Thursday, September 20, 2018

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की चुनावी राजनीति में 'सीए प्रीमियर लीग' के जरिये सुधीर अग्रवाल ने जो बाउंसर फेंका है, उसने इंस्टीट्यूट की सेंट्रल काउंसिल के चुनावी माहौल में गर्मी पैदा करने के साथ-साथ बाकी उम्मीदवारों को चिंतित व परेशान करने का काम भी किया है

नई दिल्ली । सुधीर अग्रवाल की 'क्रिकेट डिप्लोमेसी' ने चार्टर्ड एकाउंटेंट्स इंस्टीट्यूट की सेंट्रल काउंसिल की चुनावी राजनीति में खासी गर्मी पैदा कर दी है । नॉर्दर्न इंडिया सीए फेडरेशन की तरफ से दो अक्टूबर को शुरू हो रही 'सीए प्रीमियर लीग' को सुधीर अग्रवाल की तरफ से एक ऐसे मास्टर स्ट्रोक के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है, जिसने नॉर्दर्न रीजन में सेंट्रल काउंसिल के प्रायः सभी उम्मीदवारों और उनके समर्थकों को चिंतित और परेशान कर दिया है । चिंतित और परेशान हों भी क्यों न ? इस बार की प्रीमियर लीग में दिल्ली से बाहर की भी कई टीम आ रही हैं, और इससे भी बड़ी बात यह कि बिग फोर का प्रतिनिधित्व करती हुईं भी कुछेक टीम इस बार प्रीमियर लीग का हिस्सा बन रही हैं । इन तथ्यों को सुधीर अग्रवाल की चार्टर्ड एकाउंटेंट्स खिलाड़ियों के बीच बनी और बढ़ती स्वीकार्यता के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । यूँ कहने को तो खिलाड़ियों की संख्या हालाँकि ज्यादा नहीं होगी; किंतु एक खिलाड़ी सिर्फ एक ईकाई ही नहीं होता है - उसके नजदीकी और उसके प्रशंसक होते हैं, उसकी एक फॉलोइंग होती है और उसका एक ऑरा (आभामंडल) होता है; ऐसे में एक खिलाड़ी वास्तव में कई लोगों पर प्रभाव छोड़ता है । अंतर्राष्ट्रीय ख्याति और मान्यता प्राप्त फिरोजशाह कोटला की पिच पर खेलने के लिए जालंधर, हिसार, यमुनानगर, गुड़गाँव आदि से आयेंगे तो कुछ ही चार्टर्ड एकाउंटेंट्स खिलाड़ी, लेकिन वहाँ के बाकी चार्टर्ड एकाउंटेंट्स खिलाड़ियों और चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के लिए भी यह तथ्य स्वाभाविक रूप से उत्सुकता और दिलचस्पी का होगा ही । जो भी क्रिकेट का बल्ला पकड़ता है, उसकी इच्छा और हसरत अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा प्राप्त फिरोजशाह कोटला की पिच पर खेलने की तो होती ही है । यह सच है कि सीए प्रीमियर लीग में खेलने का मौका कुछ ही चार्टर्ड एकाउंटेंट्स को मिलेगा, लेकिन क्रिकेट में दिलचस्पी रखने वाले बाकी चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के लिए भी यह मौका भावनात्मक जुड़ाव का होगा ही - और ऐसा कौन चार्टर्ड एकाउंटेंट होगा, जिसे क्रिकेट में दिलचस्पी न होगी । यही तथ्य सेंट्रल काउंसिल के चुनाव के संदर्भ में सुधीर अग्रवाल की 'क्रिकेट डिप्लोमेसी' को महत्त्वपूर्ण बना देता है, और सेंट्रल काउंसिल के बाकी उम्मीदवारों की नींद उड़ा देता है ।
इस वर्ष दो अक्टूबर से शुरू हो रही 'सीए प्रीमियर लीग' नॉर्दर्न इंडिया सीए फेडरेशन का चौथा आयोजन है । पहले के तीन आयोजनों की सफलता ने सीए प्रीमियर लीग को नॉर्दर्न रीजन के चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के बीच जो पहचान और प्रतिष्ठा दी है, उसके चलते भी इस चौथे आयोजन के प्रति रीजन के चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के बीच खासा उत्साह है । इस उत्साह को बनाने/जमाने में सुधीर अग्रवाल की तरकीब भी है - जिन्होंने सीए प्रीमियर लीग के रूप में प्रोफेशन और क्रिकेट का ऐसा 'कॉकटेल' तैयार किया है, जिसमें चार्टर्ड एकाउंटेंट्स को दोहरा फायदा मिलता/दिखता है । इसका नजारा तीसरे और पिछले आयोजन के फाइनल व पुरुस्कार वितरण समारोह में देखने को मिला था । उक्त समारोह में इंस्टीट्यूट के दो पूर्व प्रेसीडेंट्स - एनडी गुप्ता और वेद जैन समारोह में मौजूद चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के लिए आकर्षण के प्रमुख केंद्र थे । उक्त समारोह में मौजूद चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की सक्रियता और संलग्नता में देखा/पाया भी गया और उनमें से कईयों ने कहा भी कि यहाँ क्रिकेट के रोमांच के साथ एनडी गुप्ता और वेद जैन जैसे इंस्टीट्यूट के प्रतिष्ठित लोगों के साथ नजदीकी बनाने और दिखाने के मौके भी मिल रहे हैं । मौजूदा वर्ष के शुरू में हुए उक्त समारोह में एनडी गुप्ता और वेद जैन के साथ जिन कई चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ने तस्वीरें खिंचवाईं और सोशल मीडिया में उन तस्वीरों को लगाया/दिखाया, उन तस्वीरों ने उक्त समारोह में न पहुँच सके चार्टर्ड एकाउंटेंट्स को 'सीए प्रीमियर लीग' के प्रति उत्सुक व गंभीर बनाया । यह भी एक प्रमुख कारण है कि 'सीए प्रीमियर लीग' के करीब बारह दिन बाद शुरू हो रहे चौथे आयोजन के प्रति चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, खासकर युवा चार्टर्ड एकाउंटेंट्स का जोश जोरों पर दिख रहा है । संयोग है कि यह चौथा आयोजन इंस्टीट्यूट के चुनाव के मौके पर हो रहा है । इस आयोजन के मुख्य कर्ता-धर्ता के रूप में सुधीर अग्रवाल ने इस मौके और जोश का अपनी उम्मीदवारी के लिए पूरा पूरा फायदा उठाने के उद्देश्य से चौथे आयोजन को और खास बनाने की तैयारी भी की है । दरअसल सुधीर अग्रवाल की बहुआयामी तैयारी ने ही चार्टर्ड एकाउंटेंट्स इंस्टीट्यूट के सेंट्रल काउंसिल के चुनावी माहौल में गर्मी पैदा कर दी है ।
'तैयारी' के तहत ही व्यवस्था की गई है कि प्रत्येक टीम को एक लीग मैच फिरोजशाह कोटला की पिच पर खेलने का मौका अवश्य ही मिलेगा । पिछले आयोजन में सिर्फ फाइनल मैच ही फिरोजशाह कोटला की पिच पर हो सका था । इस बार की व्यवस्था में लेकिन लीग में शामिल प्रत्येक खिलाड़ी को फिरोजशाह कोटला की अंतर्राष्ट्रीय पिच पर अपने खेल का कौशल दिखाने का मौका मिलेगा । दो अक्टूबर को 'सीए प्रीमियर लीग' का उद्घाटन दिल्ली स्थित अक्षर धाम मंदिर के मुख्य पुजारी स्वामी वत्सल मुनि कर रहे हैं, और बाद के आयोजनों में भी प्रयास रहेगा कि देश के मुख्य क्रिकेटर और इंस्टीट्यूट के प्रमुख पदाधिकारी और सदस्य खिलाड़ियों की हौंसला-आफजाई के लिए मौजूद रहें । यह व्यवस्था लीग की पहचान और प्रतिष्ठा बढ़ाने के उद्देश्य से तो होगी ही, साथ ही इस व्यवस्था में सेंट्रल काउंसिल के लिए प्रस्तुत सुधीर अग्रवाल की उम्मीदवारी के प्रमोशन का लक्ष्य भी स्वाभाविक रूप से होगा ही । सुधीर अग्रवाल ने सारी व्यवस्था इतनी चतुराई से की है कि प्रीमियर लीग के हर मौके का फायदा उनकी उम्मीदवारी को मिल सके । चुनावी आचार-संहिता का पालन करते हुए सुधीर अग्रवाल ने हालाँकि नॉर्दर्न इंडिया सीए फेडरेशन के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है, और प्रीमियर लीग के छह पृष्ठों के ब्रॉशर पर कहीं भी उनका नाम नहीं है - लेकिन पूरे आयोजन पर उनकी छाप इतनी गहरी है कि नॉर्दर्न इंडिया सीए फेडरेशन और/या सीए प्रीमियर लीग का जिक्र होते ही लोगों की जुबान पर सहज ही सुधीर अग्रवाल का नाम आ जाता है । दरअसल नॉर्दर्न इंडिया सीए फेडरेशन तथा सीए प्रीमियर लीग और सुधीर अग्रवाल आपस में एक दूसरे के इतने पर्याय बन चुके हैं; और लोगों के दिलों-दिमाग में ऐसे बैठ चुके हैं कि ब्रॉशर में सुधीर अग्रवाल का नाम होने या न होने का कोई अर्थ नहीं रह गया है । प्रीमियर लीग के जरिये सुधीर अग्रवाल ने सेंट्रल काउंसिल के चुनाव में जो बाउंसर फेंका है, उसने इंस्टीट्यूट की चुनावी राजनीति में गर्मी पैदा करने तथा सेंट्रल काउंसिल के बाकी उम्मीदवारों को चिंतित व परेशान करने का काम जरूर किया है - लेकिन इंस्टीट्यूट की चुनावी राजनीति के खिलाड़ियों का मानना और कहना है कि अपने इस आयोजन को मिलने वाले जोरदार समर्थन को वोट में बदलने का मैकेनिज्म सुधीर अग्रवाल को अभी तैयार करना है । वास्तव में वह मैकेनिज्म ही सेंट्रल काउंसिल में उनकी सफलता को सुनिश्चित करने का काम करेगा ।

Monday, September 17, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता की रजिस्ट्रेशन की कमी के कारण फ्लॉप होती दिख रही पेम वन को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अपनी उम्मीदवारी के प्रमोशन के लिए उपयोग करने की अशोक अग्रवाल की कोशिश सचमुच बचा लेगी क्या ?

गाजियाबाद । 23 सितंबर को होने जा रहे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता के पहले कार्यक्रम पेम (प्रेसीडेंट इलेक्ट मीट) वन के लिए अब जब गिनती के दिन ही बचे हैं, तब भी दीपक गुप्ता को रजिस्ट्रेशन के लिए जूझना पड़ रहा है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार अशोक अग्रवाल के समर्थकों के बड़ी संख्या में पेम वन में उपस्थिति बनाने के अभियान के चलते दीपक गुप्ता की मुश्किलें कुछ आसान तो होती हुई दिख रही हैं, अन्यथा दीपक गुप्ता की पेम वन का बुरा हाल ही होना था । स्थिति कितनी खराब है, इसका अंदाजा इसी बात से लग रहा है कि पर्याप्त रजिस्ट्रेशन न हो पाने  के कारण दीपक गुप्ता को खुद प्रयास करना पड़ रहा है, और फोन कर कर के लोगों से रजिस्ट्रेशन करवाने की रिक्वेस्ट करना पड़ रही है । दीपक गुप्ता का शिकायतभरा रोना यह है कि जो लोग उनके साथ जुड़े हैं और उनके साथ होने का दम भरते हैं, वह लोग भी रजिस्ट्रेशन करवाने में उनकी मदद नहीं कर रहे हैं । दीपक गुप्ता को सबसे ज्यादा आश्चर्य उन लोगों के व्यवहार पर है, जो उनके गवर्नर-काल में डिस्ट्रिक्ट टीम में पद तो लेना चाहते हैं - और या ले चुके हैं, लेकिन पेम वन को कामयाब बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं । परंपरा और व्यवहार के अनुसार, प्रेसीडेंट इलेक्ट के अलावा पेम वन में ऐसे रोटेरियंस शामिल होते हैं, जिन्हें अगले रोटरी वर्ष की डिस्ट्रिक्ट टीम में पद लेना या मिलना होता है; ऐसे लोगों की एक सीमित संख्या होती है, जिनका रजिस्ट्रेशन तो पेम वन के लिए आसानी से हो जाता है - रजिस्ट्रेशन के 'टारगेट' को पूरा करने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट और उनकी कोर टीम के सदस्यों को प्रयास करना होता है । दीपक गुप्ता और उनकी कोर टीम के सदस्यों के प्रयासों में कमी के चलते पेम वन के 'टारगेट' को पूरा करना दीपक गुप्ता के लिए मुश्किल हो रहा है; और इसके चलते दीपक गुप्ता और उनकी कोर टीम के सदस्यों के बीच ही आरोप-प्रत्यारोप का सीन बन रहा है । दीपक गुप्ता का अपनी कोर टीम के सदस्यों पर आरोप है कि लोग महत्त्वपूर्ण पद लेकर तो बैठ गए हैं, लेकिन काम कुछ करने को तैयार नहीं हैं; कोर टीम के सदस्यों का कहना लेकिन यह है कि दीपक गुप्ता में लीडरशिप की कोई खूबी ही नहीं है, और उन्हें यह पता व समझ ही नहीं है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर केरूप में उन्हें काम कैसे करने हैं और कैसे लोगों को इंस्पॉयर करना है ।
दीपक गुप्ता का 'टारगेट' दरअसल सुभाष जैन की पेम वन से 'अच्छी' पेम वन करने का है । हालाँकि जगह के मामले में दीपक गुप्ता गच्चा खा गए हैं । सुभाष जैन ने पेम वन का आयोजन पुलमैन होटल में किया था, जहाँ रोटेरियंस को नया अनुभव मिला था, जबकि दीपक गुप्ता पेम वन का आयोजन ताज पैलेस में कर रहे हैं, जो पुलमैन से सस्ता पड़ता है । दीपक गुप्ता इस कमी की भरपाई संख्या बल से पूरा करना चाहते हैं । पिछले वर्ष पेम वन में साढ़े पाँच सौ से अधिक लोग जुटे थे, दीपक गुप्ता इससे अधिक लोग अपनी पेम वन में चाहते हैं । लेकिन रजिस्ट्रेशन की जो रफ्तार है, उसे देख कर लगता नहीं है कि दीपक गुप्ता इस 'टारगेट' को प्राप्त कर सकेंगे । लोगों का आरोप है कि दीपक गुप्ता रजिस्ट्रेशन के लिए ज्यादा रकम ले रहे हैं, और यही कारण है कि उन्हें रजिस्ट्रेशन की कमी का सामना करना पड़ रहा है । पिछले वर्ष पेम वन में एक दंपति के लिए रजिस्ट्रेशन चार्ज 5500 रुपए था, लेकिन दीपक गुप्ता एक दंपति के लिए आठ हजार रुपए बसूल रहे हैं । पिछली बार की तुलना में इस बार का होटल सस्ता है, इसलिए उम्मीद तो यह की जा रही थी कि इस बार रजिस्ट्रेशन चार्ज कम होगा, लेकिन दीपक गुप्ता तो करीब डेढ़ गुना रकम बढ़ा कर चार्ज बसूल कर रहे हैं । पेम वन को स्पॉन्सर करने वाले क्लब्स से तो दीपक गुप्ता ने पिछले वर्ष की तुलना में करीब तीन गुना रकम बसूलने की कोशिश की है । अपने पहले ही कार्यक्रम में दीपक गुप्ता ने जो लूट मचाई है, उसके कारण वह डिस्ट्रिक्ट में आलोचना व आरोपों के पात्र बन रहे हैं । हालाँकि कुछेक लोग इसके लिए दीपक गुप्ता के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर मुकेश अरनेजा को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं; उनका मानना/कहना है कि दीपक गुप्ता रोटरी के नाम पर पैसे बनाने का काम शायद न करें - और यह काम उन्हें अँधेरे में रख कर मुकेश अरनेजा कर रहे हैं ।
मजे की बात यह है कि दीपक गुप्ता एक तरफ तो यह दावा कर रहे हैं कि पेम वन के आयोजन में जो/जितना पैसा खर्च होना है, वह स्पॉन्सरशिप तथा अभी तक हुए रजिस्ट्रेशन के जरिये आ चुका है - इसलिए उन्हें और रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है; लेकिन दूसरी तरफ वह फोन कर कर के लोगों पर रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए दबाव बना रहे हैं । लोगों का कहना/पूछना है कि दीपक गुप्ता को जब पेम वन का खर्च जुट गया है, तो उन्हें और रजिस्ट्रेशन की जरूरत क्या है, जिसके लिए वह तरह तरह से दबाव बना रहे हैं । अपने पहले ही कार्यक्रम, पेम वन को लेकर दीपक गुप्ता जिस तरह से विवादों व आरोपों के घेरे में आ गए हैं, और लीडरशिप व संगठनक्षमता के मामले में अपनी कमजोरी को जाहिर कर रहे हैं - उससे उनके गवर्नर वर्ष के बेहाल होने/रहने के अनुमान लगाए जा रहे हैं । पेम वन के मामले में दीपक गुप्ता की कुछ लाज बचाने का काम अशोक अग्रवाल और उनके समर्थक करते नजर आ रहे हैं । दरअसल पेम वन के जरिये अशोक अग्रवाल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अपनी उम्मीदवारी को प्रमोट करने के उद्देश्य से प्रयास किया है कि पेम वन के आयोजन में उनके समर्थक अच्छी संख्या में रहें, ताकि लोगों को यह बताया/दिखाया जा सके कि दीपक गुप्ता और उनके बीच एक दूसरे की मदद करने वाले संबंध हैं तथा दीपक गुप्ता की टीम में अशोक अग्रवाल के समर्थकों व नजदीकियों को प्रमुखता से जगह मिलने जा रही है । अशोक अग्रवाल और उनके समर्थकों को लगता है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता के साथ अपने और अपने समर्थकों के दोस्ताना संबंधों को दिखा/जता कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में अशोक अग्रवाल की उम्मीदवारी के लिए अच्छा समर्थन जुटाया जा सकेगा ।

Sunday, September 16, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में टीके रूबी का 'मॉडल' अपनाने की बजाये राजा साबू वाला 'मॉडल' अपनाने के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बैरी रसिन के कार्यक्रम के रजिस्ट्रेशन चार्ज को लेकर फजीहत में फँसे

चंडीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल 29 सितंबर को आयोजित हो रही समिट के रजिस्ट्रेशन चार्ज को लेकर भारी आलोचना का शिकार हो रहे हैं । सोशल मीडिया में अपने गुस्से और अपनी नाराजगी को व्यक्त करते हुए डिस्ट्रिक्ट के कई आम और खास लोगों ने इसे लूट-खसोट कहा/बताया है, और साफ-साफ आरोप लगाया है कि छोटे-छोटे आयोजनों के बड़े-बड़े रजिस्ट्रेशन चार्ज लेकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल खासी कमाई कर रहे हैं और अपनी जेब भर रहे हैं । उल्लेखनीय है कि उक्त समिट में मुख्य वक्ता के रूप में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बैरी रसिन आ रहे हैं । ज्यूडिशियल एकेडमी में आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम के लिए प्रति व्यक्ति 700 रुपये तथा प्रति दंपति 1300 रुपये का रजिस्ट्रेशन चार्ज लिया जा रहा है । शाम 4 बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर पहले लोगों को भ्रम रहा कि कार्यक्रम के बाद डिनर की व्यवस्था होगी, लेकिन जब भेद खुला कि डिनर नहीं - चाय आदि की ही व्यवस्था है, तो रजिस्ट्रेशन चार्ज को लेकर लोगों का गुस्सा भड़क उठा । कई लोगों ने रजिस्ट्रेशन की रकम को बहुत ज्यादा बताया है । किसी किसी ने तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल को ऑफर भी दिया कि उक्त कार्यक्रम वह 250 रुपये के रजिस्ट्रेशन चार्ज में करवा देंगे । डिस्ट्रिक्ट में, डिस्ट्रिक्ट के किसी कार्यक्रम के रजिस्ट्रेशन चार्ज को लेकर इससे पहले किसी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को ऐसी फजीहत झेलना पड़ी हो - ऐसा डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ सदस्यों को भी याद नहीं पड़ता है ।
प्रवीन गोयल के लिए सबसे बड़ी फजीहत की बात यह हुई है कि लोगों ने पिछले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के साथ उनकी तुलना करके उन्हें नीचा और गया-बीता साबित करने की कोशिश की है । किसी ने पिछले रोटरी वर्ष में हुए एक इंटरसिटी कार्यक्रम की याद करते हुए बताया कि तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने 750 रुपये के रजिस्ट्रेशन चार्ज में लंच करवाया था, चाय पिलवाई थी और गिफ्ट भी दिए थे । लोगों का पूछना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी यदि 750 रुपये में इतना कुछ कर सकते हैं, तो प्रवीन गोयल के लिए कहाँ/क्या मुश्किल है ? इसी तुलना के आधार पर लोगों का कहना है कि टीके रूबी को तो चूँकि रोटरी से पैसे कमाने नहीं थे, इसलिए उन्होंने रोटेरियंस को अच्छी सुविधाएँ दीं, लेकिन प्रवीन गोयल ने लगता है कि रोटरी से पैसे कमाने को अपना लक्ष्य बना लिया है - इसलिए वह छोटी/मोटी सुविधाओं के बदले में मोटी-मोटी रकम बसूल रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के पूर्व सदस्य तथा रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के पूर्व प्रेसीडेंट एमपी गुप्ता ने पत्र लिख कर प्रवीन गोयल से रजिस्ट्रेशन चार्ज पर पुनर्विचार करने का अनुरोध भी किया है । अपने पत्र में एमपी गुप्ता ने प्रवीन गोयल को याद दिलाया है कि अभी दो महीने पहले ही, जुलाई में ज्यूडिशियल एकेडमी में ही उन्होंने एक सम्मान समारोह का आयोजन किया था, जिसमें 600 रूपये का रजिस्ट्रेशन था । एमपी गुप्ता के पत्र में याद दिलाए गए इस तथ्य के सामने आने के बाद लोगों को आश्चर्य हुआ कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल के सामने ऐसी क्या मजबूरी आ गई कि उन्होंने दो महीने में ही उसी जगह तथा उसी तरह की सुविधाओं के लिए 100 रुपये बढ़ा दिए हैं ।
डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ रोटेरियंस को यह देख कर बहुत बुरा भी लग रहा है कि कुछ सौ रुपयों को लेकर डिस्ट्रिक्ट में सार्वजनिक रूप से इतनी थुक्का-फजीहत हो रही है, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जैसे महत्त्वपूर्ण पद की छीछालेदर हो रही है । लेकिन उनका कहना है कि इस स्थिति को लाने/बनाने में पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू और उनकी शह पर रहने/चलने वाले गवर्नर्स का व्यवहार ही मुख्य रूप से जिम्मेदार है । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स तरह तरह से लोगों से पैसा इकट्ठा करते रहे हैं, और फिर उसका हिसाब-किताब देने/बताने में आनाकानी करते रहे हैं और इकट्ठा हुई रकम पर कुंडली मार कर बैठे रहे हैं और मनमर्जी से उसका इस्तेमाल करते रहे हैं - इसका नतीजा है कि डिस्ट्रिक्ट में लोगों को लगने लगा है कि यह लोग रोटरी और सेवा/प्रोजेक्ट्स के नाम पर पैसों की भारी हेराफेरी और चोरी-चकारी करते हैं । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स के लिए बदकिस्मती की बात यह रही कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी ने रोटेरियंस को मान/सम्मान तथा सुविधाएँ देने में इतने ऊँचे स्टैंडर्ड स्थापित किए कि लोगों को महसूस हुआ कि जैसे अभी तक तो वह ठगे जा रहे थे । हिसाब-किताब में पारदर्शिता रखने तथा लगातार उसके लिए प्रयास करने के टीके रूबी के प्रयत्नों का नतीजा यह हुआ है कि राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स का हर काम संदेह से देखा जाने लगा है और उसका हिसाब-किताब माँगा जाने लगा है । इस बदले माहौल का खामियाजा प्रवीन गोयल को भुगतना पड़ रहा है - क्योंकि गवर्नरी के लिए उन्होंने टीके रूबी का 'मॉडल' अपनाने की बजाये राजा साबू वाला 'मॉडल' अपनाया, और अपने हर काम को संदेहास्पद बना लिया है । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बैरी रसिन के लिए होने वाला कार्यक्रम रजिस्ट्रेशन चार्ज को लेकर जिस तरह से विवाद में घिर गया है, उससे लग रहा है कि प्रवीन गोयल के लिए राजा साबू का 'मॉडल' मुसीबत बढ़ाने वाला साबित होगा ।

Saturday, September 15, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में दो उम्मीदवारों के रह जाने से सीधे बने चुनावी मुकाबले की स्थिति में पूर्व डिस्ट्रिक्ट रमेश चंद्र की नाराजगी के चलते अशोक कंतूर के लिए मामला चुनौतीपूर्ण बना

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए नामांकन भरने का अंतिम दिन गुजर जाने के साथ ही स्पष्ट हो गया है कि उक्त पद के लिए दो ही उम्मीदवारों - अशोक कंतूर और अनूप मित्तल के बीच सीधा चुनावी मुकाबला होगा । चुनावी मुकाबले की दौड़ शुरू होते समय जितेंद्र गुप्ता भी दौड़ते हुए दिख रहे थे; हालाँकि उनकी दौड़ को कोई भी गंभीरता से नहीं ले रहा था - लेकिन कोई यह भी नहीं मान रहा था कि वह चुपचाप से पतली गली पकड़ कर दौड़ से अलग हो जायेंगे । माना/समझा जा रहा था कि जितेंद्र गुप्ता अगले रोटरी वर्ष में उम्मीदवार होने की तैयारी के तहत इस वर्ष उम्मीदवार 'बन' रहे हैं, इसलिए एक उम्मीदवार के रूप में वह ज्यादा सक्रिय नहीं दिखेंगे - लेकिन उम्मीदवार बने रहेंगे, ताकि अगले रोटरी वर्ष में वह पहले से बढ़त बना सकें । इसलिए उम्मीदवारों में दो ही नाम देख कर कई लोगों को हैरानी भी हुई, कुछेक को यह देख कर झटका भी लगा कि डिस्ट्रिक्ट की लीडरशिप के मामले में जितेंद्र गुप्ता इस तरह का बचकानापन दिखायेंगे । जितेंद्र गुप्ता की बदकिस्मती यह रही कि लोगों ने तो उन्हें गंभीरता से तब भी नहीं लिया था, जब वह खुद बहुत गंभीर दिखने का प्रयास कर रहे थे  - लिहाजा जब उन्होंने खुद ही गंभीरता को त्याग दिया, तब लोग उन्हें लेकर मजाक बना/सुना रहे हैं । ऐसे में, जितेंद्र गुप्ता की तरफ से चुनावी दौड़ से बाहर होने के लिए अपनी प्रोफेशनल व्यस्तता को कारण बताते हुए कुछ सफाई दी गई है; लेकिन लोगों को लग रहा है कि जितेंद्र गुप्ता को चूँकि अपनी उम्मीदवारी के संबंध में कहीं कोई समर्थन नहीं मिला, इसलिए उन्होंने अगले रोटरी वर्ष का प्लान त्याग दिया है; और अब जब उन्हें अगले वर्ष उम्मीदवार नहीं बनना है, तो इस वर्ष उम्मीदवार बन कर माहौल बनाने की कोई जरूरत भी नहीं रह गई - और इसलिए वह चुनावी दौड़ के सीन से चुपचाप खिसक लिए हैं ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए दो उम्मीदवारों के रह जाने से चुनावी मुकाबला इस वर्ष सीधा और दिलचस्प हो गया है । पता नहीं कि यह मुकाबला सीधा-सीधा हो जाने का नतीजा है या कुछ और बात है कि अशोक कंतूर के जो समर्थक अभी दो-तीन महीन पहले तक अशोक कंतूर को अस्सी प्रतिशत वोट मिलने का दावा कर रहे थे, वह अब चुनावी मुकाबले को बराबर की टक्कर के रूप में देख रहे हैं । उल्लेखनीय है कि दो-तीन महीने पहले तक अशोक कंतूर के समर्थक नेता लोगों के बीच कहते/बताते थे कि अनूप मित्तल और जितेंद्र गुप्ता तो नाहक ही उम्मीदवार बन रहे हैं, क्योंकि अशोक कंतूर को अस्सी प्रतिशत वोट मिल रहे हैं - किंतु अब जब चुनावी मुकाबले का दिन नजदीक आता दिख रहा है, तो अशोक कंतूर के समर्थक नेताओं के सुर बदले हुए हैं, और वह मान रहे हैं कि अनूप मित्तल के लिए भी समर्थन तेजी से बढ़ा है और मुकाबला बराबरी पर आ टिका है । मजे की बात यह है कि अशोक कंतूर के समर्थक नेता इस बात का कोई कारण भी नहीं बता रहे हैं कि दो-तीन महीने पहले अशोक कंतूर को जो अस्सी प्रतिशत वोट मिल रहे थे, वह घट कर पचास प्रतिशत तक पर क्यों आ गए हैं, और अनूप मित्तल को समर्थन तेजी से क्यों बढ़ा है ? अशोक कंतूर के समर्थक नेताओं के इस रवैये को देख कर डिस्ट्रिक्ट में लोगों को लगा है कि अशोक कंतूर  समर्थक नेताओं को सच्चाई या तो पता नहीं है, और या वह जानबूझ कर सच्चाई को अनदेखा कर रहे हैं - और लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं । इस कोशिश से अशोक कंतूर की उम्मीदवारी को फायदा तो कुछ नहीं मिला है, बल्कि समर्थक नेताओं की हवाई बातों ने अशोक कंतूर के लिए मुसीबत बढ़ाने का काम और किया । दरअसल, अशोक कंतूर अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से क्लब के प्रेसीडेंट और या प्रेसीडेंट के नजदीकी वरिष्ठ सदस्य से संपर्क करते तो उन्हें यही सुनने को मिलता कि 'अरे, आप को तो अस्सी प्रतिशत वोट मिल ही रहे हैं, आप क्यों चिंता कर रहे हैं ?' इस तरह की बातों ने लेकिन उम्मीदवार के रूप में अशोक कंतूर की चिंता बढ़ा दी है । 
अशोक कंतूर को सबसे तगड़ी चोट अपने ही क्लब में पड़ी है । उनके क्लब के वरिष्ठ सदस्य और पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश चंद्र ने अशोक कंतूर की उम्मीदवारी का खुलेआम विरोध किया है । दिलचस्प संयोग है कि अशोक कंटूर उसी वर्ष क्लब के प्रेसीडेंट थे, जिस वर्ष रमेश चंद्र डिस्ट्रिक्ट गवर्नर थे - इस नाते अशोक कंतूर को रमेश चंद्र का समर्थन सुनिश्चित ही होना चाहिए था । किंतु 'उस' वर्ष के प्रेसीडेंट्स की किटी में जब अशोक कंतूर की उम्मीदवारी को समर्थन देने की बात उठी, तो रमेश चंद्र का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने कहा कि अशोक कंतूर पिछले दो वर्ष से उन्हें अपमानित करने की प्रक्रिया में शामिल हैं, तब उन्हें ख्याल नहीं आया कि मैं उनका गवर्नर रह चुका हूँ; रमेश चंद्र ने स्पष्ट कहा कि अशोक कंतूर का रवैया और व्यवहार देखते हुए मेरे लिए उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करना संभव नहीं होगा । रमेश चंद्र के ऐलान से हुए नुकसान की भरपाई करने की कोशिश में अशोक कंतूर ने हालाँकि फिर दावा करना शुरू किया कि रमेश चंद्र की डिस्ट्रिक्ट में हैसियत ही क्या है, और यदि वह समर्थन नहीं करेंगे तो उनका क्या बिगाड़ लेंगे ? अशोक कंतूर ने लोगों के बीच कहा/बताया है कि रमेश चंद्र को तो क्लब में भी कोई नहीं मानता/पहचानता है, और क्लब के प्रेसीडेंट विशेष माथुर तो रमेश चंद्र को कोई तवज्जो नहीं देते हैं - इसलिए रमेश चंद्र की नाराजगी से उनकी उम्मीदवारी को कोई खतरा या डर नहीं है । हो सकता है कि अशोक कंतूर का यह दावा सही ही हो, और सचमुच रमेश चंद्र की नाराजगी उनकी उम्मीदवारी को कोई नुकसान न पहुँचाती हो - लेकिन रमेश चंद्र की नाराजगी अशोक कंतूर की लोगों के बीच एक नकारात्मक पहचान व छवि तो बनाती ही है, जो उनकी उम्मीदवारी के लिए घातक साबित हो सकती है । अशोक कंतूर के कुछेक नजदीकियों और समर्थकों को ही लग रहा है कि अनूप मित्तल की उम्मीदवारी के प्रति डिस्ट्रिक्ट में हमदर्दी का जो भाव है, तथा डिस्ट्रिक्ट के अधिकतर पूर्व गवर्नर्स का उन्हें जो समर्थन है, उसके कारण अशोक कंतूर के लिए चुनावी मुकाबला पहले से ही मुश्किल बना हुआ है; ऐसे में रमेश चंद्र की नाराजगी के चलते अशोक कंतूर की बनने वाली नकारात्मक छवि उन्हें और पीछे धकेलने का ही काम करेगी ।

Friday, September 14, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में रवि सचदेवा के क्लब के अधिष्ठापन समारोह की सफलता के जरिये रवि सचदेवा और उनके समर्थकों व शुभचिंतकों में भरा जोश सचमुच डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की गर्मी को बढ़ाते हुए उसे और दिलचस्प बना सकेगा क्या ?

नोएडा । रवि सचदेवा की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों की सक्रियता में अचानक से तेजी आ रही दिख रही है, जिसके चलते वह कल शाम एक मीटिंग कर रहे हैं - जिसमें रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के अभियान को लेकर आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी । दरअसल रोटरी क्लब नोएडा एक्सेलेंस के नए पदाधिकारियों के अधिष्ठापन समारोह में जुटी भीड़ ने रवि सचदेवा और उनकी उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों को खासा उत्साहित किया है, और उन्हें लगने लगा है कि वह यदि अपनी मुहिम को सावधानी से संयोजित करें और चलाएँ, तो रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को अच्छा समर्थन मिल सकेगा । उल्लेखनीय है कि रोटरी क्लब नोएडा एक्सेलेंस का अधिष्ठापन समारोह कहने को तो क्लब के नए पदाधिकारियों को अधिष्ठापित करने के लिए आयोजित किया गया था, लेकिन उसे जिस बड़े और खास डिजाईन के साथ आयोजित किया गया था उसे देख कर हर किसी को ठीक ठीक समझ में आ गया कि इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के लिए डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच माहौल बनाना और संदेश पहुँचाना है । इस समारोह के चलते रवि सचदेवा की उम्मीदवारी में यदि एक ऊँची छलाँग देखी/पहचानी गई, तो इसके दो कारण रहे - एक तो इस समारोह में डिस्ट्रिक्ट के कई खास और आम लोगों की उपस्थिति तथा दूसरे पूर्व गवर्नर मुकेश अरनेजा के साथ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी आलोक गुप्ता की मौजूदगी । सामान्य स्थितियों में इन तीनों की मौजूदगी के कोई ज्यादा मतलब नहीं होते, और इनकी मौजूदगी को सामान्य शिष्टाचार के पर्याय के रूप में ही देखा/पहचाना जाता - लेकिन क्लब में और समारोह में सतीश सिंघल के होने के विवाद के बीच समारोह में इन तीनों की मौजूदगी के कुछ खास अर्थ 'बन' गए । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत रवि सचदेवा की उम्मीदवारी ने उन 'अर्थों' को राजनीतिक आयाम भी दे दिया ।
समारोह को मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता की मौजूदगी के चलते राजनीतिक आयाम इसलिए भी मिला - क्योंकि अभी तक डिस्ट्रिक्ट में जो राजनीतिक समीकरण रहे हैं, उसमें सतीश सिंघल, मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता एक खेमा बना कर रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट के प्रति रोटरी इंटरनेशनल के कठोर रवैये के सामने आने से - जिसके तहत सतीश सिंघल के खिलाफ कार्रवाई हुई और शरत जैन को चेतावनी मिली - डिस्ट्रिक्ट की राजनीति के समीकरणों में उलट-फेर होने की संभावना तो दिखी, लेकिन अभी तक कोई नया समीकरण बनता हुआ नजर नहीं आया है । पिछले दिनों मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता ने हालाँकि सतीश सिंघल के साथ दूरी बनाने/दिखाने की कोशिश तो की, लेकिन रोटरी क्लब नोएडा एक्सेलेंस के अधिष्ठापन समारोह में एक साथ मौजूदगी दिखा कर - वह फिर 'पुराने घेरे' में वापस लौटते हुए दिखे हैं । जो लोग राजनीति के घुमावदार मोड़ों को जानते/समझते हैं, वह मानते/कहते हैं कि मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता अभी रवि सचदेवा की उम्मीदवारी का झंडा उठाने की जल्दबाजी नहीं करेंगे/दिखायेंगे; यह लोग अभी माहौल भाँपेंगे और यदि रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को दम पकड़ता पायेंगे, तभी आगे आयेंगे । रवि सचदेवा और उनकी उम्मीदवारी के समर्थक व शुभचिंतक भी इस बात को समझ रहे हैं, और इसलिए वह दो स्तरों पर एकसाथ तैयारी करते हुए देखे जा रहे हैं - एक स्तर पर वह मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता को रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के समर्थक के रूप में 'दिखाने' का काम कर रहे हैं, और दूसरे स्तर पर वह ऐसा दिखाते हुए रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच स्वीकृति दिलाने का प्रयास कर रहे हैं ।
रवि सचदेवा और उनकी उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों ने रोटरी क्लब नोएडा एक्सेलेंस के अधिष्ठापन समारोह में दिए गए मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता के भाषणों के चुनिंदा अंशों को सोशल मीडिया के जरिये जिस तरह प्रचारित किया है, उसमें इन तीनों को रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के समर्थक के रूप में 'दिखाने' की होशियारी साफ झलकती है । हालाँकि रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के कुछेक समर्थकों का ही मानना/कहना है कि इस तरह की तरकीबों से क्षणिक रूप में तो माहौल में अनुकूलता और गर्मी लाई जा सकती है, किंतु इस अनुकूलता और गर्मी को यदि स्थाई रूप देना है तो इसके लिए जमीनी स्तर पर कुछ ठोस काम करना होगा । यह ठोस काम क्या होगा और इसे कैसे किया जायेगा, लगता है कि इसे तय करने के लिए ही रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों ने कल की बैठक बुलाई है । क्लब के अधिष्ठापन समारोह के रूप में रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को प्रमोट करने के उद्देश्य से हुए आयोजन के सात/आठ दिन के भीतर ही समर्थकों व शुभचिंतकों की मीटिंग करने की तैयारी से संकेत मिल रहा है कि अधिष्ठापन समारोह की सफलता ने रवि सचदेवा और उनके समर्थकों व शुभचिंतकों को उत्साहित किया है, तथा वह और जोरशोर के साथ रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के अभियान में जुटने की जरूरत समझ रहे हैं । कल शाम होने वाली मीटिंग का एक उद्देश्य समर्थकों व शुभचिंतकों को एकजुट व उत्साहित रखने के साथ-साथ अधिष्ठापन समारोह की सफलता को ज्यादा से ज्यादा भुनाने की कवायद के रूप में भी देखा/पहचाना जा रहा है । माना/समझा जा रहा है कि अधिष्ठापन समारोह की सफलता ने रवि सचदेवा और उनके समर्थकों व शुभचिंतकों में जो जोश भरा है, वह इस वर्ष होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की गर्मी को और भड़कायेगा तथा उसे और दिलचस्प बनायेगा ।

Wednesday, September 12, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी सुशील गुप्ता के सम्मान समारोह को अपनी राजनीति के लिए 'उपयोग' करने की विनोद बंसल की कोशिश के कारण प्रस्तावित सम्मान समारोह का तमाशा बन गया है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया और डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर विनोद बंसल के बीच चल रही खींचातानी के चलते इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में सुशील गुप्ता के होने वाले सम्मान समारोह को लेकर खासा तमाशा खड़ा हो गया है । इन दोनों के रवैये को लेकर कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के सदस्यों के बीच नाराजगी अलग शुरू हो गई है; जिनका कहना है कि सम्मान समारोह को लेकर विनय भाटिया और विनोद बंसल ने मिलकर जो तमाशा खड़ा किया है, उससे डिस्ट्रिक्ट की ही नहीं - सुशील गुप्ता की भी बदनामी हो रही है । कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के ही कुछेक सदस्यों का कहना है कि उन्हें इधर-उधर से सुनने को मिल रहा है कि डिस्ट्रिक्ट में 13 अक्टूबर को सुशील गुप्ता का सम्मान समारोह होने जा रहा है, लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की तरफ से इस मामले में उन्हें कोई अधिकृत सूचना नहीं मिली है । कुछेक ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया से इस बारे में पूछा भी तो उन्हें जबाव मिला कि सारा कार्यक्रम विनोद बंसल फाइनल करेंगे, जो अभी देश से बाहर गए हुए हैं - उनके वापस लौटने के बाद ही यह सुनिश्चित किया जायेगा और बताया जायेगा कि सुशील गुप्ता का सम्मान समारोह कब और कहाँ होगा । विनय भाटिया से यह जबाव पा कर कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के सदस्य और भड़के हुए हैं । सुशील गुप्ता के सम्मान समारोह को लेकर हो रही तमाशेबाजी से खफा होकर कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के एक वरिष्ठ सदस्य सुरेश जैन ने चेन्नई इंस्टीट्यूट के तुरंत बाद सुशील गुप्ता के सम्मान में एक निजी आयोजन करने की घोषणा कर दी है । सुरेश जैन की इस घोषणा ने विनय भाटिया और विनोद बंसल को परेशान कर दिया है, और वह सुरेश जैन के इस कार्यक्रम को रद्द करवाने की कोशिशों में जुट गए हैं । उनका कहना है कि डिस्ट्रिक्ट में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में सुशील गुप्ता का सम्मान करने का पहला मौका 'डिस्ट्रिक्ट' को मिलना चाहिए । 
उल्लेखनीय है कि सुशील गुप्ता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाने के बाद कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में कॉलिज की तरफ से सुशील गुप्ता का सम्मान समारोह करने का सुझाव आया था, जिस पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया का कहना रहा कि सुशील गुप्ता के सम्मान में समारोह डिस्ट्रिक्ट को करना चाहिए और डिस्ट्रिक्ट उसे करना चाहेगा । विनोद बंसल ने विनय भाटिया की बात का समर्थन किया; कॉलिज के दूसरे सदस्यों को भी इसमें कोई ऐतराज की बात नहीं लगी - और यह बात कॉलिज में स्वीकार कर ली गई । कॉलिज के सदस्यों का कहना है कि लेकिन उसके बाद से उन्हें नहीं पता कि सुशील गुप्ता के सम्मान समारोह को लेकर विनय भाटिया और विनोद बंसल क्या खिचड़ी पका रहे हैं । इधर-उधर से पहले उन्होंने 20 अक्टूबर को समारोह होने की बात सुनी थी, और अब वह उक्त समारोह के 13 अक्टूबर को होने की बात सुन रहे हैं । विनय भाटिया से कुछ पूछते हैं तो वह यह कह कर हाथ झाड़ लेते हैं कि विनोद बंसल जब देश लौटेंगे, तब ठीक-ठीक पता चलेगा कि समारोह कब और कहाँ होगा । इस तरह इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने गए सुशील गुप्ता का अपने ही डिस्ट्रिक्ट में सम्मान समारोह होने का मामला एक तमाशा बन गया है, जो मुफ्त में देखने को मिल रहा है ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया के नजदीकियों का कहना है कि सुशील गुप्ता के सम्मान समारोह के 'साईज' को लेकर विनय भाटिया और विनोद बंसल के बीच चूँकि गंभीर विवाद है, इसलिए भी समारोह को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है । दरअसल विनोद बंसल इस समारोह को बड़े स्तर पर करना चाहते हैं, जिसमें देश भर के रोटेरियंस नेताओं और पदाधिकारियों के साथ-साथ रोटरी इंटरनेशनल के प्रमुख नेताओं व पदाधिकारियों को भी आमंत्रित किया जाए - ताकि समारोह की धूम मचे और ख्याति फैले । विनोद बंसल का यह आईडिया विनय भाटिया को पसंद तो खूब आया, लेकिन इतने बड़े समारोह के खर्चे का आकलन करने पर उनकी हवा टाईट हो गई । विनय भाटिया को समारोह के खर्चे पर घबराया देख विनोद बंसल ने अपने स्वभाव के अनुसार उन्हें आश्वस्त तो किया कि चिंता मत करो, सब हो जायेगा - लेकिन यह नहीं बताया कि हो कैसे जायेगा । विनय भाटिया की घबराहट बनी देख विनोद बंसल ने उन्हें रास्ता भी सुझाया कि डिस्ट्रिक्ट 3012 के गवर्नर सुभाष जैन से बात कर लेते हैं और दोनों डिस्ट्रिक्ट मिल कर समारोह कर लेते हैं । यह सुन कर विनय भाटिया की घबराहट कम होने की बजाये बढ़ और गई । उन्होंने आकलन किया कि डिस्ट्रिक्ट 3012 भी समारोह का हिस्सा बनेगा, तो लोगों की भीड़ और बढ़ेगी ही - और दोनों डिस्ट्रिक्ट के लिए भी उतना बड़ा समारोह कर पाना कैसे संभव होगा, जितना बड़ा समारोह करने की विनोद बंसल सोच रहे हैं और योजना बना रहे हैं ? विनोद बंसल योजना बता कर खुद तो विदेश उड़ गए, और समारोह की तैयारी की मुसीबत विनय भाटिया के सिर छोड़ गए । विनय भाटिया चाहते हैं कि सुशील गुप्ता के सम्मान में समारोह डिस्ट्रिक्ट 3011 चाहें अकेले करे और या डिस्ट्रिक्ट 3012 के साथ मिल कर करे - डिस्ट्रिक्ट के लोगों को ही शामिल करके और उनके साथ मिल कर ही कर लें और ज्यादा तामझाम न करें । 
विनय भाटिया का अपने नजदीकियों के बीच कहना/बताना है कि विनोद बंसल को चूँकि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए उम्मीदवार बनना है, और उसके लिए समर्थन जुटाने के वास्ते वह सुशील गुप्ता के साथ अपनी नजदीकियत को दिखाना चाहते हैं - इसलिए सुशील गुप्ता के सम्मान समारोह को वह बड़े स्तर पर करना चाहते हैं, ताकि देश/दुनिया के रोटेरियन नेताओं को दिखा/बता सकें कि सुशील गुप्ता के लिए वह क्या कर सकते हैं । विनय भाटिया का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में वह विनोद बंसल की महत्त्वाकाँक्षा को पूरा करने के लिए डिस्ट्रिक्ट का मंच तो उपलब्ध करवा सकते हैं, लेकिन 'डिस्ट्रिक्ट' विनोद बंसल की महत्त्वाकाँक्षा का 'खर्च' नहीं झेल पायेगा । इस बात को विनोद बंसल कैसे देखते हैं और कैसे हैंडल करते हैं, यह उनके वापस लौटने के बाद ही तय होगा - इसलिए विनय भाटिया ने सुशील गुप्ता के सम्मान समारोह की तैयारी को ठंडे बस्ते में डाल दिया है और तय कर लिया है कि विनोद बंसल जब देश लौटेंगे, तभी देखेंगे और तय करेंगे कि क्या करना है ? सुशील गुप्ता के सम्मान समारोह को लेकर हो रहे इस तमाशे ने कॉलिज ऑफ गवर्नर्स को बुरी तरह नाराज किया हुआ है, और उन्हें लग रहा है कि इस तरह से सुशील गुप्ता के सम्मान के नाम पर उन्हें अपमानित किया जा रहा है, और इससे डिस्ट्रिक्ट की भी फजीहत हो रही है ।

Tuesday, September 11, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में अगले रोटरी वर्ष फरीदाबाद के उम्मीदवार के रूप में अमित जोनेजा की उम्मीदवारी की चर्चा चलने और उसे सुशील खुराना का समर्थन मिलने से विनोद बंसल का 'आदमी' होने के बावजूद अजीत जालान को अपनी उम्मीदवारी खतरे में पड़ती दिख रही है

फरीदाबाद । अमित जोनेजा की बढ़ती सक्रियता और उन्हें लेकर फरीदाबाद के रोटेरियंस नेताओं की बनती दिख रही गोलबंदी में अजीत जालान को अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी के लिए की जा रही अपनी तैयारी पर संकट मँडराता दिख रहा है । अपने नजदीकियों से हालाँकि उन्होंने उम्मीद व्यक्त की है कि पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनोद बंसल स्थिति को सँभाल लेंगे और अमित जोनेजा को उनकी उम्मीदवारी के लिए खतरा नहीं बनने देंगे । लेकिन अजीत जालान के नजदीकियों का ही कहना/बताना है कि अमित जोनेजा को 'आगे बढ़ाने' की मुहिम में जिस तरह से पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुशील खुराना भी दिलचस्पी ले रहे हैं, उससे लगता नहीं है कि विनोद बंसल के लिए अजीत जालान की 'मदद' कर पाना आसान होगा । मजे की बात यह है कि अमित जोनेजा की तरफ से उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई बात नहीं सुनी गई है, लेकिन फिर भी उन्हें अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । यह इसलिए हो रहा है क्योंकि फरीदाबाद के ही रोटेरियंस नेताओं की तरफ से कहा/सुना जा रहा है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में फरीदाबाद का जो दबदबा बना है, उसका फायदा उठाने के लिए फरीदाबाद के लोगों को डिस्ट्रिक्ट के नेतृत्व के लिए आगे आना चाहिए - और ऐसा नहीं होना चाहिए कि फरीदाबाद के 'संसाधनों' का फायदा दिल्ली के लोग ही उठाते रहें; इसी सोच के तहत फरीदाबाद के कई नेताओं का मानना/कहना है कि फरीदाबाद के जो लोग अभी सक्रिय हैं और जिनकी डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच पहचान व सक्रियता बनती नजर आ रही है, उनमें अमित जोनेजा का पलड़ा भारी है और इसलिए उन्हें अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करना चाहिए । इन लोगों का यह भी मानना/कहना है कि अमित जोनेजा यदि अपनी उम्मीदवारी के लिए तैयार नहीं भी होते हैं, तो उन्हें उम्मीदवारी के लिए राजी करना चाहिए ।
इस तरह की बातों ने अजीत जालान के लिए खासी बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है । दरअसल अजीत जालान अगले रोटरी वर्ष में अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं । इसके लिए उन्होंने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया की टीम में डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी जैसा महत्त्वपूर्ण पद भी प्राप्त कर लिया और उक्त पद की आड़ में उन्होंने क्लब्स के प्रमुख सदस्यों तथा प्रेसीडेंट इलेक्ट के बीच अपनी पहचान बनाने का काम भी शुरू कर दिया । अजीत जालान ने कहीं कहीं तो अपने आप को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया से भी 'ऊपर' दिखाने का प्रयास किया, और ऐसे काम भी कर डाले - जो वास्तव में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया को करना चाहिए थे; और ऐसा करते हुए उन्होंने यह दिखाने/जताने का प्रयास किया कि विनय भाटिया को तो कुछ आता/जाता है नहीं और वह तो कुछ करना नहीं चाहते, और इसलिए डिस्ट्रिक्ट का सारा काम मुझे ही करना पड़ रहा है । अजीत जालान के साथ-साथ विनय भाटिया की टीम में पप्पुजीत सिंह सरना और अमित जोनेजा को भी हालाँकि अहम् पद मिले हैं, और यह दोनों भी विनय भाटिया को 'दबोचने' और पीछे धकेलने में लगे रहते हैं, लेकिन इन दोनों की काम करने में कोई दिलचस्पी लोगों को नहीं दिखती है; यह शोर-शराबे में ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं - जबकि अजीत जालान ने काम करने वाले व्यक्ति की छवि व पहचान बनाई है । इसलिए अजीत जालान को अभी तक इन दोनों की सक्रियता में अगले वर्ष की अपनी उम्मीदवारी के लिए कोई खतरा नहीं दिख रहा था; लेकिन हाल ही के दिनों में जिस तरह से अमित जोनेजा की उम्मीदवारी की चर्चा जोर पकड़ने लगी है, उससे अजीत जालान को अपनी उम्मीदवारी खतरे में पड़ती दिख रही है । फरीदाबाद के लोगों के बीच यह चर्चा चल पड़ी है कि विनय भाटिया के बाद दिल्ली से लगातार तीन गवर्नर हो जायेंगे, इसलिए अगले रोटरी वर्ष में फरीदाबाद से गवर्नर चुना जाना चाहिए ।
फरीदाबाद में इस चर्चा को उकसाने में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुशील खुराना का हाथ भी देखा/पहचाना जा रहा है । सुशील खुराना दरअसल इस बात से खफा बताये/सुने जा रहे हैं कि एक समय फरीदाबाद में उनका दबदबा था, जिसे अब लेकिन विनोद बंसल ने हथिया लिया है । अगले रोटरी वर्ष के लिए अजीत जालान को उम्मीदवारी की तैयारी करने में सुशील खुराना को विनोद बंसल से निपटने का मौका दिखा है । अजीत जालान को चूँकि विनोद बंसल के 'आदमी' के रूप में देखा/पहचाना जाता है, इसलिए सुशील खुराना को लगता है कि अजीत जालान की तैयारी में मट्ठा डाल कर वह वास्तव में विनोद बंसल की जड़ों को खराब कर सकते हैं । यह काम 'फरीदाबाद' से हो सकता है, इसमें सुशील खुराना को दोहरा फायदा दिख रहा है । अगले रोटरी वर्ष में फरीदाबाद से उम्मीदवार लाने/आने की चर्चाओं में सुशील खुराना के भी दिलचस्पी लेने से मामला थोड़ा गंभीर हो गया है, और मामले की इस गंभीरता ने अजीत जालान की मुसीबत को बढ़ा दिया है । अजीत जालान अपने आप को और अपने नजदीकियों को हालाँकि विनोद बंसल का वास्ता देकर आश्वस्त कर रहे हैं कि अंततः सब ठीक हो जायेगा । अजीत जालान ने अपने नजदीकियों को यह कहते/बताते हुए भी आश्वस्त किया है कि अमित जोनेजा के बस की उम्मीदवार 'बनना' और चुनाव लड़ना है ही नहीं; इसीलिए फरीदाबाद के लोगों द्वारा बहुत उकसाने के बावजूद वह अपनी उम्मीदवारी को लेकर अभी तक घोषणा करने के लिए तैयार नहीं हो सके हैं । अजीत जालान के नजदीकियों को लेकिन डर है कि फरीदाबाद ने नेताओं ने अपने अभियान में जोर लगाया तो बहुत संभव है कि अमित जोनेजा - या कोई और उम्मीदवार हो जायेगा, और तब विनोद बंसल भी कुछ नहीं कर पायेंगे । लोगों को लगता है कि अजीत जालान भले ही विनोद बंसल के 'आदमी' के रूप में जाने/पहचाने जाते हों, लेकिन अजीत जालान के लिए वह कोई ऐसी 'लड़ाई' बिलकुल नहीं लड़ेंगे, जिससे उनका अपना 'खेल' बिगड़ता हो । अजीत जालान के लिए समस्या की बात यह है कि अगले रोटरी वर्ष की अपनी उम्मीदवारी को लेकर वह फरीदाबाद के लोगों और विनोद बंसल पर ही निर्भर हैं, अब यदि इन्होंने ही उनका साथ छोड़ दिया - तो वह क्या करेंगे ?