Saturday, July 13, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में अचानक से प्रस्तुत हुई मनीष गोयल की उम्मीदवारी के चलते डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में ललित खन्ना की उम्मीदवारी के समीकरणों में सेंध लगने की स्थिति सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी को फायदा पहुँचाती लग रही है

नई दिल्ली । मनीष गोयल इंकार करते करते डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी संग्राम में आखिरकार कूद ही पड़े हैं । यही तमाशा पिछले दिनों अशोक जैन ने किया/दिखाया था; वह भी ना ना करते हुए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर बैठे थे, लेकिन जल्दी ही उन्हें यह समझ में आ गया कि यह 'खेल' उनके बस का है नहीं - सो वह चुपचाप वापस हो लिए । मनीष गोयल को जानने वालों का कहना है कि यह खेल मनीष गोयल के बस का भी नहीं है, और यदि उनकी सद्बुद्धि वापस लौटी तो वह भी अशोक जैन वाली होशियारी दिखायेंगे - अन्यथा उनका हाल रवि सचदेवा जैसा होगा । मनीष गोयल के मामले में दो बातें गौर करने वाली हैं : एक यह कि उनके नजदीकी और डिस्ट्रिक्ट के चुनावी खिलाड़ी पिछले करीब दो महीने से उन्हें उम्मीदवार बनने के लिए उकसा/भड़का रहे थे, लेकिन अपनी तात्कालिक पारिवारिक जिम्मेदारियों का वास्ता देकर वह कह/बता रहे थे कि इस वर्ष तो उम्मीदवार बन पाना उनके लिए असंभव ही होगा ।उनके नजदीकी एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने इन पंक्तियों के लेखक से बताया है कि मनीष गोयल ने अपनी कुछेक ऐसी तात्कालिक पारिवारिक जिम्मेदारियों का जिक्र किया, जिन्हें सुन/जान कर उन्हें भी लगा कि इस वर्ष उम्मीदवार बनना मनीष गोयल के लिए मुसीबतभरा ही होगा और इसीलिए उन्होंने मनीष गोयल से उम्मीदवारी की बात करना बंद कर दिया था । गौर करने वाली दूसरी बात मनीष गोयल का वह सार्वजनिक कथन है जो उन्होंने डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी बनाए जाने पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता को थैंक्यू कहते हुए दर्ज किया था, जिसमें उन्होंने अपने सेक्रेटरी-वर्ष को 'लर्निंग ईयर' (सीखने वाला वर्ष) कहा था । इन दो बातों पर गौर करते हुए कह सकते हैं कि अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए मनीष गोयल ने खुद अपने द्वारा ही बताई गईं अपनी गंभीर पारिवारिक जिम्मेदारियों से मुँह मोड़ लिया है; और जो 'लर्निंग' उन्हें पूरे वर्ष करनी थी, वह उन्होंने शुरू के महीने के पहले सप्ताह में ही कर ली है ।
इसीलिए मनीष गोयल की उम्मीदवारी पर सबसे पहली प्रतिक्रिया के रूप में डिस्ट्रिक्ट के लोगों का कहना यही है कि ऐसा कन्फ्यूज्ड व्यक्ति डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनेगा भी, तो करेगा क्या ? लोगों का कहना यही है कि उम्मीदवारी प्रस्तुत करने में मनीष गोयल ने जितनी जो देरी की है, उससे ही साबित है कि यह उनका 'अपना' फैसला नहीं है, वह तो बस किन्हीं और लोगों के उकसाने/भड़काने के चलते उम्मीदवार बन गए हैं । मनीष गोयल किन लोगों के उकसाने/भड़काने के चलते उम्मीदवार बने हैं, इसे लेकर डिस्ट्रिक्ट के लोगों की राय बँटी हुई है; कुछेक लोग डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट आलोक गुप्ता को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, तो अन्य कुछेक लोग इसके लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता को जिम्मेदार मान रहे हैं । मनीष गोयल को डिस्ट्रिक्ट में हालाँकि पूर्व गवर्नर मुकेश अरनेजा के 'आदमी' के रूप में देखा/पहचाना जाता है; मुकेश अरनेजा को लेकिन सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी के समर्थन में देखा/पहचाना जा रहा है - इसलिए यह बात पहेली भी बनी हुई है कि मनीष गोयल आखिर किस भरोसे उम्मीदवार बने हैं ? डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच चर्चा यही है कि दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता ने अपने अपने 'स्वार्थ' में मनीष गोयल को बलि के लिए बकरा बना दिया है । मनीष गोयल की उम्मीदवारी को डिस्ट्रिक्ट में कोई भी गंभीरता से लेता हुआ भले ही न दिख रहा हो, लेकिन उनकी अचानक से प्रस्तुत हुई उम्मीदवारी ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी परिदृश्य को नाटकीय बनाने का काम तो किया ही है - और इस नाटकीय परिदृश्य में ललित खन्ना के लिए मुसीबत बढ़ती देखी जा रही है, और ललित खन्ना की बढ़ती मुसीबत में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी को फायदा होने का अनुमान लगाया जा रहा है ।
ललित खन्ना दरअसल अभी तक दीपक गुप्ता और उनकी कोर टीम का एकतरफा समर्थन पाते हुए नजर आ रहे थे; मनीष गोयल की उम्मीदवारी के आने से जिसके बँटने का खतरा पैदा हो गया है । ललित खन्ना के कुछेक शुभचिंतकों का हालाँकि दावा है कि ललित खन्ना ने दीपक गुप्ता के लिए जो किया है, उसे देखते हुए दीपक गुप्ता उनके साथ धोखा नहीं करेंगे; लेकिन उनके सामने सवाल यह है कि मनीष गोयल की उम्मीदवारी के पीछे यदि दीपक गुप्ता नहीं हैं, तो दीपक गुप्ता उम्मीदवारी घोषित करने के बाद मनीष गोयल को डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी के पद से हटा क्यों नहीं देते हैं और क्लब्स की मीटिंग्स में उन्हें अपने साथ ले जाना बंद क्यों नहीं कर देते हैं ? दीपक गुप्ता को 'जानने' वाले लोगों का कहना तो यहाँ तक है कि दीपक गुप्ता ने वास्तव में ललित खन्ना की 'लगाम कसने' के लिए ही मनीष गोयल को उम्मीदवार बनाया है, और इसीलिए वह मनीष गोयल को डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी बनाए रखेंगे । जो लोग मनीष गोयल की उम्मीदवारी के पीछे आलोक गुप्ता को देख रहे हैं, उनका कहना है कि अपनी गवर्नरी की 'धमक' पैदा करने के लिए उन्हें एक उम्मीदवार चाहिए था; दरअसल रोटरी में गवर्नरी तभी 'पूरी हुई' मानी जाती है जब वह किसी और को गवर्नर बनवाता है - जैसे जेके गौड़ ने सुभाष जैन को बनवाया, सुभाष जैन ने अशोक अग्रवाल को बनवाया, दीपक गुप्ता व आलोक गुप्ता को सतीश सिंघल के 'प्रॉडक्ट' के रूप में देखा/पहचाना जाता है, दीपक गुप्ता ने ललित खन्ना का झंडा उठा लिया; आलोक गुप्ता के पास हालाँकि गवर्नरी 'पूरी' करने का अभी अगले वर्ष का मौका है, लेकिन उन्होंने जब देखा/पाया कि मनीष गोयल में 'कीड़े' तो हैं, लेकिन कीड़े अलग अलग दिशाओं में भाग रहे हैं, तो उन्होंने मौका ताड़ा और मनीष गोयल के 'कीड़ों' को एक दिशा में करके उन पर एडहेसिव टेप लगा दिया; आलोक गुप्ता को यह भी उम्मीद होगी कि मनीष गोयल के रूप में एक उम्मीदवार उनके हाथ में होगा, तो उनके कार्यक्रमों में उनके 'काम' आयेगा ।
मनीष गोयल की उम्मीदवारी को 'कठपुतली' उम्मीदवारी के रूप में देखे जाने के कारण मनीष गोयल के लिए एक उम्मीदवार के रूप में 'मूव' करना फजीहतभरा तो होगा, लेकिन उनकी उम्मीदवारी ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को त्रिकोणीय बनाने का जो काम किया है - उसने ललित खन्ना की तैयारी व स्थिति को गड़बड़ा दिया है । दरअसल मनीष गोयल की उम्मीदवारी के चलते बनते/बिगड़ते समीकरण सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करते हैं; वह सिर्फ ललित खन्ना की उम्मीदवारी के पक्ष में बनते समीकरणों को प्रभावित करते नजर आ रहे हैं - इसलिए मनीष गोयल की उम्मीदवारी के चलते ललित खन्ना के समर्थन-आधार में पड़ती दिख रही सेंध सुनील मल्होत्रा की उम्मीदवारी को फायदा पहुँचाती लग रही है ।

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 के रोटरी क्लब दिल्ली वेस्ट से निकाले जाने से बचने का मौका खोज रहे पूर्व गवर्नर रवि चौधरी को रोटरी क्लब दिल्ली साऊथएक्स में शरण मिलने के बाद अशोक कंतूर का आरोप कि पूर्व गवर्नर रमेश चंदर अब उन्हें भी क्लब से निकलवाना चाहते हैं

नई दिल्ली । अपनी हरकतों के चलते अपने क्लब - रोटरी क्लब दिल्ली वेस्ट से निकलने के लिए मजबूर किए गए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी को अंततः रोटरी क्लब दिल्ली साऊथएक्स में शरण मिल गई है, और अब अशोक कंतूर पर भी दबाव बनाया जा  रहा है कि वह भी क्लब से निकल लें ! रवि चौधरी और अशोक कंतूर क्लब में होने वाली अपनी दुर्दशा के लिए क्लब के वरिष्ठ सदस्य और पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश चंद्र को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । उल्लेखनीय है कि पिछले रोटरी वर्ष में ही रवि चौधरी को क्लब से निकालने की तैयारी हो गई थी, लेकिन रवि चौधरी ने किसी तरह क्लब के पदाधिकारियों को इस बात के लिए राजी कर लिया था कि वह उन्हें क्लब से न निकालें, क्योंकि तब रोटरी और डिस्ट्रिक्ट में उनकी बहुत बदनामी होगी - उन्होंने क्लब के पदाधिकारियों को आश्वस्त किया कि वह स्वयं ही किसी दूसरे क्लब में ट्रांसफर ले लेंगे, ताकि क्लब से निकाले जाने की बदनामी से बच सकें । रवि चौधरी के लिए बदकिस्मती की बात लेकिन यह रही कि उन्होंने जिस भी क्लब के लोगों से अपनी सदस्यता की बात की, उन्होंने रवि चौधरी के हाथ जोड़ लिए । दरअसल रवि चौधरी की हरकतों को तथा डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच उनकी बदनामी को देखते/पहचानते हुए कोई भी क्लब रवि चौधरी को अपने यहाँ लेने के लिए तैयार नहीं हुआ । मजे की बात यह रही कि रवि चौधरी ने अपनी इस बदनामीभरी स्थिति से शर्मसार होने की बजाये इसका लाभ उठाने की कोशिश की, और अपने क्लब में तर्क किया कि उन्हें चूँकि कोई और क्लब नहीं ले रहा है, इसलिए उन्हें दिल्ली वेस्ट में ही रहने दिया जाए । लेकिन रवि चौधरी की यह चालबाजी चली नहीं और उन्हें स्पष्ट कर दिया गया कि जल्दी से वह अपने लिए कोई क्लब खोज लें, अन्यथा उन्हें दिल्ली वेस्ट से तो निकाल ही दिया जायेगा । तब रवि चौधरी ने किसी तरह रोटरी क्लब दिल्ली साऊथएक्स के पदाधिकारियों को राजी किया और उसमें शरण ली ।
रवि चौधरी के निकलने के बाद रोटरी क्लब दिल्ली वेस्ट में अब अशोक कंतूर पर भी दबाव बनाया जा रहा है कि वह भी अपने लिए कोई और क्लब खोज लें ताकि उनकी हरकतों से क्लब का माहौल खराब न हो और क्लब अपनी पहचान व प्रतिष्ठा को बनाये/बचाये रख सके । क्लब के लोगों का कहना है कि रवि चौधरी और अशोक कंतूर की हरकतों के कारण क्लब का माहौल काफी खराब हो गया था; रवि चौधरी तो गवर्नर रह चुके थे, और अशोक कंतूर को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (नॉमिनी) चुने जाने का पूरा भरोसा था -  इसलिए दोनों लोग क्लब में अपनी मनमानी चलाने लगे थे, जिसके चलते क्लब के पदाधिकारियों के लिए काम कर पाना मुश्किल हो गया था । क्लब में खराब होते माहौल के लिए रवि चौधरी को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना गया और उन्हें क्लब से निकालने की तैयारी शुरू हो गई । रवि चौधरी ने पहले तो दादागिरी दिखाते हुए पदाधिकारियों को हड़काने की कोशिश की, लेकिन पदाधिकारियों को क्लब के दूसरे सदस्यों का समर्थन मिलता देख वह समझौते पर आ गए और किसी दूसरे क्लब में ट्रांसफर लेने की बात करने लगे । बाद में भी वह दिल्ली वेस्ट में बने रहने की तिकड़में करते रहे, लेकिन उनकी दाल गली नहीं । अंततः रवि चौधरी को रोटरी क्लब दिल्ली साऊथएक्स में शरण मिल गई है । रोटरी क्लब दिल्ली वेस्ट के पदाधिकारी और सदस्य अब अशोक कंतूर पर भी दबाव बना रहे हैं कि रवि चौधरी की तरह वह भी किसी और क्लब में ट्रांसफर ले लें । दिल्ली वेस्ट के पदाधिकारियों और सदस्यों को दरअसल लगता है कि रवि चौधरी के 'आदमी' के रूप में अशोक कंतूर यदि क्लब में रहेंगे, तो क्लब रवि चौधरी की हरकतों से वास्तव में मुक्त नहीं हो पायेगा । रवि चौधरी, अशोक कंतूर के जरिये दिल्ली वेस्ट की गतिविधियों को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे और क्लब में गंद फैलाने का काम करेंगे । क्लब यदि सचमुच रवि चौधरी की हरकतों से आजाद होना चाहता है तो जरूरी है कि अशोक कंतूर भी क्लब छोड़ें । 
रवि चौधरी और अशोक कंतूर रोटरी क्लब दिल्ली वेस्ट में अपने खिलाफ बने माहौल के लिए क्लब के वरिष्ठ सदस्य व पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश चंदर को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । अशोक कंतूर ने तो पिछले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में मिली पराजय के लिए भी रमेश चंदर को जिम्मेदार ठहराया था ।अशोक कंतूर का आरोप था कि रमेश चंदर ने उनके साथ धोखा किया था; और वास्तव में उनके साथ नहीं, बल्कि क्लब के साथ धोखा किया था - क्योंकि वह क्लब की तरफ से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार थे । अशोक कंतूर का कहना है कि उनकी उम्मीदवारी के साथ धोखा करके रमेश चंदर ने असल में क्लब के साथ धोखा किया था - और इसलिए उन्हें क्लब से निकाला जाना चाहिए, न कि उन्हें या रवि चौधरी को । अशोक कंतूर के लिए मुसीबत की बात यह रही कि उनके इस तर्क को क्लब में कोई समर्थन नहीं मिला, और रवि चौधरी को तो क्लब से निकलने के लिए मजबूर होना ही पड़ा है, उन पर भी क्लब छोड़ने के लिए दबाव पड़ रहा है । अशोक कंतूर लेकिन रोटरी क्लब दिल्ली वेस्ट की अपनी सदस्यता बचाने की जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं; दरअसल उन्हें डर है कि रवि चौधरी की तरह यदि कहीं उन्हें भी क्लब छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा तो यह बात डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उंनकी उम्मीदवारी के लिए बड़ा नुकसान पहुँचाने वाली होगी । यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली वेस्ट की अपनी सदस्यता बचा सकने में फेल होने के बाद अशोक कंतूर कैसे अपनी सदस्यता बचा पाते हैं - बचा भी पाते हैं या नहीं ?

Tuesday, July 9, 2019

रोटरी फाउंडेशन के पैसों को हड़पने का दोषी पाए गए तथा रोटरी इंटरनेशनल से सजा प्राप्त डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व गवर्नर अनिल अग्रवाल के साथ मंच शेयर करने के मामले में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए समर्थन जुटाने में लगे विनोद बंसल मुसीबत व फजीहत का शिकार बन रहे हैं

नई दिल्ली । बूढ़ों, बीमारों, गरीबों व अनपढ़ों के नाम पर रोटरी फाउंडेशन से मिले पैसों को हड़पने के आरोप में रोटरी इंटरनेशनल से सजा पाए डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल अग्रवाल के साथ मंच शेयर करने के मामले में डिस्ट्रिक्ट 3011 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनोद बंसल खासे विवाद व फजीहत का शिकार हो रहे हैं । उल्लेखनीय है कि 12 जुलाई को जयपुर में रोटरी क्लब जयपुर के नए पदाधिकारियों का इंस्टॉलेशन हो रहा है, जिसमें विनोद बंसल मुख्य अतिथि के रूप में तथा अनिल अग्रवाल विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगे । अनिल अग्रवाल को अभी हाल ही में रोटरी इंटरनेशनल द्वारा तीन वर्षों के लिए रोटरी में ग्रांट्स, अवॉर्ड्स, असाइनमेंट्स व अपॉइंटमेंट्स से वंचित करने की सजा सुनाई गई है । विनोद बंसल रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्य बनने की कोशिश में है । ऐसे में, लोगों को हैरानी है कि रोटरी इंटरनेशनल की सबसे बड़ी प्रशासनिक ईकाई का सदस्य बनने की कोशिश करने वाले विनोद बंसल रोटरी इंटरनेशनल द्वारा दोषी ठहराए गए और सजा प्राप्त अनिल अग्रवाल के साथ मंच शेयर करने के लिए कैसे और क्यों तैयार हो गए हैं ? इससे क्या यह समझा जाए कि इंटरनेशनल डायरेक्टर के रूप में विनोद बंसल बूढ़ों, बीमारों, गरीबों व अनपढ़ों की मदद के नाम पर रोटरी फाउंडेशन के पैसों को हड़पने वालों को संरक्षण देंगे; और उनके डायरेक्टर-काल में रोटरी के पैसों की लूट करने वालों की मौज-बहार होगी ? कई लोगों की तरफ से विनोद बंसल को सुझाव दिया गया है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की अपनी उम्मीदवारी को ध्यान में रखते हुए उन्हें अनिल अग्रवाल जैसे 'सजायाफ्ता' के साथ मंच शेयर नहीं करना चाहिए । 
इस तरह की बातें विनोद बंसल के लिए भले ही मुसीबत व फजीहत का कारण बनी हुईं हैं, लेकिन अनिल अग्रवाल और उनके नजदीकियों पर इन बातों का कोई असर नहीं है । अनिल अग्रवाल के नजदीकियों का कहना है कि रोटरी क्लब जयपुर के कार्यक्रम में विनोद बंसल को मुख्य अतिथि अनिल अग्रवाल ने ही बनवाया है, इसलिए विनोद बंसल उनके साथ मंच शेयर करने से इंकार नहीं कर पायेंगे । विनोद बंसल के शुभचिंतकों को डर लेकिन यह लग रहा है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने में विनोद बंसल यदि अनिल अग्रवाल जैसे बेईमान और रोटरी इंटरनेशनल से सजा पाए लोगों के साथ खड़े दिखेंगे तो इससे उनकी उम्मीदवारी को नुकसान ही पहुँचेगा । उक्त कार्यक्रम में हालाँकि कुछेक और पूर्व गवर्नर्स भी अनिल अग्रवाल के साथ मंच शेयर करेंगे, लेकिन उक्त पूर्व गवर्नर्स चूँकि कुछ पाने की 'दौड़' में नहीं हैं, इसलिए रोटरी इंटरनेशनल से सजा पाए अनिल अग्रवाल के साथ उठने-बैठने का उन पर कोई असर नहीं पड़ता है । विनोद बंसल का मामला लेकिन दूसरा पड़ जाता है । वह इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवार हैं; और इस नाते जब वह रोटरी इंटरनेशनल के फैसले का मजाक बनाते देखे जाते हैं तो लोगों के बीच सवाल पैदा होता है कि विनोद बंसल को जब रोटरी इंटरनेशनल के फैसलों का सम्मान ही नहीं करना है, और रोटरी इंटरनेशनल द्वारा दोषी घोषित किए गए और सजा प्राप्त अनिल अग्रवाल के साथ ही सार्वजनिक रूप से उठना-बैठना है, तो इंटरनेशनल डायरेक्टर उन्हें क्यों बनना है - क्या बूढ़ों, बीमारों, गरीबों व अनपढ़ों के नाम पर रोटरी का पैसा हड़पने वालों को बचाने के लिए ?
अनिल अग्रवाल के नजदीकियों का कहना है कि रोटरी इंटरनेशनल ने अनिल अग्रवाल को रोटरी से निकाला नहीं है, और उनका पूर्व गवर्नर का स्टेटस बरकरार है; जो प्रतिबंध उन पर लगाए गए हैं, उनमें किसी क्लब के कार्यक्रम में विशेष अतिथि बनने पर कोई रोक नहीं है - इसलिए रोटरी क्लब जयपुर के कार्यक्रम में उनके विशेष अतिथि बनने को नाहक ही मुद्दा बनाया जा रहा है और इसमें विनोद बंसल को भी गैरजरूरी रूप से घसीटा जा रहा है । तकनीकी रूप से इस तर्क में दम है और यह सही है, लेकिन नैतिकता नाम की भी कोई चीज होती है - रोटरी में नैतिकता को शर्म के साथ घोल कर यदि पी लिया जायेगा, तो यह रोटरी की साख व प्रतिष्ठा के लिए बहुत ही बुरा संकेत व उदाहरण नहीं होगा क्या ? सोचिये, एक क्लब के नए पदाधिकारियों व सदस्यों के सामने मंच पर एक ऐसा रोटेरियन बैठा होगा, जिसे बूढ़ों, बीमारों, गरीबों और अनपढ़ों के नाम पर पैसों का घपला करने का दोषी ठहराया गया है और सजा सुनाई गई है - तो नए पदाधिकारियों व सदस्यों के बीच कैसा संदेश जायेगा । इसी तर्क से उक्त कार्यक्रम में विनोद बंसल की होने वाली मौजूदगी पर सवाल उठाए जा रहे हैं । रोटरी इंटरनेशनल में डायरेक्टर होने की तैयारी कर रहे विनोद बंसल एक कार्यक्रम में रोटरी के पैसों को हड़पने के मामले में रोटरी इंटरनेशनल द्वारा दोषी ठहराए गए तथा सजा प्राप्त अनिल अग्रवाल के साथ जब मंच शेयर करेंगे, तो वह रोटरी की पहचान, साख व प्रतिष्ठा के साथ एक तरह का खिलवाड़ ही नहीं कर रहे होंगे ? विनोद बंसल के शुभचिंतकों का भी मानना और कहना है कि विनोद बंसल को अनिल अग्रवाल जैसे 'सजायाफ्ता' के साथ मंच शेयर करने से बचना चाहिए, अन्यथा यह बात इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की उनकी उम्मीदवारी के लिए घातक साबित हो सकती है ।
रोटरी इंटरनेशनल द्वारा अनिल अग्रवाल को दोषी ठहराने व सजा सुनाने वाला पत्र :

 

Monday, July 8, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा के इंस्टॉलेशन समारोह में 'बिन बुलाए' आए यश पाल दास को मिली तवज्जो तथा शाजु पीटर व जेपीएस सिबिया की मौजूदगी को डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में राजा साबू गिरोह की वापसी करने की तैयारी के संकेतों के रूप में देखा जा रहा है

चंडीगढ़ । जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-वर्ष के डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में राजेंद्र उर्फ राजा साबू के साथ-साथ उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स की उपस्थिति ने डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों का सर चकराने का काम किया है । उल्लेखनीय है कि जितेंद्र ढींगरा के कार्यक्रमों में राजा साबू तो आते रहे हैं; लेकिन यश पाल दास, शाजु पीटर, जेपीएस सिबिया जैसे उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स कभी नहीं दिखे हैं । इसीलिए इनकी उपस्थिति पर लोगों को हैरानी हुई और फुसफुसाहटें शुरू हुईं कि यह लोग कैसे आ गए ? इन पूर्व गवर्नर्स का आरोप रहा है कि जितेंद्र ढींगरा ने इन्हें कभी अपने कार्यक्रमों में आमंत्रित ही नहीं किया । पिछले एक कार्यक्रम में कुछेक लोगों के सामने राजा साबू ने जितेंद्र ढींगरा से यह शिकायत करते हुए उन्हें सुझाव दिया था कि वह इन पूर्व गवर्नर्स को भी आमंत्रित किया करें । समझा गया कि राजा साबू के सुझाव पर जितेंद्र ढींगरा ने इन पूर्व गवर्नर्स को भी आमंत्रित कर लिया होगा, और इसलिए यह जितेंद्र ढींगरा के कार्यक्रम में आ पहुँचे । जितेंद्र ढींगरा ने लेकिन कई मौकों पर अलग अलग लोगों के सामने स्पष्ट कहा कि उन्होंने इन्हें 'खासतौर' से नहीं आमंत्रित किया था । जितेंद्र ढींगरा का कहना रहा कि उन्होंने तो पहले की तरह ही सभी के लिए एक आम निमंत्रण भेजा था - पहले यह उस निमंत्रण को निमंत्रण नहीं मानते थे, लेकिन अब की बार उन्होंने मान लिया; तो इस बदले हुए रवैये का कारण वही जानते होंगे । दरअसल पिछले करीब तीन वर्षों में डिस्ट्रिक्ट में जो राजनीतिक व प्रशासनिक गंद मचा रहा, उसके लिए राजा साबू के इन तीन नजदीकी पूर्व गवर्नर्स को ही मुख्य रूप से जिम्मेदार माना/ठहराया जाता रहा है । इसीलिए पहले टीके रूबी के गवर्नर-वर्ष में इन्हें कोई तवज्जो नहीं मिली, और अब जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-वर्ष में भी इनके साथ वैसा ही सुलूक होने की उम्मीद की जा रही थी । इसीलिए लोगों को लगता है कि डिस्ट्रिक्ट में अपना 'वनवास' खत्म करने के लिए ही राजा साबू के नजदीकी पूर्व गवर्नर्स यश पाल दास, शाजु पीटर और जेपीएस सिबिया 'बिन बुलाए' ही जितेंद्र ढींगरा के कार्यक्रम में आ पहुँचे ।
दरअसल राजा साबू और उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स डिस्ट्रिक्ट की प्रशासनिक व्यवस्था व राजनीति में पुनर्वापसी के लिए लगातार हाथ-पैर मार रहे हैं । अपनी पुनर्वापसी का विश्वास उन्हें मौजूदा व भावी गवर्नर्स - जितेंद्र ढींगरा, रमेश बजाज व अजय मदान के 'व्यवहार' से भी हुआ । इन तीनों के 'व्यवहार' से राजा साबू और उनके नजदीकी गवर्नर्स को लगा कि यह तीनों उनके नजदीक आना/रहना चाहते हैं । राजा साबू के नजदीकी मनमोहन सिंह को जितेंद्र ढींगरा द्वारा डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाए जाने से राजा साबू और उनके नजदीकी गवर्नर्स का पुनर्वापसी का हौंसला और बढ़ा । राजा साबू और उनके नजदीकी गवर्नर्स लेकिन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के प्रति अपनी खुन्नस को नहीं छोड़ पाए और उन्हें लगा कि जितेंद्र ढींगरा, रमेश बजाज व अजय मदान के ढीले-ढाले रवैये में वह टीके रूबी को निशाना बना लेंगे । इसी के तहत अभी हाल तक, राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों ने टीके रूबी के डीआरएफसी (डिस्ट्रिक्ट रोटरी फाउंडेशन चेयरमैन) बनने में अड़चनें डालने के प्रयास किए । इन प्रयासों पर लेकिन जितेंद्र ढींगरा के कड़ा रवैया अपनाने से पानी फिर गया । जितेंद्र ढींगरा के 'कभी नर्म तो कभी गर्म' रहने पर राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को इतना तो शायद समझ में आ गया है कि जितेंद्र ढींगरा, रमेश बजाज व अजय मदान के साथ उनके नजदीक तो आ सकते हैं - लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह तीनों उन्हें टीके रूबी के साथ 'बदतमीजी' करने का मौका दे देंगे । माना/समझा जा रहा है कि इसीलिए राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों ने अब यह योजना बनाई है कि तवज्जो न दिए जाने के बावजूद डिस्ट्रिक्ट के कार्यक्रमों में उन्हें अपनी उपस्थिति बनानी और 'दिखानी' चाहिए; इससे वह सत्ता में न होते हुए भी मेडीकल मिशन जैसे अपने स्वार्थी 'काम' बना सकेंगे - और इसीलिए यश पाल दास, शाजु पीटर व जेपीएस सीबिया 'बिन बुलाए' ही जितेंद्र ढींगरा के इंस्टॉलेशन कार्यक्रम में आ पहुँचे ।
दरअसल राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को लगता है कि डिस्ट्रिक्ट के कार्यक्रमों में शामिल होकर वह एक तरफ तो अपने 'काम' बनाने/निकालने के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट के लोगों को यह संकेत दे सकते हैं कि जितेंद्र ढींगरा और उनके साथियों ने उनके साथ नजदीकी बनाना शुरू कर दिया है और इसीलिए वह उन्हें अपने कार्यक्रमों में शामिल कर रहे हैं; और दूसरी तरफ वह विभिन्न मुद्दों पर अपनी अलग राय रख कर वह जितेंद्र ढींगरा और उनके साथियों के बीच खटराग पैदा करने का मौका पा सकते हैं । राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों ने इस वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत हुई नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी के मामले में अपनी अलग राय देकर अपने इरादे जाहिर भी कर दिए हैं । खुद राजा साबू ने जितेंद्र ढींगरा को सलाह दी है कि इस वर्ष किसी महिला को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुना जाना चाहिए । इस सलाह के जरिए राजा साबू ने वास्तव में नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी को विवादास्पद बनाने का दाँव चला है । जितेंद्र ढींगरा ने हालाँकि अभी तो नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी पर कोई 'समझौता' करने से इंकार कर दिया है; लेकिन कौन जानता है कि राजा साबू ने जो दाँव चला है, उसके चलते डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में टीके रूबी व जितेंद्र ढींगरा की जो धाक जमी है, वह बिखर न जाए ! जितेंद्र ढींगरा के कई एक नजदीकियों का कहना है कि उन्हें यह बात समझ नहीं आती है कि जितेंद्र ढींगरा जब यह मानते हैं और कहते भी रहते हैं कि राजा साबू और उनके संगी-साथी अपनी 'हरकतों' से बाज नहीं आयेंगे, तब फिर वह उन्हें तवज्जो देते हुए हरकतें करने का मौका क्यों दे रहे हैं ? पिछले तीन वर्षों में राजा साबू और उनके गिरोह के साथ छिड़ी लड़ाई में टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा का लगातार साथ देने वाले कई लोगों का मानना और कहना है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति और व्यवस्था में राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को जब पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया है, तब फिर उन्हें किसी भी तरह की तवज्जो देकर उनके लिए वापसी का रास्ता क्यों तैयार किया जा रहा है ? डिस्ट्रिक्ट के कई लोग इंस्टॉलेशन कार्यक्रम में यश पाल दास को मिली तवज्जो तथा शाजु पीटर व जेपीएस सिबिया की मौजूदगी को पिछले तीन वर्षों की 'लड़ाई' में मिली जीत पर पानी फिरने की शुरुआत के रूप में भी देख/पहचान रहे हैं ।

Sunday, July 7, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 के डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में ढाई सौ डॉलर देने की शर्त के नाम पर डिस्ट्रिक्ट के लोगों, रोटरी फाउंडेशन तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी गुलाम वहनवती तक से धोखाधड़ी करने वाले दीपक गुप्ता रोटरी फाउंडेशन की रकम में घपला करने के आरोपों में फँसे

गाजियाबाद । डिस्ट्रिक्ट 3012 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता रोटरी फाउंडेशन के करीब एक लाख 25 हजार डॉलर की रकम का कोई घपला करने का प्रयास कर रहे हैं क्या ? यह शक जाहिर करने वाले लोग दीपक गुप्ता पर रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी गुलाम वहनवती के साथ 'धोखा' करने का आरोप तो सीधा सीधा ही लगा रहे हैं । हालाँकि कई लोगों के लिए इस बात पर यकीन करना काफी मुश्किल भी हो रहा है; लेकिन रोटरी में जिस तरह के किस्से सामने आ रहे हैं, उन्हें देखते/सुनते हुए कुछ भी 'असंभव' नहीं लगता है । पिछले दिनों ही डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल अग्रवाल को रोटरी फाउंडेशन के पैसे हड़प जाने के आरोप में रोटरी में प्रतिबंधित करने का फैसला हुआ है । उससे पहले भी कुछेक पूर्व गवर्नर्स व गवर्नर्स को घपलेबाजियों के आरोप में सजाएँ सुनाई गईं हैं । और तो और, अभी हाल ही में रॉन बुर्टोन को रोटरी फाउंडेशन के चेयरमैन पद से हटाया गया है, जबकि चेयरमैन के रूप में उनका कार्यकाल कुल दो महीने ही बाकी बचा था । इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि रोटरी में घपलेबाजियों, बेईमानियों और धोखाधड़ियों की बातें आम हैं, और किसी भी पद पर बैठा व्यक्ति यह सब कर सकता है; सच बल्कि यह है कि जो जितने बड़े पद पर है, वह ज्यादा बड़ी लूट-खसोट कर सकता है - करता है और सजा तक पा चुका है । इसलिए दीपक गुप्ता भी यदि आरोपों के घेरे में हैं तो उसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है । मजे की बात यह है कि आरोपों का यह घेरा दीपक गुप्ता ने खुद ही अपने लिए बुना/बनाया/कसा है ।
उल्लेखनीय है कि दीपक गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन में शामिल होने वाले प्रत्येक रोटेरियन और उनके जीवनसाथी पर रोटरी फाउंडेशन के नाम पर ढाई सौ डॉलर देने की शर्त रखी थी । उनके द्वारा जारी किए गए एक परिपत्र में साफ कहा गया था कि जो कोई 250 डॉलर रोटरी फाउंडेशन के लिए देगा, उसे ही डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन का अधिकृत निमंत्रण मिलेगा । डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में करीब पाँच सौ लोगों के जुटने का दावा किया गया है । इस हिसाब से डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में रोटरी फाउंडेशन के नाम पर करीब एक लाख 25 हजार डॉलर की रकम इकट्ठा होने का सीधा सीधा अनुमान लगाया गया है । कुछेक लोगों ने रोटरी फाउंडेशन में और भी ज्यादा रकम दी है, जिसके चलते रोटरी फाउंडेशन के नाम पर इकट्ठा हुई रकम के और भी ज्यादा होने का अनुमान है । लेकिन रोटरी फाउंडेशन तक यह रकम नहीं पहुँची है । ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी रकम आखिर गई कहाँ ? डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह की तैयारी से जुड़े लोगों का कहना है कि समारोह में इतनी रकम जमा ही नहीं हुई । उनका कहना है कि ढाई सौ डॉलर देने की शर्त के चलते डिस्ट्रिक्ट के लोगों ने डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में शामिल होने में जब कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, तो समारोह को 'पिटने' से बचाने के लिए उन्होंने ढाई सौ डॉलर की शर्त को हटा दिया था । इस बारे में लेकिन कोई अधिकृत परिपत्र जारी नहीं किया गया था और यह काम दीपक गुप्ता ने 'चोरी-छिपे' ही किया । उन्होंने लोगों को फोन कर कर के बताया कि ढाई सौ डॉलर की शर्त को हटा लिया गया है, और समारोह में शामिल होने का कोई पैसा नहीं लिया जायेगा । समझा जाता है कि यह 'काम' दीपक गुप्ता ने चोरी-छिपे इसलिए किया, ताकि जिन कुछेक लोगों ने उनकी झाँसेबाजी में आकर रजिस्ट्रेशन के ढाई सौ डॉलर दिए हैं, वह कहीं वापस न माँग लें ।
दीपक गुप्ता ने रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी गुलाम वहनवती को धोखे में रखने के उद्देश्य से भी ढाई सौ डॉलर वाली शर्त हटाने की घोषणा को अधिकृत रूप से प्रकट नहीं किया । उनके नजदीकियों का ही कहना है कि गुलाम वहनवती को समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करते हुए दीपक गुप्ता ने यही झाँसा दिया था कि समारोह में शामिल होने वाले प्रत्येक रोटेरियन से रोटरी फाउंडेशन में ढाई सौ डॉलर मिलेंगे । उनकी योजना के फेल होने की पोल न खुल जाए और उनका झूठ पकड़ा न जाए, इसलिए दीपक गुप्ता ने ढाई सौ डॉलर वाली शर्त को हटाने की बात को छिपाए ही रखा । रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों को दीपक गुप्ता की इस चालबाजी का पता नहीं है, इसलिए वह बेचारे तो पाँच सौ लोगों की उपस्थिति के आधार पर एक लाख 25 हजार डॉलर तथा उससे भी अधिक रकम के आने का इंतजार कर रहे हैं - लेकिन दीपक गुप्ता उन्हें यह रकम सौंप ही नहीं रहे हैं । रोटरी में अनुभवी लोगों का मानना और कहना है कि दीपक गुप्ता ने शर्त के रूप में अपनी जो योजना बनाई थी, उसे सफल बनाना कोई मुश्किल नहीं था; किंतु उन्होंने बिना किसी तैयारी के अपनी योजना को जबर्दस्ती लोगों पर थोपने की जो कोशिश की - वह उन्हें उलटी पड़ गई और फिर उन्हें हर किसी के साथ अलग अलग रूप में धोखाधड़ी करना पड़ी; किसी से कुछ कहा और किसी से कुछ छिपाया । खास बात यह है कि अभी भी उनकी तरफ से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन में कितने लोगों ने ढाई सौ डॉलर के साथ रजिस्ट्रेशन करवाया था । बातें और दावे तो लंबे-चौड़े हैं, लेकिन तथ्य गायब हैं । दरअसल इसीलिए समारोह की तैयारी से जुड़े लोगों को भी इस बात की हवा नहीं है कि रोटरी फाउंडेशन के नाम पर सचमुच कितना पैसा आया है । इसी से लोगों को शक हो रहा है कि ढाई सौ डॉलर की शर्त के नाम पर डिस्ट्रिक्ट के लोगों, रोटरी फाउंडेशन तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी गुलाम वहनवती तक से धोखाधड़ी करने वाले दीपक गुप्ता कहीं रोटरी फाउंडेशन की रकम में कोई घपला तो नहीं कर रहे हैं ? 

Saturday, July 6, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 के डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह से गायब रहने के कारण डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर विनोद बंसल लोगों के निशाने पर आए और उन्हें पद से हटाने की माँग उठी; लोगों का यह भी कहना है कि उनका यह रवैया इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में उन पर भारी पड़ सकता है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर विनोद बंसल की अनुपस्थिति पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन को लोगों से काफी कुछ सुनना पड़ा; जिससे दुखी होकर किन्हीं किन्हीं लोगों से उन्होंने कहा भी कि वह सोच रहे हैं कि वह विनोद बंसल को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के पद से हटा दें, और अन्य किसी को यह पद सौंपे । सुरेश भसीन का रोना है कि डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का पद हासिल करने के लिए तो विनोद बंसल ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था, लेकिन उक्त पद की जिम्मेदारी निभाने में उन्होंने न कोई रुचि दिखाई और न भागीदारी निभाने की कोई जरूरत समझी । शायद ही अन्य किसी डिस्ट्रिक्ट में ऐसा हुआ हो, कि डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन जैसे महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम में डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर ही गायब हो । इससे पहले विनोद बंसल डीटीटीएस (डिस्ट्रिक्ट टीम ट्रेनिंग सेमीनार) कार्यक्रम में भी नदारत थे । सुरेश भसीन के अन्य कुछेक कार्यक्रमों में भी विनोद बंसल ने शामिल होने तथा अपनी जिम्मेदारी निभाने की जरूरत नहीं समझी थी । रोटरी में नया रोटरी-वर्ष शुरू होने से पहले के तथा पहले दिन के कार्यक्रम का बड़ा खास महत्त्व माना/समझा जाता है; इन कार्यक्रमों को इस तरह से डिजाईन किया गया है जिससे कि नए रोटरी-वर्ष के पदाधिकारियों को विषयों, लक्ष्यों व मुद्दों के बारे में प्रशिक्षित किया जा सके - और इसीलिए इन कार्यक्रमों में डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर की भूमिका खासी जिम्मेदारी भरी होती है । विनोद बंसल ने लेकिन कई कार्यक्रमों में उपस्थित रहना तक जरूरी नहीं समझा । विनोद बंसल के इस रवैये पर लोगों का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर पद की जिम्मेदारी निभाने के लिए विनोद बंसल के पास जब समय ही नहीं है, तो वह इस पद पर बने ही क्यों हैं और यह पद वह छोड़ क्यों नहीं देते हैं ?
विनोद बंसल दरअसल इन दिनों इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव की तैयारियों में व्यस्त हैं; और इसके तहत विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारियों के बीच पैठ बनाने की कोशिशों में लगे हैं - इन कोशिशों में वह दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के कार्यक्रमों के निमंत्रणों का जुगाड़ करते हैं, और अपने डिस्ट्रिक्ट के कार्यक्रमों से गायब रह कर दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के कार्यक्रमों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते हैं । लोगों का कहना है कि विनोद बंसल दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स में अपनी पैठ बनाने के जो प्रयास कर रहे हैं, उन पर आपत्ति करने का किसी को अधिकार नहीं है - लेकिन खुद विनोद बंसल को भी यह सोचना चाहिए कि इस सब को ध्यान में रखते हुए उन्हें जिम्मेदारी का कोई पद नहीं लेना चाहिए; विनोद बंसल को खुद भी 'देखना' चाहिए कि वह यदि अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह ठीक से नहीं करते नजर आयेंगे तो इसका इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की उनकी उम्मीदवारी पर प्रतिकूल असर ही पड़ेगा । विनोद बंसल के इस मामले में लेकिन अपने 'जबाव' हैं; कुछेक लोगों के बीच उन्होंने सुरेश भसीन के रवैये की शिकायतें की हैं । उनका कहना है कि सुरेश भसीन ने उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर तो बना दिया, लेकिन सारे काम और सारे फैसले वह खुद ही करना चाहते हैं और वह तो बस नाम के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर हैं । डिस्ट्रिक्ट में लोगों को यह तो 'दिखा' है कि डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के रूप में विनोद बंसल को सुरेश भसीन के साथ वैसी 'आजादी' नहीं मिली, जैसी उन्होंने विनय भाटिया के साथ 'ली' - लेकिन लोगों का मानना और कहना है कि रोटरी में विनय भाटिया और सुरेश भसीन की 'स्थिति' देखते हुए विनोद बंसल को यह खुद ही सोचना चाहिए था कि जैसे उन्होंने विनय भाटिया को 'चला' लिया है, वैसे ही वह सुरेश भसीन को भी नहीं 'चला' पायेंगे । सुरेश भसीन व विनोद बंसल को एक दूसरे से जो शिकायतें रहीं, वह अभी तक दबी/ढकी रही थीं, और दोनों ने ही अपनी अपनी नाराजगियों व शिकायतों को ज्यादा लोगों के सामने प्रकट नहीं किया था और अपने अपने तरीके से काम चला रहे थे - लेकिन डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में विनोद बंसल की अनुपस्थिति से मामला भड़क गया है, और विनोद बंसल को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर पद से हटाए जाने की बातें होने लगी हैं । 
मजे की बात यह रही कि विनोद बंसल के अपने डिस्ट्रिक्ट के इंस्टॉलेशन समारोह में पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू तथा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी पद से इस्तीफा देने वाले सुशील गुप्ता जैसे बड़े नेता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल थे, लेकिन फिर भी विनोद बंसल ने उक्त समारोह में शामिल होना जरूरी नहीं समझा - और उस समय उन्होंने अन्य जगह व्यस्त रहना जरूरी समझा । लोगों के बीच चर्चा रही कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में लगता है कि विनोद बंसल को राजा साबू, सुशील गुप्ता और अपने डिस्ट्रिक्ट के लोगों का समर्थन मिलने का भरोसा नहीं है, इसलिए डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर जैसे महत्त्वपूर्ण पद पर होते हुए भी उन्होंने अपने डिस्ट्रिक्ट के खास आयोजन में शामिल रहना जरूरी नहीं समझा - और वहाँ व्यस्त रहे जहाँ उन्हें मदद मिलने की उम्मीद है । विनोद बंसल के शुभचिंतकों का मानना और कहना है कि सुरेश भसीन से उन्हें चाहें जो और जैसी शिकायतें हों, लेकिन डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर होने के नाते उन्हें डिस्ट्रिक्ट के महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल तो होना ही चाहिए और उन्होंने जो जिम्मेदारी ली है उसे उचित तरीके से निभाना ही चाहिए - अन्यथा उस जिम्मेदारी को छोड़ देना चाहिए; डिस्ट्रिक्ट के महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों से अनुपस्थित होकर वह वास्तव में लोगों को आलोचना करने का मौका दे रहे हैं, और यह बात इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में उन पर भारी पड़ सकती है ।

Friday, July 5, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 के इंस्टॉलेशन समारोह में ललित खन्ना के मेजर डोनर लेवल थ्री बनने की घोषणा पर प्रेसीडेंट्स से मिली उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया को डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले रोटेरियंस ललित खन्ना की उम्मीदवारी के लिए अच्छे संकेत के रूप में देख/पहचान रहे हैं

नई दिल्ली । ललित खन्ना ने डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में मेजर डोनर लेवल थ्री बनने के लिए जो चेक दिया, और उनके चेक को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर मुकेश अरनेजा ने जिस उत्साहपूर्ण तरीके से समारोह में उपस्थित लोगों को 'दिखाया' - उसके चलते क्लब्स के प्रेसीडेंट के बीच ललित खन्ना की पहचान का रंग और गाढ़ा हुआ दिख रहा है । इंस्टॉलेशन समारोह में मंच से ललित खन्ना की जो वाह-वाही हुई, उसे देख कर क्लब्स के प्रेसीडेंट इतने प्रभावित हुए कि उनमें से अधिकतर ने वहीं ललित खन्ना को अपने अपने क्लब के इंस्टॉलेशन समारोह में आने का निमंत्रण दे डाला । प्रेसीडेंट्स ने उनसे आग्रह किया कि उन्हें उनके क्लब के इंस्टॉलेशन समारोह में अवश्य ही आना है । अपने क्लब के इंस्टॉलेशन समारोह में ललित खन्ना की उपस्थिति को सुनिश्चित करवाने का प्रेसीडेंट्स का यह नजारा डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में तो देखने को मिला ही, उसके बाद भी कई एक प्रेसीडेंट्स अपने क्लब के इंस्टॉलेशन में ललित खन्ना की उपस्थिति को सुनिश्चित करने के प्रयासों में लगे हैं । दरअसल यह बात दर्शाती है कि डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन में मेजर डोनर लेवल थ्री बनने के लिए ललित खन्ना ने रोटरी फाउंडेशन के नाम जो चेक दिया, उसकी प्रेसीडेंट्स पर कुछ अलग ही छाप पड़ी है । ललित खन्ना चूँकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार हैं, इसलिए क्लब्स के प्रेसीडेंट पर पड़ी इस छाप का एक राजनीतिक अर्थ भी निकलता है, जो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए ललित खन्ना की उम्मीदवारी को मजबूती प्रदान करता है । 
डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में मंच से हुई ललित खन्ना की वाह-वाही ने प्रेसीडेंट्स को दरअसल इसलिए भी अलग तरीके से प्रभावित किया, क्योंकि डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में पहुँचने से पहले ही, प्रेसीडेंट-वर्ष की शुरुआत होने के मौके पर उन्हें ललित खन्ना की तरफ से खास तौर से डिजाईन किया गया शुभकामना-संदेश देता हुआ कॉर्ड मिल चुका था; जिसे पा/देख कर उन्हें ललित खन्ना की व्यापक सोच व नजरिये का ठोस परिचय मिल चुका था । दरअसल इसी परिचय को डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में उस समय और मजबूती मिली जब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता तथा कुछेक अन्य गवर्नर्स की मौजूदगी में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर व डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर मुकेश अरनेजा ने ललित खन्ना के द्वारा दिए गए चेक को जब लहरा कर दिखाया और उनके मेजर डोनर लेवल थ्री बनने की घोषणा की । इस घोषणा को सुन कर ललित खन्ना से प्रेसीडेंट्स के प्रभावित होने की 'जमीन' वास्तव में ललित खन्ना की तरफ से भेजे गए उस शुभकामना-कॉर्ड ने तैयार की हुई थी, जो प्रेसीडेंट्स को पहले ही मिल चुका था । ललित खन्ना ने उक्त कॉर्ड को खास तरीके से डिजाईन किया/करवाया था, जिसमें रोटरी के संस्थापक पॉल हैरिस का रोटेरियंस को लेकर कहा गया एक प्रेरणा-संदेश था, उसके साथ क्लब के प्रेसीडेंट की तस्वीर थी और उन्हें उनके नाम के साथ संबोधित करते हुए शुभकामना-संदेश था । ललित खन्ना ने सभी प्रेसीडेंट्स को इस कॉर्ड की सॉफ्ट व हॉर्ड कॉपी भेजी, जिससे सभी प्रेसीडेंट्स ने 'स्पेशल' फील किया । 
प्रेसीडेंट्स को 'स्पेशल' फील करवा कर ललित खन्ना ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अपनी उम्मीदवारी को मजबूती देने की जो कोशिश की, उसे डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में उनके मेजर डोनर लेवल थ्री बनने की घोषणा ने और बल प्रदान किया है । ललित खन्ना के नजदीकियों तथा उनके शुभचिंतकों को लगता है कि प्रेसीडेंट्स ने ललित खन्ना के साथ नजदीकी बनाने तथा दिखाने में जिस तरह से दिलचस्पी प्रदर्शित की है, उसके कारण निश्चित ही ललित खन्ना की उम्मीदवारी को फायदा होगा । डिस्ट्रिक्ट के क्लब्स के प्रेसीडेंट अपने अपने क्लब के इंस्टॉलेशन समारोह में ललित खन्ना की उपस्थिति को सुनिश्चित करने/करवाने के लिए जो रुचि दिखा रहे हैं, उसे ललित खन्ना के नजदीकियों व शुभचिंतकों के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले दूसरे रोटेरियंस भी ललित खन्ना की उम्मीदवारी के लिए अच्छे संकेत के रूप में देख/पहचान रहे हैं - और इस बात ने इस वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी परिदृश्य में ललित खन्ना की उम्मीदवारी को खासा महत्त्वपूर्ण बना दिया है ।