Saturday, January 25, 2014

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री में सिरसा क्षेत्र में आरके शाह की उम्मीदवारी के प्रति समर्थन दिखाने के साथ-साथ विजय शिरोहा ने विरोधी खेमे के नेताओं के झूठे प्रचार की पोल खोलने का काम भी कर लिया

नई दिल्ली । आरके शाह की उम्मीदवारी के प्रति समर्थन व्यक्त करने के उद्देश्य से रानिया में आयोजित मीटिंग में 14 क्लब्स के 180 से अधिक सदस्यों के उपस्थित होने से सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद का चुनाव आरके शाह के पक्ष में एकतरफा तौर पर झुका हुआ दिखा है । उल्लेखनीय है कि आरके शाह की उम्मीदवारी को सिरसा क्षेत्र में ऐसा जोरदार समर्थन मिलने की उम्मीद खुद आरके शाह को और उनके कुछेक समर्थक नेताओं को भी नहीं थी । एक सिर्फ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विजय शिरोहा को जरूर विश्वास था कि आरके शाह को सिरसा क्षेत्र में भी वैसा ही समर्थन मिलेगा, जैसा हरियाणा के दूसरे क्षेत्रों में मिलने की उम्मीद और दावा किया जा रहा है । विजय शिरोहा को इस तरह का जो विश्वास था, उसे आरके शाह और उनकी उम्मीदवारी के कुछेक दूसरे समर्थक नेता हालाँकि किंचित संदेह से देख रहे थे । विश्वास और संदेह के इसी मिलेजुले माहौल में रानिया में आरके शाह की उम्मीदवारी के समर्थन में मीटिंग आयोजित हुई ।
सिरसा क्षेत्र के लोगों के लिए आयोजित मीटिंग को रानिया में आयोजित करने के फैसले को लेकर भी आरके शाह के समर्थकों में थोड़ा मतभेद था । कुछेक समर्थक इस मीटिंग को सिरसा में ही आयोजित करना चाहते थे, जबकि अन्य कुछेक का कहना था कि इस मीटिंग को रानिया में आयोजित किया जाये । रानिया में मीटिंग आयोजित करने के पक्षधर लोगों का तर्क था कि रानिया में जो उपस्थिति होगी, वह वास्तविक ताकत को प्रदर्शित करेगी । यही हुआ भी । रानिया में आयोजित मीटिंग में 14 क्लब्स के 180 से अधिक लोगों की उपस्थिति ने सचमुच में चुनावी लड़ाई को आरके शाह के पक्ष में एकतरफा रूप से कर दिया है । यह तब हुआ जबकि आरके शाह की उम्मीदवारी के समर्थक नेता उक्त मीटिंग में नहीं गए थे; और पूरा आयोजन एक तरह से वीके हंस के भरोसे था । ख़राब मौसम और घने कोहरे के बावजूद इतने लोगों का आरके शाह की उम्मीदवारी के समर्थन में हुई मीटिंग में जुटना विरोधी खेमे के नेताओं के दावों को बुरी तरह से ध्वस्त कर देता है ।
दरअसल विरोधी खेमे के नेताओं ने अफवाह उड़ा रखी थी कि सिरसा क्षेत्र के क्लब्स के लोग डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विजय शिरोहा के बहुत खिलाफ हैं और इसका खामियाजा आरके शाह को भुगतना पड़ेगा । इस अफवाह के चलते आरके शाह कुछ टेंशन में भी आये, लेकिन जल्दी ही उन्हें विरोधी खेमे के नेताओं की चाल समझ में आ गई । आरके शाह ने गौर किया कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विजय शिरोहा ने हाल ही में सड़क सुरक्षा सप्ताह के जिस प्रोजेक्ट का आह्वान किया था, उसे डिस्ट्रिक्ट में सबसे ज्यादा उत्साह से सिरसा क्षेत्र के क्लब्स ने ही अपनाया था । विरोधी खेमे के नेताओं द्धारा उड़ाई गई अफवाह यदि सच होती, और सचमुच में सिरसा क्षेत्र के क्लब्स के लोगों के बीच डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विजय शिरोहा के प्रति विरोध का भाव होता तो विजय शिरोहा द्धारा आह्वानित प्रोजेक्ट के प्रति वह इतना उत्साह भला क्यों दिखाते ? इतने सब कुछ के बाद भी, आरके शाह की उम्मीदवारी के समर्थन में आयोजित मीटिंग के जरिये भी विजय शिरोहा ने विरोधी खेमे के नेताओं के झूठे प्रचार की हवा निकालने की तैयारी की । सिरसा की बजाये रानिया में मीटिंग करके और खुद के साथ-साथ दूसरे बड़े नेताओं को अनुपस्थित रख कर रानिया में आयोजित मीटिंग को सफल करवा कर विजय शिरोहा ने विरोधी खेमे के नेताओं के झूठे प्रचार की पोल खोलने का काम भी आरके शाह की उम्मीदवारी के प्रति समर्थन दिखाने के साथ-साथ ही कर लिया ।

Friday, January 24, 2014

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री में विक्रम शर्मा की पराजय को सुनिश्चित जान कर उनके समर्थक नेताओं ने उनसे बाकी बचे पैसे ऐंठने के लिए पीएस राठी की उम्मीदवारी के जरिये दबाव बनाने की चाल चली है

नई दिल्ली । विक्रम शर्मा और उन्हें सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार बनाने की मुहिम में जुटने वाले नेताओं के बीच झगड़ा पैदा हो गया है, जिसके चलते नेताओं ने एक दूसरे उम्मीदवार पीएस राठी को उम्मीदवार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है । लायंस क्लब दिल्ली कृष्णा के पीएस राठी बेचारे भले व्यक्ति हैं - विक्रम शर्मा की उम्मीदवारी से चार दिनों में ही निराश हो चुके नेता जिनमें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने की लालसा जगा देने में तो कामयाब हो गए हैं, लेकिन जिन्हें कम समय में जिता देने का भरोसा दे पाने में वह सफल नहीं हो पाये हैं । विक्रम शर्मा को छोड़ कर पीएस राठी की उम्मीदवारी का झंडा थामने की तैयारी करने वाले नेता इसीलिए इस जुगाड़ में लग गए हैं कि कैसे भी करके डिस्ट्रिक्ट कॉन्फरेंस का मौजूदा शिड्यूल स्थगित हो जाये और डिस्ट्रिक्ट कॉन्फरेंस आगे बढ़ जाये, ताकि उन्हें पीएस राठी की उम्मीदवारी की तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाये ।
विक्रम शर्मा को उम्मीदवार बनाने वाले और चार दिन बाद ही अब उनके समर्थन से पीछे हटते दिख रहे नेता लायंस इंटरनेशनल को चिट्ठी लिख कर डिस्ट्रिक्ट कॉन्फरेंस में अडंगा डालने का जो प्रयास कर रहे हैं, उसके पीछे यही कारण देखा/पहचाना जा रहा है कि विक्रम शर्मा की पराजय को उन्होंने स्वीकार कर लिया है और अब वह एक नए उम्मीदवार के साथ आना चाहते हैं और उसके लिए समय चाहते हैं ।
विक्रम शर्मा और उनकी उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं के बीच आरोपों-प्रत्यारोपों का जो नजारा देखा/सुना जा रहा है, उसने पूरे मामले को खासा दिलचस्प बना दिया है । विक्रम शर्मा का आरोप हैं कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के एक खेमे के नेताओं ने उन्हें उम्मीदवार तो बना दिया है, लेकिन उनकी मदद कोई भी नहीं कर रहा है और सभी नेता अपने अपने तरीके से उनसे पैसा ऐंठने के प्रयासों में लगे हैं । नेताओं का आरोप यह है कि विक्रम शर्मा की उम्मीदवारी को हरी झंडी देने से पहले उन्हें सारा हिसाब बता दिया गया था और विक्रम शर्मा द्धारा सभी खर्चे करने की स्वीकृति देने के बाद ही उनकी उम्मीदवारी को हरी झंडी दी गई थी, लेकिन अब विक्रम शर्मा पैसा खर्च करने में आनाकानी कर रहे हैं, जिसके चलते उनके समर्थन में किये जाने वाले काम प्रभावित हो रहे हैं ।
विक्रम शर्मा के पास इसका बड़ा तर्क संगत जबाव है - उनका कहना है कि उनकी उम्मीदवारी को हरी झंडी देने से पहले उनके और नेताओं के बीच जो बातचीत हुई थी, उन्होंने तो उसके अनुसार काम किया, लेकिन नेताओं ने अपने हिस्से की जिम्मेदारी नहीं निभाई है । विक्रम शर्मा के अनुसार, उनकी उम्मीदवारी को हरी झंडी मिलते ही उन्होंने एक मोटी रकम नेताओं को सौंप दी थी, जिस रकम को अजय बुद्धराज और हर्ष बंसल ने हथिया लिया और उस रकम को अपने अपने क्लब्स के ड्यूज जमा कराने में खर्च कर दिया । दूसरे नेताओं को जब इस बात का पता चला तो वह भड़क गए कि उनके क्लब्स के ड्यूज क्यों नहीं जमा करवाये गए । भड़के हुए नेताओं का मुँह बंद करने के लिए अजय बुद्धराज और हर्ष बंसल ने उनसे और पैसे मांगने शुरू कर दिए । विक्रम शर्मा का कहना है कि उन्होंने जब सारा हिसाब समझ कर अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की तैयारी की है, तो जाहिर है कि वह पैसे खर्च करने के लिए तैयार हैं और पैसे खर्च करेंगे; किंतु नेताओं को भी तो अपनी सक्रियता से यह दिखाना/बताना चाहिए कि वह पैसे 'लेने' के अलावा भी कुछ और करेंगे ।
विक्रम शर्मा की उम्मीदवारी के समर्थन में भिवानी में हुई मीटिंग में फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नरेश गुप्ता के न पहुँचने से विक्रम शर्मा को समझ में आ गया कि उन्हें उम्मीदवार बनाने वाले नेताओं की दिलचस्पी सिर्फ उनसे पैसा बसूलने में है; इसके साथ ही विक्रम शर्मा ने पैसा देने से हाथ खींच लिया । नेता लोग इस बात से भड़क गए और उन्होंने विक्रम शर्मा की बजाये पीएस राठी को उम्मीदवार बनाने की तैयारी शुरू कर दी । नेताओं ने सब्जबाग दिखाया तो पीएस राठी के मन में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने का ख्वाब तो जाग गया, किंतु वह अभी इस बारे में आश्वस्त नहीं हो पाये हैं कि जो नेता उन्हें सब्जबाग दिखा रहे हैं, वह उन्हें जिता ही देंगे; इसलिए पीएस राठी अपनी उम्मीदवारी को लेकर ज्यादा आगे नहीं बढ़े हैं । उन्हें सब्जबाग दिखा रहे नेताओं को लेकिन यह जरूर लग रहा है कि यदि उन्हें थोड़ा समय मिल जाये तो फिर वह पीएस राठी को जीतने का भरोसा भी दिला देंगे ।
पीएस राठी की उम्मीदवारी को कुछ लोग हालाँकि विक्रम शर्मा पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं । विक्रम शर्मा से पैसे ऐंठने में परेशानी अनुभव कर रहे नेताओं को लग रहा है कि पीएस राठी की उम्मीदवारी का भय दिखा कर वह विक्रम शर्मा की जेब ढीली करवाने में सफलता प्राप्त कर लेंगे । नेता लोग भी जान रहे हैं कि विक्रम शर्मा की उम्मीदवारी का कुछ होना/जाना नहीं है और आरके शाह को सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुने जाने से अब कोई चमत्कार ही रोक सकता है; इसलिए विक्रम शर्मा से बाकी बचे पैसे ऐंठने के लिए उन्हें कुछ न कुछ हरकत करते रहना जरूरी लग रहा है - जिससे विक्रम शर्मा के मन में डर और/या उम्मीद बनी रहे और वह बाकी बचे पैसे भी 'अपने' नेताओं को दे दें ।

Monday, January 20, 2014

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 में सीओएल के लिए आशीष घोष को अधिकृत उम्मीदवार घोषित होने से रोकने के लिए रमेश अग्रवाल और उनकी टीम ने अधिकृत उम्मीदवार के लिए दो-तिहाई वोटों को प्राप्त करने की जरूरत का झमेला खड़ा किया

नई दिल्ली । रमेश अग्रवाल को सीओएल (काउंसिल ऑन लेजिसलेशन) के लिए चुनवाने हेतु विनय कुमार अग्रवाल और जेके गौड़ ने जिस तरह की मोर्चाबंदी की है, उससे रमेश अग्रवाल की उम्मीदवारी की कमजोरी ही साबित हुई है । उल्लेखनीय है कि रमेश अग्रवाल की उम्मीदवारी के प्रमुख झंडाबरदार विनय कुमार अग्रवाल ने माँग की है कि सीओएल के लिए अधिकृत उम्मीदवार के लिए दो-तिहाई वोट प्राप्त करना जरूरी होना चाहिए । विनय कुमार अग्रवाल डिस्ट्रिक्ट के बड़े कानूनबाज किस्म के लोगों - मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल - के नजदीक हैं, इसलिए उनसे यह उम्मीद तो की ही जाती है कि उन्हें डिस्ट्रिक्ट में का नियम पता ही होगा जिसके अनुसार साधारण बढ़त ही अधिकृत उम्मीदवार चुनने के लिए आवश्यक है । आखिर तब फिर विनय कुमार अग्रवाल ने दो-तिहाई वोटों को प्राप्त करने की जरूरत की माँग क्यों की है ?
रमेश अग्रवाल के नजदीकियों का ही मानना और कहना है कि लगता है कि रमेश अग्रवाल और उनके सिपहसालारों ने समझ लिया है कि काउंसिल ऑफ गवर्नर्स में आशीष घोष को उनसे ज्यादा वोट मिल जायेंगे । उन्होंने जो हिसाब लगाया है उसके अनुसार आशीष घोष को रमेश अग्रवाल से ज्यादा वोट तो मिल जायेंगे, लेकिन आशीष घोष को मिलने वाले वोटों की संख्या कुल वोटों के दो-तिहाई स्तर को नहीं छू सकेगी । इसीलिये आशीष घोष को अधिकृत उम्मीदवार घोषित होने से रोकने के लिए रमेश अग्रवाल और उनकी टीम को अधिकृत उम्मीदवार के लिए दो-तिहाई वोटों को प्राप्त करने की जरूरत की माँग करने का रास्ता सूझा है ।
रमेश अग्रवाल और उनकी टीम का प्रयास है कि अधिकृत उम्मीदवार के लिए दो-तिहाई वोटों को प्राप्त करना यदि जरूरी बना दिया गया, तो फिर आशीष घोष अधिकृत उम्मीदवार नहीं बन पायेंगे और तब सीओएल के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करने वाले सभी उम्मीदवार खुले चुनाव में चुनाव लड़ने के अधिकारी बन जायेंगे । रमेश अग्रवाल और उनके समर्थकों को डर है कि सीओएल के लिए नोमीनेटिंग कमेटी द्धारा चुने जाने वाले अधिकृत उम्मीदवार को यदि साधारण बढ़त के आधार पर ही चुना गया, तो फिर आशीष घोष ही अधिकृत उम्मीदवार चुन लिये जायेंगे । रमेश अग्रवाल की तरफ से दावा तो किया जा रहा है कि वह यदि अधिकृत उम्मीदवार नहीं चुने गए तो वह चेलैंज करेंगे - लेकिन वह खुद भी जानते/समझते हैं कि चेलैंज करना आसान नहीं होगा । इसलिए ही रमेश अग्रवाल और उनके समर्थक चाहते हैं और प्रयासरत हैं कि नोमीनेटिंग कमेटी से फैसला हो ही नहीं और मामला खुला छूट जाये । इसी के लिए अधिकृत उम्मीदवार के लिए दो-तिहाई वोट जरूरी करने वाला झमेला खड़ा किया जा रहा है । विनय कुमार अग्रवाल को उम्मीद है कि वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनोद बंसल पर दबाव बना कर दो-तिहाई वोट वाले मामले को स्वीकृत करवा लेंगे । क्या होगा, यह कल पता चलेगा ।
रमेश अग्रवाल के एक दूसरे 'सिपाही' जेके गौड़ ने एक बड़ी कामयाबी पाई - उन्होंने एक छिपा हुआ वोट रमेश अग्रवाल के पक्ष में खोज निकाला । डिस्ट्रिक्ट 3060 में 1991-92 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बने एसपी मैनी पिछले कुछेक वर्षों से डिस्ट्रिक्ट 3010 में रोटरी क्लब नोएडा के सदस्य हैं । एसपी मैनी यहाँ पोलियो कार्यक्रम में सक्रिय हैं और इस नाते से जेके गौड़ से उनका परिचय है । उसी परिचय का लाभ उठा कर जेके गौड़ ने एसपी मैनी से काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की कल होने वाली मीटिंग में उपस्थित होने के लिए आवेदन करवाया है । रोटरी इंटरनेशनल के नियमानुसार एसपी मैनी को डिस्ट्रिक्ट 3010 में काउंसिल ऑफ गवर्नर्स का सदस्य होने का पूरा अधिकार है । हैरानी की बात यही है कि वह अभी तक यहाँ काउंसिल ऑफ गवर्नर्स के सदस्य बने क्यों नहीं ? मजे की बात यह है कि रमेश अग्रवाल को अब जिन एसपी मैनी का वोट चाहिए और जिसके लिए उनके 'सिपाही' जेके गौड़ ने एसपी मैनी से कल की मीटिंग में उपस्थित होने का आवेदन करवाया है, उन एसपी मैनी को पिछले वर्ष के अपने गवर्नर-काल में रमेश अग्रवाल ने एक बार भी तवज्जो नहीं दी और न उन्हें काउंसिल ऑफ गवर्नर्स में ही शामिल किया ।
एसपी मैनी के जरिये जेके गौड़ ने दरअसल मंजीत साहनी से भी बदला लेने का काम किया है । जेके गौड़, मंजीत साहनी से इस बात को लेकर बुरी तरह खफा हैं कि पिछले वर्ष उन्होंने सुधीर मंगला का समर्थन किया था । जेके गौड़ को आशंका हुई कि मंजीत साहनी सीओएल के चुनाव में चूँकि आशीष घोष के समर्थन में हैं, इसलिए एसपी मैनी को वह कहीं आशीष घोष के समर्थन में न कर दें । पोलियो कार्यक्रम में सक्रिय होने के कारण एसपी मैनी का मंजीत साहनी के साथ भी अच्छा परिचय है । मंजीत साहनी इस बारे में कुछ सोचें और करें, जेके गौड़ उससे पहले ही एसपी मैनी को ले उड़े । इस तरह जेके गौड़ ने साबित करने की कोशिश की है कि वह मंजीत साहनी से ज्यादा होशियार और एप्रोच वाले हैं । जेके गौड़ कहते भी हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में पिछले वर्ष सुधीर मंगला का समर्थन करके मंजीत साहनी ने उनका क्या बिगाड़ लिया था ? एसपी मैनी को अपने साथ करके जेके गौड़ ने लगातार दूसरे वर्ष मंजीत साहनी को मात दे दी है । 
रमेश अग्रवाल और उनकी टीम के लोग कल की काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में बिजनेस संबंधी बेईमानियों के चक्कर में पुलिस, अदालत और लेनदारों से बचते-छिपते फिर रहे असित मित्तल की उपस्थिति को भी संभव बनाने के प्रयासों में लगे हैं । उन्हें पक्का विश्वास है कि असित मित्तल का वोट रमेश अग्रवाल को ही मिलेगा ।
रमेश अग्रवाल और उनकी टीम के लोगों ने सीओएल का चुनाव जीतने के लिए जिस तरह की व्यापक घेराबंदी की है, उसके चलते कल, 21 जनवरी को सीओएल के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चुनाव करने के लिए होने वाली काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग महत्वपूर्ण हो गई है । काउंसिल ऑफ गवर्नर्स के कई सदस्य समय समय पर रमेश अग्रवाल की, मुकेश अरनेजा की, विनय कुमार अग्रवाल की, असित मित्तल की और जेके गौड़ की लानत मलानत करते रहे हैं - ऐसे में देखने की बात यह होगी कि जब फैसला करने का समय आता है तब काउंसिल ऑफ गवर्नर्स के सदस्य अपने छोटे-मोटे मतभेदों को भुलाकर डिस्ट्रिक्ट और रोटरी को बदनाम करने वाले लोगों के खिलाफ फैसला कर पाते हैं या डिस्ट्रिक्ट को वैसे ही लोगों के हाथों में सौंप देते हैं ?

Sunday, January 19, 2014

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन में शिव कुमार चौधरी की उम्मीदवारी को समर्थन के मुद्दे पर मुकेश गोयल को अपने ही समर्थकों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है

गाजियाबाद । मुकेश गोयल ने अपनी मुश्किलों से उबरने के लिए शिव कुमार चौधरी की उम्मीदवारी का समर्थन करने का जो फैसला किया, वह अपना उल्टा असर दिखा रहा है । दरअसल मुकेश गोयल के कई समर्थक और नजदीकी ही उनके इस फैसले को पचा नहीं पा रहे हैं । शिव कुमार चौधरी की उम्मीदवारी को समर्थन के मुद्दे पर मुकेश गोयल अपने ही लोगों के बीच जैसे घिर गए हैं और अलग-थलग पड़ गए हैं । अपने ही लोगों के बीच अलग-थलग दिखाई पड़ने की बात को छिपाये रखने के लिए ही मुकेश गोयल को शामली में आयोजित हुई तीसरी कैबिनेट मीटिंग में अपने आप को अनुपस्थित रखने के लिए मजबूर होना पड़ा । मुकेश गोयल को सबसे तगड़ा झटका तो सुनील जैन और सुनील निगम की तरफ से लगा है । फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील जैन और सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील निगम अभी तक मुकेश गोयल के साथ ही थे, लेकिन शिव कुमार चौधरी की उम्मीदवारी के मुद्दे पर इन्होँने अलग राग ही छेड़ दिया है । मुकेश गोयल के अन्य प्रमुख सहयोगी और साथी भी शिव कुमार चौधरी की उम्मीदवारी के समर्थन को आत्मघाती कदम मान रहे हैं ।
मुकेश गोयल के समर्थकों और नजदीकियों का ही कहना है कि शिव कुमार चौधरी की उम्मीदवारी का समर्थन करके मुकेश गोयल ने सबसे पहले तो अगले दो वर्षों में सत्ता में होने और सत्ता को चलाने का अवसर खो दिया है । उम्मीद थी और इंतजार किया जा रहा था कि पहले सुनील जैन के और फिर सुनील निगम के गवर्नर-काल में मुकेश गोयल का ही राज-पाट चलेगा और तब मुकेश गोयल से जुड़े लोगों को सत्ता में होने का सुख प्राप्त होगा । शिव कुमार चौधरी की उम्मीदवारी का समर्थन करके मुकेश गोयल ने लेकिन यह मौका खो दिया है । मुकेश गोयल के समर्थकों और नजदीकियों के बीच इसीलिये उनके इस फैसले को लेकर निराशा और विरोध का भाव है । मुकेश गोयल के समर्थकों और नजदीकियों का यह भी कहना है कि डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच शिव कुमार चौधरी की जिस तरह की सक्रियता रही है और उनकी जिस तरह की ' पहचान' है, उसके चलते सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद का चुनाव जीतना उनके लिए मुश्किल ही होगा; लेकिन यदि वह जीत भी गए तो यह तो तय है कि वह मुकेश गोयल के साथ नहीं रहेंगे । इन्हीं तर्कों के साथ मुकेश गोयल के समर्थकों और नजदीकियों का उनसे कहना है कि शिव कुमार चौधरी की उम्मीदवारी का समर्थन करना हर तरह से घाटे का सौदा है - जिसमें मिलना कुछ नहीं है, सिर्फ खोना ही खोना है ।
मुकेश गोयल को उनके ही समर्थक और नजदीकी याद दिला रहे हैं कि शिव कुमार चौधरी अभी कल तक उन्हें बुरा-भला कहते रहे हैं और सार्वजनिक रूप से उन्हें इग्नोर व अपमानित करते रहे हैं; अभी कल तक शिव कुमार चौधरी दूसरे खेमे के नेताओं का समर्थन प्राप्त करने का ही प्रयास कर रहे थे - लेकिन चूँकि दूसरे खेमे के नेताओं के यहाँ उनकी दाल नहीं गली, इसलिए वह अब उनकी शरण में आये हैं । समर्थकों और नजदीकियों का कहना है कि हम एक ऐसे व्यक्ति के लिए जो कल तक हमारा नहीं था और आगे भी जिसके हमारे साथ रहने की कोई उम्मीद नहीं है, उन लोगों को क्यों छोड़ दें तो हमारे साथ रहे हैं और जिनके आगे भी हमारे साथ रहने की उम्मीदें हैं । मुकेश गोयल के पास अपने ही समर्थकों और नजदीकियों के इन सवालों के कोई जबाव नहीं हैं, इसीलिये वह अपने समर्थकों और नजदीकियों को अपने फैसले के प्रति राजी नहीं कर पा रहे हैं । मुकेश गोयल इसीलिये शामली में आयोजित हुई तीसरी कैबिनेट मीटिंग में शामिल होने नहीं पहुँचे, ताकि दूसरों को अपने ही समर्थकों व नजदीकियों के बीच अलग-थलग पड़ते हुए न दिखाई दें । मुकेश गोयल को हालाँकि उम्मीद है कि वह अपने समर्थकों व नजदीकियों को समझा लेंगे और उनके समर्थक उनके फैसले को स्वीकार कर लेंगे । मजे की बात यह है कि मुकेश गोयल के समर्थक भी इस उम्मीद से हैं कि मुकेश गोयल को जल्दी ही समझ में आ जायेगा कि शिव कुमार चौधरी की उम्मीदवारी का समर्थन करके उन्होंने कितनी बड़ी गलती की है ।
मुकेश गोयल अपने राजनीतिक जीवन में सचमुच पहली बार ऐसे फँसे हैं, जहाँ पहले उन्हें अपने ही समर्थकों और नजदीकियों से निपटना है । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की उम्मीदवारी को लेकर मुकेश गोयल और उनके समर्थकों के बीच जिस तरह की दूरियाँ बनी हैं, उसके चलते इस बार की सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की चुनावी लड़ाई खासी दिलचस्प हो गई है ।

Friday, January 17, 2014

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में गुरनाम सिंह और विशाल सिन्हा को लग रहा है कि केएस लूथरा 'दिख' भले ही उनके साथ रहे हैं, लेकिन वह करेंगे क्या यह पता नहीं

लखनऊ । गुरनाम सिंह ने विशाल सिन्हा की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर केएस लूथरा को अपनी तरफ कर तो लिया है, लेकिन केएस लूथरा की भूमिका को लेकर गुरनाम सिंह अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं । यही कारण है कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव के संबंध में बनाई गई महत्वपूर्ण कमेटियों में केएस लूथरा को नहीं रखा गया है । उक्त कमेटियों के लिए पदाधिकारियों का चयन गुरनाम सिंह ने ही किया है । कमेटियों के पदाधिकारियों के नामों का ऐलान अभी नहीं हुआ है, लेकिन गुरनाम सिंह ने इन पंक्तियों को लेखक को बताया है कि नाम तय हो गए हैं और प्रमुख कमेटियों में केएस लूथरा को जिम्मेदारी नहीं दी गई है । मजे की बात यह है कि केएस लूथरा अपनी तरफ से हर संभव कोशिश कर रहे हैं कि वह गुरनाम सिंह के साथ 'दिखें', लेकिन गुरनाम सिंह और विशाल सिन्हा उन पर पूरी तरह विश्वास नहीं कर पा रहे हैं । दरअसल पिछली बार का अनुभव उन्हें केएस लूथरा को लेकर लगातार सशंकित किए हुए हैं और इसीलिये वह दोनों केएस लूथरा पर पूरी तरह आँख मूँद कर भरोसा नहीं कर रहे हैं । दोनों तरफ के 'तौर-तरीके' भी उनके बीच विश्वास बनने/बनाने में बाधा बन रहे हैं । गुरनाम सिंह को 'अपने जासूसों' से यह सूचना तो मिलती है कि केएस लूथरा उनके ही साथ होने की बात कहते/करते हैं लेकिन केएस लूथरा के जो लोग हैं वह अभी भी एके सिंह की उम्मीदवारी का झंडा उठाये हुए हैं - असल में इसीलिये गुरनाम सिंह और विशाल सिन्हा, केएस लूथरा पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं ।
दरअसल पिछले वर्ष के अपने अनुभव के चलते भी गुरनाम सिंह और विशाल सिन्हा के लिए केएस लूथरा पर भरोसा करना मुश्किल बना हुआ है । उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी इन्होंने केएस लूथरा की तगड़ी घेराबंदी की थी और इन्हें विश्वास था कि केएस लूथरा चाहते हुए भी कुछ कर नहीं पायेंगे, लेकिन केएस लूथरा छुपे रुस्तम साबित हुए । गुरनाम सिंह ने जिस चौतरफा तरीके से केएस लूथरा को घेरा था, उसमें केएस लूथरा बिलकुल ऐसे हो जाते थे कि जैसे वह न तो कुछ करेंगे और न कुछ कर सकेंगे, लेकिन अंदर ही अंदर केएस लूथरा ने ऐसा इंतजाम किया कि गुरनाम सिंह और विशाल सिन्हा चारों खाने चित्त भी हुए और हैरान भी हुए कि यह हुआ क्या ? गुरनाम सिंह और विशाल सिन्हा ने समझ लिया कि केएस लूथरा को 'पहचानना' आसान नहीं है, वह जैसे 'दिखते' हैं वैसे हैं नहीं । इसीलिये इस वर्ष भी गुरनाम सिंह और विशाल सिन्हा समझ रहे हैं कि केएस लूथरा 'दिख' भले ही उनके साथ रहे हैं, लेकिन क्या करने की सोच रहे हैं इसे समझना थोड़ा मुश्किल है ।
यह मुश्किल एके सिंह के रवैये के कारण भी दिख रही है । गुरनाम सिंह और विशाल सिन्हा के लिए यह समझना भी मुश्किल हो रहा है कि केएस लूथरा यदि सचमुच उनके साथ आ गए हैं तो फिर एके सिंह किस भरोसे अभी भी उम्मीदवार बने हुए हैं ? पिछले वर्ष जैसे ही हालात अभी हैं - पिछले वर्ष इस समय तक शिव कुमार गुप्ता की उम्मीदवारी को लेकर असमंजस बना हुआ था, क्योंकि कोई भी उनकी उम्मीदवारी के समर्थन में 'दिख' नहीं रहा था, गुरनाम सिंह और विशाल सिन्हा से सभी लोग समर्थन का वायदा और दावा कर रहे थे; उम्मीदवार के रूप में खुद शिव कुमार गुप्ता भी बहुत सक्रिय नहीं थे; ले दे कर एक केएस लूथरा ही दबे-छिपे तरीके से शिव कुमार गुप्ता की उम्मीदवारी की बात करते हुए सुने जा रहे थे, लेकिन गुरनाम सिंह और विशाल सिन्हा ने उनकी ऐसी घेराबंदी की हुई थी कि उनसे भी कुछ होता हुआ दिख नहीं रहा था । इसके बावजूद क्या हुआ, यह सब जानते हैं । पिछली बार की तुलना में गुरनाम सिंह और विशाल सिन्हा को डराने के लिए एक बात जरूर इस बार है - और वह कि चुनाव को अफोर्ड करने को लेकर शिव कुमार गुप्ता के संदर्भ में डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच सवाल था, जबकि एके सिंह के संदर्भ में इस बार यह सवाल नहीं है । इसीलिये सब कुछ अनुकूल होने के बावजूद गुरनाम सिंह और विशाल सिन्हा के लिए निश्चिंत होने के हालात नहीं हैं ।
दरअसल इसी हालात के चलते केएस लूथरा की भूमिका संदेहास्पद और महत्वपूर्ण हो गई है । विशाल सिन्हा की उम्मीदवारी को केएस लूथरा द्धारा समर्थन दिए जाने की घोषणा पर केएस लूथरा के समर्थकों और नजदीकियों ने ही जिस तरह से सवाल उठाया है और केएस लूथरा को गुरनाम सिंह और विशाल सिन्हा के जाल में फँसने से बचने की सलाह दी है उससे गुरनाम सिंह और विशाल सिन्हा को केएस लूथरा की भूमिका संदिग्ध दिखने लगी है । केएस लूथरा के समर्थक और नजदीकी अभी भी एके सिंह की उम्मीदवारी के समर्थन में लगे हुए हैं, और केएस लूथरा इसके लिए उन्हें रोक पाने में अपनी असमर्थता व्यक्त कर चुके हैं । गुरनाम सिंह इस बात पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हैं कि केएस लूथरा लोगों को बताते हैं कि गुरनाम सिंह उन्हें मनाने पच्चीस बार उनके घर आये । गुरनाम सिंह को लगता है कि इस तरह के दावे करके केएस लूथरा अपनी अहमियत जता रहे हैं । केएस लूथरा के नजदीकियों को लगता है कि गुरनाम सिंह और विशाल सिन्हा ने पिछले वर्ष केएस लूथरा के साथ जो किया, उसके चलते केएस लूथरा के लिए मन से उनके साथ जाना आसान नहीं होगा; गुरनाम सिंह ने घेरघार कर केएस लूथरा को अपने साथ कर भले ही लिया हो और केएस लूथरा भी अपने आप को उनके साथ दिखा भले रहे हों - लेकिन केएस लूथरा के लिए उनके साथ जुड़ना आसान नहीं होगा । यह बात गुरनाम सिंह और विशाल सिन्हा भी समझ रहे हैं और इसीलिए वह केएस लूथरा पर पूरी तरह से भरोसा नहीं कर पा रहे हैं ।

Thursday, January 16, 2014

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री में नरेश गुप्ता के खिलाफ नेगेटिव वोटिंग की बढ़ती सुगबुगाहट के बने माहौल में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विजय शिरोहा की भूमिका महत्वपूर्ण हुई

नई दिल्ली । अब तो अजय बुद्धराज ने भी मानना और कहना शुरू कर दिया है कि नरेश गुप्ता के व्यवहार और तौर-तरीकों के कारण हरियाणा के लोगों के बीच नरेश गुप्ता का विरोध बढ़ता जा रहा है और नरेश गुप्ता इससे होने वाले नुकसान को पहचान नहीं पा रहे हैं । उल्लेखनीय है कि अजय बुद्धराज के कहने पर नरेश गुप्ता ने सिरसा के लोगों की नाराजगी दूर करने के लिए सिरसा में तो मीटिंग की थी, लेकिन दूसरे कुछेक अन्य शहरों में उस तरह की मीटिंग करने के अजय बुद्धराज के प्रस्ताव को नरेश गुप्ता ने कोई तवज्जो नहीं दी । अजय बुद्धराज दरअसल इसी बात से भड़के हुए हैं । अजय बुद्धराज के लिए मुसीबत की बात यह हुई कि हरियाणा के कई एक लोगों से उन्होंने कहा हुआ है कि नरेश गुप्ता उनके यहाँ आयेंगे और उन्हें नरेश गुप्ता की मदद करनी है । अजय बुद्धराज ने जिन लोगों से यह कहा है वह लोग बेचारे नरेश गुप्ता का इंतजार ही कर रहे हैं । नरेश गुप्ता ने उनके यहाँ जाना तो दूर, उन्हें फोन करने तक का कष्ट नहीं किया । उन्होंने अजय बुद्धराज से शिकायत की कि वह उन्हें ऐसे व्यक्ति की मदद करने के लिए क्यों कह रहे हैं, जिसे मदद की जरूरत ही नहीं है ।
नरेश गुप्ता की मुश्किल यह है कि सत्ता खेमे के लोगों के बीच पहले से ही उन्हें विरोधी खेमे के नेताओ के नजदीक देखा/पहचाना जा रहा है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विजय शिरोहा के खिलाफ की गई नरेश गुप्ता की बयानबाजी को मुद्दा बना कर हरियाणा के लोगों ने नरेश गुप्ता को सबक सिखाने की तैयारी करना शुरू भी कर दिया है । मजे की बात यह हुई कि नरेश गुप्ता ने यह सफाई भी देने की कोशिश की कि उन्होंने विजय शिरोहा के खिलाफ कोई बयानबाजी नहीं की तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विजय शिरोहा व उनके समर्थकों के बीच उन्हें बदनाम करने के लिए कुछेक लोगों ने इस तरह की झूठी बातें फैलाई हैं । नरेश गुप्ता की इस सफाई पर किसी ने भी भरोसा नहीं किया तो इसका कारण यही रहा कि नरेश गुप्ता के बयान उन नेताओं के जरिये ही सामने आये हैं, जिन्हें नरेश गुप्ता तवज्जो देते हुए पहचाने जाते हैं । इसके अलावा, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विजय शिरोहा की प्रेरणा और उनके प्रोत्साहन से हरियाणा के विभिन्न क्लब्स ने 'सड़क सुरक्षा सप्ताह' प्रोजेक्ट को लेकर जो आयोजन किये, नरेश गुप्ता उनसे प्रायः दूर ही रहे । हरियाणा के कुछेक क्लब्स ने अपने अपने प्रोजेक्ट्स में नरेश गुप्ता को सम्मान के विभिन्न रूपों में आमंत्रित भी किया, किंतु नरेश गुप्ता ने उनके निमंत्रणों को कोई अहमियत ही नहीं दी । नरेश गुप्ता के इस रवैये से समझा यही गया कि 'सड़क सुरक्षा सप्ताह' के तहत हुए आयोजनों की सफलता से चूँकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विजय शिरोहा की तारीफ होगी और विजय शिरोहा का ही मान बढ़ेगा, इसलिए नरेश गुप्ता किसी भी प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं बने ।
नरेश गुप्ता के खैरख्वाह बनने/दिखने वाले नेता ही बताते और दावा करते हैं कि उन्हें तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विजय शिरोहा की हर बात नरेश गुप्ता के जरिये पता चल जाती है । ऐसा कई बार देखा/पाया भी गया है कि विजय शिरोहा द्धारा की गई कोई बात या उनके द्धारा उठाये गए किसी भी कदम की जानकारी तुरंत ही विरोधी खेमे के नेताओं तक पहुँच जाती है । इसके लिए नरेश गुप्ता को ही जिम्मेदार माना/पहचाना गया है । नरेश गुप्ता ने खुद कई बार अलग-अलग लोगों से इस बात का रोना रोया है कि कुछेक नेताओं ने तो उन्हें अपना जासूस समझा हुआ है और वे चाहते हैं कि डिस्ट्रिक्ट आयोजनों की और/या डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के साथ हो रही मीटिंग की पल-पल की खबर वह उन्हें देते रहें । इस तरह का रोना रोते रहने के बावजूद नरेश गुप्ता को प्रायः विरोधी खेमे के नेताओं की कठपुतली बने हुए ही देखा गया है । इसीलिये सत्ता खेमे के लोगों के बीच नरेश गुप्ता के लिए विरोध का भाव बढ़ता ही जा रहा है ।
नरेश गुप्ता और उनके खैरख्वाह नेताओं को इसका आभास भी है और अपने तरीके से वह विरोध की हवा निकालने की कोशिश भी करते रहे हैं । इसी सिलसिले में नरेश गुप्ता ने केएल खट्टर से अभयदान लेने का प्रयास किया । केएल खट्टर ने उन्हें निश्चिंत रहने का आश्वासन भी दे दिया । नरेश गुप्ता ने खुशी खुशी यह बात अजय बुद्धराज को बताई तो अजय बुद्धराज बिफर गए; उन्होंने नरेश गुप्ता को समझाया कि केएल खट्टर की बात पर भरोसा मत करना । अजय बुद्धराज ने अपने अनुभव का वास्ता देकर नरेश गुप्ता को सावधान किया कि केएल खट्टर जो कहते हैं, करते उसका उल्टा हैं । अजय बुद्धराज के अनुसार, केएल खट्टर ने नरेश गुप्ता को यदि निश्चिंत रहने का आश्वासन दिया है तो नरेश गुप्ता को समझ लेना चाहिए कि उन्हें निश्चिंत नहीं रहना है । इसी 'शिक्षा' के साथ अजय बुद्धराज ने नरेश गुप्ता को पहले सिरसा में और फिर बाद में हरियाणा के दूसरे शहरों में मीटिंग करने के जरिये लोगों से मेल-मुलाकात करने का सुझाव दिया - सुझाव क्या दिया, उनका प्रोग्राम ही बनवा दिया था; जिस पर लेकिन नरेश गुप्ता ने कोई अमल नहीं किया ।
सिरसा में मीटिंग करके नरेश गुप्ता को दरअसल तगड़ा वाला झटका लगा । तगड़ा वाला झटका इसलिए क्योंकि उक्त मीटिंग का खर्चा उन्हें देना पड़ा । सिरसा में जेब हल्की करवा कर लौटे नरेश गुप्ता ने अजय बुद्धराज को खूब कोसा और तय किया कि अजय बुद्धराज ने हरियाणा के दूसरे शहरों में मीटिंग करने का जो सुझाव उन्हें दिया हुआ है, वह उस पर अमल नहीं करेंगे । नरेश गुप्ता के इस रवैये से उनके अपने खेमे के लोग भी खफा हो गए हैं । नरेश गुप्ता ने अपने व्यवहार से जिस तरह डिस्ट्रिक्ट में अधिकतर लोगों को अपने खिलाफ कर लिया है, उसके चलते नरेश गुप्ता के खिलाफ नेगेटिव वोटिंग होने को लेकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विजय शिरोहा की भूमिका महत्वपूर्ण हो उठी है । विजय शिरोहा ने जिस तरह एक झटके में विक्रम शर्मा और आरके शाह की स्थितियों को बदल दिया है, उसे देखते/पहचानते हुए नरेश गुप्ता के मामले में भी विजय शिरोहा का फैसला ही निर्णायक होगा ।

Wednesday, January 15, 2014

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में ललित मोहन गुप्ता द्धारा घेरे जाने की कोशिशों के बीच योगेश मोहन गुप्ता को भरोसा है कि जोड़-तोड़ और तिकड़मों से वह सीओएल में दोबारा से जाने का रास्ता बना लेंगे

मुरादाबाद/मेरठ । ललित मोहन गुप्ता ने सीओएल (काउंसिल ऑन लेजिसलेशन) के लिए प्रस्तुत अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने हेतु जो संपर्क अभियान छेड़ा है, उसने मुरादाबाद के उन पूर्व गवर्नर्स के सामने अजीब-सा धर्मसंकट खड़ा कर दिया है, जो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी के समर्थन में हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी को चूँकि मेरठ के क्लब्स का लगभग एकतरफा समर्थन मिल रहा है, जिसके बदले में मेरठ के क्लब्स दिवाकर अग्रवाल के समर्थकों से सीओएल के चुनाव में योगेश मोहन गुप्ता की उम्मीदवारी के लिए समर्थन मांग
रहे हैं । दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी के मुरादाबाद के समर्थकों के सामने समस्या यह आ खड़ी हुई है कि सीओएल के चुनाव में ललित मोहन गुप्ता मुरादाबाद को संगठित रूप से खड़े करने/दिखाने का आह्वान कर रहे हैं । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट के किसी भी आयोजन में - वह आयोजन चाहें चुनाव ही क्यों न हो - मुरादाबाद अमूमन एकसाथ खड़ा दिखता भी रहा है । कभी-कभार मुरादाबाद यदि विभाजित हुआ भी है - जैसे कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को लेकर इस बार वह है - तो सिर्फ उन्हीं मौकों पर जब मुरादाबाद के ही दो लोग आमने-सामने आ खड़े हुए हों । किसी बाहर वाले के लिए मुरादाबाद के लोगों ने अपने बीच के विश्वास और साथ-सहयोग को कभी ख़त्म नहीं किया है ।
यह ठीक है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को लेकर मुरादाबाद मौजूदा रोटरी वर्ष में पहले से ही विभाजित है, लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में जहाँ तक दो उम्मीदवारों के बीच के मुकाबले का संदर्भ है तो उसके कारण विभाजन बहुत ज्यादा नहीं है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के एक उम्मीदवार - दीपक बाबू ने चूँकि लोगों के बीच कोई काम ही नहीं किया, इसलिए मुरादाबाद में उनके लिए सिर्फ उन्हीं लोगों का समर्थन है जो प्रोफेशन या रिश्तेदारी के चलते उनसे जुड़े हुए हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के दूसरे उम्मीदवार - दिवाकर अग्रवाल से किसी कारण से विरोध का भाव रहने वाले कुछेक लोगों का भी समर्थन दीपक बाबू को मिल सकता है । दीपक बाबू एक उम्मीदवार के रूप में मुरादाबाद के लोगों का समर्थन जुटाने में चूँकि असफल होते हुए दिख रहे हैं, इसलिए मुरादाबाद से दो उम्मीदवार होने के बावजूद मुरादाबाद के रोटेरियंस के बीच कोई विशेष तनाव या घमासान मचता हुआ नहीं नजर आ रहा है । दरअसल इसीलिए ललित मोहन गुप्ता को उम्मीद है कि मुरादाबाद सीओएल के लिए प्रस्तुत उनकी उम्मीदवारी का पूरी एकजुटता के साथ उनका समर्थन करेगा तथा बाकी शहरों और कस्बों में भी समर्थन जुटाने के लिए काम करेगा । सीओएल के लिए अधिकृत उम्मीदवार चुनने का काम पहले पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की नोमीनेटिंग कमेटी को 18 जनवरी को करना है, इसलिए ललित मोहन गुप्ता ने उनके बीच समर्थन जुटाने का अभियान शुरू किया है ।
सीओएल के चुनाव को लेकर ललित मोहन गुप्ता के पास तुरुप का जो इक्का है, वह यह तर्क है कि सीओएल में पहले जो लोग जा चुके हैं उनके अलावा जो लोग सीओएल में जाना चाहते हैं उन्हें मौका मिलना चाहिए । इस तर्क के जरिये ललित मोहन गुप्ता ने दरअसल योगेश मोहन गुप्ता की उम्मीदवारी को निशाने पर लिया है । उल्लेखनीय है कि योगेश मोहन गुप्ता पिछली बार ही सीओएल में गए थे और अब वह दोबारा सीओएल में जाने के लिए ताल ठोंक रहे हैं । यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि सीओएल में डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व कर चुके बृज भूषण भी इस बार फिर अपनी उम्मीदवारी पेश कर चुके थे, लेकिन ललित मोहन गुप्ता के साथ-साथ जब दूसरे कई लोगों ने यह सवाल उठाया कि जो लोग सीओएल में जा चुके हैं, वही बार-बार क्यों सीओएल में जाने वालों की लाइन में खड़े हो जाते हैं - तो बृज भूषण ने अपनी उम्मीदवारी को तुरंत से वापस ले लिया । बृज भूषण को शायद इस बात पर शर्म आई होगी कि लोग उन्हें सत्तालोलुप समझें । योगेश मोहन गुप्ता लेकिन इस तरह की बातों पर शर्म-वर्म के पचड़े में नहीं पड़ते, इसलिए वह तो दोबारा से सीओएल में जाने की लाइन में लग गए हैं ।
योगेश मोहन गुप्ता ने ऐलान कर दिया है कि वह यदि नोमीनेटिंग कमेटी द्धारा अधिकृत उम्मीदवार नहीं चुने गए, तो फिर वह अधिकृत उम्मीदवार को चेलैंज करेंगे । योगेश मोहन गुप्ता का मानना और कहना है कि चुनाव जीतने का 'हुनर' उन्हें आता है, इसलिए वह किसी भी चुनाव का सामना करने के लिए तैयार हैं । योगेश मोहन गुप्ता के नजदीकियों का हालाँकि दावा है कि नोमीनेटिंग कमेटी का फैसला योगेश मोहन गुप्ता के पक्ष में ही आयेगा और वही अधिकृत उम्मीदवार चुने जायेंगे । मजे की बात यह है कि योगेश मोहन गुप्ता लगातार दूसरी बार सीओएल में जाने के लिए 'तैयार' तो हो रहे हैं, लेकिन इसके लिए समर्थन जुटाने वास्ते लोगों के बीच जाने से बच रहे हैं । दरअसल उन्हें डर इस बात का है कि लोग जब उनसे पूछेंगे कि सीओएल में वह बार-बार क्यों जाना चाहते हैं, तो वह क्या जबाव देंगे ? योगेश मोहन गुप्ता को भरोसा है कि लोगों के बीच जाये बिना, लोगों के सवाल का जबाव दिए बिना, जोड़-तोड़ और तिकड़मों से वह सीओएल में दोबारा से जाने का रास्ता बना ही लेंगे । योगेश मोहन गुप्ता ने अपने भरोसे के बीच अपनी जिस कमजोरी को उद्घाटित किया है, ललित मोहन गुप्ता ने उनकी उसी 'कमजोरी' में अपने लिए संभावना देखी/पहचानी है और इसीलिए उन्होंने मुद्दा बनाया है कि सीओएल में डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व किसी नए को करना चाहिए ।