Friday, November 1, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में शेखर मेहता के सम्मान समारोह के निमंत्रण पत्र से डिस्ट्रिक्ट के तीनों सबसे वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स एसपी मैनी, एमएल अग्रवाल व केके गुप्ता तथा निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुभाष जैन को बाहर रख कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता ने एक नए विवाद को जन्म दिया

नई दिल्ली । शेखर मेहता का इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में होने वाला सम्मान समारोह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता के लिए किस तरह निजी खुन्नस निकालने और नियम विरुद्ध मनमानी करने/दिखाने का मौका बन गया है, उसे समारोह के निमंत्रण पत्र को देख कर समझा जा सकता है । निमंत्रण पत्र में ललित खन्ना का नाम तो है, जबकि वह अभी काउंसिल ऑफ गवर्नर्स का हिस्सा नहीं हैं और उनका डीजीएनडी का पद रोटरी इंटरनेशनल के रिकॉर्ड पर नहीं है; उनके चुनाव को लेकर शिकायत दर्ज किए जाने की अवधि अभी बाकी है और शिकायत दर्ज होने पर उनका चुना जाना खतरे में पड़ सकता है  - लेकिन ललित खन्ना के ही क्लब के दो सदस्य वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स एमएल अग्रवाल तथा केके गुप्ता का नाम निमंत्रण पत्र में नहीं है । डिस्ट्रिक्ट के सबसे वरिष्ठ पूर्व गवर्नर एसपी मैनी तथा निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुभाष जैन का नाम भी निमंत्रण पत्र में नहीं है । हालाँकि यह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का विशेषाधिकार है कि वह किस कार्यक्रम की जिम्मेदारी किसे या किन्हें किन्हें दे; और जिम्मेदारी 'इसे' देने और 'उसे' न देने को आलोचना का आधार बनाना उचित नहीं कहा जा सकता है । लेकिन देखने की बात यह होती है कि जिम्मेदारी देने वाले पदाधिकारियों का चुनाव डिस्ट्रिक्ट गवर्नर आखिर किस आधार पर करता है और जिनका चुनाव करता है उन्हें व्यावहारिक रूप में कोई तवज्जो देता है या नहीं ?
शेखर मेहता के सम्मान-समारोह के निमंत्रण पत्र में जिन लोगों के नाम हैं, उनमें से कई के पास न तो कोई जिम्मेदारी है और न उन्हें पता है कि समारोह में कैसे क्या होना है ? कुछेक लोगों ने इन पंक्तियों के लेखक से बताया है कि दीपक गुप्ता ने इस समारोह की तैयारी को लेकर उनसे कभी कोई बात नहीं की और उन्हें समारोह की तारीख, समय व जगह के बारे में अभी ही तब पता चला है, जब सभी को पता चला है । समारोह के निमंत्रण पत्र में कई नाम तो सिर्फ 'डेकोरेशन' के लिए रखे गए हैं । यद्यपि इसमें भी कोई बुराई की बात नहीं है; लेकिन बुराई की बात इस कारण से है कि डेकोरेशन की यह भला कौन सी परिभाषा है, जिसमें डिस्ट्रिक्ट के सबसे वरिष्ठ लोगों को बाहर बैठा दिया गया है ?
शेखर मेहता के सम्मान समारोह के निमंत्रण पत्र में निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुभाष जैन का नाम न होना तो लोगों को समझ में आता है । उल्लेखनीय है कि दीपक गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव सुभाष जैन से हारे थे, और उस हार का उन्हें तगड़ा सदमा लगा था, जिसे उनके व्यवहार में कई मौकों पर देखा गया था । कोढ़ में खाज वाली बात यह और हुई कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता के तौर-तरीकों की तथा उनके आयोजनों की तुलना सुभाष जैन के तौर-तरीकों व आयोजनों से होने लगी और हर तुलना में लोगों ने दीपक गुप्ता को नीचे तथा सुभाष जैन को ऊपर ही रखा तथा पाया । इसके चलते दीपक गुप्ता और जलते/भुनते रहे । दीपक गुप्ता चुनाव में सुभाष जैन को नहीं हरा सके; तौर-तरीकों व आयोजनों के मामले में वह सुभाष जैन से आगे या बेहतर साबित नहीं हुए - इसलिए संभव है कि उन्होंने सोचा होगा कि शेखर मेहता के सम्मान समारोह के निमंत्रण पत्र में सुभाष जैन का नाम न देकर वह अभी तक की सभी पराजयों का बदला सुभाष जैन से ले लेंगे और अपनी निजी खुन्नस पूरी कर लेंगे । लेकिन बेचारे एसपी मैनी, एमएल अग्रवाल और केके गुप्ता जैसे डिस्ट्रिक्ट के तीनों सबसे वरिष्ठ गवर्नर्स से दीपक गुप्ता की भला ऐसी क्या खुन्नस रही कि उन्होंने इन तीनों को न तो कोई जिम्मेदारी देने लायक समझा और न इन्हें 'डेकोरेशन' के लिए ही उपयुक्त पाया ?

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में शेखर मेहता के सम्मान में होने वाले समारोह की बागडोर रंजन ढींगरा को मिलने से भड़के विनोद बंसल ने समारोह की तैयारी के लिए होने वाली बैठक का बहिष्कार किया; जिसके बाद उनके समारोह को फेल करने की कोशिशों में जुटने की बात फैली

नई दिल्ली । विनोद बंसल की नाराजगी और विरोधी तेवरों के चलते 8 नवंबर को होने वाला इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता का सम्मान समारोह मुसीबत में पड़ता/फँसता नजर आ रहा है । विनोद बंसल हालाँकि समारोह की तैयारी कमेटी के चेयरमैन हैं, लेकिन उनकी शिकायत है कि समारोह की तैयारी से उन्हें अलग-थलग कर दिया गया है और तैयारी का सारा काम कन्वेनर रंजन ढींगरा तथा एडवाईजर सुरेश जैन ने हथिया लिया है और सारा प्रोग्राम यही दोनों तय कर रहे हैं । प्रोग्राम तय करने को लेकर तैयारी कमेटी व रिसेप्शन कमेटी के सदस्यों की हाल ही में हुई बैठक में विनोद बंसल इतने तमतमाए कि जोर से 'आय एम् नॉट इंटरेस्टिंग' कहते हुए बैठक को बीच में ही छोड़ कर चले गए । मजे की बात यह रही कि बैठक में शामिल सदस्यों को यही समझ में नहीं आया कि विनोद बंसल आखिर भड़के किस बात पर हैं । किसी ने उनकी नाराजगी का कारण पूछने की कोशिश भी की, लेकिन उन्होंने किसी को बोलने का मौका ही नहीं दिया और जोर जोर से बोलते हुए बैठक छोड़ कर चले गए । बैठक में मौजूद सदस्यों को यह तो समझ में आया कि विनोद बंसल समारोह की तैयारी से अलग-थलग किए जाने की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हुआ कि तैयारी से जुड़ा ऐसा कौन सा काम कर लिया गया, जिसमें विनोद बंसल अपनी भागीदारी चाहते थे - और जिसके न मिलने पर वह इतना भड़क गए कि तैयारी पर बात करने के लिए हो रही बैठक को बीच में ही छोड़ कर - एक तरह से उसका बायकाट करके - निकल गए । डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच यह चर्चा भी सुनी गई है कि विनोद बंसल अब उक्त समारोह को विफल करने की तैयारी में जुट गए हैं; और इसके लिए एक तरफ तो उन्होंने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन को यह कहते हुए भड़काना शुरू किया है कि वह समारोह में दिलचस्पी क्यों ले रहे हैं, उन्हें इससे क्या मिलेगा - और दूसरी तरफ निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया को उन्होंने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी है कि फरीदाबाद से समारोह के लिए ज्यादा रजिस्ट्रेशन न हों । विनोद बंसल को लगता है कि शेखर मेहता के सम्मान समारोह में लोगों की ज्यादा भागीदारी नहीं होगी, तो समारोह विफल माना जायेगा और इससे साबित होगा कि समारोह को सफल करने/बनाने का हुनर तो सिर्फ उनके पास है ।
लोगों के बीच की चर्चाओं के अनुसार, विनोद बंसल एक तरफ तो शेखर मेहता के सम्मान समारोह को विफल करने के प्रयासों में लगे हैं, और दूसरी तरफ समारोह की तैयारी कमेटी के चेयरमैन पद को बचाने का प्रयास भी कर रहे हैं । दरअसल विनोद बंसल जिस तरह से नाराजगी दिखाते हुए तैयारी कमेटी व रिसेप्शन कमेटी की बैठक का बायकाट करके गए, उसे देखते हुए बैठक में विचार आया कि विनोद बंसल जब खुद कह गए हैं कि वह समारोह में 'इंट्रेस्टेड' नहीं हैं, तब फिर उन्हें चेयरमैन बनाये रखने का क्या फायदा - उनकी जगह किसी और को चेयरमैन बनाया जाए । अधिकतर कमेटी सदस्यों ने लेकिन जल्दबाजी में इस तरह का फैसला न करने का सुझाव दिया । विनोद बंसल को जब यह बात पता चली तो उन्होंने कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों से संपर्क साधा । उनकी क्या बातें हुईं, यह तो किसी को नहीं पता चला, लेकिन समझा जाता है कि उन्होंने चेयरमैन पद को बचाने का ही प्रयास किया है । विनोद बंसल के नजदीकियों का कहना है कि विनोद बंसल ने गुस्से में बैठक का बहिष्कार तो कर दिया और तैश में यह बोल आये कि 'आय एम् नॉट इंटरेस्टिंग' - लेकिन चेयरमैन का पद वह नहीं खोना चाहते हैं । समझा जाता है कि विनोद बंसल समारोह की बागडोर पूरी तरह अपने हाथ में रखना चाहते थे, लेकिन जो संभव नहीं हो सका, और इसीलिए वह नाराज हो गए हैं । उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष सुशील गुप्ता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में हुए सम्मान समारोह की बागडोर विनोद बंसल के हाथ में थी, और - आरोपों के अनुसार - उन्होंने खूब मनमानी की थी तथा अन्य किसी को कोई तवज्जो नहीं दी थी । पिछले वर्ष के उसी अनुभव को याद रखते हुए डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स इस बार तैयार थे और उन्होंने विनोद बंसल के लिए ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ा कि वह अपनी मनमानी कर सकें । विनोद बंसल दरअसल इसी बात से बुरी तरह बौखलाए हुए हैं । 
विनोद बंसल को सबसे तगड़ा झटका यह लगा कि वह विनय भाटिया को कमेटी में कोई जगह नहीं दिलवा सके । वह विनय भाटिया को को-चेयरमैन या को-कन्वेनर बनवाना चाहते थे । को-कन्वेनर पद पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अनूप मित्तल की नियुक्ति का उन्होंने खूब विरोध किया । इसके लिए उन्होंने यहाँ तक तर्क दिया कि गवर्नर नॉमिनी के रूप में अनूप मित्तल तो प्रोटोकॉल में ही नहीं आते हैं, इसलिए उन्हें किसी भी कमेटी में कैसे रखा जा सकता है । उनके इस तर्क को लेकिन सुना नहीं गया । शेखर मेहता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में होने वाले सम्मान समारोह की बागडोर अपने हाथ में रख कर विनोद बंसल दरअसल यह दिखाना/जताना चाहते थे कि अपने डिस्ट्रिक्ट में उनकी अच्छी धाक है । समारोह की बागडोर लेकिन रंजन ढींगरा को मिल जाने से विनोद बंसल को दोहरा झटका लगा - रोटरी में लोगों के बीच एक संदेश तो यह गया कि अपने ही डिस्ट्रिक्ट में विनोद बंसल को तवज्जो नहीं मिल रही है, और दूसरा संदेश यह गया कि डिस्ट्रिक्ट में उनकी बजाये रंजन ढींगरा को तवज्जो है । रंजन ढींगरा भी चूँकि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की दौड़ में हैं, इसलिए रंजन ढींगरा को तवज्जो मिलना - विनोद बंसल के लिए खासी फजीहत वाली स्थिति है । कोढ़ में खाज वाली बात यह हुई कि समारोह में एमओसी (मास्टर ऑफ सेरेमनी) की जिम्मेदारी भी रंजन ढींगरा को मिल गई है । विनोद बंसल इससे और उखड़ गए । एमओसी पद पर उनकी निगाह थी । समारोह की तैयारी से जुड़े डिस्ट्रिक्ट के लीडर्स लेकिन इस बार पूरी तैयारी से थे और विनोद बंसल को कोई बढ़त नहीं देना चाहते थे । उनकी तरफ से सुना गया है कि विनोद बंसल अति-महत्त्वाकांक्षी हैं और सब कुछ पाना चाहते हैं; वह चेयरमैन पद से संतुष्ट नहीं है - वह वास्तव में मैक्सीमम को मिनिमम ही समझते हैं । विनोद बंसल की 'दशा' पर एक वरिष्ठ पूर्व गवर्नर ने एक किस्सा सुनाया : 
'एक महिला अपने छोटे बच्चे को गोद में लेकर समुद्र के किनारे थी, कि एक तेज लहर आई 
और उसके बच्चे को गोद से छीन कर बहा ले गई । महिला ने रोना-चिल्लाना शुरू किया और 
ईश्वर से गुहार लगाना शुरू किया कि तभी एक और तेज लहर आई 
और उसका बच्चा वापस उसकी गोद में आ गया । महिला खुश हुई और ईश्वर को 
शुक्रिया कहने ही वाली थी कि उसने देखा कि बच्चे के सर पर जो टोपी थी, 
वह नहीं है । तब शुक्रिया कहने की बजाये उसने यह कहते हुए
ईश्वर के प्रति नाराजगी दिखाई कि अच्छा, टोपी तूने मार ली ।' 
किस्सा सुना कर वरिष्ठ पूर्व गवर्नर का कहना है कि किस्से वाली महिला की तरह विनोद बंसल को इस बात की संतुष्टि नहीं है कि वह चेयरमैन बने हैं, वह दूसरी 'चीजें' न मिलने से दुखी और नाराज हैं तथा कमेटी के लोगों को कोस रहे हैं । शेखर मेहता के सम्मान समारोह को फेल करने की विनोद बंसल की तैयारी की बातों ने सम्मान समारोह को लेकिन मुसीबत में फँसा दिया है । 

Thursday, October 31, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद पर नवीन गुलाटी की एकतरफा जीत को टीके रूबी के गवर्नर-वर्ष में चुनाव की चाबी प्रेसीडेंट्स को सौंप कर राजा साबू खेमे के नेताओं को अलग-थलग करके मजबूर बना देने वाले फैसले के नतीजे के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है 

पानीपत । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में नवीन गुलाटी की एकतरफा तथा बंपर चुनावी जीत ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में बदल रहे समीकरणों को पूरी तरह से ठोस रूप दे दिया है, और राजा साबू खेमे के नेताओं को पूरी तरह न सिर्फ किनारे लगा दिया है, बल्कि उन्हें असहाय और अलग-थलग कर दिया है । डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में पहली बार ऐसा हुआ है कि राजा साबू और उनके खेमे के नेताओं ने अपने आप को इतना असहाय और अलग-थलग पाया कि उनके लिए यह समझ पाना और तय कर पाना मुश्किल ही नहीं, बल्कि असंभव हुआ कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में उनकी भूमिका क्या हो ? पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू ने वर्षों अपने इशारे पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (नॉमिनी) बनाये हैं; डिस्ट्रिक्ट में उनके आशीर्वाद के बिना कोई डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (नॉमिनी) बनने के बारे में सोच भी नहीं सकता था । दरअसल इसी रुतबे से पैदा हुए घमंड के चक्कर में उनकी ऐसी दशा हो गई है कि अब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में उनकी आवाज का रत्ती भर का महत्त्व भी नहीं बचा रह गया है । अभी तीन-चार वर्ष पहले तक जो लोग राजा साबू तथा उनके खेमे के नेताओं के भरोसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने की लाइन में लगे हुए दिख रहे थे, वह न जाने कहाँ छिप गए हैं - और वह लोग गवर्नर बन रहे हैं, जिन्हें राजा साबू खेमे के इशारे पर डिस्ट्रिक्ट टीम से ही निकाल बाहर किया गया था । नवीन गुलाटी उन बारह रोटेरियंस में चौथे हैं, जिन्हें चार वर्ष पहले टीके रूबी के समर्थन में होने वाली मीटिंग में शामिल होने के 'अपराध' में डेविड हिल्टन के गवर्नर वर्ष में डिस्ट्रिक्ट टीम से निकाल दिया गया था ।
उसके बाद से ही सत्ता का पहिया इतनी तेजी से घूमा है कि जिन टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर न बनने देने के लिए राजा साबू और उनके खेमे के नेताओं ने हर तरह की हरकत की, उन्हीं टीके रूबी का समर्थन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (नॉमिनी) पद के उम्मीदवारों के लिए जरूरी हो गया है; और टीके रूबी के साथ खड़े होने/दिखने वाले जिन लोगों को चुन चुन कर डिस्ट्रिक्ट टीम से बाहर किया गया था, वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (नॉमिनी) बनते जा रहे हैं - और राजा साबू तथा उनके खेमे के नेता असहाय व अलग-थलग पड़ गए हैं । टीके रूबी को गवर्नर न बनने देने की राजा साबू और उनके खेमे के नेताओं की जिद अंततः उन्हें इतना भारी पड़ेगी, इसकी उन्होंने या अन्य किसी ने कल्पना भी नहीं की थी । पिछले रोटरी वर्ष तक राजा साबू खेमे के नेता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में भूमिका निभा रहे थे, और डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में घटते अपने प्रभाव को बचाने तथा उस पर पुनः काबिज होने की तिकड़मों में लगे थे - लेकिन इस वर्ष उन्होंने कोई हिम्मत नहीं की और पूरी तरह समर्पण करते हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव से उन्होंने अपने आप को दूर ही रखा । शुरू में राजा साबू ने महिला गवर्नर की बात उठा कर अपनी चलाने की कोशिश जरूर की थी, लेकिन जब उन्होंने देखा कि कोई उनकी बात सुन ही नहीं रहा है तो फिर वह चुप लगा गए । अपने ही डिस्ट्रिक्ट में राजा साबू की ऐसी राजनीतिक दुर्गति होगी, यह उन्होंने तो क्या - उनके विरोधियों ने भी नहीं सोचा था ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति से राजा साबू और उनके खेमे के नेताओं को बाहर करने में टीके रूबी के गवर्नर-वर्ष में हुए/लिए गए उस फैसले का निर्णायक असर रहा है, जिसके तहत नोमीनेटिंग कमेटी की व्यवस्था को खत्म करके सीधे चुनाव के तरीके को अपनाया गया । दरअसल इस फैसले के जरिये टीके रूबी ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति की चाबी क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को पकड़ा दी है और इस तरह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में रोटेरियंस की भूमिका को न सिर्फ महत्त्वपूर्ण बना दिया, बल्कि निर्णायक रूप दे दिया है । इससे पहले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति की चाबी राजा साबू और उनके पाँच/सात नजदीकी गवर्नर्स के पास ही रहती थी, और इनमें भी राजा साबू का फैसला ही अंतिम फैसला होता था । दरअसल नोमीनेटिंग कमेटी वाली व्यवस्था में राजा साबू खेमे की 'राजनीतिक जान' बसती थी; और इसी कारण से टीके रूबी के गवर्नर-वर्ष की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत हुए रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के प्रस्ताव को राजा साबू खेमे ने भारी विरोध किया था और उसे प्रस्तुत होने से रोकने की हर संभव कोशिश की थी । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी को इसका अंदाजा था और इसीलिए उन्होंने पूरी 'फील्डिंग' लगाई हुई थी और राजा साबू के विरोध को सफल नहीं होने दिया । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की चाबी क्लब्स के प्रेसीडेंट्स तथा आम रोटेरियंस के हाथ में आ जाने से राजा साबू और उनके खेमे के नेताओं की राजनीतिक कमर टूट गई है और वह मजबूर बन कर रह गए हैं । 

Wednesday, October 30, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में होने वाले इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता के स्वागत/सम्मान के नाम पर रमेश अग्रवाल को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की 'राजनीति' करने का मौका देने तथा खर्च का बोझ क्लब्स पर डालने के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता मुसीबत में फँसे   

नई दिल्ली । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता के स्वागत/सम्मान में होने वाला कार्यक्रम क्लब्स से 50/50 हजार रुपए माँगने के कारण विवाद में फँस गया है । लोगों के बीच चर्चा सुनी जा रही है कि उक्त कार्यक्रम को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश अग्रवाल की राजनीति का जरिया बना कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता क्लब्स पर नाहक ही बोझ डाल रहे हैं और इस तरह रमेश अग्रवाल को क्लब्स के पैसों पर इंटरनेशनल डायरेक्टर पद का चुनाव लड़वाने की तैयारी कर रहे हैं । कुछेक लोगों का तो यहाँ तक कहना है कि रमेश अग्रवाल ने अपने राजनीतिक स्वार्थ में दीपक गुप्ता को फँसा दिया है, और दीपक गुप्ता ने क्लब्स को फँसा दिया है । उल्लेखनीय है कि पिछले रोटरी वर्ष में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाने पर सुशील गुप्ता का दिल्ली में जो स्वागत/सम्मान समारोह हुआ था, उसे डिस्ट्रिक्ट 3012 और डिस्ट्रिक्ट 3011 ने मिल कर किया था । उसी तर्ज पर दीपक गुप्ता के सामने इस वर्ष शेखर मेहता के स्वागत/सम्मान समारोह को आयोजित करने का ऑफर था । दीपक गुप्ता के नजदीकियों के अनुसार, दीपक गुप्ता इसके लिए राजी भी थे; लेकिन रमेश अग्रवाल ने दीपक गुप्ता को समझा लिया कि उक्त समारोह अकेले करना ही उचित होगा । समझा जाता है कि रमेश अग्रवाल चूँकि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवार होने की तैयारी कर रहे हैं, इसलिए उन्हें लगा कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता के स्वागत/सम्मान समारोह के जरिये वह अपनी डायरेक्टर पद की उम्मीदवारी के लिए 'माहौल' बना सकेंगे ।   
रमेश अग्रवाल की उम्मीदवारी के लिए माहौल बनाने के उद्देश्य से किए जा रहे शेखर मेहता के स्वागत/सम्मान समारोह के लिए दीपक गुप्ता ने क्लब्स से 50 हजार रुपए देने की माँग की है, जिसके बदले में क्लब को पाँच युगल्स के लिए समारोह में शामिल होने का अवसर देने की बात की गई है । उल्लेखनीय है कि रोटरी में इस तरह के आयोजनों के लिए पैसे जुटाने का काम व्यक्तिगत रजिस्ट्रेशन के जरिये किया जाता है; और या कुछेक सक्रिय रोटेरियंस से स्पॉन्सरशिप ली जाती है । पिछले रोटरी वर्ष में हुए समारोह में कुछेक लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था, तथा कई लोगों को तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुभाष जैन द्वारा ली गई स्पॉन्सरशिप के बदले में प्रवेश मिला था । लोगों का कहना है कि सुभाष जैन की ही तरह दीपक गुप्ता को और रमेश अग्रवाल को समारोह का खर्च जुटाने के लिए स्पॉन्सरशिप लेना चाहिए; दीपक गुप्ता ने लेकिन क्लब्स पर बोझ डाल कर नाहक ही विवाद पैदा कर दिया है । इस 'व्यवस्था' के चलते समारोह में हिस्सा लेने के लिए क्लब के पाँच युगल्स का चयन करने को लेकर क्लब्स में झगड़े होने की आशंका व्यक्त की जा रही है । लोगों का कहना है कि शेखर मेहता के स्वागत/सम्मान समारोह के खर्च के लिए दीपक गुप्ता को पिछले वर्ष जैसी ही व्यवस्था अपनाना चाहिए थी - जिससे न कोई झंझट पैदा होता, न किसी झगड़े की आशंका होती और न क्लब पर कोई बोझ पड़ता ।
शेखर मेहता के स्वागत/सम्मान समारोह का मुखिया रमेश अग्रवाल को बनाने के दीपक गुप्ता के फैसले पर पूर्व गवर्नर मुकेश अरनेजा भी नाराज बताये/सुने जा रहे हैं । मुकेश अरनेजा चूँकि डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर हैं, इसलिए वह उम्मीद कर रहे थे कि दीपक गुप्ता उक्त समारोह के आयोजन की जिम्मेदारी उन्हें देंगे । मुकेश अरनेजा को यह उम्मीद इसलिए भी थी क्योंकि पिछले रोटरी वर्ष में सुशील गुप्ता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में हुए स्वागत/सम्मान समारोह की जिम्मेदारी सुभाष जैन ने तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर शरत जैन को दी थी । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता ने लेकिन उक्त समारोह की जिम्मेदारी के लिए डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर मुकेश अरनेजा पर भरोसा करने की बजाये रमेश अग्रवाल को चुना और मुकेश अरनेजा को निराश किया और झटका दिया । रमेश अग्रवाल को समारोह की जिम्मेदारी मिलने से शेखर मेहता के स्वागत/सम्मान में होने वाला समारोह रमेश अग्रवाल का राजनीतिक तमाशा बन गया है, जिसके खर्च का बोझ क्लब्स पर डालने के कारण वह विवादपूर्ण भी बन गया है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता के पिछले कार्यक्रम, खासतौर से डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारियों का अधिष्ठापन कार्यक्रम और फिर दीवाली मेला - लोगों से सहयोग न मिलने के कारण बुरी तरह से 'पिटे' और फ्लॉप रहे हैं; शेखर मेहता के स्वागत/सम्मान के कार्यक्रम को लेकर दीपक गुप्ता की तैयारी जिस विवाद में फँस/पड़ गई है, उसके कारण डर पैदा हुआ है कि कहीं इस समारोह का हश्र भी उनके पिछले कार्यक्रमों जैसा तो नहीं होगा ? 

Monday, October 28, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के पूर्व प्रेसीडेंट भूषण चौहान के नाकारापन व बेईमानीपूर्ण नीयत के कारण रद्द हुए प्रोजेक्ट के पुनर्जीवित होने तथा पूरा होने का श्रेय लेने की भूषण चौहान की कोशिश में लोगों को बेशर्मी व निर्लज्जता की पराकाष्ठा दिख रही है

गाजियाबाद । रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के पूर्व प्रेसीडेंट भूषण चौहान सुनने और बोलने में लाचार बच्चों के ईलाज से जुड़े प्रोजेक्ट के पूरा होने का जिस तरह से श्रेय ले रहे हैं, उसे कई लोगों ने बेशर्मी और निर्लज्जता की पराकाष्ठा के रूप में देखा/पहचाना है । लोगों का कहना है कि भूषण चौहान के नाकारापन और बेईमानीपूर्ण नीयत के चलते उक्त प्रोजेक्ट न सिर्फ लेटलतीफी का शिकार हुआ, बल्कि रद्द भी हो गया था - किसी तरह उसे पुनर्जीवित किया/करवाया गया और पूरा किया गया; भूषण चौहान लेकिन उसके पूरा होने का श्रेय ऐसे ले रहे हैं - जैसे कि उसे पूरा करने में उनका बड़ा भारी योगदान है । हकीकत यह है कि जब तक उक्त प्रोजेक्ट की कमान भूषण चौहान के हाथ में थी, प्रोजेक्ट में रत्ती भर का काम नहीं हुआ, जिसके चलते रोटरी फाउंडेशन ने उक्त प्रोजेक्ट को रद्द ही कर दिया था । दरअसल करीब 23 लाख रुपए के उक्त प्रोजेक्ट के लिए ग्लोबल ग्रांट ली गई थी; लेकिन प्रोजेक्ट के मुखिया के रूप में भूषण चौहान रोटरी फाउंडेशन को प्रोजेक्ट से जुड़े विवरण ही नहीं दे रहे थे - जिसके चलते रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों को सुनने व बोलने में लाचार बच्चों के ईलाज से जुड़े प्रोजेक्ट के पैसों में बेईमानी होने के संदेह हुए और उन्होंने प्रोजेक्ट को रद्द करने का फैसला सुना दिया ।
उल्लेखनीय है कि तीन वर्ष पहले, क्लब के प्रेसीडेंट के रूप में भूषण चौहान ने चार कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरीज के लिए 33,200 अमेरिकी डॉलर (करीब 23 लाख रुपए) की ग्लोबल ग्रांट स्वीकृत करवाई । 'जी 1233' नाम की इस ग्रांट के स्वीकृत होते ही भूषण चौहान प्रोजेक्ट का काम करने की बजाये ग्रांट के पैसों पर कुंडली मार कर बैठ गए । रोटरी फाउंडेशन ने ग्रांट स्वीकृत होते ही 6 अक्टूबर 2016 को प्रोजेक्ट का लेखाजोखा रखने का काम शुरू कर दिया, लेकिन उसे भूषण चौहान की तरफ से प्रोजेक्ट को लेकर जानकारी ही नहीं मिली । प्रोजेक्ट के तहत दस महीने में बच्चों का ईलाज हो जाना चाहिए था - लेकिन भूषण चौहान रोटरी फाउंडेशन को प्रोजेक्ट के काम को लेकर कोई जानकारी ही नहीं दे रहे थे । सिर्फ यही नहीं, रोटरी फाउंडेशन से आने वाली ईमेल्स का भी जबाव देना भूषण चौहान ने जरूरी नहीं समझा । दस महीनों तक रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों को जब भूषण चौहान की तरफ से न तो कोई जानकारी मिली, और न अपनी ईमेल्स का जबाव मिला - तो उन्होंने प्रोजेक्ट को रद्द करके 2 सितंबर 2017 को इस सूचना को रिकॉर्ड पर भी लगा दिया । प्रोजेक्ट से जुड़े तथ्यों तथा उसके रद्द होने के फैसले को रोटरी फाउंडेशन के इस पृष्ठ पर देखा जा सकता है :


प्रोजेक्ट रद्द होने का कारण भी रोटरी फाउंडेशन ने बताया है, जिसे यहाँ देखा जा सकता है :


भूषण चौहान के नाकारापन व बेईमानीपूर्ण नीयत के चलते सुनने और बोलने में लाचार बच्चों के ईलाज से जुड़े प्रोजेक्ट के रद्द होने से रोटरी जगत में रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल की तो बदनामी हुई ही, साथ ही साथ रोटरी व डिस्ट्रिक्ट की पहचान व विश्वसनीयता को भी चोट पहुँची - और ईलाज का इंतजार करते मासूम बच्चे ईलाज से भी वंचित रह गए । भूषण चौहान की कारस्तानी के चलते होने वाले चौतरफा नुकसान से बचने के लिए क्लब के बाद के वर्षों के पदाधिकारियों ने डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारियों के साथ मिल कर रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकरियों से उक्त प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित करने का अनुरोध किया और उन्हें आश्वस्त किया कि पूर्व में प्रदर्शित किए गए नाकारापन को नहीं दोहराया जायेगा और उचित तरीके से प्रोजेक्ट को पूरा किया जायेगा । जिस प्रोजेक्ट को वर्ष 2016-17 में पूरा होना चाहिए था; लेकिन भूषण चौहान के नाकारापन व बेईमानीपूर्ण नीयत के चलते जो रद्द हो गया था - उसे पुनर्जीवित करवा कर, तीन वर्ष बाद अभी हाल ही में पूरा किया गया है । लोग लेकिन यह देख कर हैरान हो रहे हैं कि प्रोजेक्ट के पूरा होने का श्रेय भूषण चौहान जोरशोर से ले रहे हैं और ऐसे जता/दिखा रहे हैं जैसे कि उन्होंने कोई बड़ा महान काम किया है । लोग उनके इस रवैये को बेशर्मी व निर्लज्जता की पराकाष्ठा के रूप में देख रहे हैं । लोगों का कहना है कि भूषण चौहान में यदि जरा सी भी नैतिकता और शर्म है तो उन्हें इस बात के लिए सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए कि उनके नाकारापन के चलते प्रोजेक्ट रद्द हुआ तथा क्लब और रोटरी व डिस्ट्रिक्ट की साख तथा विश्वसनीयता को चोट पहुँची - और खुद श्रेय लेने की बजाये क्लब व डिस्ट्रिक्ट के उन पदाधिकारियों का आभार व्यक्त करना चाहिए, जिन्होंने प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित करवाने में तथा उसे पूरा करवाने में भूमिका निभाई । 

Tuesday, October 22, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन में मलकीत सिंह जस्सर तथा अपने ही क्लब की तरफ से मुकेश गोयल को मिला दोहरा झटका सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की पंकज बिजल्वान की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाता दिख रहा है

हापुड़ । पंकज बिजल्वान की सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की उम्मीदवारी का झंडा उठाए मुकेश गोयल को हाल ही में दो झटके एक साथ लगे हैं, जिसने पंकज बिजल्वान की उम्मीदवारी को गहरे संकट में फँसा दिया है । मुकेश गोयल को पहला झटका पूर्व गवर्नर मलकीत सिंह जस्सर ने दिया, जो मुकेश गोयल कैम्प छोड़ कर सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए रजनीश गोयल की उम्मीदवारी के झंडे को ऊँचा किए हुए विनय मित्तल कैम्प के साथ जा जुड़े दिखाई दिए हैं । इससे भी बड़ा झटका मुकेश गोयल को अपने ही क्लब के प्रेसीडेंट राकेश वर्मा से मिला, जिनके बगावती तेवर के कारण मुकेश गोयल को पंकज बिजल्वान की उम्मीदवारी को बड़े स्तर पर प्रमोट करने के उद्देश्य से किए जा रहे अपने क्लब के अधिष्ठापन समारोह को रद्द कर देने के लिए मजबूर होना पड़ा है । मजे की बात यह देखने को मिल रही है कि मुकेश गोयल कैम्प की तरफ से मलकीत सिंह जस्सर के मामले में तो लीपापोती करने तथा डैमेज-कंट्रोल की कोशिश की जा रही है, लेकिन मुकेश गोयल के क्लब की तरफ से जो झटका लगा है - उस पर मुकेश गोयल और उनके कैम्प के लोगों की बोलती पूरी तरफ बंद है । इन दोनों मामलों को डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में मुकेश गोयल के घटते राजनीतिक असर के नतीजे के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है और माना/समझा जा रहा है कि मुकेश गोयल को लगने वाले यह झटके वास्तव में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए प्रस्तुत पंकज बिजल्वान की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने वाले हैं ।
मलकीत सिंह जस्सर के जरिये लगे झटके के मामले में डैमेज-कंट्रोल की कोशिश करते हुए मुकेश गोयल कैम्प की तरफ से मलकीत सिंह जस्सर को लेकर दुष्प्रचार शुरू कर दिया गया है; जिसके तहत कभी यह कहा/बताया जाता है कि मलकीत सिंह जस्सर 'हमारे ही साथ हैं', रजनीश गोयल के कार्यक्रम में तो वह 'हमारे' जासूस के रूप में गए थे; कभी कहा जाता है कि मलकीत सिंह जस्सर के पास है क्या, और उनके जाने से से क्या फर्क पड़ता है; कभी बताया जाता है कि मलकीत सिंह जस्सर जल्दी ही 'हमारे' साथ दिखेंगे; आदि-इत्यादि । मुकेश गोयल कैम्प के ही कुछेक अन्य लोगों का कहना है कि मलकीत सिंह जस्सर दरअसल मुकेश गोयल कैम्प में अपनी उपेक्षा से नाराज हुए और इसलिए वह विनय मित्तल कैम्प में शिफ्ट कर गए हैं । मलकीत सिंह जस्सर यह देख कर भी मुकेश गोयल कैम्प में निराश हुए कि उनके क्लब - लायंस क्लब गाजियाबाद के अधिकतर लोग विनय मित्तल के साथ हैं, और मुकेश गोयल के आयोजनों में क्लब के दो/एक लोग ही शामिल होते हैं । मलकीत सिंह जस्सर का मुकेश गोयल कैम्प छोड़ कर विनय मित्तल कैम्प में शामिल होना चुनाव के गणित को बड़े स्तर पर भले ही प्रभावित न करता हो, लेकिन मनोवैज्ञानिक व भावनात्मक रूप से मुकेश गोयल कैम्प तथा पंकज बिजल्वान की उम्मीदवारी के अभियान को जोर का झटका देता है । 
मुकेश गोयल तथा पंकज बिजल्वान की उम्मीदवारी को इससे भी बड़ा झटका मुकेश गोयल के क्लब से मिला है । इस झटके के चलते मुकेश गोयल को मल्टीपल के डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारियों तथा प्रमुख पूर्व गवर्नर्स के बीच ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल थर्ड वाइस प्रेसीडेंट पद के एंडॉर्सी एपी सिंह तथा पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर संगीता जटिया तक के सामने फजीहत का शिकार होना पड़ा है । हर जगह खबर फैल गई है कि डिस्ट्रिक्ट पर अपना प्रभुत्व वापस पाने की कोशिश करने वाले मुकेश गोयल का अपने क्लब में ही प्रभुत्व नहीं रह गया है और बड़े जोरशोर से तैयारी करने के बावजूद वह अपने क्लब के अधिष्ठापन समारोह को रद्द कर देने के लिए मजबूर हुए हैं । मजे की बात यह है कि उक्त समारोह होने की जानकारी तो मुकेश गोयल लोगों को प्रतिदिन दे रहे थे और समारोह का भारी भरकम निमंत्रण पत्र बार बार लोगों को दिखा व भेज रहे थे; लेकिन समारोह के रद्द हो जाने की सूचना को लेकर वह चुप्पी बनाए हुए हैं । अपने ही क्लब में मुसीबत व फजीहत झेलने के लिए मुकेश गोयल किस तरह खुद ही जिम्मेदार हैं, इससे जुड़े तथ्यों को 'रचनात्मक संकल्प' की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट में पढ़ा जा सकता है । इस किस्से से एक बात यह जरूर साबित हुई है कि मुकेश गोयल के पास इस समय न कोई रणनीति है और न उनके पास कोई ढंग के सलाहकार हैं, जिस कारण से वह सेल्फ-गोल करने में तथा खुद ही अपने लिए मुसीबतें पैदा करने तथा उन्हें बढ़ाने में लगे हुए हैं । लोगों को लगता है कि मुकेश गोयल यदि थोड़ी सी समझदारी से काम लेते तो अपने क्लब में पैदा हुए झंझट से अपने आप को बचा सकते थे तथा उससे होने वाले नुकसान से बच सकते थे । किसी रणनीति के अभाव में, खुद ही अपने लिए मुसीबतें पैदा करने तथा उन्हें बढ़ाने के मुकेश गोयल के 'फैसलों' तथा उनके नतीजों ने पंकज बिजल्वान की उम्मीदवारी को मुसीबत में फँसा दिया है । 

Sunday, October 20, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में अजीत जालान को रोटरी के पैसे से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव लड़वाने की विनोद बंसल की तैयारी ने उनके अपने क्लब में बबाल पैदा किया, जहाँ लोगों को डर हुआ है कि अजीत जालान के चक्कर में विनोद बंसल कहीं राजीव मित्तल का रोटरी फाउंडेशन में किया गया 'इन्वेस्टमेंट' मुसीबत में न फँसवा दें ?

नई दिल्ली । रोटरी क्लब दिल्ली राजधानी के एक प्रोजेक्ट के साथ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार अजीत जालान की संलग्नता ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनोद बंसल की भूमिका को एक बार फिर विवाद व चर्चा में ला दिया है । रोटरी क्लब दिल्ली राजधानी विनोद बंसल के क्लब के रूप में जाना/पहचाना जाता है, और अजीत जालान को विनोद बंसल के उम्मीदवार के रूप में ही देखा/पहचाना जाता है । गंभीर आरोप यह है कि अजीत जालान को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव विनोद बंसल रोटरी के पैसे से लड़वा रहे हैं । दरअसल रोटरी क्लब दिल्ली राजधानी का सेनेटरी पैड्स बनाने और बाँटने का एक बड़ा महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट है; क्लब के लोगों का ही कहना/बताना है कि अजीत जालान को इस प्रोजेक्ट से जोड़ कर उन्हें चुनावी लाभ दिलवाने का आईडिया विनोद बंसल का ही है । विनोद बंसल पहले भी, केआर रविंद्रन के प्रेसीडेंट-वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में पक्षपातपूर्ण भूमिका निभाने के लिए रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड से फटकार खा चुके हैं । उम्मीद की गई थी कि उस फटकार से उन्होंने सबक लिया होगा । विनोद बंसल लेकिन जिस तरह से अपने क्लब के एक महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट का राजनीतिक इस्तेमाल कर/करवा रहे हैं, और अजीत जालान को रोटरी के पैसे से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी का चुनाव 'लड़वा' रहे हैं - उससे लग/दिख रहा है कि उन्होंने केआर रविंद्रन के प्रेसीडेंट-वर्ष में पड़ी व दर्ज हुई उस फटकार से कोई सबक नहीं लिया है ।
रोटरी क्लब दिल्ली राजधानी का सेनेटरी पैड्स का जो प्रोजेक्ट है, वह संकल्प फाउंडेशन नाम की एक स्वयंसेवी संस्था के 'सहयोग' से चल रहा है । मजे की बात यह है कि विनोद बंसल के क्लब की तमाम गतिविधियाँ इसी संस्था के सहयोग से चल रही हैं, जिसे लेकर क्लब के अन्य कुछेक सदस्यों के बीच गहरी नाराजगी है । यह संस्था दरअसल क्लब के ही एक सदस्य राजीव मित्तल की है । राजीव मित्तल ने रोटरी फाउंडेशन में बड़ा दान देने की तैयारी की हुई है; वह शायद एकेएस सदस्य बनेंगे । क्लब के सदस्यों का ही कहना लेकिन यह है कि राजीव मित्तल रोटरी फाउंडेशन में जो पैसा देंगे, वह कोई 'दान' नहीं है, बल्कि 'इन्वेस्टमेंट' है - जिसके बदले वह रोटरी फाउंडेशन से चार गुना पैसा विभिन्न प्रोजेक्ट्स के नाम पर लेंगे । विनोद बंसल ने यही 'समझा' कर राजीव मित्तल को रोटरी फाउंडेशन में 'दान' देने के लिए प्रेरित किया है । विनोद बंसल ने रोटरी फाउंडेशन में 'पैसा दो, और उसका चार गुना लो' फार्मूले के जरिये रोटरी फाउंडेशन के लिए पैसे इकट्ठे करने के काम में 'मास्टरी' पाई हुई है । इसी फार्मूले से वह वह अपने क्लब के राजेश गुप्ता को एकेएस सदस्य बनवा चुके हैं; जिसके ऐवज में राजेश गुप्ता ने प्रोजेक्ट के नाम पर रोटरी फाउंडेशन से जो पैसे लिए - उस पर क्लब में और रोटरी में भारी बबाल रहा; जिसके चलते रोटरी इंटरनेशनल की तरफ से तीन बार उस प्रोजेक्ट का ऑडिट हुआ, वह प्रोजेक्ट क्लब से छिना और अंततः राजेश गुप्ता को भी उस प्रोजेक्ट से अलग किया गया । हालाँकि तब तक राजेश गुप्ता रोटरी फाउंडेशन से मिली रकम का सारा 'लाभ' ले चुके थे ।  
क्लब के ही लोगों का कहना है कि रोटरी फाउंडेशन से करीब चार गुना पैसा दिलवाने का वास्ता देकर विनोद बंसल ने जिस तरह राजेश गुप्ता को एकेएस बनवाया था, उसी फार्मूले के अनुसार उन्होंने राजीव मित्तल को एकेएस बनने और रोटरी फाउंडेशन में 'इन्वेस्ट' करने के लिए तैयार किया है । यही कारण है कि राजीव मित्तल को रोटरी में बड़ा 'फायदा' दिखने लगा है और क्लब की गतिविधियों में राजीव मित्तल की संस्था की संलग्नता काफी बढ़ गई है । क्लब के कुछेक सदस्यों का तो यहाँ तक कहना/बताना है कि उन्हें तो कभी कभी लगता है कि जैसे क्लब को संकल्प फाउंडेशन में गिरवी रख दिया गया है । रोटरी के पैसे से क्लब चलाने के आरोप तो क्लब के सदस्यों की तरफ से सुने जा रहे हैं, डिस्ट्रिक्ट के दूसरे लोग यह देख कर हैरान हैं कि विनोद बंसल ने अपने उम्मीदवार अजीत जालान को रोटरी के पैसे से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव लड़वाने का तरीका भी खोज लिया है । रोटरी फाउंडेशन से पैसे लेने/निकलवाने तथा उनका विविधता के साथ इस्तेमाल करने के मामले में विनोद बंसल ने सचमुच बड़ा 'इनोवेशन' किया है - लेकिन उनके इनोवेशंस उनके लिए फजीहत का कारण बन रहे हैं; और उनके लिए मुसीबत की बात यह है कि उनकी फजीहत के कारण उनके अपने क्लब के सदस्य ही बन रहे हैं । उल्लेखनीय है कि राजेश गुप्ता के मामले में आरोप व विरोध के स्वर क्लब में ही उठे थे, जिसके चलते राजेश गुप्ता का प्रोजेक्ट पहले क्लब से छिना और फिर उनसे; लेकिन राजेश गुप्ता खुशकिस्मत रहे कि जब तक आरोप व विरोध के स्वर उठे और उनसे चीजें छिनी - तब तक वह 'खेल' कर चुके थे; राजीव मित्तल लेकिन शुरू से ही मुसीबत में फँसते/घिरते दिख रहे हैं । क्लब में राजीव मित्तल के नजदीकियों का मानना/कहना है कि यह मामला प्रोजेक्ट के बहाने अजीत जालान को चुनावी फायदा दिलवाने की विनोद बंसल की योजना से भड़का है । राजीव मित्तल के नजदीकियों को डर है कि अजीत जालान के चक्कर में विनोद बंसल कहीं राजीव मित्तल का 'इन्वेस्टमेंट' मुसीबत में न फँसवा दें ?