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Friday, February 22, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता के उदाहरण के साथ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए ललित खन्ना की उम्मीदवारी को मिलते दिख रहे जोर के चलते सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी की तैयारी के लिए संकट और गहरा गया लग रहा है

नई दिल्ली । अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी को लेकर लगातार मुसीबत में घिरे/फँसे रोटरी क्लब दिल्ली विकास के प्रेसीडेंट सुनील मल्होत्रा को ललित खन्ना की उम्मीदवारी की तैयारी की खबर से और बड़ा झटका लगा है । मजे की बात यह है कि ललित खन्ना को उम्मीदवार बनने की तैयारी करते 'देख' सुनील मल्होत्रा के विरोधियों की उनके अपने क्लब में संख्या और बढ़ गई है । उम्मीदवारी को लेकर क्लब में मचे घमासान को अभी तक चुपचाप बैठे तमाशा देख रहे कई एक वरिष्ठ सदस्यों ने भी कहना शुरू कर दिया है कि सुनील मल्होत्रा के लिए समय लगता है कि अनुकूल नहीं है, इसलिए उन्हें अपनी उम्मीदवारी को लेकर जोर नहीं देना चाहिए । रोटरी क्लब दिल्ली विकास के कई वरिष्ठ सदस्यों को यह चिंता भी सताने लगी है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए चुनाव लड़ कर सुनील मल्होत्रा कहीं क्लब की साख  और प्रतिष्ठा को चोट न पहुँचा दें । उनका कहना है कि अभी डिस्ट्रिक्ट का सबसे बड़ा क्लब होने के नाते डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में क्लब की एक अलग ही पहचान, साख और धमक है; लेकिन यदि सुनील मल्होत्रा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव हार गए तो क्लब की बनी चली आ रही पहचान, साख और धमक एक झटके में धूल में मिल जाएगी । क्लब में सुनील मल्होत्रा के विरोधी ही नहीं, बल्कि साथी/समर्थक भी ललित खन्ना के उम्मीदवार बनने की स्थिति में सुनील मल्होत्रा के लिए चुनावी मुकाबले को मुश्किल हुआ मान रहे हैं और इस कारण सुनील मल्होत्रा के समर्थन से पीछे हटते हुए नजर आ रहे हैं ।
इस बीच, क्लब में पर्दे के पीछे रह कर सुनील मल्होत्रा के खिलाफ मुहिम चला रहे पूर्व प्रेसीडेंट जवाहर गुप्ता भी कूद कर पर्दे के सामने आ गए हैं और सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी के खिलाफ आमने-सामने की लड़ाई लड़ने के लिए पोजीशन ले चुके हैं । उनका कहना है कि क्लब की तरफ से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवार यदि प्रस्तुत किया जाना है, तो वरिष्ठ होने के नाते पहला मौका उन्हें मिलना चाहिए । क्लब के तथा क्लब की राजनीति की जानकारी रखने वाले डिस्ट्रिक्ट के लोगों का मानना/कहना है कि जवाहर गुप्ता को सचमुच में उम्मीदवार नहीं बनना है, उन्होंने तो बस सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी का रास्ता रोकने के लिए अपनी उम्मीदवारी की बात उछाल दी है । दिलचस्प नजारा यह बना है कि क्लब में सुनील मल्होत्रा के नजदीकियों व समर्थकों की तरफ से कहा/सुना जा रहा है कि जवाहर गुप्ता वास्तव में ललित खन्ना के लिए रास्ता 'साफ करने' और सुनील मल्होत्रा को ललित खन्ना के 'रास्ते' से हटाने के लिए अपनी उम्मीदवारी का बुलडोजर लेकर आ गए हैं । मजे की बात यह है कि जवाहर गुप्ता जब क्लब के प्रेसीडेंट थे, तब उनके भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवार बनने की बात जोरशोर से उठी थी, लेकिन उनके प्रेसीडेंट पद से उतरने के बाद उनके उम्मीदवार बनने की बात भी उतर गई और फिर खुद जवाहर गुप्ता ने खुद भी कभी अपनी उम्मीदवारी को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखाई । क्लब में ही लोगों का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की 'जरूरतों' को पूरा कर पाना जवाहर गुप्ता के बस की बात नहीं है; इसलिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने का ख्बाव देखना उन्होंने छोड़ दिया है - लेकिन उन्हें यह भी मंजूर नहीं है कि क्लब से कोई और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बन जाये; इसलिए उन्होंने सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी को रोकने के लिए हर हथकंडा अपनाया हुआ है ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी के लिए ललित खन्ना को तैयारी करता और डिस्ट्रिक्ट के प्रमुख लोगों का समर्थन जुटाता देख जवाहर गुप्ता को अपना 'मकसद' पूरा होता हुआ लग रहा है । रोटरी क्लब दिल्ली विकास में ललित खन्ना की उम्मीदवारी का वास्ता देकर सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी का विरोध करने वालों की संख्या बढ़ी है, उससे जवाहर गुप्ता का काम आसान हो गया है और उन्हें लग रहा है कि सुनील मल्होत्रा के नजदीकियों और समर्थकों ने ललित खन्ना की उम्मीदवारी को जिस गंभीरता से लिया है, उसके चलते सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी के चांस अब बहुत ही कम रह गये हैं । कुछेक लोग हालाँकि सुनील मल्होत्रा और ललित खन्ना की उम्मीदवारी से डरे उनके नजदीकियों व समर्थकों को समझा रहे हैं कि ललित खन्ना दो बार पहले भी उम्मीदवार रह चुके हैं और असफल रहे हैं, इसलिए उनकी उम्मीदवारी को ज्यादा गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है; इस समझाइस से सुनील मल्होत्रा को कुछ बल मिलता नजर आता है, कि तभी कोई न कोई उन्हें ध्यान दिला देता है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने जा रहे दीपक गुप्ता भी तो तीसरी बार में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुने जा सके थे - इसलिए ललित खन्ना की तीसरी बार की उम्मीदवारी को हल्के में लेने की जरूरत नहीं है । अगले रोटरी वर्ष के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति जिस तरह से थकी थकी सी लग रही है, उसमें ललित खन्ना की उम्मीदवारी को और जोर मिलता दिख रहा है । ललित खन्ना की उम्मीदवारी को मिल रहे जोर के चलते सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी के लिए संकट और गहरा गया है ।

Wednesday, January 21, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में ज्ञानचंद गुप्ता द्धारा सतीश सिंघल की मीटिंग का जिम्मा लेने के कारण रोटरी क्लब दिल्ली विकास में मचे घमासान ने क्लब के अध्यक्ष जवाहर गुप्ता के लिए तो फजीहत खड़ी की ही है, साथ ही मीटिंग के मूल उद्देश्य को भी पृष्ठभूमि में धकेल दिया है

नई दिल्ली । ज्ञानचंद गुप्ता ने सतीश सिंघल की मीटिंग का 'जिम्मा' लेकर रोटरी क्लब दिल्ली विकास में खासा बबाल पैदा कर दिया है, और क्लब के अध्यक्ष जवाहर गुप्ता के लिए फजीहत खड़ी कर दी है । दरअसल जो बबाल पैदा हुआ, उसके लिए जवाहर गुप्ता को जिम्मेदार ठहराया गया; और फिर सतीश सिंघल के समर्थकों ने जवाहर गुप्ता पर दीवाली मेले का हिसाब न देने का आरोप लगाते हुए हमला बोल दिया है । इस तरह, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई के चलते डिस्ट्रिक्ट का एक प्रमुख क्लब न सिर्फ खासे विवाद में फँस गया है, बल्कि क्लब के लोग एक दूसरे पर कीचड़ उछालने के काम में भी लग गए हैं ।
रोटरी क्लब दिल्ली विकास में इस कीचड़-कीचड़ खेल की शुरुआत कराने का 'श्रेय' ज्ञानचंद गुप्ता को दिया जा रहा है । ज्ञानचंद गुप्ता क्लब के एक वरिष्ठ सदस्य हैं और क्लब में उनके लिए अच्छा सम्मान है । यह सम्मान उन्होंने अपनी सक्रियता और निष्पक्षता के चलते कमाया है । उन्हें जानने वाले लोगों का कहना है कि क्लब में अपनी अच्छी सक्रियता और धाक रखने के बावजूद उन्होंने कभी भी अपनी चलाने और अपने फैसले थोपने का प्रयास नहीं किया, तथा हमेशा ही क्लब में सर्वानुमति बनाने/बनवाने का काम किया । 'ऐसी' पहचान रखने वाले ज्ञानचंद गुप्ता को जब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के एक उम्मीदवार सतीश सिंघल की पार्टी करने/करवाने का जिम्मा लेते हुए देखा गया तो क्लब के लोगों के कान खड़े हुए । क्लब के कई वरिष्ठ सदस्यों को तो इस बात की हैरानी हुई कि ज्ञानचंद गुप्ता तो 'इस तरह' के काम में पड़ते नहीं हैं, अब ऐसा क्या हुआ कि उन्हें 'इस तरह' का काम करने के लिए आगे आना पड़ा; क्लब के कई दूसरे सदस्यों का कहना रहा कि ज्ञानचंद गुप्ता के इस कदम से क्लब का नाम खराब हुआ है । उल्लेखनीय है कि रोटरी क्लब दिल्ली विकास में हमेशा ही इस बात का ध्यान रखा गया है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में क्लब 'खुलेआम' किसी एक पक्ष के साथ नहीं 'दिखेगा' । ज्ञानचंद गुप्ता ने लेकिन क्लब की इस नीति के खिलाफ काम किया और अपने इस काम से क्लब को बदनाम किया/करवाया है ।
क्लब में यह समझने की कोशिश हुई कि ज्ञानचंद गुप्ता ने क्लब को बदनाम करने/करवाने वाला यह काम आखिर क्यों किया ? क्लब में सभी ने समझा/माना कि इस मामले में ज्ञानचंद गुप्ता दरअसल इस्तेमाल हो गए हैं, और दूसरे लोगों ने उन्हें आगे करके अपना उल्लू सीधा कर लिया है । जाना/समझा यह गया कि उक्त मीटिंग के पीछे हैं तो दूसरे लोग, लेकिन वह खुद तो सामने आये नहीं, और उन्होंने ज्ञानचंद गुप्ता को मोहरा बना लिया । इस तरह क्लब में ज्ञानचंद गुप्ता को क्लब की बदनामी करने/करवाने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाने लगा, तो ज्ञानचंद गुप्ता के नजदीकियों ने क्लब के अध्यक्ष जवाहर गुप्ता को निशाने पर ले लिया । ज्ञानचंद गुप्ता के नजदीकियों को लगता है कि सतीश सिंघल की मीटिंग कराने का जो काम ज्ञानचंद गुप्ता ने किया है, वह जवाहर गुप्ता को पसंद नहीं आया है; और इसीलिए वह ज्ञानचंद गुप्ता को बदनाम तथा उक्त मीटिंग को खराब करने/करवाने में लगे हुए हैं । जवाहर गुप्ता को निशाने पर लेने वाले लोगों का कहना है कि लगता है कि जवाहर गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रसून चौधरी की उम्मीदवारी का समर्थन करने का मन बनाया है और इसीलिए उन्हें यह बात पसंद नहीं आई है कि ज्ञानचंद गुप्ता ने सतीश सिंघल की मीटिंग कराई है । ज्ञानचंद गुप्ता के नजदीकियों का आरोप है कि दीवाली मेले के आयोजन में तो जवाहर गुप्ता ने सतीश सिंघल के क्लब के लोगों से स्पॉन्सरशिप ले ली और अब सतीश सिंघल की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने में लगे हुए हैं ।
ज्ञानचंद गुप्ता के नजदीकियों ने जवाहर गुप्ता पर गंभीर हमला बोलते हुए आरोप यह लगाया है कि जवाहर गुप्ता ने दीवाली मेले के हिसाब-किताब में गड़बड़ी की है, और इसीलिए उन्होंने दीवाली मेले का हिसाब-किताब अभी तक भी नहीं दिया है । आरोप लगाने वाले लोगों का कहना है कि जवाहर गुप्ता यह तो कहते/बताते रहते हैं कि दीवाली मेले में उन्हें नुकसान हुआ है और उनके अपने बहुत से पैसे लग गए हैं, किंतु जब भी उनसे हिसाब देने/बताने को कहो तो वह कन्नी काटने लगते हैं । दीवाली मेले में कुछेक काम जिन लोगों ने यह सोच कर किए थे कि 'इस' काम में होने वाला खर्चा उन्हें दीवाली मेले के एकाउंट से मिलेगा, वह भी खर्चा मिलने का अभी तक इंतजार ही कर रहे हैं - क्योंकि जवाहर गुप्ता ने 'उस' काम का खर्चा चुकाने में भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई । इसी से लोगों को कहने का मौका मिला है कि जवाहर गुप्ता ने पैसे इकट्ठे करने में तो दिलचस्पी दिखाई, लेकिन भुगतान करने में बचने की कोशिश की - और इसी से यह आरोप आया कि उन्होंने हिसाब-किताब में गड़बड़ी की है । जो लोग दीवाली मेले के हिसाब-किताब में जवाहर गुप्ता द्धारा गड़बड़ी किए जाने की बात को नहीं भी मानते हैं, उनका भी कहना लेकिन यह है कि जवाहर गुप्ता को हिसाब-किताब तो देना/बताना ही चाहिए । क्लब के लोगों के बीच आरोपों-प्रत्यारोपों का यह जो सिलसिला चला है, उसमें यह बात भी आई कि सतीश सिंघल ने दीवाली मेले के लिए जितनी स्पॉन्सरशिप दिलाने का वादा जवाहर गुप्ता से किया था, उतनी स्पॉन्सरशिप चूँकि सतीश सिंघल ने नहीं दिलाई - इसीलिए जवाहर गुप्ता उनसे खफा हैं; और इसीलिए वह ज्ञानचंद गुप्ता द्धारा सतीश सिंघल की मीटिंग कराने की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं और ज्ञानचंद गुप्ता की कार्रवाई को क्लब को बदनाम करने/करवाने वाले काम के रूप में प्रचारित करने की कानाफूसियाँ कर रहे हैं ।
ज्ञानचंद गुप्ता द्धारा सतीश सिंघल की मीटिंग का जिम्मा लेने के कारण रोटरी क्लब दिल्ली विकास में मचे घमासान ने क्लब के अध्यक्ष जवाहर गुप्ता के लिए तो फजीहत खड़ी की ही है, साथ ही मीटिंग के मूल उद्देश्य को भी पृष्ठभूमि में धकेल दिया है ।

Friday, September 19, 2014

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 के प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3012 में जवाहर गुप्ता के रवैये से झटका खाए शरत जैन की उम्मीदवारी का झंडा थामे अरनेजा गिरोह के नेताओं ने जवाहर गुप्ता को यह कहते हुए बदनाम करना शुरू किया है कि डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले के आयोजन के जरिये उन्होंने वास्तव में अपनी उम्मीदवारी की तैयारी शुरू की है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले के आयोजन की तैयारी में जुटे रोटरी क्लब दिल्ली विकास के अध्यक्ष जवाहर गुप्ता को 'पटाने' में विफल रहने के बाद अरनेजा गिरोह के लोगों ने उन्हें अपने निशाने पर ले लिया है । क्लब के भीतर और क्लब के बाहर अरनेजा गिरोह के जो लोग हैं वह इस बात को प्रचारित करने में लगे हैं कि जवाहर गुप्ता दीवाली मेले के आयोजन की जिम्मेदारी निभाने की आड़ में दरअसल अगले वर्षों में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए प्रस्तुत की जाने वाली अपनी उम्मीदवारी की तैयारी कर रहे हैं । जवाहर गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले के आयोजन की जिम्मेदारी लेने के लिए जो 'प्रयत्न' किए, उसमें कई लोगों को रोटरी में आगे बढ़ने की उनकी महत्वाकांक्षा के संकेत तो छिपे दिखे थे - लेकिन इन संकेतों के सहारे/भरोसे 'उद्देश्य' घोषित करने का काम उनके क्लब के लोगों ने ही किया । दरअसल डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले के आयोजन की जिम्मेदारी जवाहर गुप्ता को मिलने से कई लोग खुश नहीं हैं । खुश न होने वाले लोगों में उनके अपने क्लब के लोग भी हैं और उनके अपने जोन के लोग भी हैं । क्लब के कई बड़े लोग तो इसलिए खुश नहीं हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि दीवाली मेले के आयोजन से जवाहर गुप्ता की डिस्ट्रिक्ट में पहचान और साख बढ़ेगी; जोन के लोग इसलिए खफा हैं क्योंकि दीवाली मेले की आड़ में राजनीति करने का मौका उनसे छिन गया ।
जवाहर गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले के आयोजन की जिम्मेदारी मिलने के साथ लेकिन अरनेजा गिरोह के नेता 'काम' पर लग गए और उन्होंने जवाहर गुप्ता को इस बात के फिलर्स भेजना शुरू कर दिया कि वह दीवाली मेले की तैयारी में उनकी हर तरह से मदद करने के लिए तैयार हैं । जवाहर गुप्ता को पटाने के लिए उन्हें सीधा-सीधा ऑफर भी दे दिया गया कि उन्हें शरत जैन से स्पॉन्सरशिप भी दिलवा दी जाएगी । जवाहर गुप्ता ने लेकिन उनके जब किसी भी फिलर्स के प्रति उत्साह नहीं दिखाया और स्पॉन्सरशिप के ऑफर को यह कहकर ठुकरा दिया कि दीवाली मेले की तैयारी में वह उम्मीदवारों को किसी भी रूप में शामिल नहीं करेंगे - तो अरनेजा गिरोह के लोगों ने जवाहर गुप्ता को बदनाम करने की चाल चली । इस चाल को चलाने में उन्हें जवाहर गुप्ता के क्लब के कुछेक ऐसे प्रमुख लोगों की मदद भी मिल गई, जो पहले से ही जले-भुने बैठे थे । रोटरी क्लब दिल्ली विकास के कुछेक लोग इस बात के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजय खन्ना की भी बुराई करने से परहेज नहीं कर रहे हैं कि दीवाली मेले जैसे डिस्ट्रिक्ट फंक्शन के आयोजन की जिम्मेदारी एक क्लब को देने की बजाए जोन को देना चाहिए था । दीवाली मेला क्लब को देने के फैसले से नाराज इन लोगों का असली दुःख वास्तव में यह है कि इन्हें डर हुआ है कि इससे डिस्ट्रिक्ट में जवाहर गुप्ता का 'कद' बढ़ेगा - और जवाहर गुप्ता का कद यदि बढ़ेगा, तो स्वाभाविक रूप से 'इनका' कद घटेगा ।
रोटरी क्लब दिल्ली विकास के इन्हीं लोगों ने कहना शुरू किया कि डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले की तैयारी से जवाहर गुप्ता ने अपनी उम्मीदवारी की तैयारी शुरू कर दी है । उल्लेखनीय है कि रोटरी क्लब दिल्ली विकास में दरअसल कई लोग हैं जो अपने आप को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए पूरी तरह परफेक्ट समझते हैं । उन्हें समस्या बस इस बात में लगती है कि डिस्ट्रक्ट गवर्नर बनने के लिए पहले उम्मीदवार बनना पड़ता है - उनसे लंबी-लंबी 'छुड़वा' तो लो, पर उम्मीदवार बनने की बात आती है तो उनका दम निकलने लगता है । इसलिए अपना दम उन्होंने उसका दम निकालने के लिए बचा कर रखा है, जो उन्हें क्लब में सिर उठाता हुआ दिखता है । उनका रवैया बिलकुल ऐसा है : हम तो गवर्नर बन न सकेंगे, तुम्हें भी न बनने देंगे । डिस्ट्रिक्ट में यह चर्चा प्रायः सुनने को मिल जाती है कि रोटरी क्लब दिल्ली विकास एक बड़ा क्लब है, अच्छा क्लब है, बहुत सक्रिय क्लब है, बहुत काम करने वाला क्लब है - लेकिन डिस्ट्रिक्ट को लीडरशिप प्रदान करने के मामले में पिछड़ा रहता है । तमाम चर्चा में कारण यही निकलता है कि क्लब में जो लोग प्रमुख बने हुए हैं, वह न तो खुद आगे आते हैं - और जो कोई आगे आता हुआ दिखता है उसका दम पहले ही निकाल देते हैं । जवाहर गुप्ता के साथ भी यही सुलूक किया जा रहा है । जवाहर गुप्ता चूँकि खासे सक्रिय हैं और बिलकुल नए नए काम कर रहे हैं, इसलिए उनके ही क्लब के कुछेक लोगों ने यह कहते हुए उन्हें बदनाम करने का अभियान छेड़ दिया है कि वह तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने की तैयारी में यह सब कर रहे हैं ।
अरनेजा गिरोह के नेताओं ने इस बात को 'लपक' कर और जोर-शोर से कहना शुरू कर दिया है । अरनेजा गिरोह के नेताओं को लगता है कि इस तरह से दबाव बना कर वह जवाहर गुप्ता को अपनी छतरी के नीचे ले आयेंगे । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रमेश अग्रवाल ने रोटरी क्लब दिल्ली विकास के कुछेक सदस्यों के साथ जिस तरह की 'धोखाधड़ी' की, उसके चलते दिल्ली विकास के सदस्यों के बीच रमेश अग्रवाल के खिलाफ गहरी नाराजगी और विरोध है । रमेश अग्रवाल के खिलाफ दिल्ली विकास के लोगों की इस नाराजगी और विरोध को शरत जैन की उम्मीदवारी के लिए खतरे के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । रमेश अग्रवाल हालाँकि दावा करते रहे हैं कि दिल्ली विकास में उनके कुछ एजेंट हैं जो हालात को सँभाल लेंगे - और अपने उन्हीं एजेंटों के भरोसे रमेश अग्रवाल ने डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले में अपनी और/या शरत जैन की भूमिका/भागीदारी बनाने की तिकड़म लगाई थी - जवाहर गुप्ता ने लेकिन उनकी तिकड़म को अभी तक तो कामयाब नहीं होने दिया है ।
रमेश अग्रवाल और अरनेजा गिरोह के दूसरे नेताओं की समस्या और चिंता दरअसल यह है कि वह शरत जैन की उम्मीदवारी को दिल्ली के क्लब्स में अच्छे समर्थन के दावे तो बहुत करते हैं, लेकिन अपने दावे को सच बनाने/बताने वाले तथ्य नहीं जुटा पा रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेला रोटरी क्लब दिल्ली विकास को मिला तो उन्हें अपने दावे को सच बनाने/बताने का मौका हाथ लगता हुआ दिखा । उन्हें लगा कि वह जवाहर गुप्ता को मदद का, स्पॉन्सरशिप का ऑफर पहुँचायेंगे तो जवाहर गुप्ता उनके पास दौड़े चले आयेंगे - और तब वह लोगों को बता/दिखा सकेंगे कि जब दिल्ली का सबसे बड़ा क्लब उनके साथ है तो छोटे-मोटे क्लब्स तो उनके साथ हो ही जायेंगे । जवाहर गुप्ता ने लेकिन उनकी सारी 'योजना' पर पानी फेर दिया । शरत जैन की उम्मीदवारी का झंडा उठाए अरनेजा गिरोह को इससे जो तगड़ा झटका लगा है, उससे उबरने की कोशिश में ही अरनेजा गिरोह के नेताओं ने तथा दूसरे लोगों ने जवाहर गुप्ता को यह कहते हुए बदनाम करना शुरू किया है कि डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले के आयोजन के जरिये जवाहर गुप्ता ने वास्तव में अगले वर्षों में प्रस्तुत की जाने वाली अपनी उम्मीदवारी की तैयारी शुरू की है ।
हालाँकि इस बात का उनके पास कोई जबाव नहीं है कि यदि यह सच भी है तो इसमें आरोप वाली बात भला क्या है ?