुने गए हैं कि पता नहीं संजीव राय मेहरा को कुछ मिलेगा भी, या सारी रकम रवि चौधरी खुद अकेले ही हड़प जायेंगे ?
संजीव राय मेहरा ने पेम वन के आयोजन में पहला झटका डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन को दिया । उल्लेखनीय है कि रोटरी में नियम और व्यवस्था के अनुसार डिस्ट्रिक्ट में कोई भी कार्यक्रम डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की तरफ से ही होता है - और हो सकता है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के भी जो कार्यक्रम होते हैं; प्रोटोकॉल के अनुसार, उनका निमंत्रण भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की तरफ से ही जाता है । संजीव राय मेहरा ने लेकिन मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन को पूरी तरह इग्नोर करते हुए तथा प्रोटोकॉल की ऐसीतैसी करते हुए निमंत्रण अपनी तरफ से दिया । सुरेश भसीन की इस बेइज्जती के लिए कुछेक लोग सुरेश भसीन को भी यह तर्क देते हुए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं कि सुरेश भसीन रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत करते तो संजीव राय मेहरा और रवि चौधरी यह हरकत नहीं कर पाते; लेकिन जब सुरेश भसीन ही अपनी बेइज्जती पर चुप लगा गए तो फिर दूसरा कौन उनकी मदद कर सकता है । वरिष्ठ रोटेरियंस ने अमित जैन के गवर्नर-वर्ष में हुए इसी से मिलती-जुलती हरकत को याद करते हुए बताया कि उस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में असित मित्तल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार विनोद बंसल के साथ मिल कर अमित जैन को इग्नोर करते हुए अपने एक कार्यक्रम की तैयारी शुरू कर दी थी । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अमित जैन को चूँकि जितेंद्र गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थन में देखा जा रहा था, इसलिए अमित जैन को बेइज्जत करने की असित मित्तल की मुहिम में विनोद बंसल भी बढ़चढ़ कर सहयोग कर रहे थे । आमतौर पर झगड़े-झंझट से दूर रहने वाले अमित जैन ने रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत कर उक्त कार्यक्रम को 'नल एंड वॉइड' घोषित करने का अनुरोध कर दिया, जिसकी जानकारी मिलने पर असित मित्तल ने फिर अमित जैन से विचार-विमर्श करके कार्यक्रम तय किया और प्रोटोकॉल के हिसाब से कार्यक्रम हुआ । लोगों का कहना है कि सुरेश भसीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हैं, वह चाहें तो संजीव राय मेहरा को प्रोटोकॉल के हिसाब से कार्यक्रम करने के लिए 'मजबूर' कर सकते हैं - और अपने आप को बेइज्जत होने से बचा सकते हैं ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अनूप मित्तल का प्रोफाइल डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी में नहीं छापा गया; इसके लिए बड़ा फनी कारण बताया गया कि प्रोफाइल माँगने और तैयार करने के बावजूद उसे इसलिए नहीं छापा जा सका, क्योंकि डायरेक्टरी में पेज नहीं बचा था । रंजन ढींगरा को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयर जैसे महत्त्वपूर्ण पद पर होने के बावजूद कार्यक्रम के महत्त्वपूर्ण मौकों पर मंच पर नहीं बुलाया गया । अनूप मित्तल और रंजन ढींगरा ने लोगों के बीच खुलकर अपनी नाराजगी को प्रदर्शित किया । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय अग्रवाल के लिए मुसीबत की बात यह रही कि अपनी उपेक्षा पर वह बेचारे खुलकर अपनी नाराजगी भी व्यक्त नहीं कर सके । दरअसल उन्हें तथा अन्य लोगों को उम्मीद थी कि संजीव राय मेहरा व रवि चौधरी की जोड़ी उन्हें डिस्ट्रिक्ट एडवाइजरी काउंसिल में अवश्य ही रखेंगे; लेकिन जब उन्हें वहाँ नहीं देखा/पाया गया, तो उन्होंने शिकायती स्वर में कुछ कहने/बोलने की कोशिश की तो लोगों ने यह कहते हुए उनका ही मजाक बनाना शुरू कर दिया कि आप तो इन दोनों की बड़ी तरफदारी करते रहे हैं, फिर भी इन्होंने आपको अपनी एडवाइजरी काउंसिल में रखने लायक नहीं समझा । कुछेक लोगों ने विनय अग्रवाल के साथ चुटकी भी ली कि आप क्या समझते थे कि रवि चौधरी सिर्फ दूसरों के साथ बदतमीजी करेगा, आपके साथ नहीं करेगा - अब जब उसकी 'बदतमीजी' का शिकार आप भी हो गए हैं, तो कैसा लग रहा है ? इस तरह की बातें सुनकर विनय अग्रवाल ने समझ लिया कि वह तो एडवाइजरी काउंसिल में जगह न मिलने का रोना भी किसी के सामने नहीं रो सकते हैं; यदि रोयेंगे तो हर कोई उनसे हमदर्दी दिखाने की बजाये उनका मजाक ही बनायेगा । 
संजीव राय मेहरा पेम वन के आयोजन तथा डिस्ट्रिक्ट टीम के प्रमुख पदों को 'बेचने' के जरिये मोटी रकम 'कमाने' के आरोपों के घेरे में भी फँसे हैं । पेम वन के आयोजन को उन्होंने 26 क्लब्स से स्पॉन्सर करवाया, जिसके तहत प्रत्येक क्लब से 60 हजार रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक लिए गए । कुछेक रोटेरियंस ने व्यक्तिगत रूप से आयोजन को स्पॉन्सर किया । कई लोगों को लगता है कि संजीव राय मेहरा ने जितना पैसा इकट्ठा किया, खर्च उसका आधा भी नहीं हुआ । डायरेक्टरी में पेज कम पड़ जाने के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी का प्रोफाइल नहीं छापे जा सकने वाली बात पर गौर करें, तो समझ सकते हैं कि संजीव राय मेहरा ने पैसे खर्च करने के मामले में कैसी कैसी कंजूसी व बचत की होगी और कितने पैसे बचाये होंगे ? अपनी डिस्ट्रिक्ट टीम के प्रमुख पदों के लिए चुने गए लोगों से भी संजीव राय मेहरा द्वारा मोटी मोटी रकमें बसूलने की चर्चा है । लोगों के बीच चर्चा सुनी जा रही है कि संजीव राय मेहरा ने अपनी गवर्नरी को पैसा कमाने/जुटाने का जरिया बना लिया है । संजीव राय मेहरा के नजदीकियों व शुभचिंतकों का कहना है कि असल में पैसों के मामले में रवि चौधरी की चूँकि खासी बदनामी रही है और उनके एकाउंट को लेकर भी खासी फजीहत वाली स्थिति रही थी, इसलिए भी संजीव राय मेहरा की हर कार्रवाई को शक/संदेह की निगाह से देखा जायेगा और यदि उन्होंने अपने तौर-तरीकों में पारदर्शिता नहीं रखी तो उनके हिस्से में भी रवि चौधरी जैसी ही बदनामी आएगी - और जो आना शुरू भी हो गई है ।

Saturday, September 7, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में मेंबरशिप सेमीनार जैसे महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम की कुर्बानी देकर की गई बॉलीवुड नाईट के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता डिस्ट्रिक्ट के लोगों के साथ-साथ रोटरी इंटरनेशनल के बड़े पदाधिकारियों व नेताओं के बीच भी फजीहत का शिकार बने

गाजियाबाद । डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप सेमीनार को रद्द करके बॉलीवुड नाईट करवाने की हरकत के चलते हुई फजीहत के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता को बॉलीवुड नाईट कार्यक्रम से दूर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा । इस कार्यक्रम को लेकर दीपक गुप्ता को दोहरी मुसीबत झेलना पड़ रही है । डिस्ट्रिक्ट के दिल्ली व सोनीपत क्षेत्र के रोटेरियंस व प्रेसीडेंट्स इस कारण उनसे नाराज हुए हैं कि उन्हें कार्यक्रम का निमंत्रण नहीं मिला और जिसके चलते वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके; दूसरी तरफ रोटरी के बड़े नेताओं ने दीपक गुप्ता की इस बात के लिए आलोचना की कि उन्होंने बॉलीवुड नाईट के नाम पर मेंबरशिप सेमीनार जैसे रोटरी इंटरनेशनल के महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम की गुपचुप तरीके से बलि चढ़ा दी । रोटरी के कुछेक बड़े नेताओं ने 'रचनात्मक संकल्प' से भी 7 सितंबर के लिए मेंबरशिप सेमीनार की पूर्व घोषणा के तथ्य की जानकारी ली और पुष्टि की, जिसके तहत 'रचनात्मक संकल्प' ने उन्हें बताया कि अपने गवर्नर वर्ष की डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी में पृष्ठ 102 पर खुद दीपक गुप्ता ने कार्यक्रम का शिड्यूल प्रकाशित किया हुआ है । दीपक गुप्ता ने 27 सदस्यों की भारी-भरकम डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप कमेटी बनाई हुई है, जिसके चेयरमैन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश अग्रवाल हैं; लेकिन न दीपक गुप्ता ने और न रमेश अग्रवाल ने किसी को बताया है कि 7 सितंबर को होने वाले मेंबरशिप सेमीनार का आखिर हुआ क्या ? रमेश अग्रवाल की भी इस बात के लिए आलोचना हो रही है कि उन्हें यदि चेयरमैन बनने का शौक है, तो उन्हें चेयरमैन पद की जिम्मेदारी निभाने में तथा नियमानुसार पद के अनुरूप काम करने में भी उन्हें दिलचस्पी क्यों नहीं है ।
मजे की बात यह है कि दीपक गुप्ता की तरफ से लगातार यही तर्क दिया जा रहा है कि बॉलीवुड नाईट डिस्ट्रिक्ट का कार्यक्रम नहीं है; लेकिन उनकी तरफ से आधिकारिक रूप से यह नहीं बताया जा रहा है कि यह कार्यक्रम आखिर था किसका ? रोटरी की व्यवस्था के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट में कोई भी कार्यक्रम या तो क्लब करता है और या डिस्ट्रिक्ट । डिस्ट्रिक्ट का कार्यक्रम कुछेक क्लब्स तथा डिस्ट्रिक्ट टीम के कुछेक पदाधिकारी मिल कर करते हैं । बॉलीवुड नाईट का आयोजन दो असिस्टेंट गवर्नर्स तथा उनके जोन के प्रेसीडेंट्स ने किया है, तो इसे डिस्ट्रिक्ट का ही कार्यक्रम माना जायेगा । रोटरी के नियम-कानूनों तथा उसकी व्यवस्था को जानने/समझने वाले वरिष्ठ रोटेरियंस का कहना है कि बॉलीवुड नाईट का जो आयोजन हुआ है, उसमें कुछ भी गलत नहीं है; गलत सिर्फ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता का रवैया है; अपने रवैये और अपनी बेवकूफी के चलते वह ऐसी मुसीबत में फँस गए हैं कि उससे निकलने के लिए उन्हें नए नए बहाने गढ़ने पड़ रहे हैं तथा मुँह छिपाना पड़ रहा है । उल्लेखनीय है कि बॉलीवुड नाईट कार्यक्रम जिस होटल में हुआ, वह दीपक गुप्ता के घर से मुश्किल से सौ मीटर की दूरी पर होगा, लेकिन फिर भी दीपक गुप्ता ने कार्यक्रम में न जाने में ही अपनी भलाई देखी/पहचानी । रोटरी में इससे पहले ऐसा शायद ही किसी डिस्ट्रिक्ट में किसी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के साथ हुआ होगा कि दो असिस्टेंट गवर्नर्स अपने जोन के प्रेसीडेंट्स के साथ मिल कर एक कार्यक्रम करें, जिसमें कई रोटेरियंस शामिल हुए हों, लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को उस कार्यक्रम से मुँह छिपाना पड़ा हो ।
दीपक गुप्ता को अपनी टीम के दो प्रमुख पदाधिकारियों तथा 12 क्लब्स के प्रेसीडेंट्स द्वारा आयोजित कार्यक्रम से इसलिए मुँह छिपाना पड़ा, क्योंकि जिस तारीख को यह कार्यक्रम हुआ, उस तारीख पर उन्होंने मेंबरशिप सेमीनार करने की घोषणा की हुई थी । 7 सितंबर को होने वाले मेंबरशिप सेमीनार का क्या हुआ, यह डिस्ट्रिक्ट में किसी को नहीं पता - डिस्ट्रिक्ट की मेंबरशिप कमेटी के पदाधिकारियों को भी इस बारे में कुछ नहीं पता । कमेटी के चेयरमैन रमेश अग्रवाल को भी पता है या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है । गारंटी लेकिन इस बात की जरूर है कि चेयरमैन के रूप में रमेश अग्रवाल ने भी अपनी कमेटी के पदाधिकरियों को कोई जानकारी नहीं दी है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता एक तरफ तो बॉलीवुड नाईट के लिए मेंबरशिप सेमीनार की कुर्बानी करने को लेकर फजीहत का शिकार बन रहे हैं; दूसरी तरफ डिस्ट्रिक्ट के तमाम रोटेरियंस व पदाधिकारी इस बात पर खफा हैं कि उन्हें बॉलीवुड नाईट से दूर रखा गया है । दिल्ली व सोनीपत क्षेत्र के वरिष्ठ रोटेरियंस तथा क्लब्स के प्रेसीडेंट्स व अन्य पदाधिकारी इस बात पर नाराजगी जता/दिखा रहे हैं कि उन्हें क्यों इस कार्यक्रम से अलग-थलग रखा गया और निमंत्रण तक नहीं दिया गया । डिस्ट्रिक्ट में यह भी कहा/सुना जा रहा है कि बॉलीवुड नाईट वास्तव में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार ललित खन्ना का कार्यक्रम था, जिसके लिए दीपक गुप्ता ने मेंबरशिप सेमीनार की बलि चढ़ा दी । दीपक गुप्ता की इस हरकत के चलते विवाद में फँसा बॉलीवुड नाईट कार्यक्रम ललित खन्ना के लिए भी मुसीबत का कारण बना । ललित खन्ना के समर्थकों व शुभचिंतकों को डर हुआ है कि दीपक गुप्ता की हरकत के चलते बॉलीवुड नाईट कार्यक्रम को लेकर रोट्रेरियंस के बीच जो नाराजगी पैदा हुई है, वह कहीं ललित खन्ना की उम्मीदवारी के अभियान पर प्रतिकूल असर न डाले ।

Friday, September 6, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन में मेरठ के बाद गाजियाबाद में भी पंकज बिजल्वान की उम्मीदवारी के संदर्भ में मुकेश गोयल की राजनीति को तगड़ा झटका लगा, जहाँ बड़े क्लब्स के पदाधिकारियों व सदस्यों ने उनके कार्यक्रम से दूर रहने का फैसला किया 

गाजियाबाद । बड़े क्लब्स के पदाधिकारियों तथा सदस्यों के दूर रहने के कारण सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए पंकज बिजल्वान की उम्मीदवारी को समर्थन दिलवाने तथा 'दिखाने' के उद्देश्य से कल देर शाम मुकेश गोयल द्वारा आयोजित की गई मीटिंग को फेल हुआ माना जा रहा है । मीटिंग में उपस्थित हुए लोगों के अनुसार ही, गाजियाबाद क्षेत्र के बड़े क्लब्स - पाँच और उससे अधिक वोट वाले क्लब्स के पदाधिकारियों तथा सदस्यों को मीटिंग में अनुपस्थित देख कर खुद मुकेश गोयल तथा दूसरे नेताओं को भारी झटका लगा और उनके मुँह लटक गए । मुकेश गोयल को सबसे तगड़ा झटका लायंस क्लब गाजियाबाद से ही लगा; क्लब के सदस्य पूर्व गवर्नर अजय सिंघल तो कार्यक्रम में थे, लेकिन उनके साथ क्लब के एक ही सदस्य पहुँचे । लायंस क्लब गाजियाबाद डिस्ट्रिक्ट का सबसे बड़ा क्लब है; बड़ा क्लब होने के नाते इस क्लब में हर खेमे के समर्थक हैं; इस नाते किसी भी कार्यक्रम में दस/पंद्रह सदस्यों का पहुँचना/होना एक सामान्य बात रही है । मुकेश गोयल का इस क्लब के सदस्यों के बीच विशेष प्रभाव भी रहा है, इसलिए उम्मीद की जा रही थी कि मुकेश गोयल के कार्यक्रम में लायंस क्लब गाजियाबाद के सदस्यों की बड़ी संख्या देखने को मिलेगी । लेकिन अजय सिंघल सहित कुल दो सदस्यों को कार्यक्रम में पहुँचा देख कर मुकेश गोयल का माथा गर्मा गया । डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि गाजियाबाद में किसी उम्मीदवार की मीटिंग हो, और उसमें लायंस क्लब गाजियाबाद के कम से कम दस/पंद्रह सदस्य न पहुँचे हों । लायंस क्लब गाजियाबाद के अलावा, क्षेत्र के और जो क्लब पाँच या उससे अधिक वोटों के हैं, उनके पदाधिकारियों व सदस्यों ने भी मुकेश गोयल के निमंत्रण को अनदेखा/अनसुना किया ।
मुकेश गोयल के नजदीकियों ने इसका ठीकरा निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर व मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन विनय मित्तल के सिर फोड़ा । उनका आरोप है कि विनय मित्तल ने क्लब्स के पदाधिकारियों व सदस्यों को कार्यक्रम में जाने से रोका । उनका दावा है कि इसके बावजूद कार्यक्रम में 24 क्लब्स के 85 से ज्यादा लायंस उपस्थित हुए । मुकेश गोयल के नजदीकियों द्वारा विनय मित्तल पर लगाए जा रहे आरोप को यदि सच मान लें, तो इससे यही बात साबित होती है कि क्लब्स के पदाधिकारियों व सदस्यों पर विनय मित्तल का प्रभाव मुकेश गोयल से ज्यादा है । उल्लेखनीय है कि इससे पहले मेरठ में अलेक्जेंडर एथलेटिक क्लब में होने वाले एक कार्यक्रम के आयोजकों द्वारा पंकज बिजल्वान का नाम निमंत्रण पत्र से उड़ा देने की घटना हो चुकी है । मुकेश गोयल लाख कोशिशों के बावजूद पंकज बिजल्वान का नाम निमंत्रण पत्र में नहीं जुड़वा सके हैं । मुकेश गोयल के नजदीकियों ने इसके लिए भी विनय मित्तल को जिम्मेदार ठहराया हुआ है । इन घटनाओं से लग रहा है कि पंकज बिजल्वान की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के मुकेश गोयल के प्रयास अपेक्षित नतीजा नहीं दे पा रहे हैं; और मुकेश गोयल के नजदीकी हालात की गंभीरता व नाजुकता को स्वीकारने तथा समझने की बजाए अपनी हर असफलता व कमजोरी के लिए विनय मित्तल को जिम्मेदार ठहरा दे रहे हैं ।
इससे कई लोगों को यह आशंका भी हो चली है कि पंकज बिजल्वान की उम्मीदवारी बनी भी रह सकेगी, या वह कोई समझौता करके बीच में ही अपनी उम्मीदवारी को वापस ले लेंगे । गाजियाबाद में हुई मीटिंग में कई लोगों ने अपनी यह आशंका व्यक्त की और पंकज बिजल्वान से सीधे ही सवाल पूछा कि उम्मीदवारी के मामले में कहीं धोखा तो नहीं दोगे । पंकज बिजल्वान ने हालाँकि उन्हें अपनी उम्मीदवारी के संदर्भ में आश्वस्त तो किया है; लेकिन उनके 'व्यवहार' से ज्यादा लोग आश्वस्त नहीं हुए हैं । कार्यक्रम में उपस्थित रहे कुछेक लोगों ने इन पंक्तियों के लेखक को बताया कि पंकज बिजल्वान 'मंच' पर अधिकतर समय तो अपने मोबाइल में ही व्यस्त रहे । अरुण मित्तल जब लोगों को संबोधित कर रहे थे, तब उनकी बात सुनने तथा उनकी बात से लोगों के बीच पैदा होने वाली प्रतिक्रिया पर ध्यान देने और उसे समझने की कोशिश करने की बजाए पंकज बिजल्वान के मोबाइल में व्यस्त रहने की तस्वीर ने लोगों को बताया/दिखाया है कि अपनी ही उम्मीदवारी के अभियान में वह स्वयं गंभीर नहीं हैं । इसीलिए कार्यक्रम में पंकज बिजल्वान की उम्मीदवारी पर आशंका व्यक्त करने वाले सवाल उठने तथा उसका जबाव देने/मिलने के बाद भी पंकज बिजल्वान की उम्मीदवारी को लेकर आशंका कम होने की बजाए गहरा और गई है । लोगों को भी लग रहा है कि मुकेश गोयल के कार्यक्रम जब फेल हो रहे हैं, और वह पंकज बिजल्वान का नाम कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र में नहीं छपवा पा रहे हैं, और उनके कार्यक्रमों से बड़े क्लब्स के पदाधिकारी व सदस्य दूर रह रहे हैं, तब पंकज बिजल्वान उम्मीदवार बने भी आखिर किसके भरोसे रहेंगे ? 

Thursday, September 5, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में मेंबरशिप सेमीनार को रद्द करके बॉलीवुड नाईट करवाने की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता की 'कार्रवाई' ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की गरिमा व प्रतिष्ठा को बदनामी के दलदल में फँसाया

गाजियाबाद । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप सेमीनार को जिस तरह से बॉलीवुड नाईट में बदल दिया है, उसके कारण डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच उनकी भारी थू-थू हो रही है । उल्लेखनीय है कि रोटरी में मेंबरशिप सेमीनार का बड़ा खास महत्त्व है, और इसे रोटरी के विस्तार व फैलाव के संदर्भ में एक जरूरी कार्यक्रम के रूप में खासतौर से डिजाईन किया गया है । इसी कारण से दीपक गुप्ता ने जब अपने गवर्नर वर्ष के महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों का शिड्यूल तय किया, तब उन्होंने मेंबरशिप सेमीनार को भी तवज्जो दी । लेकिन लगता है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नरी करते हुए उन्होंने अपनी प्राथमिकताएँ बदल ली हैं, और मेंबरशिप सेमीनार जैसे महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम की उनके लिए कोई जरूरत और या प्रासंगिकता नहीं रह गई है । दीपक गुप्ता शायद पहले और अकेले गवर्नर होंगे, जिन्होंने मेंबरशिप सेमीनार को रद्द करके बॉलीवुड नाईट जैसे कार्यक्रम को तवज्जो दी है । दीपक गुप्ता के नजदीकियों ने दीपक गुप्ता का बचाव करते हुए हालाँकि तर्क दिया है कि बॉलीवुड नाईट डिस्ट्रिक्ट का कार्यक्रम नहीं है, और इसके लिए दीपक गुप्ता को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है । नजदीकी लेकिन इस सवाल पर चुप्पी साध जाते हैं कि दीपक गुप्ता ने पहले से घोषित मेंबरशिप सेमीनार को रद्द क्यों कर दिया और क्यों यह जानकारी भी डिस्ट्रिक्ट के लोगों को देना जरूरी नहीं समझा ?
और यह तर्क भी किसी को हजम नहीं हो रहा है कि बॉलीवुड नाईट डिस्ट्रिक्ट का कार्यक्रम नहीं है; कार्यक्रम के आयोजक दो असिस्टेंट गवर्नर्स हैं - जो वास्तव में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के प्रतिनिधि होते हैं । कहने के लिए तो कहा जा रहा है कि बॉलीवुड नाईट दो असिस्टेंट गवर्नर्स तथा उनके जोन के प्रेसीडेंट्स कर रहे हैं, लेकिन दोनों जोन के कई प्रेसीडेंट्स का कहना है कि उन्हें तो इस कार्यक्रम की जानकारी ही बाद में मिली और उन्हें तो जबर्दस्ती कार्यक्रम में शामिल बताया जा रहा है । दोनों जोन के कई क्लब्स के बोर्ड मेंबर्स  का कहना है कि बॉलीवुड नाईट कार्यक्रम के संदर्भ में उनके क्लब में कोई बात नहीं हुई है, और उन्हें तो कार्यक्रम का कॉर्ड देख कर पता चला कि इसके आयोजकों में उनका अपना क्लब भी शामिल है । दो असिस्टेंट गवर्नर्स अपने जोन के क्लब्स के पदाधिकारियों को अँधेरे में रख कर - और वास्तव में उनके साथ धोखा करके उनके नाम पर एक कार्यक्रम कर रहे हैं; और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता को अपने प्रतिनिधियों की इस हरकत के बारे में पता ही नहीं है । वह क्या सो रहे हैं ? और मान लेते हैं कि पहले उन्हें इस बारे में यदि नहीं भी पता था, तो अब जब पता हो गया है, तब वह क्या कर रहे हैं ? जाहिर है कि मेंबरशिप सेमीनार को रद्द करके उसकी जगह हो रहे बॉलीवुड नाईट कार्यक्रम के होने में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता की पूरी पूरी मिलीभगत है ।
डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच चर्चा है कि बॉलीवुड नाईट वास्तव में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार ललित खन्ना की उम्मीदवारी को प्रमोट करने के उद्देश्य से हो रही है । कार्यक्रम के प्रचार अभियान में हालाँकि ललित खन्ना का कहीं कोई नाम नहीं है और कोई भी ऐसा तथ्य पब्लिक डोमेन में नहीं है जिससे पता चले या साबित हो कि बॉलीवुड नाईट कार्यक्रम का ललित खन्ना से कोई लेना-देना है; लेकिन कुछेक लोगों के हवाले से दावा किया गया है कि ललित खन्ना ने उन्हें फोन करके इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है । डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ रोटेरियंस का मानना/कहना है कि किसी उम्मीदवार की उम्मीदवारी को प्रमोट करने के लिए कोई आयोजन हो, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किसी उम्मीदवार का समर्थन करे - इसे रोटरी की राजनीति में स्वीकार्यता मिल गई है, और इसमें आपत्ति की कोई बात नहीं है । इसे हर कोई अपने अपने तरीके से करता ही है, लेकिन इस चक्कर में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अपनी जिम्मेदारियाँ और अपने पद की गरिमा भूल जाए, यह बहुत ही शर्मनाक बात है । वरिष्ठ रोटेरियंस ने ही रेखांकित किया कि पिछले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुभाष जैन ने अशोक अग्रवाल की उम्मीदवारी का समर्थन किया था, लेकिन इस चक्कर में उन्होंने रोटरी के कार्यक्रमों व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की गरिमा पर आँच नहीं आने दी थी; लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता जिस तरह अपनी गवर्नरी और रोटरी के महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों को 'बेच' दे रहे हैं - उससे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर, डिस्ट्रिक्ट व रोटरी की पहचान व प्रतिष्ठा पर संकट गहरा रहा है ।

Wednesday, September 4, 2019

रोटरी फाउंडेशन के चेयरमैन गैरी हुऑंग के हाथों सम्मानित होने से डिस्ट्रिक्ट के रोटेरियंस के बीच एक रोटेरियन के रूप में ललित खन्ना की पहचान में व्यापकता व स्वीकार्यता बढ़ने से डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी परिदृश्य में ललित खन्ना की उम्मीदवारी खासी महत्त्वपूर्ण हो गई है 

नई दिल्ली । मेजर डोनर लेबल थ्री बनने पर रोटरी फाउंडेशन के चेयरमैन गैरी हुऑंग से प्रशंसा और सम्मान पाकर ललित खन्ना ने एक रोटेरियन के रूप में अपनी पहचान को जिस तरह से और व्यापक व प्रतिष्ठित व स्वीकार्य बनाया है, उससे उनके नजदीकियों व समर्थकों को भरोसा हुआ है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में निश्चित ही उन्हें इसका फायदा मिलेगा । दिल्ली में डिस्ट्रिक्ट 3011 व डिस्ट्रिक्ट 3012 के संयुक्त रूप से आयोजित हुए कार्यक्रम को गैरी हुऑंग की मौजूदगी से यूँ भी एक विशिष्टता प्राप्त हुई और इसी विशिष्ट कार्यक्रम में ललित खन्ना को मेजर डोनर लेबल थ्री बनने पर गैरी हुऑंग ने सम्मानित किया । उल्लेखनीय है कि रोटरी में मेजर डोनर लेबल थ्री बनने वाले तो बहुत से रोटेरियन मिल जायेंगे, लेकिन इसके लिए रोटरी फाउंडेशन के चेयरमैन के हाथों सम्मानित होने का सौभाग्य किसी किसी को ही मिल पाता है । यह ठीक है कि यह सौभाग्य कई तरह के संयोगों पर निर्भर करता है, और यह सौभाग्य पाने वाले रोटेरियन को यह किस्मत से ही मिल पाता है; ललित खन्ना के नजदीकियों व समर्थकों को यह संयोग इसलिए भी उत्साहित कर रहा है क्योंकि इससे यह भी 'दिख' रहा है कि इस समय ललित खन्ना की किस्मत भी जोरशोर से उनके साथ है ।
बड़े-बुजुर्गों ने कहा भी है कि किस्मत भी उसका ही साथ देती है, जो प्रयत्न करता है । ललित खन्ना ने मेजर डोनर लेबल थ्री बनने के लिए खुद से प्रयत्न किए, तो उन्हें रोटरी फाउंडेशन के चेयरमैन से सम्मानित होने का सौभाग्य मिला; उन्होंने यदि उक्त प्रयत्न न किया होता तो उन्हें यह सौभाग्य नहीं ही मिलता । ललित खन्ना के नजदीकियों व समर्थकों का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी को लेकर ललित खन्ना ने जिस तरह का प्रयत्न किया हुआ है, और डिस्ट्रिक्ट के आम व खास रोटेरियंस के साथ उन्होंने जिस तरह का तालमेल बनाया हुआ है, उसके कारण उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुने जाने का भी निश्चित सौभाग्य मिलेगा । उल्लेखनीय है कि ललित खन्ना ने मेजर डोनर लेबल थ्री बनने की घोषणा अपने डिस्ट्रिक्ट के डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में ही कर दी थी, और उनके द्वारा दिए गए चेक को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर मुकेश अरनेजा ने बड़े उत्साह से समारोह में उपस्थित लोगों को दिखाया था । उक्त समारोह में मंच से ललित खन्ना की जो वाह-वाही हुई थी, उसे देख कर क्लब्स के प्रेसीडेंट तथा डिस्ट्रिक्ट के अन्य रोटेरियंस खासे प्रभावित हुए थे; और एक उम्मीदवार के रूप में ललित खन्ना की डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच एक अलग ही छाप पड़ी/बनी । 
ललित खन्ना ने अपनी उम्मीदवारी को लेकर चलाए अपने संपर्क अभियान में डिस्ट्रिक्ट के आम व खास रोटेरियंस को, और खासकर प्रेसीडेंट्स को 'स्पेशल' फील करवाया ।इसी का नतीजा रहा कि ललित खन्ना ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अपनी उम्मीदवारी को मजबूती देने की जो कोशिश की, उसे डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में उनके मेजर डोनर लेवल थ्री बनने की घोषणा ने और बल प्रदान किया है । ललित खन्ना के नजदीकियों तथा उनके शुभचिंतकों का ही नहीं, बल्कि दूसरे लोगों का भी कहना है कि डिस्ट्रिक्ट के रोटेरियंस तथा खासतौर से प्रेसीडेंट्स ने ललित खन्ना के साथ नजदीकी बनाने तथा दिखाने में जिस तरह से लगातार दिलचस्पी ली है - और विभिन्न मौकों पर उसे प्रदर्शित भी किया है, उसे ललित खन्ना की उम्मीदवारी के लिए बढ़ते व मजबूत होते समर्थन के रूप में ही देखा/पहचाना गया है । यही 'सीन' दिल्ली में रोटरी फाउंडेशन के चेयरमैन की मौजूदगी में हुए समारोह में ललित खन्ना के हुए सम्मान के बाद देखने को मिल रहा है । इस स्थिति को डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले दूसरे रोटेरियंस भी ललित खन्ना की उम्मीदवारी के लिए अच्छे संकेत के रूप में देख/पहचान रहे हैं - और इस बात ने इस वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी परिदृश्य में ललित खन्ना की उम्मीदवारी को खासा महत्त्वपूर्ण बना दिया है ।