Sunday, September 22, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3020 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सैम मोव्वा के इंटरनेशनल डायरेक्टर चुने जाने से इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता के सहारे रोटरी की राजनीति व प्रशासनिक व्यवस्था में ऊँची छलाँग लगाने के मंसूबे बाँधने वाले रोटेरियंस को तगड़ा झटका लगा है

नई दिल्ली । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए डिस्ट्रिक्ट 3020 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सैम राव मोव्वा के अधिकृत उम्मीदवार चुने जाने से सिर्फ उनके प्रतिद्वंद्वी विनय कुलकर्णी को ही झटका नहीं लगा है, बल्कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता तथा उनके सहारे रोटरी की राजनीति व प्रशासनिक व्यवस्था में ऊँची छलाँग लगाने के मंसूबे बाँधने वाले रोटेरियंस को भी तगड़ा झटका लगा है । उल्लेखनीय है कि रोटरी में प्रत्येक स्तर की चुनावी राजनीति उम्मीदवारों की बजाये वास्तव में खेमों की राजनीति होती है और चुनावी हार-जीत को खेमों की हार-जीत के रूप में ही देखा/पहचाना जाता है । कभी-कभार कोई उम्मीदवार अपने आप को खेमे से 'बड़ा' साबित कर देता है, लेकिन यह कभी-कभार ही हो पाता है - और  उसके 'बड़े' साबित होने में भी कुल मिलाकर खेमे की ही भूमिका देखी/मानी जाती है । इसी तर्ज पर जोन 7 में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में विनय कुलकर्णी को उस खेमे के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा था, जिसके नेताओं के रूप में कल्याण बनर्जी व सुशील गुप्ता को देखा/पहचाना जाता रहा है और शेखर मेहता भी जिसके एक प्रमुख सदस्य रहे हैं । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाने के चलते शेखर मेहता की पहचान ने एकदम से ऊँची छलाँग लगाई और खेमे को उनके नाम से भी जाना/पहचाना जाने लगा है । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले शेखर मेहता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाने से खेमे के लोगों में एक नई जान पड़ी और उन्हें विश्वास हुआ कि अब वह जोन 7 में विनय कुलकर्णी को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए आसानी से 'चुनवा' लेंगे ।
इसीलिए इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने हेतु होने वाली मीटिंग से चार दिन पहले कोलकाता में हुए रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन के आयोजन को विनय कुलकर्णी की जीत को आसान बनाने के 'उपाय' के रूप में ही देखा/पहचाना गया और आरोपित किया गया । यह दरअसल आयोजन में विनय कुलकर्णी की उपस्थिति के कारण हुआ । आयोजन में रोटरी इंटरनेशनल के तमाम बड़े पदाधिकारी थे - इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी थे, पूर्व व मौजूदा इंटरनेशनल डायरेक्टर्स थे और फ्यूचर इंटरनेशनल डायरेक्टर्स की तो खासी भीड़ थी; लेकिन किसी की अक्ल में यह जरा सी बात नहीं आई कि रोटरी में चुनावी आचार संहिता नाम की एक व्यवस्था है, जिसकी मन से आप भले ही परवाह न करते हों, लेकिन 'दिखावे' के लिए तो कम से कम उसकी इज्जत कर लो - और उम्मीदवार होने के नाते विनय कुलकर्णी को आयोजन के मंच से दूर रखो । रोटरी इंटरनेशनल के बड़े पदाधिकारियों की मौजूदगी में रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन के आयोजन में चुनावी आचार संहिता की जिस तरह से धज्जियाँ उड़ी देखी गईं, उससे खासा बबाल हो गया । कोढ़ में खाज वाली बात यह हो गई कि इतने सब के बाद भी जोन 7 में नोमीनेटिंग कमेटी ने विनय कुलकर्णी को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए नहीं चुना । 
विनय कुलकर्णी की इस असफलता ने शेखर मेहता के सहारे रोटरी की राजनीति व व्यवस्था में ऊँची छलाँग लगाने की तैयारी करने वाले रोटेरियंस को खासी चोट पहुँचाई है । उल्लेखनीय है कि शेखर मेहता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाते ही, रोटरी में बड़े पद पाने की जुगाड़ में लगे रहने वाले कुछेक रोटेरियंस ने शेखर मेहता के साथ अपनी नजदीकी का वास्ता देकर रोटरी में 'जो चाहेंगे, वह पा लेंगे' जैसे दावे करने शुरू कर दिए । जब तक सुशील गुप्ता इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी थे, तब तक यह सुशील गुप्ता के यहाँ सुबह-शाम हाजिरी लगाते थे, अब इन्होंने शेखर मेहता के नाम की माला जपना शुरू कर दिया है । रोटरी में जो कोई भी प्रभावी होता है, या दिखता है - यह उसके आसपास मँडराना शुरू कर देते हैं । शेखर मेहता दरअसल अभी ऐसे लोगों को हैंडल नहीं कर पा रहे हैं, और इसलिए ऐसे लोग अपने स्वार्थ में शेखर मेहता के लिए तरह तरह से मुसीबतें खड़ी कर रहे हैं । रोटरी के 'चोर-उचक्कों', यहाँ तक कि रोटरी से सजा पाए रोटेरियंस ने तथा जल्दी से जल्दी कुछ भी करके बड़े पद पाने की इच्छा रखने वाले रोटेरियंस ने - इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाते ही शेखर मेहता के नजदीक 'दिखने' तथा अपने आपको उनके नजदीक बताने की जो तत्परता दिखाई है, और ऐसे रोटेरियंस ने जिस तरह से शेखर मेहता को घेर लिया है, उससे शेखर मेहता को सिर्फ बदनामी ही मिल रही है । शेखर मेहता से हमदर्दी रखने वाले वरिष्ठ रोटेरियंस का कहना है कि शेखर मेहता ने यदि ऐसे लोगों से 'निपटना' नहीं सीखा तो मुसीबत में ही फँसेंगे । विनय कुलकर्णी को लेकर  पिछले पाँच/छह दिनों में जो तमाशा हुआ, और कुछ हासिल भी नहीं हुआ - वह एक सबक भी है । 

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में ललित खन्ना व सुनील मल्होत्रा के बीच होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में सुनील मल्होत्रा के चुनाव अभियान को तेजी पकड़ता देख कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता वोटिंग शिड्यूल जल्दी शुरू करने के लिए मजबूर हुए हैं क्या ?

गाजियाबाद । कभी हाँ तो कभी ना के भारी अनिश्चय में झूलते झूलते डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता ने आखिरकार डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए वोट डालने का शिड्यूल घोषित कर ही दिया है । मजे की बात यह हुई है कि जल्दी चुनाव करवाने को लेकर उठ रहे डिस्ट्रिक्ट के लोगों के सवालों पर तो दीपक गुप्ता ने पूरी तरह चुप्पी साधी हुई थी ही, उन्होंने अपने नजदीकियों व सहयोगियों तक से भी इस बात को छिपाया हुआ था और उन्हें पूरी तरह से अँधेरे में रखा हुआ था कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के शिड्यूल को लेकर उनकी तैयारी आखिर क्या है । इसीलिए उनके नजदीकियों व सहयोगियों की तरफ से लगातार कहा जा रहा था कि दीपक गुप्ता ने जल्दी चुनाव करवाने को लेकर उनसे कोई बात नहीं की है; और इसलिए उन्हें नहीं लगता कि दीपक गुप्ता सचमुच जल्दी चुनाव करवाने को लेकर उत्सुक हैं । लेकिन वोटिंग शिड्यूल घोषित होने से यह साफ हो गया है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को लेकर अपने नजदीकी सहयोगियों व डिस्ट्रिक्ट के प्रमुख पदाधिकारियों को भी अँधेरे में रखा और उनके साथ धोखा किया । दरअसल इसी कारण से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को लेकर दीपक गुप्ता की नीयत में खोट व बेईमानी देखी/पहचानी गई और वह आरोपों के घेरे में फँसे । 
डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच चर्चा है कि दीपक गुप्ता जल्दी चुनाव करवा कर ललित खन्ना की जीत को सुनिश्चित कर देना चाहते हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता की हरकतों के चलते उन्हें मिलने वाली बदनामी का कुप्रभाव ललित खन्ना की उम्मीदवारी पर पड़ने का खतरा मँडराता दिखा, तो खुद दीपक गुप्ता को ही लगने लगा कि उन्हें यदि ललित खन्ना को जीत दिलवाने का श्रेय लेना है, तो उन्हें जल्दी चुनाव करवा लेना चाहिए । चुनावी राजनीति की जरूरत दीपक गुप्ता को भले ही जल्दी चुनाव करवाने के लिए प्रेरित कर रही थी, लेकिन जल्दी चुनाव करवाने के कारण पैदा होने वाली मुसीबतों की आशंका उन्हें डरा भी रही थी और इसलिए वह असमंजस में थे कि आखिर करें तो क्या करें ? दीपक गुप्ता ने चुनावी तैयारी तो पूरी कर ली थी, और इस तरह वोटिंग शिड्यूल को तय तथा घोषित करने की 'गोटी' अपने हाथ में कर ली थी - लेकिन 'फाईनल' फैसला लेने में वह हिचक रहे थे । समझा जा रहा था कि वह 'हालात' पर नजर रखे हुए हैं और हालात के अनुरूप उन्हें जैसा करने में 'फायदा' दिखेगा, वैसा वह कर लेंगे । डिस्ट्रिक्ट में कई लोगों का मानना/कहना रहा कि वह दरअसल सुनील मल्होत्रा के चुनाव अभियान पर नजर रखे हैं और टोह ले रहे हैं कि सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी को डिस्ट्रिक्ट के लोगों, खासकर क्लब्स के प्रेसीडेंट्स के बीच कैसा क्या समर्थन मिलने की संभावना बन/दिख रही है ।
माना/समझा जा रहा है कि ललित खन्ना व सुनील मल्होत्रा के बीच होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में सुनील मल्होत्रा के चुनाव अभियान ने पिछले दिनों जो अप्रत्याशित रूप से तेजी पकड़ी है, उसे 'देख' कर ही दीपक गुप्ता अपना असमंजस छोड़ कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का शिड्यूल घोषित करने के लिए मजबूर हुए हैं । उल्लेखनीय है कि पिछले महीने स्वतंत्रता दिवस को सेलीब्रेट करने के कार्यक्रम के जरिये सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी के प्रति समर्थन 'दिखाने' तथा जुटाने का जो आयोजन किया गया था, उसमें डिस्ट्रिक्ट के आम और खास रोटेरियंस की जुटी भीड़ ने सुनील मल्होत्रा तथा उनके नजदीकियों व समर्थकों को खासा उत्साहित किया और उसके बाद से उनके चुनाव अभियान ने खासा जोर पकड़ा है । पिछले दिनों रोटरी इंटरनेशनल के महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप सेमीनार की कुर्बानी देकर की गई बॉलीवुड नाईट के कारण दीपक गुप्ता की जो फजीहत हुई, उसके चलते ललित खन्ना की उम्मीदवारी पर प्रतिकूल असर पड़ने का खतरा दिखा, और इस खतरे का फायदा सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी को मिलने की संभावना दिखी है । यह सब देख कर ही दीपक गुप्ता को वोटिंग शिड्यूल और टालना उचित नहीं लगा । सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी के समर्थकों का कहना है कि सुनील मल्होत्रा को मिलते दिख रहे समर्थन को 'रोकने' के लिए दीपक गुप्ता ने जल्दी चुनाव करवाने का जो दाँव चला है, वह सफल नहीं होगा और इस तरह के हथकंडों से वह सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी को मिलते नजर आ रहे फायदे को रोक नहीं पायेंगे ।           

Tuesday, September 17, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में पिछले रोटरी वर्ष के प्रेसीडेंट्स के जरिये सुनील मल्होत्रा ने चुनावी राजनीति के समीकरणों को बदलने का जो प्रयास किया है, उससे सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी के समर्थकों को प्रभावी माहौल बनने तथा उनकी उम्मीदवारी को खासी मजबूती मिलने का भरोसा हुआ है

नई दिल्ली । सुनील मल्होत्रा ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अपनी उम्मीदवारी के अभियान में क्लब्स के निवर्त्तमान प्रेसीडेंट्स (आईपीपी) की मदद लेने की जो कोशिश की है, उसने उनके नजदीकियों व शुभचिंतकों को आश्वस्त किया है कि इसका अवश्य ही प्रभावी व सकारात्मक नतीजा निकलेगा - जो उनकी उम्मीदवारी को मजबूती देगा । उल्लेखनीय है कि मौजूदा प्रेसीडेंट की रोटरी की सारी स्कूलिंग चूँकि पिछले प्रेसीडेंट की देखरेख में हुई होती है, इसलिए माना/समझा जाता है कि मौजूदा प्रेसीडेंट भावनात्मक रूप से पिछले प्रेसीडेंट के प्रभाव में ज्यादा होता/रहता है; इसी तथ्य को पहचानते हुए सुनील मल्होत्रा ने निवर्त्तमान प्रेसीडेंट्स पर खास ध्यान दिया है - पिछले रोटरी वर्ष में खुद प्रेसीडेंट होने के नाते सुनील मल्होत्रा का पिछले रोटरी वर्ष के प्रेसीडेंट्स के साथ नजदीक और विश्वास का संबंध वैसे भी है । निवर्त्तमान प्रेसीडेंट व मौजूदा प्रेसीडेंट के बीच बनने व रहने वाले भावनात्मक भरोसे को सुनील मल्होत्रा ने अपनी उम्मीदवारी के लिए 'अवसर' बनाया है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति में मौजूदा प्रेसीडेंट की ही ज्यादा पूछ-परख होती है, और निवर्त्तमान प्रेसीडेंट चुनावी राजनीति में अप्रासंगिक मान लिया जाता है - और इसलिए कोई भी उसे तवज्जो नहीं देता है । सुनील मल्होत्रा ने लेकिन निवर्त्तमान प्रेसीडेंट की महत्ता को समझा/पहचाना तथा अपने चुनाव अभियान में उन्हें खास तौर से जोड़ने की कोशिश की है ।
सुनील मल्होत्रा की इस कोशिश ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति के अभियान के तौर-तरीकों को एक नया रूप दिया है; और अपनी इस कोशिश के जरिए उन्होंने निवर्त्तमान प्रेसीडेंट को जो सम्मान व महत्ता देने तथा दिलवाने का काम किया है, उसने चुनावी राजनीति के समीकरणों को बदलने का भी प्रयास किया है । सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों का मानना और कहना है कि निवर्त्तमान प्रेसीडेंट्स के माध्यम से सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी के पक्ष में अच्छा व प्रभावी माहौल बना है तथा उनकी उम्मीदवारी को खासी मजबूती मिली है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट के विभिन्न क्लब्स के अधिष्ठापन समारोहों में सुनील मल्होत्रा को जो विशेष तवज्जो मिलते देखी गई, उसके पीछे भी क्लब के निवर्त्तमान प्रेसीडेंट की सक्रियताभरी भूमिका को ही देखा/पहचाना गया है । अधिष्ठापन समारोहों में सुनील मल्होत्रा को सिर्फ एक उम्मीदवार के रूप में ही नहीं देखा/पहचाना गया, बल्कि डिस्ट्रिक्ट के सबसे बड़े क्लब के प्रतिनिधि के रूप में भी 'देखा' गया है; क्लब के अधिष्ठापन समारोह में चूँकि निवर्त्तमान प्रेसीडेंट की मुख्य भूमिका होती है, इसलिए आयोजक क्लब का निवर्त्तमान प्रेसीडेंट सुनील मल्होत्रा को फेलो प्रेसीडेंट के रूप में देखते/पहचानते हुए उनका स्वागत करता है, तो उससे समारोह में मौजूद लोगों के बीच सुनील मल्होत्रा की एक अलग पहचान बनी और उम्मीदवार के रूप में उन्हें इसका फायदा भी मिला ।
दरअसल इससे ही सुनील मल्होत्रा और उनके समर्थकों को निवर्त्तमान प्रेसीडेंट की 'भावनात्मक ताकत' का आभास हुआ और फिर उन्होंने इस भावनात्मक ताकत को एक अवसर में बदलने के लिए काम किया । यह काम सुनील मल्होत्रा वास्तव में इसलिए भी कर पाए क्योंकि उनका क्लब डिस्ट्रिक्ट का सबसे बड़ा क्लब है; प्रेसीडेंट के रूप में सुनील मल्होत्रा को एक बड़े क्लब का नेतृत्व करने का मौका मिला - जिससे उनकी नेतृत्व क्षमता का सुबूत लोगों को मिला । सहज ही समझा जा सकता है कि विभिन्न अनुभव, स्वभाव व विचार रखने वाले लोगों के क्लब को प्रेसीडेंट के रूप में नेतृत्व देना सुनील मल्होत्रा के लिए खासा चुनौतीपूर्ण रहा होगा । एक बड़े क्लब का नेतृत्व करना वास्तव में एक डिस्ट्रिक्ट का नेतृत्व करने जैसा ही चुनौतीपूर्ण मामला होता है - या शायद उससे भी मुश्किल । डिस्ट्रिक्ट में तो बहुत से क्लब्स तथा सदस्य इस बात पर ध्यान भी नहीं देते/रखते हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उनका नेतृत्व आखिर कर क्या रहा है; लेकिन क्लब का प्रेसीडेंट हमेशा ही क्लब के हर सदस्य के 'राडार' पर होता है - इस बिना पर सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी के समर्थक लगातार दावा करते रहे हैं कि एक बड़े क्लब का नेतृत्व करने - और खासी सफलता के साथ करने वाले सुनील मल्होत्रा डिस्ट्रिक्ट का नेतृत्व करने के लिए बिलकुल परफेक्ट हैं । एक बड़े क्लब से उम्मीदवार होने के नाते सुनील मल्होत्रा को वोटों की गिनती का भी फायदा होने की बात लोगों के बीच होती है । लोगों को लगता है कि उन्हें मिलने वाले वोटों की गिनती 25/30 से तो शुरू होती है - और यह तथ्य डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी मुकाबले में सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी को महत्त्वपूर्ण बना देता है । 

रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता की संस्था रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन के आयोजन में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवार विनय कुलकर्णी की मौजूदगी ने आयोजन तथा शेखर मेहता की भूमिका को विवादास्पद बनाया

नई दिल्ली । कोलकाता में हो रहे रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में विनय कुलकर्णी की उपस्थिति ने जोन 7 में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को विवाद में घसीट लिया है । रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस को मिली/भेजी गई कुछेक शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि यह कार्यक्रम विनय कुलकर्णी की उम्मीदवारी को प्रमोट करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है, और रोटरी इंटरनेशनल को इसका संज्ञान लेना चाहिए तथा इस बारे में उचित कार्रवाई करना चाहिए । शिकायतों में कहा गया है कि यह बहुत ही अफसोस की बात है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने के लिए होने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की मीटिंग से ठीक पहले रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन की उक्त मीटिंग की - और उसमें विनय कुलकर्णी की उपस्थिति से परहेज भी नहीं किया । उल्लेखनीय है कि जोन 7 में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में विनय कुलकर्णी भी उम्मीदवार हैं, और उन्हें शेखर मेहता खेमे के उम्मीदवार के रूप में ही देखा/पहचाना जाता है । उल्लेखनीय यह भी है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने के लिए तीन दिन बाद ही - 21 सितंबर को नोमीनेटिंग कमेटी की मीटिंग होनी है ।
गौरतलब है कि रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन के पीछे शेखर मेहता का ही दिमाग और उनकी मेहनत है । 2011 में श्रीलंका में आयोजित हुई रोटरी साऊथ एशिया कॉन्फ्रेंस में शेखर मेहता की प्रेरणा व पहल से श्रीलंका, पाकिस्तान, नेपाल, मालदीव्स तथा भारत के रोटेरियंस ने क्षेत्र में अन्य कई विषयों के साथ-साथ शिक्षा व स्वास्थ्य को लेकर काम करने के लिए रोटरी साऊथ एशिया सोसायटी फॉर डेवेलपमेंट एंड को-ऑपरेशन का गठन किया था । पिछले वर्ष इसका ही नाम बदल कर रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन किया गया है । मजे की बात यह है कि इसके तहत काम भले ही शिक्षा व स्वास्थ्य को लेकर किए गए हैं, लेकिन इसके गठन तथा इसके कामों के पीछे असली उद्देश्य राजनीतिक ही देखा/पहचाना गया है । इसी कारण से बासकर चॉकलिंगम ने इंटरनेशनल डायरेक्टर के अपने कार्यकाल में रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन को तथा उसके कार्यक्रमों को कोई तवज्जो नहीं दी; और उनके इंटरनेशनल डायरेक्टर के कार्यकाल में इसकी सक्रियता भी कम रही और जो रही भी वह दबी-छिपी रही । रोटेरियंस के बीच माना जाता रहा है कि शेखर मेहता ने लंबी राजनीतिक छलाँग लगाने के लिए ही इसका गठन किया है । रोटरी में बहुत से लोग मानते और कहते हैं कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट (नॉमिनी) के पद पर पहुँचने में रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन के जरिए किए गए 'कामों' ने शेखर मेहता की काफी मदद की है ।
सिर्फ समझा ही नहीं जा रहा है, बल्कि कहा भी जा रहा है कि रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन ने अब विनय कुलकर्णी को इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवाने का बीड़ा उठा लिया है । रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस को भेजी गई शिकायतों में कहा गया है कि रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन के कोलकाता में हो रहे कार्यक्रम में शेखर मेहता तथा मौजूदा इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या व कमल सांघवी की उपस्थिति में विनय कुलकर्णी की जिस तरह की मौजूदगी रही और 'दिखाई' गई है, वह जोन 7 में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश है और चुनावी आचार-संहिता का खुला उल्लंघन है । कहा गया है कि डिस्ट्रिक्ट्स में होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में आचार-संहिता के नाम पर उम्मीदवारों पर तरह तरह के प्रतिबंध लगाए जाते हैं, लेकिन इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर्स की मौजूदगी में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवार को खुल्लमखुल्ला तवज्जो दी जा रही है । बिडंवना और निराशा की बात यह भी है कि रोटरी इंटरनेशनल को भेजी गई शिकायतों के संबंध में संबद्ध रोटेरियंस का यह भी कहना है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के सान्निध्य में ही जब चुनावी आचार-संहिता का उल्लंघन किया जा रहा हो और मजाक बनाया जा रहा हो, तो न्याय मिलने की उम्मीद भी घट जाती है । इसी कारण से जोन 7 में इंटरनेशनल डायरेक्टर का चयन करने के लिए होने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की मीटिंग से चार दिन पहले, 16 सितंबर को कोलकाता में शुरू हुए दो दिवसीय रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन का आयोजन गहरे विवाद में फँस गया है ।

Monday, September 16, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में अशोक कंतूर की डिस्ट्रिक्ट को 'बंद' करवा देने की धमकी, अजीत जालान की 'बनिया कार्ड' की राजनीति तथा महेश त्रिखा की निश्चिंतता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति के सीन को सी-ग्रेड हिंदी फिल्म के नाटक जैसा बना दिया है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव दूसरे वर्ष भी हारने की स्थिति में डिस्ट्रिक्ट 'बंद' करवा देने की अशोक कंतूर की धमकी तथा बनिया प्रेसीडेंट्स के भरोसे चुनाव जीतने की अजीत जालान की घोषणा ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में खासा ड्रामा पैदा कर दिया है । तीसरी तरफ महेश त्रिखा को उम्मीद है कि इन दोनों की आपसी लड़ाई उन्हें आसानी से जीत दिलवा देगी । इस तरह, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनावी परिदृश्य किसी सी-ग्रेड हिंदी फिल्म का सा आभास देता हुआ लग रहा है; जिसमें रोना-धोना है, साजिशें हैं, धमकियाँ हैं, चलताऊ किस्म के हथकंडे हैं, अच्छे-अच्छे सपने हैं - यानि फूहड़ किस्म के मनोरंजन का पूरा पूरा सामान है । सबसे धमाकेदार घोषणा अशोक कंतूर ने की हुई है । कुछेक लोगों से उन्होंने साफ कहा है कि इस बार भी वह यदि चुनाव नहीं जीते, तो डिस्ट्रिक्ट में हो रही गड़बड़ियों व बेईमानियों की वह पोल खोलेंगे और जिसके चलते हो सकता है कि रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट को नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस में ही डाल दे । अशोक कंतूर दरअसल उन पूर्व गवर्नर्स नेताओं से बहुत खफा हैं, जो पिछले वर्ष तो उनकी उम्मीदवारी के समर्थन में थे, लेकिन इस वर्ष उनकी उम्मीदवारी में  दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं ।अशोक कंतूर का कहना है कि उनके पास सभी गवर्नर्स की कारस्तानियों का कच्चा-चिट्ठा है, और यदि गवर्नर्स का समर्थन न मिलने के कारण वह चुनाव हारे - तो वह सभी की शिकायत रोटरी इंटरनेशनल में करेंगे । उनका कहना है कि उनके पास गड़बड़ियों व बेईमानियों के जो तथ्य हैं, वह इतने गंभीर हैं कि उन्हें देख/जान कर रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट को सस्पेंड भी कर सकता है ।
अजीत जालान ने अपनी जीत का जो फार्मूला लोगों को बताया है, वह भी लोगों का खासा मनोरंजन कर रहा है । उनका कहना है कि डिस्ट्रिक्ट में करीब सत्तर प्रतिशत क्लब्स के प्रेसीडेंट बनिए हैं, इनमें से यदि कुछेक ने उन्हें धोखा दिया भी तो भी उन्हें इतने प्रेसीडेंट्स तो वोट दे ही देंगे जो उनकी जीत को सुनिश्चित करेंगे । अजीत जालान का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट में हर कोई जानता है कि वह पूर्व गवर्नर विनोद बंसल के उम्मीदवार हैं, जो कि पंजाब के बनिए हैं और इस तरह वह उन्हें बनियों के साथ-साथ पंजाबियों का भी समर्थन मिलेगा और ऐसे में उन्हें भला कौन हरा सकेगा ? इस तरह की बातें करने पर अजीत जालान से कुछेक लोगों ने हालाँकि पूछा भी कि पिछले रोटरी वर्ष में उन्हें यह जरूरी नहीं लगता था क्या कि बनिए प्रेसीडेंट्स को बनिया उम्मीदवार को वोट देना चाहिए; पिछले वर्ष तो वह बनिए प्रेसीडेंट्स पर दबाव बना रहे थे कि वह पंजाबी उम्मीदवार को वोट दें ? इस सवाल पर कहीं चुप रह कर तो कहीं यह कहते हुए अजीत जालान ने अपने आप को 'बचाया' कि पिछले वर्ष की बात अलग थी । पिछले रोटरी वर्ष में अशोक कंतूर की हार के लिए अजीत जालान ने बनिया बहुल रोहतक क्षेत्र के रोटेरियंस को खूब कोसा था और उन पर धोखा देने का आरोप लगाया था । अजीत जालान ने कई लोगों को कहा/बताया है कि उनकी तथा उनके समर्थक नेताओं की तरफ से कोशिशें हो रही हैं कि इस बार रोहतक के क्लब्स के पदाधिकारी उनकी उम्मीदवारी के साथ धोखाधड़ी न कर सकें । कहीं कहीं अजीत जालान ने यह भी कहा है कि उन्हें तो उनके नेता जैसा कहने को कहते हैं, वह वैसा ही लोगों के बीच कहने लगते हैं । इससे लोगों को यह भी लग रहा है कि 'बनिया कार्ड' अजीत जालान का दिमागी फितूर नहीं है, बल्कि उनकी उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं की सोची-समझी रणनीति है ।
अशोक कंतूर व अजीत जालान को अपनी अपनी उम्मीदवारी को लेकर आक्रामक रवैया अपनाते देख महेश त्रिखा अपनी उम्मीदवारी को लेकर निश्चिंत हुए जा रहे हैं । उन्हें लग रहा है कि यह दोनों जितना ज्यादा सक्रिय होंगे, उतना ही एक दूसरे को नुकसान पहुँचायेंगे और इस तरह उनकी उम्मीदवारी के लिए रास्ते को आसान बनायेंगे । महेश त्रिखा और उनके समर्थक दरअसल पहले इस बात से डरे हुए थे कि अशोक कंतूर व अजीत जालान के बीच कहीं समझौता न हो जाए; उन्हें डर था कि यदि इन दोनों में से कोई एक उम्मीदवार रहा तो सीधे मुकाबले में महेश त्रिखा के लिए चुनाव निकालना मुश्किल हो सकता है - लेकिन जैसे जैसे यह साफ होता जा रहा है कि अशोक कंतूर के साथ-साथ अजीत जालान भी उम्मीदवार रहेंगे, वैसे वैसे महेश त्रिखा तथा उनके समर्थकों को अपना काम आसान होता नजर आ रहा है । महेश त्रिखा और उनके समर्थकों का गणित है कि पिछले रोटरी वर्ष में अशोक कंतूर व अजीत जालान की मिलीजुली 'ताकत' जब अशोक कंतूर को चुनाव नहीं जितवा सकी थी, तब अलग अलग होकर यह दोनों क्या पा लेंगे ? दूसरे लोगों को भी लगता है कि महेश त्रिखा का यदि अशोक कंतूर से सीधा मुकाबला हो रहा होता, तो अशोक कंतूर को सहानुभूति का फायदा मिल सकता था, लेकिन अजीत जालान की उम्मीदवारी प्रस्तुत होने से उस फायदे की उम्मीद पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है । अशोक कंतूर की उम्मीदवारी के साथ रवि चौधरी वाली 'बीमारी' भी लगी हुई है । अशोक कंतूर को रवि चौधरी के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जाता है और माना जाता है कि रवि चौधरी की हरकतों के चलते अशोक कंतूर की उम्मीदवारी को नुकसान हुआ था । रवि चौधरी की हरकतें बदस्तूर जारी हैं और अभी हाल ही में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा के पेम वन कार्यक्रम में कई गवर्नर्स को जिस तरह से अपमानित होना पड़ा, उसके लिए संजीव राय मेहरा के साथ-साथ उनके डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के रूप में रवि चौधरी को भी जिम्मेदार ठहराया गया है । समझा जाता है कि इस तरह की बातों से अशोक कंतूर की उम्मीदवारी को नुकसान होगा । सचमुच में क्या होगा, यह तो बाद में पता चलेगा - अभी लेकिन जिस तरह की बातें हो रही हैं, उसके चलते लोगों का फिलहाल मनोरंजन खूब हो रहा है ।

Sunday, September 15, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय से मिले बायोडेटा के अनुसार, रोटरी में काम करने के अनुभव के मामले में ललित खन्ना का पलड़ा भारी देखा/पहचाना गया है और इस आधार पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए ललित खन्ना की उम्मीदवारी को 'वजन' मिला है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय द्वारा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवारों का बायोडेटा क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को भेजने के साथ ही ललित खन्ना व सुनील मल्होत्रा के बीच होने वाला चुनाव लोगों को और नजदीक आता हुआ दिख रहा है, तथा इसी के साथ चुनावी गहमागहमी भी खासी बढ़ गई है । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता के सम्मान में तथा उनकी मौजूदगी में हुए कार्यक्रमों में डिस्ट्रिक्ट के मौजूदा, भावी व पूर्व गवर्नर्स के साथ ललित खन्ना को जो तवज्जो मिली, उसके चलते ललित खन्ना को भावी गवर्नर के रूप में देखा/पहचाना गया - और इस कारण से उनकी उम्मीदवारी को लोगों के बीच बढ़त मिलने के दावे सुनाई पड़े हैं । कुछेक गवर्नर्स ने ललित खन्ना का शेखर मेहता से परिचय वर्ष 2022-23 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में करवाया; इससे डिस्ट्रिक्ट में लोगों को लगा है कि डिस्ट्रिक्ट के अधिकतर गवर्नर्स ने ललित खन्ना को विजेता उम्मीदवार के रूप में देखना/पहचानना शुरू कर दिया है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ रोटेरियंस तथा क्लब्स के प्रेसीडेंट कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में इस बात से प्रभावित होते ही हैं कि डिस्ट्रिक्ट के मौजूदा, भावी व पूर्व गवर्नर्स किस उम्मीदवार को तवज्जो दे रहे हैं - और वह इसके आधार पर ही फैसला करते हैं । इसलिए ही शेखर मेहता के सामने कई गवर्नर्स द्वारा ललित खन्ना को मिली तवज्जो ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उनकी उम्मीदवारी के अभियान को मजबूती दी है ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय से मिले बायोडेटा के आधार पर भी ललित खन्ना की उम्मीदवारी को 'वजन' मिला है । प्रत्येक संदर्भ में ललित खन्ना का पलड़ा भारी देखा/पहचाना गया है, और रोटरी में काम करने के अनुभव के मामले में भी उन्हें काफी आगे 'पाया' जा रहा है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय से प्रेसीडेंट्स को जो बायोडेटा मिले हैं, वह खुद उम्मीदवार ही तैयार करके अपने नामांकन के साथ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय को सौंपते हैं - इसलिए कोई यह आरोप नहीं लगा सकता है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय ने जो बायोडेटा प्रेसीडेंट्स को भेजे हैं, उन्हें तैयार करने में कोई पक्षपात किया गया है । बायोडेटा होने से किसी उम्मीदवार के लिए यह भी संभव नहीं होता है कि वह झूठे और बढ़चढ़ कर दावे कर सके । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में हालाँकि कभी कभी कोई उम्मीदवार ऐसा आ जाता है जो बकलोली करते हुए शेखचिल्लीपूर्ण बातें करके लंबी-चौड़ी फेंकता/छोड़ता है, लेकिन बायोडेटा लोगों को उसकी असली 'औकात' बता/दिखा देता है और इसलिए उसकी बकलोली का लोगों पर कोई असर पड़ता नहीं है और वह लोगों के बीच मजाक बन कर ही रह जाता है । संभवतः रोटरी इंटरनेशनल ने इसीलिए चुनावी प्रक्रिया में प्रेसीडेंट्स को उम्मीदवारों का बायोडेटा भेजना जरूरी किया हुआ है । मजे की बात है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति के शोर में उम्मीदवारों के बायोडेटा को ज्यादा महत्त्व मिलते हुए नहीं 'देखा' जाता है, लेकिन उम्मीदवारों का मूल्याँकन करने तथा उनकी कथनी/करनी में फर्क 'दिखाने' का काम बायोडेटा 'चुपचाप' तरीके से करता ही है ।
ललित खन्ना के बायोडेटा ने प्रेसीडेंट्स को जिस तरह से प्रभावित किया है; उसे देख/जान कर ललित खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों को विश्वास है कि प्रेसीडेंट्स अपने अपने क्लब की बोर्ड मीटिंग में बायोडेटा के आधार में उम्मीदवारों के काम तथा उनके अनुभव का मूल्याँकन करेंगे तो बोर्ड के बाकी सदस्य भी ललित खन्ना के बायोडेटा से प्रभावित होंगे और ललित खन्ना को वोट देने की वकालत करेंगे । उल्लेखनीय है कि ललित खन्ना ने जब से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत की है, तभी से लगातार प्रभावी अभियान चलाया है, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में महत्त्वपूर्ण व निर्णायक भूमिका निभाने वाले पदाधिकारियों के बीच अपनी पैठ बनाने की उन्होंने सुनियोजित कोशिश की है । इसी कोशिश के तहत उन्होंने प्रत्येक अवसर पर अपनी सक्रियता दिखाई है । डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन का कार्यक्रम हो, जोन के कार्यक्रम हों, उनके अपने क्लब का अधिष्ठापन समारोह हो, रोटरी फाउंडेशन के चेयरमैन गैरी हुऑंग के सम्मान में तथा उनकी मौजूदगी में हुआ आयोजन हो, और चाहें अभी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता के सम्मान में तथा उनकी मौजूदगी में हुए कार्यक्रम हैं - सभी में ललित खन्ना की जैसी सक्रियता भरी उपस्थिति रही है, उसके चलते उनकी उम्मीदवारी को दृढ़ता व बढ़त मिलती दिख रही है ।

Wednesday, September 11, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3110 में एक क्लब प्रेसीडेंट अंकुर अग्रवाल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को प्रभावित करने के लिए उनकी ईमेल आईडी को फर्जी तरीके से इस्तेमाल करने के मामले में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर आईएस तोमर का नाम लेकर डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में खासी गर्मी पैदा की

बरेली । रोटरी क्लब बरेली मैग्नेट सिटी के प्रेसीडेंट अंकुर अग्रवाल ने धोखे और फर्जी तरीके से उनकी ईमेल आईडी को इस्तेमाल करके डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों को बदनाम करने तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को प्रभावित करने के मामले में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर आईएस तोमर का नाम लेकर डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में खासी गर्मी पैदा कर दी है । दरअसल कुछेक लोगों को यह भी लग रहा है कि जो हो रहा है, उसमें अंकुर अग्रवाल भी राजनीति खेल रहे हैं, और या 'मोहरा' बन रहे हैं । उल्लेखनीय है कि रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस में कंसर्न अधिकारी जितिंदर सिंह को लिखे/भेजे ईमेल संदेश में अंकुर अग्रवाल ने बताया और दावा किया कि डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर रवि प्रकाश अग्रवाल पर मतपत्र छीनने तथा जबरन उनके हस्ताक्षर करवाने का आरोप लगते हुए उनके नाम से जो शिकायत की गई है, वह शिकायत उनकी ईमेल आईडी का फर्जी व धोखेपूर्ण तरीके से इस्तेमाल करके की गई है । अंकुर अग्रवाल ने अपने संदेश-पत्र में इस फर्जीवाड़े के लिए अपने क्लब के पूर्व प्रेसीडेंट राहुल वोहरा पर संदेह व्यक्त किया है । अंकुर अग्रवाल ने कहा/बताया है कि राहुल वोहरा ने रोटरी इंटरनेशनल के कुछेक मैसेज देखने का वास्ता देकर उनसे उनकी ईमेल आईडी ली थी; उन्हें शक है कि पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर आईएस तोमर की चुनावी राजनीति को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से राहुल वोहरा ने ही उनकी ईमेल आईडी का फर्जी तरीके से इस्तेमाल करके उक्त आरोपपूर्ण मेल भेजी है ।
उल्लेखनीय है कि अंकुर अग्रवाल के नाम से भेजी गई पहली ईमेल, जिसे कुछ ही घंटों के अंदर अंकुर अग्रवाल ने फर्जी बता दिया है, में आरोप लगाया गया है कि डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर रवि प्रकाश अग्रवाल डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू के बेटे तथा अन्य कुछ रोटेरियंस के साथ उनके कार्यालय में ठीक उस समय पहुँचे, जब वह पोस्टमैन से मतपत्रों वाला लिफाफा ले रहे थे । उनसे उक्त लिफाफा छीना गया और जबरन उनसे मतपत्रों पर हस्ताक्षर करवा लिए गए । उक्त आरोपपूर्ण शिकायत के साथ माँग की गई कि जबरन हस्ताक्षरित करवाए गए उनके मतपत्र को निरस्त किया जाए । इसके कुछ घंटों के भीतर ही अंकुर अग्रवाल ने उक्त ईमेल-पत्र को फर्जी बताते हुए रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय को ईमेल-पत्र लिखा । कुछेक लोगों को हालाँकि यह भी लगता है कि दोनों ईमेल-पत्र अंकुर अग्रवाल द्वारा ही लिखे भेजे गए हैं; पहले ईमेल-पत्र के बाद उन पर भारी दबाव पड़ा, जिसके चलते उन्हें कुछ ही घंटों के भीतर दूसरा ईमेल-पत्र लिखने के लिए मजबूर होना पड़ा है । डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के हथकंडों से परिचित वरिष्ठ रोटेरियंस का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद को लेकर जिस तरह की राजनीति होती रही है, और इस वर्ष होने वाला चुनाव दोनों खेमों के लिए जिस तरह से महत्त्वपूर्ण हो उठा है - उसे देखते हुए किसी भी तरह की 'हरकत' से इंकार नहीं किया जा सकता है ।
ऐसे में, रोटरी इंटरनेशनल के साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों के सामने समस्या यह पैदा हो गई है कि वह अंकुर अग्रवाल के कौन से ईमेल-पत्र को सच मानें - पहले वाले को, या दूसरे वाले को । चूँकि अंकुर अग्रवाल का आरोप और फिर कुछ ही घंटों के भीतर उसे फर्जी बताना रिकॉर्ड पर है, इसलिए रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों के सामने यह तय करने की गंभीर चुनौती आ पड़ी है कि वह अंकुर अग्रवाल की किस बात पर यकीन करें । डिस्ट्रिक्ट का राजनीतिक माहौल चूँकि गहमागहमीभरा है, और उसमें तरह तरह के 'षड्यंत्र' हो रहे हैं - इसलिए हर किसी के लिए यह समझना खासा मुश्किल है कि कौन कब सच बोल रहा है, और कौन झूठ ? रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों के लिए मुसीबत की बात यह है कि वह यदि अंकुर अग्रवाल के दूसरे ईमेल-पत्र को सच मानते हुए पहले ईमेल पत्र को फर्जी मान लें, और फिर बाद में 'साबित' हो कि अंकुर अग्रवाल ने दूसरा ईमेल-पत्र दबाव में आकर लिखा था - तो फिर रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों की भी फजीहत होगी । जो भी हो, रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों को फैसला तो करना ही होगा । इस झमेले से लेकिन एक बात यह जरूर जाहिर हो गई है कि पवन अग्रवाल और सतीश जायसवाल के बीच होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में काफी तमाशे देखने को मिलेंगे ।
अंकुर अग्रवाल की दोनों ईमेल-पत्र की तस्वीरें :