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Saturday, August 4, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुभाष जैन के क्लब का सोविनियर क्लब के सदस्यों की सक्रियता की तस्वीर प्रस्तुत करते हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत अमित गुप्ता की उम्मीदवारी के पक्ष में व्यापक अपील पैदा करने के साथ-साथ उसे विश्वसनीय रूप भी देता है

गाजियाबाद । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुभाष जैन के क्लब - रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के 27 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 'टुगेदर वी कैन' शीर्षक से प्रकाशित क्लब सोविनियर की जैसी जो प्रशंसा हो रही है, वह अपने आप में अप्रत्याशित है और क्लब के पदाधिकारियों तथा सदस्यों का मनोबल बढ़ाने वाली है । यूँ तो कई क्लब्स अपने अपने सोविनियर निकालते हैं, जो अच्छी व आकर्षक छपाई तथा क्लब के इतिहास व सक्रियता से जुड़ी सामग्री के कारण लोगों को ध्यान खींचते हैं, और लोगों को उपयोगी भी लगते हैं । लेकिन रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के इस वर्ष प्रकाशित हुए और चार्टर डे पर विमोचित हुए सोविनियर ने डिस्ट्रिक्ट के बाहर के प्रमुख लोगों - खासकर दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारियों को भी जिस तरह से आकर्षित और प्रभावित किया है, उसके कारण यह खास बन गया है । कई लोगों ने इन पंक्तियों के लेखक से बात करने के दौरान इस सोविनियर का जिक्र किया, और कहा कि कागज और छपाई की उत्कृष्टता के कारण ही नहीं, बल्कि चयनित सामग्री के कारण यह सोविनियर उल्लेखनीय बन पड़ा है । इसके लिए हर कोई सोविनियर की संपादिका रचना अग्रवाल की तारीफ कर रहा है, लेकिन रचना अग्रवाल सोविनियर के आकर्षक व प्रभावी बनने का श्रेय क्लब के पूर्व प्रेसीडेंट अमित गुप्ता को दे रही हैं । सोविनियर में प्रकाशित अपने संदेश में रचना अग्रवाल ने सोविनियर की सामग्री इकट्ठा करवाने से लेकर उसे एक शक्ल देने तक के श्रमसाध्य काम में अमित गुप्ता से मिले सहयोग को श्रेय देते हुए उनका आभार व्यक्त किया है । उल्लेखनीय है कि अमित गुप्ता को इस वर्ष क्लब का ट्रेनर भी चुना गया है, और वह इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार भी हैं । वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव जीते तो सुभाष जैन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रहते हुए क्लब को दूसरा गवर्नर भी मिल जायेगा ।
'टुगेदर वी कैन' इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बैरी रसिन तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर बासकर चॉकलिंगम तथा डिस्ट्रिक्ट के मौजूदा, भावी व पूर्व गवर्नर्स तथा क्लब के पदाधिकारियों के संदेशों से तो सुसज्जित है ही - जो अलग अलग तरीके से रोटरी के आदर्शों के प्रति जागरूक बनाते हैं - साथ ही रोटरी के कार्यों व लक्ष्यों से संबंधित उपयोगी व रोचक जानकारी से भी परिपूर्ण हैं । सोविनियर का खासा रोमांचक व दिलचस्प पक्ष लेकिन उसमें प्रकाशित तस्वीरें हैं, जो क्लब की गतिविधियों के इतिहास व विविधतापूर्ण पहलुओं से तो परिचित करवाती ही हैं, पुरानी यादों व पुराने सदस्यों/साथियों के साथ बिताये गए मौकों को भी पुनर्जीवित करती हैं । 27 वर्ष किसी भी व्यक्ति के चेहरे व शारीरिक संरचना में होने वाले परिवर्तनों के लिहाज से बड़ा लंबा समय है; इस लिहाज से कुछेक सदस्यों की पुरानी तस्वीरें नए रोटेरियंस को रोमांचित कर रही हैं । इस मामले में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुभाष जैन की पुरानी तस्वीरें लोगों का खास ध्यान खींच रही हैं । सुभाष जैन क्लब के चार्टर सदस्य हैं, और क्लब के दूसरे वर्ष में - वर्ष 1992-93 में वह प्रेसीडेंट बने थे । इस नाते वह क्लब की गतिविधियों से शुरू से ही जुड़े रहे हैं, और शुरू के वर्षों की गतिविधियों की तस्वीरों में उनकी उपस्थिति उस समय के लोगों की यादों को नया कर रही है, और नए रोटेरियंस को रोमांचित कर रही है । कई तस्वीरों में योगेश गर्ग, जो अब रोटरी क्लब गाजियाबाद विकास के सदस्य हैं, नजर आ रहे हैं - जो रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के 'निर्माण' में योगेश गर्ग की अथक व महत्त्वपूर्ण भूमिका को याद दिलाने का काम करती हैं ।
'टुगेदर वी कैन' शीर्षक से प्रकाशित क्लब सोविनियर में प्रकाशित तस्वीरें पुरानी यादों और पुराने सदस्यों की सक्रियताओं से जुड़े प्रसंगों को ताजा करने तथा नए रोटेरियंस को उनसे परिचित कराने का काम ही नहीं करती हैं, बल्कि क्लब की गतिविधियों की विविधता को भी सामने लाती है । सोविनियर में प्रकाशित तस्वीरें 'बताती' हैं कि रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल समाज और आम लोगों से जुड़ी हर जरूरत में मदद करने को लेकर आगे रहा है, तथा क्लब के कई सदस्य नियमित रूप से - प्रत्येक वर्ष के पदाधिकारियों के साथ सहयोग करते हुए, क्लब की गतिविधियों में शामिल होते रहे हैं । सोविनियर में प्रकाशित तस्वीरें इस बात की भी झलक देती हैं कि क्लब और उसके सदस्यों की खास पहचान और प्रसिद्धि ने दूसरे देशों से आने वाले रोटेरियंस को भी आकर्षित किया है, और समय समय पर वह क्लब के कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं । रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के सक्रियताभरे गौरवशाली इतिहास से परिचित करवाते सोविनियर को जो प्रशंसा मिल रही है, उसने क्लब के सदस्यों को स्वाभाविक रूप से खुशी दी है और हर कोई इसके लिए अमित गुप्ता को श्रेय दे रहा है । क्लब के सदस्यों का कहना है कि पुरानी पुरानी तस्वीरों को खोजने का काम जिस लगन और धैर्य की माँग करता है, वह अमित गुप्ता में ही है और वही यह काम कर सकते हैं; तथा अमित गुप्ता में ही वह सोच व नजरिया है जो तस्वीरों को वह तरतीब देने का काम कर सकती है कि उनके जरिये क्लब की गतिविधियों का नजारा देखने को मिले । सोविनियर में प्रकाशित तस्वीरों से अमित गुप्ता की सक्रियता की व्यापक तस्वीर भी देखने को मिलती है । अमित गुप्ता और उनकी पत्नी स्वाति गुप्ता, जो वर्ष 2014-15 में क्लब की प्रेसीडेंट थीं तथा इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट लिट्रेसी कमेटी की चेयरपरसन हैं, की निरंतर व विविधतापूर्ण सक्रियता का तथ्य भी सोविनियर की तस्वीरों से सामने आता है । अमित गुप्ता और स्वाति गुप्ता की सक्रियता का जो स्तर है, वह उन्हें क्लब में ही नहीं - बल्कि डिस्ट्रिक्ट में अकेले ऐसे दंपति की पहचान देता है, जो रोटरी में समान रूप से सक्रिय हैं और रोटरी के कामों में समान रूप से बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं । अमित गुप्ता चूँकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार हैं, इसलिए उनकी और उनकी पत्नी स्वाति गुप्ता की सक्रियता की व्यापक तस्वीर उनकी उम्मीदवारी के पक्ष में व्यापक अपील पैदा करती है और उसे विश्वसनीय रूप देती है - और इस तरह से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी परिदृश्य को दिलचस्प बनाती है ।

Friday, July 10, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के बोर्ड सदस्यों द्वारा सर्वसम्मत फैसले में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए सुभाष जैन को क्लब का अधिकृत उम्मीदवार घोषित करने तथा उनकी उम्मीदवारी को क्लब की इज्जत व प्रतिष्ठा का मुद्दा बना लेने से चुनावी समीकरणों में उलटफेर होने की संभावना बढ़ी

गाजियाबाद । रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के बोर्ड ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए सुभाष जैन की उम्मीदवारी को जिस सहजता के साथ हरी झंडी दे दी है, उसने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों को हैरान किया है । दरअसल डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों को आशंका व उम्मीद थी कि क्लब में चूँकि सुभाष जैन के साथ-साथ योगेश गर्ग ने भी उम्मीदवारी का दावा ठोका हुआ है, इसलिए क्लब में उम्मीदवारी का निर्णय आराम से और जल्दी से तो नहीं ही हो पायेगा - और निर्णय लेने की प्रक्रिया में दोनों उम्मीदवारों व उनके समर्थकों की तरफ से क्लब में खूब पटाखेबाजी होगी । उम्मीदवारी के मुद्दे पर रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल में पटाखेबाजी व तमाशाबाजी होती देखने की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को यह जानकर लेकिन भारी निराशा हुई है कि क्लब के लोगों ने दूसरों को मजा लेने का तथा क्लब की फजीहत करने का मौका नहीं दिया और बहुत ही मैच्योर तरीके से एक मुश्किल दिख रहा फैसला सहजता से ले लिया । इस फैसले से नहीं, बल्कि सौहार्दपूर्ण माहौल में फैसला होने से उन लोगों को तगड़ा झटका लगा है जो उम्मीद कर रहे थे कि उम्मीदवारी के फैसले को लेकर सुभाष जैन और योगेश गर्ग अपने अपने समर्थकों के साथ एक दूसरे पर कीचड़ उछालेंगे और तमाशाबाजी करेंगे - जिसमें उन्हें मजा लेने का मौका मिलेगा । डिस्ट्रिक्ट के कई लोगों का कहना है कि उन्हें सचमुच उम्मीद नहीं थी कि सुभाष जैन और योगेश गर्ग के बीच उम्मीदवारी को लेकर चलती दिख रही होड़ इतनी आसानी से और क्लब के सदस्यों के बीच सौहार्द बनाए रखते हुए किसी नतीजे पर पहुँच सकेगी । रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल की डिस्ट्रिक्ट में एक खास पहचान रही है : क्लब के वरिष्ठ सदस्यों में कभी कभी खटपट सुनाई देती रही है, और उनके बीच एक-दूसरे के प्रति जाहिर होने वाली शिकायतें सार्वजनिक चर्चा का विषय भी बनी हैं - लेकिन अपने बीच की नाराजगियों और शिकायतों को क्लब के सदस्य बहुत ही गरिमापूर्ण तरीके से हल करते रहे हैं; और उन्होंने क्लब की साख व प्रतिष्ठा पर कभी आँच नहीं आने दी । इस बार का 'झगड़ा' लेकिन थोड़ा बड़ा और गंभीर था - और इसलिए ही दूसरे लोगों को लग रहा था कि क्लब के सदस्यों के लिए इस बार क्लब की साख व प्रतिष्ठा को बचा पाना मुश्किल ही होगा । लेकिन क्लब के सदस्यों ने दिखा दिया कि बात अगर क्लब की साख व प्रतिष्ठा को बचाने की होगी - तो उनके लिए कुछ भी करना मुश्किल नहीं होगा । 
उल्लेखनीय है कि सुभाष जैन की उम्मीदवारी को हरी झंडी देने का फैसला क्लब की जिस बोर्ड मीटिंग में हुआ, उस बोर्ड मीटिंग में योगेश गर्ग के नजदीकी व समर्थक के रूप में देखे/पहचाने जाने वाले सदस्य भी थे, और उन्होंने योगेश गर्ग की उम्मीदवारी के लिए वकालत भी की - किंतु जब उन्हें लगा कि उनके तर्क कमजोर पड़ रहे हैं तो फिर उन्होंने सुभाष जैन के पक्ष में हामी भरने में भी देर नहीं लगाई । योगेश गर्ग के इन नजदीकियों और समर्थकों से भी ज्यादा मैच्योर रवैया क्लब के अध्यक्ष आशीष गर्ग ने दिखाया । आशीष गर्ग को सुभाष जैन के 'आदमी' के रूप में देखा/पहचाना जाता है; उनके बारे में यह भी प्रचलित है कि वह जो कहना/करना चाहते हैं उसे किसी की परवाह किए बिना दो-टूक ढंग से कह/कर देते हैं । इस 'ख्याति' के चलते आशंका यह व्यक्त की जा रही थी कि सुभाष जैन की उम्मीदवारी को क्लियर कराने के लिए आशीष गर्ग कहीं ऐसा कुछ न कर बैठें जिससे झमेला खड़ा हो जाए । अपनी 'ख्याति' के विपरीत आशीष गर्ग ने लेकिन बहुत ही संयम का परिचय दिया और वह कोई पक्ष लेने से बचते हुए ही दिखे । योगेश गर्ग और सुभाष जैन के समर्थकों के इस संयमी और मैच्योर व्यवहार ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए क्लब में चल रही उम्मीदवारी की होड़ में सुभाष जैन को जितवाने या योगेश गर्ग को हरवाने का काम नहीं किया - बल्कि क्लब को और रोटरी को 'जितवाया' है । 
रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल की मौजूदा वर्ष की पहली बोर्ड मीटिंग में उम्मीदवारी के मुद्दे पर फैसला करना दरअसल इसलिए जरूरी हो गया था, क्योंकि पिछले रोटरी वर्ष की अंतिम बोर्ड मीटिंग में योगेश गर्ग ने क्लब की तत्कालीन अध्यक्ष स्वाति गुप्ता से इस बात पर अपनी नाराजगी दिखाई थी कि उन्हें उम्मीदवारी के जो आवेदन मिले - उससे क्लब के बोर्ड के सदस्यों को अवगत कराने का काम उन्होंने नहीं किया और इस तरह उन्होंने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं किया । स्वाति गुप्ता का कहना था कि उम्मीदवारी के जो दो आवेदन उन्हें मिले, वह चूँकि अगले रोटरी वर्ष के लिए थे - इसलिए उन्होंने उन पर कोई कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं समझी; और ऐसा करके उन्होंने यदि कोई गलती की है, तो इसे अनजाने में हुई गलती समझा जाए और इसके लिए वह माफी माँगती हैं । योगेश गर्ग ने उन्हें माफ तो कर दिया, लेकिन उन्हें यह सुझाव भी दिया कि अपना अध्यक्ष-काल पूरा होने पर वह अगले अध्यक्ष को उम्मीदवारी के दोनों आवेदन सौंपे और उस पर जल्दी कार्रवाई करने की सिफारिश करें । स्वाति गुप्ता ने 30 जून और या एक जुलाई को जब अध्यक्ष पद आशीष गर्ग को हस्तांतरित किया तो कवरिंग लैटर में योगेश गर्ग द्वारा दिए गए सुझावों को लिख दिया । आशीष गर्ग ने भी अध्यक्ष के रूप में पहला काम वह किया, जिसे करीब ढाई महीने तक न करने और लटकाये रखने के लिए योगेश गर्ग ने स्वाति गुप्ता से नाराजगी व्यक्त की थी । क्लब के बोर्ड के अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में रोटरी इंटरनेशनल ने अपने संविधान के आर्टिकल 10 के सैक्शन 1, सैक्शन 2 और सैक्शन 3 में जो नियम प्रतिपादित किए हैं - उनका अक्षर-अक्षर पालन करते हुए रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के बोर्ड ने अपनी पहली मीटिंग में उम्मीदवारी के मुद्दे पर चर्चा की और एकमत से सुभाष जैन की उम्मीदवारी के पक्ष में फैसला किया । 
उम्मीदवारी पर चर्चा करने बैठे रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के बोर्ड सदस्यों के सामने प्रमुख रूप से दो सवाल थे : एक यह कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए क्लब की तरफ से उम्मीदवारी प्रस्तुत की जाए या नहीं; और दूसरा सवाल यह कि यदि क्लब की तरफ से उम्मीदवारी प्रस्तुत की जानी है तो किसकी उम्मीदवारी प्रस्तुत करें ? पहला सवाल दरअसल इसलिए चर्चा में लिया गया क्योंकि क्लब में भी और क्लब के बाहर के कुछेक लोगों के बीच भी यह चर्चा सुनी गई थी कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के चक्कर में क्लब में झगड़ा पैदा हो रहा है और क्लब की बदनामी हो रही है, इसलिए बेहतर यह होगा कि इस चक्कर से दूर ही रहा जाए । बोर्ड मीटिंग में हालाँकि किसी ने भी इस तर्क का समर्थन नहीं किया । सभी की रजामंदी इस बात को लेकर थी कि क्लब में जब दो दो वरिष्ठ सदस्य उम्मीदवारी प्रस्तुत कर रहे हैं, तब उम्मीदवारी से पीछे हटने में क्लब की ज्यादा बदनामी होगी । सभी ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि यह ठीक है कि उम्मीदवारी के चलते बहुत सी ऐसी अप्रिय बातें हो रही हैं तथा ऐसी समस्याएँ खड़ी हो रही हैं, जो क्लब की साख व प्रतिष्ठा के अनुकूल नहीं हैं - किंतु क्लब उन बातों और समस्याओं का सामना करने तथा आपस में मिलबैठ कर उन्हें हल करने की बजाये, उनसे बचने और मुँह छिपाने की कोशिश करेगा तो अपनी साख व प्रतिष्ठा को खोयेगा । बोर्ड मीटिंग में सभी ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि हम लोग भी और क्लब के दूसरे सदस्य भी मैच्योर लोग हैं और अपने झगड़ों को आपस में बातचीत करके हल कर सकते हैं; इसलिए जो भी झगड़े हैं उन्हें हल कर लेने का विश्वास रखते हुए क्लब को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करना चाहिए । ऐसा करना इसलिए भी जरूरी समझा गया कि क्लब में झगड़े की बात फैला कर क्लब के बाहर के जो लोग क्लब को बदनाम कर रहे हैं, तथा क्लब को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की होड़ से बाहर करने का षड्यंत्र कर रहे हैं, उन्हें उचित जबाव दिया जा सके । 
क्लब की तरफ से उम्मीदवारी प्रस्तुत करने का फैसला तो आराम से हो गया, किंतु उम्मीदवारी योगेश गर्ग और सुभाष जैन में से किसकी प्रस्तुत हो - यह फैसला करना थोड़ा पेचीदा काम था । मीटिंग में मौजूद एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि उम्मीदवार को लेकर बातचीत जब शुरू हुई, तो माहौल में थोड़ी गर्मी पैदा हो गई थी । ऐसा लगा जैसे योगेश गर्ग और सुभाष जैन के समर्थक अपनी अपनी तरफ से पूरी तैयारी करके मीटिंग में आए थे । योगेश गर्ग के समर्थकों ने क्लब में और रोटरी में योगेश गर्ग के लंबे योगदान का हवाला देते हुए तर्क दिया कि डिस्ट्रिक्ट में योगेश गर्ग की बड़ी पहचान है, और डिस्ट्रिक्ट के कई बड़े नेताओं के साथ उनके अच्छे संबंध हैं - इसलिए उनकी उम्मीदवारी को प्रस्तुत किया जाना चाहिए । सुभाष जैन के समर्थकों का कहना रहा कि डिस्ट्रिक्ट में बेशक योगेश गर्ग की बड़ी पहचान है, लेकिन हाल-फिलहाल की उनकी गतिविधियों को देखें तो लगता है कि रोटरी में उन्हें जो कुछ करना था उसे वह कर चुके हैं तथा आगे रोटरी के लिए ज्यादा कुछ करने का उनमें पहले जैसा उत्साह बचा नहीं रह गया है, जबकि सुभाष जैन ने अपनी सक्रियता से यह दिखाया/जताया है कि उनमें रोटरी के लिए बहुत कुछ करने का हौंसला अभी बाकी है और क्लब उनमें अपना भविष्य देख/पा सकता है । इस बात के पक्ष में सुभाष जैन के रोटरी फाउंडेशन की ऑर्च क्लम्प सोसायटी के सदस्य बनने का जिक्र किया गया, जिसके लिए सुभाष जैन को इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई की प्रशंसा तो मिली ही, साथ ही मनोज देसाई ने अपनी फेसबुक टाइमलाइन पर सुभाष जैन को प्रमुखता से स्थान भी दिया और उनकी तस्वीर लगाई । इस पर योगेश गर्ग की वकालत करने वालों ने टिप्पणी की कि यह काम तो सुभाष जैन ने अपनी उम्मीदवारी की हवा बनाने के लिए किया; जिसका सुभाष जैन के समर्थकों ने तुरंत जबाव दिया कि यदि इसे सच भी मान लिया जाए, तो इसमें गलत क्या है ? 
सुभाष जैन के समर्थकों ने यह तथ्य भी बताया कि सुभाष जैन ने पिछले रोटरी वर्ष में जब अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत नहीं की थी, तब भी उन्होंने दो हजार डॉलर रोटरी फाउंडेशन में दिए थे और साथ ही घोषणा भी की थी कि क्लब को अपने लक्ष्य तक पहुँचने में कुछ कमी पड़ेगी, तो वह उस कमी को भी पूरा करेंगे । इसलिए यह कहना झूठा प्रचार है कि सुभाष जैन जो कर रहे हैं, वह सिर्फ अपनी उम्मीदवारी को ध्यान में रखकर कर रहे हैं । सुभाष जैन जब उम्मीदवार नहीं थे, तब भी वह रोटरी का 'काम' कर रहे थे; और जब उम्मीदवार बने, तब और जोरशोर से रोटरी का काम करने लगे । किसी भी उम्मीदवार को अपनी उम्मीदवारी की हवा बनाने के लिए बहुत कुछ करना ही होता है; कुछ करने वाले उम्मीदवार से बेहतर वह उम्मीदवार भला कैसे हो सकता है, जो उम्मीदवार बनने से पहले भी कुछ न कर रहा हो, और उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के बाद अपनी उम्मीदवारी की हवा बनाने के लिए भी कुछ न कर रहा हो ? सुभाष जैन के समर्थकों की इस तरह की बातें सुनकर योगेश गर्ग के समर्थकों के हौंसले पस्त पड़ गए और उनसे कुछ कहते हुए नहीं बना । सुभाष जैन के समर्थकों ने इसके बाद जो तर्क दिया, उसे सुनकर तो योगेश गर्ग के समर्थक सुभाष जैन के समर्थक बन गए । सुभाष जैन के समर्थकों का कहना रहा कि योगेश गर्ग ने करीब ढाई महीने पहले अपनी उम्मीदवारी तो प्रस्तुत की है, किंतु अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने हेतु इन ढाई महीनों में उन्होंने किया कुछ नहीं है - इससे ऐसा लग रहा है कि जैसे वह अपनी उम्मीदवारी के प्रति जरा भी गंभीर नहीं हैं, और वह सिर्फ सुभाष जैन की उम्मीदवारी को बिगाड़ने के लिए अपनी उम्मीदवारी की बात कर रहे हैं । योगेश गर्ग के समर्थक भी यह दावा नहीं कर सके कि योगेश गर्ग अपनी उम्मीदवारी के प्रति सचमुच गंभीर हैं; और इसके साथ ही योगेश गर्ग की उम्मीदवारी की वकालत किसी ने नहीं की और सुभाष जैन सर्वसम्मति से क्लब की तरफ से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार घोषित कर दिए गए । सुभाष जैन को उम्मीदवार घोषित करने के साथ ही बोर्ड सदस्यों ने यह फैसला भी किया कि अभी तक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए सुभाष जैन अकेले अपने दम पर अपना अभियान चला रहे थे, किंतु अब उनके अभियान में क्लब भी जुटेगा - क्योंकि उनकी उम्मीदवारी अब क्लब की इज्जत और प्रतिष्ठा का मुद्दा भी बन गई है ।  
सुभाष जैन की उम्मीदवारी पर क्लब के बोर्ड सदस्यों की सर्वसम्मत मोहर लगते ही, यह खबर जंगल में आग की तरह फैल गई । इसकी एक वजह यह भी रही कि रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के बोर्ड सदस्य जिस समय डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए क्लब के अधिकृत उम्मीदवार के रूप में सुभाष जैन के नाम पर सर्वसम्मत सहमति दर्ज और घोषित कर रहे थे, ठीक उसी समय शहर के कई रोटेरियंस के साथ सुभाष जैन रोटरी क्लब गाजियाबाद के भजन संध्या कार्यक्रम में थे - और वहीं उन्हें अपने अधिकृत उम्मीदवार चुने जाने की सूचना मिली, और उनसे दूसरे लोगों को जानकारी मिली । सुभाष जैन के इतनी आसानी से क्लब के सर्वसम्मत उम्मीदवार बन जाने से दूसरे उम्मीदवारों की उम्मीदों को खासा तगड़ा झटका लगा है, और उन्हें अपनी चुनावी रणनीति नए सिरे से बनाने की जरूरत महसूस हुई है । सुभाष जैन की उम्मीदवारी को रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के बोर्ड सदस्यों ने जिस तरह अपनी इज्जत और प्रतिष्ठा का मुद्दा बना लिया है और घोषित कर दिया है, उससे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के समीकरणों में काफी उलटफेर देखने को मिल सकता है ।

Sunday, June 28, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में गाजियाबाद के वरिष्ठ रोटेरियंस योगेश गर्ग तक के साथ धोखा और चालबाजी करने वाले जेके गौड़ का रवैया यदि अशोक गर्ग के प्रति भी बदला बदला सा है, तो इसमें आश्चर्य की भला क्या बात है ?

नई दिल्ली । जेके गौड़ के बदले-बदले से रवैये ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार अशोक गर्ग को खासा हैरान भी किया है, और बुरी तरह परेशान भी । अशोक गर्ग के नजदीकियों के अनुसार, अशोक गर्ग उन दिनों को याद करके अपनी हैरानी व परेशानी को और बढ़ाते हुए भी दिखते हैं, जब जेके गौड़ खुद उम्मीदवार थे । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत अपनी उम्मीदवारी को कामयाब बनाने के लिए जेके गौड़ उनकी कैसे कैसे और कैसी कैसी खुशामद किया करते थे, उसे याद करते हुए - और जेके गौड़ के अब के व्यवहार के साथ उसकी तुलना करते हुए अशोक गर्ग अचंभा करते हैं कि कोई व्यक्ति इतना भी बदल सकता है क्या ? पिछले रोटरी वर्ष में भी जेके गौड़ के साथ अशोक गर्ग के इतने घनिष्ट संबंध थे कि जेके गौड़ के कहने पर अशोक गर्ग ने अपने क्लब के वरिष्ठ सदस्य संजीव रस्तोगी को क्लब से ही निकाल/निकलवा दिया था । नजदीकियों के अनुसार, अशोक गर्ग को अब लगता है कि जेके गौड़ ने पिछले वर्षों में उन्हें तरह-तरह से इस्तेमाल किया, और अब जब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार के रूप में उन्हें जेके गौड़ से मदद की उम्मीद है, तो जेके गौड़ उनके साथ ऐसे पेश आते हैं कि जैसे उन्हें पहचानते ही नहीं हैं । अशोक गर्ग को चूँकि दूसरे रोटेरियंस से भी यह सुनने को मिलता है कि जेके गौड़ बहुत बदल गए हैं, अब वह पहले जैसे नहीं रह गए हैं और घमंडी व बदतमीज तक हो गए हैं, तो अशोक गर्ग को थोड़ी सांत्वना तो मिलती है किंतु उनका अचंभा खत्म नहीं होता है । गाजियाबाद के वरिष्ठ रोटेरियंस तक से की जा रही जेके गौड़ की बदतमीजियों की खबरें दरअसल अशोक गर्ग के अचंभे को खत्म नहीं होने दे रही हैं । 
गाजियाबाद के वरिष्ठ रोटेरियंस को जेके गौड़ की ताजा बदतमीजी का शिकार उस समय होना पड़ा, जब 30 जून को आयोजित हो रहे अपने 'संभव - टू मेक पॉसिबल' कार्यक्रम की तैयारियों के सिलसिले में उन्होंने अपनी तथाकथित कोर टीम की मीटिंग बुलाई । इस मीटिंग में उपस्थित लोगों से विचार-विमर्श करने व सलाह लेने की बजाए जेके गौड़ ने अपने फरमान सुनाने पर ही ज्यादा ध्यान दिया । हद तब हुई जब जेके गौड़ ने ऐलान किया कि 30 जून के उक्त कार्यक्रम के लिए वह 25 जून तक ही रजिस्ट्रेशन स्वीकार करेंगे । मीटिंग में मौजूद गाजियाबाद के वरिष्ठ रोटेरियंस राजीव वशिष्ठ, उमेश चोपड़ा, विनोद चावला आदि ने जेके गौड़ को समझाने का प्रयास किया कि अपने डिस्ट्रिक्ट की रोटरी में लोग ऐन कार्यक्रम के दिन तक रजिस्ट्रेशन करवाते हैं, इसलिए इस तरह का फैसला व्यवहारिक नहीं होगा - और यह फैसला लागू नहीं किया जाना चाहिए । जेके गौड़ ने लेकिन इनकी एक न सुनी और 25 जून तक रजिस्ट्रेशन करवाने के फैसले को लागू करने पर अड़े रहे । मीटिंग में मौजूद किसी भी व्यक्ति ने उनके इस फैसले पर सहमति व्यक्त नहीं की, लेकिन जेके गौड़ फिर भी 'अपने' फैसले को लागू करने की जिद पूरी करके ही माने । मीटिंग में मौजूद लोगों के बीच नाराजगी भरे स्वर भी उभरे कि जेके गौड़ को जब किसी की सुननी/माननी ही नहीं है, तो फिर मीटिंग बुलाने का नाटक क्यों करता है ? इस किस्से में मजे की बात यह रही कि मीटिंग में जेके गौड़ को जो बात समझ में नहीं आ रही थी, और जिसे मानने के लिए वह हरगिज तैयार नहीं हुए - वह बात जेके गौड़ को तीन दिन बाद लेकिन समझ में आ गई; जब उन्होंने उक्त कार्यक्रम के लिए 25 जून तक रजिस्ट्रेशन कराने की शर्त को हटा लिया । इस पर कुछेक लोगों ने चुटकी भी ली कि जेके गौड़ की अक्ल का ताला धीरे-धीरे खुलता है क्या, जो उन्हें बात देर से समझ में आती है । 
इस मीटिंग की आड़ में जेके गौड़ ने गाजियाबाद के एक अन्य वरिष्ठ रोटेरियन योगेश गर्ग के साथ एक दूसरी किस्म की चाल खेली । इस मीटिंग में जेके गौड़ ने योगेश गर्ग को भी आमंत्रित किया । योगेश गर्ग ने मीटिंग में आने के लिए हामी भी भर दी - लेकिन ऐन मौके पर उन्हें पता चला कि जेके गौड़ ने इस मीटिंग में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के दूसरे किसी संभावित उम्मीदवार को तो आमंत्रित किया ही नहीं है; संभावित उम्मीदवारों में एक अकेले उन्हीं को जेके गौड़ ने आमंत्रित किया है । यह जानकारी देने वाले ने योगेश गर्ग को यह जानकारी और दी कि उक्त मीटिंग में उनकी उपस्थिति को बना/दिखा कर जेके गौड़ ने उनकी संभावित उम्मीदवारी की राह के लिए रोड़ा तैयार करने की चाल चली है । समय रहते जेके गौड़ द्वारा रची गई साजिश की पोल खुल जाने से योगेश गर्ग ने उक्त मीटिंग में जाना तो स्थगित कर दिया, किंतु योगेश गर्ग को यह जानकर तगड़ा झटका लगा कि जेके गौड़ उनके साथ भी इस तरह की धोखाधड़ी कर सकता है ? जेके गौड़ की इस चालबाजी से सावधान होकर ही योगेश गर्ग ने जेके गौड़ का कामकाज देख रहे अशोक अग्रवाल को फोन करके एक बार फिर याद दिलाया कि डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी में उनका नाम किसी भी रूप में नहीं छपना चाहिए । योगेश गर्ग हालाँकि यह बात जेके गौड़ व अशोक अग्रवाल को पहले बता चुके थे; किंतु जेके गौड़ द्वारा रची गई चालबाजी के बेनकाब होने के बाद बाद योगेश गर्ग को डर हुआ कि जेके गौड़ डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी में नाम छापने की हरकत कर सकता है, इसलिए उन्हें अशोक अग्रवाल को वह बात दोबारा से याद दिलाना जरूरी लगा ।
जेके गौड़ ने योगेश गर्ग के साथ जो चालबाजी खेली, उसके बारे में जानकर अशोक गर्ग की अपने प्रति जेके गौड़ के बदले रवैये से पैदा हुई निराशा शायद कुछ कम हुई होगी । उन्हें लगा होगा कि जेके गौड़ जब गाजियाबाद के योगेश गर्ग जैसे वरिष्ठ रोटेरियन को धोखा देने का काम कर सकते हैं और उनके साथ चालबाजी खेल सकते हैं, तो फिर उनके साथ अपना रवैया क्यों नहीं बदल सकते ? अशोक गर्ग के प्रति जेके गौड़ के बदले रवैये के पीछे हालाँकि मुकेश अरनेजा वाले ऐंगल को भी देखा/पहचाना जा रहा है । उल्लेखनीय है कि अशोक गर्ग को मुकेश अरनेजा के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । अशोक गर्ग के समर्थकों व शुभचिंतकों का कहना है कि जेके गौड़ ने आजकल अपना 'आका' चूँकि रमेश अग्रवाल को बनाया हुआ है, और रमेश अग्रवाल तथा मुकेश अरनेजा के बीच छत्तीस का संबंध बना हुआ है - इसलिए जेके गौड़ को भी मुकेश अरनेजा से दूरी बनानी/दिखानी पड़ रही है; और इस चक्कर में अशोक गर्ग को 'पिसना' पड़ रहा है । कुछेक अन्य लोगों का कहना लेकिन यह भी है कि खेमेबाजी के कारण अशोक गर्ग को जेके गौड़ से जो चोट पड़ेगी, वह इतनी बुरी नहीं लगती; जितनी चोट अशोक गर्ग को जेके गौड़ के बदलते व्यवहार और उनके घमंडी हो जाने के कारण लग रही है । अशोक गर्ग के समर्थकों का कहना है कि जेके गौड़ यदि मुकेश अरनेजा के उम्मीदवार होने के नाते भी अशोक गर्ग के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे हैं, तो यह बात भी तो जेके गौड़ के अवसरवादी होने का सुबूत ही है - जेके गौड़ को क्या यह बात याद नहीं है कि रोटरी में आज वह जहाँ हैं, वहाँ तक उन्हें पहुँचाने में मुकेश अरनेजा का कितना और कैसा सहयोग रहा है ? अशोक गर्ग ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अपनी उम्मीदवारी का अभियान जब शुरू किया था, तब उन्हें बड़ा भरोसा था कि मुकेश अरनेजा के उम्मीदवार होने का जो लाभ उन्हें मिलेगा, उसके साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में जेके गौड़ की भी मदद उन्हें मिलेगी । यह भरोसा उन्हें इसलिए भी था, क्योंकि जेके गौड़ की उम्मीदवारी के समय उन्होंने जेके गौड़ की हर तरह से मदद की थी । अशोक गर्ग को यह देख/जान कर लेकिन खासा झटका लगा है कि जेके गौड़ पूरी तरह अहसानफरामोश निकले । जेके गौड़ की इस अहसानफ़रामोशी ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार के रूप में अशोक गर्ग की चुनौती को बढ़ा दिया है ।

Tuesday, June 9, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में सुभाष जैन की चुनावी मीटिंग में उपस्थित हुए उनके अपने क्लब के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा लोगों के बीच की गईं बातों ने सुभाष जैन की उम्मीदवारी की संभावना को लेकर लोगों के बीच बने हुए संशय व अनिश्चय को वास्तव में और बढ़ा दिया है

गाजियाबाद । सुभाष जैन की गाजियाबाद में हुई चुनावी मीटिंग में उनके अपने क्लब के वरिष्ठ सदस्यों ने उनके चुनाव अभियान की हवा बिगाड़ दी - और इस तरह उनके अपने क्लब के वरिष्ठ सदस्य ही उनकी उम्मीदवारी के दुश्मन साबित हुए । सुभाष जैन के लिए मुसीबत की बात यह हुई कि अपनी चुनावी मीटिंग में अपने क्लब के वरिष्ठ सदस्यों की उपस्थिति को उन्होंने इस योजना के तहत संभव बनाया था ताकि वह डिस्ट्रिक्ट के लोगों को बता/दिखा सकें कि उनकी उम्मीदवारी को लेकर उनके अपने क्लब में चल रहा झगड़ा सुलट गया है, और उनके अपने क्लब में उनकी उम्मीदवारी को लेकर एक राय बन गई है । लेकिन उनके क्लब के वरिष्ठ सदस्यों ने मीटिंग में मौजूद दूसरे लोगों को जो बताया, उससे सुभाष जैन की योजना तो सफल नहीं ही हुई - बल्कि बात बिगड़ और गई । मीटिंग में लोगों के बीच जो बातें हुईं, उससे न सिर्फ पुराने घाव हरे और हो गए - बल्कि क्लब में सुभाष जैन की उम्मीदवारी का झगड़ा नए सिरे से गर्म और हो गया । सुभाष जैन के क्लब के ही लोगों ने मीटिंग में मौजूद दूसरे लोगों को बताया कि सुभाष जैन ने तो योगेश गर्ग को भी इस मीटिंग में बुलाया था और उनकी मौजूदगी को संभव करने के लिए काफी प्रयास किए थे - किंतु उनके प्रयास कामयाब नहीं हुए; और इसी से जाहिर है कि योगेश गर्ग ने अपनी उम्मीदवारी का दावा अभी छोड़ा नहीं है, तथा क्लब में उम्मीदवारी का झगड़ा अभी बदस्तूर जारी है । मीटिंग में सुभाष जैन के विरोधी और योगेश गर्ग के समर्थक के रूप में देखे/पहचाने जाने वाले सदस्यों की उपस्थिति ने हालाँकि मीटिंग के शुरू में दूसरे लोगों को आभास दिया कि सुभाष जैन ने क्लब को मैनेज कर लिया है तथा अपने विरोधियों को 'ठंडा' कर दिया है । लेकिन जल्दी ही उनके क्लब - रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल में उम्मीदवारी के जारी झगड़े की असलियत सामने आ गई । 
सुभाष जैन के क्लब के मीटिंग में मौजूद कुछेक सदस्यों ने तो लोगों के बीच यह तक स्वीकार किया और बताया कि इस मीटिंग में उनकी मौजूदगी की बात योगेश गर्ग को पता है, तथा वह योगेश गर्ग से बात करके ही इस मीटिंग में आए हैं । मजा यह हुआ कि उन्होंने तो लोगों को यह कहा/बताया कि इस मीटिंग में उपस्थित होने/न होने को लेकर उन्होंने योगेश गर्ग से बात की तो योगेश गर्ग ने उनसे यही कहा कि वह अपनी समझ और अपने विवेक से फैसला करें - दूसरे लोगों ने लेकिन यह समझा कि यह लोग मीटिंग में आये ही यह सोच कर थे कि वह दूसरे लोगों को क्लब की स्थिति की सच्चाई बतायेंगे । उनके सच्चाई बताने के चक्कर में लेकिन सुभाष जैन की मीटिंग के उद्देश्य का कबाड़ा हो गया ।
सुभाष जैन के लिए मुसीबत की बात यह हो रही है कि अपने ही क्लब में उन्हें अपनी उम्मीदवारी को लेकर जिस भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है, उसके कारण उनके लिए डिस्ट्रिक्ट में समर्थन जुटाना तो दूर की बात, अपनी उम्मीदवारी के प्रति लोगों को आश्वस्त तक कर पाना मुश्किल हो रहा है । सुभाष जैन ने पीछे एक बड़ा दाँव चला और दावा किया कि जैनी भाई होने के चलते पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रूपक जैन ने उन्हें समर्थन दे दिया है । उनकी चुनावी मीटिंग में शामिल हुए उनके ही क्लब के लोगों ने लेकिन उनके इस दावे को झूठा बताया । उनका कहना रहा कि रूपक जैन ने योगेश गर्ग को फोन करके बताया है कि सुभाष जैन उनके पास समर्थन माँगने आए थे, लेकिन उन्होंने सुभाष जैन को साफ बता दिया है कि उनका समर्थन तो योगेश गर्ग के लिए होगा - या उसके लिए होगा, जिसका समर्थन योगेश गर्ग करेंगे । रूपक जैन ने सुभाष जैन को इस बात के लिए उलाहना भी दिया कि तुमने तो हमारी इतनी इज्जत भी नहीं रखी कि उम्मीदवारी प्रस्तुत करने से पहले विचार-विमर्श कर लेते; समर्थन माँगने अब आए हो, जब तीन सौ लोगों से समर्थन माँग चुके हो; समर्थन माँगने वाले लोगों की सूची में तीन सौ एक नंबर तो उसका होता है, जिसे तुम कुछ समझ ही नहीं रहे हो - अब जब हमें कुछ समझ ही नहीं रहे हो, तो हमारे समर्थन की चिंता क्यों कर रहे हो ? आदि-इत्यादि । इस तरह की जली-कटी सुनाने के साथ-साथ रूपक जैन ने सुभाष जैन को कुछ अच्छे सुझाव भी दिए - जिनमें प्रमुख यही था कि अपनी उम्मीदवारी के लिए दूसरों से समर्थन माँगने से पहले उन्हें अपने क्लब में समर्थन हासिल करने का प्रयास करना चाहिए । इन सब बातों को बताने के साथ ही सुभाष जैन के क्लब के वरिष्ठ सदस्यों ने अनुमान व्यक्त किया कि शायद रूपक जैन के सुझाव पर ही सुभाष जैन अंततः योगेश गर्ग के घर जाने और उनसे बात करने के लिए मजबूर हुए । 
डिस्ट्रिक्ट में रूपक जैन और योगेश गर्ग की नजदीकियत को हर कोई जानता/पहचानता है । इसके बावजूद सुभाष जैन ने योगेश गर्ग को दरकिनार कर रूपक जैन से तार जोड़ने की कोशिश यह सोच कर की होगी कि जैन होने के कारण रूपक जैन बिना किसी ना-नुकुर के उनके समर्थन के लिए राजी हो जायेंगे । जैन होने के कारण हर जैन उनका सगा होगा, सुभाष जैन यदि अपने पिछले अनुभव को याद रखते तो ऐसा न सोचते । उल्लेखनीय है कि मुकेश अरनेजा के साथ हुए अपने पिछले चुनाव में मिली पराजय के बाद खुद उन्होंने ही लोगों के बीच रोना रोया था कि रिश्ते के एक साले ने ही उन्हें धोखा दिया । यानि जिससे धोखा खाने की शिकायत वह कर रहे थे वह रिश्ते में उनका साला भी था और जैन भी था । इस अनुभव के बावजूद जैन होने के कारण उन्होंने रूपक जैन से समर्थन मिलने की उम्मीद की, और बदले में रूपक जैन से जली-कटी सुनी । रूपक जैन से जली-कटी सुनने के बाद हो सकता है कि सुभाष जैन को समझ में आ गया हो कि योगेश गर्ग को वह जितने हलके में ले रहे हैं, उससे उनकी मुश्किलें बढ़ ही रही हैं और इसलिए ही वह योगेश गर्ग के घर जाने और उन्हें मनाने के लिए प्रयास करने के लिए मजबूर हुए । 
सुभाष जैन की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए जो लोग तैयार हैं, उनका भी मानना और कहना है कि योगेश गर्ग को मनाने तथा अपने क्लब का पूरा व एकतरफा समर्थन पाने का प्रयास उन्हें सबसे पहले करना चाहिए था । इस काम में देर करके और इसे तवज्जो न देने से सुभाष जैन ने अपना बड़ा नुकसान कर लिया है । इसका सबसे बड़ा नुकसान यही है कि अपनी उम्मीदवारी लिए समर्थन का माहौल बनाने का उनका हर प्रयास फेल हो जा रहा है । अपनी सक्रियता से वह दो कदम आगे बढ़ते हैं, लेकिन क्लब का विवाद उन्हें चार कदम पीछे कर देता है । उल्लेखनीय है कि अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए जिन भी उम्मीदवारों का नाम चर्चा में है, उनमें अभी एक अकेले सुभाष जैन ही लोगों के बीच सक्रिय हैं - इस हिसाब से सुभाष जैन की उम्मीदवारी को दूसरे संभावित उम्मीदवारों से बहुत बहुत आगे दिखना चाहिए था; हकीकत और विडंबना की बात किंतु यह है कि डिस्ट्रिक्ट में लोग अभी उनकी उम्मीदवारी को लेकर ही आश्वस्त नहीं हो पा रहे हैं - और डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच अभी उनकी उम्मीदवारी को लेकर ही अनिश्चय व संशय बना हुआ है । गाजियाबाद में आयोजित की गई चुनावी मीटिंग में उनके ही क्लब के वरिष्ठ सदस्यों से दूसरे लोगों को जो जो बातें सुनने को मिलीं, उससे उनकी उम्मीदवारी की संभावना को लेकर बना हुआ उक्त अनिश्चय व संशय वास्तव में और बढ़ गया है । 

Friday, May 15, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद हेतु प्रस्तुत अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने में लगे सुभाष जैन को जेके गौड़ ने जो आईना दिखाया है, सुभाष जैन उससे कोई सबक लेंगे क्या ?

गाजियाबाद । सुभाष जैन को अपनी तमाम सक्रियता के बावजूद अपनी उम्मीदवारी के लिए जितना/जैसा ठंडा और नकारात्मक रिस्पॉन्स मिल रहा है, उससे उनकी उम्मीदवारी के अभियान के तेजी पकड़ने के अनुमान फेल होते हुए दिखने लगे हैं । बहुत लोगों को उम्मीद थी कि सुभाष जैन ने जब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत की है, तो वह अच्छी तैयारी के साथ उसके लिए समर्थन जुटाने के अभियान में निकलेंगे । सुभाष जैन अपने परिचितों के बीच अपनी इसी खूबी के लिए जाने/पहचाने जाते हैं कि वह जो भी काम हाथ में लेते हैं, उसे प्रभावी तरीके से अंजाम तक पहुँचाते हैं । लेकिन अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तावित अपनी उम्मीदवारी के अभियान के संदर्भ सुभाष जैन अपनी उक्त खूबी को प्रदर्शित कर पाने में अभी तक तो विफल ही नजर आ रहे हैं । रोटरी क्लब गाजियाबाद आईडियल के प्रेसीडेंट इलेक्ट पंकज जैन के एक बिजनेस ईवेंट में उन्होंने अपनी उम्मीदवारी के प्रमोशन का जो मौका बनाया, उसके कारण तो उनकी भारी फजीहत हुई है । उक्त ईवेंट में सुभाष जैन की तरफ से आमंत्रित किए गए रोटेरियंस को वहाँ जिस बदइंतजामी का शिकार होना पड़ा, उससे देख/सुन कर उन लोगों को गहरा धक्का लगा जो सुभाष जैन की तरफ से बेहतर तैयारियों की उम्मीद लगाए हुए थे । मौके पर मौजूद कुछेक रोटेरियंस के अनुसार, बदइंतजामी को दूर करने के लिए लोगों के बीच सुभाष जैन को खुद पकौड़े सर्व करने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन फिर भी कई रोटेरियंस पकौड़े न मिलने की शिकायत करते सुने/देखे गए । सुभाष जैन के उक्त उपक्रम को कई रोटेरियंस ने आपसी बातचीत में, तो कुछेक ने सुभाष जैन के सीधे मुँह पर वाहियात बताया । 'बेगाने की शादी में अब्दुल्ला के दीवाने' होने वाले मुहावरे की तर्ज पर पंकज जैन के आयोजन से फायदा उठाने की सुभाष जैन ने जो कोशिश की, उसने उन्हें ऐसा झटका दिया है कि उससे उबरना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है । 
सुभाष जैन के लिए इससे भी बड़ी चुनौती लेकिन क्लब में बनी हुई है, जिससे उबरने/निकलने के लिए उन्हें कोई उपाय तक नहीं सूझ रहा है । क्लब में योगेश गर्ग ने अपनी उम्मीदवारी का दावा जता कर सुभाष जैन की उम्मीदवारी की राह में जो रोड़ा डाला हुआ है, उस रोड़े को हटाने के बारे में सुभाष जैन अभी तक कोई प्रयास करते हुए भी नहीं दिखे हैं । उनके नजदीकियों का कहना है कि क्लब में योगेश गर्ग द्वारा पैदा हुए इस झंझट से निबटने की उनकी सारी उम्मीद अगले रोटरी वर्ष में होने वाले क्लब के अध्यक्ष आशीष गर्ग पर टिकी है । आशीष गर्ग को सुभाष जैन 'अपना आदमी' बताते हुए दावा कर रहे हैं कि अगले रोटरी वर्ष में योगेश गर्ग से आशीष गर्ग निपटेंगे । सुभाष जैन को आशीष गर्ग से यह उम्मीद भले ही हो, लेकिन क्लब के दूसरे सदस्यों का मानना/कहना है कि आशीष गर्ग भले ही सुभाष जैन के 'आदमी' हों, लेकिन अध्यक्ष के रूप में काम तो उन्हें नियमानुसार ही करना होगा; और इसलिए सुभाष जैन जिस मनमाने तरीके से मामले को हल कर लेने की उम्मीद लगाये हुए हैं, उससे तो बात बनेगी नहीं । उल्लेखनीय है कि योगेश गर्ग से निपटने के लिए सुभाष जैन ने अभी ही प्रयास किए थे और उन्हें उम्मीद थी कि स्कूली धंधे में संग-साथ के चलते मौजूदा अध्यक्ष स्वाति गुप्ता उनका साथ देंगी । लेकिन स्वाति गुप्ता से उन्हें कोई मदद या फेवर मिलता नहीं दिखा तो उन्होंने अपने प्रयासों को समेट लिया और अपनी सारी उम्मीद आशीष गर्ग पर टिका दी हैं । क्लब में जो सुभाष जैन के शुभचिंतक भी हैं, उनका भी मानना और कहना है कि सुभाष जैन 'जिस तरह की' मदद अध्यक्ष से चाहते हैं उस तरह की मदद करने को न स्वाति गुप्ता तैयार हुईं और न आशीष गर्ग तैयार होंगे - तैयार हो भी गए, तो भी कर नहीं पायेंगे । 
सुभाष जैन के लिए क्लब का यह झमेला डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच समर्थन जुटाने की उनकी कोशिशों में एक बड़ी रूकावट बना हुआ है । दरअसल डिस्ट्रिक्ट में लोगों को यही समझना मुश्किल हो रहा है कि सुभाष जैन अपनी उम्मीदवारी के लिए जब अपने क्लब में हरी झंडी नहीं ले पा रहे हैं, तो वह उम्मीदवार बनेंगे कैसे ? सुभाष जैन के सामने उम्मीदवार बनने के यूँ तो दूसरे रास्ते हो सकते हैं, लेकिन समस्या स्पष्टता की है - जिसके अभाव में सुभाष जैन की उम्मीदवारी को लेकर ही कन्फ्यूजन बना हुआ है । ऐसे में, जबकि सुभाष जैन लोगों के बीच अपनी उम्मीदवारी को लेकर ही भरोसा पैदा नहीं कर पा रहे हैं, तब फिर अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाना उनके लिए कितना मुश्किल हो रहा होगा - इसे सहज ही समझा जा सकता है । सुभाष जैन के लिए मुसीबत की बात यह हो रही है कि डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच उनकी उम्मीदवारी की हवा नहीं बनती दिख रही है, तो उसके कारण क्लब में उनकी उम्मीदवारी के संभावित समर्थक हतोत्साहित हो रहे हैं । यानि क्लब का झंझट उन्हें दोनों तरफ से चोट पहुँचा रहा है । इसीलिए सुभाष जैन की उम्मीदवारी के प्रति समर्थन का भाव रखने रोटेरियंस का मानना और कहना है कि सुभाष जैन को पहले अपने क्लब में पैदा हुए झंझट को हल करना चाहिए, जिससे कि डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच उनकी उम्मीदवारी को लेकर पैदा हुआ और बना हुआ कन्फ्यूजन दूर हो सके ।
सुभाष जैन को जेके गौड़ के रवैये से भी झटका लगा है । स्कूली धंधे की जो सक्रियता है उसमें तो जेके गौड़ उनके साथ बिलकुल कंधे से कंधा मिलाकर रहते हैं और उनकी हाँ में हाँ मिलाते रहते हैं; रोटरी में भी जेके गौड़ अभी तक उनके साथ 'ठीक' ही रहे हैं; लेकिन सुभाष जैन ने शिकायत की है कि जब से वह उम्मीदवार 'बने' हैं, तब से जेके गौड़ का रवैया कुछ बदला बदला से है । जेके गौड़ के बदले बदले रवैये की शिकायत कई अन्यों को भी है - हालाँकि यह शिकायत जायज नहीं है । जेके गौड़ अब गवर्नर हैं यार, रवैया कुछ बदलना भी चाहिए; और उनके बदले रवैये को झेलने के लिए दूसरे लोगों को तैयार भी होना चाहिए । सुभाष जैन की समस्या लेकिन दूसरी है । अपनी उम्मीदवारी को उन्होंने अचानक से यदि प्रस्तुत किया है, तो उसके पीछे जेके गौड़ की ही प्रेरणा रही है । सुभाष जैन ने खुद ही लोगों को बताया है कि जेके गौड़ से मदद मिलने का आश्वासन मिलने के बाद ही उन्होंने अपनी उम्मीदवारी को प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है । लेकिन अब जब वह उम्मीदवार बन गए हैं, तब जेके गौड़ उन्हें कोई तवज्जो नहीं दे रहे हैं और उनकी पर्याप्त मदद नहीं कर रहे हैं । जेके गौड़ का कहना लेकिन कुछ और है । जिन लोगों ने उन्हें बताया कि सुभाष जैन उनसे मदद नहीं मिलने से खफा हैं, उन्हें जेके गौड़ ने कहा कि सुभाष जैन की समस्या यह है कि वह सोचते/चाहते हैं कि मैं रोजाना सुबह उन्हें फोन करूँ और उनसे पूछूँ कि मुझे उनकी क्या क्या मदद करनी है: जेके गौड़ ने थोड़ा तल्खी से कहा कि मदद सुभाष जैन को मुझसे चाहिए तो सुभाष जैन को मुझे फोन करना होगा और बताना होगा कि मुझसे उन्हें क्या मदद चाहिए । जेके गौड़ ने अपने इस रिएक्शन से सुभाष जैन को आईना दिखाने का जो काम किया है, वह स्वाभाविक भी है और सही भी है; साथ ही इससे यह भी पता चलता है कि सुभाष जैन के एटीट्यूड से जेके गौड़ कितने आहत हैं । 
सुभाष जैन का यह एटीट्यूड ही उनके लिए सबसे बड़ी समस्या है और इसी के कारण तमाम सक्रियता के बावजूद उनकी उम्मीदवारी के अभियान में हवा भरती हुई नहीं दिख रही है । 

Tuesday, April 21, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए सुभाष जैन को अपने लिए स्थितियाँ अनुकूल तो खूब दिख रही हैं, लेकिन क्लब में योगेश गर्ग ने भी अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करके उनके लिए बड़ी समस्या और चुनौती पैदा कर दी है

गाजियाबाद । सुभाष जैन ने अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की बात करके लोगों को हैरान कर दिया है । लोगों के लिए हैरान होने का कारण यह रहा कि अभी चार दिन पहले ही तो उन्होंने सुभाष जैन को यह कहते हुए सुना था कि अगले तीन-चार वर्ष तो वह बहुत ही व्यस्त होने के कारण अपनी उम्मीदवारी के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं; लेकिन अब वही सुभाष जैन खुद ही अपनी उम्मीदवारी की बात कह रहे हैं । किसी के लिए भी यह समझना मुश्किल हो रहा है कि चार दिन में आखिर ऐसा क्या हो गया है कि सुभाष जैन की सारी व्यस्तता छूमंतर हो गई और वह उम्मीदवार बनने के लिए तैयार हो गए हैं ? लोगों के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि चार दिन पहले अपनी व्यस्तता की जो बात उन्होंने कही थी, वह यदि झूठ थी - तो क्या जरूरी है कि अब जो वह अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की बात कर रहे हैं, वह झूठ नहीं होगी ? दरअसल सुभाष जैन के इसी विरोधाभासी व्यवहार के कारण अभी कोई भी उनकी उम्मीदवारी की बात को गंभीरता से नहीं लेता दिख रहा है ।
सुभाष जैन की उम्मीदवारी की बात को कोई इसलिए भी गंभीरता से नहीं ले रहा है, क्योंकि उनके अपने क्लब - रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल में उनकी उम्मीदवारी को लेकर झमेला पैदा हो गया है । सुभाष जैन ने अपनी उम्मीदवारी की बात बताते हुए लोगों से इस बात का दावा किया कि उन्हें अपने क्लब में अपनी उम्मीदवारी के लिए हरी झंडी मिल गई है; और जब कुछेक लोगों ने क्लब के वरिष्ठ सदस्य योगेश गर्ग की उम्मीदवारी के बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने जबाव दिया कि योगेश गर्ग ने भी उनकी उम्मीदवारी के प्रति समर्थन व्यक्त कर दिया है । सुभाष जैन ने लोगों के बीच भले ही यह दावे कर दिए, लेकिन उनके यह दावे जल्दी ही झूठे साबित हो गए । क्लब के पदाधिकारियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि क्लब में औपचारिक तौर पर अभी सुभाष जैन की उम्मीदवारी के बारे में कोई फैसला होना तो दूर की बात है, अभी कोई विचार-विमर्श भी नहीं हुआ है । क्लब के पदाधिकारियों का तो यहाँ तक कहना है कि जिस दिन उन्हें सुभाष जैन की तरफ से अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की इच्छा जताता हुआ ईमेल संदेश मिला, उसके अगले ही दिन उन्हें योगेश गर्ग की तरफ से भी अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने बाबत पत्र प्राप्त हुआ । अब यदि योगेश गर्ग भी अगले रोटरी वर्ष में अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की बात कर रहे हैं, तो सुभाष जैन का यह कहना/बताना झूठ ही हुआ न कि उनके क्लब ने उनकी उम्मीदवारी को हरी झंडी दे दी है और योगेश गर्ग भी उनकी उम्मीदवारी को लेकर राजी हैं ।
इन तथ्यों ने सुभाष जैन की उम्मीदवारी को लोगों के बीच मजाक का विषय बना दिया है । जिन लोगों को सुभाष जैन के साथ हमदर्दी है और जो चाहते हैं कि सुभाष जैन को उम्मीदवार बनना चाहिए, उन्हें भी यह समझना मुश्किल हो रहा है कि सुभाष जैन ने अपनी उम्मीदवारी को इतने बचकाने तरीके से और झूठ का सहारा लेते हुए प्रस्तुत क्यों किया है ? उन्हें भी लगता है कि सुभाष जैन को अपनी उम्मीदवारी के संदर्भ में पहले अपने क्लब को भरोसे में लेना चाहिए था, और क्लब के झगड़ों/झंझटों को निपटाना चाहिए था - और फिर उसके बाद उन्हें दूसरे लोगों से अपनी उम्मीदवारी की बात करना चाहिए था । सुभाष जैन के शुभचिंतकों को भी लगता है कि अपने क्लब में अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाए बिना सुभाष जैन ने जिस तरह से अपनी उम्मीदवारी को प्रस्तुत किया है, उससे न सिर्फ उनकी उम्मीदवारी का हल्कापन जाहिर हुआ है, वह बल्कि मजाक का विषय भी बन गई है ।
दूसरों के बीच भले ही सुभाष जैन की उम्मीदवारी मजाक का विषय बन गई हो, लेकिन अपनी उम्मीदवारी को लेकर सुभाष जैन खुद बहुत आश्वस्त हैं । लोगों से बात करते हुए उन्होंने जो कुछ कहा है उसका सार यह है कि सुभाष जैन को लगता है कि प्रवीन निगम को कोई जानता नहीं है; दीपक गुप्ता को कोई पसंद नहीं करता; अशोक गर्ग के बस की चुनाव लड़ना नहीं है; प्रसून चौधरी के कट्टर समर्थक विकास चोपड़ा जब उनके समर्थन में आ जायेंगे तो प्रसून चौधरी के पास भी कुछ बचा नहीं रह जायेगा । दरअसल सुभाष जैन ने विकास चोपड़ा को कुछ बिजनेस दिया है, जिसके भरोसे वह मानते हैं कि वह उम्मीदवार बनेंगे तो विकास चोपड़ा, प्रसून चौधरी को छोड़ कर उनके समर्थन में आ जायेंगे । सुभाष जैन ने जेके गौड़ का समर्थन मिलने का भी दावा किया है । स्कूलों की जो एसोसिएशनबाजी होती है, उसमें जेके गौड़ चूँकि सुभाष जैन की हाँ में हाँ मिलाते रहते हैं, इसलिए सुभाष जैन को भरोसा है कि वह उम्मीदवार बनेंगे तो जेके गौड़ उनकी उम्मीदवारी का झंडा खुद-ब-खुद उठा लेंगे । इतनी अनुकूल स्थितियों के बीच, फिर मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल भी उनका समर्थन करने को मजबूर हो जायेंगे । इस तरह, सुभाष जैन को विश्वास है कि वह बड़े आराम से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुन लिए जायेंगे ।
सुभाष जैन का आराम से चुन लिए जाने के इस सपने का क्या होगा, यह तो बाद में पता चलेगा; सुभाष जैन के लिए अभी मुसीबत लेकिन यह पैदा हो गई है कि उनकी इन बातों के आधार पर उनका मजाक ज्यादा बन रहा है । क्लब में योगेश गर्ग ने भी अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करके सुभाष जैन के लिए बड़ी चुनौती पैदा कर ही दी है । क्लब में सुभाष जैन के लिए जो समस्याएँ पैदा हुई हैं, उनके लिए खुद सुभाष जैन को ही जिम्मेदार माना/बताया जा रहा है । क्लब में सुभाष जैन के संगी-साथियों का ही कहना है कि सुभाष जैन ने अपने व्यवहार और अपने रवैये से लोगों को अपने खिलाफ कर लिया है; समस्या की बात यह है कि उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं है कि उनका तौर-तरीका उन्हें सच्चाई से अवगत ही नहीं होने दे रहा है और वह खामख्याली में ही अनुमान लगाये जा रहे हैं । यही कारण है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत उनकी उम्मीदवारी प्रस्तुत होते ही लोगों के बीच मजाक का विषय बन गई है ।

Saturday, July 5, 2014

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जेके गौड़ ने सुभाष जैन को सब्जबाग दिखा कर रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल को विघटन के कगार पर पहुँचा दिया है

गाजियाबाद । रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के सदस्यों ने आजकल डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जेके गौड़ को निशाने पर लिया हुआ है । उनके बीच इस बात को लेकर बेहद नाराजगी और गुस्सा है कि जेके गौड़ ने अपनी घटिया तिकड़मों से उनके क्लब में फूट पड़वाने वाली स्थितियाँ पैदा कर दी हैं । रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल में योगेश गर्ग और सुभाष जैन के बीच चल रहे 'शीत-युद्ध' के कारण क्लब के विघटन की जो स्थिति बनी है उसके पीछे मुख्य खेल जेके गौड़ का ही देखा/पहचाना जा रहा है । क्लब के कुछेक लोगों ने दावा तो किया है कि योगेश गर्ग और सुभाष जैन के बीच जो मामला है, उसे सुलझा लिया जायेगा और क्लब की एकता बनी रहेगी । लेकिन क्लब के अन्य कुछेक लोगों के अनुसार, सुभाष जैन के रवैये को देखते/समझते हुए इस दावे के सच साबित होने की उम्मीद कम ही है । इन कुछेक सदस्यों का कहना है कि उन्होंने योगेश गर्ग से अनुरोध किया था कि वह सुभाष जैन से मिलकर 'अपना झगड़ा' ख़त्म करें - लेकिन योगेश गर्ग ने यह कहकर उनके अनुरोध को ख़ारिज कर दिया कि उनका सुभाष जैन के साथ कोई झगड़ा ही नहीं है, वह किस झगड़े को ख़त्म करें । इन लोगों ने योगेश गर्ग पर लेकिन दबाव बनाया कि वह अपनी तरफ से पहल करके सुभाष जैन से बात करें । क्लब के सदस्यों का दबाव बना, तो योगेश गर्ग इसके लिए राजी हो गए । उन्होंने सुभाष जैन को फोन किया और मिलने की बात की - सुभाष जैन ने अगले दिन अपने ऑफिस में मिलने का समय तय किया । अगले दिन वह समय आता, उससे पहले योगेश गर्ग को सुभाष जैन से एसएमएस मिला जिसमें कहीं जाने की बात कहते हुए मिलने के आयोजन को ख़त्म दिया । सुभाष जैन की तरफ से - न उस समय और न बाद में ही - यह भी नहीं बताया गया कि मिलने का कार्यक्रम कब हो सकता है । सुभाष जैन के इस रवैये से साफ हो जाता है कि क्लब का भविष्य किस दिशा की तरफ बढ़ रहा है ।
समझा जाता है कि सुभाष जैन के इस रवैये को खाद-पानी जेके गौड़ की तरफ से मिल रहा है । सुभाष जैन और जेके गौड़ के 'संबंधों' से परिचित क्लब के सदस्यों का कहना है कि जेके गौड़ ने सुभाष जैन को समझा दिया है कि वह तो उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनवाना चाहते हैं, लेकिन योगेश गर्ग उनकी राह का रोड़ा बनेंगे - इसलिए पहले योगेश गर्ग से ही निपटो । हाल ही के दिनों में, पहले गाजियाबाद के अन्य क्लब्स के लोगों के बीच और फिर अपने ही क्लब की असेम्बली में योगेश गर्ग को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार बनाने की बात जिस तरह से उठी उससे सुभाष जैन को जेके गौड़ की बात में दम दिखा है और वह जेके गौड़ की सलाहानुसार योगेश गर्ग से निपटने की तैयारी में जुट गए हैं । योगेश गर्ग के साथ सुभाष जैन के रोटरी के स्तर पर ही नहीं, परिवार के स्तर पर भी जिस तरह के संबंध रहे हैं, उनसे परिचित रहे क्लब के सदस्यों को - मिलने की योगेश गर्ग की कॉल को टाल देने की सुभाष जैन की कार्रवाई में उक्त तैयारी के संकेत और सुबूत दिख रहे हैं । योगेश गर्ग और सुभाष जैन के बीच का जो 'शीत-युद्ध' क्लब की एकता के लिए खतरा बन गया है, उसके लिए एक अकेले जेके गौड़ को जिम्मेदार ठहराना, हालाँकि उनके साथ ज्यादती करना भी होगा । सच यही है कि क्लब में 'आग' तो पहले से ही सुलग रही थी - लेकिन हाँ, उसमें घी डालने का काम जेके गौड़ ने ही किया है । जेके गौड़ ने घी तबियत से डाला है, और इसके चलते ही क्लब में सुलग रही आग भड़क उठी है ।
क्लब के सदस्यों का ही कहना है कि पिछले तीन-चार वर्षों में सुभाष जैन को यह बात सालना शुरू हुई कि रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में 'योगेश गर्ग के क्लब' के रूप में क्यों देखा/पहचाना जाता है । यह खुन्नस पहली बार उस वर्ष देखने में आई, जिस वर्ष संजय पाण्डेय अध्यक्ष थे । जीओेवी में तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर असित मित्तल ने अध्यक्ष के रूप में संजय पाण्डेय की परफॉर्मेंस पर असंतोष व्यक्त किया था, लेकिन इसके दो महीने बाद ही उन्होंने संजय पाण्डेय के लिए सबसे बड़े अवार्ड का फैसला किया । असित मित्तल ने अपने इस फैसले से जब योगेश गर्ग को अवगत कराया तो योगेश गर्ग ने उनके इस फैसले पर हैरानी व्यक्त करते हुए कहा कि अभी दो महीने पहले ही तुम जिस अध्यक्ष के कामकाज पर असंतोष जता चुके हो, उसे सबसे बड़ा अवार्ड दोगे तो यह पक्षपातपूर्ण फैसला नहीं लगेगा । असित मित्तल ने उन्हें बताया कि इस फैसले के लिए असिस्टेंट गवर्नर अतुल गोयल और सुभाष जैन की बड़ी तगड़ी सिफारिश है । बाद में, अतुल गोयल ने योगेश गर्ग को समझाने का प्रयास किया कि हमारे क्लब के अध्यक्ष को डिस्ट्रिक्ट का सबसे बड़ा अवार्ड मिल रहा है, तो आप उसका विरोध क्यों कर रहे हैं । योगेश गर्ग ने उनसे कहा कि वह विरोध नहीं कर रहे हैं; वह तो सिर्फ यह कह रहे हैं कि तिकड़म और सिफारिश से लिए गए अवार्ड से क्लब की बदनामी ही होगी । योगेश गर्ग के इस तर्क को तरह तरह से व्याख्यायित करके अतुल गोयल और सुभाष जैन ने क्लब के लोगों को बताया कि संजय पाण्डेय को उक्त अवार्ड मिलने का विरोध योगेश गर्ग इसलिए कर रहे हैं, ताकि डिस्ट्रिक्ट के सबसे बड़े अवार्ड के प्राप्तकर्ता के रूप में भाभी जी का नाम ही चलता रहे - भाभी जी, यानि योगेश गर्ग की पत्नी रेखा गर्ग । उल्लेखनीय है कि क्लब के अध्यक्ष के रूप में रेखा गर्ग को तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुशील खुराना ने डिस्ट्रिक्ट का सबसे बड़ा अवार्ड दिया था । रेखा गर्ग को मिले अवार्ड को बीच में लाकर सुभाष जैन ने अतुल गोयल के साथ मिल कर योगेश गर्ग पर पहला बड़ा हमला किया था ।
बाद में, पता यह चला कि संजय पाण्डेय को उक्त अवार्ड दिलवाने के लिए अतुल गोयल और सुभाष जैन ने असित मित्तल के साथ क्लब के वोट का सौदा किया था । यह सौदा कराने का काम जेके गौड़ ने किया था । उस रोटरी वर्ष में, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए संजय खन्ना और रवि चौधरी के बीच चुनाव हो रहा था, जिसमें रवि चौधरी की उम्मीदवारी की बागडोर असित मित्तल के हाथ में थी और गाजियाबाद में रवि चौधरी के लिए समर्थन जुटाने का ठेका जेके गौड़ ने लिया हुआ था । रवि चौधरी की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने वास्ते जेके गौड़ द्धारा आयोजित पार्टी में गाना गाने आई लड़की को लेकर मार-पिटाई और खून-खच्चर तक होने वाली घटना 'रचनात्मक संकल्प' के पाठकों को याद होगी ही । उस चुनाव में योगेश गर्ग ने संजय खन्ना की उम्मीदवारी का समर्थन करने की वकालत की थी, किंतु जेके गौड़ के मार्फ़त असित मित्तल से हो चुके सौदे के चलते अतुल गोयल और सुभाष जैन ने रवि चौधरी के हक़ में फैसला करवाया । ऐसा करने के जरिये सुभाष जैन ने दरअसल यह दिखाने/बताने की कोशिश की कि जिस क्लब को योगेश गर्ग के क्लब के रूप में देखा/पहचाना जाता है, उस क्लब में योगेश गर्ग की चलती ही नहीं है ।
इसके अगले वर्ष, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार के रूप में जेके गौड़ ने इन पँक्तियों के लेखक को ही कई बार बताया था कि गाजियाबाद में एक अकेले योगेश गर्ग ही उनसे नाराज थे, लेकिन उन्हें तो उन्होंने एक बार मिल कर ही मना लिया था । पीछे, नोमीनेटिंग कमेटी के एक चुनाव में जेके गौड़ ने योगेश गर्ग के साथ धोखाधड़ी की थी, योगेश गर्ग उसी के कारण जेके गौड़ से खफा थे । खुद जेके गौड़ के अनुसार, जेके गौड़ ने जब अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन की गुहार लगाई तो योगेश गर्ग ने उन्हें इस बात का कोई अहसास ही नहीं होने दिया कि वह उनसे नाराज भी थे । लेकिन चुने जाते ही, जेके गौड़ ने कहना/बताना शुरू किया कि योगेश गर्ग तो उनकी जगह डॉक्टर सुब्रमणियन का समर्थन करना चाहते थे लेकिन क्लब में उनकी किसी ने सुनी ही नहीं । जेके गौड़ के अनुसार ही, सुभाष जैन लगातार उन्हें बताते रहते थे कि क्लब में योगेश गर्ग तो डॉक्टर सुब्रमणियन के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करते हैं । क्लब के लोगों का कहना था कि सुभाष जैन इस तरह की बातें दरअसल यह बताने/जताने के लिए करते हैं ताकि लोगों के बीच यह संदेश जाए कि क्लब में योगेश गर्ग की तो जरा भी नहीं चलती है, और क्लब का जो भी फैसला होता है वह उनकी मर्जी और पसंद से होता है । क्लब के लोगों ने हालाँकि तुरंत ही स्पष्ट कर दिया था कि उम्मीदवारों को लेकर क्लब में जब भी कभी चर्चा होती थी, योगेश गर्ग हमेशा ही यही कहते थे कि जो भी उम्मीदवार हैं उनमें गवर्नर बनने लायक तो डॉक्टर सुब्रमणियन हैं, किंतु गाजियाबाद का होने के नाते हमें समर्थन जेके गौड़ का करना चाहिए । यानि, सच यह है कि जेके गौड़ गवर्नर के रूप में योगेश गर्ग के लिए पहली पसंद तो नहीं थे, किंतु जेके गौड़ का विरोध उन्होंने कभी नहीं किया । सुभाष जैन और जेके गौड़ लेकिन फिर भी योगेश गर्ग को विरोधी के रूप में देखते/बताते रहे ।
पिछले दिनों हुए सीओएल के चुनाव में रमेश अग्रवाल के पक्ष में, तथा डिस्ट्रिक्ट के विभाजन के पक्ष में क्लब का वोट/समर्थन जुटाने के लिए जेके गौड़ ने सुभाष जैन की मदद ली, और सुभाष जैन ने योगेश गर्ग को अँधेरे में और धोखे में रखकर उक्त फैसले करवाए । इस तरह, पिछले तीन वर्षों में क्लब के भीतर रहते हुए सुभाष जैन ने और क्लब से बाहर रहते हुए जेके गौड़ ने क्लब में योगेश गर्ग की जड़ें खोदने का काम किया और अधिकतर मौकों पर वह सफल भी रहे/दिखे । लेकिन निरंतर प्राप्त की जाती रही सफलताओं के बावजूद वह योगेश गर्ग की पहचान और हैसियत को एक खरोंच भी नहीं दे पाए । डिस्ट्रिक्ट विभाजन की राजनीति के चलते गाजियाबाद के रोटेरियंस के सामने जब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवारों को चुनने का मौका आया तो उन्होंने सुभाष जैन को नहीं, योगेश गर्ग को चुना । यह तो हुई गाजियाबाद की बात; इसके बाद जब रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के सदस्यों ने क्लब असेम्बली में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया को अंजाम दिया तो उन्होंने भी सुभाष जैन की मौजूदगी में योगेश गर्ग को उम्मीदवार के रूप में चुना । इस तरह पहले शहर में और फिर क्लब में सुभाष जैन को योगेश गर्ग से मात खानी पड़ी । समझा जाता है कि इससे सुभाष जैन बुरी तरह बौखला गए हैं और अब वह योगेश गर्ग के साथ आरपार कर लेना चाहते हैं । उनका रवैया देख/जान कर ऐसा लगता है कि जैसे उन्होंने तय कर लिया है कि अब बात नहीं होगी, अब एक्शन होगा ।
जेके गौड़ ने सुभाष जैन को आश्वस्त किया है कि अपने गवर्नर-काल में वह उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुनवायेंगे । उस महान उपलब्धि को प्राप्त करने के लिए - सुभाष जैन को भी लगता है, और जेके गौड़ ने भी उन्हें समझाया है कि योगेश गर्ग का पक्का इंतजाम करना होगा । इसीलिए सुभाष जैन ने योगेश गर्ग की बात करने की पहल को ठुकरा दिया है । सुभाष जैन के इस रवैये से रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल में कुछ खास धमाका होने की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है ।