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Saturday, February 14, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में दीपक गुप्ता और प्रसून चौधरी की सक्रियता व संलग्नता की निरंतरता पर बने असमंजस के कारण अरनेजा गिरोह के नेताओं ने अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अशोक कुमार गर्ग की उम्मीदवारी से फिलहाल हाथ खींचा

नई दिल्ली । अशोक कुमार गर्ग को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी के लिए अरनेजा गिरोह द्धारा दिखाई जा रही हरी झंडी को फिलहाल पीछे कर लेने से अगले रोटरी वर्ष की चुनावी राजनीति का परिदृश्य थोड़ा धुँधला पड़ गया है । उल्लेखनीय है कि अभी कुछ दिन पहले तक अगले रोटरी वर्ष में अरनेजा गिरोह की तरफ से रोटरी क्लब दिल्ली शाहदरा के अशोक कुमार गर्ग को उम्मीदवार बनाये जाने की चर्चा खासी मुखर थी । अशोक कुमार गर्ग को उम्मीदवार बनाये जाने को लेकर क्लब में कोई बखेड़ा न खड़ा हो, इसके लिए पहले से ही व्यवस्था कर ली गई थी और इसी व्यवस्था के तहत संजीव रस्तोगी को क्लब से बाहर करवा दिया गया था । मान लिया गया था कि संजीव रस्तोगी के क्लब से बाहर हो जाने के बाद अशोक कुमार गर्ग के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवारी का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है । अरनेजा गिरोह द्धारा तीन-तिकड़म से शरत जैन को विजय दिलवा देने के साथ तो अशोक कुमार गर्ग और उनके नजदीकियों ने यह मानना और जताना भी शुरू कर दिया था कि जिस तरह अरनेजा गिरोह ने शरत जैन को जितवा दिया है, वैसे ही उन्हें भी जितवा दिया जायेगा । लेकिन अरनेजा गिरोह के नेताओं ने अगले रोटरी वर्ष में अशोक कुमार गर्ग की उम्मीदवारी को लेकर अचानक से चुप्पी साध ली है ।
अरनेजा गिरोह के नेताओं के नजदीकियों का ही कहना है कि नेताओं को दरअसल अभी अशोक कुमार गर्ग की क्षमताओं पर भरोसा नहीं हो पा रहा है, और वह इस बात को लेकर खुद को ही आश्वस्त नहीं कर पा रहे हैं कि अशोक कुमार गर्ग एक उम्मीदवार की जिम्मेदारियों का निर्वाह कर पायेंगे या नहीं और वह उन्हें जितवा भी सकेंगे क्या ? अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव खासा गहमागहमी भरा होने की उम्मीद की जा रही है । दीपक गुप्ता और प्रसून चौधरी के साथ साथ रोटरी क्लब दिल्ली मयूर विहार के राजीव गुप्ता तथा रोटरी क्लब नोएडा एक्सीलेंस के प्रवीण निगम द्धारा भी अपनी अपनी उम्मीदवारी के लिए संभावनाएँ तलाशे जाने की बातें लोगों के बीच चर्चा में हैं । दीपक गुप्ता और प्रसून चौधरी इस बार अपनी अपनी उम्मीदवारी में असफल भले ही रहे हों, लेकिन अपने अपने अभियान को उन्होंने जिस सक्रियता व संलग्नता के साथ चलाया - उसके कारण वह लोगों के बीच पैठ बनाने में तो कामयाब रहे ही हैं । अगले रोटरी वर्ष में वह यदि सचमुच में अपनी अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करते हैं तो दोनों एक दूसरे के आमने-सामने होंगे और वह एक दिलचस्प मुकाबला होगा । राजीव गुप्ता और प्रवीण निगम के बारे में भी उनके नजदीकियों का कहना है कि यदि उन्होंने वास्तव में अपनी अपनी उम्मीदवारी को प्रस्तुत किया तो वह पूरी पूरी तैयारी से मैदान में उतरेंगे और मुकाबले को गंभीर व संगीन बनायेंगे ।
अरनेजा गिरोह के लोगों का कहना है कि इन लोगों की संभावित उम्मीदवारी को देखते हुए ही उनके नेताओं ने अभी यह फैसला टाल दिया है कि वह किसकी उम्मीदवारी का झंडा उठाये । नेता लोग पहले यह देख/समझ लेना चाहते हैं कि कौन कौन सचमुच में अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करते हैं, और अपनी अपनी उम्मीदवारी के अभियान को वह कैसे चलाते हैं ? वह जिसका पलड़ा भारी देखेंगे, उसी का झंडा उठा लेंगे । इस बार प्रसून चौधरी की उम्मीदवारी का समर्थन करने के बावजूद उन्हें जीत दिलवाने में असफल रहने से सबक लेते हुए अरनेजा गिरोह के नेता अगली बार के लिए सावधान हैं और किसी ऐसे उम्मीदवार के साथ ही जाना चाहेंगे जिसके जीतने की उम्मीद होगी । शरत जैन की जीत से अरनेजा गिरोह के नेताओं की इज्जत इस बार तो बच गई, अगली बार वह यदि अपने उम्मीदवार को नहीं जितवा सके, तो उनके लिए मुश्किल हो जायेगी । दरअसल इसीलिए अरनेजा गिरोह के नेताओं ने अशोक कुमार गर्ग की उम्मीदवारी से फिलहाल हाथ खींच लिए हैं ।
अशोक कुमार गर्ग के नजदीकी हालाँकि दावा तो कर रहे हैं कि शरत जैन उनकी उम्मीदवारी को समर्थन देने की वकालत कर रहे हैं, और इसलिए उन्हें विश्वास है कि नेताओं का समर्थन भी उन्हें मिल जायेगा । दूसरे लोगों को यद्यपि इस विश्वास पर विश्वास नहीं है । उनका तर्क है कि गिरोह में शरत जैन की हैसियत ऐसी नहीं है कि वह अपनी पसंद का फैसला करवा सकें । फैसला तो मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल ही करेंगे । संभावित उम्मीदवार अपने अपने तरीके से उनका समर्थन पाने की कोशिशें तो कर ही रहे हैं, लेकिन साथ ही यह भी जानने/समझने का प्रयास कर रहे हैं कि अपनी अपनी उम्मीदवारी के अभियान को वह कैसे आगे बढ़ाये । दीपक गुप्ता और प्रसून चौधरी के रवैये पर भी काफी कुछ निर्भर है । इस वर्ष उनकी जो सक्रियता व संलग्नता रही है, उसी की निरंतरता में वह यदि अपने अभियान को बनाये रखते हैं तो दूसरे उम्मीदवारों के लिए उनसे मुकाबला करना मुश्किल हो सकता है; लेकिन यदि उनकी निरंतरता का क्रम टूटा तो दूसरे उम्मीदवारों को अपने लिए जगह बनाने का मौका मिल भी सकता है । इस सब के चलते अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनावी परिदृश्य अभी थोड़ा गफलत भरा तो बना दिख रहा है, लेकिन यह सभी को लग रहा है कि वह होगा खासा पेचीदा ।

Thursday, December 25, 2014

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 के प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3012 में राजीव गुप्ता की उम्मीदवारी का संकेत मिलने के साथ सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थकों के बीच जो उथल-पुथल मची, उसने सतीश सिंघल की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने का और उनके प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवार प्रसून चौधरी को बढ़त दिलाने का ही काम किया है

नई दिल्ली । रोटरी क्लब दिल्ली मयूर विहार के राजीव गुप्ता की अगले रोटरी वर्ष में प्रस्तुत होने वाली उम्मीदवारी की चर्चा ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के अभियान को खासी तगड़ी चोट पहुँचाई है । राजीव गुप्ता इस वर्ष असिस्टेंट गवर्नर हैं और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के शुरू से ही घनघोर समर्थक रहे हैं । सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के जो भी समर्थक रहे हैं, उनमें राजीव गुप्ता सबसे आगे रहे हैं और सबसे ज्यादा सक्रिय रहे हैं । राजीव गुप्ता के दिलचस्पी लेने के कारण ही रोटरी क्लब दिल्ली मयूर विहार का अधिष्ठापन समारोह सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के एक बड़े लॉन्चिंग पैड के रूप में आयोजित हुआ था । रोटरी क्लब दिल्ली मयूर विहार के अध्यक्ष आशीष अग्रवाल अधिष्ठापन समारोह में जितने लोगों को आमंत्रित कर रहे थे, राजीव गुप्ता ने निजी दिलचस्पी लेकर उससे ज्यादा लोगों को आमंत्रित करवाया था और इस चक्कर में हुए अतिरिक्त खर्च की भरपाई भी की थी । इस भरपाई को लेकर क्लब के लोगों के बीच थोड़ा विवाद भी हुआ था - कुछ लोगों का कहना था कि यह भरपाई राजीव गुप्ता ने की थी, लेकिन कुछ अन्य लोगों का कहना था कि अतिरिक्त खर्च हुई रकम राजीव गुप्ता ने सतीश सिंघल से दिलवाई थी । इस तरह के छोटे-मोटे विवादों के बावजूद रोटरी क्लब दिल्ली मयूर विहार का अधिष्ठापन समारोह बहुत जोरदार रूप में संपन्न हुआ था; और उस समारोह में सतीश सिंघल की उम्मीदवारी का जैसा जो प्रमोशन हुआ था उससे सतीश सिंघल की उम्मीदवारी ने एक ऊँची छलाँग भरी थी ।
रोटरी क्लब दिल्ली मयूर विहार के अधिष्ठापन समारोह में सतीश सिंघल की उम्मीदवारी को जो ऊँची छलाँग मिली, उससे राजीव गुप्ता को भी एक बड़े स्ट्रैटिजिस्ट की पहचान मिली और माना जाने लगा कि राजीव गुप्ता के साथ रहने से सतीश सिंघल के लिए अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाना और उसे बढ़ाते जाना जरा भी मुश्किल नहीं होगा ।
लेकिन वही राजीव गुप्ता अंततः सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के लिए घाटे का वाहक बने हैं ।
यह इसलिए हुआ क्योंकि राजीव गुप्ता ने सतीश सिंघल की उम्मीदवारी का झंडा उठाने के साथ-साथ अगले रोटरी वर्ष में अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के संकेत देने भी शुरू कर दिए । उनके हवाले से लोगों के बीच चर्चा फैली कि सतीश सिंघल को चुनवाने/जितवाने के बाद राजीव गुप्ता अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करेंगे । माना/समझा गया कि सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के पक्ष में राजीव गुप्ता ने जो सक्रियता दिखाई है, उसके पीछे उनका मकसद अगले वर्ष प्रस्तुत होने वाली अपनी उम्मीदवारी के लिए जमीन तैयार करना है । इसका परिणाम यह हुआ कि सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के ऐसे कई समर्थक - जो राजीव गुप्ता की प्रस्तावित उम्मीदवारी के पक्ष में नहीं थे, भड़क गए और उन्होंने सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थन से बचना शुरू कर दिया । अगले रोटरी वर्ष के लिए राजीव गुप्ता के ही क्लब के अनूप मित्तल के नाम की भी चर्चा थी । सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के कुछेक समर्थकों ने रोटरी क्लब नोएडा एक्सीलेंस के प्रवीण निगम को उम्मीदवार के रूप में प्रमोट करना शुरू कर दिया । हालात यह बने कि सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थक सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के लिए काम करने की बजाए अगले रोटरी वर्ष की चुनावी राजनीति करने में लग गए ।
इससे सतीश सिंघल की उम्मीदवारी का अभियान तो पिछड़ा ही - साथ ही उनके समर्थकों के बीच परस्पर विरोधी खेमेबाजी भी होने लगी । सतीश सिंघल के प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवार प्रसून चौधरी ने इस स्थिति का पूरा पूरा फायदा उठाया । सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के ऐसे समर्थकों पर, जो राजीव गुप्ता की प्रस्तावित उम्मीदवारी के विरोधी हैं - प्रसून चौधरी की तरफ से डोरे डाले गए और सतीश सिंघल के कई समर्थकों को अपनी तरफ मिला लिया गया । इसी का नतीजा है कि चुनाव अभियान शुरू होते समय जिन लोगों को सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थन में देखा/समझा जा रहा था, उनमें से कई अब प्रसून चौधरी की उम्मीदवारी के समर्थन में सक्रिय देखे जा रहे हैं । इस तरह, राजीव गुप्ता की उम्मीदवारी का संकेत मिलने के साथ सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थकों के बीच जो उथल-पुथल मची, उसने सतीश सिंघल की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने का ही काम किया है ।
मजे की बात यह हुई है कि अगले रोटरी वर्ष में प्रस्तुत होने वाली राजीव गुप्ता की उम्मीदवारी की चर्चा भी अब ठंडी पड़ गई है । राजीव गुप्ता के क्लब के लोगों का ही कहना है कि क्लब में अपनी उम्मीदवारी को लेकर राजीव गुप्ता ने कोई बात नहीं की है । उनसे पूछा भी गया तो उन्होंने यह कहते हुए बात को टाल दिया कि क्लब के लोग तो उनकी उम्मीदवारी का विरोध कर रहे हैं, ऐसे में अभी वह अपनी उम्मीदवारी को लेकर क्या बात करें ? क्लब के बाहर भी उनके जो नजदीकी हैं, उनका कहना है कि राजीव गुप्ता ने अब अपनी उम्मीदवारी को लेकर बात करना बंद दिया है । उनके कुछेक नजदीकियों का कहना है कि पहले भी वह यह कहते थे कि सतीश सिंघल के जीतने पर ही वह अगले वर्ष अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करेंगे; हो सकता है कि अब उन्हें सतीश सिंघल के जीतने का भरोसा न रह गया हो और इसीलिए उन्होंने अपनी उम्मीदवारी की बात करना बंद कर दिया हो । सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के संदर्भ में यह एक बड़ा ट्रैजिक सा प्रसंग बन गया है कि जिन राजीव गुप्ता को सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के सबसे बड़े समर्थक के रूप में देखा/पहचाना जा रहा था, उन्हीं राजीव गुप्ता के कारण सतीश सिंघल की उम्मीदवारी अपने प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवार प्रसून चौधरी की उम्मीदवारी के मुकाबले पिछड़ती हुई नजर आ रही है ।

Thursday, August 7, 2014

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 में सतीश सिंघल की उम्मीदवारी को प्रमोट करने की आड़ में राजीव गुप्ता ने जिस तरह से अगले वर्षों में संभावित अपनी उम्मीदवारी के लिए जमीन तैयार का काम किया, उससे रोटरी क्लब दिल्ली मयूर विहार के दो खेमों में बँटने का खतरा पैदा हुआ है

नई दिल्ली । सतीश सिंघल की उम्मीदवारी को प्रमोट करने के बहाने राजीव गुप्ता जिस तरह अपने आप को लोगों के बीच पहचनवाने का काम कर रहे हैं, उससे उनके क्लब - रोटरी क्लब दिल्ली मयूर विहार में खासा बबाल पैदा हो गया है । क्लब के कई लोगों का कहना है कि दूसरे क्लब के लोगों के सामने राजीव गुप्ता जिस तरह की बातें करते हैं और अपने आप को जिस तरह से 'पोज' करते हैं उससे वह यह जताने/दिखाने का प्रयास करते हैं कि जैसे क्लब वही चला रहे हैं और क्लब में जो कुछ भी होता है वह उनसे पूछ कर और उनके 'सहारे' से ही होता है - इससे क्लब की तो बदनामी होती ही है, साथ ही क्लब के दूसरे जो लोग सक्रिय रहते हैं उनकी हेठी भी होती है । क्लब में संजीव सिंघल, विनीत विद्यार्थी, अनूप मित्तल आदि भी हैं जिन्होंने अपनी सक्रियता और अपने कामकाजी रवैये से डिस्ट्रिक्ट में अपनी पहचान बनाई है । पिछले रोटरी वर्ष में, विनोद बंसल के गवर्नर-काल में प्रकाशित डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी में अनूप मित्तल का नाम पाँच बार छपा है । अनूप मित्तल के अलावा उक्त डायरेक्टरी में पाँच और उससे ज्यादा बार छपने वाले नाम राजेश बत्रा, आशीष घोष, संजय खन्ना, जेके गौड़, नवदीप चावला और पप्पूजीत सिंह सरना के हैं । इनमें पहले चार नाम तो गवर्नर कैटेगरी वाले हैं - यानि विनोद बंसल के गवर्नर-काल में जिन तीन लोगों को सबसे ज्यादा जिम्मेदारियाँ मिलीं उनमें एक नाम रोटरी क्लब दिल्ली मयूर विहार के अनूप मित्तल का था । विनोद बंसल ने डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरर जैसे महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी वाले पद के लिए रोटरी क्लब दिल्ली मयूर विहार के संजीव सिंघल को उपयुक्त पाया । क्लब के लोगों का कहना है कि इन तथ्यों से जाहिर है कि क्लब के किन लोगों की डिस्ट्रिक्ट में ऊँची पहचान और हैसियत है; अब ऐसे में राजीव गुप्ता जब अपने आप को क्लब का सर्वेसर्वा दिखाने/जताने का प्रयास करते हैं तो डिस्ट्रिक्ट के दूसरे लोगों को क्लब में उठापटक होने का अंदेशा होता है और इससे क्लब की छवि और पहचान पर प्रतिकूल असर पड़ता है ।
राजीव गुप्ता की अति-सक्रियता के पीछे उनके क्लब के लोग उनकी महत्वाकांक्षा को देखते/पहचानते हैं । क्लब के लोगों का कहना है कि राजीव गुप्ता अगले वर्षों में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार होना चाहते हैं और इसके लिए दूसरे क्लब्स के लोगों की निगाह में चढ़ना चाहते हैं । सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थन में वह बढ़चढ़कर जो सक्रियता दिखा रहे हैं, उसके पीछे उनका उद्देश्य दरअसल अगले वर्षों में प्रस्तुत होने वाली अपनी उम्मीदवारी के लिए जमीन तैयार करना है । वास्तव में, उनके इसी 'उद्देश्य' ने क्लब में बबाल खड़ा कर दिया है । क्लब में दरअसल अनूप मित्तल को भी संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जाता है; इसीलिए समझा गया है कि राजीव गुप्ता अपनी सक्रियता के सहारे अनूप मित्तल को पीछे धकेल कर आगे आने का जुगाड़ लगा रहे हैं । क्लब के कुछेक लोग हालाँकि इसमें कोई बुराई भी नहीं समझते हैं । बातचीत में उनकी 'टोन' से ऐसा नहीं लगता कि वह कोई राजीव गुप्ता के समर्थक हैं, लेकिन फिर भी वह राजीव गुप्ता की आगे आने की कोशिश को सही ठहराते हुए तर्क देते हैं कि अनूप मित्तल उम्मीदवार होने की बात तो करते हैं, लेकिन उम्मीदवार बनते हुए 'दिखते' नहीं हैं, ऐसे में राजीव गुप्ता यदि आगे आने का प्रयास कर रहे हैं तो उसमें क्या गलत है ? इनका कहना है कि 'आ रहे हैं' 'आ रहे हैं' कहते हुए अनूप मित्तल को दूसरों का रास्ता रोके रखने का अधिकार तो नहीं मिल जाता है न ?
राजीव गुप्ता के तरीके को गलत मानने वाले क्लब के दूसरे कुछेक सदस्यों का कहना लेकिन यह है कि राजीव गुप्ता को जब पता है कि अनूप मित्तल पहले से ही उम्मीदवारी की लाइन में हैं और अपने तरीके से उसके लिए काम भी कर रहे हैं और बदले में डिस्ट्रिक्ट लीडरशिप के बीच पहचान और स्वीकार्यता भी प्राप्त कर रहे हैं, तब उन्हें अनूप मित्तल के साथ बात करके अपना 'कार्यक्रम' तय करना चाहिए । वह यदि ऐसा नहीं करते हैं तो यही माना जायेगा कि वह चालबाजी खेल रहे हैं और इससे क्लब के लोगों के बीच खटराग पैदा होगा । वास्तव में, यही हुआ भी है । क्लब के वरिष्ठ और अनुभवी लोगों का मानना और कहना है कि राजीव गुप्ता ने जो कुछ भी किया है, या करने का प्रयास किया है उसमें गलत कुछ भी नहीं है - बस उनका अंदाज कुछ ऐसा रहा जिससे बात का बतंगड़ बन गया और उँगलियाँ उन्हीं की तरफ उठ गईं ।
राजीव गुप्ता ने जो किया और या जो 'दिखाने' का प्रयास किया - उसे उनके उतावलेपन का सुबूत मानने वाले लोगों का कहना है कि सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के प्रमोशन की आड़ में अपना प्रमोशन करने की तरकीब जुटा कर राजीव गुप्ता ने मौके को पहचानने में तथा उसका इस्तेमाल करने में तो कोई गलती नहीं की, लेकिन उन्होंने जो तरीका अपनाया उससे उन्होंने अपने लिए भी और सतीश सिंघल के लिए भी मुश्किल खड़ी कर ली हैं । उल्लेखनीय है कि रोटरी क्लब दिल्ली मयूर विहार के प्रमुख लोगों के रोटरी क्लब नोएडा के प्रमुख लोगों के साथ नजदीकी और व्यावहारिक दोस्ती के संबंध रहे हैं और इस नाते से सतीश सिंघल को रोटरी क्लब दिल्ली मयूर विहार का समर्थन मिलना लगभग तय माना जा रहा है । राजीव गुप्ता लेकिन जिस तरह से सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के झंडावरदार बन कर अपना काम बनाने की जुगत में लगे हैं उससे रोटरी क्लब दिल्ली मयूर विहार दो खेमों में बँटने की कगार पर बढ़ता दिखने लगा है - और इसके चलते सतीश सिंघल के इस मजबूत किले में प्रसून चौधरी के लिए सुरंग बनने की आहट सुनाई देने लगी है । राजीव गुप्ता को नजदीक से जानने वाले लोगों को हैरानी इस बात की है कि राजीव गुप्ता तो बहुत सुलझे हुए और व्यवहारकुशल व्यक्ति हैं - तब फिर उन्होंने ऐसी चूक आखिर क्यों कर दी जिसके चलते उन्हें अपने नजदीकियों और समर्थकों की आलोचना तक का शिकार होना पड़ रहा है ।

Saturday, August 2, 2014

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 के प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3012 में सतीश सिंघल की उम्मीदवारी को मनीष अग्रवाल और राजीव गुप्ता की मदद ने, तथा प्रसून चौधरी की उम्मीदवारी को रमणीक तलवार और विकास चोपड़ा की तरफदारी ने; दोनों के बीच होने वाले चुनावी मुकाबले को दिलचस्प और काँटे का बनाया

गाजियाबाद । सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थन में मनीष अग्रवाल और राजीव गुप्ता ने तथा प्रसून चौधरी की उम्मीदवारी के समर्थन में रमणीक तलवार और विकास चोपड़ा ने जिस तरह की सक्रियता दिखाई है, उसके चलते डिस्ट्रिक्ट 3010 के प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3012 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को लेकर खासी गर्मी पैदा हो गई है । मजे की बात यह है कि मनीष अग्रवाल और रमणीक तलवार डिस्ट्रिक्ट में 'ग्रुप 26' के नाम से जाने/पहचाने जाने वाले एक प्रमुख ग्रुप के सदस्य हैं, जिसके सदस्यों ने आपस में बड़ी कसमें/बसमें खाई हुई हैं कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के चक्कर में ग्रुप के सदस्य अपनी एकता पर आँच नहीं आने देंगे । लेकिन इन दोनों के अलग-अलग उम्मीदवारों के साथ खुल कर सक्रिय होने से उक्त ग्रुप की एकता खतरे में पड़ गई है । मनीष अग्रवाल और रमणीक तलवार की मजबूरी भी है - जब इनके अपने अपने क्लब से उम्मीदवार आ रहे हैं, तो इन्हें उनके समर्थन में सक्रिय होना भी है । इस प्रसंग की एक और दिलचस्प बात यह है कि सतीश सिंघल और प्रसून चौधरी की उम्मीदवारी घोषित होने से पहले संभावित उम्मीदवारों की जो सूची लोगों के बीच चर्चा में थी उसमें मनीष अग्रवाल और रमणीक तलवार के नाम थे; लेकिन उम्मीदवारी जब चर्चा की चुगलखोरियों से निकल कर जमीन पर उतरी तो सतीश सिंघल और प्रसून चौधरी के नाम सामने आये ।
सतीश सिंघल की उम्मीदवारी को मनीष अग्रवाल की सक्रियता से तो बल मिला ही है, साथ ही रोटरी क्लब दिल्ली मयूर विहार के राजीव गुप्ता की सक्रियता से भी ताकत मिली है । राजीव गुप्ता ने निजी दिलचस्पी लेकर अपने क्लब के अधिष्ठापन समारोह को न सिर्फ आमंत्रित किए गए अतिथियों की संख्या को बढ़वा कर बड़ा करवाया बल्कि उसे सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थक-आयोजन में भी तब्दील कर दिया । किसी उम्मीदवार को किसी दूसरे क्लब में इतना खुला समर्थन शायद ही कभी मिला हो, जितना रोटरी क्लब दिल्ली मयूर विहार में सतीश सिंघल को मिला । कुछेक लोगों को हालाँकि यह कहते हुए भी सुना गया कि सतीश सिंघल की उम्मीदवारी को प्रमोट करने के बहाने राजीव गुप्ता ने वास्तव में अगले वर्षों में प्रस्तुत होने वाली अपनी उम्मीदवारी के लिए जमीन तैयार का काम किया है । यह बात यदि सच भी है तो भी - राजीव गुप्ता ने जो किया उससे अभी तो सतीश सिंघल की उम्मीदवारी को ही ताकत मिली है । इससे पहले, सतीश सिंघल और मनीष अग्रवाल के क्लब के अधिष्ठापन समारोह को अच्छे से आयोजित करने में तथा दूसरे क्लब्स के महत्वपूर्ण लोगों की उपस्थिति को संभव बनाने में मनीष अग्रवाल ने अतिरिक्त सक्रियता दिखाई । क्लब के लोगों को ही कहते हुए सुना गया कि मनीष अग्रवाल यदि सक्रिय न होते तो क्लब का अधिष्ठापन समारोह वैसा न होता, जैसा कि वह हुआ ।
मनीष अग्रवाल और राजीव गुप्ता ने यदि सतीश सिंघल की उम्मीदवारी को मुकाबले में लाने का काम किया है तो रमणीक तलवार और विकास चोपड़ा ने प्रसून चौधरी की उम्मीदवारी की हवा बनाने में योगदान दिया है । उम्मीदवार के रूप में प्रसून चौधरी के सामने सबसे बड़ी समस्या लोगों के साथ अपने अपरिचय को लेकर थी । वह खुद भी ज्यादा लोगों को नहीं जानते/पहचानते थे और विभिन्न क्लब्स के लोग भी उन्हें नहीं जानते/पहचानते थे । लोगों के साथ उनके इस अपरिचय को दूर करने में उन्हें रमणीक तलवार और विकास चोपड़ा की सक्रियता से बहुत मदद मिली । रमणीक तलवार चूँकि चुनावी लटकों-झटकों से भी अच्छी तरह परिचित हैं, इसलिए रमणीक तलवार की सक्रियता के कारण प्रसून चौधरी ने कम समय में चुनावी-यात्रा की जितनी दूरी तय कर ली है, वह अन्यथा उनके लिए मुश्किल क्या - शायद असंभव ही होती । संजय खन्ना और रवि चौधरी के बीच हुए चुनाव में रवि चौधरी के पक्ष में जुटे चुनावी महारथियों के जबड़े से संजय खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थन को खींचने का जो लोमहर्षक काम हुआ था, उसे करने वालों में एक नाम रमणीक तलवार का भी था । तभी से डिस्ट्रिक्ट के चुनावी खिलाड़ियों की सूची में रमणीक तलवार का भी नाम जुड़ा है । संजय खन्ना के चुनाव में रमणीक तलवार ने जिस तरह की जो भूमिका निभाई थी, उसके चलते डिस्ट्रिक्ट के प्रायः सभी क्लब्स में उनका परिचय है जिसका फायदा वह प्रसून चौधरी को दिलवा रहे हैं । विकास चोपड़ा इस वर्ष असिस्टेंट गवर्नर हैं, जिस नाते उनके लिए लोगों के बीच पैठ बनाने की सुविधा है । विकास चोपड़ा की इस सुविधा ने प्रसून चौधरी के कई कामों को आसान बना दिया है ।
सतीश सिंघल और प्रसून चौधरी की एक कॉमन समस्या है - और वह यह कि राजनीतिक तिकड़मों को संभव करने के मामले में दोनों ही कच्चे हैं । सतीश सिंघल की रोटरी में लंबी सक्रियता रही है । रोटरी में उन्होंने काम भी बहुत किए हैं लेकिन डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में उन्हें कभी इन्वॉल्व होते हुए नहीं देखा/पाया गया । यही कारण रहा कि रोटरी में कामकाजी उपलब्धियों के लिहाज से उन्हें डिस्ट्रिक्ट में जो जगह मिलना चाहिए थी, वह नहीं मिल सकी । प्रसून चौधरी अपने क्लब के चार्टर प्रेसीडेंट हैं और प्रेसीडेंट के रूप में उन्होंने कुछेक ऐसे उल्लेखनीय काम किए जो डिस्ट्रिक्ट में उदाहरण बने; किंतु उनका क्लब डिस्ट्रिक्ट में पहचाना जाता है 'रमणीक तलवार के क्लब' के रूप में । सतीश सिंघल भी और प्रसून चौधरी भी अपने काम से राजनीतिक फायदा उठाने का हुनर नहीं सीख सके । सामान्य परिस्थितियों में तो इसे एक अच्छी बात के तौर पर लिया जाता; लेकिन चुनावी राजनीति के संदर्भ में यह 'कमजोरी' है । जाहिर है कि उम्मीदवार के रूप में दोनों के सामने अपनी इस 'कमजोरी' पर विजय पाने की गंभीर चुनौती है ।
सतीश सिंघल और प्रसून चौधरी अपनी अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के अभियान में जिस तरह अपने अपने नजदीकी समर्थकों पर निर्भर हैं और उनके नजदीकी समर्थक भी उन्हें जिस तरह से मदद पहुँचा रहे हैं - उसके चलते दोनों के बीच होने वाले चुनाव का परिदृश्य दिलचस्प और काँटे का हुआ जा रहा है ।