Showing posts with label WinS (WASH in Schools). Show all posts
Showing posts with label WinS (WASH in Schools). Show all posts

Saturday, April 13, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में अलग-थलग पड़े होने की फजीहत से छुटकारा पाने के लिए विन्स सेमीनार को मौके के रूप में इस्तेमाल करने की रमेश अग्रवाल की कोशिश को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता ने फेल किया; जिसके चलते रमेश अग्रवाल के लिए 'बैक टु स्क्वायर वन' वाली स्थिति बन गई है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट 3012 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता ने दिल्ली में आयोजित हुए रीजनल विन्स ट्रेनिंग सेमीनार के आयोजन में दिलचस्पी न दिखा कर अपने ही डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर रमेश अग्रवाल और उनकी 'राजनीति' को खासा तगड़ा झटका दिया है । दीपक गुप्ता की बेरुखी के चलते उक्त सेमीनार के आयोजन की जिम्मेदारी रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस के सिर पड़ी, जिसके कारण रमेश अग्रवाल को खासी फजीहत का सामना करना पड़ा । दरअसल रमेश अग्रवाल चाहते थे कि उक्त सेमीनार के आयोजन की जिम्मेदारी डिस्ट्रिक्ट 3012 ले ले, ताकि जोन के डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारियों के बीच यह संदेश जाए कि रमेश अग्रवाल की अपने डिस्ट्रिक्ट में गहरी पैठ है और उन्हें अपने डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारियों तथा सदस्यों का अच्छा समर्थन प्राप्त है । उल्लेखनीय है कि रमेश अग्रवाल इस 'प्रचार' से बड़े परेशान हैं कि उनके अपने ही डिस्ट्रिक्ट में उनकी कोई पूछ/पहचान नहीं है । मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुभाष जैन ने तो रमेश अग्रवाल को किनारे कोने में बैठाये रखा ही; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी आलोक गुप्ता और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी नामित अशोक अग्रवाल भी उनके खिलाफ रहे हैं । दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता के विरोध के चलते ही रमेश अग्रवाल डीआरएफसी नहीं बन सके; और इस वर्ष हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में अशोक अग्रवाल को हरवाने के लिए रमेश अग्रवाल ने दिन-रात एक किया - लेकिन फिर भी अशोक अग्रवाल भारी जीत से विजयी हुए । पिछले रोटरी वर्ष में, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सतीश सिंघल ने तो रमेश अग्रवाल का ऐसा बुरा हाल बना कर रखा हुआ था, कि रमेश अग्रवाल के दूसरे किसी डिस्ट्रिक्ट में ट्रांसफर लेने की चर्चा चल पड़ी थी । अपने ही डिस्ट्रिक्ट में ऐसी भारी फजीहत झेल रहे रमेश अग्रवाल के लिए यह फजीहत ज्यादा बड़ी मुसीबत की बात इसलिए भी थी कि इसके कारण उन्हें दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के लोगों के सामने लज्जित होना पड़ता था ।
रमेश अग्रवाल अपने आपको इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवार के रूप में प्रोजेक्ट करने के प्रयास में लगे हुए हैं; और इसके लिए रोटरी इंडिया विन्स के सेक्रेटरी पद को सीढ़ी की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं । उक्त सीढ़ी के जरिये वह दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स में घुसने की कोशिश करते हैं, लेकिन दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारी किसी न किसी तरह से उन्हें अहसास करा देते रहे हैं कि उन्हें पता है कि खुद अपने डिस्ट्रिक्ट में रमेश अग्रवाल की कैसी क्या हैसियत है ? इस बात को अनुभव करते हुए ही रमेश अग्रवाल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता के साथ संबंध सुधारने का प्रयास किया । पिछले दिनों संपन्न हुए इस वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव ने रमेश अग्रवाल को दीपक गुप्ता के नजदीक आने का मौका भी दे दिया । दरअसल अशोक अग्रवाल को सुभाष जैन के उम्मीदवार के रूप में देखने के कारण दीपक गुप्ता और रमेश अग्रवाल ने अशोक अग्रवाल के विरोध का झंडा उठाया - तो वह अशोक अग्रवाल का तो कुछ नहीं बिगाड़ सके, लेकिन उस प्रक्रिया में उन दोनों को नजदीक आने का अवसर जरूर मिल गया । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में दीपक गुप्ता ने अपने कार्यक्रमों में रमेश अग्रवाल को तवज्जो दी, तो रमेश अग्रवाल को भी लगा कि उनका 'डिस्ट्रिक्ट-निकाला' खत्म हो गया है और अब वह डिस्ट्रिक्ट के कार्यक्रमों में शामिल हो सकेंगे । रमेश अग्रवाल के साथ एक बड़ी समस्या बताई जाती है कि कोई उन्हें ऊँगली पकड़ाए तो वह उसका पहुँचा पकड़ने के लिए लपकते हैं; इसी 'आदत' के चलते उन्होंने दीपक गुप्ता से उम्मीद की कि वह रीजनल विन्स ट्रेनिंग सेमीनार का आयोजन कर लें - दीपक गुप्ता ने लेकिन खर्चे का रोना रोकर इससे इंकार कर दिया । दीपक गुप्ता के बारे में भी मशहूर है कि वह दूसरों से तो काम लेना चाहते हैं, लेकिन दूसरों के काम आने से वह बचते हैं और दूर भागते हैं । रोटरी विन्स ट्रेनिंग सेमीनार के 'आयोजन' से इंकार करके दीपक गुप्ता ने रमेश अग्रवाल की सारी योजना पर पानी फेर दिया ।
रमेश अग्रवाल की योजना थी कि उनका डिस्ट्रिक्ट ही जब उक्त रीजनल सेमीनार आयोजित करेगा, तो रीजन/जोन में हो रखी उनकी बदनामी के दाग कुछ साफ होंगे और लोगों को पता चलेगा कि उनकी अपने डिस्ट्रिक्ट में अच्छी पैठ है । दीपक गुप्ता ने लेकिन बदनामी के दाग धोने की उनकी योजना को फेल कर दिया । दीपक गुप्ता ने कुछ ही दिन पहले रोटरी इंडिया वाटर कंजर्वेशन ट्रस्ट द्वारा आयोजित किए गए 'वर्ल्ड वाटर डे' का उदाहरण देते हुए तर्क दिया कि उक्त रीजनल ट्रेनिंग सेमीनार रोटरी इंडिया विन्स को ही करना चाहिए । उल्लेखनीय है कि रोटरी इंडिया विन्स ने गोवा, दिल्ली, कोलकाता व चेन्नई में रीजनल ट्रेनिंग सेमीनार करने की योजना बनाई है, जिनमें गोवा तथा दिल्ली में सेमीनार हो चुके हैं । दीपक गुप्ता का कहना रहा कि उक्त सेमीनार जब रोटरी इंडिया विन्स का कार्यक्रम है, तो कार्यक्रम रोटरी इंडिया विन्स को ही करना चाहिए । दीपक गुप्ता के स्पष्ट इंकार के बाद उक्त सेमीनार रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस को आयोजित करना पड़ा, जिसके चलते ट्रेनिंग सेमीनार में उपस्थित विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारियों के सामने साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों के रूप में संजय परमार तथा निदा हसन की भूमिका महत्त्वपूर्ण हो गई - और इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवार के संदर्भ में रमेश अग्रवाल से अपने आपको महत्त्वपूर्ण दिखलाने का मौका छिन गया । अपने ही डिस्ट्रिक्ट में अलग-थलग पड़े होने की फजीहत झेल रहे रमेश अग्रवाल के सामने विन्स ट्रेनिंग सेमीनार एक अच्छा मौका था, जिसमें वह उक्त फजीहत से छुटकारा पा सकते थे - लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता के रवैये ने उन्हें 'बैक टु स्क्वायर वन' वाली स्थिति में ला दिया है ।

Thursday, November 17, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में जेके गौड़ इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की सदस्यता के सहारे रमेश अग्रवाल को सबक सिखाने का काम करेंगे क्या ?

नई दिल्ली । रमेश अग्रवाल के साथ समय बड़ा क्रूर मज़ाक कर रहा है - जिन जेके गौड़ को उन्होंने कभी भी पैर की जूती से ज्यादा तवज्जो नहीं दी, उन्हीं जेके गौड़ के कारण उनका राजनीतिक भविष्य चौपट होने की कगार पर आ पहुँचा है और जिसे बचाने के लिए उन्हें जेके गौड़ को मनाने/फुसलाने में 'लगना' पड़ रहा है । रमेश अग्रवाल अगले रोटरी वर्ष में रोटरी जोन 4 और 6ए में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के लिए बनने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के इस वर्ष होने वाले चुनाव में उम्मीदवार बनने की तैयारी कर रहे हैं; किंतु उनकी इस तैयारी को जेके गौड़ ने तगड़ा झटका दिया हुआ है । दरअसल जेके गौड़ ने भी उक्त नोमीनेटिंग कमेटी के लिए अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की तैयारी दिखाई है । नोमीनेटिंग कमेटी की सदस्यता का फैसला पहले काउंसिल ऑफ गवर्नर्स में होगा, जहाँ लेकिन जेके गौड़ के मुकाबले रमेश अग्रवाल की हालत बहुत ही पतली है । काउंसिल ऑफ गवर्नर्स के दस प्रभावी सदस्यों में रमेश अग्रवाल को कुल दो सदस्यों - शरत जैन और सुभाष जैन का ही समर्थन मिल सकता है । जाहिर तौर पर इससे तो उनकी दाल गलेगी नहीं । इसके बाद, रमेश अग्रवाल के पास सीधे चुनाव में जाने का विकल्प ही बचता है । रमेश अग्रवाल को लोगों के बीच अपनी स्थिति/हैसियत का अंदाजा है, इसलिए उक्त विकल्प अपनाने का दुस्साहस वह नहीं करेंगे । इस तरह का दुस्साहस करने का मजा वह पहले एक बार चख चुके हैं । पैतृक डिस्ट्रिक्ट 3010 में सीओएल के चक्कर में वह आशीष घोष से जा भिड़े थे और अपनी नाक कटवा बैठे थे । उनके नजदीकियों का कहना है कि उस तरह की शेख़ीबाजी में वह इस बार नहीं पड़ेंगे; और प्रयास सिर्फ यह करेंगे कि किसी तरह जेके गौड़ को फुसला/समझा कर वह रास्ते से हटा/हटवा दें ।
रमेश अग्रवाल के लिए इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी में जाना दरअसल रोटरी में अपने राजनीतिक भविष्य को बचाने/सँवारने के लिए बहुत ही जरूरी है । तमाम तिकड़मों व जुगाड़ों के बावजूद रमेश अग्रवाल डिस्ट्रिक्ट के ऊपर की रोटरी की व्यवस्था व राजनीति में अपनी जगह नहीं बना सके हैं । ले दे कर रोटरी विन्स में उन्हें 'मजदूरी' करने का मौका भर मिला हुआ है, जिसमें भी कुछ करते दिखने की तस्वीरें खिंचवाने के लिए उन्हें विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के गवर्नर्स की खुशामद और करना पड़ती हैं । अपने अपने डिस्ट्रिक्ट में बुलाने की ऐवज में गवर्नर्स उन्हें जिस तरह से खिजाते और अपमानित करते हैं, इसे सिर्फ वही जानते हैं । दूसरों ने तो इसे तब जाना, जब पिछले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट 3011 के तत्कालीन गवर्नर सुधीर मंगला ने कई लोगों के सामने उन्हें बुरी तरह फटकारा था । रमेश अग्रवाल के नजदीकी बताते हैं कि रोटरी विन्स का काम तो वह इस मजबूरी में कर रहे हैं, क्योंकि उनके पास और कोई असाइनमेंट ही नहीं है । ऐसे में, रमेश अग्रवाल को लगता है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की सदस्यता उनके सारे संकट दूर कर देगी और रोटरी में उनके 'भविष्य' को सुरक्षित कर देगी । उल्लेखनीय है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव एक बड़ा चुनाव होता है, और उसमें रोटरी के तमाम बड़े नेता इन्वॉल्व होते हैं । रमेश अग्रवाल को लगता है - और स्वाभाविक रूप से ठीक ही लगता है कि वह नोमीनेटिंग कमेटी में होंगे तो रोटरी के तमाम बड़े नेताओं के साथ असाइनमेंट के लिए सौदेबाजी कर सकेंगे; और इस तरह से रोटरी की ऊपर की 'व्यवस्था' में उनकी गाड़ी चल निकलेगी ।
रमेश अग्रवाल के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि जैसा वह सोच रहे हैं, ठीक वैसा ही जेके गौड़ भी सोच रहे हैं । जेके गौड़ रोटरी में कोई घास छीलने ही - या रमेश अग्रवाल की 'गुलामी' करने ही थोड़े ही आए हैं । उनका भी 'आगे बढ़ने' का मन होगा ही । यह जेके गौड़ की खुशकिस्मती है कि उन्हें एक ऐसा सुनहरा मौका मिला है, जिसमें कुछ किए बिना ही इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की सदस्यता खुद-ब-खुद उनकी जेब में आ रही है । जेके गौड़ डिस्ट्रिक्ट की राजनीतिक खेमेबाज़ी में हालाँकि अभी भी हैं तो उसी खेमे में, जिसे रमेश अग्रवाल के खेमे के रूप में देखा/पहचाना जाता है - लेकिन रमेश अग्रवाल के लिए वह रास्ता छोड़ेंगे, इसकी उम्मीद कम देखी जा रही है । वास्तव में इस स्थिति के लिए रमेश अग्रवाल खुद ही जिम्मेदार हैं । रमेश अग्रवाल ने जेके गौड़ को हर कदम पर इतना सताया और बार बार अपमानित किया है कि जेके गौड़ उनके लिए अपने हाथ में आए सुनहरे मौके को छोड़ने के लिए शायद ही तैयार होंगे । लोगों को लगता है कि जेके गौड़ को रोटरी की ऊपर की व्यवस्था व राजनीति में बड़ी भूमिका ही पाने का मौका नहीं मिला है, बल्कि रमेश अग्रवाल से मिले अपमान का बदला लेने का अवसर भी मिला है । यूँ तो रमेश अग्रवाल राजनीतिक हैसियत और चतुराई के मामले में जेके गौड़ को अपने सामने कुछ नहीं समझते, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें जेके गौड़ के सामने मजबूर व असहाय बना दिया है ।
रमेश अग्रवाल ने हालाँकि अभी हिम्मत नहीं हारी है, और उनकी तरफ से तरह तरह से जेके गौड़ को पटाने/फुसलाने के प्रयास किए जा रहे हैं; तथा उनके साथ सौदेबाजी करने के 'मौके' खोजे/बनाए जा रहे हैं - लेकिन जेके गौड़ की तरफ से अभी पीछे हटने का संकेत उन्हें नहीं मिला है । जेके गौड़ के नजदीकियों का कहना है कि जेके गौड़ के मन में अभी रमेश अग्रवाल के प्रति जो नाराजगी है, उसे देखते हुए तो यह उम्मीद नहीं की जा सकती है कि वह रमेश अग्रवाल के लिए रास्ता छोड़ेंगे । उनका कहना है कि बात यदि सिर्फ एक पद पाने की होती, तो जेके गौड़ से उम्मीद की जा सकती थी कि  वह रमेश अग्रवाल की राह का रोड़ा न बनते; किंतु जेके गौड़ के सामने चूँकि रमेश अग्रवाल से बदला लेने और उन्हें सबक सिखाने का मौका है - इसलिए उम्मीद नहीं है कि जेके गौड़ मौका छोड़ेंगे । जेके गौड़ चूँकि यह भी अच्छे से जानते/समझते हैं कि रमेश अग्रवाल का स्वभाव कुत्ते की उस दुम की तरह है जिसे सीधा करने का चाहें जितना प्रयास करो, वह सीधी नहीं होती है; पटाने/फुसलाने की कोशिशों तथा सौदेबाजी के चक्कर में वह यदि रमेश अग्रवाल के लिए मौका यदि छोड़ भी देते हैं, तो भी रमेश अग्रवाल आगे उन्हें अपमानित करने की हरकतों से बाज नहीं आयेंगे - लिहाजा जेके गौड़ उन्हें सबक सिखाना ही चाहेंगे । तमाम प्रतिकूल स्थितियों के बावजूद रमेश अग्रवाल चूँकि अभी भी जेके गौड़ को रास्ते से हटाने की मुहिम में लगे हुए हैं, इसलिए देखना दिलचस्प होगा कि जेके गौड़ उनकी मुहिम में फँसने से अपने आपको बचा पाते हैं या नहीं ?

Wednesday, May 27, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 के एक आयोजन में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट सुधीर मंगला के हाथों हुई पूर्व गवर्नर रमेश अग्रवाल की फजीहत का शरत जैन और जेके गौड़ ने भी जो मजा लिया, उससे रमेश अग्रवाल बहुत खफा हैं

नई दिल्ली । रमेश अग्रवाल, शरत जैन और जेके गौड़ से इस बात पर बुरी तरह खफा हैं कि 'वाश' प्रोग्राम को लेकर रोटरी इंडिया विन्स कमेटी व यूनिसेफ के बीच मेमोरेण्डम पर हस्ताक्षर होने के कार्यक्रम में सुधीर मंगला जब उन्हें डांट-फटकार लगा रहे थे, तब यह दोनों चुपचाप खड़े तमाशा देख रहे थे और मजे ले रहे थे । रमेश अग्रवाल का रोना है कि इन दोनों को गवर्नर बनवाने में उन्होंने अथक मेहनत की, और अपने आप को लोगों के बीच बुरी तरह बदनाम तक करवाया - लेकिन इसका बदला इन्होंने इस तरह दिया कि सुशील गुप्ता, संजय खन्ना, विनोद बंसल, संगीता बंसल, रमेश चंद्र तथा यूनिसेफ के प्रमुख पदाधिकारियों के बीच सुधीर मंगला जब उन्हें बुरी तरह लताड़ रहे थे, तब यह दोनों चुपचाप खड़े मजे ले रहे थे । सुशील गुप्ता यदि बीच-बचाव नहीं करते, तो सुधीर मंगला पता नहीं उनका क्या हाल करते । रमेश अग्रवाल का दुःख है कि सुधीर मंगला के हाथों होती उनकी फजीहत पर संजय खन्ना, विनोद बंसल, रमेश चंद्र आदि ने मजे लिए - यह तो वह समझ सकते हैं; किंतु शरत जैन और जेके गौड़ जैसे लोग भी मजे लेने से नहीं चूके, जो गवर्नर बनने के लिए और गवर्नरी चलाने के लिए पूरी तरह उन पर निर्भर रहे हैं और हैं । सुधीर मंगला के हाथों हुई रमेश अग्रवाल की फजीहत के दृश्य ने राजेंद्र जैना द्वारा हुई रमेश अग्रवाल की पिटाई/दौड़ाई के दृश्य को याद दिला दिया ।
मजे की बात यह रही कि राजेंद्र जैना के मामले की तरह ही सुधीर मंगला के मामले में भी अपनी फजीहत को रमेश अग्रवाल ने खुद ही आमंत्रित किया । रमेश अग्रवाल का दरअसल स्वभाव और तरीका ही ऐसा है कि वह दूसरों को उकसाता है । उल्लेखनीय है कि रोटरी इंडिया विन्स कमेटी व यूनिसेफ के बीच मेमोरेण्डम पर हस्ताक्षर होने का कार्यक्रम बड़े मजे से और गरिमापूर्ण तरीके से चल रहा था । आपसी बातचीत के बीच सुधीर मंगला ने रोटरी इंडिया विन्स कमेटी के चेयरमैन सुशील गुप्ता से 'वाश' प्रोग्राम की एक वीडियो फिल्म उपलब्ध करवाने की बात की, जिसे वह डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच प्रदर्शित करना चाहते थे । सुशील गुप्ता ने उन्हें बताया कि उक्त वीडियो फिल्म रमेश अग्रवाल के पास है और वह उनसे ले सकते हैं । सुशील गुप्ता से यह जानकर सुधीर मंगला ने तुरंत ही वहीं मौजूद रमेश अग्रवाल से उक्त वीडियो फिल्म उपलब्ध करवाने की बात कही । प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रमेश अग्रवाल ने सुधीर मंगला को जबाव दिया कि वीडियो फिल्म तो वह उपलब्ध करवा देंगे, लेकिन शिकायत यह है कि तुम अपने कार्यक्रमों में मुझे बुलाते ही नहीं हो । सुधीर मंगला ने उनसे यह शिकायत सुनी, तो रमेश अग्रवाल को तुरंत से पूरी विनम्रता से आश्वस्त किया कि वह उन्हें अपने अगले किसी कार्यक्रम में अवश्य ही बुलायेंगे । बात यहाँ खत्म हो जानी चाहिए थी - किंतु पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश अग्रवाल की यह खूबी है कि सामने वाला यदि उनसे तमीज से बात कर रहा होता है, तो वह सामने वाले को कमजोर समझने लगते हैं और फिर उसके सिर पर सवार होने की कोशिश करने लगते हैं ।
सुधीर मंगला के साथ भी उन्होंने यही किया । सुधीर मंगला ने उनकी शिकायत सुनकर तमीज के साथ जब उन्हें अपने अगले किसी कार्यक्रम में बुलाने के प्रति आश्वस्त किया, तो सुधीर मंगला की इस तमीज और विनम्रता को रमेश अग्रवाल ने उनकी कमजोरी समझा और उनके सिर पर सवार होने की कोशिश करते हुए सुधीर मंगला से कुछ अनाप-शनाप कहने लगे । रमेश अग्रवाल का कहना रहा कि मैंने तुम्हें गवर्नर बनवाया और पहले तुम मेरी खुशामद किया करते थे और अब अपने कार्यक्रमों में जिस-तिस को बुलाते हो, लेकिन मुझे नहीं बुलाते हो । मेमोरेण्डम हस्ताक्षरित होने वाला कार्यक्रम एक छोटा कार्यक्रम था, और वहाँ गिनती के ही लोग मौजूद थे । वहाँ का माहौल ऐसा था ही नहीं जिसमें कि रमेश अग्रवाल इस तरह की बातें करते । लेकिन रमेश अग्रवाल तो रमेश अग्रवाल हैं - अपनी निजी खुन्नस निकालने के लिए वह इस बात की बिलकुल भी परवाह नहीं करते कि मौका क्या है, माहौल क्या है और आसपास कौन लोग हैं । सुधीर मंगला से वह जिस तरह भिड़े हुए थे, उससे लग रहा था कि सुधीर मंगला ने अपने कार्यक्रमों में उन्हें न बुला कर उन्हें गहरी चोट दी है और रमेश अग्रवाल अपने भीतर बहुत सा गुबार ले कर बैठे हैं । रमेश अग्रवाल को अपना गुबार निकालते देख सुधीर मंगला ने पहले तो उनकी बातों को नजरअंदाज किया, लेकिन जब उन्होंने देखा कि रमेश अग्रवाल उनकी भलमनसाहत को उनकी कमजोरी समझ कर बदतमीजी करते ही जा रहे हैं, तो फिर वह भी अपने हरियाणा वाले तेवर में आ गए; और फिर उन्होंने रमेश अग्रवाल को जो सुनाना शुरू किया तो रमेश अग्रवाल को बचने/छिपने की जगह भी नहीं दिखी/मिली । 
राजेंद्र जैना के मामले में भी ऐसा ही हुआ था - पहले तो रमेश अग्रवाल ने राजेंद्र जैना के साथ बदतमीजी की, लेकिन जब राजेंद्र जैना ने उन्हें जबाव देना शुरू किया तो रमेश अग्रवाल ने महिलाओं के बीच छिप कर अपने आप को बचाया था । यहाँ लेकिन लोग बहुत ही कम थे, लिहाजा रमेश अग्रवाल को बचने/छिपने के लिए जगह ही नहीं मिली । सुधीर मंगला ने जमकर रमेश अग्रवाल की क्लास ली और कहा कि तुम हो किसी लायक नहीं और बड़े नेताओं की खुशामद कर कर के अपने लिए निमंत्रण माँगते हो; दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के गवर्नर इलेक्ट्स ने मुझे बताया है कि तुमने उनकी खुशामद कर कर के अपने लिए निमंत्रण जुटाए हैं; लोगों से काम निकालते हो और फिर उनके साथ बदतमीजी करते हो; तुम्हारी हरकतों के कारण ही रोटरी में तुम्हारी बदनामी है और तुम्हें कोई पसंद नहीं करता है; जैसे तैसे करके अपने लिए कुछ जगह बना लेते हो और फिर उसका प्रदर्शन करके अपने आप को बड़ा दिखाते हो; सब जानते हैं कि तुम क्या हो; आदि-इत्यादि । सुधीर मंगला ने जो कुछ कहा, यह तो भले शब्दों में उसकी एक बानगी भर है; उन्होंने रमेश अग्रवाल को ऐसा बहुत कुछ कहा जो यहाँ लिखा/छापा भी नहीं जा सकता । सुधीर मंगला के उग्र तेवर देख कर रमेश अग्रवाल की सिट्टीपिट्टी गुम हो गई थी । वहाँ मौजूद कोई भी वरिष्ठ रोटेरियन उनकी मदद को आगे नहीं आया । सुशील गुप्ता थोड़ा अलग यूनिसेफ के पदाधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे थे । उन्होंने शोर सुना तो वह बीच-बचाव करने आए और उन्होंने सुधीर मंगला को शांत किया । 
रमेश अग्रवाल एक 'बहादुर' व्यक्ति हैं । सुधीर मंगला ने उनके साथ जो किया, उसकी उन्होंने कोई परवाह नहीं की है । राजेंद्र जैना ने उनके साथ जो किया था, उन्होंने उसकी भी कोई परवाह नहीं की थी । रमेश अग्रवाल अच्छी तरह से जानते हैं कि रोटरी में अधिकतर लोग उन्हें पसंद नहीं करते हैं - उन्हें इसकी भी परवाह नहीं है, क्योंकि इसके बावजूद रोटरी में वह अपने कुछ-कुछ काम बनाने में सफल हो ही जाते हैं । अपनी सफलताओं के साथ वह कुल मिलाकर खुश हैं । यहाँ भी रमेश अग्रवाल को इस बात से कोई रंज नहीं हुआ कि संजय खन्ना, विनोद बंसल, रमेश चंद्र आदि ने उन्हें सुधीर मंगला के प्रकोप से बचाने का कोई प्रयास नहीं किया और जो हुआ उसका मजा ही लिया । रमेश अग्रवाल को लेकिन यह देख कर बुरा लगा कि शरत जैन और जेके गौड़ जैसे उनके 'भक्त' भी मजा लेते रहे और इन्होंने भी सुधीर मंगला को रोकने की या मौके पर उनके साथ सहानुभूति दिखाने का कोई प्रयास तक नहीं किया । शरत जैन और जेके गौड़ के इस व्यवहार ने रमेश अग्रवाल को जरूर आहत किया है ।

Wednesday, April 15, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 से रोटरी इंडिया विन्स में शरत जैन को डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर बनवा कर रमेश अग्रवाल ने अपने लिए डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के पद को पक्का करने का दाँव तो चला ही है, साथ ही साथ रोटरी की राजनीति में मुकेश अरनेजा को किनारे लगाने का काम भी कर लिया है

नई दिल्ली । रमेश अग्रवाल ने रोटरी इंडिया की विन्स(वॉश इन स्कूल्स) कमेटी में डिस्ट्रिक्ट विन्स कॉर्डिनेटर के रूप में शरत जैन का नाम जुड़वा कर एक तरफ तो मुकेश अरनेजा को तगड़ा झटका दिया है, और दूसरी तरफ अपने लिए डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर पद की कुर्सी पक्की करने का दाँव चला है । मुकेश अरनेजा के लिए बदकिस्मती की बात यह हुई है कि सुशील गुप्ता से सिफारिश करके विन्स कमेटी में रमेश अग्रवाल को जगह उन्होंने ही दिलवाई थी; लेकिन अब रमेश अग्रवाल ने इस कमेटी से मुकेश अरनेजा का पत्ता पूरी तरह ही कटवा दिया है । सुशील गुप्ता रोटरी इंडिया विन्स के चेयरमैन हैं । सुशील गुप्ता के साथ मुकेश अरनेजा की नजदीकियत को जानते/पहचानते हुए रमेश अग्रवाल लगातार मुकेश अरनेजा से सिफारिश करने की खुशामद कर रहे थे । रमेश अग्रवाल का यही तर्क था कि इस कमेटी में उन्हें यदि जगह मिल गई तो डिस्ट्रिक्ट से ऊपर के लोगों के बीच उठने बैठने का उन्हें भी कुछ मौका मिल जायेगा । मुकेश अरनेजा की इस कमेटी का हिस्सा बनने में इसलिए दिलचस्पी नहीं थी, क्योंकि फिर उन्हें ज्यादा समय देना पड़ता और काम करना पड़ता । मुकेश अरनेजा की खुद की दिलचस्पी नहीं थी, और रमेश अग्रवाल उनकी खुशामद कर रहे थे, लिहाजा मुकेश अरनेजा ने सुशील गुप्ता से बात करके रमेश अग्रवाल को रोटरी इंडिया विन्स कमेटी में जगह दिलवा दी ।
मुकेश अरनेजा ने सोचा तो यह था कि वह रमेश अग्रवाल को एक बड़ा पद दिलवा रहे हैं तो रमेश अग्रवाल उनका अहसान मानेंगे । रमेश अग्रवाल लेकिन मुकेश अरनेजा के पक्के वाले चेले हैं - उन्होंने मुकेश अरनेजा की अच्छी बातें तो कुछ नहीं सीखीं, किंतु घटिया बातें खूब सीख ली हैं । अहसान न मानने का 'गुण' हो सकता है कि उनमें पहले से भी हो, और मुकेश अरनेजा की चेलागिरी करते हुए तो वह और ठोस हुआ हो - जैसे करेला यूँ तो कड़वा ही होता है, पर यदि वह नीम पर चढ़ा हुआ हो तो और ज्यादा कड़वा होने का अहसास कराता है । सो, अपने आप को मुकेश अरनेजा का पक्का वाला चेला साबित करते हुए रमेश अग्रवाल ने सबसे पहले मुकेश अरनेजा को ही डसा । मुकेश अरनेजा की विन्स की केंद्रीय कमेटी का सदस्य बनने में तो दिलचस्पी नहीं थी (क्योंकि वहाँ कुछ काम भी करना पड़ता); लेकिन डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर के रूप में उक्त कमेटी का हिस्सा बनने में पूरी दिलचस्पी थी (क्योंकि तब काम तो कुछ करना नहीं होता, और नेतागिरी दिखाने का पूरा पूरा अवसर होता) । डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर का पद चूँकि पीडीजी किस्म के लोगों को ही मिलता है, इसलिए मुकेश अरनेजा आश्वस्त थे कि डिस्ट्रिक्ट 3012 से उनका ही नंबर लगेगा । रमेश अग्रवाल ने लेकिन उन्हें तगड़ा झटका देते हुए उनकी जगह शरत जैन को डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर के रूप में ले लिया है ।
गौर करने वाला तथ्य यह है कि शरत जैन को इससे कोई फायदा नहीं है ! डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर के रूप में वह विन्स की जिस भी मीटिंग में हिस्सा लेने के अधिकारी होंगे, उस मीटिंग में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में भी हिस्सा लेने का अधिकार उन्हें होगा ही । रमेश अग्रवाल की इस 'हरकत' से शरत जैन को तो कोई फायदा नहीं होगा, लेकिन डिस्ट्रिक्ट 3012 को नुकसान जरूर हो गया है । विन्स की मीटिंग्स में डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व घट गया है - क्योंकि दो पदों का प्रतिनिधित्व एक अकेले शरत जैन ही करेंगे । और यदि कभी शरत जैन नहीं जा पाये तो उक्त मीटिंग में डिस्ट्रिक्ट 3012 के प्रतिनिधित्व का तो बस भगवान ही मालिक है । अगले रोटरी वर्ष में शरत जैन पेम/पेट्स की तैयारियों में व्यस्त रहेंगे, लिहाजा संभव है कि वह विन्स की मीटिंग्स के लिए समय न निकाल पाएँ । इसी वजह से कुछेक लोगों का कहना रहा कि शरत जैन की बजाये जेके गौड़ को रमेश अग्रवाल डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर बनवा सकते थे । उसमें भी समस्या लेकिन यही है कि जेके गौड़ भले ही रमेश अग्रवाल को सिर पर बैठाये हुए हों और उनके 'गुलाम' की तरह बने हुए हों, लेकिन रमेश अग्रवाल उन्हें मुकेश अरनेजा के 'आदमी' के रूप में ही देखते हैं । कुछेक लोगों का तो मानना और कहना है कि रमेश अग्रवाल हमेशा ही जेके गौड़ को इसीलिए जलील किए रहते हैं, क्योंकि जेके गौड़ 'में' वह मुकेश अरनेजा को देखते हैं ।
शरत जैन को रोटरी इंडिया विन्स में डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर बनवा कर रमेश अग्रवाल ने दरअसल अपने लिए शरत जैन के गवर्नर-काल के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के पद को पक्का करने का भी दाँव चला है । उन्होंने शरत जैन को अहसास करवाया है कि उनकी कृपा से वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (इलेक्ट) ही नहीं बने हैं, बल्कि डिस्ट्रिक्ट से ऊपर की रोटरी में भी उनके लिए मुँह दिखाने का मौका बना है । रमेश अग्रवाल को विश्वास है कि यह मौका बनाने के लिए उन्हें शरत जैन से ईनाम अवश्य मिलेगा और शरत जैन उनकी तरह के अहसानफरामोश साबित नहीं होंगे; और अवश्य ही उन्हें ही डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनायेंगे । एक पंथ दो काज वाली शैली में रमेश अग्रवाल ने शरत जैन को डिस्ट्रिक्ट विन्स कॉर्डिनेटर बनवा कर मुकेश अरनेजा को किनारे लगाने का काम भी कर लिया । इसी स्थिति के लिए गुरु के गुड़ रह जाने तथा चेले के शक्कर हो जाने वाली कहावत बनी है ।