Wednesday, February 22, 2012

रवि भाटिया की राह में रोड़ा अटकाने के लिए डॉक्टर सुब्रमणियन मोहरा बनेंगे क्या

नई दिल्ली | रवि भाटिया और डॉक्टर सुब्रमणियन में से किसी एक को अगले रोटरी वर्ष के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद का उम्मीदवार चुनने को लेकर रोटरी क्लब दिल्ली सेंट्रल में खासा घमासान मच गया है | खास बात यह है कि दिल्ली सेंट्रल में मचे इस घमासान में डिस्ट्रिक्ट के नेताओं ने भी अपने अपने पक्ष तय कर लिए हैं, जिस कारण दिल्ली सेंट्रल का यह घमासान डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति की दिशा और दशा को लेकर भी महत्वपूर्ण हो गया है | संजय खन्ना की चुनावी जीत से उत्साहित और संजय खन्ना की चुनावी जीत में डिस्ट्रिक्ट की बेहतरी को देख रहे लोगों की उम्मीदें अब रवि भाटिया पर आ टिकी हैं, लेकिन संजय खन्ना की जीत से बने माहौल को फिर से बदरंग करने और संजय खन्ना की जीत से पहले वाले माहौल को वापस लाने की इच्छा रखने वाले 'लोग' भी चूँकि चुप नहीं बैठे हैं, इसलिए उन्होंने रवि भाटिया की राह में रोड़ा अटकाने के लिए डॉक्टर सुब्रमणियन को मोहरा बना लिया है | गौर करने की बात यह है कि रवि भाटिया की बजाये डॉक्टर सुब्रमणियन को उम्मीदवार बनाये जाने की वकालत करने वालों के पास इसके अलावा और कोई तर्क नहीं है कि डॉक्टर सुब्रमणियन की उम्मीदवारी को मुकेश अरनेजा और असित मित्तल ने समर्थन देने का भरोसा दे दिया है | इस तर्क के भरोसे डॉक्टर सुब्रमणियन की उम्मीदवारी की वकालत करने वालों के पास लेकिन इस बात का कोई जबाव नहीं है कि इन दोनों नेताओं के समर्थन के बावजूद जब रवि चौधरी का कुछ नहीं हुआ, तो डॉक्टर सुब्रमणियन का ही क्या होगा ?
दिल्ली सेंट्रल के भी और डिस्ट्रिक्ट के भी कई लोगों का साफ मानना और कहना है कि किसी भी उम्मीदवार की सफलता का आधार यह नहीं होता है कि उसे 'इसका' या 'उसका' समर्थन प्राप्त है; सफलता का आधार होता है उसकी अपनी पहचान और उसकी अपनी सामर्थ्य | सभी मानते और कहते हैं कि पहचान और सामर्थ्य को लेकर रवि भाटिया का पलड़ा डॉक्टर सुब्रमणियन की तुलना में बहुत-बहुत भारी है | रवि भाटिया की डिस्ट्रिक्ट में अच्छी पहचान है, उन्होंने डिस्ट्रिक्ट में कई गवर्नर्स के साथ महत्वपूर्ण भूमिकाओं में काम किया है, डिस्ट्रिक्ट में सक्रिय भूमिका निभाने वाले लोगों को वह अच्छी तरह जानते-पहचानते हैं, पीछे एक बार चुनावी प्रक्रियां का हिस्सा बन चुकने के कारण वह चुनावी राजनीति की सपरीली-पथरीली राहों को भी जानते-पहचानते हैं - और उनके बारे में सबसे बड़ी बात यह कि संजय खन्ना की चुनावी जीत में अहम् भूमिका निभाने वाले सभी बड़े-छोटे नेताओं का समर्थन उन्हें बिना किसी झंझट के मिल सकने के पूरे आसार हैं | डॉक्टर सुब्रमणियन के साथ समस्या यह है कि डिस्ट्रिक्ट में उनकी न तो कोई पहचान है, और न ही उनकी किसी भी तरह की कोई सक्रियता रही है | उन्होंने कभी कोई जिम्मेदारी भी नहीं निभाई - निभाई इसलिए नहीं, क्योंकि किसी ने उन्हें कोई जिम्मेदारी दी नहीं; किसी ने उन्हें जिम्मेदारी दी इसलिए नहीं क्योंकि कोई भी उनकी सामर्थ्य के प्रति आश्वस्त नहीं हो पाया | ले देकर उनके नाम अभी हाल ही में संपन्न हुई डिस्ट्रिक्ट कांफ्रेंस की चेयरमैनी है | लेकिन यह चेयरमैनी उन्हें रोटरी में की गई उनकी सेवाओं से प्रभावित होकर नहीं मिली, बल्कि असित मित्तल के भाई की 'सेवा' करने के कारण मिली |
असित मित्तल रोटरी को और डिस्ट्रिक्ट को चूँकि अपनी निजी जायदाद की तरह देखते/समझते हैं, इसलिए वह निजी रूप से उनके काम आने वालों को डिस्ट्रिक्ट 'दे देने' को तैयार हो जाते हैं | रवि चौधरी को 'लंगड़ा घोड़ा' बताते हुए वह उनके बारे में इधर जिस तरह की बातें करने लगे हैं उससे जाहिर हो रहा है कि वह रवि चौधरी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इसलिए नहीं बनवा रहे थे क्योंकि वह रवि चौधरी की रोटरी-सेवाओं से प्रभावित थे: वह तो चूँकि रवि चौधरी ने निजी तौर पर उनकी 'सेवा' की हुई है - असित मित्तल को उन्होंने खासी मोटी रकम उपलब्ध करवाई हुई है, जिसे असित मित्तल वापिस नहीं कर रहे हैं: सो असित मित्तल ने रवि चौधरी से कहा कि मैं तुम्हें तुम्हारे पैसे तो वापस नहीं कर पा रहा हूँ, चलो मैं तुम्हें डिस्ट्रिक्ट 3010 दे देता हूँ | असित मित्तल ने यही खेल डॉक्टर सुब्रमणियन के साथ खेला | डॉक्टर सुब्रमणियन ने असित मित्तल के भाई के उपचार में मदद की थी; उनके इस उपकार के बदले में असित मित्तल ने उन्हें भी डिस्ट्रिक्ट 3010 'दे देने' का वायदा कर लिया | इस वायदे को पूरा करते दिखने के उद्देश्य से ही असित मित्तल ने डॉक्टर सुब्रमणियन को कांफ्रेस चेयरमैन बनाया | असित मित्तल ने डिस्ट्रिक्ट को बड़े-बड़े 'महान' लोग दिए हैं | डॉक्टर सुब्रमणियन के साथ असित मित्तल ने एक जिन प्रदीप चौधरी को डायरेक्टर कांफ्रेंस प्रोमोशन बनाया, उन प्रदीप चौधरी की रोटरी सेवाओं को असित मित्तल के अलावा और कोई नहीं जानता | प्रदीप चौधरी रोटेरियंस के बीच यदि जाने जाते हैं तो सिर्फ एक काम के लिए - 25 जनवरी को गाजियाबाद में रवि चौधरी की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के उदेश्य से हुई मीटिंग में लड़कीबाजी को लेकर जो मारपिटाई हुई थी उसके मुख्य आयोजक प्रदीप चौधरी ही थे | यह तथ्य जानना इसलिए जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट रूप से समझा जा सके कि असित मित्तल ने डिस्ट्रिक्ट प्रोमोशन का काम प्रदीप चौधरी और डॉक्टर सुब्रमणियन को उनकी रोटरी सेवाओं को देखते हुए नहीं, बल्कि अपने निजी स्वार्थों को पूरा करते हुए सौंपा था |
डॉक्टर सुब्रमणियन के नजदीकियों और उनके शुभचिंतकों ने उनको समझाया है कि असित मित्तल की बातों में आकर वह अपनी किरकिरी न करवाएँ | उन्हें बताया गया है कि असित मित्तल ही दूसरों से कहते हैं कि डॉक्टर के बस की चुनाव लड़ना है ही नहीं, और यह भी कि डॉक्टर को अभी इस बात का अंदाज़ा ही नहीं है कि एक उम्मीदवार को क्या-क्या पापड़ बेलने पड़ते हैं | नजदीकियों और शुभचिंतकों की इस समझाइश का कोई असर पड़ता इससे पहले रवि भाटिया की उम्मीदवारी से डरे मुकेश अरनेजा जैसे लोगों ने भी डॉक्टर सुब्रमणियन की उम्मीदवारी को हवा देने का काम शुरू कर दिया | मजे की बात यह है कि मुकेश अरनेजा ने कुछ ही दिन पहले रवि भाटिया को अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया था | रवि भाटिया लेकिन उन्हें जैसे ही प्रेरित होते दिखे, उन्होंने डॉक्टर सुब्रमणियन को उकसाने का काम हाथ में ले लिया | रोटरी क्लब दिल्ली सेंट्रल में जो लोग रवि भाटिया को आगे बढ़ता हुआ नहीं देखना चाहते हैं, उन्होंने भी डॉक्टर सुब्रमणियन को हवा देना शुरू कर दिया है | डॉक्टर सुब्रमणियन के साथ हमदर्दी रखने वाले लोगों का मानना और कहना है कि उन्हें मुकेश अरनेजा और असित मित्तल जैसे अपनी राजनीतिक दुकान के लिए 'सामान' खोज रहे लोगों तथा रवि भाटिया के विरोधी लोगों के बहकाने में नहीं आना चाहिए और तथ्यपूर्ण तरीके से डिस्ट्रिक्ट के चुनावी समीकरण व अपनी स्थिति का आकलन करना चाहिए और तब अपनी उम्मीदवारी के बारे में फैसला करना चाहिए | रोटरी क्लब दिल्ली सेंट्रल के कई प्रमुख लोगों का तथा डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के प्रमुख खिलाड़ियों का मानना और कहना है कि डॉक्टर सुब्रमणियन की बजाये यदि रवि भाटिया उम्मीदवार बनते हैं तो वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के प्रबल दावेदार हो सकेंगे | रोटरी क्लब दिल्ली सेंट्रल के पदाधिकारियों पर रवि भाटिया को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार चुनने का दबाव तो बहुत है, लेकिन डॉक्टर सुब्रमणियन को हवा दे रहे रवि भाटिया के विरोधियों ने भी अभी अपनी कोशिशें नहीं छोड़ी हैं - इसलिए रोटरी क्लब दिल्ली सेंट्रल में उम्मीदवार चुनने को लेकर खासा घमासान मचा हुआ है |

Thursday, February 2, 2012

सतीश गुप्ता की उम्मीदवारी से डरे मुकेश अरनेजा और असित मित्तल उन्हें मनाने के साथ-साथ उन्हें बदनाम करने की मुहिम में जुटे

नई दिल्ली | सतीश गुप्ता ने अपनी उम्मीदवारी के शुभचिंतकों व समर्थकों के साथ मीटिंग करके अपनी चुनावी रणनीति को जिस आक्रामक तरीके से जाँचा-परखा है, उसके बारे में जान/सुन कर मुकेश अरनेजा और असित मित्तल को तगड़ा झटका लगा है | दरअसल इन्हें क्या, अन्य कईयों को यह उम्मीद नहीं थी कि सतीश गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए अपनी उम्मीदवारी के समर्थन में कई-एक प्रमुख लोगों का खुल्लमखुल्ला समर्थन जुटा लेंगे | अपनी चुनावी रणनीति को लेकर सतीश गुप्ता ने जो मीटिंग की, उसमें पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अशोक घोष के बहुत खासमखास सतिंदर नारंग, पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर केके गुप्ता के बेटे समीर गुप्ता, असित मित्तल की डिस्ट्रिक्ट टीम में ट्रेजरार अशोक गर्ग के क्लब के कुछेक खास सदस्य, असित मित्तल-रमेश अग्रवाल-विनोद बंसल की चुनावी जीत में प्रमुख भूमिका निभाने वाले गाजियाबाद के रवींद्र सिंह, असित मित्तल की डिस्ट्रिक्ट टीम के चार-पाँच असिस्टेंट गवर्नर आदि की उपस्थिति ने उनकी मीटिंग को महत्वपूर्ण बना दिया | इन तथा कुछेक अन्य प्रमुख लोगों की उपस्थिति से यह स्वतः साबित हुआ कि जिन सतीश गुप्ता की उम्मीदवारी को हल्के में लिया जा रहा है, उन सतीश गुप्ता ने अपनी उम्मीदवारी के लिए लोगों के बीच अच्छा समर्थन जुटाया हुआ है और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनावी मुकाबले में वह 'छुपे रुस्तम' साबित हो सकते हैं | इस मीटिंग में सतीश गुप्ता के क्लब के प्रायः सभी पूर्व अध्यक्ष तथा मौजूदा पदाधिकारी भी उपस्थित थे | उनकी उपस्थिति से सत्ताधारी गवर्नर्स गिरोह के उन 'नेताओं' को स्वतः ही जबाव मिल गया जो लगातार यह झूठ फैलाए हुए थे कि सतीश गुप्ता की उम्मीदवारी को तो उनके अपने ही क्लब में विरोध का सामना करना पड़ रहा है |
सतीश गुप्ता की उम्मीदवारी के शुभचिंतकों व समर्थकों की इस मीटिंग की जानकारी मिलते ही मुकेश अरनेजा और असित मित्तल के तो हाथों के तोते उड़ गए | दरअसल इन दोनों को उम्मीद थी कि यह सतीश गुप्ता की उम्मीदवारी को वापस करवा देंगे | मुकेश अरनेजा ने तो पिछले दिनों झूठ बोल-बोल कर लोगों को यह बताना भी शुरू कर दिया था कि सतीश गुप्ता ने अपनी उम्मीदवारी को वापस ले लिया है | इससे पहले मुकेश अरनेजा और असित मित्तल ने तरह-तरह से सतीश गुप्ता को अपनी उम्मीदवारी के प्रति हतोत्साहित करने का हर संभाव प्रयास किया था | मुकेश अरनेजा ने तो कई-कई बार यह दावा करते हुए कि सतीश गुप्ता को चार से ज्यादा वोट नहीं मिलेंगे, सतीश गुप्ता की स्थिति और पहुँच को कम करके आँकने का और उन्हें अपमानित करने का काम किया था | असित मित्तल ने सतीश गुप्ता के साथ दोस्ती की आड़ में धोखाधड़ी की | असित मित्तल मीठी-मीठी बातें करके सतीश गुप्ता से यह पता कर लेते कि वह किन-किन लोगों से मिल रहे हैं तथा कौन-कौन लोग उनके साथ आ रहे हैं, और फिर उन लोगों को बहला/फुसला कर सतीश गुप्ता से दूर कर देते | सतीश गुप्ता को जब तक असित मित्तल की धोखाधड़ी का पता चला, तब तक असित मित्तल उनका काफी नुकसान कर चुके थे | पता चलने के बाद सतीश गुप्ता सावधान हो गए और फिर उन्होंने असित मित्तल की चालाकी में फँसने से बचने का गुण सीख लिया | विनोद बंसल से भी सतीश गुप्ता को कुल मिलाकर निराशा ही हाथ लगी | विनोद बंसल ने हालांकि शुरू में सतीश गुप्ता की उम्मीदवारी के प्रति समर्थन दिखाया था, लेकिन खुलकर उनके लिए कुछ करने से उन्होंने यह तर्क देकर अपने को बचा लिया था कि चूंकि वह डीजीएन हैं, इसलिए उनके लिए खुलकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में पार्टी बनना उचित नहीं होगा और यह उनके पद की गरिमा के अनुकूल भी नहीं होगा | सतीश गुप्ता लेकिन बाद में यह देख कर हैरान रह गए कि पद की गरिमा की दुहाई देने वाले विनोद बंसल डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में न सिर्फ पार्टी बने बल्कि कहीं-कहीं तो उन्होंने मुकेश अरनेजा व असित मित्तल से भी 'आगे निकलने' की कोशिश की |
सतीश गुप्ता की उम्मीदवारी को कम करके आँकने, उन्हें हतोत्साहित करने, उनके साथ दोस्ती की आड़ में धोखाधड़ी करने के बाद भी मुकेश अरनेजा और असित मित्तल जब अपने 'उद्देश्यों' में सफल नहीं हुए हैं; और सतीश गुप्ता ने अपनी तैयारी तथा अपनी उम्मीदवारी के प्रति लोगों के समर्थन की एक झलक दिखा दी है तो मुकेश अरनेजा और असित मित्तल ने सतीश गुप्ता को झूठे और बेहूदा किस्म के आरोप लगा कर बदनाम करने की चाल भी चल दी है | मुकेश अरनेजा और असित मित्तल की घटिया हरकतें चूंकि लोगों के बीच जाहिर हो चुकी हैं - पच्चीस जनवरी को इनकी शह पर आयोजित हुई गाजियाबाद की मीटिंग में शराबबाजी और लड़कीबाजी के चक्कर में हुई खूनी मार-पिटाई की घटना पर पर्दा डालने की इनकी तमाम कोशिशों के बाद भी इनकी 'दिलचस्पियों' के किस्से चूंकि अब हर जुबान पर हैं, इसलिए इन्होंने दूसरों को भी अपने जैसा ही बताने/दिखाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं | सतीश गुप्ता की उम्मीदवारी के शुभचिंतकों व समर्थकों की मीटिंग के बाद सतीश गुप्ता पर झूठे और बेहूदा आरोप लगाने की जो कोशिश हुई है, उसके पीछे मुकेश अरनेजा और असित मित्तल को ही पहचाना जा रहा है | चूंकि यह भी जानते हैं कि सतीश गुप्ता पर और या अन्य दूसरों पर यह जो आरोप लगा रहे हैं, वह झूठे हैं - इसलिए यह फर्जी या बेनामी रूप से आरोप लगा रहे हैं | सतीश गुप्ता की उम्मीदवारी के शुभचिंतकों व समर्थकों की मीटिंग होने, तथा इस मीटिंग के कारण सतीश गुप्ता की उम्मीदवारी के मजबूती से दिखने के बाद मुकेश अरनेजा और असित मित्तल ने सतीश गुप्ता के खिलाफ जिस तरह का हल्ला बोला है, उससे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद का चुनावी परिदृश्य दिलचस्प हो गया है |
सतीश गुप्ता की उम्मीदवारी की तैयारी और उनको मिलते 'दिख' रहे समर्थन के प्रभाव को समझने वाले सत्ताधारी गवर्नर्स के नज़दीकियों ने ही यह कहना शुरू कर दिया है कि सत्ताधारी गवर्नर्स को यदि अपनी चुनावी इज्ज़त बचानी है तो उन्हें सतीश गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थन में आ जाना चाहिए | इस बात को लेकर रमेश अग्रवाल तथा विनोद बंसल पर ज्यादा दबाव है | रमेश अग्रवाल पर इसलिए भी, क्योंकि सतीश गुप्ता के कई शुभचिंतक और समर्थक रमेश अग्रवाल के क्लब में हैं | विनोद बंसल के साथ हमदर्दी रखने वाले लोगों का कहना है कि विनोद बंसल जितना जल्दी यह समझ लेंगे कि मुकेश अरनेजा और असित मित्तल 'जैसी' राजनीति करके उन्हें सिर्फ बदनामी ही मिलेगी, उतना ही उनके लिए भी अच्छा है | मुकेश अरनेजा और असित मित्तल को भी इस बात का आभास है कि कुछेक लोग रमेश अग्रवाल व विनोद बंसल को सतीश गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थन के लिए राजी करने का प्रयास कर रहे हैं; इसीलिए उन्होंने सतीश गुप्ता को बदनाम करने की मुहिम छेड़ दी है | मजे की बात यह है कि यह लोग एक तरफ तो सतीश गुप्ता को बदनाम कर रहे हैं, और दूसरी तरफ सतीश गुप्ता को यह समझा कर 'बैठाने' की कोशिश भी कर रहे हैं कि उनकी उम्मीदवारी संजय खन्ना की उम्मीदवारी को फायदा पहुँचा रही है | सतीश गुप्ता लेकिन इनकी अपमानित करने तथा बदनाम करने की बातों और दोस्ती की आड़ में की गई इनकी धोखाधड़ी की हरकतों से इतने दुखी हो चुके हैं कि वह इन पर जरा भी भरोसा करने को तैयार नहीं हैं | सतीश गुप्ता को अपने काम पर, अपनी उम्मीदवारी के लिए जुटाये अपने समर्थन-आधार पर इतना भरोसा हो गया है कि वह अब और ज़ोर-शोर से न सिर्फ अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के अभियान में लग गए हैं, बल्कि यह व्यवस्था करने में भी जुट गए हैं कि सत्ताधारी गवर्नर्स चुनाव में किसी तरह की बेईमानी या हेराफेरी न कर सकें | सतीश गुप्ता ने अपने समर्थकों को चेता दिया है कि मुकेश अरनेजा और असित मित्तल चुनाव में किसी भी तरह की धांधली कर सकते हैं, इसलिए इनकी हर हरकत पर निगाह रखने की जरूरत है | यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि सतीश गुप्ता की शिकायत के बाद ही पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता और सुदर्शन अग्रवाल की 'अदालत' ने मुकेश अरनेजा को 'तड़ीपार' करने का आदेश सुनाया था |
सतीश गुप्ता ने बड़े नेताओं - पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के समर्थन के बिना - और सत्ताधारी गवर्नर्स के खुले व षडयंत्रपूर्ण विरोध के बावजूद जिस तरह अपनी उम्मीदवारी के लिए न सिर्फ अच्छा-खासा समर्थन जुटा लिया है, बल्कि अपनी उम्मीदवारी की हवा भी बना ली है, उससे उनके हौंसले काफी बुलंद हैं | उन्हें उम्मीद है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए डिस्ट्रिक्ट में जो चुनावी घमासान मचा हुआ है और जिस तरह से क्लब्स के अध्यक्षों को तथा अन्य रोटेरियंस को परेशान किया हुआ है उससे तंग होकर लोग उन्हें ही चुनना पसंद करेंगे | सतीश गुप्ता की उम्मीदवारी, उनकी सक्रियता, प्रभावपूर्ण नतीजे पाने की उनकी सामर्थ्य (जैसे मुकेश अरनेजा को 'तड़ीपार' करवा देना) ने रवि चौधरी की उम्मीदवारी के समर्थकों को बुरी तरह डरा दिया है | असित मित्तल का मानना और कहना है कि सतीश गुप्ता यह नहीं समझ रहे हैं कि उनके साथ जो लोग नज़र आ रहे हैं, वह वास्तव में संजय खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थक हैं, और उन्हें सिर्फ इस्तेमाल कर रहे हैं; तथा उनकी उम्मीदवारी संजय खन्ना की जीत को ही सुनिश्चित करने का काम करेगी | सतीश गुप्ता लेकिन असित मित्तल या रवि चौधरी के किसी और समर्थक की बात को सुनने/मानने को तैयार नहीं हैं |

Wednesday, February 1, 2012

पोलियो के नाम पर हुई मीटिंग में घटी मार-पिटाई की घटना पर पर्दा डाल कर असित मित्तल ने राजा साबू के नाम का भी इस्तेमाल किया

नई दिल्ली/गाजियाबाद | संजय खन्ना की उम्मीदवारी के शुभचिंतकों व समर्थकों द्धारा आयोजित की गई मीटिंग में लोगों को शामिल होने से रोकने के लिए सत्ताधारी गवर्नर्स गिरोह ने षड्यंत्र के तहत जिस मीटिंग का आयोजन किया, वह बुरी तरह फ्लॉप हुई | सत्ताधारी गवर्नर्स गिरोह द्धारा आयोजित इस मीटिंग को 'बुरी तरह फ्लॉप' इसलिए माना गया, क्योंकि इसके जरिये न तो वह 'राजनीति' की जा सकी, जिस राजनीति को करने के लिए वास्तव में इसका आयोजन किया गया था; और न उस उद्देश्य को ही प्राप्त किया जा सका - दिखावे के लिए जिसे औपचारिक तौर पर घोषित किया गया था | उल्लेखनीय है कि सत्ताधारी गवर्नर्स गिरोह ने तीस जनवरी की रात आठ बजे बुलाई गई मीटिंग का घोषित उद्देश्य कॉन्फ्रेंस में पोलियो कार्यक्रम को लेकर रोटेरियंस को प्रेरित करने का बताया था | सत्ताधारी गवर्नर्स गिरोह के एक सदस्य ने इन पंक्तियों के लेखक को बताया कि पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू ने फरवरी के अंत में दिल्ली में होने वाले पोलियो के कार्यक्रम को कामयाब बनाने के लिए ज़ोर दिया हुआ है और इसे लेकर वह कॉन्फ्रेंस में तैयारियों का जायेजा भी लेंगे | पोलियो का तो बहाना था, इस मीटिंग के पीछे सत्ताधारी गवर्नर्स का मूल उद्देश्य संजय खन्ना की उम्मीदवारी के शुभचिंतकों व समर्थकों द्धारा की जा रही मीटिंग को फेल करना था | इसीलिए इन्होंने जानबूझ मीटिंग का समय वही रखा जो कि संजय खन्ना के शुभचिंतकों व समर्थकों द्धारा तय की गई मीटिंग का था | इन्हें यदि सचमुच पोलियो पर बात करना थी तो कोई दूसरा समय तय करना चाहिए था, ताकि इनकी मीटिंग में ज्यादा से ज्यादा लोग शामिल हो सकते |
सत्ताधारी गवर्नर्स गिरोह के सदस्य - मुकेश अरनेजा, असित मित्तल, रमेश अग्रवाल और विनोद बंसल - पोलियो के बारे में यदि सचमुच गंभीर हैं, तो इन्हें पच्चीस जनवरी को हुई मीटिंग का संज्ञान लेना चाहिए, जो इन्होंने नहीं लिया और जिसके कारण डिस्ट्रिक्ट की और रोटरी की बदनामी हुई है | उल्लेखनीय है कि पच्चीस जनवरी को रवि चौधरी की उम्मीदवारी के शुभचिंतकों व समर्थकों ने रवि चौधरी की उम्मीदवारी के लिए समर्थन दिखाने और जुटाने के उद्देश्य से मीटिंग का आयोजन किया था | यह मीटिंग पोलियो के नाम पर की गई थी | मीटिंग के आयोजन की जिम्मेदारी संभालने वाले अशोक अग्रवाल डिस्ट्रिक्ट पोलियो प्लस कमेटी के चेयरमैन हैं | गौर करने की बात यह है कि संजय खन्ना की उम्मीदवारी के शुभचिंतकों व समर्थकों ने संजय खन्ना की उम्मीदवारी के लिए समर्थन दिखाने और जुटाने के उद्देश्य से जो मीटिंग की वह पर्यावरण तथा वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने के नाम पर की | गौर करने की बात यह है कि इन्होंने पर्यावरण तथा वृक्षारोपण के नाम पर यदि मीटिंग की तो पर्यावरण तथा वृक्षारोपण के प्रति लोगों को प्रोत्साहित भी किया और आगंतुकों को प्रेरित व उत्साहित करने के उद्देश्य से उनके बीच पौधे भी वितरित किए | लेकिन डिस्ट्रिक्ट पोलियो प्लस कमेटी के चेयरमैन अशोक अग्रवाल द्धारा पोलियो के नाम पर की गई मीटिंग में पोलियो के बारे में एक शब्द तक नहीं बोला गया | सिर्फ इतना ही नहीं, पोलियो के नाम पर आयोजित हुई मीटिंग में लोगों के बीच लात-घूसों से मार-पिटाई और हो गई | इससे भी जायदा शर्मनाक बात यह हुई कि इस मार-पिटाई के लिए शराबबाजी और लड़कीबाजी को जिम्मेदार ठहराया गया | सत्ताधारी गवर्नर्स ने शराबबाजी और लड़कीबाजी के आरोप से इंकार करने में तो देर नहीं लगाई, लेकिन मामले की जांच कराने की मांग को एकदम से खारिज कर दिया | लोगों का कहना यही रहा कि सत्ताधारी गवर्नर्स जब मौके पर मौजूद ही नहीं थे, तो उन्हें क्या पता और कैसे पता कि पोलियो के नाम पर हुई मीटिंग में मार-पिटाई की घटना का कारण क्या था ?
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर असित मित्तल ने पोलियो के काम के नाम पर हुई शराबबाजी और लड़कीबाजी तथा उस कारण हुई मार-पिटाई की घटना पर पर्दा डालने की जो कोशिश की, उससे पोलियो के प्रति उनकी जिम्मेदारी को सहज ही समझा जा सकता है | असित मित्तल ने इस कार्यक्रम के 'आयोजक' अशोक अग्रवाल के खिलाफ भी कोई कार्यवाई नहीं की | लोगों के बीच इसके 'कारण' की चर्चा भी खूब है | लोगों के बीच चर्चा है कि असित मित्तल ने अशोक अग्रवाल से तरह-तरह से मोटी रकम बसूली हुई है, जिसे वह वापस नहीं कर रहे हैं | इसी कारण से उनकी अशोक अग्रवाल के खिलाफ कार्यवाई करने की हिम्मत नहीं हो रही है | सत्ताधारी गवर्नर्स गिरोह के 'सरदार' मुकेश अरनेजा का भी असित मित्तल पर अशोक अग्रवाल के खिलाफ कार्यवाई न करने के लिए दबाव है | मुकेश अरनेजा का भी पैसा असित मित्तल के पास दबा हुआ है, जो मुकेश अरनेजा को वापस नहीं मिल रहा है | अशोक अग्रवाल और मुकेश अरनेजा लोगों के बीच ताल ठोक कर कहते भी हैं कि असित मित्तल पहले उनका पैसा वापस करें, तब उनके खिलाफ कार्यवाई करने के बारे में सोचें | उनके यह कहने में दम भी दिखा है | पच्चीस जनवरी को पोलियो के नाम पर तमाशा करवा देने वाले अशोक अग्रवाल तीस जनवरी की मीटिंग में मंच पर गवर्नर्स के साथ बैठे थे | लोगों ने माना कि अशोक अग्रवाल का जलवा है |
तीस जनवरी को सत्ताधारी गवर्नर्स गिरोह द्धारा बुलाई गई मीटिंग में अशोक अग्रवाल का जलवा और असित मित्तल की बेचारगी तो साबित हुई, लेकिन पोलियो के काम की ऐसी-तैसी हुई | आनन-फानन में बुलाई गई इस मीटिंग को लेकर दरअसल पहले ही सत्ताधारी गवर्नर्स की इतनी थू-थू हो चुकी थी कि इसे लेकर उनका उत्साह भी खत्म हो चुका था और इसके आयोजन को लेकर वह बचाव की मुद्रा में भी आ चुके थे | सत्ताधारी गवर्नर्स गिरोह के 'सरदार' मुकेश अरनेजा ने तो मीटिंग में न आने में ही अपनी ख़ैर समझी | लोगों की नाराज़गी को देखते हुए गिरोह के दूसरे सदस्य भी लोगों को यह सफाई देते नज़र आए कि इस मीटिंग में वह कोई राजनीति नहीं करेंगे | हालांकि किसी के लिए भी यह जबाव देते नहीं बना कि जब तुम्हें राजनीति नहीं करनी है तो फिर इस मीटिंग को ऐसे समय करने की क्या जरूरत थी जिस समय अधिकतर लोग एक दूसरी मीटिंग में व्यस्त हैं ? मुश्किल से बीस कदमों की दूरी पर आयोजित हुईं दो मीटिंग्स में लोगों की उपस्थिति के आधार पर जिन लोगों ने तुलना की उन्होंने पाया कि संजय खन्ना की उम्मीदवारी के शुभचिंतकों व समर्थकों द्धारा आयोजित मीटिंग में कहीं ज्यादा लोगों की उपस्थिति थी | अधिकतर लोग ऐसे रहे जो सिर्फ संजय खन्ना की उम्मीदवारी के शुभचिंतकों व समर्थकों द्धारा आयोजित मीटिंग में उपस्थित हुए, जबकि कुछेक लोग सत्ताधारी गवर्नर्स गिरोह द्धारा आयोजित मीटिंग में मुँह-दिखाई करके संजय खन्ना की उम्मीदवारी के शुभचिंतकों व समर्थकों द्धारा आयोजित मीटिंग में पहुंचे | सत्ताधारी गवर्नर्स गिरोह द्धारा अड़ंगा डालने की तमाम कोशिशों के बावजूद संजय खन्ना की उम्मीदवारी के शुभचिंतकों व समर्थकों द्धारा आयोजित मीटिंग में लोगों की अच्छी-ख़ासी उपस्थिति ने यही साबित किया है कि सत्ताधारी गवर्नर्स गिरोह ने पोलियो के काम का, रोटरी का और डिस्ट्रिक्ट का जो मज़ाक बनाया हुआ है उसे अधिकतर लोग पसंद नहीं कर रहे हैं | राजा साबू का नाम लेकर तीस जनवरी की मीटिंग करने वाले सत्ताधारी गवर्नर्स गिरोह ने जिस तरह पच्चीस जनवरी की घटना पर पर्दा डालने की कोशिश की है, उससे यही पता चलता है कि इन्हें रोटरी की और डिस्ट्रिक्ट की पहचान की परवाह तो नहीं ही है, राजा साबू के नाम की भी फिक्र नहीं है |

Sunday, January 29, 2012

संजय खन्ना को मिल रहे व्यापक समर्थन को देख कर रवि चौधरी के समर्थक गवर्नर डर गए हैं क्या

नई दिल्ली/गाजियाबाद | संजय खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थकों द्धारा की जा रही मीटिंग में लोगों को शामिल होने से रोकने के लिए सत्ताधारी गवर्नर्स ने जो षड्यंत्र रचा है, उससे उन्होंने अपनी कमजोरी की पोल खुद ही खोल ली है | उल्लेखनीय है की तीस जनवरी को जिस समय संजय खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थकों ने अपनी एकजुटता को दिखाने के लिए मीटिंग का आयोजन किया है, ठीक उसी समय मुकेश अरनेजा, असित मित्तल, रमेश अग्रवाल, विनोद बंसल गिरोह ने डिस्ट्रिक्ट कान्फ्रेंस की तैयारी को लेकर एक फर्जी किस्म की मीटिंग का आयोजन कर लिया है | इस तरह की मीटिंग की रोटरी की 'व्यवस्था' में न तो कोई जरूरत है और न इस तरह की कोई मीटिंग इससे पहले डिस्ट्रिक्ट में कभी हुई है | डिस्ट्रिक्ट कान्फ्रेंस की तैयारी को लेकर रोटरी 'व्यवस्था' में कर्टन रेजर नाम से एक कार्यक्रम शिड्यूल में होता है - जो पहले ही हो चुका है | सत्ताधारी गवर्नर्स गिरोह ने तीस जनवरी को जो फर्जी किस्म की मीटिंग बुलाई है उसके बारे में आनन-फानन में तब फ़ैसला लिया गया, जब इस गिरोह के सभी गवर्नर्स ने पाया/देखा कि उनकी हर तिकड़म के बावजूद संजय खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थकों की मीटिंग को गाजियाबाद के और उत्तरप्रदेश के दूसरे शहरों/कस्बों के क्लब्स का ही नहीं, बल्कि आसपास के दिल्ली के क्लब्स का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है | मुकेश अरनेजा ने, असित मित्तल ने, रमेश अग्रवाल ने और विनोद बंसल ने अपने-अपने तरीके से क्लब्स के अध्यक्षों व अन्य प्रमुख रोटेरियंस को संजय खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थकों द्धारा की जा रही मीटिंग्स से दूर रहने/रखने की कोशिश की - लेकिन संजय खन्ना के समर्थकों ने उन्हें टका सा जवाब दे दिया |
रवि चौधरी की उम्मीदवारी का खुल कर समर्थन कर रहे मुकेश अरनेजा, असित मित्तल, रमेश अग्रवाल तथा विनोद बंसल को पहले तो यह देख/जान कर तगड़ा झटका लगा की रवि चौधरी की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से आयोजित हुई मीटिंग उपस्थितों के बीच मार-पिटाई हो जाने के कारण बदनामी और गांभीर आरोपों में फंस गई | उल्लेखनीय है कि कुछेक लोगों ने रवि चौधरी की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने हेतु पच्चीस जनवरी को आयोजित हुई मीटिंग में मार-पिटाई की घटना को शराबबाजी और लड़कीबाजी के कारण हुआ झगड़ा बताया | मीटिंग के आयोजकों के रूप में जेके गौड़ और अशोक अग्रवाल ने हालांकि इससे इंकार किया | उनके इंकार पर लेकिन किसी ने भरोसा नहीं किया | भरोसा न करने का कारण यह रहा कि कुछ ही दिन पहले जेके गौड़ और अशोक अग्रवाल ने अपने क्लब की मीटिंग में भी लड़कियों के अश्लील व भौडे किस्म के डांस करवाए थे | कई एक लोगों का आरोप है कि जेके गौड़ और अशोक अग्रवाल जो भी कार्यक्रम करवाते हैं, उसमें लड़कियों के अश्लील व भौडे डांस जरूर ही करवाते हैं | जेके गौड़ और अशोक अग्रवाल के इंकार के बावजूद जब मार-पिटाई की घटना के कारण उक्त मीटिंग की बदनामी होना नहीं रुकी तो बचाव में मुकेश अरनेजा, असित मित्तल, रमेश अग्रवाल और विनोद बंसल ने भी शराबबाजी और लड्कीबाजी की बात से इंकार करना शुरू किया | लोगों ने इस पर घटना की जांच करने की मांग की | जांच कराने की मांग सुन कर इन सब की हवा सरक गई |
इस प्रकरण में विनोद बंसल के रवैये से लोगों को ज्यादा निराशा हुई है | अधिकतर लोगों का मानना रहा है और उनका विश्वास रहा है, उन्हें उम्मीद रही है कि विनोद बंसल डिस्ट्रिक्ट में मुकेश अरनेजा, असित मित्तल और रमेश अग्रवाल जैसी टुच्ची व ओछी हरकतें न करेंगे और न उनका बचाव करेंगे | लेकिन रवि चौधरी की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के लिए हुई मीटिंग में घटी मार-पिटाई की घटना की जांच की मांग को उन्होंने भी जिस तरह से खारिज किया उससे उनसे बेहतरी की उम्मीद रखने वालों को गहरी निराशा हुई है | जांच की मांग को सत्ताधारी गवर्नर्स ने जिस एकतरफ़ा तरीके से खारिज किया, उससे लोगों के बीच आरोपों को सच माना गया | जाहिर तौर पर यह रवि चौधरी की उम्मीदवारी के लिए और उनकी उम्मीदवारी के समर्थकों के लिए बड़ा झटका बना | इस झटके से सँभलने का वह कोई उपाय सोचते, इससे पहले ही रवि चौधरी की उम्मीदवारी का समर्थन कर रहे गवर्नर्स यह देख/जान का भौंचक रह गए कि संजय खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थकों का काफिला बढ़ता ही जा रहा है और संजय खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थकों द्धारा आयोजित की जा रही मीटिंग को जोरदार समर्थन मिल रहा है | संजय खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थकों द्धारा की जा रही मीटिंग को फेल करने के लिए मुकेश अरनेजा, असित मित्तल, रमेश अग्रवाल और विनोद बंसल ने पहले तो तरह-तरह के लालच देकर मीटिंग के आयोजकों को तोड़ने की कोशिश की | इसमें कामयाब नहीं हुए तो उन्होंने कोशिश की कि इस मीटिंग में ज्यादा लोग न जाएँ | लेकिन जल्दी ही उन्हें पता चल गया कि इस मीटिंग में जाने के लिए वह लोग भी तैयार हैं, जिनके समर्थन को लेकर वह बहुत आश्वस्त हैं | इसके बाद ही मुकेश अरनेजा, असित मित्तल, रमेश अग्रवाल और विनोद बंसल गिरोह को डिस्ट्रिक्ट कान्फ्रेंस की तैयारी के नाम पर फर्जी किस्म की मीटिंग करने का उपाय सूझा |
मुकेश अरनेजा, असित मित्तल, रमेश अग्रवाल और विनोद बंसल को लगता है कि यह मीटिंग करके वह लोगों को संजय खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थकों द्धारा की जा रही मीटिंग में जाने से रोक लेंगे | किन्तु रवि चौधरी के ही कुछेक अन्य समर्थकों का मानना और कहना है कि यह मीटिंग करके इन्होंने अपनी कमजोरी को ही साबित और घोषित कर दिया है | डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए हो रहे चुनाव पर नज़र रख रहे अनुभवी लोगों का मानना और कहना है कि सत्ताधारी गवर्नर्स द्धारा रवि चौधरी की उम्मीदवारी के समर्थन में खुल कर काम करने और हर तरह का 'हथकंडा' आजमाने के बावजूद संजय खन्ना को मिल रहे समर्थन को जब नहीं रोका जा सका है, तो इस एक मीटिंग से ही क्या किया जा सकेगा ? रवि चौधरी की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से गाजियाबाद में दो-दो बार बड़ी मीटिंग हो चुकी हैं; इसके बाद भी संजय खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थकों द्धारा आयोजित की जा रही मीटिंग में रवि चौधरी की उम्मीदवारी के समर्थक खतरा देख रहे हैं - तो यह उनके द्धारा अपनी कमजोरी को स्वीकार करना ही है | संजय खन्ना की उम्मीदवारी को मिल रहा व्यापक समर्थन देख कर मुकेश अरनेजा, असित मित्तल, रमेश अग्रवाल और विनोद बंसल लगता है कि वास्तव में बुरी तरह डर गए हैं और इसीलिए उन्होंने तीस जनवरी को ठीक उसी समय एक फर्जी किस्म की मीटिंग बुला ली है, जबकि संजय खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थकों ने भी मीटिंग का आयोजन किया है | रवि चौधरी की उम्मीदवारी के समर्थक रहे लोग ही यह कह रहे हैं कि इस तरह की हरकतों से संजय खन्ना की उम्मीदवारी को मिल रहे समर्थन में और इजाफा ही होगा, क्योंकि सत्ताधारी गवर्नर्स की इस तरह की बचकानी हरकतों से संजय खन्ना के प्रति लोगों में हमदर्दी ही पैदा होगी |

Monday, January 23, 2012

श्रीकांत जोशी के खिलाफ अशोक अग्रवाल की अभद्र व अशालीन बातों को सुनकर लोगों ने उनके जेके गौड़ की उम्मीदवारी के खिलाफ होने का अनुमान लगाया है

गाजियाबाद | जेके गौड़ ने श्रीकांत जोशी के बारे में अशोक अग्रवाल द्धारा की गई अभद्र व अशालीन किस्म की बातों को अशोक अग्रवाल के ज्यादा पी कर बहक जाने का नतीजा बताया है | जेके गौड़ ने लोगों को सफाई दी है कि राजीव वशिष्ठ के बेटे की शादी के समारोह में अशोक अग्रवाल ने श्रीकांत जोशी के बारे में जो कुछ भी कहा है वह उन पर चढ़े नशे का असर भर था और उसके कोई अन्य अर्थ नहीं निकाले जाने चाहिए | जेके गौड़ को यह सफाई देने की जरूरत दरअसल इसलिए पड़ी क्योंकि उक्त समारोह में जिन्होंने अशोक अग्रवाल को श्रीकांत जोशी के खिलाफ अभद्र व अशालीन किस्म की बातें करते हुए सुना उन्होंने अशोक अग्रवाल के रवैये को जेके गौड़ की अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए प्रस्तुत होने वाली उम्मीदवारी की जड़ में मट्ठा डालने की कोशिश के रूप में ही देखा और बताया | अशोक अग्रवाल यूं तो जेके गौड़ के बहुत नजदीक और बहुत खास दिखते हैं लेकिन कई लोगों को लगता है कि जेके गौड़ का डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करना अशोक अग्रवाल को पसंद नहीं आ रहा है और वह नहीं चाहते हैं कि जेके गौड़ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुने जायें | इसीलिए वह ऐसा कुछ करने के चक्कर में रहते हैं और मौका मिले तो करते हैं जिससे कि जेके गौड़ की उम्मीदवारी को नुकसान पहुंचे | श्रीकांत जोशी के बारे में अशोक अग्रवाल ने जो बकवासपूर्ण बातें कीं, उनके पीछे भी अशोक अग्रवाल के इसी उद्देश्य को देखा/ पहचाना गया |
उल्लेखनीय है कि श्रीकांत जोशी अगले रोटरी वर्ष में अपने क्लब के अध्यक्ष हैं, और इस नाते से अगले वर्ष होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी |अशोक अग्रवाल यह बात न समझते हों, इस पर कोई भी विश्वास नहीं करेगा | जेके गौड़ और या उनका कोई भी नजदीकी या समर्थक या शुभचिंतक ऐसा कोई काम नहीं करेगा या करना चाहेगा जिससे कोई भी क्लब अध्यक्ष जेके गौड़ के खिलाफ अभी से हो जाये | अब अगर अशोक अग्रवाल सचमुच में जेके गौड़ की उम्मीदवारी के समर्थक हैं तो श्रीकांत जोशी के खिलाफ अभद्र तथा अशालीन तरीके से बात करने का क्या कारण हो सकता है - और वह भी तब जबकि उनके लिए यह करना किसी भी कारण से जरूरी नहीं था | इसी कारण से जिन लोगों ने अशोक अग्रवाल को श्रीकांत जोशी के खिलाफ अभद्र व अशालीन तरीके से बात करते हुए सुना, उन्होंने यही माना और समझा कि अशोक अग्रवाल ने जेके गौड़ की उम्मीदवारी में मट्ठा डालने का काम शुरू कर दिया है | अशोक अग्रवाल ने जिन लोगों के सामने श्रीकांत जोशी के खिलाफ अभद्र व अशालीन बातें कीं उन लोगों का कहना है कि जेके गौड़ ने अशोक अग्रवाल को चुप करने की बहुत कोशिश की और यह तर्क भी दिया कि श्रीकांत जोशी से तुम्हारा क्या झगड़ा है और इस तरह की बातों से क्यों मेरी उम्मीदवारी के लिए समस्या पैदा कर रहे हो | जेके गौड़ की कोशिश का और उनके तर्कों का लेकिन अशोक अग्रवाल पर कोई असर नहीं हुआ; बल्कि उन्होंने और जोर-शोर से श्रीकांत जोशी के खिलाफ अपनी बातें जारी रखीं |
जेके गौड़ के लिए अशोक अग्रवाल को चुप करना मुश्किल हुआ, लेकिन इससे भी बड़ी समस्या का सामना उन्हें यह देख /जान कर करना पड़ा कि अशोक अग्रवाल की श्रीकांत जोशी के खिलाफ कही गई बातों को इस बात के संकेत और सुबूत के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है कि अशोक अग्रवाल डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए प्रस्तुत की जाने वाली उनकी उम्मीदवारी के खिलाफ हैं | आखिर तब जेके गौड़ को लोगों को अशोक अग्रवाल के बारे में सच बात बतानी ही पड़ी | जेके गौड़ ने लोगों को आश्वस्त किया की अशोक अग्रवाल उनकी उम्मीदवारी के साथ पूरी तरह से हैं और हर तरह से उनकी उम्मीदवारी का समर्थन कर रहे हैं | जेके गौड़ ने लोगों को बताया है कि श्रीकांत जोशी के बारे में अशोक अग्रवाल ने जो कुछ कहा है, वह नशे में होने के कारण कहा है तथा उनके कहे हुए के कोई अन्य अर्थ नहीं लगाए या निकाले जाने चाहिए | जेके गौड़ ने लोगों को बताया है कि अशोक अग्रवाल ने उन्हें आश्वस्त किया है कि जब तक वह उम्मीदवार हैं तब तक अशोक अग्रवाल ज्यादा नहीं पिया करेंगे, ताकि वह किसी के बारे में ऐसा कुछ न कह बैठें जिससे कि जेके गौड़ की उम्मीदवारी के लिए मुसीबत पैदा हो |

Saturday, January 21, 2012

रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3100 में संजीव रस्तोगी और वीके भटनागर ने जो किया, उसके पीछे सुधीर खन्ना का हाथ होने की बातों ने मामले को गंभीर बनाया

मुरादाबाद | डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नीरज कुमार अग्रवाल इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए होने वाले चुनाव में अकेले रह गए उम्मीदवार संजीव रस्तोगी और उनके नज़दीकियों के सीधे निशाने पर आ गए हैं | संजीव रस्तोगी और उनके समर्थकों व शुभचिंतकों का स्पष्ट आरोप है कि उनके और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के दूसरे उम्मीदवार वीके भटनागर के बीच दोस्ताना समझौता हो जाने को नीरज कुमार अग्रवाल ने पसंद नहीं किया है और इस समझौते को अपने गवर्नर-काल की डिस्ट्रिक्ट कांफ्रेंस को नुकसान पहुँचाने की कोशिश के रूप में देखा/पहचाना है, इसलिए वह संजीव रस्तोगी को सबक सिखाना चाहते हैं और कोशिश करना चाहते हैं कि संजीव रस्तोगी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर न चुने जाएँ | नीरज कुमार अग्रवाल इन आरोपों से साफ इंकार करते हैं | उनका कहना है कि संजीव रस्तोगी की उम्मीदवारी यदि खतरे में पड़ी दिख रही है, तो इसके लिए वह खुद ही जिम्मेदार हैं | नीरज कुमार अग्रवाल का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार के रूप में संजीव रस्तोगी ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों को और क्लब्स के पदाधिकारियों को जिस तरह अपमानित और लांछित किया है और उससे रोटेरियंस के बीच जो नाराजगी है और जिस नाराजगी के कारण संजीव रस्तोगी को 'मिलता' हुआ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद 'छिनता' हुआ दिख रहा है - वह सब संजीव रस्तोगी के खुद के किए-धरे का नतीजा है | नीरज कुमार अग्रवाल का साफ कहना है कि अपने किए-धरे का जो नतीजा संजीव रस्तोगी के सामने आ रहा है, उससे बौखला कर संजीव रस्तोगी उन्हें नाहक ही निशाना बना रहे हैं |
उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में अचानक से उस समय गर्मी आ गई, जब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के दोनों उम्मीदवारों - संजीव रस्तोगी और वीके भटनागर ने एक संयुक्त पत्र के जरिये लोगों को बताया कि चूंकि उन्होंने पाया है कि डिस्ट्रिक्ट में गवर्नर पद का चुनाव लूट-खसोट का जरिया बन गया है; क्लब के पदाधिकारी और डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ रोटेरियंस तरह-तरह से उम्मीदवारों से पैसा बसूलने का प्रयास करते हैं और क्लब के वोट खुलेआम बिकते हैं इसलिए वह आपस में मिलबैठ कर यह फैसला करेंगे कि उनमें से कोई एक ही उम्मीदवार होगा और इस तरह वह चुनाव की नौबत को टालेंगे ताकि चुनाव के नाम पर धंधा करने वाले लोगों को अपनी जेबें भरने का मौका ही न मिले | इंटरनेशनल प्रेसीडेंट कल्याण बनर्जी को लिखे इस पत्र को डिस्ट्रिक्ट के लोगों को भेजने के साथ-साथ रोटरी इंटरनेशनल के वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी भेजा गया | इस पत्र के सामने आने के कुछ दिन बाद ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के एक उम्मीदवार वीके भटनागर ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली और संजीव रस्तोगी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए अकेले उम्मीदवार रह गए | लेकिन इससे पहले डिस्ट्रिक्ट में बबाल मच गया था |
डिस्ट्रिक्ट में वरिष्ठ रोटेरियंस से लेकर क्लब्स के पदाधिकारियों तक ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नीरज कुमार अग्रवाल से संजीव रस्तोगी और वीके भटनागर द्धारा लिखे और भेजे गए पत्र में कहीं गई बातों का संज्ञान लेने की मांग की | इस मांग के आधार पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ने दोनों उम्मीदवारों को पत्र लिख कर उनसे पूछा कि उनसे किन-किन लोगों ने पैसा बसूलने का प्रयास किया और किन-किन लोगों ने उन्हें अपना-अपना वोट बेचने का प्रस्ताव दिया | अपने पत्र में वोट के बदले पैसा बसूले जाने का खुला आरोप लगाने वाले संजीव रस्तोगी और वीके भटनागर ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के इस पत्र का कोई जबाव नहीं दिया | डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नीरज कुमार अग्रवाल ने दोनों उम्मीदवारों से इस बात का भी जबाव मांगा था कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार के रूप में उक्त पत्र लिख कर उन्होंने चुनावी आचार संहिता का तथा डिस्ट्रिक्ट के नियमों का जो उल्लंघन किया है, उसके कारण उनका नामांकन रद्द क्यों न कर दिया जाए | दोनों उम्मीदवारों ने इसके जबाव में सिर्फ यह कहा कि उन्होंने चुनावी आचार संहिता का तथा किसी नियम का कोई उल्लंघन नहीं किया है |
संजीव रस्तोगी ने (और वीके भटनागर ने भी, हालाँकि उम्मीदवारी वापस ले लेने के बाद उनका कोई ज्यादा मतलब नहीं रह गया है) एक मामले में चुप्पी साध कर और एक मामले में यह जबाव देकर कि उन्होंने चुनावी आचार संहिता का तथा किसी नियम का कोई उल्लंघन नहीं किया है, अपने आप को बचाने की कोशिश तो की है लेकिन वह भी जान/समझ रहे हैं कि गुनाह तो उन्होंने किया ही है | चुनावी आचार संहिता का तथा डिस्ट्रिक्ट के नियमों का तो उन्होंने स्पष्ट उल्लंघन किया ही है, डिस्ट्रिक्ट के छोटे-बड़े सभी रोटेरियंस को भी उन्होंने 'तगड़ी' गाली दी है और सभी को वोट के बदले पैसा बसूलने वाला घोषित कर दिया है | संजीव रस्तोगी के इस आरोप पर रोटेरियंस बिफरे पड़े हैं और बाकायदा प्रस्ताव पास करके या डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को पत्र लिख कर अपना रोष और विरोध प्रकट कर रहे हैं | डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नीरज कुमार अग्रवाल का दावा है कि डिस्ट्रिक्ट के नब्बे प्रतिशत से भी अधिक क्लब्स ने संजीव रस्तोगी और वीके भटनागर के खिलाफ कार्यवाई करने और उनकी रोटरी सदस्यता समाप्त करने तक की मांग की है | यह मांग करने वालों का तर्क है कि इन दोनों ने डिस्ट्रिक्ट को, डिस्ट्रिक्ट के लोगों को और रोटरी को बदनाम किया है | यह मांग करने वालों का कहना है कि संजीव रस्तोगी और वीके भटनागर को जब यह लगता है कि उनके साथ के रोटेरियंस के लिए रोटरी एक धंधा है और वह किसी भी तरह से पैसा बसूलने की तिकड़म में रहते हैं तो उन्हें ऐसे रोटेरियंस के साथ रहने, ऐसे रोटेरियंस वाले डिस्ट्रिक्ट का गवर्नर बनने की जरूरत क्या है और क्यों है ?
संजीव रस्तोगी ने अपने आप को चारों तरफ से घिरा देख/पा कर ही नीरज कुमार अग्रवाल को सीधा निशाना बना लिया है | दरअसल नीरज कुमार अग्रवाल को सीधा निशाना बनाने की प्रेरणा यह देख/जान कर मिली कि कुछेक लोगों का मानना/कहना रहा कि संजीव रस्तोगी ने जो किया है वह गलत तो है लेकिन यह कोई इतनी बड़ी गलती नहीं है कि उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने से रोका जाए | कुछेक लोगों के यह मानने/कहने से संजीव रस्तोगी को बल मिला और उन्होंने समझ लिया है कि यदि वह नीरज कुमार अग्रवाल को निशाना बनाते हैं, तो एक तो उन्हें लोगों की सहानुभूति मिल जाएगी और दूसरे उन्हें नीरज कुमार अग्रवाल से खार खाने वालों का समर्थन मिल जाएगा | 'आक्रमण बचाव का अच्छा तरीका है' वाले लोकप्रिय फार्मूले को अपनाते हुए, संजीव रस्तोगी ने अपने आप को बचाने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नीरज कुमार अग्रवाल को सीधे निशाने पर लेने की जो कोशिश की, उसने लेकिन मामले को और पेचीदा बना दिया है |
संजीव रस्तोगी (और वीके भटनागर) का 'अपराध' दरअसल उतना सीधा है नहीं, जितना सीधा वह नज़र आ रहा है | किसी के लिए भी इस बात को समझ पाना मुश्किल बना हुआ है कि जो 'बात' इन्होंने की है चूंकि उससे यह बहुत अच्छे से परिचित रहे हैं - संजीव रस्तोगी पर तो पिछले रोटरी वर्ष में राकेश सिंघल की तरफ से लोगों को पैसे बाँटने का आरोप तक लगा था; इस वर्ष अपनी-अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करते हुए भी संजीव रस्तोगी और वीके भटनागर दावा कर रहे थे कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि चुनाव जीतने के लिए क्या-क्या हथकंडे अपनाने पड़ते हैं और वह कुछ भी करने से पीछे नहीं हटेंगे - तब फिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि यह दोनों साधुओं की सी भाषा बोलने लगे | हर कोई यह मानता और कहता है कि संजीव रस्तोगी और वीके भटनागर को यदि कुछ गलत नहीं भी करना था और लोगों के हाथों अपना शोषण नहीं भी कराना था तो चुपचाप से वह यह कर सकते थे जो उन्होंने किया | जो शोर उन्होंने अब किया, उस शोर को उन्हें तब करना चाहिए था जब लूट-खसोट की घटनाएँ हो रही थीं या जब उन्हें उनके बारे में पता चला था | चुनाव जीतने के लिए हर हथकंडा अपनाने की बात करते-करते अचानक से उन्होंने जो यू-टर्न लिया, उसमें कई लोगों को 'दूसरी' राजनीति की गंध आती है | लोगों को लगता है कि 'कुछ लोगों' ने नीरज कुमार अग्रवाल के गवर्नर-काल की डिस्ट्रिक्ट कांफ्रेंस को खराब और बदनाम करने के उद्देश्य से संजीव रस्तोगी और वीके भटनागर को इस्तेमाल किया है तथा उनसे उक्त पत्र लिखवाया | ऐसा मानने वालों में अधिकतर का इशारा सुधीर खन्ना की तरफ है | नीरज कुमार अग्रवाल और सुधीर खन्ना के बीच 'शीतयुद्ध' की खबरें चूँकि आम हैं, इसलिए सुधीर खन्ना का हाथ होने की बातों पर लोगों का सहज विश्वास भी हो गया है | संजीव रस्तोगी के प्रति सहानुभूति का रवैया अपनाने/दिखाने वालों में चूँकि अधिकतर लोग सुधीर खन्ना के नजदीकी हैं, इसलिए भी इस प्रकरण में सुधीर खन्ना का हाथ होने की बात को बल मिला | सुधीर खन्ना और उनके नज़दीकियों ने इस प्रकरण में किसी भी तरह की भूमिका से लेकिन साफ इंकार किया है | उनका यही कहना है कि इससे उन्हें क्या हासिल होने वाला है ?
सच क्या है, यह तो करने वाले जानें - लेकिन एक बात पर अधिकतर लोग सहमत हैं कि संजीव रस्तोगी और वीके भटनागर ने जो किया है उससे डिस्ट्रिक्ट की बदनामी तो हुई ही है, डिस्ट्रिक्ट के लोगों और पदाधिकारियों के लिए भी लज्जा और अपमान की स्थिति बनी है | लोगों का मानना और कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार अपनी कमजोरियों को छिपाने तथा लोगों का समर्थन पाने के लिए खुद ही तो पैसे खर्च करते हैं, और फिर लोगों को बदनाम करते हैं | पिछले वर्षों में कुछेक ऐसे लोग भी उम्मीदवार बने जिनमें काबिलियत तो दो पैसे की नहीं थी, लेकिन अपने पैसे के बल पर वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बन बैठे | यह देख/जान कर ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में पैसे का बोलबाला हो गया | लोगों को संजीव रस्तोगी के रवैये पर इसीलिए गुस्सा है कि पिछले वर्ष संजीव रस्तोगी ने खुद ही तो राकेश सिंघल के लिए वोट जुटाने की खातिर पैसे का इस्तेमाल किया और अब वह रोटेरियंस को बदनाम और लांछित कर रहे हैं | कुछ संजीव रस्तोगी के प्रति इस गुस्से के कारण और कुछ लोगों के इस विश्वास के कारण कि इस झमेले के पीछे सुधीर खन्ना का हाथ है जिन्होंने नीरज कुमार अग्रवाल की डिस्ट्रिक्ट कांफ्रेंस को खराब करने के उद्देश्य से यह षड्यंत्र रचा - यह मामला गंभीर हो उठा है और विश्वास किया जा रहा है कि नीरज कुमार अग्रवाल को नीचा दिखाने की यह जो कोशिश हुई है उसे नीरज कुमार अग्रवाल आसानी से पूरा नहीं होने देंगे | नीरज कुमार अग्रवाल को इस मामले में चूंकि क्लब्स के पदाधिकारियों तथा डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ रोटेरियंस का भी समर्थन मिल रहा है - इसलिए समझा जा रहा है कि संजीव रस्तोगी और वीके भटनागर को अपने किए-धरे का भुगतान तो करना ही होगा |

Wednesday, January 18, 2012

मुकेश अरनेजा को 'तड़ीपार' किया गया, ताकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में गंदगी न फैले

मुकेश अरनेजा को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव से संबंधित किसी भी कमेटी में न रखने तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की चुनावी प्रक्रिया से पूरी तरह दूर रखने का फैसला किया गया है | पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर्स सुदर्शन अग्रवाल और सुशील गुप्ता ने इस वर्ष हो रहे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में मुकेश अरनेजा की भूमिका को लेकर मिली गंभीर शिकायतों पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर असित मित्तल और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी विनोद बंसल के साथ विचार-विमर्श के बाद यह फैसला किया | मुकेश अरनेजा पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हैं, सीओएल के सदस्य हैं और अगले रोटरी वर्ष के लिए डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर हैं - लेकिन रोटेरियंस के बीच वह इन वजहों से नहीं बल्कि रोटेरियंस के साथ और उनके प्रति की जाने वाली अपनी बदतमीजियों, अपनी बदजुबानी, अपनी अवसरवादिता और पक्षपातपूर्ण गुंडागर्दी के लिए जाने/पहचाने जाते हैं | वह खुद भी अपने को 'डिस्ट्रिक्ट का गुंडा' कहते हैं और चाहते हैं कि रोटेरियंस उन्हें इसी रूप में जाने/पहचाने | नगरनिगमों के, विधानसभाओं के, लोकसभाओं के चुनाव के दौरान - पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार - सामाजिक अपराध और गुंडागर्दी कम हो जाती है | पुलिस अधिकारियों का अनुभव और अध्ययन है कि चुनाव के दौरान गुंडे राजनीतिक कार्यकर्त्ता बन जाते हैं और इसलिए सामाजिक अपराध कम हो जाते हैं - राजनीतिक अपराध बढ़ जाते हैं, लेकिन वह पुलिस का सरदर्द नहीं होते; वह चुनाव की देखरेख की जिम्मेदारी निभा रहे लोगों का सरदर्द होते हैं | इसी तर्ज़ पर रोटरी में जब भी चुनाव होते हैं, मुकेश अरनेजा की 'गुंडागर्दी' बढ़ जाती है |
इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के जो चुनाव हो रहे हैं उसमें भी उनकी 'गुंडागर्दी' की ख़बरें सुनने को मिल रही हैं | डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के एक उम्मीदवार सतीश गुप्ता ने मुकेश अरनेजा की हरकतों की शिकायत सुदर्शन अग्रवाल और सुशील गुप्ता से की | यह दोनों पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर्स चुनावी तैयारियों का जायेजा लेने के लिए हुई एक मीटिंग में पञ्च की भूमिका में थे | मजे की बात यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर असित मित्तल को इस बात का अंदाज़ा था कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव के संदर्भ में उनकी और मुकेश अरनेजा की भूमिका की शिकायत होगी, इसलिए वह इस मीटिंग को लगातार टालते आ रहे थे और इस कोशिश में थे कि यह मीटिंग न हो | लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के एक उम्मीदवार संजय खन्ना ने बार-बार इस मीटिंग को करने की मांग करके असित मित्तल को मजबूर किया कि वह इस मीटिंग को करें | इस मीटिंग में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के सभी उम्मीदवारों को आमंत्रित किया गया था और तीनों पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर्स को पञ्च की भूमिका निभानी थी | ओ पी वैश्य बाहर होने के कारण इस मीटिंग में शामिल नहीं हो सके | पञ्च की भूमिका निभा रहे सुदर्शन अग्रवाल और सुशील गुप्ता के सामने सबसे गंभीर शिकायत सतीश गुप्ता ने की | सतीश गुप्ता का कहना रहा कि मुकेश अरनेजा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में खुलेआम पक्षपातपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और न सिर्फ उनके बारे में झूठा प्रचार कर रहे हैं, बल्कि एक उम्मीदवार के समर्थन में क्लब्स के अध्यक्षों के घर-घर जा रहे हैं | सतीश गुप्ता की शिकायत रही कि अगले रोटरी वर्ष के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर होने का फायदा उठाते हुए वह अगले रोटरी वर्ष में पदों का लालच देते हुए वोटरों को एक उम्मीदवार के पक्ष में करने का अभियान छेड़े हुए हैं | मुकेश अरनेजा की कारस्तानियों की शिकायत करते हुए सतीश गुप्ता ने मुकेश अरनेजा को चुनावी प्रक्रिया से पूरी तरफ बाहर रखने और दूर करने की मांग की | सतीश गुप्ता का कहना रहा कि यह इसलिए जरूरी है ताकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद का चुनाव निष्पक्ष तरीके से हो सके और चुनाव में गंदगी व बदमजगी न फैले |
सुदर्शन अग्रवाल और सुशील गुप्ता ने सतीश गुप्ता की शिकायतों को और उनकी मांग को गंभीरता से लिया तथा असित मित्तल और विनोद बंसल से विचार-विमर्श किया | असित मित्तल और विनोद बंसल को सतीश गुप्ता की शिकायतें और उनकी मांग अच्छी तो नहीं लगीं, लेकिन मुकेश अरनेजा की कारस्तानियों को सुन कर सुदर्शन अग्रवाल और सुशील गुप्ता का जो मूड उन्होंने देखा तो फिर मुकेश अरनेजा को बचाने की उन्होंने भी कोई कोशिश नहीं की | कोई कोशिश उन्होंने इसलिए भी नहीं की, क्योंकि सतीश गुप्ता ने जो शिकायत और जो मांग मुकेश अरनेजा के संदर्भ में की थी वह असित मित्तल के संदर्भ में भी की थी | असित मित्तल ने लेकिन कलाकारी दिखाते हुए पहले ही अपने आप चुनावी प्रक्रिया से दूर रहने की बात कह दी थी, और उनकी इस चालाकी से सारा फोकस मुकेश अरनेजा पर ही आ टिका था | असित मित्तल को लगा कि मुकेश अरनेजा को उन्होंने बचाने की कोशिश की तो कहीं बात न बिगड़ जाये और अभी वह खुद जो बचते हुए दिख रहे हैं कहीं दोबारा न फँस जाये ? असित मित्तल को इसी में अपनी भलाई नज़र आई कि मुकेश अरनेजा को फँसा दो और अपने को बचा लो | असित मित्तल ने यही किया | असित मित्तल और विनोद बंसल की संस्तुति मिलते ही सुदर्शन अग्रवाल और सुशील गुप्ता ने मुकेश अरनेजा को तड़ीपार करने का आदेश सुना दिया | दोनों पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर्स के आदेश के अनुसार मुकेश अरनेजा को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव से संबंधित किसी भी कमेटी में शामिल नहीं किया जायेगा और ऐसी व्यवस्था की जायेगी कि मुकेश अरनेजा चुनाव के दौरान मतदाताओं को किसी भी तरह प्रभावित न कर सकें |
मुकेश अरनेजा के कारण रोटरी और डिस्ट्रिक्ट को इस तरह एक बार फिर लज्जित होना पड़ा है | उल्लेखनीय है कि नगरनिगमों के, विधानसभाओं के, लोकसभाओं के चुनाव के दौरान तो इस तरह की कार्यवाईयाँ होती सुनी गईं हैं कि चुनाव को शांतिपूर्ण व निष्पक्ष तरीके से संपन्न करने के लिए अपराधी व गुंडा तत्वों को जिलाबदर या तड़ीपार कर दिया जाता है - लेकिन रोटरी में यह इस तरह की पहली घटना ही है | मुकेश अरनेजा के लिए भी यह बहुत ही शर्मनाक फैसला है | पर किसी को भी यह विश्वास नहीं है कि मुकेश अरनेजा को पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर्स तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी द्धारा उनके खिलाफ लिए गए इस फैसले पर कोई शर्म महसूस होगी | मुकेश अरनेजा के नजदीकियों के अनुसार, मुकेश अरनेजा ने इस फैसले पर अभी - इन पंक्तियों को लिखे जाते समय उक्त फैसला हुए करीब बयालीस घंटे हो रहे हैं - कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है; लेकिन इस फैसले के लिए उन्होंने संजय खन्ना को जिम्मेदार ठहराया है | उन्होंने कहा है कि संजय खन्ना हालाँकि उनके और असित मित्तल के खिलाफ शिकायत करने की तैयारी करते सुने गए थे, लेकिन ऐन मौके पर उन्होंने होशियारी दिखाई और सतीश गुप्ता को भड़का कर सतीश गुप्ता से उनके खिलाफ शिकायत करवा दी | मुकेश अरनेजा के अनुसार, संजय खन्ना को उनके समर्थकों ने समझाया होगा कि यदि वह असित मित्तल और मुकेश अरनेजा की शिकायत करेंगे तो उन दोनों के साथ उनका सीधा टकराव होगा, जिसे उन्हें टालना चाहिए | इसके बाद ही संजय खन्ना ने खुद शिकायत न करवा कर सतीश गुप्ता से शिकायत करवाई | सतीश गुप्ता से शिकायत करवा कर संजय खन्ना ने लोगों को यह दिखाने/जताने की चतुराई भी प्रकट की कि असित मित्तल और मुकेश अरनेजा से एक अकेले उन्हीं को शिकायत नहीं है, बल्कि दूसरे उम्मीदवारों को भी शिकायत है | मुकेश अरनेजा को दरअसल सतीश गुप्ता से यह उम्मीद नहीं थी कि वह उनके खिलाफ इस हद तक आक्रामक रवैया अपनाएंगे | मुकेश अरनेजा ने कोलकाता में हुए रोटरी इंस्टीट्यूट में सतीश गुप्ता को नीचा दिखाने की बहुत कोशिश की थी और उनके खिलाफ अनाप-शनाप बयानबाजी की थी, लेकिन सतीश गुप्ता ने उसपर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की थी | इससे मुकेश अरनेजा को लगा कि वह सतीश गुप्ता के साथ जैसा चाहें व्यवहार कर सकते हैं | मुकेश अरनेजा के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि सतीश गुप्ता पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर्स के सामने उनकी शिकायत करते हुए उन्हें तड़ीपार कराने की मांग कर सकते हैं | सतीश गुप्ता ने लेकिन बता/दिखा दिया है कि उन्हें हलके में न लिया जाये | असित मित्तल और मुकेश अरनेजा की शिकायत के पीछे चाहें संजय खन्ना की प्रेरणा हो या उनकी स्वयं की रणनीति हो - सतीश गुप्ता ने यह तो जता ही दिया है कि जरूरत पड़ने पर वह सीधे टकराने का हौंसला भी रखते हैं | मुकेश अरनेजा को तड़ी पार करवाकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव को उन्होंने रोचक तो बना ही दिया है |