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Saturday, June 22, 2019

रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी होल्गर नेक ने अपनी कोर टीम में सुशील गुप्ता के 'लोगों' को ही बनाए रख कर रोटरी में सुशील गुप्ता का प्रभाव खत्म हुआ मान कर खुशी मनाने वाले उनके विरोधियों को तगड़ा झटका दिया है

नई दिल्ली । सुशील गुप्ता के इस्तीफा देने के बाद इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी पद की जिम्मेदारी संभालने वाले होल्गर नेक ने सुशील गुप्ता द्वारा बनाई गई कोर टीम को ही अपनी कोर टीम बना कर सुशील गुप्ता के विरोधियों को तगड़ा झटका दिया है । उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य कारणों से सुशील गुप्ता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी पद से इस्तीफा देने के बाद सुशील गुप्ता के विरोधी नेताओं के मन बड़े गदगद थे । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाने के बाद सुशील गुप्ता से नजदीकियाँ बनाने और 'दिखाने' वाले महत्त्वाकांक्षी नेताओं ने भी उनके इस्तीफा देते ही रंग बदलना शुरू कर दिया था । सुशील गुप्ता के विरोधियों और अवसरवादी नेताओं ने मान/समझ लिया था कि रोटरी इंटरनेशनल की 'व्यवस्था' तथा उसकी राजनीति में सुशील गुप्ता का प्रभाव खत्म हो गया है, और इसलिए उन्हें सुशील गुप्ता की परवाह करने की जरूरत नहीं है । लेकिन सुशील गुप्ता की जगह इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी बने होल्गर नेक ने उनकी 'समझ' पर पत्थर गिरा दिए हैं । इन पंक्तियों के लिखे जाने के समय होल्गर नेक की कोर टीम की चल रही मीटिंग की तस्वीरों में यह देखने को मिल रहा है कि सुशील गुप्ता द्वारा अपनी कोर टीम के लिए चुने गए पदाधिकारियों को ही होल्गर नेक ने अपनी कोर टीम में बनाए रखा है और इसके जरिये उन्होंने वास्तव में यह 'संदेश' देने का काम किया है कि उन्हें सुशील गुप्ता से अलग न समझा जाए । होल्गर नेक के इस संदेश ने सुशील गुप्ता के विरोधियों और अवसरवादी नेताओं की 'खुशियों' पर जैसे ताला डाल दिया है । 
उल्लेखनीय है कि सुशील गुप्ता के इस्तीफा देने के बाद, इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी पद पर होल्गर नेक का 'चयन' हुआ था, तब भी यह चर्चा चली थी कि उनके चयन में सुशील गुप्ता की पसंद का ध्यान रखा गया है । दरअसल इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के दावेदारों में होल्गर नेक की स्थिति बहुत ही कमजोर थी; इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद के चुनाव की राजनीति के खिलाड़ियों में कोई भी उन्हें 'दौड़' में नहीं पा/देख रहा था । सुशील गुप्ता के इस्तीफे के बाद, प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के लिए होने वाले पुनर्निर्वाचन में उन उम्मीदवारों का पलड़ा भारी देखा/पहचाना जा रहा था जिनका सुशील गुप्ता के साथ तगड़ा मुकाबला हुआ था, और जो बहुत मामूली अंतर से पिछड़ गए थे । होल्गर नेक को तो कोई भी संभावित प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में नहीं देख रहा था; यहाँ तक कि वह खुद भी कोई उम्मीद नहीं रखे थे और इसीलिए प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के लिए होने वाले पुनर्निर्वाचन की प्रक्रिया में उन्होंने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई । लेकिन जब उनके नाम की घोषणा हुई, तब हर किसी को हैरानी हुई । नोमीनेटिंग कमेटी ने जितनी आसानी से होल्गर नेक के नाम पर सहमति बनाई, उतनी आसानी से तो सुशील गुप्ता भी नहीं चुने गए थे । नोमीनेटिंग कमेटी में सुशील गुप्ता को कड़ी टक्कर देने वाले उम्मीदवारों के समर्थकों ने होल्गर नेक को चुने जाने के मामले में ज्यादा टाँग नहीं अड़ाई तो इसका कारण यही रहा कि नोमीनेटिंग कमेटी के सदस्यों को सुशील गुप्ता की राय का सम्मान करने का 'इशारा' था और उनकी 'पसंद' के रूप में होल्गर नेक को प्रेसीडेंट नॉमिनी का पद मिल गया ।
होल्गर नेक को सुशील गुप्ता की पसंद के रूप में मिली चर्चा को सुशील गुप्ता के विरोधियों ने ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया और यह मान लिया कि रोटरी में सुशील गुप्ता के दिन अब पूरे हो गए हैं । वैसे भी, रोटरी में पद पाने वाला यह कहाँ ध्यान रखता है कि उसे किन लोगों के सहयोग से पद मिला है ? लेकिन होल्गर नेक ने सुशील गुप्ता द्वारा अपनी कोर टीम के लिए चुने गए पदाधिकारियों को ही अपनी कोर टीम में बनाए रखने के फैसले से यह दिखा/जता दिया है कि उन्हें सुशील गुप्ता के 'प्रतिनिधि' के रूप में ही देखा/पहचाना जाए । सुशील गुप्ता ने अपनी कोर टीम में अपने देश से रंजन ढींगरा को चुना था, होल्गर नेक ने रंजन ढींगरा को अपनी कोर टीम में उसी पद पर बनाए रखा है । इन पंक्तियों के लिखे जाने के समय होल्गर नेक की कोर टीम की चल रही मीटिंग में यह देखने को भी मिला कि सिर्फ रंजन ढींगरा ही नहीं, सुशील गुप्ता की कोर टीम के दूसरे सदस्य भी होल्गर नेक की कोर टीम में पहले के अपने अपने पदों पर बनाए रखे गए हैं । होल्गर नेक के इस फैसले ने सुशील गुप्ता के विरोधियों और अवसरवादी नेताओं को तगड़ा झटका दिया है; सुशील गुप्ता के प्रभाव को खत्म हुआ मान कर उन्होंने रोटरी में अपने जो जो मंसूबे बनाए थे, वह सब उन्हें फेल होते हुए दिख रहे हैं । होल्गर नेक के रवैये को देखते हुए उन्हें यह मुश्किल लग रहा है कि सुशील गुप्ता की 'अनुपस्थिति' का वह कोई फायदा उठा सकेंगे । होल्गर नेक के प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाने में तथा उनके द्वारा सुशील गुप्ता की टीम को ही अपनी टीम बना लेने के फैसले में एक यह संदेश भी निहित है कि सुशील गुप्ता भले ही बीमार हों, और बीमारी के चलते वह प्रेसीडेंट नॉमिनी का पद छोड़ने के लिए मजबूर हुए हों - लेकिन रोटरी में उनका प्रभाव पहले जैसा ही बना हुआ है; और यह बात रोटरी में उनके विरोधियों तथा अवसरवादी महत्त्वाकांक्षी नेताओं के लिए काफी मुसीबतभरी है ।

Saturday, April 27, 2019

रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी सुशील गुप्ता का इस्तीफ़ा, रॉन बुर्टोन को रोटरी फाउंडेशन के चेयरमैन पद से हटाये जाने के तुरंत बाद ही आने के कारण, लोगों के बीच संशय का विषय बना

नई दिल्ली । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी पद से इस्तीफा देकर सुशील गुप्ता ने देश के विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के रोटेरियंस को उदास और निराश करने के साथ-साथ असमंजस और संशय में डाल दिया है । रोटेरियंस दरअसल इस बात पर फूले फूले फिर रहे थे कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट की कुर्सी पर उनके बीच रहने वाला व्यक्ति बैठेगा । सुशील गुप्ता का एक बड़ा लंबा सक्रिय रोटरी जीवन रहा है, और प्रायः हर डिस्ट्रिक्ट में ऐसे लोग मिल जायेंगे जिनकी रोटरी में कुल हैसियत/पूँजी और उपलब्धि यह है कि वह सुशील गुप्ता के नजदीक रहे हैं । कई डिस्ट्रिक्ट्स में दो/चार ऐसे लोग मिल जायेंगे जो रोटरी व डिस्ट्रिक्ट में सिर्फ इस वजह से 'जिंदा' हैं कि उनकी सुशील गुप्ता तक सीधी पहुँच है; डिस्ट्रिक्ट्स में कोई लफड़ा होता है, तो लफड़े से जुड़े लोग उसकी शरण में आते हैं कि भाई, सुशील गुप्ता के यहाँ ले चल ! सुशील गुप्ता काम तो शायद ही किसी के आए हों, लेकिन अपने तौर-तरीकों से उन्होंने अपना ऐसा ऑरा (आभामंडल) जरूर बनाया, जिसकी बदौलत उन्होंने तो उन्होंने, उनके नजदीकियों तक ने अपना अपना 'सिक्का' चला लिया । ऑरा के मामले में सुशील गुप्ता ने राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू को टक्कर दी है; रोटरी में राजा साबू ने जो 'हैसियत' पाई उसे छू पाने में सिर्फ सुशील गुप्ता ही कामयाब हो सके हैं - कुछेक संदर्भ में सुशील गुप्ता का पलड़ा बल्कि भारी ही रहा है । राजा साबू की जो हैसियत बनी, वह इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने के बाद बनी, जबकि सुशील गुप्ता ने प्रेसीडेंट नोमीनेट होने से पहले ही उस हैसियत को पा लिया - यही कारण है कि प्रेसीडेंट नॉमिनी बनने के लिए राजा साबू को चुनाव का सामना करना पड़ा था, लेकिन सुशील गुप्ता के सामने वैसी कोई समस्या पैदा नहीं हुई । राजा साबू ने अपने खुन्नसी व्यवहार के चलते अपने विरोधी व 'दुश्मन' भी खूब बनाये, जबकि सुशील गुप्ता ने अपने उदार रवैये के चलते विरोधियों व 'दुश्मनों' को भी 'अपना' बनाया । यही कारण रहा कि सुशील गुप्ता जब प्रेसीडेंट नॉमिनी घोषित हुए, तब देश में हर खेमे का रोटेरियन उत्साहित हुआ, उसे एक खास किस्म के भावनात्मक गर्व की अनुभूति हुई और प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में सुशील गुप्ता का अप्रत्याशित स्वागत हुआ ।
और यही कारण है कि प्रेसीडेंट नॉमिनी पद से सुशील गुप्ता के इस्तीफे की खबर ने हर किसी को उदास और निराश किया है । बीमारी को इस्तीफा देने का कारण बताये जाने से लोगों के बीच असमंजस और पैदा हुआ है । रोटरी में हर तरफ पदों के लिए भयंकर किस्म की 'मारकाट', तिकड़म और झूठ-फरेब देखते रहे रोटेरियंस के लिए इस बात को हजम कर पाना मुश्किल हो रहा है कि ठीक हो सकने वाली बीमारी के कारण सुशील गुप्ता ने इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जैसा बड़ा पद यूँ ही छोड़ दिया है । सुशील गुप्ता को जबड़े संबंधी समस्या बताई जा रही है, जिसके चलते उनके लिए खाना-पीना और बोल पाना मुश्किल ही नहीं, बल्कि असंभव सा बना हुआ है । रोटेरियंस भी लेकिन मजेदार लोग हैं; अपना अपना डॉक्टरी-ज्ञान पेल कर हर कोई सवाल उठा रहा है कि यह न तो ऐसी बीमारी है जो लंबी चले और न ऐसी है कि ठीक न हो सके - तब फिर सुशील गुप्ता को इस्तीफा देने की जल्दी क्या पड़ गई ? सुशील गुप्ता के शुभचिंतकों की तरफ से इसके जबाव में कहा/बताया जा रहा है कि ऊपर से 'देखने' पर यह बीमारी ज्यादा गंभीर भले ही न लगे, लेकिन सोचने की बात यह है कि जब समस्या शुरू हुई होगी, तब सुशील गुप्ता ने ईलाज तो करवाया ही होगा; ईलाज के बावजूद समस्या खत्म होने की बजाये बढ़ती गई है - जिससे लग रहा है कि बीमारी उतनी सरल नहीं है, जितनी लोग समझ रहे हैं । शुभचिंतकों का यह भी कहना है कि सुशील गुप्ता एक आदर्शवादी व्यक्ति हैं और संगठन को प्राथमिकता देते हैं । बीमारी के चलते वह अपने पद की जिम्मेदारियों का निर्वाह नहीं कर पा रहे हैं, और पता नहीं आगे कितना समय उन्हें अपनी जिम्मेदारियों से विमुख रहना पड़े - लिहाजा यह विचार करके कि उनकी अनुपस्थिति में संगठन के काम पर प्रतिकूल असर न पड़े, उन्होंने पद छोड़ने का फैसला कर लिया है । सुशील गुप्ता के लिए संगठन पहले है, और उन्होंने साबित कर दिया है कि अपनी निजी वजह से वह संगठन के काम पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ने देंगे ।
हिन्दुस्तानियों का किसी भी बात को लेकर कयास लगाने का जो स्वभाव है, जिसके चलते सीता तक को अग्निपरीक्षा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था, उसके चलते कई लोगों को लेकिन सुशील गुप्ता के शुभचिंतकों का तर्क हजम नहीं हो रहा है । उन्हें लग रहा है कि सुशील गुप्ता के इस्तीफे के पीछे की कहानी कुछ और ही है, जिसे बीमारी की आड़ में छिपाया जा रहा है । यह कयास असल में रॉन बुर्टोन को रोटरी फाउंडेशन के चेयरमैन पद से हटाये जाने के तुरंत बाद ही सुशील गुप्ता द्वारा इस्तीफा देने से पैदा हुआ है । उल्लेखनीय है कि चेयरमैन के रूप में रॉन बुर्टोन का कार्यकाल कुल दो महीने ही बाकी बचा था, लेकिन फिर भी अचानक लिए गए फैसले में उन्हें हटा कर ब्रेंडा क्रेसी को बाकी दो माह के लिए उनकी चेयर दे दी गई है । सुशील गुप्ता भी हाल ही के वर्षों में रोटरी फाउंडेशन में ट्रस्टी रहे हैं । यदि यह सिर्फ एक इत्तफाक है, तो भी बहुत संदेह पैदा करने वाला इत्तफाक है कि 22 अप्रैल को रॉन बुर्टोन को ट्रस्टी चेयर से हटाया जाता है, और चार दिन बाद ही पूर्व ट्रस्टी सुशील गुप्ता प्रेसीडेंट नॉमिनी पद से इस्तीफा दे देते हैं । यह संदेह तब और बढ़ जाता है, जब सुशील गुप्ता के नजदीकी उनके इस्तीफे पर हैरानी व्यक्त करते हैं और कहते/बताते हैं कि सुशील गुप्ता से उनकी रोज ही बात होती है, लेकिन उन्हें यह आभास नहीं मिला कि सुशील गुप्ता इतना बड़ा फैसला करने वाले हैं । इस तरह की बातों से लोगों के बीच संशय है कि हो न हो रोटरी फाउंडेशन में कुछ बड़ी ही गड़बड़ हुई है, जिसके कारण रॉन बुर्टोन को फाउंडेशन के चेयरमैन पद से हटाया गया है, और सुशील गुप्ता का प्रेसीडेंट नॉमिनी पद से इस्तीफा 'लिया' गया है । हालाँकि रॉन बुर्टोन को हटाने के तथा सुशील गुप्ता के इस्तीफे के जो जो कारण बताये गए हैं, उनमें कोई साम्य नहीं बैठता दिखता है; लेकिन 'टाइमिंग' के चलते सुशील गुप्ता का इस्तीफा संशय में जरूर आ जाता है । मौजूदा समय ऐसा है, जिसमें दुनिया में, समाज में, देश में और रोटरी में हम बड़ी बड़ी 'मूर्तियों' को 'ढहते' हुए देख रहे हैं, तब फिर कोई भी बुरी बात चौंकाती नहीं है; इसलिए भी सुशील गुप्ता का प्रेसीडेंट नॉमिनी पद से हुआ इस्तीफा संशय के घेरे में आ जाता है ।


Wednesday, September 12, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी सुशील गुप्ता के सम्मान समारोह को अपनी राजनीति के लिए 'उपयोग' करने की विनोद बंसल की कोशिश के कारण प्रस्तावित सम्मान समारोह का तमाशा बन गया है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया और डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर विनोद बंसल के बीच चल रही खींचातानी के चलते इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में सुशील गुप्ता के होने वाले सम्मान समारोह को लेकर खासा तमाशा खड़ा हो गया है । इन दोनों के रवैये को लेकर कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के सदस्यों के बीच नाराजगी अलग शुरू हो गई है; जिनका कहना है कि सम्मान समारोह को लेकर विनय भाटिया और विनोद बंसल ने मिलकर जो तमाशा खड़ा किया है, उससे डिस्ट्रिक्ट की ही नहीं - सुशील गुप्ता की भी बदनामी हो रही है । कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के ही कुछेक सदस्यों का कहना है कि उन्हें इधर-उधर से सुनने को मिल रहा है कि डिस्ट्रिक्ट में 13 अक्टूबर को सुशील गुप्ता का सम्मान समारोह होने जा रहा है, लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की तरफ से इस मामले में उन्हें कोई अधिकृत सूचना नहीं मिली है । कुछेक ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया से इस बारे में पूछा भी तो उन्हें जबाव मिला कि सारा कार्यक्रम विनोद बंसल फाइनल करेंगे, जो अभी देश से बाहर गए हुए हैं - उनके वापस लौटने के बाद ही यह सुनिश्चित किया जायेगा और बताया जायेगा कि सुशील गुप्ता का सम्मान समारोह कब और कहाँ होगा । विनय भाटिया से यह जबाव पा कर कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के सदस्य और भड़के हुए हैं । सुशील गुप्ता के सम्मान समारोह को लेकर हो रही तमाशेबाजी से खफा होकर कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के एक वरिष्ठ सदस्य सुरेश जैन ने चेन्नई इंस्टीट्यूट के तुरंत बाद सुशील गुप्ता के सम्मान में एक निजी आयोजन करने की घोषणा कर दी है । सुरेश जैन की इस घोषणा ने विनय भाटिया और विनोद बंसल को परेशान कर दिया है, और वह सुरेश जैन के इस कार्यक्रम को रद्द करवाने की कोशिशों में जुट गए हैं । उनका कहना है कि डिस्ट्रिक्ट में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में सुशील गुप्ता का सम्मान करने का पहला मौका 'डिस्ट्रिक्ट' को मिलना चाहिए । 
उल्लेखनीय है कि सुशील गुप्ता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाने के बाद कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में कॉलिज की तरफ से सुशील गुप्ता का सम्मान समारोह करने का सुझाव आया था, जिस पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया का कहना रहा कि सुशील गुप्ता के सम्मान में समारोह डिस्ट्रिक्ट को करना चाहिए और डिस्ट्रिक्ट उसे करना चाहेगा । विनोद बंसल ने विनय भाटिया की बात का समर्थन किया; कॉलिज के दूसरे सदस्यों को भी इसमें कोई ऐतराज की बात नहीं लगी - और यह बात कॉलिज में स्वीकार कर ली गई । कॉलिज के सदस्यों का कहना है कि लेकिन उसके बाद से उन्हें नहीं पता कि सुशील गुप्ता के सम्मान समारोह को लेकर विनय भाटिया और विनोद बंसल क्या खिचड़ी पका रहे हैं । इधर-उधर से पहले उन्होंने 20 अक्टूबर को समारोह होने की बात सुनी थी, और अब वह उक्त समारोह के 13 अक्टूबर को होने की बात सुन रहे हैं । विनय भाटिया से कुछ पूछते हैं तो वह यह कह कर हाथ झाड़ लेते हैं कि विनोद बंसल जब देश लौटेंगे, तब ठीक-ठीक पता चलेगा कि समारोह कब और कहाँ होगा । इस तरह इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने गए सुशील गुप्ता का अपने ही डिस्ट्रिक्ट में सम्मान समारोह होने का मामला एक तमाशा बन गया है, जो मुफ्त में देखने को मिल रहा है ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया के नजदीकियों का कहना है कि सुशील गुप्ता के सम्मान समारोह के 'साईज' को लेकर विनय भाटिया और विनोद बंसल के बीच चूँकि गंभीर विवाद है, इसलिए भी समारोह को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है । दरअसल विनोद बंसल इस समारोह को बड़े स्तर पर करना चाहते हैं, जिसमें देश भर के रोटेरियंस नेताओं और पदाधिकारियों के साथ-साथ रोटरी इंटरनेशनल के प्रमुख नेताओं व पदाधिकारियों को भी आमंत्रित किया जाए - ताकि समारोह की धूम मचे और ख्याति फैले । विनोद बंसल का यह आईडिया विनय भाटिया को पसंद तो खूब आया, लेकिन इतने बड़े समारोह के खर्चे का आकलन करने पर उनकी हवा टाईट हो गई । विनय भाटिया को समारोह के खर्चे पर घबराया देख विनोद बंसल ने अपने स्वभाव के अनुसार उन्हें आश्वस्त तो किया कि चिंता मत करो, सब हो जायेगा - लेकिन यह नहीं बताया कि हो कैसे जायेगा । विनय भाटिया की घबराहट बनी देख विनोद बंसल ने उन्हें रास्ता भी सुझाया कि डिस्ट्रिक्ट 3012 के गवर्नर सुभाष जैन से बात कर लेते हैं और दोनों डिस्ट्रिक्ट मिल कर समारोह कर लेते हैं । यह सुन कर विनय भाटिया की घबराहट कम होने की बजाये बढ़ और गई । उन्होंने आकलन किया कि डिस्ट्रिक्ट 3012 भी समारोह का हिस्सा बनेगा, तो लोगों की भीड़ और बढ़ेगी ही - और दोनों डिस्ट्रिक्ट के लिए भी उतना बड़ा समारोह कर पाना कैसे संभव होगा, जितना बड़ा समारोह करने की विनोद बंसल सोच रहे हैं और योजना बना रहे हैं ? विनोद बंसल योजना बता कर खुद तो विदेश उड़ गए, और समारोह की तैयारी की मुसीबत विनय भाटिया के सिर छोड़ गए । विनय भाटिया चाहते हैं कि सुशील गुप्ता के सम्मान में समारोह डिस्ट्रिक्ट 3011 चाहें अकेले करे और या डिस्ट्रिक्ट 3012 के साथ मिल कर करे - डिस्ट्रिक्ट के लोगों को ही शामिल करके और उनके साथ मिल कर ही कर लें और ज्यादा तामझाम न करें । 
विनय भाटिया का अपने नजदीकियों के बीच कहना/बताना है कि विनोद बंसल को चूँकि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए उम्मीदवार बनना है, और उसके लिए समर्थन जुटाने के वास्ते वह सुशील गुप्ता के साथ अपनी नजदीकियत को दिखाना चाहते हैं - इसलिए सुशील गुप्ता के सम्मान समारोह को वह बड़े स्तर पर करना चाहते हैं, ताकि देश/दुनिया के रोटेरियन नेताओं को दिखा/बता सकें कि सुशील गुप्ता के लिए वह क्या कर सकते हैं । विनय भाटिया का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में वह विनोद बंसल की महत्त्वाकाँक्षा को पूरा करने के लिए डिस्ट्रिक्ट का मंच तो उपलब्ध करवा सकते हैं, लेकिन 'डिस्ट्रिक्ट' विनोद बंसल की महत्त्वाकाँक्षा का 'खर्च' नहीं झेल पायेगा । इस बात को विनोद बंसल कैसे देखते हैं और कैसे हैंडल करते हैं, यह उनके वापस लौटने के बाद ही तय होगा - इसलिए विनय भाटिया ने सुशील गुप्ता के सम्मान समारोह की तैयारी को ठंडे बस्ते में डाल दिया है और तय कर लिया है कि विनोद बंसल जब देश लौटेंगे, तभी देखेंगे और तय करेंगे कि क्या करना है ? सुशील गुप्ता के सम्मान समारोह को लेकर हो रहे इस तमाशे ने कॉलिज ऑफ गवर्नर्स को बुरी तरह नाराज किया हुआ है, और उन्हें लग रहा है कि इस तरह से सुशील गुप्ता के सम्मान के नाम पर उन्हें अपमानित किया जा रहा है, और इससे डिस्ट्रिक्ट की भी फजीहत हो रही है ।

Saturday, August 11, 2018

इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट चुने गए सुशील गुप्ता को फजीहत से बचाने के लिए डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव से 'बचने' और या चुनाव को ईमानदारी से करवाए जाने की कोशिशें सचमुच सफल हो सकेंगी क्या ?

नई दिल्ली । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाने के बाद सुशील गुप्ता को देश/विदेश में/से बधाईयाँ भले ही खूब मिल रही हों, और देश/विदेश के लोग उनके प्रति भले ही सम्मान उड़ेले दे रहे हों - लेकिन अपने ही डिस्ट्रिक्ट में उन्हें बहुत ही प्रतिकूल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है । सुशील गुप्ता के नजदीक समझे जाने वाले कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के डिस्ट्रिक्ट में कम से कम दो-तीन वर्ष तक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद पर आपसी सहमति से चयन करने के सुझाव को जिस तरह से नकारने का काम हुआ है, उससे संकेत मिल रहा है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट चुने जाने के बाद सुशील गुप्ता के साथ नजदीकी 'दिखाने' को लेकर डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच होड़ भले ही मची हो, लेकिन उनके मान/सम्मान को बनाये रखने को लेकर किसी को फिक्र नहीं है । सुशील गुप्ता के कुछेक नजदीकियों का मानना और कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को लेकर पिछले रोटरी वर्ष में जिस तरह और जिस स्तर की बेईमानी हुई और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर व कुछेक पूर्व गवर्नर्स की उसमें खुली भागीदारी रही, उसके कारण डिस्ट्रिक्ट का माहौल काफी विषाक्त हो गया है । पिछले वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी इस वर्ष भी जिस तरह से अपनी हरकतों को जारी रखे हुए हैं, और मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया का छिपा तथा उनके साथियों का खुला सहयोग/समर्थन रवि चौधरी की हरकतों को मिलता दिख रहा है - उससे लग रहा है कि पिछले वर्ष जैसी ही हरकतें इस वर्ष भी हो सकती हैं । अब जब हरकतें होंगी, तो उसकी चर्चाएँ भी होंगी - और तब डिस्ट्रिक्ट व सुशील गुप्ता के बड़े 'दुश्मनों' को उन्हें बदनाम करने का मौका मिलेगा; और यह स्थिति इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट सुशील गुप्ता के लिए फजीहत वाली होगी ।
कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स याद दिलाते हैं कि एक बार पहले भी, विनय भाटिया के चुनाव में हुई बेईमानी को लेकर रोटरी इंटरनेशनल के तत्कालीन पदाधिकारियों ने खुद से संज्ञान लेकर डिस्ट्रिक्ट 3011 के राजनीतिक माहौल पर चर्चा की थी, और तीन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स तथा पप्पूजीत सिंह सरना की भूमिका की आलोचना करते हुए तीखी टिप्पणी की थी । उसी प्रकरण को याद करते हुए कुछेक पूर्व गवर्नर्स का कहना है कि सुशील गुप्ता के प्रेसीडेंट होते हुए डिस्ट्रिक्ट में चुनावी राजनीति को लेकर यदि गंदी हरकतें होती हैं, तो सुशील गुप्ता के प्रेसीडेंट इलेक्ट चुने जाने से नाखुश हुए बड़े नेताओं को उन्हें और डिस्ट्रिक्ट को बदनाम करने का मौका मिलेगा । इस स्थिति से बचने के लिए ही सुशील गुप्ता के नजदीकियों के रूप में देखे जाने वाले पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को तरकीब सूझी कि क्यों न अगले दो-तीन वर्षों में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए आपसी विचार-विमर्श से सहमति बनाई जाए, ताकि कोई विवाद पैदा न हो सके - और सुशील गुप्ता के प्रेसीडेंट इलेक्ट चुने जाने से नाखुश हुए बड़े नेताओं को उन्हें और डिस्ट्रिक्ट को बदनाम करने का मौका न मिल सके । डिस्ट्रिक्ट, सुशील गुप्ता और उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स की बदकिस्मती लेकिन यह रही कि इस विचार को कोई खास समर्थन मिलता हुआ दिख नहीं रहा है, और इस विचार की भ्रूण हत्या ही होती नजर आ रही है । 
दरअसल डिस्ट्रिक्ट के कुछेक चुनावबाज नेताओं को डर है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए चुनाव यदि नहीं हुए, तो उनके सामने तो अस्तित्व का ही संकट खड़ा हो जायेगा । कुछेक 'नेताओं' की तो वास्तव में समस्या ही यह है कि उनका रोटरी और डिस्ट्रिक्ट में कोई सकारात्मक योगदान तो है नहीं, वह राजनीति व बदतमीजी के जरिये ही अपनी 'चौधराहट' जमाने की कोशिश करते हैं - उन्हें जब राजनीति करने का मौका नहीं मिलेगा, तो उनके लिए तो रोटरी का 'मतलब' ही खत्म हो जायेगा । ऐसे लोगों ने ही विचार-विमर्श के जरिये डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए सहमति बनाने के विचार को सिरे से ही नकार दिया है । इसके लिए उन्होंने तर्क भी जोरदार गढ़ लिया है और वह यह कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी कौन हो, इसका फैसला कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को नहीं - बल्कि क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को ही करने देना चाहिए । कुछेक वरिष्ठ रोटेरियंस का कहना यह भी है कि चुनाव से 'बचने' की बजाये चुनाव को ईमानदारी से करवाए जाने का प्रयास किया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर और या उसके संगी-साथी और पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स चुनाव के नाम पर अपनी गंदी राजनीति और हरकतें न कर सकें - जिससे कि डिस्ट्रिक्ट की पहचान को कलंकित होने से और सुशील गुप्ता को फजीहत का शिकार होने से बचाया जा सके । डिस्ट्रिक्ट में लेकिन जिस तरह का माहौल है, और डिस्ट्रिक्ट टीम के कुछेक पदाधिकारियों ने जिस तरह से अपने आपको 'सुपर गवर्नर' समझा हुआ है, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया जिनके सामने असहाय व मजबूर से बने हुए हैं - उसके चलते ऐसा हो सकेगा, यह देखना दिलचस्प होगा ।

Friday, August 3, 2018

रोटरी इंटरनेशनल के पूर्व प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन के सक्रिय विरोध के बावजूद प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के लिए सुशील गुप्ता की उम्मीदवारी को लेकर भारतीय रोटेरियंस की उम्मीदें उबाल पर तो हैं, लेकिन यूरोपीय देशों के प्रतिनिधियों की एकता सुशील गुप्ता के लिए मुसीबत भी बन सकती है

नई दिल्ली । रोटरी इंटरनेशनल के प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के चुनाव की 'पहली परीक्षा' में सुशील गुप्ता के 'पास' हो जाने से सुशील गुप्ता के समर्थकों व शुभचिंतकों के बीच 'फाइनल परीक्षा' में भी उनके पास हो जाने की उम्मीद पैदा हुई है - और उन्हें लग रहा है कि सुशील गुप्ता के रूप में भारत को रोटरी इंटरनेशनल के प्रेसीडेंट पद पर प्रतिनिधित्व करने का एक बार फिर मौका मिलेगा । हालाँकि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद के चुनाव से जुड़ी राजनीति को जानने/समझने वाले वरिष्ठ रोटेरियन अभी साफ-साफ कोई राय व्यक्त करने से बच रहे हैं । उनका कहना है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट का चुनाव इतनी अनिश्चितताओं से भरा हुआ है कि ऐन मौके तक कुछ भी कह पाना मुश्किल होता है । लेकिन फिर भी सुशील गुप्ता के प्रेसीडेंट बनने को लेकर भारतीय रोटेरियंस के बीच उम्मीदें उबाल पर हैं, और जानकारों का कहना/बताना है कि सुशील गुप्ता जीत के बहुत करीब हैं - और इतना करीब आ कर भी वह यदि वाइस प्रेसीडेंट नहीं चुने गए, तो फिर उनके लिए इंटरनेशनल प्रेसीडेंट की कुर्सी की तरफ जाने वाला रास्ता हमेशा के लिए बंद हो जायेगा । एक तरह से कह सकते हैं कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने को लेकर सुशील गुप्ता के सामने यह आखिरी मौका है । सुशील गुप्ता के कुछेक शुभचिंतकों को पूर्व प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन से खतरा नजर आ रहा है; उन्हें लग रहा है कि केआर रवींद्रन नहीं चाहते हैं कि भारत से कोई प्रेसीडेंट बने, ताकि भारतीय रोटेरियंस पर उनका राज यथावत चलता रहे; सुशील गुप्ता यदि प्रेसीडेंट बने तो केआर रवींद्रन को भारत से अपना बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ेगा - इसलिए केआर रवींद्रन अपनी तरफ से सुशील गुप्ता का काम बिगाड़ने का हर संभव प्रयास करेंगे ही ।
रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के लिए सुशील गुप्ता का दावा यदि मजबूत समझा जा रहा है तो इसका कारण है कि अधिकृत उम्मीदवार का चुनाव करने वाली 17 सदस्यीय नोमीनेटिंग कमेटी में दो सदस्य तो भारत से ही हैं : जोन 4 से मनोज देसाई और जोन 6 से शेखर मेहता । इन दोनों को ही सुशील गुप्ता के समर्थकों के रूप में देखा पहचाना जाता है । जोन 22 (घाना) के सैम ओकुदजेतो तथा जोन 28 (अमेरिका) के माइकेल मक्कलॉग को सुशील गुप्ता के पक्के समर्थक के रूप में देखा/पहचाना जाता है । जोन 26 (अमेरिका) के ब्रद्फोर्ड हॉवर्ड तथा जोन 30 (अमेरिका) की केरेन वेंटज इंटरनेशनल डायरेक्टर के रूप में उन्हीं वर्षों में इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्य रहे हैं, जिन वर्षों में मनोज देसाई इंटरनेशनल डायरेक्टर थे; और उन्हीं वर्षों में सुशील गुप्ता रोटरी फाउंडेशन में ट्रस्टी रहे थे । ब्रद्फोर्ड हॉवर्ड तथा केरेन वेंटज इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने पर दिल्ली आ चुके हैं, और सुशील गुप्ता यहाँ उनका स्वागत करवा चुके हैं । इस पृष्ठभूमि के चलते इन दोनों का समर्थन भी सुशील गुप्ता को मिल सकता है । जोन 10 (फिलीपींस) के गुइलर तुमंगन, जोन 12 (कोरिया) के जुइन पार्क, जोन 32 (अमेरिका) के माइकेल मक्गवर्न को भी सुशील गुप्ता के अच्छे परिचितों व नजदीकियों के रूप में देखा/पहचाना जाता है । सुशील गुप्ता की एक बड़ी उपलब्धि जोन 20 (नीदरलैंड) के पॉल क्निफ का समर्थन भी है, जिनके बारे में हालाँकि यह भी माना/कहा जाता है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के चुनाव में यूरोपीय देशों की एकता का खेल चला तो पॉल क्निफ यूरोपीय उम्मीदवार के समर्थन में भी जा सकते हैं ।
सुशील गुप्ता को नोमीनेटिंग कमेटी में दरअसल यूरोपीय देशों के प्रतिनिधियों से ही खतरा है, 17 सदस्यीय नोमीनेटिंग कमेटी में वैसे तो जिनकी संख्या कुल चार ही है - लेकिन जो आपसी एकता बना कर दूसरे देशों के प्रतिनिधियों का भी समर्थन जुटा लेने का प्रयास करते हैं । यूरोपीय देशों को चूँकि लंबे समय से इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद पर प्रतिनिधित्व देने का अवसर नहीं मिला है, इसलिए इस बार वह भी जोरशोर से अपने दावे को जता रहे हैं । सुशील गुप्ता के लिए झटके और चुनौती की बात यह है कि गैर एशियाई व गैर अमेरिकी देशों के बीच तो यूरोपीय दावे के प्रति समर्थन है ही, एशियाई व अमेरिकी जोन में भी उनके प्रति समर्थन का भाव है । नोमीनेटिंग कमेटी की कार्यप्रणाली से परिचित लोगों का कहना है कि नोमीनेटिंग कमेटी का फैसला इससे भी प्रभावित होगा कि नोमीनेटिंग कमेटी में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले मनोज देसाई तथा शेखर मेहता प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के अधिकृत उम्मीदवार के लिए सुशील गुप्ता की वकालत कितने जोरदार तथा कन्विंसिंग तरीके से करते हैं । दरअसल नोमीनेटिंग कमेटी के सदस्य प्रेसीडेंट नॉमिनी चुनने की प्रक्रिया में प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के उम्मीदवारों की बजाये अपने अपने 'भविष्य' को लेकर ज्यादा सजग रहते हैं, और यह 'मैसेज' नहीं छोड़ना चाहते हैं कि वह किसी के खिलाफ हैं; दरअसल उन्हें डर होता है कि उन्होंने जोरशोर से किसी की खिलाफत की - और उनकी खिलाफत के बावजूद वह यदि जीत गया तो उनका तो कैरियर चौपट कर देगा । यह डर मनोज देसाई व शेखर मेहता द्वारा सुशील गुप्ता की वकालत के तेवर को कमजोर कर सकता है, और उनकी यह कमजोरी सुशील गुप्ता के लिए घातक हो सकती है ।
नोमीनेटिंग कमेटी प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के लिए छह उम्मीदवारों का चयन पहले ही कर चुकी है; इन छह में से अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने का काम 6 अगस्त को होगा । भारत में रोटरी की राजनीति के संदर्भ में देखें, तो 6 अगस्त को फैसला सिर्फ सुशील गुप्ता के भविष्य का ही नहीं होगा - बल्कि देश में उनके भरोसे रोटरी की व्यवस्था व राजनीति में 'छलाँग' लगाने की ताक में बैठे रोटेरियंस का भी होगा । इस हिसाब से 6 अगस्त का दिन सुशील गुप्ता के समर्थकों/नजदीकियों और विरोधियों में से किसी एक के लिए राजनीतिक 'क़त्ल' का दिन भी होगा ।