Monday, October 21, 2013

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री में दीपक टुटेजा का जन्मदिन मनवा कर ओंकार सिंह रेणु के शुभचिंतकों ने विक्रम शर्मा को अपने खेमे के नेताओं के बीच बदनाम करने की चाल चली है क्या

नई दिल्ली । विक्रम शर्मा ने अपने क्लब के सदस्यों के साथ मिल कर दीपक टुटेजा का जन्मदिन क्या मनाया, डिस्ट्रिक्ट के चुनावी खिलाड़ियों को जैसे साँप सूँघ गया है । विक्रम शर्मा इस वर्ष सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं; और जिन नेताओं के भरोसे वह यह तैयारी कर रहे हैं उनके लिए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक टुटेजा दुश्मन नंबर वन हैं । ऐसे में, विक्रम शर्मा द्धारा अपने क्लब के सदस्यों के साथ दीपक टुटेजा के जन्मदिन को समारोह पूर्वक मनाये जाने की खबर ने सभी को हैरान किया है । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के बाद विक्रम शर्मा ने विरोधी खेमे के नेताओं के साथ मिलना-जुलना शुरू किया तो इसे एक बहुत स्वाभाविक तरीके से लिया गया । कोई भी उम्मीदवार सभी लोगों से मिलेगा-जुलेगा ही - इसलिए विरोधी खेमे के नेताओं से विक्रम शर्मा के मिलने-जुलने पर उनके खेमे के नेताओं ने कोई आपत्ति नहीं की । लेकिन विरोधी खेमे के एक प्रमुख नेता दीपक टुटेजा का जन्मदिन मनाना - और तब मनाना, जबकि विक्रम शर्मा के प्रमुख सलाहकार अजय बुद्धराज ने दीपक टुटेजा को दुश्मन नंबर एक घोषित किया हुआ हो; किसी को भी हजम नहीं हो रहा है । चुनावी राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों का यह मानना तो है कि विक्रम शर्मा ने दीपक टुटेजा का जन्मदिन मनाया है तो इसके लिए उन्होंने अपने खेमे के प्रमुख लोगों से अनुमति तो ले ही ली होगी; लेकिन हर किसी के लिए यह बात पहेली बनी हुई है कि विक्रम शर्मा को दीपक टुटेजा का जन्मदिन मनाने की अनुमति देने के पीछे उनके खेमे के नेताओं की चाल आखिर है क्या ?
इस बारे में लेकिन जितने मुँह, उतनी बातें हैं । विक्रम शर्मा के नजदीकियों का कहना है कि विक्रम शर्मा के जरिये दीपक टुटेजा का जन्मदिन मनवा कर दीपक टुटेजा को फुसलाने और अपनी तरफ करने का दाँव चला गया है । यह दाँव चलने/चलवाने वाले लोग भी हालाँकि जानते/समझते हैं कि इस तरह की कार्रवाईयों से दीपक टुटेजा को फुसलाना आसान नहीं होगा; लेकिन फिर भी उन्होंने यह दाँव चला/चलवाया है तो इसके पीछे उनकी सोच यह है कि इस कार्रवाई से दीपक टुटेजा को फुसलाया भले न जा सके, लेकिन उनके और विजय शिरोहा के बीच झगड़ा जरूर पैदा किया जा सकेगा । दीपक टुटेजा और विजय शिरोहा के बीच 'पैदा हुए' झगड़े में अपने लिए मौका देख रहे विरोधी खेमे के नेताओं का विश्वास है कि तब इन दोनों में से कोई एक उनके साथ आने के लिए मजबूर होगा - और तब उनका राजनीतिक वनवास दूर हो जायेगा । विक्रम शर्मा की उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं के बीच यह विश्वास इसलिए और बढ़ा/मजबूत हुआ है, क्योंकि वे देख/जान रहे हैं कि सत्ता खेमे में आरके शाह की उम्मीदवारी को लेकर बहुत भरोसा नहीं बन पा रहा है । उम्मीदवारी के लिहाज से आरके शाह को कमजोर आँकते हुए विक्रम शर्मा की उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं को लगता है कि यही समय है जबकि वह सत्ता खेमे की एकता को छिन्न-भिन्न कर सकते हैं । विक्रम शर्मा द्धारा दीपक टुटेजा का जन्मदिन मनाये जाने के पीछे सत्ता खेमे की एकता को ख़त्म करने की कोशिश को देखा/पहचाना तो जा रहा है, लेकिन उस मूल सवाल का जबाव तो इसमें भी नहीं मिला है कि इस काम के लिए उन दीपक टुटेजा को 'हीरो' क्यों बनाया गया - जिन दीपक टुटेजा को विक्रम शर्मा के प्रमुख सलाहकार अजय बुद्धराज ने दुश्मन नंबर एक घोषित किया हुआ है ।
विक्रम शर्मा की उम्मीदवारी के एक बड़े समर्थक नेता ने हालाँकि इस प्रकरण को यह कहते/बताते हुए ज्यादा तवज्जो देने लायक मानने से इंकार किया कि विक्रम शर्मा ने तो अन्य पूर्व गवर्नर्स का भी जन्मदिन मनाया है; बल्कि दूसरे पूर्व गवर्नर्स का जन्मदिन तो उन्होंने ज्यादा तैयारी के साथ और ज्यादा बड़े स्तर पर मनाया है; दीपक टुटेजा का जन्मदिन तो विक्रम शर्मा ने साधारण तरीके से ही मनाया है । विक्रम शर्मा की उम्मीदवारी के एक अन्य समर्थक नेता का कहना है कि विक्रम शर्मा द्धारा दीपक टुटेजा का जन्मदिन आयोजित करवा कर विक्रम शर्मा की उम्मीदवारी के एक समर्थक ने दरअसल अजय बुद्धराज को नीचा दिखाने और अपमानित करने का काम किया है । इन समर्थक नेता का कहना है कि विक्रम शर्मा के साथ समस्या यह हुई है कि कई नेता उनके सलाहकार हो गए हैं और सभी अपने-अपने राजनीतिक हित साधने के लिए उनका इस्तेमाल कर रहे हैं । किसी को यह बात पसंद नहीं आ रही है कि अजय बुद्धराज ने स्वतः ही विक्रम शर्मा के प्रमुख सलाहकार का 'पद' संभाल लिया है; तो किसी का दुःख यह है कि खेमे की तरफ से उम्मीदवार ओंकार सिंह रेणु को बनना चाहिए था, विक्रम शर्मा क्यों हो गए ? इसी तर्ज पर, कुछेक लोगों को लगता है कि दीपक टुटेजा का जन्मदिन मनवा कर ओंकार सिंह रेणु के शुभचिंतकों ने विक्रम शर्मा को अपने खेमे के नेताओं के बीच बदनाम करने की चाल चली है जिससे कि विक्रम शर्मा की उम्मीदवारी खतरे में पड़े और ओंकार सिंह रेणु का काम बने ।
विक्रम शर्मा द्धारा दीपक टुटेजा का जन्मदिन मनवा कर विक्रम शर्मा की उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं ने चाहें जो भी राजनीतिक हित साधने का उपक्रम किया हो, उसका नतीजा तो बाद में देखने को मिलेगा - लेकिन अभी जो दिख रहा है वह यह कि इस कार्रवाई से उनके बीच आपस में ही एक-दूसरे को लेकर शक/संदेह पैदा हो गया है; और इस स्थिति ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति को खासा दिलचस्प बना दिया है ।

Saturday, October 19, 2013

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में सीओएल के लिए प्रस्तुत अपनी उम्मीदवारी को अचानक से वापस लेकर बृज भूषण अग्रवाल ने योगेश मोहन गुप्ता की मुश्किल बढ़ाई

मेरठ । बृज भूषण अग्रवाल ने एक नाटकीय घटनाक्रम में सीओएल के लिए प्रस्तुत की गई अपनी उम्मीदवारी को वापस लेने की घोषणा करके डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति को दिलचस्प मोड़ पर ला खड़ा कर दिया है । बृज भूषण अग्रवाल ने जिस अचानक तरीके से अपनी उम्मीदवारी को वापस लिया है, उसे लेकर तरह-तरह की बातें सुनी/कही जा रही हैं । कुछ लोगों को लगता है कि सीओएल के लिए योगेश मोहन गुप्ता ने जिस तरह की तैयारी दिखाई उसे देख/आँक कर बृज भूषण अग्रवाल डर गए और उन्होंने समझ लिया कि चुनाव हारने से अच्छा यह होगा कि वह चुनाव से बाहर ही हो जाएँ । कुछेक अन्य लोगों का कहना लेकिन यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव रस्तोगी के पाला बदल कर योगेश मोहन गुप्ता के साथ खड़े हो जाने की खबर मिलने के बाद बृज भूषण अग्रवाल के लिए कहीं कोई उम्मीद नहीं बची, तो फिर अपनी उम्मीदवारी को वापस लेने में ही उन्हें अपनी भलाई दिखी । उल्लेखनीय है कि संजीव रस्तोगी पहले बृज भूषण अग्रवाल की उम्मीदवारी के साथ सिर्फ थे भर ही नहीं, बल्कि बृज भूषण अग्रवाल की उम्मीदवारी को हवा देते हुए भी 'दिख' रहे थे । हाल ही में, लेकिन पता नहीं योगेश मोहन गुप्ता ने उन्हें क्या घुट्टी पिलाई कि संजीव रस्तोगी मेरठ के रोटेरियंस की कोर कमेटी में लॉटरी द्धारा हुए फैसले को स्वीकारने की वकालत करने लगे । जबकि अभी हाल के दिनों तक यही संजीव रस्तोगी उक्त फैसले को धता बता कर बृज भूषण अग्रवाल की उम्मीदवारी को हवा दे रहे थे और इस कारण से उनके और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी सुनील गुप्ता के साथ तनातनी की बातें सुनाई देने लगी थीं ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव रस्तोगी अपने गवर्नर-काल के महत्वपूर्ण पदों को बाँटने के जरिये बृज भूषण अग्रवाल की उम्मीदवारी के लिए राजनीतिक बिसात बिछा रहे थे - और ऐसा करते हुए वह दरअसल योगेश मोहन गुप्ता के लिए समस्याएँ खड़ी कर रहे थे । संजीव रस्तोगी का योगेश मोहन गुप्ता के साथ कुछ पुराना बैर है - जिसे दो वर्ष पहले, संजीव रस्तोगी की उम्मीदवारी का योगेश मोहन गुप्ता द्धारा किये गए विरोध से और मजबूती मिली । बृज भूषण अग्रवाल की सीओएल के लिए प्रस्तुत उम्मीदवारी में संजीव रस्तोगी को योगेश मोहन गुप्ता से निपटने का मौका दिखा तो उन्होंने तेवर कस लिए । संजीव रस्तोगी ने तेवर जरूर कस लिए और बृज भूषण अग्रवाल के समर्थन में लोगों को जुटाने की तैयारी भी की, लेकिन उनकी तैयारी उन्हें और बृज भूषण अग्रवाल को कोई खास नतीजा देती हुई नहीं दिखी । इसी बीच योगेश मोहन गुप्ता ने अपना दाँव चला । योगेश मोहन गुप्ता मानते और कहते हैं कि वह डिस्ट्रिक्ट में हरेक की औकात जानते और पहचानते हैं, इसलिए किसी को भी अपने पक्ष में करने में उन्हें ज्यादा समय नहीं लगता । संजीव रस्तोगी भी तभी तक बृज भूषण अग्रवाल की उम्मीदवारी को हवा देते हुए दिखे, जब तक कि योगेश मोहन गुप्ता उनसे नहीं मिले । हाल ही में, एक शाम जब योगेश मोहन गुप्ता ने संजीव रस्तोगी के दरवाजे पर दस्तक दी, तो संजीव रस्तोगी ने उनके साथ आने में और बृज भूषण अग्रवाल की उम्मीदवारी से हाथ खींचने में देर नहीं लगाई ।
सीओएल की उम्मीदवारी को लेकर पर्दे के पीछे जो खेल हुआ उसे बृज भूषण अग्रवाल द्धारा इन पंक्तियों के लेखक से कहे गए उन शब्दों के जरिये समझा/पहचाना जा सकता है, जिसमें उन्होंने बताया कि उनके और योगेश मोहन गुप्ता के बीच हुए समझौते के बाद उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है । उनके और योगेश मोहन गुप्ता के बीच क्या समझौता हुआ है - इसे लेकर बृज भूषण अग्रवाल ने तो कुछ नहीं बताया; लेकिन समझौते की बातचीत की टेबल पर मौजूद एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि योगेश मोहन गुप्ता ने बृज भूषण अग्रवाल को आश्वस्त किया है कि अगली बार सीओएल के लिए वह बृज भूषण अग्रवाल की उम्मीदवारी का समर्थन करेंगे । योगेश मोहन गुप्ता से यह आश्वासन मिलने के बाद ही बृज भूषण अग्रवाल ने अपनी उम्मीदवारी को वापस लेने का फैसला किया ।
बृज भूषण अग्रवाल और योगेश मोहन गुप्ता के बीच हुए इस समझौते ने - और इस समझौते को कराने में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव रस्तोगी तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी सुनील गुप्ता की भूमिका ने दूसरे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को भड़का दिया है । उनका कहना है कि रोटरी के पदों की बंदरबाँट बृज भूषण अग्रवाल और योगेश मोहन गुप्ता को कैसे और क्यों करने दी जा सकती है ? पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के आलावा, दूसरे कई लोगों का भी मानना और कहना है कि बृज भूषण अग्रवाल और योगेश मोहन गुप्ता चूँकि सीओएल में क्रमशः दो बार और एक बार जा चुके हैं, इसलिए अब दूसरे लोगों को मौका मिलना चाहिये । किस को मौका मिले - इसे चाहें वरिष्टता के आधार पर और या लॉटरी जैसे किसी तरीके से तय कर लिया जाये । अधिकतर लोगों का मानना और कहना है कि योगेश मोहन गुप्ता को पदों की ऐसी भूख है कि वह उक्त तर्क को मान कर अपनी उम्मीदवारी छोड़ेंगे नहीं - लेकिन कुछेक अन्य लोगों का तर्क है कि कौन विश्वास करता था कि बृज भूषण अग्रवाल बीच रास्ते में अचानक से अपनी उम्मीदवारी को छोड़ देंगे ? इस तर्क के भरोसे उनका कहना है कि जिस तरह से बृज भूषण अग्रवाल अपनी उम्मीदवारी से पीछे हटने के लिए मजबूर हुए हैं, उसी तरह से योगेश मोहन गुप्ता को भी अपनी उम्मीदवारी छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सकता है ।
लाख टके का सवाल लेकिन यही है कि योगेश मोहन गुप्ता को कौन और कैसे अपनी उम्मीदवारी को वापस लेने के लिए मजबूर कर सकेगा ? यह बात सभी मानते और कहते हैं कि केवल बातें बनाकर और अच्छे-अच्छे तर्क देकर योगेश मोहन गुप्ता की उम्मीदवारी को वापस नहीं कराया जा सकेगा । इसके लिए तो उनके सामने कड़ी चुनौती प्रस्तुत करनी पड़ेगी और उन्हें इस बात का अहसास कराना पड़ेगा कि पदों की उनकी भूख को लोगों का समर्थन नहीं मिलेगा । योगेश मोहन गुप्ता की उम्मीदवारी के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच माहौल बना सकने वाले पूर्व गवर्नर को ही लोगों का समर्थन मिल सकेगा । बृज भूषण अग्रवाल की उम्मीदवारी के वापस होने से कुछेक लोगों को भले ही लगता हो कि योगेश मोहन गुप्ता की राह आसान हो गई है, लेकिन कई एक लोगों का मानना और कहना है कि बृज भूषण अग्रवाल के हटने से योगेश मोहन गुप्ता के लिए मामला ख़राब ज्यादा हो गया है । दरअसल बृज भूषण अग्रवाल का विरोध ज्यादा था - उनकी उम्मीदवारी के रहते उनके विरोधी योगेश मोहन गुप्ता को नापसंद करने के बावजूद उनके साथ खड़े होने के लिए मजबूर होते । लेकिन बृज भूषण अग्रवाल के हटने के बाद अब ऐसी कोई मजबूरी नहीं रही है । विरोध का जो दबाव पहले बृज भूषण अग्रवाल के ऊपर था, वह दबाव अब योगेश मोहन गुप्ता के ऊपर आ गया है । यह देखना दिलचस्प होगा कि कोई पूर्व गवर्नर अपनी सक्रियता से इस दबाव से योगेश मोहन गुप्ता को 'दबा' पाता है; या फिर योगेश मोहन गुप्ता पदों की अपनी भूख को शांत करने के लिए लोगों का समर्थन जुगाड़ ही लेंगे ।

Saturday, October 12, 2013

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में सीओएल के लिए बृज भूषण और योगेश मोहन गुप्ता के बीच छिड़ी लड़ाई में ललित मोहन गुप्ता और वागीश स्वरूप ने अपने लिए मौका देखा

मेरठ । योगेश मोहन गुप्ता ने सीओएल (काउंसिल ऑन लेजिसलेशन) के लिए अपनी उम्मीदवारी को प्रस्तुत करने के साथ-साथ ही जिस तरह से अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने का अभियान शुरू कर दिया है, उससे डिस्ट्रिक्ट 3100 की चुनावी राजनीति में खासी गर्मी पैदा हो गई है । योगेश मोहन गुप्ता चूँकि मानते और कहते हैं कि वह चुनाव में यदि खड़े हुए हैं तो सिर्फ लड़ने के लिए नहीं बल्कि 'जीतने' के लिए खड़े हुए हैं - इसलिए वह हर हथकंडा आजमाना अपना अधिकार और कर्तव्य समझते हैं । योगेश मोहन गुप्ता ने चूँकि इसी तर्ज पर सीओएल के लिए प्रस्तुत अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने का अभियान शुरू किया है, इसलिए डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में गर्मी पैदा होना स्वाभाविक भी है । इस गर्मी का तापमान तब और बढ़ा जब मुरादाबाद के दौरे में योगेश मोहन गुप्ता के साथ ऐसे लोगों को देखा गया जो संजीव रस्तोगी के नजदीकी समझे जाते हैं । संजीव रस्तोगी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट हैं और सीओएल की राजनीति में बृज भूषण अग्रवाल के समर्थन में समझे जाते हैं । उल्लेखनीय है कि सीओएल के लिए इस बार बृज भूषण अग्रवाल को शुरू से ही मजबूत उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा था, किंतु मेरठ से एक उम्मीदवार लाने के नाम पर जो कसरत हुई उसने बृज भूषण अग्रवाल के लिए हालात को मुश्किल बना दिया है ।
दरअसल, सीओएल के लिए योगेश मोहन गुप्ता ने इस बार - लगातार दूसरी बार जब एक बार फिर अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की सुगबुगाहट दिखाई तो मेरठ को 'एक' करने/रखने वाले लोगों ने लाटरी के जरिये बृज भूषण अग्रवाल और योगेश मोहन गुप्ता में से किसी एक की उम्मीदवारी तय करने का प्रस्ताव रखा । सभी की सहमति के बाद लाटरी खुली तो बाजी योगेश मोहन गुप्ता के हाथ लगी । बृज भूषण अग्रवाल ने लेकिन इस फैसले को स्वीकार करने से इंकार कर दिया । बृज भूषण अग्रवाल चूँकि दो बार सीओएल में जा चुके हैं, इसलिए कई लोग इस बार फिर प्रस्तुत होने वाली उनकी उम्मीदवारी के विरोध में कमर कस रहे थे । लाटरी से निकले फैसले को स्वीकार करने से इंकार करके बृज भूषण अग्रवाल ने अपने विरोधियों की संख्या को बढ़ाने का ही काम किया है । बृज भूषण अग्रवाल और उनके नजदीकियों को लेकिन इस विरोध की परवाह नहीं है । उन्हें अपनी राजनीतिक ताकत और अपने रणनीतिक कौशल पर भरोसा है । दूसरे लोगों को भी लगता है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव रस्तोगी का समर्थन उन्हें ताकत दे रहा है, जिसके भरोसे वह मेरठ में बनी कोर-टीम के फैसले को भी न मानने का दम दिखा रहे हैं । लाटरी से निकले फैसले ने योगश मोहन गुप्ता की उम्मीदवारी को यदि ताकत दी है, तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव रस्तोगी के रवैये ने उनकी ताकत के गुब्बारे की हवा भी कम की हुई है ।
योगेश मोहन गुप्ता ने इसीलिये मुरादाबाद के दौरे में सुनियोजित तरीके से ऐसे लोगों को अपने साथ रखा जो संजीव रस्तोगी के नजदीक समझे जाते हैं । इस तरीके से उन्होंने डिस्ट्रिक्ट के लोगों को एक तरफ तो यह दिखाने/बताने की कोशिश की है कि संजीव रस्तोगी उस तरह से बृज भूषण अग्रवाल के साथ नहीं हैं जैसे कि बृज भूषण अग्रवाल और उनके लोग बता/जता रहे हैं और दूसरी तरफ उन्होंने यह संदेश देने का काम किया है कि संजीव रस्तोगी के नजदीकियों को अपनी तरफ कर लेना उनके लिए मुश्किल नहीं होगा । योगेश मोहन गुप्ता की इस चाल के सामने आने के बाद बृज भूषण अग्रवाल और संजीव रस्तोगी की तरफ से जो सफाईयाँ आईं हैं उसने ही दरअसल गर्मी का अहसास कराया है ।
सीओएल की चुनावी लड़ाई में मेरठ को बँटा देख कर ललित मोहन गुप्ता को बल मिला है और इसी बल के चलते उन्होंने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है । उनका सीधा सा तर्क है कि बृज भूषण अग्रवाल दो बार और योगेश मोहन गुप्ता एक बार चूँकि सीओएल में रह चुके हैं इसलिए अब डिस्ट्रिक्ट के दूसरे लोगों को मौका मिलना चाहिए । उल्लेखनीय है कि ललित मोहन गुप्ता ने सीओएल के पिछले चुनाव में भी अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत की थी, लेकिन एक बड़ी दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो जाने के कारण उनकी उम्मीदवारी खुद-ब-खुद ही समाप्त हो गई थी । इस बार, ललित मोहन गुप्ता जिस तर्क के साथ अपनी उम्मीदवारी को प्रमोट कर रहे हैं वह तर्क तो लोगों के बीच अपनी स्वीकार्यता बना रहा है, लेकिन इस स्वीकार्यता को समर्थन में बदलने के जिस मैकेनिज्म की जरूरत होती है उस पर ललित मोहन गुप्ता के लिए अभी बहुत काम करना बाकी है ।  
सीओएल के लिए वागीश स्वरूप ने भी हालाँकि अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत की हुई है, लेकिन उनकी उम्मीदवारी में अपनी जीत से ज्यादा बृज भूषण को हराने का ताव ज्यादा है । उन्होंने ऐलान भी किया हुआ है कि बृज भूषण को हराने का माद्दा यदि किसी और में उन्हें दिखाई दिया तो वह अपनी उम्मीदवारी छोड़ कर उसका समर्थन करेंगे । वागीश स्वरूप अभी तक हालाँकि यह तय नहीं कर पाए हैं कि बृज भूषण अग्रवाल को हराने का माद्दा किस में है । मुजफ्फरनगर में अभी हाल ही में हुई इंटरसिटी के दौरान योगेश मोहन गुप्ता ने वागीश स्वरूप को यह विश्वास दिलाने का भरसक प्रयास किया कि वह बृज भूषण अग्रवाल को हरा सकते हैं । वागीश स्वरूप लेकिन अभी योगेश मोहन गुप्ता के इस दावे पर विश्वास करने को तैयार नहीं हैं । योगेश मोहन गुप्ता के तौर-तरीके भी वागीश स्वरूप को पसंद नहीं हैं इसलिए उम्मीद की जा रही है कि वागीश स्वरूप का समर्थन योगेश मोहन गुप्ता को तो शायद नहीं ही मिलेगा ।
इसी तरह की स्थितियों के चलते सीओएल को लेकर डिस्ट्रिक्ट 3100 में छिड़ी चुनावी लड़ाई दिलचस्प हो उठी है ।

Wednesday, October 9, 2013

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी बनने के किये राजीव देवा और सुधीर मंगला को भद्दी और बेहूदा किस्म की बातों का सहारा ही रह गया है क्या

नई दिल्ली । सुधीर मंगला और राजीव देवा की तरफ से एक दूसरे पर जो आरोप-प्रत्यारोप सुनाई दे रहे हैं, उन्हें सुन कर लोगों ने यह निष्कर्ष निकाल लिया है कि डिस्ट्रिक्ट में गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव इन दोनों के कारण गटर-छाप अभियान में बदलता जा है । अभी तक चुनाव के बहाने गंदगी फैलाने की जिम्मेदारी सुधीर मंगला के घोषित समर्थक पूर्व गवर्नर विनय कुमार अग्रवाल उठाये हुए थे, लेकिन अब राजीव देवा उन्हें पूरी टक्कर दे रहे हैं । राजीव देवा की 'वाणी' को जिन्होंने सुना है उनका कहना है कि विनय कुमार अग्रवाल के बाद अब राजीव देवा ने भी रोटरी में तथा डिस्ट्रिक्ट 3010 में सड़क-छाप टाइप का माहौल बनाने का जिम्मा सँभाल लिया है । विनय कुमार अग्रवाल द्धारा की/कही जाने वाली बातों में डिस्ट्रिक्ट के रोटेरियंस के लिए इस्तेमाल की जा रही गाली-गलौचपूर्ण भाषा जहाँ सुधीर मंगला की उम्मीदवारी का कबाड़ा कर रही है, वहाँ राजीव देवा ने अपनी उम्मीदवारी का जनाजा निकालने की जिम्मेदारी खुद ही संभाल ली है । मजे की बात यह हुई है कि पहले यह दोनों दूसरे रोटेरियंस को अपनी अश्लील व अशालीन भाषा का शिकार बना रहे थे, लेकिन अब ये एक-दूसरे पर पिल पड़े हैं ।
शुरुआत राजीव देवा ने की । उन्होंने सुधीर मंगला को लेकर भद्दी बातें कहना शुरू किया तो सुधीर मंगला की तरफ से जबावी मोर्चा विनय कुमार अग्रवाल ने संभाला । राजीव देवा ने अकेले सुधीर मंगला को ही निशाना नहीं बनाया था - उन्होंने रवि भाटिया और सुरेश भसीन के लिए भी अपशब्दों का इस्तेमाल किया । रवि भाटिया और सुरेश भसीन ने लेकिन उनकी बातों को अनसुना ही किया, और उनके स्तर पर उतरने से बचने की ही कोशिश की । सुधीर मंगला के यहाँ से किंतु राजीव देवा को करारा जबाव मिला । सुधीर मंगला और विनय कुमार अग्रवाल को जब पता चला कि राजीव देवा रोटरी क्लब दिल्ली राजधानी से सुधीर मंगला के निकलने की कहानी सुना कर सुधीर मंगला को बदनाम कर रहे हैं तो विनय कुमार अग्रवाल ने राजीव देवा की पोल-पट्टी खोलना शुरू किया । लोगों को बताया गया कि किस तरह राजीव देवा के क्लब ट्रेनर रहते हुए रोटरी क्लब दिल्ली कनाट प्लेस बंद हुआ । इससे पिछले वर्ष राजीव देवा की पत्नी मधु देवा के अध्यक्ष रहते हुए रोटरी क्लब दिल्ली रायसीना हिल्स बंद हुआ था । मधु देवा इससे पहले अध्यक्ष रहते हुए एक और क्लब - रोटरी क्लब दिल्ली साउथ सबर्बन - बंद करवा चुकी थीं । मधु देवा के अध्यक्ष रहते हुए दो क्लब्स के बंद होने के लिए भी जिम्मेदार राजीव देवा को माना/पहचाना गया था । लोगों का कहना रहा कि मधु देवा तो नाम की अध्यक्ष थीं; पर्दे के पीछे से कामकाज राजीव देवा ही करते थे और उनकी हरकतों के चलते ही उक्त क्लब्स बंदी की कगार पर पहुँचे ।
राजीव देवा को रोटरी भी करनी है - लिहाजा उन्होंने तिकड़म लगाई और अपने क्लब और अपनी पत्नी के क्लब के बचे-खुचे लोगों को लेकर रोटरी क्लब दिल्ली कनाट प्लेस रायसीना हिल्स बना लिया । इसी वर्ष बने इस क्लब की तरफ से राजीव देवा उम्मीदवार हो गए हैं । विनय कुमार अग्रवाल का कहना है कि जो व्यक्ति क्लब नहीं चला सका और जिसके नाम तीन-तीन क्लब्स को बंद करने का रिकॉर्ड है वह डिस्ट्रिक्ट में क्या कर सकेगा ? मजे की बात यह है कि राजीव देवा कुछ करने का दावा कर भी नहीं रहे हैं । वह तो खुद कह रहे हैं कि वह तो मजे लेने के लिए उम्मीदवार बने हैं । रोटरी को राजीव देवा ने मजे लेने का जरिया ही माना/बनाया हुआ है और इसके चलते उन्होंने जो-जो हरकतें कीं तो उनके और उनकी पत्नी के क्लब्स बंद होते गए । रोटरी को मजे लेने का अड्डा माने बैठे राजीव देवा ने क्लब चलाने से ज्यादा क्लब्स को बंद करने का काम किया है । विनय कुमार अग्रवाल लोगों को बता रहे हैं कि राजीव देवा सिर्फ रोटरी में ही बदनाम नहीं हैं, बल्कि अपने कामकाज में भी बदनाम हैं । कॉम्पीटेंट ऑटोमोबाइल कंपनी लिमिटेड में वह अच्छी खासी नौकरी पर थे, किंतु अपनी हरकतों से उन्होंने कंपनी के मुख्य प्रवर्तक व सर्वेसर्वा राज चोपड़ा को इतना परेशान किया कि राज चोपड़ा को उन्हें बुरी तरफ झिड़क कर बाहर करना पड़ा । विनय कुमार अग्रवाल के दावे के अनुसार, रोटरी में तो राजीव देवा के लोगों के साथ झगड़े-झंझट रहे ही हैं - कामकाजी जीवन में भी उनके दूसरों के साथ लड़ने-झगड़ने वाले संबंध रहे हैं ।
सुधीर मंगला की तरफ के लोगों और राजीव देवा के बीच भद्दी भाषा में छिड़े आरोपों-प्रत्यारोपों को एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । दरअसल इन दोनों ने माना/समझा हुआ है कि अश्लील और अशालीन बातें करके ये लोगों के बीच अपने लिए समर्थन जुटा लेंगे । इस 'फार्मूले' के भरोसे सुधीर मंगला और राजीव देवा ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा के क्लब्स पर खास ध्यान देना शुरू किया है । पता नहीं उन्हें क्यों ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा में लफंगे किस्म के लोग बसते हैं जो हल्की/भद्दी बातों के असर में उनका समर्थन करने को तैयार हो जायेंगे । उल्लेखनीय है कि सुधीर मंगला और राजीव देवा को उनकी बातों के स्तर के कारण ही दिल्ली के क्लब्स अपने-अपने अधिष्ठापन आयोजनों में इन्हें आमंत्रित किये जाने से बचे, जिसे देख/पहचान कर इन्होंने समझ लिया है कि दिल्ली के क्लब्स में तो इनकी दाल नहीं गलेगी; और इसीलिए इनकी उम्मीदें अब उत्तर प्रदेश और हरियाणा के क्लब्स पर आ टिकी हैं । यह सच है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के क्लब्स के लोग उतने इलीट किस्म के नहीं हैं, जितने दिल्ली के क्लब्स के लोग हैं - और इसी आधार पर सुधीर मंगला और राजीव देवा को लग रहा है कि वे भद्दी और बेहूदा किस्म की बातों से उत्तर प्रदेश और हरियाणा के क्लब्स में अपने लिए समर्थन जुटा लेंगे । ऐसे में, इन दोनों के बीच होड़ इस बात को लेकर छिड़ी है कि कौन ज्यादा बेहूदा और भद्दी बातें कर सकता है । सुधीर मंगला की तरफ से मोर्चा विनय कुमार अग्रवाल ने संभाला हुआ है तो राजीव देवा खुद ही उन्हें टक्कर दे रहे हैं । लगता है कि इन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि इनकी बातों और हरकतों से रोटरी और डिस्ट्रिक्ट की बदनामी तो हो ही रही है, साथ ही इन्हें भी इससे कोई फायदा नहीं हो रहा है ।

Tuesday, October 8, 2013

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 के रोटेरियन मानव चावला ने आईफैक्स कला दीर्घा में रमेश राणा की पेंटिंग्स की एकल प्रदर्शनी का उद्घाटन किया

नई दिल्ली । नई दिल्ली में रफ़ी मार्ग स्थित आईफैक्स (ऑल इंडिया फ़ाईन ऑर्ट्स एण्ड क्रॉफ्ट्स सोसायटी) की कलादीर्घा में आयोजित रमेश राणा की पेंटिंग्स के आठवीं एकल प्रदर्शनी का रोटेरियन और वास्तु व एस्ट्रो ऐनलिस्ट मानव चावला ने आज उद्घाटन किया । प्रख्यात चित्रकार और आईफैक्स के कार्यकारी अध्यक्ष परमजीत सिंह ने कई अन्य प्रमुख कलाकारों, कला की शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों तथा कला प्रेमियों की उपस्थिति में संपन्न हुए उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता की ।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनीवर्सिटी और जीवाजी यूनीवर्सिटी ग्वालियर से कला की शिक्षा प्राप्त करने वाले रमेश राणा ने इससे पहले विभिन्न कला दीर्घाओं में आयोजित होने वाली सात एकल प्रदर्शनियों में अपनी पेंटिंग्स को प्रदर्शित किया है तथा इसके आलावा 45 से अधिक समूह प्रदर्शनियों में उनकी अलग-अलग पेंटिंग्स को दिखाया गया है । रमेश राणा ने कई कला शिविरों में भी भाग लिया है और आईफैक्स के स्कॉलरशिप अवॉर्ड के साथ-साथ उन्होंने
अन्य कुछ पुरस्कारों व सम्मानों को भी प्राप्त किया है ।
मानव चावला ने रमेश राणा की पेंटिंग्स की प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद दिए अपने भाषण में रमेश राणा द्धारा अपनी पेंटिंग्स में प्रयुक्त किये गए रंगों की संरचना को खास तौर से रेखांकित किया और वास्तु के नजरिये से उसकी व्याख्या प्रस्तुत की । पेंटिंग्स में अभिव्यक्त होने वाले रूपाकारों को मानव चावला ने जिस तरह देखा/पहचाना उसके कारण वहाँ मौजूद लोगों को रमेश राणा की पेंटिंग्स को देखने का एक भिन्न नजरिया
मिला; और इसके चलते मानव चावला की बातों को ध्यान से सुना गया ।
मानव चावला यूँ तो श्री रतनम ग्रुप और श्री रतनम रियल एस्टेट में डायरेक्टर हैं तथा पार्थ रिएल्टर्स व पार्थ इंटरनेशनल में मैनेजिंग डायरेक्टर हैं किंतु उनकी दिलचस्पी के विषय वैदिक वास्तु और न्यूमरोलॉजी है । ज्योतिष व फेंग शुई में भी उनका अच्छा दखल है । वास्तु-एस्ट्रो-न्यूमरो-फेंग शुई एनालिष्ट के रूप में मानव चावला की विश्वसनीय पहचान है और इस क्षेत्र में उनकी सेवाएं लेने वालों में देश के विभिन्न प्रमुख शहरों के विशिष्ट लोग हैं । मानव चावला एक प्रभावी वक्ता हैं और अपने इस गुण के कारण वह देश भर में वास्तु व न्यूमरोलॉजी पर आयोजित होने वाले वैचारिक कार्यक्रमों में खास तौर से आमंत्रित किये जाते हैं तथा उत्सुकता के साथ सुने जाते हैं । सेमिनार व विचार गोष्ठियों में वक्ता के रूप में मानव चावला की प्रस्तुति का तरीका ऐसा रहता है कि वह धीर-गंभीर व नीरस-से विषय में भी जैसे जान डाल देते हैं और श्रोताओं के बीच उनकी बात को ध्यान से सुनने की दिलचस्पी खुद-ब-खुद पैदा हो जाती है । विषय को उसकी पूरी तथ्यात्मकता तथा रोचकता के साथ प्रस्तुत करने की ख्याति के चलते ही मानव चावला को विभिन्न रोटरी क्लब्स में मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया जाता है और इस कारण रोटेरियंस के बीच उनकी पहचान एक रोटेरियन से अलग और खास है ।
मानव चावला अकेले ऐसे रोटेरियन हैं जो एक रोटरी सदस्य होते हुए दूसरे रोटेरियंस के सामने रोटरी से अलग किसी विषय पर अपनी विशेषज्ञता को प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किये जाते हैं ।
उल्लेखनीय है कि रोटरी के आयोजनों में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर, क्लब अध्यक्ष और दूसरे पदाधिकारी ही वक्ता के रूप में आते हैं । रोटरी में विभिन्न क्षेत्रों के होशियार व कामयाब लोगों की भी कोई कमी नहीं है - लेकिन अपने-अपने क्षेत्रों में साख बनाये हुए लोगों को रोटरी के आयोजनों में किसी भी तरह की तवज्जो मिलते हुए नहीं देखा गया है । रोटरी में यह मौका सिर्फ एक अकेले मानव चावला को मिलते हुए देखा गया है । रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 में मानव चावला रोटरी क्लब गाजियाबाद नवोदय के चार्टर प्रेसीडेंट हैं तथा डिस्ट्रिक्ट स्तर पर कई जिम्मेदारियों का निर्वाह कर चुके हैं, जिनमें प्रमुख है वर्ष 2011-12 में डिस्ट्रिक्ट कांफ्रेंस प्रोमोशन में डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी पद की जिम्मेदारी ।
आईफैक्स में आयोजित कई प्रमुख चित्रकारों की उपस्थिति में रमेश राणा की पेंटिंग्स की एकल प्रदर्शनी के उद्घाटन के जरिये मानव चावला की सक्रियता और पहचान के दायरे का विस्तार ही हुआ है ।


Sunday, October 6, 2013

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 में विनोद बंसल और पीटी प्रभाकर को बदनाम करके उन्हें ब्लैकमेल करने के सूत्रधार की खोज के संकेतों के मुकेश अरनेजा की तरफ जाने से मामला खासा दिलचस्प हुआ

नई दिल्ली । विनोद बंसल और पीटी प्रभाकर को बेनकाब करने का आह्वान करती हुई फर्जी ईमेल डिस्ट्रिक्ट के जिन पूर्व गवर्नर्स को भेजी गई है, उनमें से कुछ का माथा इस दिलचस्प संयोग को देख/पहचान कर ठनका है कि उक्त मेल मुकेश अरनेजा को नहीं भेजी गई है । मुकेश अरनेजा डिस्ट्रिक के बड़े नेता हैं; बड़े तुर्रमखाँ नेता हैं । डिस्ट्रिक्ट में ही नहीं, डिस्ट्रिक्ट से बाहर भी उनका बड़ा नाम है । ऐसे में, सोचने/विचारने वाली बात यह है कि जो व्यक्ति विनोद बंसल और पीटी प्रभाकर को बेनकाब करना चाहता है, वह अपना आह्वान डिस्ट्रिक्ट 3010 के ऐसे पूर्व गवर्नर्स तक तो पहुँचा रहा है, जो बेचारे न तीन में हैं और तेरह में - तो फिर वह मुकेश अरनेजा को अपना आह्वान क्यों नहीं पहुँचा रहा है ?
यह सवाल इसलिए और भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि उक्त आह्वान करने वाले ने जो तरीका अपनाया है वह फर्जी, धोखाधड़ी और षड्यंत्र की श्रेणी में आता है । अब जो व्यक्ति फर्जी, धोखाधड़ी और षड्यंत्रपूर्ण तरीके से एक आह्वान कर रहा है और सभी से कर रहा है तो वह मुकेश अरनेजा को आह्वान क्यों नहीं कर रहा है ?
कहीं इसका कारण यह तो नहीं है कि यह आह्वान करने का काम खुद मुकेश अरनेजा ने ही किया है । सामान्य व्यवहार की बात है कि कोई भी जब दूसरों को - बहुत सारे दूसरों को - ईमेल भेजता है तो वह अपने आप को नहीं भेजता । अपने आप को भेजने की उसे जरूरत ही नहीं होती । तो क्या, मुकेश अरनेजा भी अनजाने में इसी सामान्य व्यवहार का पालन कर बैठे और 'रंगेहाथ' पकड़े जाने का सुराग दे बैठे । अपराधशास्त्र का एक महत्वपूर्ण सूत्र है कि हर अपराधी कोई न कोई ऐसी चूक कर बैठता है जिससे वह पकड़ा जाता है । इस तथ्य के आधार पर जो लोग यह मान रहे हैं कि उक्त फर्जी मेल मुकेश अरनेजा की ही कारस्तानी है, वह एक यह तर्क और दे रहे हैं कि मुकेश अरनेजा को फर्जी, धोखाधड़ी और षड्यंत्रपूर्ण तरीके से काम करने का बहुत शौक है । अपने इस शौक के चलते वह बार-बार 'पकड़ा' गया है - लेकिन बेशर्मी वाला गुण भी उसमें इस कदर कूट-कूट कर भरा हुआ है कि फिर भी वह बाज नहीं आता है ।
विनोद बंसल और पीटी प्रभाकर को बेनकाब करने का आह्वान करने की मुकेश अरनेजा की इस कारस्तानी के पीछे लोगों को एक और कारण ध्यान में आता है और वह यह कि मुकेश अरनेजा और उनके गिरोह के रमेश अग्रवाल, असित मित्तल और विनय कुमार अग्रवाल जैसे दूसरे लोग पिछले कुछ दिनों से विनोद बंसल को किसी न किसी बहाने से निशाने पर लेते रहे हैं । पिछले दिनों रोटरी फाउंडेशन के लिए पैसे जुटाने के मामले में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में विनोद बंसल ने जब एक बड़ा कीर्तिमान बनाया और इस कीर्तिमान के चलते वह रोटरी के बड़े नेताओं व पदाधिकारियों की निगाह में चढ़े तो इन लोगों की तो जैसे बुरी तरह सुलग गई । इसके चलते इन्होंने अलग-अलग मौकों पर तरह-तरह से विनोद बंसल को लेकर मुँहझाँसी की और विनोद बंसल को विभिन्न आरोपों के घेरे में लेते हुए उन्हें बदनाम करने की कोशिश की । विनोद बंसल का उससे जब कुछ बिगड़ता हुआ इन्हें नहीं दिखा तो - जैसा कि समझा जाता है - मुकेश अरनेजा ने फर्जी ईमेल के जरिये उन्हें बदनाम करने करने की चाल चली ।
मुकेश अरनेजा को - और उनके गिरोह के सदस्यों को विनोद बंसल से जो भी समस्याएँ और शिकायतें हैं उन्हें वह उनकी अनुपस्थिति में और या फर्जी तरीके से लोगों के बीच क्यों लाते हैं; सीधे बात क्यों नहीं करते हैं ? उनकी बातें, उनकी शिकायतें यदि सचमुच सही और प्रासंगिक हैं तो छिप कर उन बातों को कहने का भला क्या मतलब है ? लोगों को लगता है कि अपनी पहचान के साथ और सीधी बात करने की इनकी औकात नहीं है और इसीलिए यह फर्जी, धोखाधड़ी और षड्यंत्रपूर्ण तरीके अपनाते हैं । इस बार, विनोद बंसल और पीटी प्रभाकर को बदनाम करने के लिए जिस तरह का फर्जी तरीका अपनाया गया है, उससे लगता है कि असल उद्देश्य विनोद बंसल और पीटी प्रभाकर को ब्लैकमेल करने का है ।
विनोद बंसल और पीटी प्रभाकर को बदनाम करके उन्हें ब्लैकमेल करने के सूत्रधार की खोज के सारे संकेत मुकेश अरनेजा की तरफ जाने से यह सारा मामला खासा दिलचस्प हो गया है ।

Saturday, October 5, 2013

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 में घटिया और टुच्ची राजनीति करने वाले पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कायर भी हैं !

'रचनात्मक संकल्प' और 'मुकेश मिश्र' का नाम इस्तेमाल करते हुए ईमेल आईडी sankalprachnatmak@rediffmail.com से अभी कुछ देर पहले रोटेरियंस को भेजी गई मेल फर्जी है; इस मेल से वास्तविक 'रचनात्मक संकल्प' और 'मुकेश मिश्र' का कोई संबंध नहीं है । यह ईमेल आईडी हमारी नहीं है । हमारी ईमेल आईडी है : rachnatmak.sankalp@gmail.com
'रचनात्मक संकल्प' और 'मुकेश मिश्र' अपने नाम के इस दुरूपयोग की कड़े शब्दों में निंदा और भर्त्सना करते हैं ।
डिस्ट्रिक्ट 3010 में तीन-चार पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अपनी टुच्ची और घटिया हरकतों के लिए डिस्ट्रिक्ट में ही नहीं, पूरे रोटरी समाज में बुरी तरह बदनाम हैं । साथी रोटेरियंस के खिलाफ बेहूदा, अश्लील व अशालीन किस्म की बातें करना इनका मुख्य काम है । रोटरी में इन्हें सभी पद चाहिए होते हैं और इन्हें पाने की कोशिश में यह अपने साथी रोटेरियंस को हर तरह से बदनाम करने का काम करते हैं । साथी रोटेरियंस में से अन्य कोई यदि इन्हें अपने से आगे बढ़ता हुआ दिखाई देता है तो यह उसे तरह-तरह से बदनाम करके उसका रास्ता रोकने की कोशिश करते हैं । अपनी इस कोशिश में यह दूसरों का नाम इस्तेमाल करके फर्जी पत्र और ईमेल लिखने तक लिखने का काम करने से परहेज नहीं करते हैं । इनमें इतना भी साहस नहीं है कि ये लोगों को जो बताना चाहते हैं, उसे अपने नाम से बतायें ।
इस तरह, फर्जी पत्रों का सहारा लेने वाले डिस्ट्रिक्ट 3010 के घटिया और टुच्ची राजनीति करने वाले जो तीन-चार पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हैं, वह अपने आप को कायर भी साबित करते रहे हैं ।
इन्हीं पूर्व गवर्नर्स ने इस फर्जी ईमेल के जरिये अपनी घटिया राजनीति करने का एक और कायराना सुबूत पेश किया है ।
'रचनात्मक संकल्प' जिम्मेदार और विश्वसनीय तरीके से सूचनाओं व विचारों का आदान-प्रदान करने में यकीन करता है; और इसीलिए 'रचनात्मक संकल्प' में जो कुछ भी प्रकाशित होता है वह हमारी पूरी संपर्क-पहचान के साथ प्रकाशित होता है - ताकि तथ्यों व विचारों को लेकर यदि किसी को कुछ कहना है तो वह हमसे कह सके और तथ्यों व विचारों को सही रूप में देखा/परखा जा सके ।
तथ्यों की सच्चाई पर और उस सच्चाई को जानने/पहचानने की कोशिश पर हमारा पूरा यकीन है और अपने इस यकीन के कारण ही फर्जी तरीके से कुछ करने की हमें कभी कोई जरूरत नहीं पड़ती ।
हमें अपने पाठकों पर भी पूरा भरोसा है । हमें विश्वास है कि हमारे पाठक असली और नकली का फर्क समझते रहेंगे ।
हम एक बार फिर दोहराना चाहेंगे कि हमारा एक ही ईमेल आईडी है और वह है rachnatmak.sankalp@gmail.com
रोटरी के अपने पाठकों से हम अनुरोध करेंगे कि डिस्ट्रिक्ट 3010 के धोखेबाज, फरेबी और टुच्चे पूर्व गवर्नर्स की गतिविधियों से सावधान रहें । कहीं ऐसा न हो कि उनकी फर्जी कारस्तानियों का अगला निशाना या शिकार आप बनें !