Wednesday, August 8, 2018

इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट सुशील गुप्ता के लिए - 'हू इज सुशील गुप्ता' कहने वाले डिस्ट्रिक्ट 3012 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता के धमकीभरे रवैये से अगले रोटरी वर्ष में क्लब्स के प्रेसीडेंट के बीच डर बैठा

गाजियाबाद । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता के धमकीभरे रवैये ने क्लब्स के प्रेसीडेंट इलेक्ट को बुरी तरह डराया हुआ है, और कई तो बेचारे यह सोच-सोच कर परेशान हैं कि अगले रोटरी वर्ष में वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता को झेलेंगे कैसे ? कई एक क्लब्स के पदाधिकारियों का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होते हुए सुभाष जैन उन पर इतना रौब नहीं जमाते हैं, जितना रौब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट होते हुए दीपक गुप्ता दिखाते हैं । उल्लेखनीय है कि इन दिनों क्लब्स में अधिष्ठापन समारोह हो रहे हैं; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुभाष जैन ने सुझाव दिया हुआ है कि अधिष्ठापन समारोह के साथ-साथ क्लब्स जीओवी (गवर्नर्स ऑफिशियल विजिट) भी करवा लें - प्रायः सभी क्लब्स ने उनके इस सुझाव को उपयोगी माना है, जिसके चलते क्लब्स जीओवी तथा अधिष्ठापन समारोह साथ-साथ ही करवा रहे हैं । इसके चलते कार्यक्रम लंबा हो जाता है; लंबाई कतरने के लिए क्लब्स के पदाधिकारी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी के भाषण पर कैंची चला देते हैं - इस बात पर दीपक गुप्ता बुरी तरह भड़क उठते हैं । शुरू में इस तरह की स्थितियों से दो-चार होने पर दीपक गुप्ता ने तमाशा शुरू किया, जिसके तहत वह कार्यक्रम वाले दिन क्लब के प्रेसीडेंट को फोन करके कार्यक्रम का पूरा ब्यौरा लेते हैं - कि कार्यक्रम कितने बजे सचमुच शुरू होगा, क्या क्या होगा, कैसे कैसे होगा, कितना कितना समय लगेगा, मुझे बोलने का मौका मिलेगा या नहीं, मौका मिलेगा तो कितना समय मिलेगा आदि-इत्यादि । कुछेक क्लब्स के प्रेसिडेंट्स ने बेहद नाराजगी के साथ बताया कि कार्यक्रम वाले दिन वैसे ही टेंशन रहता है, उस पर दीपक गुप्ता दिमाग का दही और बना देता है । दीपक गुप्ता को यदि पता चलता है कि उन्हें बोलने का मौका नहीं मिलेगा, या कम समय मिलेगा - तो वह भड़क उठते हैं और प्रेसीडेंट के साथ बदतमीजी करने लगते हैं । 
दीपक गुप्ता के इस रवैये ने दिल्ली के एक बड़े व प्रमुख क्लब के प्रेसीडेंट को तो इतना परेशान किया कि वह बेचारा रोने को आ गया । जिन क्लब्स के प्रेसीडेंट दीपक गुप्ता को उचित रूप में इज्जत/मान देना चाहते हैं, और व्यस्त शिड्यूल में उन्हें ठीक-ठाक समय देते हैं - दीपक गुप्ता उन्हें भी तरह तरह से परेशान करते हैं; कार्यक्रम में देर से पहुँचेंगे और फिर जिद करेंगे कि उन्हें जल्दी वापस लौटना है, इसलिए पहले उनका भाषण करवाओ । उनकी माँग पूरी नहीं होती है तो वह प्रेसीडेंट के साथ-साथ क्लब के दूसरे पदाधिकारियों से भी नाराजगी दिखाते हैं । कुछेक प्रेसीडेंट्स को अपने साथी पदाधिकारियों से भी सुनने को मिलता है कि 'इसे' बुला क्यों लेते हो ? दीपक गुप्ता अपने इस रवैये को लेकर इतने कुख्यात हो चुके हैं कि कई एक क्लब्स ने उन्हें आमंत्रित न करने का फैसला किया; कुछेक ने यह सोच कर उनका नाम निमंत्रण पत्र पर नहीं छापा, कि नाम नहीं छपा दिखेगा तो दीपक गुप्ता खुद ही कार्यक्रम में नहीं आने का फैसला कर लेंगे - लेकिन इतनी होशियारी करने के बाद भी वह दीपक गुप्ता के क्रोध से नहीं बच सके । दीपक गुप्ता ने कुछेक प्रेसीडेंट्स को हड़काया कि निमंत्रण पत्र में मेरा नाम क्यों नहीं है, या कार्यक्रम का निमंत्रण मुझे क्यों नहीं भेजा ? आदि-इत्यादि । दीपक गुप्ता को जानने वाले लोग हालाँकि दीपक गुप्ता के व्यवहार से परेशान व दुखी होने वाले प्रेसीडेंट्स को सांत्वना देते  और उन्हें समझाते हुए बताते हैं कि दीपक गुप्ता की बातों से परेशान न हों, वह हैं ही ऐसे; वह किसी के साथ भी बदतमीजी कर सकते हैं; उनके क्रोध से हाल ही में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने गए सुशील गुप्ता तक नहीं बच सके हैं - दो-तीन वर्ष पहले ही कई लोगों के बीच किसी मुद्दे पर बात करते हुए सुशील गुप्ता का जिक्र आने पर दीपक गुप्ता ने भड़क कर कहा था - हूँ इज सुशील गुप्ता (सुशील गुप्ता हैं कौन) ?
दीपक गुप्ता के रवैये और उनकी कुख्याति ने लेकिन अगले रोटरी वर्ष के प्रेसीडेंट्स को डरा दिया है । उन्हें डर हुआ है कि इस वर्ष दीपक गुप्ता जब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट हैं, तब उन्होंने क्लब्स के पदाधिकारियों पर आतंक जमाया हुआ है, तो अगले रोटरी वर्ष में जब वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होंगे तब कितना और कैसा आतंक मचायेंगे ? मजे की बात यह है कि दीपक गुप्ता के रवैये के कारण खुद दीपक गुप्ता को भी परेशानी हो रही है, और अपने रवैये के चलते उन्हें 23 सितंबर को होने वाली पेम वन को स्पॉन्सर करने के लिए क्लब नहीं मिल रहे हैं । दीपक गुप्ता के एक नजदीकी का ही कहना/बताना है कि इस मामले में उनके लिए समस्या इसलिए भी गंभीर हो गई है, क्योंकि उन्हें 'अपने' असिस्टेंट गवर्नर्स का ही पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पा रहा है । दीपक गुप्ता को अब पछतावा हो रहा है कि उन्होंने कई ऐसे लोगों को नाहक ही असिस्टेंट गवर्नर्स बना दिया है, जो वास्तव में किसी काम के नहीं हैं । नाकारा किस्म के लोगों की टीम बना लेने तथा अपने अकड़ू रवैये के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता के लिए अपने पहले कार्यक्रम के रूप में पेम वन करने को लेकर जिन मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, उसने उनके गवर्नर-काल के कामकाज को लेकर उनके नजदीकियों और शुभचिंतकों को ही सशंकित बना दिया है । 

Tuesday, August 7, 2018

रोटरी इंटरनेशनल के प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के चुनाव में विरोधियों के जबड़ों से खींच कर निकाली गई सुशील गुप्ता की जीत रोटरी की इंटरनेशनल राजनीति के साथ-साथ भारत की रोटरी राजनीति में भी बड़े परिवर्तनों की प्रेरणास्रोत सचमुच बन पाएगी क्या ?

नई दिल्ली । सुशील गुप्ता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाने की खबर पर देश के रोटेरियंस नेताओं की नींद आज सूरज की पहली किरण फूटने से पहले ही जितनी जल्दी खुली है और उनके बीच खुशी की जो लहर देखने/सुनने को मिल रही है, वह अप्रत्याशित है और सचमुच एक अलग अनुभव है । वरिष्ठ रोटेरियंस याद करते हुए बताते हैं कि इससे पहले किसी भारतीय के रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट चुने जाने पर ऐसा जोश और उत्साह नहीं देखा गया था, जैसा सुशील गुप्ता के मामले में देखा जा रहा है । उल्लेखनीय है कि सुशील गुप्ता से पहले भारत तीन बार इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद पर प्रतिनिधित्व कर चुका है - 1962-63 में नितीश लाहरी, 1991-92 में राजेंद्र उर्फ राजा साबू और 2011-12 में कल्याण बनर्जी के रूप में; सुशील गुप्ता 2020-21 में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट का पदभार सँभालेंगे । पिछले कुछेक वर्षों से अशोक महाजन इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने की चुनावी दौड़ में थे, जिन्हें पूर्व प्रेसीडेंट राजा साबू का सक्रिय समर्थन था - लेकिन उनकी चुनावी दाल नहीं गल सकी । सुशील गुप्ता भी पिछले कुछेक वर्षों से प्रेसीडेंट के चुनावी मैदान में अपनी सफलता के लिए फील्डिंग सजा रहे थे । इस वर्ष सुशील गुप्ता के लिए स्थितियों को अनुकूल माना/पहचाना तो जा रहा था, लेकिन उनकी सफलता में रोड़े अटकाने वाले नेताओं की भी कमी नहीं थी । सुशील गुप्ता के नजदीकियों का ही कहना है कि सुशील गुप्ता को यह जीत विरोधियों के जबड़ों से खींच कर निकालनी पड़ी है । जानकारों ने बताया है कि नोमीनेटिंग कमेटी में दूसरे उम्मीदवारों के लिए भी अच्छा समर्थन था, और एक मौके पर तो जीत सुशील गुप्ता के हाथ से फिसलती नजर आ रही थी, लेकिन उनकी वकालत करने वालों ने अपनी एकता न सिर्फ दृढ़ता के साथ बनाये रखी बल्कि ढिलमुल चल रहे सदस्यों को अपनी तरफ खींच लेने का भी काम किया और अंततः फैसला सुशील गुप्ता के पक्ष में करवा लिया । उल्लेखनीय है कि एशिया महाद्वीप के दो पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजा साबू और केआर रवींद्रन तो सुशील गुप्ता की उम्मीदवारी के खिलाफ पूरी तरह खुलकर ताल ठोके हुए थे । रोटरी की खेमेबाजी में यह दोनों हालाँकि हैं तो एक ही खेमे में, लेकिन सुशील गुप्ता की उम्मीदवारी की खिलाफत करने के इनके कारण अलग अलग रहे । केआर रवींद्रन तो दरअसल सिर्फ इसलिए विरोध में रहे, ताकि भारत के रोटेरियंस के बीच उनकी नेतागिरी चलती रहे; जबकि राजा साबू ने करीब 28 वर्षों से चली आ रही अपनी खुन्नस के कारण सुशील गुप्ता के विरोध का झंडा उठाये रखा । 
दरअसल करीब 28 वर्ष पहले, राजा साबू को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार चुने जाने के बावजूद, रोटरी क्लब दिल्ली मिडटाऊन के मनोहर मनचंदा की तरफ से मिले चैलेंज के कारण चुनाव का जो सामना करना पड़ा था - राजा साबू उसके लिए सुशील गुप्ता को जिम्मेदार ठहराते हैं । दरअसल उस समय मनोहर मनचंदा के खास समर्थकों में सुशील गुप्ता को देखा/पहचाना जाता था । 1986-87 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रह चुके सुशील गुप्ता उस समय पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अपने डिस्ट्रिक्ट के साथ-साथ दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स की चुनावी राजनीति में सक्रिय थे, और पोस्टल-बैलेट से होने वाले चुनाव में मनोहर मनचंदा के पक्ष में वोट जुटाने के काम में खासी दिलचस्पी ले रहे थे । सुशील गुप्ता की दिलचस्पी मनोहर मनचंदा को चुनाव तो नहीं जितवा सकी, लेकिन उसके कारण राजा साबू से सदा सदा का बैर उन्हें जरूर मिल गया । राजा साबू के साथ इतिहास ने जैसे बड़ा क्रूर मजाक किया है - 28 वर्ष पहले जिन सुशील गुप्ता के कारण उनके लिए इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनना चुनौतीपूर्ण हो गया था, उन्हीं सुशील गुप्ता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाने से उनका जो थोड़ा-बहुत प्रभाव बचा हुआ था, उसके भी धूल में मिल जाने का खतरा पैदा हो गया है । राजा साबू को पिछले दो-तीन वर्षों में अपने डिस्ट्रिक्ट की घटनाओं के संदर्भ में लगातार जो चोट पर चोट पड़ी, और जिस चमत्कारिक ढंग से टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद मिला -  जिसके चलते राजा साबू की भारी किरकिरी हुई - उसके लिए राजा साबू ने सुशील गुप्ता को ही जिम्मेदार ठहराया है । डिस्ट्रिक्ट 3080 में राजा साबू के नजदीकी पूर्व गवर्नर्स लगातार सुशील गुप्ता को गलियाते रहे हैं । पिछले कुछेक वर्षों की घटनाओं से यह झलक तो मिलती रही है कि रोटरी इंटरनेशनल की राजनीति में राजा साबू का दखल कमजोर पड़ता गया है । हालाँकि अभी हाल ही में उन्होंने जिस तरह से रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी गुलाम वहनवती से सिफारिश करवा कर जरूरी शर्तों को पूरा किए बिना ग्लोबल ग्रांट मंजूर करवा ली है, उससे लोगों को यह कहने का मौका मिला है कि रोटरी में राजा साबू की 'हैसियत' छोटी/मोटी 'बेईमानियाँ' करने की जरूर बची है - सुशील गुप्ता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाने से पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजा साबू की इस हैसियत के लिए भी लेकिन खतरा पैदा हो गया दिख रहा है ।  
सुशील गुप्ता के प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाने से रोटरी की इंटरनेशनल राजनीति के साथ-साथ भारत की रोटरी राजनीति में भी बड़े परिवर्तन होने का अनुमान लगाया जा रहा है - बल्कि यह कहना शायद ज्यादा सच होगा कि परिवर्तन तो हो रहे थे, जिनके नतीजे के रूप में सुशील गुप्ता को जीत मिली है; सुशील गुप्ता की जीत परिवर्तन की प्रक्रिया को और तेज करने का काम करेगी । सुशील गुप्ता यदि नहीं चुने जाते, तो परिवर्तन की उस प्रक्रिया को धक्का लगता । सुशील गुप्ता के नजदीकियों का कहना है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के चुनाव में रोटरी इंटरनेशनल के हाल-फिलहाल के पदाधिकारियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है, और उनकी भूमिका ने रोटरी इंटरनेशनल की राजनीति में कुंडली मारे बैठे पुराने नेताओं की भूमिका को पीछे धकेल दिया है । रोटरी इंटरनेशनल में यह जैसे नए मौसम के आने का संकेत है । भारत की रोटरी की राजनीति और व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ने का अनुमान लगाया जा रहा है । हालाँकि सुशील गुप्ता पर फैसलों को टालने और उन्हें लटकाए रखने तथा अपने नजदीकियों का साथ न देने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं; अपने रवैये के चलते उन्हें खुद भी उपेक्षा और अपमान का शिकार होना पड़ता रहा है । उन्हें अपने डिस्ट्रिक्ट में पिछले रोटरी वर्ष में निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी के हाथों अपमानित होना पड़ा है, और मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया भी रवि चौधरी के रास्ते पर ही चलते नजर आ रहे हैं - जिस कारण उनके डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक कारणों से बदनाम होने का खतरा पैदा हो रहा है । माना जाता रहा है कि सुशील गुप्ता पिछले वर्ष रवि चौधरी की और इस वर्ष विनय भाटिया तथा उनके नजदीकियों की हरकतों को इसलिए अनदेखा करते रहे, ताकि कोई विवाद पैदा न हो - जिससे उनके इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के चुनाव पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़े । लेकिन उम्मीद की जा रही है कि अब जब वह इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुन लिए गए हैं, तब वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर तथा उनकी टीम के प्रमुख पदाधिकारियों की हरकतों को अनदेखा नहीं करेंगे । देखना दिलचस्प होगा कि सुशील गुप्ता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाने का सचमुच में उनके अपने डिस्ट्रिक्ट तथा भारत की रोटरी राजनीति के समीकरणों पर कैसा क्या असर पड़ेगा ? 

Monday, August 6, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा को अलग-थलग रखने/करने की कोशिशों में लगे राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को मनमोहन सिंह का डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना हजम नहीं हो पा रहा है

चंडीगढ़ । मनमोहन सिंह का डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-काल के लिए डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना स्वीकार करने से राजेंद्र उर्फ राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स बुरी तरह नाराज हैं । दरअसल उन्हें लग रहा है कि इससे डिस्ट्रिक्ट के लोगों के सामने उनके बीच फूट पड़ने और उनके खेमे के बिखरने का संदेश जा रहा है, जिसके चलते उनके लिए डिस्ट्रिक्ट की व्यवस्था और राजनीति में बने/टिके रहना मुश्किल ही हो जायेगा । उल्लेखनीय है कि राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स अभी हाल तक कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में अपनी एकता बनाए रखे हुए थे, जिसके चलते निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी अलग-थलग से पड़ते नजर आते थे - और इस 'एकता' के भरोसे उन्होंने टीके रूबी को दबाव में लेने/रखने की कोशिश की, और कुछेक मामलों में वह कामयाब भी हुए । डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स की साख भले ही धूल चाटने लगी हो, लेकिन कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में अपनी एकता के भरोसे वह काफी मनमानियाँ कर ले रहे थे । इसीलिए कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में अपनी एकता बनाए रखना उन्हें जरूरी लगता रहा है । इसी संदर्भ में राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को मनमोहन सिंह के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनने में कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की एकता के लिए खतरे की घंटी बजती 'सुनाई' दे रही है । 
कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की एकता पर खतरे का साया हालाँकि पहली बार तब पड़ा दिखा था, जब पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अरुण शर्मा ने पिछले वर्ष हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में नोमीनेटिंग कमेटी में फैसले को अनिर्णीत छोड़ देने के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधुकर मल्होत्रा के 'दबावपूर्ण' सुझाव को स्वीकार करने से इंकार कर दिया था । मधुकर मल्होत्रा के जरिये राजा साबू खेमे ने दरअसल कोशिश यह की थी कि नोमीनेटिंग कमेटी में अधिकृत उम्मीदवार को लेकर फैसला नहीं हो पायेगा तो रमेश बजाज आसानी से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी नहीं चुने जा पायेंगे । अरुण शर्मा भी हालाँकि राजा साबू खेमे के ही सदस्य के रूप में देखे जाते हैं, लेकिन राजा साबू गिरोह की राजनीति का साथ देने से उन्होंने इंकार कर दिया और उनके सख्त रवैये के कारण ही रमेश बजाज अधिकृत उम्मीदवार चुने जा सके - और फिर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी घोषित हुए । अरुण शर्मा के रवैये से डिस्ट्रिक्ट में लोगों को यह समझने में देर नहीं लगी कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में राजा साबू की राजनीति और मनमानियों को जो समर्थन 'दिखता' है, वह मजबूरी का और विकल्पहीनता के चलते पैदा होने वाला समर्थन है - और कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में कई सदस्य हैं जो मौका मिलने पर राजा साबू की मनमानियों का विरोध कर सकते हैं । अरुण शर्मा को मौका मिला, और उन्होंने राजा साबू गिरोह की गंदी राजनीति का सहभागी बनने से साफ इंकार कर दिया । अरुण शर्मा के रवैये से मिले झटके के बाद, मनमोहन सिंह ने जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-काल का डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना स्वीकार करके राजा साबू गिरोह को उससे भी बड़ा झटका दिया है ।
राजा साबू गिरोह की कोशिश दरअसल जितेंद्र ढींगरा को अलग-थलग करने की है, जिसके तहत उन्हें डिस्ट्रिक्ट के जरूरी कामों/कार्यक्रमों से भी दूर रखने की कोशिश की गई है । पिछले दिनों इंटरनेशनल डायरेक्टर इलेक्ट भरत पांड्या का डिस्ट्रिक्ट में स्वागत कार्यक्रम हुआ, जिसके बारे में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी रमेश बजाज को अधिकृत रूप से कोई जानकारी नहीं दी गई, और इस तरह उन्हें उक्त कार्यक्रम से दूर रखने की कोशिश की गई । हालाँकि भरत पांड्या की सदाश्यता और होशियारी ने राजा साबू और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल की इस टुच्ची हरकत को सफल नहीं होने दिया और अपनी तरफ से पहल करके उन दोनों को कार्यक्रम का निमंत्रण दिलवाया । भरत पांड्या के हस्तक्षेप के बाद राजा साबू की शह के चलते जितेंद्र ढींगरा और रमेश बजाज को निमंत्रण देने से बच रहे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल उन्हें कार्यक्रम में निमंत्रित करने के लिए मजबूर हुए । डिस्ट्रिक्ट में रोटरी फाउंडेशन से जुड़े खर्चों में राजा साबू की मनमानी चलती रहे, इसके लिए रोटरी फाउंडेशन से संबद्ध डिस्ट्रिक्ट क़्वालीफिकेशन मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा को शामिल करने से बचा जा रहा है । ऐसे में, राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को यह देख कर झटका लगा है कि एक तरफ तो वह जितेंद्र ढींगरा को अलग-थलग करने/रखने का प्रयास कर रहे हैं, और दूसरी तरफ उनके ही एक साथी मनमोहन सिंह ने जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-काल का डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना स्वीकार कर लिया है । राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के लिए झटके वाली बात दरअसल यह है कि जब से यह चर्चा फैली कि जितेंद्र ढींगरा डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर पद के लिए मनमोहन सिंह को राजी करने का प्रयास कर रहे हैं, तभी से राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने तरह तरह से संदेश भेज कर मनमोहन सिंह को आगाह किया था कि वह जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-काल में ड्रिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना स्वीकार न करें - लेकिन मनमोहन सिंह ने उनकी लेकिन एक न सुनी और डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बन गए । 
राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को डर है कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के दूसरे सदस्य भी यदि अरुण शर्मा और मनमोहन सिंह के 'रास्ते' पर चल पड़े, तो कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में उनके लिए मनमानी करना मुश्किल क्या - असंभव ही हो जायेगा और तब डिस्ट्रिक्ट पूरी तरह से उनके हाथ से निकल जायेगा । इसी डर के कारण मनमोहन सिंह का डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना राजा साबू और उनके गिरोह के गवर्नर्स को हजम नहीं हो पा रहा है ।

Saturday, August 4, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुभाष जैन के क्लब का सोविनियर क्लब के सदस्यों की सक्रियता की तस्वीर प्रस्तुत करते हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत अमित गुप्ता की उम्मीदवारी के पक्ष में व्यापक अपील पैदा करने के साथ-साथ उसे विश्वसनीय रूप भी देता है

गाजियाबाद । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुभाष जैन के क्लब - रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के 27 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 'टुगेदर वी कैन' शीर्षक से प्रकाशित क्लब सोविनियर की जैसी जो प्रशंसा हो रही है, वह अपने आप में अप्रत्याशित है और क्लब के पदाधिकारियों तथा सदस्यों का मनोबल बढ़ाने वाली है । यूँ तो कई क्लब्स अपने अपने सोविनियर निकालते हैं, जो अच्छी व आकर्षक छपाई तथा क्लब के इतिहास व सक्रियता से जुड़ी सामग्री के कारण लोगों को ध्यान खींचते हैं, और लोगों को उपयोगी भी लगते हैं । लेकिन रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के इस वर्ष प्रकाशित हुए और चार्टर डे पर विमोचित हुए सोविनियर ने डिस्ट्रिक्ट के बाहर के प्रमुख लोगों - खासकर दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारियों को भी जिस तरह से आकर्षित और प्रभावित किया है, उसके कारण यह खास बन गया है । कई लोगों ने इन पंक्तियों के लेखक से बात करने के दौरान इस सोविनियर का जिक्र किया, और कहा कि कागज और छपाई की उत्कृष्टता के कारण ही नहीं, बल्कि चयनित सामग्री के कारण यह सोविनियर उल्लेखनीय बन पड़ा है । इसके लिए हर कोई सोविनियर की संपादिका रचना अग्रवाल की तारीफ कर रहा है, लेकिन रचना अग्रवाल सोविनियर के आकर्षक व प्रभावी बनने का श्रेय क्लब के पूर्व प्रेसीडेंट अमित गुप्ता को दे रही हैं । सोविनियर में प्रकाशित अपने संदेश में रचना अग्रवाल ने सोविनियर की सामग्री इकट्ठा करवाने से लेकर उसे एक शक्ल देने तक के श्रमसाध्य काम में अमित गुप्ता से मिले सहयोग को श्रेय देते हुए उनका आभार व्यक्त किया है । उल्लेखनीय है कि अमित गुप्ता को इस वर्ष क्लब का ट्रेनर भी चुना गया है, और वह इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार भी हैं । वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव जीते तो सुभाष जैन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रहते हुए क्लब को दूसरा गवर्नर भी मिल जायेगा ।
'टुगेदर वी कैन' इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बैरी रसिन तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर बासकर चॉकलिंगम तथा डिस्ट्रिक्ट के मौजूदा, भावी व पूर्व गवर्नर्स तथा क्लब के पदाधिकारियों के संदेशों से तो सुसज्जित है ही - जो अलग अलग तरीके से रोटरी के आदर्शों के प्रति जागरूक बनाते हैं - साथ ही रोटरी के कार्यों व लक्ष्यों से संबंधित उपयोगी व रोचक जानकारी से भी परिपूर्ण हैं । सोविनियर का खासा रोमांचक व दिलचस्प पक्ष लेकिन उसमें प्रकाशित तस्वीरें हैं, जो क्लब की गतिविधियों के इतिहास व विविधतापूर्ण पहलुओं से तो परिचित करवाती ही हैं, पुरानी यादों व पुराने सदस्यों/साथियों के साथ बिताये गए मौकों को भी पुनर्जीवित करती हैं । 27 वर्ष किसी भी व्यक्ति के चेहरे व शारीरिक संरचना में होने वाले परिवर्तनों के लिहाज से बड़ा लंबा समय है; इस लिहाज से कुछेक सदस्यों की पुरानी तस्वीरें नए रोटेरियंस को रोमांचित कर रही हैं । इस मामले में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुभाष जैन की पुरानी तस्वीरें लोगों का खास ध्यान खींच रही हैं । सुभाष जैन क्लब के चार्टर सदस्य हैं, और क्लब के दूसरे वर्ष में - वर्ष 1992-93 में वह प्रेसीडेंट बने थे । इस नाते वह क्लब की गतिविधियों से शुरू से ही जुड़े रहे हैं, और शुरू के वर्षों की गतिविधियों की तस्वीरों में उनकी उपस्थिति उस समय के लोगों की यादों को नया कर रही है, और नए रोटेरियंस को रोमांचित कर रही है । कई तस्वीरों में योगेश गर्ग, जो अब रोटरी क्लब गाजियाबाद विकास के सदस्य हैं, नजर आ रहे हैं - जो रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के 'निर्माण' में योगेश गर्ग की अथक व महत्त्वपूर्ण भूमिका को याद दिलाने का काम करती हैं ।
'टुगेदर वी कैन' शीर्षक से प्रकाशित क्लब सोविनियर में प्रकाशित तस्वीरें पुरानी यादों और पुराने सदस्यों की सक्रियताओं से जुड़े प्रसंगों को ताजा करने तथा नए रोटेरियंस को उनसे परिचित कराने का काम ही नहीं करती हैं, बल्कि क्लब की गतिविधियों की विविधता को भी सामने लाती है । सोविनियर में प्रकाशित तस्वीरें 'बताती' हैं कि रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल समाज और आम लोगों से जुड़ी हर जरूरत में मदद करने को लेकर आगे रहा है, तथा क्लब के कई सदस्य नियमित रूप से - प्रत्येक वर्ष के पदाधिकारियों के साथ सहयोग करते हुए, क्लब की गतिविधियों में शामिल होते रहे हैं । सोविनियर में प्रकाशित तस्वीरें इस बात की भी झलक देती हैं कि क्लब और उसके सदस्यों की खास पहचान और प्रसिद्धि ने दूसरे देशों से आने वाले रोटेरियंस को भी आकर्षित किया है, और समय समय पर वह क्लब के कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं । रोटरी क्लब गाजियाबाद सेंट्रल के सक्रियताभरे गौरवशाली इतिहास से परिचित करवाते सोविनियर को जो प्रशंसा मिल रही है, उसने क्लब के सदस्यों को स्वाभाविक रूप से खुशी दी है और हर कोई इसके लिए अमित गुप्ता को श्रेय दे रहा है । क्लब के सदस्यों का कहना है कि पुरानी पुरानी तस्वीरों को खोजने का काम जिस लगन और धैर्य की माँग करता है, वह अमित गुप्ता में ही है और वही यह काम कर सकते हैं; तथा अमित गुप्ता में ही वह सोच व नजरिया है जो तस्वीरों को वह तरतीब देने का काम कर सकती है कि उनके जरिये क्लब की गतिविधियों का नजारा देखने को मिले । सोविनियर में प्रकाशित तस्वीरों से अमित गुप्ता की सक्रियता की व्यापक तस्वीर भी देखने को मिलती है । अमित गुप्ता और उनकी पत्नी स्वाति गुप्ता, जो वर्ष 2014-15 में क्लब की प्रेसीडेंट थीं तथा इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट लिट्रेसी कमेटी की चेयरपरसन हैं, की निरंतर व विविधतापूर्ण सक्रियता का तथ्य भी सोविनियर की तस्वीरों से सामने आता है । अमित गुप्ता और स्वाति गुप्ता की सक्रियता का जो स्तर है, वह उन्हें क्लब में ही नहीं - बल्कि डिस्ट्रिक्ट में अकेले ऐसे दंपति की पहचान देता है, जो रोटरी में समान रूप से सक्रिय हैं और रोटरी के कामों में समान रूप से बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं । अमित गुप्ता चूँकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार हैं, इसलिए उनकी और उनकी पत्नी स्वाति गुप्ता की सक्रियता की व्यापक तस्वीर उनकी उम्मीदवारी के पक्ष में व्यापक अपील पैदा करती है और उसे विश्वसनीय रूप देती है - और इस तरह से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी परिदृश्य को दिलचस्प बनाती है ।

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया के नाकारापन को छिपाने की कोशिश में, झूठ बोल कर और खुद को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की तरह 'दिखाने' की डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी अजीत जालान की हरकत ने विनय भाटिया और विनोद बंसल की एक साथ फजीहत करवा दी है

नई दिल्ली । अजीत जालान की एक चतुराई ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया और डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर विनोद बंसल के लिए एक साथ फजीहत वाली स्थिति बना दी है, और लोगों को कहने का मौका मिला है कि लगता है कि इन दोनों ने डिस्ट्रिक्ट की चाबी अजीत जालान को दे दी है । मामला इस वर्ष होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की अधिसूचना से जुड़ा है । रोटरी इंटरनेशनल के नियमानुसार, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को लेकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को 30 जुलाई तक क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को अधिसूचना भेज देनी होती है । 30 जुलाई तक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया पता नहीं कहाँ सोते रह गए और उक्त अधिसूचना समय से नहीं भेजी जा सकी । डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर विनोद बंसल ने भी इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि रोटरी इंटरनेशनल के नियम का पालन होना चाहिए - हो सकता है कि उन्होंने ध्यान दिया भी हो और विनय भाटिया को आगाह भी किया हो, लेकिन विनय भाटिया ने उनकी बात को तवज्जो देने में दिलचस्पी न ली हो । बहरहाल, जो भी हुआ हो - रोटरी इंटरनेशनल के एक नियम की ऐसीतैसी तो हो गई । इस मामले में लेकिन अभी जैसे और तमाशा होना बाकी था, जिसकी पटकथा अजीत जालान ने लिखी । अजीत जालान ने तीन अगस्त को लोगों को मेल भेजी, जिसमें उन्होंने बताया कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया ने 30 जुलाई को जो अधिसूचना जारी की थी, उसे वह भेज रहे हैं । अजीत जालान की इस मेल ने लोगों को भड़काने का काम किया । लोगों के बीच सवाल उठा कि अजीत जालान झूठ क्यों बोल रहे हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया ने 30 जुलाई को अधिसूचना जारी की थी; यदि सचमुच की थी तो कहाँ की थी - और यदि की थी तो प्रेसीडेंट्स को समय से भेजी क्यों नहीं; और अभी भी यह अधिसूचना डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की तरफ से नहीं, बल्कि अजीत जालान की तरफ से लोगों को क्यों मिल रही है ? अजीत जालान की इस हरकत पर लोग एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया आखिर व्यस्त कहाँ हैं, जो उन्हें रोटरी इंटरनेशनल द्वारा तय किये गए कामों को करने के लिए समय नहीं मिल पा रहा है ।
इन्हीं चर्चाओं के बीच लोगों को कहने का मौका मिल रहा है कि डिस्ट्रिक्ट में जब नाकारा किस्म के लोग डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुने जायेंगे, तो ऐसे ही तमाशे देखने को मिलेंगे । विनय भाटिया को निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी जैसा ही बताने वाले लोगों को एक बार फिर मुँह खोलने का मौका मिल गया है । उनका कहना है कि गनीमत बस इतनी ही है कि रवि चौधरी की तरह विनय भाटिया बद्तमीज नहीं हैं, अन्यथा नाकारापन में वह रवि चौधरी के ही 'छोटे भाई' हैं । इस मामले में कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स का मानना/कहना है कि बात इतनी बड़ी थी नहीं, लेकिन अजीत जालान की स्वार्थी हरकत ने बात का बतंगड़ बनवा दिया । उनका कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव से जुड़ी अधिसूचना यदि समय से नहीं जा सकी, तो यह कोई बड़ा इश्यू नहीं था; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया तीन-चार दिन के बाद भी वह अधिसूचना भेज देते तो शायद ही कोई सवाल उठाता; लेकिन अजीत जालान ने जिस तरह से झूठ बोल कर तथा अपनी फोटो-शोटो लगा कर डिस्ट्रिक्ट का 'चौधरी' बनते हुए लोगों को मेल भेजी, उससे बबाल हो गया । अजीत जालान अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी बनने की तैयारी कर रहे हैं; लोगों को लगता है कि उसी 'तैयारी' के तहत उन्होंने रोटरी इंटरनेशनल द्वारा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के लिए तय किया गया काम खुद कर डाला । अजीत जालान डिस्ट्रिक्ट कोर ग्रुप में डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी हैं; डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी के रूप में यह उनकी भी जिम्मेदारी है कि डिस्ट्रिक्ट के कामकाज में रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का पालन हो, और इस नाते 30 जुलाई तक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव से संबंधित अधिसूचना प्रेसीडेंट्स को भेज दी जानी चाहिए थी । अपनी जिम्मेदारी निभाने की बजाये झूठ बोल कर और खुद को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की तरह 'दिखाने' की अजीत जालान की हरकत ने उनके साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया और डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर विनोद बंसल की भी फजीहत करा दी है ।
क्लब्स के पदाधिकारियों के बीच यह आरोपपूर्ण चर्चा तो पहले से ही है कि विनय भाटिया के नाकारापन का पूरा फायदा पप्पूजीत सिंह सरना और अजीत जालान उठा रहे हैं, और यह दोनों ऐसा जताते हैं जैसे कि असली गवर्नर तो यह हैं और विनय भाटिया तो इनकी कठपुतली हैं । क्लब्स के पदाधिकारियों को तरह तरह की बातों के लिए यह लोग हड़काते/धमकाते रहते हैं और उन्हें 'ऐसा करने' और 'वैसा न करने' के लगातार निर्देश देते रहते हैं । डिस्ट्रिक्ट की इस दशा-दिशा पर लोगों को लेकिन हैरानी और शिकायत डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर विनोद बंसल से है । दरअसल विनय भाटिया के नाकारापन से परिचित रहे लोगों को उम्मीद थी कि विनोद बंसल के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर होने के कारण स्थितियाँ सँभली रहेंगी और डिस्ट्रिक्ट में तमाशा नहीं दिखाई देगा । लेकिन विनोद बंसल के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर होने के बावजूद हालात जहाँ के तहाँ ही बने हुए हैं । कोढ़ में खाज वाली बात यह है कि विनय भाटिया, पप्पूजीत सिंह सरना और अजीत जालान को विनोद बंसल के 'आदमियों' के रूप में ही देखा/पहचाना जाता है । अजीत जालान की अगले रोटरी वर्ष में उम्मीदवार बनने की 'तैयारी' के पीछे विनोद बंसल की प्रेरणा को ही प्रमुख कारण के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । इससे लोगों को लग रहा है कि पप्पूजीत सिंह सरना व अजीत जालान की 'सुपर गवर्नर' की तरह व्यवहार करने की हरकत को या तो विनोद बंसल से ही शह मिल रही है, और या विनोद बंसल इनके सामने असहाय पड़ रहे हैं । इससे लोगों को लग रहा है कि विनय भाटिया के गवर्नर-काल में तमाशे देखने को मिलते रहेंगे ।

Friday, August 3, 2018

रोटरी इंटरनेशनल के पूर्व प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन के सक्रिय विरोध के बावजूद प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के लिए सुशील गुप्ता की उम्मीदवारी को लेकर भारतीय रोटेरियंस की उम्मीदें उबाल पर तो हैं, लेकिन यूरोपीय देशों के प्रतिनिधियों की एकता सुशील गुप्ता के लिए मुसीबत भी बन सकती है

नई दिल्ली । रोटरी इंटरनेशनल के प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के चुनाव की 'पहली परीक्षा' में सुशील गुप्ता के 'पास' हो जाने से सुशील गुप्ता के समर्थकों व शुभचिंतकों के बीच 'फाइनल परीक्षा' में भी उनके पास हो जाने की उम्मीद पैदा हुई है - और उन्हें लग रहा है कि सुशील गुप्ता के रूप में भारत को रोटरी इंटरनेशनल के प्रेसीडेंट पद पर प्रतिनिधित्व करने का एक बार फिर मौका मिलेगा । हालाँकि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद के चुनाव से जुड़ी राजनीति को जानने/समझने वाले वरिष्ठ रोटेरियन अभी साफ-साफ कोई राय व्यक्त करने से बच रहे हैं । उनका कहना है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट का चुनाव इतनी अनिश्चितताओं से भरा हुआ है कि ऐन मौके तक कुछ भी कह पाना मुश्किल होता है । लेकिन फिर भी सुशील गुप्ता के प्रेसीडेंट बनने को लेकर भारतीय रोटेरियंस के बीच उम्मीदें उबाल पर हैं, और जानकारों का कहना/बताना है कि सुशील गुप्ता जीत के बहुत करीब हैं - और इतना करीब आ कर भी वह यदि वाइस प्रेसीडेंट नहीं चुने गए, तो फिर उनके लिए इंटरनेशनल प्रेसीडेंट की कुर्सी की तरफ जाने वाला रास्ता हमेशा के लिए बंद हो जायेगा । एक तरह से कह सकते हैं कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने को लेकर सुशील गुप्ता के सामने यह आखिरी मौका है । सुशील गुप्ता के कुछेक शुभचिंतकों को पूर्व प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन से खतरा नजर आ रहा है; उन्हें लग रहा है कि केआर रवींद्रन नहीं चाहते हैं कि भारत से कोई प्रेसीडेंट बने, ताकि भारतीय रोटेरियंस पर उनका राज यथावत चलता रहे; सुशील गुप्ता यदि प्रेसीडेंट बने तो केआर रवींद्रन को भारत से अपना बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ेगा - इसलिए केआर रवींद्रन अपनी तरफ से सुशील गुप्ता का काम बिगाड़ने का हर संभव प्रयास करेंगे ही ।
रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के लिए सुशील गुप्ता का दावा यदि मजबूत समझा जा रहा है तो इसका कारण है कि अधिकृत उम्मीदवार का चुनाव करने वाली 17 सदस्यीय नोमीनेटिंग कमेटी में दो सदस्य तो भारत से ही हैं : जोन 4 से मनोज देसाई और जोन 6 से शेखर मेहता । इन दोनों को ही सुशील गुप्ता के समर्थकों के रूप में देखा पहचाना जाता है । जोन 22 (घाना) के सैम ओकुदजेतो तथा जोन 28 (अमेरिका) के माइकेल मक्कलॉग को सुशील गुप्ता के पक्के समर्थक के रूप में देखा/पहचाना जाता है । जोन 26 (अमेरिका) के ब्रद्फोर्ड हॉवर्ड तथा जोन 30 (अमेरिका) की केरेन वेंटज इंटरनेशनल डायरेक्टर के रूप में उन्हीं वर्षों में इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्य रहे हैं, जिन वर्षों में मनोज देसाई इंटरनेशनल डायरेक्टर थे; और उन्हीं वर्षों में सुशील गुप्ता रोटरी फाउंडेशन में ट्रस्टी रहे थे । ब्रद्फोर्ड हॉवर्ड तथा केरेन वेंटज इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने पर दिल्ली आ चुके हैं, और सुशील गुप्ता यहाँ उनका स्वागत करवा चुके हैं । इस पृष्ठभूमि के चलते इन दोनों का समर्थन भी सुशील गुप्ता को मिल सकता है । जोन 10 (फिलीपींस) के गुइलर तुमंगन, जोन 12 (कोरिया) के जुइन पार्क, जोन 32 (अमेरिका) के माइकेल मक्गवर्न को भी सुशील गुप्ता के अच्छे परिचितों व नजदीकियों के रूप में देखा/पहचाना जाता है । सुशील गुप्ता की एक बड़ी उपलब्धि जोन 20 (नीदरलैंड) के पॉल क्निफ का समर्थन भी है, जिनके बारे में हालाँकि यह भी माना/कहा जाता है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के चुनाव में यूरोपीय देशों की एकता का खेल चला तो पॉल क्निफ यूरोपीय उम्मीदवार के समर्थन में भी जा सकते हैं ।
सुशील गुप्ता को नोमीनेटिंग कमेटी में दरअसल यूरोपीय देशों के प्रतिनिधियों से ही खतरा है, 17 सदस्यीय नोमीनेटिंग कमेटी में वैसे तो जिनकी संख्या कुल चार ही है - लेकिन जो आपसी एकता बना कर दूसरे देशों के प्रतिनिधियों का भी समर्थन जुटा लेने का प्रयास करते हैं । यूरोपीय देशों को चूँकि लंबे समय से इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद पर प्रतिनिधित्व देने का अवसर नहीं मिला है, इसलिए इस बार वह भी जोरशोर से अपने दावे को जता रहे हैं । सुशील गुप्ता के लिए झटके और चुनौती की बात यह है कि गैर एशियाई व गैर अमेरिकी देशों के बीच तो यूरोपीय दावे के प्रति समर्थन है ही, एशियाई व अमेरिकी जोन में भी उनके प्रति समर्थन का भाव है । नोमीनेटिंग कमेटी की कार्यप्रणाली से परिचित लोगों का कहना है कि नोमीनेटिंग कमेटी का फैसला इससे भी प्रभावित होगा कि नोमीनेटिंग कमेटी में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले मनोज देसाई तथा शेखर मेहता प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के अधिकृत उम्मीदवार के लिए सुशील गुप्ता की वकालत कितने जोरदार तथा कन्विंसिंग तरीके से करते हैं । दरअसल नोमीनेटिंग कमेटी के सदस्य प्रेसीडेंट नॉमिनी चुनने की प्रक्रिया में प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के उम्मीदवारों की बजाये अपने अपने 'भविष्य' को लेकर ज्यादा सजग रहते हैं, और यह 'मैसेज' नहीं छोड़ना चाहते हैं कि वह किसी के खिलाफ हैं; दरअसल उन्हें डर होता है कि उन्होंने जोरशोर से किसी की खिलाफत की - और उनकी खिलाफत के बावजूद वह यदि जीत गया तो उनका तो कैरियर चौपट कर देगा । यह डर मनोज देसाई व शेखर मेहता द्वारा सुशील गुप्ता की वकालत के तेवर को कमजोर कर सकता है, और उनकी यह कमजोरी सुशील गुप्ता के लिए घातक हो सकती है ।
नोमीनेटिंग कमेटी प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के लिए छह उम्मीदवारों का चयन पहले ही कर चुकी है; इन छह में से अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने का काम 6 अगस्त को होगा । भारत में रोटरी की राजनीति के संदर्भ में देखें, तो 6 अगस्त को फैसला सिर्फ सुशील गुप्ता के भविष्य का ही नहीं होगा - बल्कि देश में उनके भरोसे रोटरी की व्यवस्था व राजनीति में 'छलाँग' लगाने की ताक में बैठे रोटेरियंस का भी होगा । इस हिसाब से 6 अगस्त का दिन सुशील गुप्ता के समर्थकों/नजदीकियों और विरोधियों में से किसी एक के लिए राजनीतिक 'क़त्ल' का दिन भी होगा ।

Wednesday, August 1, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक जैन दुबई में इंटरसिटी कार्यक्रम करने की आड़ में अपनी जेब गर्म करने के आरोप में फँसे

शामली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक जैन पर इंटरसिटी जैसे रोटरी इंटरनेशनल के एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम को पिकनिक का जरिया बना देने और उसके नाम पर भारी लूट-खसोट मचाने का गंभीर आरोप लगाया गया है । इसके चलते विडंबनापूर्ण स्थिति यह बनी है कि डिस्ट्रिक्ट की छवि सुधारने के नाम पर हो रहे इंटरसिटी कार्यक्रम ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक जैन के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट की पहचान को और कलंकित करने का ही काम किया है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट की छवि सुधारने के आह्वान के साथ डिस्ट्रिक्ट की दूसरी इंटरसिटी 22 से 25 नवंबर के बीच दुबई में आयोजित करने की घोषणा की गई है, जिसके लिए प्रति व्यक्ति 45 हजार रुपए का खर्च निर्धारित किया गया है । इस खर्च निर्धारण के चलते इंटरसिटी कार्यक्रम को 'लूट के कार्यक्रम' के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । जानकारों का कहना/पूछना है कि दुबई जाने वाले लोगों को इस समय जब प्रतिष्ठित ट्रेवल एजेंसियों की तरफ से प्रति व्यक्ति करीब 30 हजार रुपए के हिसाब में अच्छा पैकेज मिल रहा है, तब दीपक जैन 45 हजार रुपए क्यों बसूल रहे हैं  ? डिस्ट्रिक्ट में कई लोगों को कहते हुए सुना गया है कि दीपक जैन ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 'बनने' में जो पैसा लगाया है, वह लगता है कि इस इंटरसिटी के आयोजन से ही बसूल लेंगे और इस तरह अपने आप को एक कुशल व्यावसायी साबित करेंगे । ऐसा करते हुए दीपक जैन ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने की इच्छा रखने वाले लोगों को एक 'रास्ता' भी दिखा दिया है, जिसके तहत पहले तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का चुनाव जीतने वास्ते वोटों को खरीदने के लिए पैसे लुटाओ और गवर्नर बन जाने  के बाद तरह तरह से लुटाए गए पैसों की बसूली कर लो । कुछेक लोगों का हालाँकि यह भी कहना है कि इस लूट में अकेले दीपक जैन का ही हिस्सा नहीं है, बल्कि उनके कुछेक नजदीकियों का भी हिस्सा है और लूट की यह योजना दीपक जैन और उनके कुछेक नजदीकियों ने मिलकर बनाई है । 
दीपक जैन के कुछेक शुभचिंतकों का कहना लेकिन यह भी है कि दुबई के लिए प्रचलित कीमत से डेढ़ गुनी कीमत बसूलने के लिए दीपक जैन दरअसल इसलिए मजबूर हुए हैं, क्योंकि उन्हें कई आम और खास लोगों को मुफ्त में दुबई ले चलने का दबाव झेलना पड़ रहा है । दीपक जैन के नजदीकियों का भी कहना है कि कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर तथा उनके खास लोग दीपक जैन पर इस बात के लिए दबाव बना रहे हैं कि दीपक जैन उन्हें मुफ्त में दुबई ले चलें । कुछेक लोग तो अपने साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों को भी मुफ्त में दुबई ले जाने/चलने का जुगाड़ बैठाने में लगे हैं । दीपक जैन के लिए कुछेक लोगों को तो मुफ्त में ले जाने से बचना मुश्किल ही है, इसलिए उन पर होने वाले खर्च को वह दूसरे लोगों से ही बसूल करेंगे - और इसी कारण से वह दुबई पैकेज डेढ़ गुना करने/रखने के लिए मजबूर हुए हैं । दीपक जैन के लिए बदकिस्मती की बात यह हुई है कि इस तरह की मजबूरीभरी सफाइयों के बाद भी वह लूट मचाने के आरोपों से बच नहीं पा रहे हैं । लोगों का कहना है कि उन्हें दृढ़ता से ऐलान करना चाहिए कि दुबई जाने वाले हर आम और खास को अपना खर्चा स्वयं उठाना होगा, और वह चाहे पूर्व गवर्नर हो या उनका खास हो - मुफ्त में दुबई जाने का मौका नहीं मिलेगा । लोगों का कहना है कि दीपक जैन यदि ऐसा नहीं कह/कर पाते हैं, तो उन्हें उन लोगों के नाम सार्वजनिक करने चाहिए, जो दबाव बना कर मुफ्त में दुबई जाना चाह रहे हैं - अन्यथा यही समझा जायेगा कि कुछेक लोगों के मुफ्त में दुबई जाने की कोशिशों का बहाना बना कर दीपक जैन ने अपनी जेब गर्म करने की तैयारी कर ली है ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक जैन को इस आरोप का भी सामना करना पड़ रहा है कि लूट की अपनी योजना में उन्होंने रोटरी के एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम के रूप में डिजाईन किए गए इंटरसिटी को मजाक बना दिया है ।उल्लेखनीय है कि इंटरसिटी कार्यक्रम के डिजाईन में प्रारूप यह बनाया गया है कि किसी एक विषय पर रोटेरियंस को जागरूक बनाया जाए और उन्हें उस विषय से संबंधित क्षेत्र में काम करने के लिए प्रेरित किया जाए । दीपक जैन ने लेकिन इंटरसिटी को मौज-मजा के एक पिकनिक कार्यक्रम में बदल दिया है - और मजे की बात यह है कि रोटरी इंटरनेशनल के एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम का मजाक बनाते हुए वह यह उम्मीद भी कर रहे हैं कि इससे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उनकी और डिस्ट्रिक्ट की छवि सुधरेगी । लोगों का कहना है कि रोटरी की भावना और उसके आदर्शों से अपरिचित रहे दीपक जैन जैसे लोग जब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनेंगे, तब ऐसे ही तमाशे देखने को मिलेँगे । डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ रोटेरियंस का कहना है कि दीपक जैन इंटरसिटी कार्यक्रम यहीं - डिस्ट्रिक्ट की भौगिलिक सीमा में कहीं करते; और दुबई के लिए घोषित रूप से पिकनिक का कार्यक्रम बनाते, तो रोटरी की गरिमा से खिलवाड़ करने के आरोप से तो कम से कम बच जाते । उन्हें लगता है कि दीपक जैन ने होशियारी दिखाते हुए एक ही कार्यक्रम के जरिये 'रोटरी' और 'लूट' - दोनों करने की जो योजना बनाई, उसके कारण वह दोहरे आरोप में फँस गए हैं ।