Showing posts with label DISTRICT GOVERNOR ELECT ELECTION. Show all posts
Showing posts with label DISTRICT GOVERNOR ELECT ELECTION. Show all posts

Tuesday, January 27, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में नोमीनेटिंग कमेटी के नतीजे से निराश और नाराज तथा अपने आप को ठगा हुआ पा रहे लोगों की तरफ से दीपक गुप्ता और प्रसून चौधरी पर नोमीनेटिंग कमेटी के फैसले को चैलेंज करने के लिए लगातार पड़ रहे दबाव ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति को दिलचस्प मोड़ दिया

गाजियाबाद । शरत जैन और सतीश सिंघल की अधिकृत हो चुकी उम्मीदवारी को चैलेंज करने को लेकर डिस्ट्रिक्ट में जिस तरह की सुगबुगाहट है, उसके चलते डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति का पारा खासा गर्म हो उठा है । नोमीनेटिंग कमेटी का फैसला आने के बाद यूँ तो आमतौर पर चुनावी सक्रियता ढीली पड़ जाती रही हैं, लेकिन इस बार उल्टा ही हो रहा है । नोमीनेटिंग कमेटी के फैसले पर डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच जिस तरह की निराशा और असंतोष है, उसके कारण प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवारों पर चैलेंज करने के लिए लोगों का दबाव पड़ रहा है । रोटरी की चुनावी राजनीति में ऐसे मौके कम ही देखने को मिलते हैं जब नोमीनेटिंग कमेटी के फैसले को चैलेंज करने के लिए प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवार से भी ज्यादा उत्सुक दूसरे लोग हों । डिस्ट्रिक्ट 3012 के पैतृक डिस्ट्रिक्ट 3010 में तो पहले कभी शायद ही ऐसा मौका बना हो । अभी तक देखने में यही आया है कि नोमीनेटिंग कमेटी के फैसले से असंतुष्ट प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवार खुद ही चैलेंज करने के बारे में सोचता है, और अधिकृत उम्मीदवार व उसके समर्थक ज्यादा सक्रिय नजर आते हैं । डिस्ट्रिक्ट 3012 के पहले ही चुना(वों) में लेकिन इसका ठीक उल्टा देखने में आ रहा है । यहाँ प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवारों की तुलना में डिस्ट्रिक्ट के लोग चैलेंज करने के बारे में ज्यादा 'तैयारी' दिखा रहे हैं ।
ऐसा दरअसल इसलिए भी है क्योंकि डिस्ट्रिक्ट के लोगों को पहले से ही यह आशंका थी कि डिस्ट्रिक्ट पर अपना कब्जा बनाये रखने के लिए अरनेजा गिरोह के नेता किसी भी तरह की हेराफेरी कर सकते हैं । लोगों का मानना और कहना है कि डिस्ट्रिक्ट 3010 में तो इनकी हरकतों पर लगाम रखने के लिए दूसरे नेता भी थे, लेकिन डिस्ट्रिक्ट 3012 में तो यह बिलकुल ही बेलगाम हो जायेंगे - इसलिए लोगों को खुद ही सक्रिय होना पड़ेगा । खास बात यह है कि लोग समझ रहे हैं और स्वीकार कर रहे हैं कि मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल चूँकि बहुत ही घाघ किस्म के हैं, इसलिए जीतने के अवसर बनाने के मामले में आगे दिखेंगे - और इसी कारण से इनके खिलाफ लगातार सक्रिय रहने की जरूरत है । लोगों को अनुमान था कि नोमीनेटिंग कमेटी में यह लोग कोई न कोई खेल कर लेंगे और इसीलिए लोगों को नोमीनेटिंग कमेटी का फैसला मंजूर नहीं हुआ है और वह प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवारों पर चैलेंज करने के लिए दबाव बना रहे हैं ।
लोगों के इस मूड को देखते/भाँपते हुए अधिकृत उम्मीदवार और उनके समर्थकों के सामने समस्या यह आ खड़ी हुई है कि वह कैसे चैलेंज करने की कोशिशों को रोकें ? शरत जैन और उनके समर्थकों के लिए तो यह इसलिए भी बड़ी समस्या हो गई है क्योंकि एक तरफ तो वह 'बड़ी जीत' का दावा करते हुए फूल कर कुप्पा हो रहे हैं, और दूसरी तरफ चैलेंज से डर रहे हैं । चैलेंज को रोकने की अपनी कोशिशों पर उन्हें लोगों से यही सुनने को मिल रहा है कि नोमीनेटिंग कमेटी में मिली 'बड़ी जीत' यदि सचमुच की जीत है तो फिर चैलेंज से डर क्यों रहे हो - चैलेंज हो जाने दो और सीधे चुनाव का सामना भी कर लो । शरत जैन की उम्मीदवारी को चैलेंज करना लोगों को इसलिए भी जरूरी लग रहा है क्योंकि वह मान रहे हैं कि शरत जैन एक कठपुतली गवर्नर ही बनेंगे, जबकि डिस्ट्रिक्ट को एक ऐसे गवर्नर की जरूरत है जो सबको साथ लेकर चल सके । जाहिर तौर पर यह सिर्फ विरोधियों का ही आरोप नहीं  है, बल्कि सत्ता खेमे के लोगों का भी स्वीकार है कि नोमीनेटिंग कमेटी में शरत जैन को जो जीत मिली है उसे मुकेश अरनेजा ने तिकड़मों से प्राप्त किया है जिसका भांडा सीधे हो सकने वाले चुनावों में फूट सकता है; और जो लोग शरत जैन के पक्ष में भी हैं वह भी मान रहे हैं कि शरत जैन की गवर्नरी में चलेगी तो रमेश अग्रवाल और मुकेश अरनेजा की मनमानी ही । इसलिए वह हर संभव कोशिश कर रहे हैं कि नोमीनेटिंग कमेटी के फैसले को चैलेंज न मिले और उनका भांडा फूटने से बचा रह जाए । उनके लिए मुसीबत की बात लेकिन यह हो रही है कि डिस्ट्रिक्ट के लोगों के मूड और तर्कों के सामने उनकी कोशिशों के लिए रास्ता बनता नहीं दिख रहा है ।
सतीश सिंघल के लिए 'बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने' की तर्ज पर मिली जीत को बचाए रखने की और भी ज्यादा बड़ी चुनौती है । दरअसल सतीश सिंघल की जीत से लोग इसलिए भी दुखी और निराश हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि सतीश सिंघल की इस जीत ने उनके साथ ज्यादा बड़ा छल किया है । सतीश सिंघल को खुद भी इस जीत का अनुमान नहीं था । वह तो बहुत पहले ही अपने आपको चुनावी दौड़ से बाहर हो चुका मान बैठे थे और एक उम्मीदवार के रूप में सक्रिय नहीं रह गए थे । एक उम्मीदवार के रूप में सतीश सिंघल ने लोगों को बुरी तरह से निराश ही किया है और इसीलिए उनके अधिकृत उम्मीदवार चुने जाने में लोगों ने अपने आप को ठगा हुआ महसूस किया है । यही कारण है कि उनकी उम्मीदवारी के चैलेंज समर्थन करने के लिए तत्पर हैं । सतीश सिंघल के लिए मुसीबत की बात यह है कि उनकी वकालत करने तथा उनके सामने आने वाले चैलेंज को टलवाने के लिए कोई आगे ही नहीं आ रहा है और उन्हें प्रसून चौधरी के नजदीकियों से खुद ही सिफारिशें करना पड़ रही हैं ।
नोमीनेटिंग कमेटी के जरिये चुनाव कराने का जो 'तमाशा' हुआ है और उसका जो नतीजा आया है, उसने डिस्ट्रिक्ट में लोगों को जिस तरह से निराश और नाराज किया है - उसके कारण दीपक गुप्ता और प्रसून चौधरी पर नोमीनेटिंग कमेटी के फैसले को चैलेंज करने के लिए लगातार दबाव पड़ रहा है । यह दबाव डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में नई गर्माहट पैदा कर रहा है ।

Thursday, January 22, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 जैसे एक नए बने डिस्ट्रिक्ट में अच्छा माहौल बने और किसी को भी रमेश अग्रवाल व मुकेश अरनेजा के हाथों बेइज्जत न होना पड़े, इसके लिए नोमीनेटिंग कमेटी के सदस्यों द्धारा ही निष्पक्ष चुनाव कराने की और नोमीनेटिंग कमेटी में गुप्त मतदान की माँग की जा रही है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजय खन्ना अधिकृत उम्मीदवा(रों) का चयन गुप्त मतदान से कराने की माँग को लेकर खासे असमंजस में हैं । उनका असमंजस चुनाव कमेटी के सदस्य मुकेश अरनेजा के कारण है । संजय खन्ना के नजदीकियों का कहना है कि चुनाव कमेटी के सदस्य के रूप में मुकेश अरनेजा का जो रवैया रहा है, उसे देखते हुए संजय खन्ना को डर है कि गुप्त मतदान की बात पर मुकेश अरनेजा बखेड़ा खड़ा कर सकते हैं और फिर नाहक ही फजीता होगा । मजे की बात यह है कि अधिकृत उम्मीदवारों का चयन करने के लिए गुप्त मतदान की जो माँग उठी है, उसके लिए भी मुकेश अरनेजा एण्ड कंपनी को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है । स्वाभाविक है कि जो समस्या मुकेश अरनेजा ने ही पैदा की है, उस समस्या को हल करने का प्रयास मुकेश अरनेजा भला क्यों सफल होने देंगे ? संजय खन्ना के लिए चुनौती की बात यह है कि वह अधिकृत उम्मीदवा(रों) का चयन निष्पक्ष तरीके से कैसे करवाएँ ? अधिकृत उम्मीदवा(रों) का चयन निष्पक्ष तरीके से करवाने के लिए ही गुप्त मतदान की माँग की जा रही है । यह माँग चूँकि नोमीनेटिंग कमेटी के लिए आने वाले वरिष्ठ रोटेरियंस की तरफ से आई है, इसलिए इस माँग का महत्व खासा बढ़ जाता है ।
नोमीनेटिंग कमेटी के लिए जिन रोटेरियंस के नाम गए हैं, वह शरत जैन और दीपक गुप्ता के बीच होने वाले चुनाव के संदर्भ में अरनेजा गिरोह के रवैये के चलते अपने आप को खासा फँसा हुआ पा रहे हैं । अरनेजा गिरोह के नेताओं - खासकर मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल की तरफ से नोमीनेटिंग कमेटी के लिए चुने गए सदस्यों पर दबाव बनाया गया है कि उन्होंने यदि शरत जैन को नहीं चुना तो फिर उनसे 'बदला' लिया जायेगा । डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद के लिए शरत जैन को चुनवाना/जितवाना इन दोनों को अपनी चौधराहट को बनाये रखने के लिए जरूरी लगता है; और इसके लिए यह कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं ।
इस संबंध में दिलचस्प उदाहरण रोटरी क्लब दिल्ली रिवरसाइड का है । रोटरी क्लब दिल्ली रिवरसाइड ने पिछले दिनों पेम थर्ड का आयोजन किया था, जिसमें रमेश अग्रवाल ने कई तरह की बेहूदगियाँ कीं और क्लब के लोगों को तरह तरह से परेशान और बेइज्जत किया । इस कारण से क्लब के लोगों में रमेश अग्रवाल के प्रति बेहद नाराजगी है और वह जान/समझ रहे हैं कि शरत जैन की उम्मीदवारी का समर्थन करने का मतलब रमेश अग्रवाल के हाथों और परेशान व बेइज्जत होने का अवसर बनाना होगा - लेकिन रमेश अग्रवाल की धमकी के चलते खुलेआम शरत जैन की उम्मीदवारी की खिलाफत करने का वह साहस नहीं कर पा रहे हैं । क्लब के वरिष्ठ सदस्य सतीश गुप्ता के सुपुत्र मोहित गुप्ता, रमेश अग्रवाल के क्लब में सेक्रेटरी हैं और अध्यक्ष बनने की लाइन में हैं । रमेश अग्रवाल ने धमकी दी हुई है कि रिवरसाइड ने यदि कोई गड़बड़ की, तो वह मोहित गुप्ता को अध्यक्ष नहीं बनने देंगे । मोहित गुप्ता के अध्यक्ष बनने की प्रक्रिया में रमेश अग्रवाल पहले भी एक बार टाँग अड़ा चुके हैं, जिसके कारण अध्यक्ष बनने की लाइन में लगने के लिए मोहित गुप्ता को इस वर्ष दोबारा सेक्रेटरी बनना पड़ा है । इसके आलावा, दिल्ली रिवरसाइड के मनोज लांबा अगले से अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार बनने की तैयारी में हैं, इसलिए भी क्लब के लोग अरनेजा गिरोह के साथ खुलेआम पंगा लेने से बचना चाहते हैं और रमेश अग्रवाल के हाथों बुरी तरह बेइज्जत होने के बाद भी शरत जैन से दूर नहीं 'दिखना' चाहते हैं ।
शरत जैन को समर्थन दिलवाने के लिए अरनेजा गिरोह के नेताओं ने इसी तरह के हथकंडे अपनाए हुए हैं - जिसके चलते नोमीनेटिंग कमेटी के लिए चुने गए सदस्य अपने आप को फँसा हुआ पा रहे हैं और माँग कर रहे हैं कि अधिकृत उम्मीदवा(रों) को चुनने के लिए गुप्त मतदान कराया जाये, जिससे कि यह पता न चल सके कि किसने किस का समर्थन किया है ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद के लिए शरत जैन और दीपक गुप्ता के बीच होने वाले चुनाव का एक दिलचस्प पहलू यह बना है कि शरत जैन जहाँ पूरी तरह मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल की तिकड़मों के भरोसे हैं, वहाँ दीपक गुप्ता ने अपनी मेहनत और अपने व्यवहार से लोगों के बीच अपनी पैठ बनाई है । शरत जैन की जीत में लोगों को मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल की चौधराहट के बने रहने तथा उस चौधराहट का शिकार बने रहने का भय है, जबकि दीपक गुप्ता की जीत लोगों को अपनी जीत की तरह दिख रही है । यहाँ संजय खन्ना और रवि चौधरी के बीच हुए चुनाव को याद करना प्रासंगिक होगा, जिसमें संजय खन्ना की जीत को लोगों ने अपनी जीत के रूप में देखा था; और संजय खन्ना की जीत को संभव बनाने में लगे लोगों ने यह महसूस नहीं किया था कि उन्होंने रवि चौधरी को हराया है - उन्होंने बल्कि महसूस यह किया था कि उन्होंने डिस्ट्रिक्ट को अरनेजा गिरोह के हाथों बदहाल होने से बचाया है । ठीक वैसा ही माहौल इस बार भी दिख रहा है - जो लोग दीपक गुप्ता के पक्ष में नजर आ रहे हैं, उनका साफ कहना है कि शरत जैन की खिलाफत वह सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वह जान/समझ रहे हैं कि शरत जैन के जीतने का मतलब मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल की हरकतों को बढ़ावा देना ही होगा; क्योंकि शरत जैन तो रमेश अग्रवाल के पीछे ही खड़े दिखेंगे और एक कठपुतली गवर्नर ही होंगे और डिस्ट्रिक्ट पर असली शासन रमेश अग्रवाल व मुकेश अरनेजा का ही होगा । एक नए बने डिस्ट्रिक्ट में अच्छा माहौल बने और किसी को भी रमेश अग्रवाल व मुकेश अरनेजा के हाथों बेइज्जत न होना पड़े - इसके लिए लोगों को दीपक गुप्ता को जिताना जरूरी लग रहा है । किंतु इस जरूरत को पूरा करने के लिए आवश्यक है कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से हों - और इसीलिए नोमीनेटिंग कमेटी में गुप्त मतदान की माँग की जा रही है ।

Saturday, January 17, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में शॉपिंग वेबसाइट बाबुमोशाय के लॉन्चिंग समारोह की सफलता और उस समारोह के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद के चुनाव के संदर्भ में दीपक गुप्ता के प्रति समर्थन व्यक्त करने के अभियान का रूप ले लेने से शरत जैन के समर्थक नेताओं के बीच बौखलाहट पैदा हुई

गाजियाबाद । बाबुमोशाय के लॉन्चिंग कार्यक्रम के दीपक गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थन अभियान में तब्दील हो जाने की चर्चा ने डिस्ट्रिक्ट 3012 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद के दूसरे उम्मीदवार शरत जैन के समर्थकों के बीच खासा हड़कंप मचा दिया है । इसी हड़कंप का नतीजा है कि शरत जैन के समर्थक नेताओं ने बाबुमोशाय के लॉन्चिंग समारोह में मौजूद रहे 'अपने' लोगों को फोन कर कर के पूछना शुरू किया है कि वह चुनाव में उन्हें धोखा देने के बारे में तो नहीं सोच रहे हैं । शरत जैन के समर्थक नेता दरअसल इस बात से ज्यादा डरे हुए हैं कि उक्त समारोह में बहुत से ऐसे लोग मौजूद दिखे, जिन्हें वह अपने पक्के समर्थक के रूप में देखते/पहचानते हैं और जिन्हें उक्त समारोह से दूर रहने के संकेत दिए गए थे । शरत जैन के समर्थक नेताओं के लिए चिंता की बात यह रही है कि उन्होंने उक्त समारोह को फेल करने के लिए जो जाल बिछाया था, वह अपने ही जाल में उलझ गया - उन्होंने हालाँकि खुल कर तो इस समारोह के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाया था, लेकिन अपने समर्थकों को हर संभव तरीके से इस समारोह से दूर रहने के संकेत स्पष्ट रूप से दिए थे । इस समारोह के मुख्य कर्ताधर्ता चूँकि रमणीक तलवार और संजीव रस्तोगी थे, इसलिए इन दोनों के संबंध में नकारात्मक किस्म की बातें करके शरत जैन के समर्थक नेताओं ने लोगों को - खासकर 'अपने' लोगों को इस समारोह में न पहुँचने के लिए राजी करने का काम किया था । लेकिन उनके तमाम प्रयासों के बावजूद इस समारोह में जिस तरह से रोटेरियंस जुटे और यहाँ जुटे रोटेरियंस को जिस तरह से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद के लिए दीपक गुप्ता के पक्ष में बातें करते हुए सुना गया, उसकी खबरें सुनने के बाद से शरत जैन के समर्थक नेताओं के तोते उड़े हुए हैं ।
शरत जैन के समर्थक नेताओं के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि रमणीक तलवार और संजीव रस्तोगी के लिए उन्होंने डिस्ट्रिक्ट में तमाम तरह की बाधाएँ खड़ी कीं, लेकिन फिर भी डिस्ट्रिक्ट के लोगों के साथ इनका इतना जुड़ाव कैसे बना हुआ है ? उल्लेखनीय है कि बाबुमोशाय एक ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट है, जिसके प्रमुख प्रवर्तकों में रमणीक तलवार और संजीव रस्तोगी हैं । यह दोनों चूँकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद के उम्मीदवार दीपक गुप्ता के अत्यंत सक्रिय समर्थकों के रूप में भी पहचाने जाते हैं, इसलिए इनकी नई कंपनी के लॉन्चिंग कार्यक्रम में दीपक गुप्ता के संभावित समर्थकों की उपस्थिति का तो शरत जैन के समर्थक नेताओं को आभास था; लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह कार्यक्रम इतना सफल होगा और इसमें डिस्ट्रिक्ट के तमाम लोग जुटेंगे । उनका अनुमान था कि उन्होंने चूँकि रमणीक तलवार और संजीव रस्तोगी की डिस्ट्रिक्ट में खासी बुरी गत बना दी है, इसलिए उनके निमंत्रण को लोग खुद ही गंभीरता से नहीं लेंगे और कार्यक्रम से दूर रहेंगे । इस अनुमान के भरोसे रहते हुए उन्होंने बस इतना करने की जरूरत समझी कि अपने लोगों को उक्त लॉन्चिंग समारोह से दूर रहने के संकेत दिए ।
शरत जैन के समर्थक नेताओं के लिए यह समझना भी मुश्किल बना हुआ है कि उनके लोगों ने उनके संकेतों को समझा नहीं और/या उनके संकेतों की अवहेलना करते हुए वह उक्त समारोह में गए । 'अपने' लोगों की इस हरकत पर रमेश अग्रवाल तो बुरी तरह भड़के हुए हैं । दरअसल पीछे हुए सीओएल के चुनाव में रमेश अग्रवाल इस बात का अनुभव कर चुके हैं कि कैसे उनके 'अपने' समझे जा रहे लोग उनके प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवार आशीष घोष के साथ जा मिले थे और उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा था । हार से बुरी तरह बौखलाए रमेश अग्रवाल ने उस समय अपने लोगों को फोन कर कर के कोसा था और अपने कई लोगों को उन्होंने धोखेबाज कहा था । उसी अनुभव को याद करते हुए रमेश अग्रवाल ने बाबुमोशाय के लॉन्चिंग समारोह में उपस्थित हुए अपने लोगों से पूछा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद के चुनाव में धोखा तो नहीं दोगे ?
बाबुमोशाय के लॉन्चिंग समारोह के सफल होने और इसमें रोटेरियंस के जुटने को चूँकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद के लिए दीपक गुप्ता की उम्मीदवारी के प्रति समर्थन व्यक्त किए जाने/होने के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है, इसलिए शरत जैन के समर्थक नेताओं को इस समारोह की सफलता खतरे की घंटी के रूप में सुनाई दी है । एक ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट 'बाबुमोशाय' के लॉन्चिंग समारोह को यूँ तो एक कारोबारी आयोजन के रूप में देखा जाना चाहिए था; किंतु इस समारोह में डिस्ट्रिक्ट के रोटेरियंस की उपस्थिति को ज्यादा से ज्यादा संभव बनाने के लिए रमणीक तलवार और संजीव रस्तोगी तथा खुद दीपक गुप्ता ने जो मेहनत की - और इससे भी बड़ी बात यह कि उन्हें अपनी मेहनत का जो फल मिला, उसके कारण ही एक सामान्य कारोबारी आयोजन डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के संदर्भ में एक बड़ी राजनीतिक परिघटना में बदल गया । यह आयोजन एक बड़ी राजनीतिक परिघटना में इसलिए भी बदल गया क्योंकि इस आयोजन में उपस्थित रोटेरियंस के बीच चुनाव की चर्चा ही गर्म रही । छोटे छोटे समूहों में होने वाली इन चर्चाओं में कहीं वक्ता तो कहीं श्रोता के रूप में मौजूद रहे एक वरिष्ठ रोटेरियन ने बताया कि यहाँ हुई चर्चाओं में अधिकतर लोगों ने इस बात को रेखांकित किया कि एक उम्मीदवार के रूप में दीपक गुप्ता ने अपना जो भी प्रभाव बनाया है, वह अपने दम पर बनाया है जबकि उनके प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवार शरत जैन कुछेक नेताओं की बैशाखी के सहारे उम्मीदवार बने हुए हैं ।
दीपक गुप्ता और शरत जैन की सक्रियताओं का आकलन करते हुए लोगों ने इस तथ्य को भी पहचाना कि शरत जैन यदि गवर्नर बने तो वह रमेश अग्रवाल और मुकेश अरनेजा की कठपुतली बन कर ही रहेंगे, और जो लोग रमेश अग्रवाल और मुकेश अरनेजा की राजनीतिक गुलामी करने के लिए तैयार नहीं होंगे उन्हें शरत जैन का सहयोग व समर्थन करने के बावजूद शरत जैन के गवर्नर-काल में उपेक्षित व अपमानित ही होना पड़ेगा - जैसे जेके गौड़ के 'हाथों' होना पड़ रहा है । उल्लेखनीय है कि जेके गौड़ की उम्मीदवारी में सहयोग/समर्थन करने वाले कई लोगों को जेके गौड़ अब सिर्फ इस कारण से पहचानने से भी बच रहे हैं, क्योंकि वह लोग इस वर्ष हो रहे चुनाव में रमेश अग्रवाल और मुकेश अरनेजा का कहना मानने को तैयार नहीं दिख रहे हैं । जेके गौड़ की गर्दन चूँकि पूरी तरह रमेश अग्रवाल और मुकेश अरनेजा के हाथ में है, इसलिए जेके गौड़ किसी 'अपने' को उससे मिले सहयोग/समर्थन के बदले में उपकृत करना चाहते भी हैं तो नहीं कर सकते हैं । शरत जैन की हालत भी जेके गौड़ जैसी ही होनी है, इसलिए सहयोग/समर्थन करने वाले उन लोगों को शरत जैन पहचानेंगे भी नहीं जिनसे रमेश अग्रवाल और मुकेश अरनेजा खुश नहीं होंगे । लोगों ने रेखांकित किया है और समझा है कि दीपक गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद पर होंगे तो वह किसी की कठपुतली नहीं होंगे और इसलिए दीपक गुप्ता तक पहुँचने के लिए उन्हें किसी और की नाखुशी या नाराजगी का रोड़ा नहीं पार करना होगा ।
बाबुमोशाय के लॉन्चिंग समारोह में एक तो अनुमान/उम्मीद के विपरीत रोटेरियंस की भीड़ जुटी; और दूसरे वहाँ जुटे लोगों ने उम्मीदवार के रूप में दीपक गुप्ता व शरत जैन की सक्रियता के स्तर का आकलन किया और उस आकलन में शरत जैन को सिर्फ कमजोर ही नहीं पाया, बल्कि उन्हें बैशाखी पर टिकी एक कठपुतली के रूप में देखा/पहचाना - उसकी खबर मिलने के बाद से शरत जैन के समर्थकों के तोते उड़े हुए हैं और उन्होंने टोह लेना ही शुरू नहीं किया है, बल्कि लोगों से बाकायदा पूछना भी शुरू किया है कि चुनाव में वह उन्हें धोखा तो नहीं देंगे । रमेश अग्रवाल ने खासतौर पर उन लोगों की खबर ली है, जिनका समर्थन पाने के लिए उन्होंने जेके गौड़ के गवर्नर-काल में पद 'बेचे' हैं । रमेश अग्रवाल को डर है कि उनसे पद लेने वाले रोटेरियंस कहीं दीपक गुप्ता से तो नहीं जा मिले हैं ? बाबुमोशाय के लॉन्चिंग समारोह की सफलता और उस समारोह के दीपक गुप्ता के प्रति समर्थन व्यक्त करने के अभियान का रूप ले लेने से शरत जैन के समर्थक नेताओं के बीच जो बौखलाहट पैदा हुई है, उससे उन्होंने अपनी कमजोरी को ही जाहिर किया है ।

Saturday, December 20, 2014

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 के प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3012 में रमेश अग्रवाल के दावे के अनुसार पेम थर्ड के आयोजन के संदर्भ में धोखा खाने के बाद भी रोटरी क्लब सोनीपत उनके साथ बना रहेगा; किंतु पेम सेकेंड में भी क्या वह जेके गौड़ को अपनी कठपुतली बनाये रख सकेंगे ?

नई दिल्ली । शरत जैन की उम्मीदवारी को नुकसान से बचाने के लिए रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 के प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3012 में रमेश अग्रवाल ने रोटरी क्लब सोनीपत के लोगों को धोखा देना मंजूर कर लिया । रमेश अग्रवाल से मिले धोखे के कारण रोटरी क्लब सोनीपत के लोगों की डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच भारी किरकिरी हुई है । रमेश अग्रवाल हालाँकि आश्वस्त हैं और दावा कर रहे हैं कि रोटरी क्लब सोनीपत में उनके कई पिटठू हैं, जिनके होने से वह क्लब उनके साथ ही रहेगा - वह क्लब के लोगों के साथ चाहें कितना ही धोखा करें । उल्लेखनीय है कि रोटरी क्लब सोनीपत के साथ पेम थर्ड की आयोजन जिम्मेदारी को लेकर धोखा हुआ है । रमेश अग्रवाल ने पेम थर्ड के आयोजन की जिम्मेदारी रोटरी क्लब सोनीपत को दे दी थी । रोटरी क्लब सोनीपत के लोगों ने उसके लिए तैयारी भी शुरू कर दी । पेम थर्ड के आयोजन में जिन जिन लोगों की मदद लेनी थी, उनके साथ मीटिंग कर ली गई थी और डिस्ट्रिक्ट के लोगों को निमंत्रित करना भी शुरू कर दिया गया था । लेकिन तभी भेद खुला कि जेके गौड़ ने तो पेम थर्ड के आयोजन के लिए रोटरी क्लब दिल्ली रिवरसाइड के सतीश गुप्ता को प्रस्ताव दिया हुआ है । सवाल पैदा हुआ कि उस प्रस्ताव पर फैसला हुए बिना और जेके गौड़ की जानकारी में लाये बिना रमेश अग्रवाल किसी और क्लब को पेम थर्ड के आयोजन की जिम्मेदारी कैसे दे सकते हैं ?
रमेश अग्रवाल के लिए यह सवाल हालाँकि बेमानी था - क्योंकि वह तो मानते और दिखाते हैं कि असली गवर्नर तो वही हैं, जेके गौड़ तो सिर्फ कठपुतली हैं, फैसला कठपुतली थोड़े ही करती है, इसलिए वह जो चाहें कर सकते हैं । किंतु फिर भी, इस संदर्भ में मामला थोड़ा पेचीदा हो गया । दरअसल सतीश गुप्ता को शरत जैन की उम्मीदवारी के पक्के समर्थक के रूप में देखा/पहचाना जाता है । शरत जैन की उम्मीदवारी के शुभचिंतकों ने माना/समझा कि रमेश अग्रवाल की यह कारस्तानी शरत जैन की उम्मीदवारी के एक समर्थक को खो सकती है । रमेश अग्रवाल की कारस्तानियाँ पहले ही शरत जैन की उम्मीदवारी को बहुत नुकसान पहुँचा चुकी हैं । इसी बात को ध्यान में रखते हुए शरत जैन की उम्मीदवारी के शुभचिंतकों और खुद शरत जैन ने रमेश अग्रवाल पर दबाव बनाया कि अपनी घटिया हरकतों को करने से वह कुछ दिनों के लिए तो बाज रहें । सतीश गुप्ता के प्रति रमेश अग्रवाल की खुन्नस से शरत जैन पहले से भी परिचित रहे हैं । सतीश गुप्ता से खुन्नस रखने के चलते ही रमेश अग्रवाल ने अपने क्लब में सतीश गुप्ता के बेटे मोहित गुप्ता को अध्यक्ष नहीं बनने दिया था । रमेश अग्रवाल की घटिया हरकत के चलते ही, मोहित गुप्ता को अध्यक्ष बनने के लिए दोबारा से लाइन में लगना पड़ा है और इस वर्ष उन्हें फिर से क्लब का सचिव बनने के लिए मजबूर होना पड़ा है ।
शरत जैन और शरत जैन की उम्मीदवारी के शुभचिंतकों का दबाव पड़ा तो रमेश अग्रवाल को पेम थर्ड के आयोजन की जिम्मेदारी रोटरी क्लब दिल्ली रिवरसाइड को देने के जेके गौड़ के फैसले को मंजूर करने के लिए मजबूर होना ही पड़ा । रमेश अग्रवाल की इस कारस्तानी से लेकिन रोटरी क्लब सोनीपत के लोगों की बड़ी फजीहत हुई है । उनकी फजीहत में मजा लेने वाले लोगों का कहना लेकिन यह है कि एक घटिया व्यक्ति के साथ रहने का यही नतीजा मिलता है । इस मामले में फजीहत भले ही रमेश अग्रवाल की भी हुई हो, लेकिन रमेश अग्रवाल इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि जो हुआ उससे शरत जैन की उम्मीदवारी को कोई नुकसान नहीं होगा । उनका दावा है कि रोटरी क्लब सोनीपत में उनके कई पिटठू हैं, जिनके कारण वह क्लब उनकी पकड़ से बाहर नहीं जा सकेगा ।
रमेश अग्रवाल चाहते हुए और प्रयास करने के बाद भी जिस तरह पेम थर्ड के आयोजन की जिम्मेदारी रोटरी क्लब सोनीपत को नहीं दिलवा सके, उसके लिए जेके गौड़ की भूमिका को भी श्रेय दिया जा रहा है । कुछेक लोगों को लगता है कि जेके गौड़ को यह बात बहुत बुरी लग रही है कि डिस्ट्रिक्ट में और डिस्ट्रिक्ट के बाहर की रोटरी में लोग उन्हें रमेश अग्रवाल की कठपुतली के रूप में देखें/पहचानें और इसीलिए इस मामले के जरिये उन्होंने यह दिखाने/जताने का प्रयास किया है कि वह रमेश अग्रवाल की कठपुतली नहीं हैं और उनके किसी फैसले को मानने से इंकार भी कर सकते हैं । जिन लोगों को लेकिन इस थ्योरी पर विश्वास नहीं है, उनका कहना है कि पेम सेकेंड में इस बात का पता चल जायेगा कि जेके गौड़ क्या सचमुच में रमेश अग्रवाल की कठपुतली नहीं बने रहना चाहते हैं ? उल्लेखनीय है कि पेम फर्स्ट में माइक ज्यादातर समय रमेश अग्रवाल के हाथ में ही रहा था; और जो बातें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में जेके गौड़ को कहनी चाहिए थीं, उन बातों को भी रमेश अग्रवाल ने कहा/बताया था । रमेश अग्रवाल के इस रवैये से ही लोगों को यह कहने का मौका मिला था कि रमेश अग्रवाल ने जेके गौड़ को कठपुतली बना कर रख दिया है और खुद ही गवर्नरी करने में लग गए हैं । यह देखना दिलचस्प होगा कि लोगों के बीच बनी इस राय/समझ को पेम सेकेंड में जेके गौड़ बदलने की कोई कोशिश करते हैं या अपने आप को रमेश अग्रवाल की कठपुतली ही साबित करते हैं ?

Monday, November 24, 2014

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 के प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3012 में दीपक गुप्ता के साथ खिंची अपनी तस्वीर को सार्वजनिक करने के लिए मुकेश अरनेजा ने रोटरी क्लब वैशाली के रमणीक तलवार को नोटिस दिया

नई दिल्ली । मुकेश अरनेजा ने दीपक गुप्ता के साथ खिंची/खिंचवाई अपनी तस्वीर को फेसबुक की अपनी टाइमलाइन पर डालने के लिए रोटरी क्लब वैशाली के वरिष्ठ सदस्य रमणीक तलवार को बौद्धिक संपदा अधिकार कानून के तहत जो नोटिस दिया, उसका करारा जबाव देकर रमणीक तलवार ने मामले को खासा दिलचस्प बना दिया है । मुकेश अरनेजा का कहना रहा कि दीपक गुप्ता चूँकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार हैं इसलिए दीपक गुप्ता के साथ उनकी यह तस्वीर लोगों को चुनाव के संदर्भ में प्रभावित करेगी । रमणीक तलवार को लिखे पत्र में मुकेश अरनेजा ने यह तो माना कि यह तस्वीर उनके साथ-साथ दीपक गुप्ता की भी बौद्धिक संपदा है, किंतु साथ ही यह दावा भी किया कि उनकी बिना अनुमति के इस तस्वीर को फेसबुक पर लाना गैरकानूनी है । रमणीक तलवार ने इसी तथ्य का हवाला देकर मुकेश अरनेजा को करारा जबाव दिया है । रमणीक तलवार का कहना रहा कि इस तस्वीर पर चूँकि दोनों का बौद्धिक संपदा अधिकार है, इसलिए दोनों यदि इसे हटाने की माँग करेंगे तो वह इसे तुरंत हटा लेंगे ।
मुकेश अरनेजा ने दीपक गुप्ता के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार होने का हवाला देते हुए इस तस्वीर के उपयोग को जिस तरह अनुचित बताया है, उसमें उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन्हें आपत्ति आखिर किस बात की है - इस बात की कि इस तस्वीर के कारण वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में संलग्न दिखते हैं जो कि वह नहीं हैं; और या उनकी आपत्ति इस बात के लिए है कि वह तो दीपक गुप्ता की उम्मीदवारी का समर्थन नहीं कर रहे हैं जबकि यह तस्वीर उन्हें दीपक गुप्ता के 'साथ' दिखा रही है और लोगों को यह आभास दे रही है कि वह तो दीपक गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थन में हैं । मुकेश अरनेजा की आपत्ति का कारण यदि पहला वाला है तो यह मुकेश अरनेजा के पाखंड और उनकी धूर्तता को प्रदर्शित करता है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए दीपक गुप्ता के प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवार शरत जैन के साथ तो उनकी बहुत से तस्वीरें फेसबुक पर विभिन्न टाइमलाइन पर देखी जा सकती हैं; लेकिन शरत जैन के साथ अपनी उन तस्वीरों को हटाने की माँग करते हुए मुकेश अरनेजा को कभी भी नहीं सुना गया है । रमणीक तलवार ने बाकायदा सुबूत देकर शरत जैन के साथ उनकी संलग्नता को जाहिर किया है ।
आपत्ति का कारण यदि दूसरा वाला है तो फिर सवाल यह उठता है कि मुकेश अरनेजा को यदि एक तस्वीर से दीपक गुप्ता को फायदा हो जाने का डर है तो फिर उन्होंने दीपक गुप्ता के साथ तस्वीर खिंचवाई ही क्यों ? रमणीक तलवार के दावे के अनुसार, उक्त तस्वीर डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले में खिंची थी - जहाँ बहुत से लोगों की तस्वीरें खिंची थीं । मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता के साथ खिंची इस एक तस्वीर से इतना भयभीत क्यों हो गए हैं कि इसे लोगों के सामने आने से रोकने के लिए उन्हें रमणीक तलवार को नोटिस देना पड़ा है ।
तस्वीर को देखें तो पहली ही नजर में यह स्पष्ट हो जाता है कि इस तस्वीर को खिंचवाते समय मुकेश अरनेजा ज्यादा उत्साहित हैं, न की दीपक गुप्ता । मुकेश अरनेजा ने जिस तरह दीपक गुप्ता को अपनी बाँह के घेरे में कसा हुआ है, उससे साफ आभास मिल रहा है कि दीपक गुप्ता को अपने नजदीक पाकर मुकेश अरनेजा बहुत खुश, गर्व से भरे हुए और उत्साह व आश्वस्ति से परिपूर्ण महसूस कर रहे हैं । मुकेश अरनेजा को हालाँकि झूठी मुस्कराहट का बड़ा ऊँचा खिलाड़ी माना जाता है, और उनके इस खिलाड़ीपने ने लोगों के बीच उनकी भूमिका को संदेहास्पद ही बनाया है और लोगों के लिए यह समझना मुश्किल होता है कि वह दिखा क्या रहे हैं और उनके मन में क्या होगा ? इसीलिए इस तस्वीर को देख कर यह समझना आसान नहीं है कि वह खुद को दीपक गुप्ता के नजदीक पाकर सचमुच उल्लास से भर गए और विभोर हो उठे या उनके जो भाव नजर आ रहे हैं, वह उनका एक नाटक भर है । तस्वीर को सार्वजनिक करने पर नोटिस दे कर मुकेश अरनेजा ने मामले को और रहस्यपूर्ण बना दिया है ।
रमणीक तलवार को नोटिस देने के साथ ही मुकेश अरनेजा ने कुछेक लोगों के बीच दावा किया है कि अब वह ऐसे लोगों को सबक सिखाना शुरू करेंगे जो रोटरी में उनके विरोधी हैं । मुकेश अरनेजा ने कुछेक लोगों को कहा/बताया है कि वकील आशीष माखीजा को उन्होंने जेके गौड़ की डिस्ट्रिक्ट टीम में महत्वपूर्ण पद दिलवाया ही इसलिए है ताकि वह लोगों को सबक सिखाने की अपनी कार्रवाई में उनकी मदद ले सकें । रमणीक तलवार को नोटिस देकर मुकेश अरनेजा ने लगता है कि अपने कहे हुए पर अमल करना शुरू कर दिया है । रमणीक तलवार ने मुकेश अरनेजा को जबाव तो तगड़ा दिया है, जिसके बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि मुकेश अरनेजा इस मामले को अब आगे कैसे बढ़ाते हैं ?

Wednesday, November 19, 2014

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 के प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3012 में चार्टर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने जा रहे जेके गौड़ के पूरी तरह समर्पण कर देने से मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल के लिए शरत जैन की उम्मीदवारी को सफल बनाने वास्ते डिस्ट्रिक्ट टीम के पदों की सौदेबाजी करना आसान हुआ

गाजियाबाद । शरत जैन को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद का चुनाव जितवाने के लिए मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल जैसे उनकी उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं ने जो व्यूह रचना की है, उसमें गाजियाबाद और उत्तर प्रदेश के रोटेरियंस को उपेक्षित और अपमानित होने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है । अगले रोटरी वर्ष की जेके गौड़ की गवर्नर-काल की टीम के जिन थोड़े से सदस्यों के नाम घोषित किए गए हैं, उनमें तो गाजियाबाद तथा उत्तर प्रदेश के लोगों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं ही मिला है; टीम के कुछेक और नाम घोषित करके बाकी महत्वपूर्ण लोगों को भी सम्मान देने का काम नहीं किया गया । आरोप है कि ऐसा इसलिए नहीं किया गया ताकि टीम के उन पदों के जरिये शरत जैन की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने हेतु सौदेबाजी की जा सके ।
इस उपेक्षापूर्ण और अपमानजनक रवैये के लिए गाजियाबाद तथा उत्तर प्रदेश के रोटेरियंस के बीच जेके गौड़ के प्रति खासतौर से रोष व नाराजगी है । यहाँ के रोटेरियंस याद करते हुए कहते/बताते हैं कि जेके गौड़ जब उम्मीदवार बने थे तब यहाँ के लोगों के बीच वायदा और दावा किया करते थे कि उनके गवर्नर-काल में गाजियाबाद व उत्तर प्रदेश के रोटेरियंस को खास तवज्जो मिलेगी और तमाम फैसले उनसे सलाह करके ही होंगे । लेकिन अब जब अपने वायदों और दावों पर सचमुच में अमल करने का मौका आया है तो जेके गौड़ का रवैया पूरी तरह से बदला हुआ है । जेके गौड़ के गवर्नर-काल में खास तवज्जो मिलने का इंतजार कर रहे गाजियाबाद के प्रमुख लोगों की ड्यूटी अपने पहले आयोजन - पेम वन में जेके गौड़ ने खाने का इंतजाम करने/देखने में लगाई हुई थी ।
जेके गौड़ के इस व्यवहार को देख कर एक नए डिस्ट्रिक्ट के रूप में रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 के बनने और इसके पहले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में जेके गौड़ के कार्यभार सँभालने से गाजियाबाद और उत्तर प्रदेश के रोटेरियंस के बीच जो भारी उत्साह था, वह हवा हो गया है । जेके गौड़ ने जिस तरह से मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल के आगे समर्पण कर दिया है, उसे देखकर गाजियाबाद व उत्तर प्रदेश के रोटेरियंस को तगड़ा झटका लगा है । पेम वन में जिस तरह से जेके गौड़ तो कम बोले, रमेश अग्रवाल ही लोगों को यह बताने में लगे रहे कि 'यह करेंगे', 'वह करेंगे' - उससे ऐसा लगा जैसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेके गौड़ नहीं, बल्कि रमेश अग्रवाल हैं । गाजियाबाद और उत्तर प्रदेश के रोटेरियंस ने यह मान लिया है कि नए डिस्ट्रिक्ट में उनकी हिस्सेदारी का अनुपात बढ़ने के बावजूद उनकी हैसियत दोयम दर्जे की ही रहेगी और उन्हें मुकेश अरनेजा व रमेश अग्रवाल जैसे लोगों की कृपा पर ही रहना पड़ेगा । मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल आज जेके गौड़ के जरिये जिस तरह डिस्ट्रिक्ट पर 'राज' कर रहे हैं, उस 'राज' को बनाये रखने के लिए उन्हें शरत जैन को जितवाना जरूरी लग रहा है - ताकि कल वह शरत जैन के जरिये डिस्ट्रिक्ट पर अपना कब्ज़ा बनाये रख सकें ।
जेके गौड़ के गवर्नर-काल के पदों पर नियुक्तियों को दरअसल इसीलिए टाला हुआ है, जिससे कि शरत जैन की जीत को सुनिश्चित किया जा सके । उनके अपने लोगों के अनुसार, इसके लिए दोतरफा रणनीति बनाई गई है । नोमीनेटिंग कमेटी में यदि शरत जैन का नाम अधिकृत उम्मीदवार के रूप में नहीं चुना गया तो चेलैंज करने के लिए कॉन्करेंस जुटाने और फिर वोट जुटाने के लिए उन पदों की सौदेबाजी की जायेगी; विपरीत स्थिति में, यानि नोमीनेटिंग कमेटी में शरत जैन के अधिकृत उम्मीदवार चुने जाने की स्थिति में प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवार दीपक गुप्ता को कॉन्करेंस न मिल सकें उसके लिए उन पदों का सौदा किया जायेगा । मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल का कहना है कि वह गाजियाबाद और उत्तर प्रदेश के रोटेरियंस को खूब जानते/समझते हैं; उन्हें अच्छे से पता है कि गाजियाबाद और उत्तर प्रदेश के रोटेरियंस के साथ चाहें जैसा व्यवहार कर लो, उन्हें चाहें कितना ही अपमानित कर लो - लेकिन फिर उन्हें कुछ दे दो, वह ठीक हो जाते हैं । इसी फार्मूले से वह अभी तक भी इस्तेमाल होते रहे हैं, और आगे भी होते रहेंगे । मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल ने अपने अपने गवर्नर-काल में - तथा उसके बाद में भी जिन-जिन क्लब्स को और रोटेरियंस को परेशान किया और अपमानित किया, उन सभी को पदों का लॉलीपॉप दिखा कर पटा लेने का उन्हें पूरा-पूरा भरोसा है । जेके गौड़ को भी उन्होंने यही समझाया है कि गाजियाबाद में और या उत्तर प्रदेश में कोई यदि नाराज होता दिखता है तो परेशान मत होना, उसे कैसे पटाना है यह हमें पता है । जेके गौड़ को भी इस बात का पता है और इसीलिए अपनी पेम वन में उन्होंने गाजियाबाद व उत्तर प्रदेश के रोटेरियंस को उपेक्षित तथा अपमानित करने वाली स्थितियों को बनाने/रचने से जरा भी परहेज नहीं किया ।
मजे की बात यह है कि यह जो कुछ भी हो रहा है उसमें फजीहत कुल मिलाकर जेके गौड़ की ही हो रही है - उन्होंने जिस तरह से मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल के सामने समर्पण किया हुआ है उसके चलते लोगों को यह कहने का मौका मिला है कि जेके गौड़ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लायक दरअसल हैं नहीं; और इसलिए ही मुकेश अरनेजा व रमेश अग्रवाल उन्हें 'दबोच' लेने में कामयाब हुए हैं । जेके गौड़ से हमदर्दी रखने वाले लोगों का मानना और कहना है कि जेके गौड़ के सामने हालाँकि सुनहरा मौका था कि वह अपनी टीम बनाते और खुद से फैसले लेते हुए 'दिखते' - ऐसा वह कर सकते थे; लेकिन पता नहीं वह क्यों इतना मजबूर हैं कि मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल के सामने समर्पण ही कर बैठे हैं । मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल ने जेके गौड़ के गवर्नर-काल को शरत जैन की उम्मीदवारी को सफल बनाने के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, जिससे जेके गौड़ के गवर्नर-काल का कबाड़ा होना तथा जेके गौड़ की फजीहत होना निश्चित ही माना जा रहा है । मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल के सामने समस्या यह है कि शरत जैन की उम्मीदवारी को सफल बनाने के लिए जेके गौड़ के गवर्नर-काल के पदों की सौदेबाजी का ही सहारा उनके पास बचा रह गया है ।

Wednesday, November 12, 2014

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 के प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3012 में शरत जैन की उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं को समर्थन जुटाने वास्ते जेके गौड़ के गवर्नर-काल के पदों की सौदेबाजी को चलाते रहने के लिए असिस्टेंट गवर्नर्स के नाम घोषित करने से बचना ही ठीक लग रहा है

गाजियाबाद । जेके गौड़ के गवर्नर-काल में जिन रोटेरियंस को असिस्टेंट गवर्नर बनने के संकेत मिले हैं, उनके लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि जेके गौड़ असिस्टेंट गवर्नर के रूप में उनके नाम सार्वजनिक रूप से घोषित क्यों नहीं कर रहे हैं ? जेके गौड़ जिस तरह से असिस्टेंट गवर्नर्स के नाम घोषित करने से बच रहे हैं उससे इस तरह की चर्चाओं को बल मिला है कि चुनावी फायदे के गणित से यदि अभी तय किए गए असिस्टेंट गवर्नर्स में से कुछेक के नाम काटने पड़े तो उन्हें काटने में और उनकी जगह दूसरों को असिस्टेंट गवर्नर बनाने का मौका बना रहेगा । आरोप यह है कि शरत जैन की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के लिए जेके गौड़ के गवर्नर-काल के पदों का सौदा किया जा रहा है । रोटरी क्लब सोनीपत मिडटाउन के ज्ञानिंदर सचदेव को डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टर मीट और रोटरी क्लब सोनीपत सिटी के दीपक गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरार घोषित करने से इस सौदेबाजी की पोल खुल गई है । दरअसल डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टर मीट पर दिल्ली के और डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरार पद पर गाजियाबाद के कुछेक चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की निगाह थी - उनमें से जिनकी जेके गौड़ के साथ पिछले दिनों जैसी जो बातचीत हुई थी उससे उन्हें उम्मीद बँधी थी कि उक्त पद उन्हें मिलेंगे । लेकिन उक्त पदों पर हुई घोषणा से उन्होंने अपने आप को ठगा हुआ महसूस किया है ।
डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरार पद को लेकर तो गाजियाबाद में बहुत ही तीखी प्रतिक्रिया हुई है । गाजियाबाद में कई लोगों ने खासी मुखरता के साथ इस बात को कहा है कि डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरार का पद तो जेके गौड़ को गाजियाबाद में ही किसी को देना चाहिए था, जिससे कि उन्हें काम करने/लेने में सुविधा होती । गाजियाबाद में बहुत से रोटेरियन चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं - उनमें से कुछेक के जेके गौड़ के साथ अच्छे संबंध भी देखे/बताये जाते हैं; जेके गौड़ उनमें से ही किसी को डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरार चुन सकते थे । पर चुनते तो तब जब उन्हें चुनने का 'अधिकार' होता । उनका अधिकार तो मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल ने ले रखा है । डिस्ट्रिक्ट में हर किसी को लगता है और कई लोग कहते भी हैं कि जेके गौड़ गवर्नर की कुर्सी पर बैठेंगे जरूर, लेकिन गवर्नर के रूप में उनके फैसले मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल ही कर रहे हैं - और इन दोनों ने शरत जैन की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने वास्ते जेके गौड़ के गवर्नर-काल को 'बेच' देने की तैयारी कर ली है । ज्ञानिंदर सचदेव और दीपक गुप्ता अपने अपने क्लब से नोमेनेटिंग कमेटी के लिए चुने गए हैं, इसलिए ही उन्हें उक्त पद दिए गए हैं ताकि नोमीनेटिंग कमेटी में वह शरत जैन की उम्मीदवारी का समर्थन करें ।
ज्ञानिंदर सचदेव और दीपक गुप्ता को पद देने पर डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच जो तीखी प्रतिक्रिया हुई है उससे शरत जैन की उम्मीदवारी के पीछे लगे अरनेजा गिरोह को चिंता हुई है और इसी चिंता में उन्होंने असिस्टेंट गवर्नर्स के नाम सार्वजनिक करने की कार्रवाई को रोक दिया है । उन्हें डर हुआ है कि असिस्टेंट गवर्नर्स के नाम पर भी यदि नाराजगियाँ फैली तो मामला उल्टा पड़ जायेगा । कुछ लोगों को यह भी लगता है कि असिस्टेंट गवर्नर्स बनाने का झाँसा ज्यादा लोगों को दे दिया गया है - नाम सार्वजनिक करने से इस झाँसे की पोल खुल जायेगी; इसलिए असिस्टेंट गवर्नर्स के नाम घोषित करने से बचने की रणनीति अपनाई गई है । पेम वन होने में मुश्किल से तीन दिन बचे हैं लेकिन उसमें शामिल होने वाले लोगों को अभी तक भी यह नहीं पता है कि उनके असिस्टेंट गवर्नर कौन कौन होंगे । पिछले वर्षों में पेम वन होने तक यह स्पष्ट हो जाता था - कभी-कभी उन्हें कहा कोऑर्डिनेटर जाता था, लेकिन उन्हें भी और दूसरों को भी यह पता होता था कि यही लोग असिस्टेंट गवर्नर होंगे । जेके गौड़ ने लेकिन कोऑर्डिनेटर भी घोषित नहीं किए हैं, जिस कारण उनके गवर्नर-काल के असिस्टेंट गवर्नर्स को लेकर असमंजस बना हुआ है । यह असमंजस इसलिए और गहरा रहा है क्योंकि जेके गौड़ की तरफ से कुछेक लोगों को असिस्टेंट गवर्नर बनने का संदेश दे दिया गया है । इसीलिए जिन लोगों को संदेश मिला है, उन्हें यह आशंका होने लगी है कि उन्हें असिस्टेंट गवर्नर का पद वास्तव में मिलेगा भी या उन्हें मिला संदेश सिर्फ झाँसा ही साबित होगा । 
शरत जैन की उम्मीदवारी के लिए समर्थन 'खरीदने' के चक्कर में जेके गौड़ के गवर्नर-काल का जैसा जो मजाक-सा बना दिया जा रहा है, उसे देखते/समझते हुए शरत जैन की उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों के बीच भी कन्फ्यूजन बढ़ रहा है । शरत जैन की उम्मीदवारी के समर्थक नेता वैसे तो यह दावा करते हुए नहीं थकते हैं कि शरत जैन की उम्मीदवारी के प्रति लोगों के बीच अच्छा समर्थन है और लोग उन्हें ही चुनेंगे - लेकिन उनसे इस बात का कोई जबाव नहीं मिलता है कि शरत जैन की उम्मीदवारी की स्थिति सचमुच में यदि इतनी ही मजबूत है तो फिर उनके लिए समर्थन जुटाने वास्ते टुच्चई करने की और जेके गौड़ के गवर्नर-काल के पदों को 'बेचने' तक के स्तर पर उतरने की जरूरत क्यों पड़ रही है ? इसीलिए लोगों को लग रहा है कि शरत जैन की उम्मीदवारी के समर्थक नेता झूठे ही उनकी हवा बना रहे हैं - और मजे की बात यह है कि अपने द्धारा बनाई जा रही हवा पर उन्हें खुद ही भरोसा नहीं है और यही कारण है कि जेके गौड़ के गवर्नर-काल के पदों का ऑफर देकर वह शरत जैन के लिए वोटों को खरीदने की तिकड़मों में लगे हुए हैं । शरत जैन की उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं की इन हरकतों ने शरत जैन की उम्मीदवारी के प्रति समर्थन का भाव रखने वाले लोगों को भी यह सोचने और कहने पर मजबूर कर दिया है कि समर्थन जुटाने के लिए की जा रही हरकतों से शरत जैन का नाम बदनाम ही हो रहा है और इससे उनकी उम्मीदवारी को मिल सकने वाला समर्थन घटेगा ही । इस तरह की बातें करने/कहने वाले लोगों के मुँह लेकिन शरत जैन की उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं ने यह कहते हुए बंद किए हुए हैं कि शरत जैन को यदि जितवाना है तो वह जो कर रहे हैं, उन्हें करने दिया जाये । यानि जेके गौड़ के गवर्नर-काल के पदों की सौदेबाजी के नए नए रूप अभी और देखने को मिलेंगे ।

Monday, November 3, 2014

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 के प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद के लिए सुरेश भसीन की अचानक प्रकट हुई सक्रियता को, आशंका और डर के साथ देखते हुए डॉक्टर सुब्रमणियन की उम्मीदवारी के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है

नई दिल्ली । सुरेश भसीन की अचानक से 'दिखने' लगी सक्रियता ने डॉक्टर सुब्रमणियन की उम्मीदवारी के समर्थकों को चिंता में डाल दिया है और इसके चलते उन्होंने यह समझने का प्रयास करना शुरू किया है कि सुरेश भसीन को सहयोग और समर्थन आखिर मिल कहाँ से रहा है, जिसके भरोसे अपनी उम्मीदवारी के लिए उन्होंने अभियान लगातार चलाया हुआ है । डॉक्टर सुब्रमणियन की उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों का निरंतर यह दावा बना हुआ है कि डॉक्टर सुब्रमणियन की उम्मीदवारी को डिस्ट्रिक्ट 3010 के प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3011 में हर किसी का एकतरफा समर्थन मिला हुआ है । प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3011 में जो भी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हैं, उन सभी का समर्थन डॉक्टर सुब्रमणियन को मिलने का दावा भी लगातार किया जा रहा है । पिछले दिनों चूँकि सुरेश भसीन कहीं ज्यादा 'दिख' भी नहीं रहे थे, इसलिए डॉक्टर सुब्रमणियन के समर्थकों व शुभचिंतकों द्धारा किए जा रहे इन दावों को लोगों के बीच सच भी मान लिया जा रहा था । डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के खिलाड़ियों ने लगभग स्वीकार कर लिया था और वह कहने लगे थे कि प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद के लिए डॉक्टर सुब्रमणियन की उम्मीदवारी के लिए कहीं कोई चुनौती नहीं है ।
लेकिन सुरेश भसीन की अचानक से 'दिखने' लगी सक्रियता ने डॉक्टर सुब्रमणियन की उम्मीदवारी के लिए कहीं कोई चुनौती न देखने वाले उनके समर्थकों व शुभचिंतकों को हैरान और परेशान कर दिया है । उनकी हैरानी का कारण यह कि जब पूरा डिस्ट्रिक्ट डॉक्टर सुब्रमणियन के समर्थन में है तो फिर सुरेश भसीन किस उम्मीद में और किसके भरोसे उम्मीदवार बने हुए हैं ? उनकी परेशानी का कारण यह है कि सुरेश भसीन की सक्रियता देख कर उन्हें आशंका हुई है कि डॉक्टर सुब्रमणियन की स्थिति को लेकर उनकी आश्वस्ति कहीं धोखा तो नहीं है और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद के उम्मीदवार के रूप में डॉक्टर सुब्रमणियन की स्थिति उतनी मजबूत नहीं है जितनी मजबूत वह समझ रहे हैं और इसीलिए सुरेश भसीन को अपने लिए मौका दिख रहा है । डॉक्टर सुब्रमणियन के समर्थकों व शुभचिंतकों को डर यह भी हुआ है कि सुरेश भसीन को कहीं किसी या किन्हीं लोगों से समर्थन का ठोस भरोसा तो नहीं मिला है, जिससे उत्साहित होकर एक उम्मीदवार के रूप में उन्होंने अपनी सक्रियता को बढ़ाया भी है और उसे 'दिखाना' भी शुरू किया है ।
डॉक्टर सुब्रमणियन के समर्थकों व शुभचिंतकों को डर दरअसल यह जानकर भी लगा है कि पिछले दिनों सुरेश भसीन जब ज्यादा कहीं 'दिख' नहीं रहे थे, तब वह वास्तव में रोटेरियंस से वन-टू-वन लगातार मिल रहे थे । अपनी इन वन-टू-वन मुलाकातों को सुरेश भसीन चूँकि प्रचारित नहीं कर रहे थे इसलिए दूसरों ने - खासकर डॉक्टर सुब्रमणियन के समर्थकों व शुभचिंतकों ने मान लिया था कि सुरेश भसीन तो कुछ कर ही नहीं रहे हैं और इस तरह वह चुनावी मुकाबले से खुद ही बाहर हो गए हैं । यह जानकारी पा कर डॉक्टर सुब्रमणियन के समर्थकों व शुभचिंतकों को लगने लगा है कि चुपचाप से वन-टू-वन मुलाकात करना सुरेश भसीन की कहीं कोई चाल तो नहीं थी - जिसका उद्देश्य डॉक्टर सुब्रमणियन को धोखे में रखना था । दरअसल हर कोई यह मान रहा है कि सुरेश भसीन को चुनावी मुकाबले से बाहर मान कर डॉक्टर सुब्रमणियन भी शांत बैठ गए और एक उम्मीदवार के रूप में अपनी सक्रियता को उन्होंने स्थगित कर दिया । डॉक्टर सुब्रमणियन के घनघोर समर्थकों का भी मानना और कहना है कि डॉक्टर सुब्रमणियन ने जिस तरह से अपने आप को लोगों से मिलने-जुलने से अलग कर लिया है, उससे लोगों के बीच उनके प्रति एक नकारात्मक प्रतिक्रिया तो बनी ही है - और सुरेश भसीन ने इसी का फायदा उठाने के लिए अब अपनी सक्रियता को खुले तौर पर दिखाना शुरू कर दिया है । डॉक्टर सुब्रमणियन के नजदीकियों को भी लग रहा है कि सुरेश भसीन को मुकाबले से बाहर मानकर डॉक्टर सुब्रमणियन ने एक उम्मीदवार के रूप में अपनी सक्रियता को थाम कर सचमुच में आत्मघाती काम किया है ।
डॉक्टर सुब्रमणियन के समर्थकों व शुभचिंतकों को लगता है कि जो हुआ, वह यदि यूँ ही हुआ है तब तो कोई ज्यादा गंभीर बात नहीं है और जो कोई नुकसान हुआ होगा उसकी भरपाई कर ली जाएगी; लेकिन जो हुआ वह यदि सुरेश भसीन की सुनियोजित योजना के तहत हुआ है तब मामला गंभीर है और इसे गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है । उन्हें दरअसल इस बात का पता है कि सुरेश भसीन को एक कुशल रणनीतिकार के रूप में देखा/पहचाना जाता है; और प्रतिकूल स्थितियों में भी अपने लिए मौके बनाने का हुनर उन्हें खूब आता है । डिस्ट्रिक्ट के चुनावी खिलाड़ियों को भी लगता है कि पहले चुपचाप से वन-टू-वन मुलाकात के जरिये संपर्क अभियान चलाने और अब अपनी सक्रियता को 'दिखाने' का जो खेल सुरेश भसीन ने किया है, वह उनकी सोची-विचारी रणनीति का ही हिस्सा होगी । सुरेश भसीन की इस रणनीति ने उनके प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवार डॉक्टर सुब्रमणियन को पहले गलती करने के लिए 'प्रेरित' किया और अब उन्हें तथा उनके समर्थकों व शुभचिंतकों को हक्का-बक्का कर दिया है । डिस्ट्रिक्ट के नेताओं के समर्थन-आधार पर देखें तो अभी भी डॉक्टर सुब्रमणियन का ही पलड़ा भारी दिखेगा; लेकिन चुनावी लड़ाई सिर्फ समर्थन-आधार के भरोसे नहीं जीती जाती - उसके लिए एक कुशल रणनीति अपनाने की भी जरूरत होती है । कुशल रणनीति अपनाने के मामले में सुरेश भसीन ने अपने आपको डॉक्टर सुब्रमणियन से इक्कीस ही साबित किया है । कुशल रणनीति के कारण ही सुरेश भसीन ने अपने आपको एक ऐसे मुकाबले में मजबूती के साथ बनाये रखा हुआ है, जिस मुकाबले में माना जा रहा है कि उनके पास कुछ है ही नहीं ।
प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद के चुनाव में स्थितियाँ ऊपर ऊपर से पूरी तरह डॉक्टर सुब्रमणियन के अनुकूल लग रही हैं, लेकिन फिर भी सुरेश भसीन की सक्रियता को देख कर उनके समर्थकों व शुभचिंतकों के बीच आशंका और डर पैदा हुआ है, तो इसका अर्थ यही है कि सुरेश भसीन की उम्मीदवारी को डॉक्टर सुब्रमणियन के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है ।


Thursday, October 30, 2014

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 के प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3012 में शरत जैन, रमेश अग्रवाल और जेके गौड़ द्धारा सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के विषय को किनारे धकेल दिए जाने के कारण सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों के बीच जो निराशा और नाराजगी पैदा हो रही है उसके चलते शरत जैन की उम्मीदवारी के लिए नई नई तरह की चुनौतियाँ पैदा हो रही हैं

नई दिल्ली । अरनेजा गिरोह ने जिस तरह अपनी सारी ताकत शरत जैन की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने में लगा दी है, उसे देख/जान कर सतीश सिंघल और उनके समर्थक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं । उल्लेखनीय है कि अरनेजा गिरोह के मुखिया मुकेश अरनेजा और गिरोह के दूसरे सदस्य समय समय पर सतीश सिंघल की उम्मीदवारी का समर्थन करने की बात तो करते रहे हैं किंतु अब जब सतीश सिंघल को सचमुच मदद की जरूरत है तो वह उनकी मदद करने से पीछे हटते हुए दिख रहे हैं । मजे की बात यह है कि सतीश सिंघल के साथ धोखा करने के लिए मुकेश अरनेजा ने रमेश अग्रवाल और जेके गौड़ को जिम्मेदार ठहराया है । उनका कहना है कि रमेश अग्रवाल और जेके गौड़ को लगता है कि उन्हें अपना सारा ध्यान सिर्फ शरत जैन की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने में लगाना चाहिए और यदि वह सतीश सिंघल की उम्मीदवारी की भी जिम्मेदारी ले लेते हैं तो इससे शरत जैन को नुकसान होगा । मुकेश अरनेजा ने सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के कुछेक समर्थकों को यह भी बताया है कि जेके गौड़ इस समय चूँकि पूरी तरह से रमेश अग्रवाल के कहे में हैं इसलिए उनकी भी नहीं सुन रहे हैं और इस कारण वह भी सतीश सिंघल के लिए कुछ कर सकने में अपने आप को असमर्थ पा रहे हैं ।
रोटरी क्लब सोनीपत अपटाऊन के राजकुमार पांचाल की जगह विनीत पटपटिया को असिस्टेंट गवर्नर बनाने के जेके गौड़ के फैसले को जेके गौड़ पर हावी होने/रहने की रमेश अग्रवाल की कार्रवाई के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । राजकुमार पांचाल ही लोगों को बता रहे हैं कि जेके गौड़ जब खुद उम्मीदवार थे तब से उनके साथ मीठी मीठी बात करते आ रहे थे और अभी हाल तक उन्हें असिस्टेंट गवर्नर पद की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार रहने के संकेत दे रहे थे । उनके क्लब में ही नहीं, बल्कि सोनीपत में भी लोग यह विश्वास करने लगे थे कि जेके गौड़ के गवर्नर-काल में राजकुमार पांचाल असिस्टेंट गवर्नर बनेंगे । लेकिन जब फैसला आया तो असिस्टेंट गवर्नर के रूप में विनीत पटपटिया का नाम देख/जान कर हर कोई हैरान रह गया । अधिकतर लोगों ने जेके गौड़ के इस फैसले को राजकुमार पांचाल के साथ विश्वासघात के रूप में ही देखा/पहचाना है । जेके गौड़ के नजदीकी ही बता रहे हैं कि राजकुमार पांचाल की जगह विनीत पटपटिया को असिस्टेंट गवर्नर बनवाने का फैसला जेके गौड़ ने रमेश अग्रवाल के कहने पर लिया है । रमेश अग्रवाल दरअसल सोनीपत में राजकुमार पांचाल की बढ़ती राजनीतिक हैसियत को अपनी राजनीति के लिए खतरे के रूप में देख रहे हैं । राजकुमार पांचाल ने अपने कामकाज और अपने व्यवहार से रोटेरियंस के बीच अपनी अच्छी साख बनाई है । क्लब के अध्यक्ष के रूप में किए गए कामों के चलते उनकी गिनती सबसे योग्य अध्यक्षों में हुई थी और उन्हें प्लेटिनम प्रेसीडेंट अवार्ड से नवाजा गया था । रोटरी की चुनावी राजनीति में भी निर्णायक भूमिका निभाने में उनका दखल रहा है । इसीलिए जेके गौड़ जब उम्मीदवार बने थे, तब सोनीपत में समर्थन जुटाने के लिए वह राजकुमार पांचाल पर निर्भर हुए थे और तभी से उन्होंने राजकुमार पांचाल को अपने खास लोगों में रखना/देखना/गिनना शुरू कर दिया था ।
लेकिन अपने 'खासों में भी खास' रमेश अग्रवाल के कहने में आकर जेके गौड़ ने राजकुमार पांचाल की बलि ले ली । रमेश अग्रवाल को डर वास्तव में यह है कि उन्होंने यदि राजकुमार पांचाल को नहीं 'रोका' तो सोनीपत में राजनीतिक मनमानी करने/दिखाने का उनका मौका ख़त्म जायेगा । सोनीपत में अपनी मनमानियों के लिए मौका बनाये रखने के लिए रमेश अग्रवाल को राजकुमार पांचाल को पीछे धकेलना जरूरी लगा और उनके असिस्टेंट गवर्नर बनने की राह में रोड़ा बन कर रमेश अग्रवाल ने यही जरूरी काम किया है । इस प्रकरण में लोगों को लेकिन जेके गौड़ के रवैये पर हैरानी है : लोगों का कहना है कि रमेश अग्रवाल के साथ उनका आखिर ऐसा क्या रिश्ता है, जिसे निभाने के चक्कर में वह उन लोगों को भी अपने से दूर करते जा रहे हैं जिन्होंने जरूरत के समय उनकी मदद की थी । मजे की बात यह है कि जेके गौड़ के साथ जुड़े कई लोगों को भी रमेश अग्रवाल के साथ उनके रिश्ते को लेकर आपत्ति होने लगी है ।  कुछेक लोग मजाक में कहने भी लगे हैं कि जेके गौड़ तो रमेश अग्रवाल के ऐसे दीवाने बने हुए हैं, जितना दीवाना तो लैला का मजनूँ भी नहीं था ।
रमेश अग्रवाल के प्रति दीवानगी के चलते जेके गौड़ जिस तरह काम कर रहे हैं और उसके कारण उनके साथ जुड़े लोग भी जिस तरह से बिदक रहे हैं - उसके चलते उनके अपने गिरोह में बिखराव बढ़ने लगा है । उनके अपने लोग ही यह कहते हुए सुने जा रहे हैं कि शरत जैन के लिए समर्थन जुटाने के नाम पर जेके गौड़ जिस तरह रमेश अग्रवाल के द्धारा इस्तेमाल हो रहे हैं, उसका वास्तव में उल्टा असर ही हो रहा है और शरत जैन का फायदा होने की बजाये नुकसान होने का खतरा बढ़ रहा है । उनकी कार्रवाइयों ने सबसे ज्यादा तो सतीश सिंघल के उन समर्थकों व शुभचिंतकों को निराश किया है, जिन्होंने इस उम्मीद के साथ शरत जैन की उम्मीदवारी के समर्थन में जुटना शुरू किया था कि इसके बदले में शरत जैन के समर्थकों व शुभचिंतकों का समर्थन सतीश सिंघल को मिलेगा । उन्हें शरत जैन के रवैये से भी निराशा हुई है : उनका कहना है कि शरत जैन उनका समर्थन तो लेना चाहते हैं, लेकिन बदले में सतीश सिंघल को अपने नजदीकियों का समर्थन दिलवाने के मुद्दे पर चुप लगा जाते हैं । मुकेश अरनेजा ने यह कह कर अपने आप को बचाने की कोशिश की हुई है कि वह क्या करें - जब शरत जैन, रमेश अग्रवाल और जेके गौड़ उनकी सुनते और मानते ही नहीं हैं । शरत जैन, रमेश अग्रवाल और जेके गौड़ ने जिस तरह से सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के विषय को किनारे धकेल दिया है, उससे सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों के बीच जो निराशा और नाराजगी पैदा हुई है - उसे शरत जैन के लिए घातक समझा जा रहा है । सतीश सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों का कहना है कि शरत जैन, रमेश अग्रवाल और जेके गौड़ को सतीश सिंघल की मदद नहीं करनी थी तो न करते, झूठ बोलने की और धोखा देने की कोशिश तो न करते ।
रमेश अग्रवाल ने शरत जैन की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से जेके गौड़ को जैसा जो इस्तेमाल किया हुआ है, और जेके गौड़ जिस तरह से अपना इस्तेमाल होने दे रहे हैं उससे न सिर्फ जेके गौड़ की बदनामी हो रही है, बल्कि गिरोह में फूट पड़ती दिख रही है - और इस सबके चलते शरत जैन की उम्मीदवारी के लिए नई नई तरह की चुनौतियाँ पैदा हो रही हैं ।

Friday, October 24, 2014

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 के प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3012 में केके गुप्ता के हस्तक्षेप के बाद मुकेश अरनेजा ने अपने ही क्लब की अध्यक्ष आभा गुप्ता के खिलाफ की जा रही हरकतों को विराम तो दिया है, लेकिन इसके चलते वह खुद की फजीहत कराने के साथ-साथ शरत जैन के लिए भी मुसीबत तो खड़ी कर ही चुके हैं

नई दिल्ली । मुकेश अरनेजा को अपने क्लब की अध्यक्ष आभा गुप्ता के साथ लगातार 'बद तमीजी' करते रहना खासा महँगा पड़ा है - इसके लिए एक तरफ उन्हें अपने ही क्लब में भारी फजीहत का सामना करना पड़ा है, और दूसरी तरफ शरत जैन की उम्मीदवारी के समर्थकों ने उनसे कहना/बताना शुरू कर दिया है कि उनका इस तरह का छिछोरापन शरत जैन की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने का काम करेगा । मुकेश अरनेजा डिस्ट्रिक्ट 3010 के प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद के लिए दीपक गुप्ता और शरत जैन के बीच होने वाले चुनाव में शरत जैन की उम्मीदवारी का झंडा उठाये हुए हैं - लेकिन अपने ही क्लब की अध्यक्ष आभा गुप्ता को तरह-तरह से परेशान करने के मामले में मुकेश अरनेजा को संलिप्त देख कर शरत जैन की उम्मीदवारी के दूसरे समर्थकों को लगने लगा है कि मुकेश अरनेजा की इस तरह की हरकतें शरत जैन की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने का ही काम करेंगी । शरत जैन की मुश्किल यह है कि अपनी उम्मीदवारी के पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए वह पूरी तरह से रमेश अग्रवाल और मुकेश अरनेजा पर निर्भर हैं - और मुकेश अरनेजा अपने ही क्लब की अध्यक्ष आभा गुप्ता के साथ 'बद तमीजी' करने के आरोपों में जिस तरह फँसे हैं उसे देख कर दूसरे क्लब्स के अध्यक्षों में मुकेश अरनेजा के प्रति विरोध पैदा हुआ है । मुकेश अरनेजा और शरत जैन के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि आभा गुप्ता कभी अपनी तरफ से तो कभी पूछे जाने पर मुकेश अरनेजा की कारस्तानी लोगों को बता रही हैं - जिसके चलते लोगों के बीच यह समझ और मजबूत बन रही है कि मुकेश अरनेजा सुधरने वाले व्यक्ति नहीं हैं, और शरत जैन अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के लिए ऐसे व्यक्ति का समर्थन और सहयोग ले रहे हैं ।
मुकेश अरनेजा की हरकतों से परेशान आभा गुप्ता क्लब की एक मीटिंग में मुकेश अरनेजा की कारस्तानियों का जिक्र करते हुए रो तक पड़ीं और अध्यक्ष पद छोड़ने पर जोर देने लगीं । क्लब के दूसरे पदाधिकारियों ने उन्हें समझाया कि वह ऐसा करेंगी तो मुकेश अरनेजा को उन्हें और बदनाम करने का मौका मिलेगा तथा लोगों की निगाह में वह कमजोर साबित होंगी । मुकेश अरनेजा ने पिछले दिनों लगातार ईमेल लिख लिख कर क्लब के लोगों के बीच आभा गुप्ता को एक काम न करने वाले तथा संगठन चलाने की समझ न रखने वाले अध्यक्ष के रूप में चित्रित करने का प्रयास किया । क्लब के लोगों के बीच हालाँकि आभा गुप्ता की पहचान एक अत्यंत सक्रिय और बेहद दिलचस्पी के साथ काम करने वाले अध्यक्ष की बनी है । इसीलिए मुकेश अरनेजा का रवैया क्लब में किसी की समझ में नहीं आया और सभी को लगा कि मुकेश अरनेजा अपनी जिन हरकतों के लिए बदनाम हैं, उन्हीं हरकतों को वह आभा गुप्ता के साथ आजमा रहे हैं । क्लब के कई एक वरिष्ठ सदस्यों का मानना और कहना रहा कि अध्यक्ष के रूप में आभा गुप्ता के काम करने के तौर-तरीकों में सुधार की हालाँकि बहुत जरूरत है, लेकिन उस जरूरत को बताने/जताने का जो तरीका मुकेश अरनेजा ने अपनाया वह अपमान करने वाला और प्रताड़ित करने वाला है - इसलिए आभा गुप्ता ने अपने आप को यदि परेशान अनुभव किया तो यह बहुत स्वाभाविक ही है; और मुकेश अरनेजा की हरकत को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता है ।
मुकेश अरनेजा तर्क देते हैं कि वह यदि अपने क्लब के अध्यक्ष से यह पूछ रहे हैं कि क्लब में न्यूजलैटर क्यों नहीं निकल रहा है; और या क्लब के सदस्यों के क्लासीफिकेशन स्पष्ट करने की बात कर रहे हैं तो इसमें गलत क्या है और इससे अध्यक्ष के रूप में आभा गुप्ता को परेशान होने की या रोने की क्या बात हो गई ? जिन भी लोगों के बीच मुकेश अरनेजा ने यह तर्क दिया, उनमें से कइयों को उनका यह तर्क सड़कछाप लोफर के तर्क जैसा लगा जो सीटी बजाने और गाना गाने के चलते ईव टीचिंग के आरोप में धर लिए जाने पर तर्क देता है कि सीटी बजाना और गाना गाना तो एक कला है, यह आरोप कैसे हो गया ? मुकेश अरनेजा की तरह क्लब में जो अन्य लोग न्यूजलैटर निकलते हुए देखना चाहते हैं, उनका कहना है कि अच्छा तरीका यह होगा कि उन्हें न्यूजलैटर निकालने के लिए आभा गुप्ता को अपनी अपनी तरफ से मदद का प्रस्ताव देना चाहिए, न कि आभा गुप्ता को बदनाम करना चाहिए । उन्होंने ही बताया कि आभा गुप्ता से पहले के कई अध्यक्षों ने भी न्यूजलैटर नहीं निकाले थे - लेकिन उन्हें तो मुकेश अरनेजा ने निशाना नहीं बनाया था । क्लासीफिकेशन की जो बात है, तो उसका सच यह है कि सदस्यों के क्लासीफिकेशन की बात आज सिर्फ बात ही बनकर रह गई है और क्लब्स तो छोड़िये डिस्ट्रिक्ट तक में क्लासीफिकेशन स्पष्ट नहीं हैं । रोटरी के जो जानकर लोग हैं उनका कहना है कि क्लासीफिकेशन का काम दरअसल इसलिए भी नहीं हो रहा है क्योंकि रोटरी इंटरनेशनल के मुख्य कर्ता-धर्ता ही उसे लेकर कन्फ्यूज से हैं और बदलती परिस्थितियों व जरूरतों के अनुरूप कोई स्पष्ट पैमाने नहीं तय कर पा रहे हैं । ऐसे में, सदस्यों के क्लासीफिकेशन स्पष्ट करने की आभा गुप्ता से की जाने की मुकेश अरनेजा की माँग के पीछे मुकेश अरनेजा की बदनियती को यदि देखा गया - और आभा गुप्ता ने अपने आप को परेशान तथा अपमानित होता हुआ महसूस किया तो यह बहुत स्वाभाविक ही है । 
आभा गुप्ता के प्रति मुकेश अरनेजा की बदनियती लोगों ने इसलिए भी देखी क्योंकि मुकेश अरनेजा कई बार लोगों के बीच शिकायत कर चुके हैं कि आभा गुप्ता उन्हें लिफ्ट ही नहीं देती हैं । मुकेश अरनेजा की मुख्य समस्या दरअसल यही रही कि अध्यक्ष के रूप में आभा गुप्ता ने उन्हें कोई तवज्जो ही नहीं दी । मुकेश अरनेजा अपने आप को बड़ा तुर्रमखाँ नेता मानते/समझते हैं; इसलिए उनके लिए यह बर्दाश्त करना मुश्किल हुआ कि उनके अपने ही क्लब में उनकी कोई पूछ नहीं हो रही है । मुकेश अरनेजा चूँकि सीधी ऊँगली से घी नहीं निकलने की स्थिति में ऊँगली टेढ़ी कर लेने वाले सिद्धांत में विश्वास करते हैं, इसलिए उन्होंने आभा गुप्ता को ठिकाने लगाने का काम शुरू कर दिया । मुकेश अरनेजा ने उम्मीद तो यह की थी - और कुछेक लोगों से उन्होंने यह कहा भी था - कि वह आभा गुप्ता की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करेंगे तो आभा गुप्ता उनकी शरण में आने को मजबूर हो जायेंगी; लेकिन हुआ उल्टा । आभा गुप्ता ने मुकेश अरनेजा के कार्य-व्यवहार की पहले तो अनदेखी की; और जब मुकेश अरनेजा की हरकतें हद से पार जाने लगीं तो मुकेश अरनेजा की शरण में जाने की बजाये उन्होंने पद छोड़ देने का विकल्प चुना - और इस तरह मुकेश अरनेजा की सारी योजना को उन्होंने फेल ही कर दिया । मुकेश अरनेजा के लिए इससे भी ज्यादा बुरी बात यह हुई कि क्लब के लोगों ने भी आभा गुप्ता का समर्थन किया और मुकेश अरनेजा की थू थू की । मास्टर स्ट्रोक चला क्लब के वरिष्ठ सदस्य और पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर केके गुप्ता ने ।
केके गुप्ता ने आभा गुप्ता को लिखे एक ईमेल संदेश में सुझाव दिया कि क्लब में माहौल जिस तरह से ख़राब चल रहा है, उस पर चर्चा करने के लिए उन्हें दीपावली के बाद पूर्व अध्यक्षों की कमेटी की मीटिंग बुलानी चाहिए । आभा गुप्ता को लिखे ईमेल संदेश की कॉपी उन्होंने क्लब के दूसरे सदस्यों को भी भेजी । केके गुप्ता द्धारा किए गए इस हस्तक्षेप से मुकेश अरनेजा ने भाँप लिया कि अब उनकी ख़ैर नहीं है । मुकेश अरनेजा ने समझ लिया कि केके गुप्ता के सुझाव पर पूर्व अध्यक्षों की कमेटी की मीटिंग यदि बुला ली गई तो फिर उनके खिलाफ कार्रवाई होना निश्चित ही है - और तब डिस्ट्रिक्ट में उनकी बड़ी फजीहत होगी । मुकेश अरनेजा जितनी तेजी से उफनते हैं, उतनी ही तेजी से बैठने की 'कला' के बड़े ऊँचे खिलाड़ी हैं - इसलिए वह तुरंत ही क्लब के सदस्यों की मान-मनौव्वल में जुट गए और कहने लगे कि आभा गुप्ता से कुछ कहना आभा गुप्ता को और क्लब के सदस्यों को बुरा लगा है, तो वह आभा गुप्ता को कुछ नहीं कहेंगे । क्लब के कुछेक सदस्यों को तो लगता है कि मुकेश अरनेजा को अक्ल आ गई है और अब वह आभा गुप्ता के साथ बद तमीजी नहीं करेंगे; लेकिन अन्य कुछेक लोगों को लगता है और वह कहते हैं कि मुकेश अरनेजा अपनी हरकतों से बाज आने वाले व्यक्ति नहीं हैं और जल्दी ही वह फिर कोई न कोई कारस्तानी करेंगे इसलिए आभा गुप्ता को सावधान रहने की जरूरत है ।
मुकेश अरनेजा की अपने ही क्लब के अध्यक्ष के साथ की गई हरकत और उनकी हरकत पर हुई प्रतिक्रिया के चलते मुकेश अरनेजा की तो फजीहत हुई ही है, साथ ही शरत जैन के लिए भी मुसीबत हो गई है । कई क्लब्स के अध्यक्षों ने अपनी कलीग आभा गुप्ता के प्रति अपनाये गए मुकेश अरनेजा के रवैये की भर्त्स्ना की है और इस बात को रेखांकित किया है कि मुकेश अरनेजा के रहते हुए रोटरी में और डिस्ट्रिक्ट में किसी की भी इज्जत सुरक्षित नहीं है । शरत जैन के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि उन्हें चूँकि मुकेश अरनेजा के उम्मीदवार के रूप में ही देखा/पहचाना जाता है - इसलिए मुकेश अरनेजा के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट में बनते हुए माहौल में उनके लिए दीपक गुप्ता के मुकाबले अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाना एक बड़ी चुनौती होगा । यानि अपने ही क्लब की अध्यक्ष आभा गुप्ता के साथ की गई मुकेश अरनेजा की हरकतों ने उनकी खुद की फजीहत तो कराई ही है, शरत जैन के लिए भी मुसीबत खड़ी कर दी है ।

Thursday, October 16, 2014

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 के प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3012 में शरत जैन की उम्मीदवारी के लिए मुसीबत और मुकेश अरनेजा की नकारात्मक छवि से छुटकारा पाने की कोशिशों में बाधा बनने के कारण असिस्टेंट गवर्नर संजीव रस्तोगी, मुकेश अरनेजा की आँख की किरकिरी बने

नई दिल्ली । अरनेजा गिरोह ने संजीव रस्तोगी का रोटरी-जीवन खत्म करने के उद्देश्य से जो ताना-बाना बुना था, संजीव रस्तोगी ने उसे समय से पहले ही पहचान लिया और एहतियादि कदम उठा कर अरनेजा गिरोह की चाल को फेल कर दिया है । अरनेजा गिरोह के मुखिया मुकेश अरनेजा और गिरोह के दूसरे सदस्यों ने पिछले कई दिनों से हवा बनाई हुई थी कि वह संजीव रस्तोगी को उनके अपने क्लब से इस तरह निकलवायेंगे जिससे कि संजीव रस्तोगी का असिस्टेंट गवर्नर का पद भी छिनेगा और फिर वह रोटरी में भी नहीं रह पायेंगे । मुकेश अरनेजा लोगों को बता रहे थे कि रोटरी क्लब दिल्ली शाहदरा के वरिष्ठ और सक्रिय सदस्य अशोक कुमार गर्ग उनके पक्के वाले चेले हैं और अशोक कुमार गर्ग के जरिये ही वह संजीव रस्तोगी का 'ईलाज' करेंगे । मुकेश अरनेजा का दावा था कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजय खन्ना भी संजीव रस्तोगी को नहीं बचा पायेंगे । यह दावा करने से भी पहले से मुकेश अरनेजा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजय खन्ना की इस बात के लिए आलोचना कर चुके थे कि वह संजीव रस्तोगी को शह दे रहे हैं । इस तरह की बातों/चर्चाओं के चलते डिस्ट्रिक्ट के कुछेक लोगों के बीच पिछले कुछेक दिनों से चर्चा थी कि मुकेश अरनेजा ने संजीव रस्तोगी को रोटरी से बाहर करने का दृढ़ निश्चय कर लिया है; और अपने इस निश्चय को पूरा करने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं ।
संजीव रस्तोगी से मुकेश अरनेजा दरअसल इसलिए नाराज हैं क्योंकि संजीव रस्तोगी ने डिस्ट्रिक्ट 3010 के प्रस्तावित विभाजित डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद के लिए होने वाले चुनाव के अभियान में दीपक गुप्ता की उम्मीदवारी का झंडा उठाया हुआ है । मुकेश अरनेजा को समस्या सिर्फ इस बात से ही नहीं है कि संजीव रस्तोगी ने दीपक गुप्ता की उम्मीदवारी का झंडा उठाया हुआ है; समस्या उन्हें इस बात से भी है कि दीपक गुप्ता की उम्मीदवारी के पक्ष में संजीव रस्तोगी ने खासा आक्रामक अभियान चला रखा है - और उनके अभियान के चलते दीपक गुप्ता के प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवार शरत जैन के लिए ऐसी मुश्किलें खड़ी हो गईं जिन्हें हल करने का उन्हें कोई तरीका ही समझ में नहीं आ रहा । शरत जैन की उम्मीदवारी का झंडा चूँकि मुकेश अरनेजा के हाथ में है - इसलिए शरत जैन की मुश्किलें मुकेश अरनेजा को अपनी मुश्किल लगी और इस कारण उन्हें संजीव रस्तोगी से निपटना जरूरी लगा । मुकेश अरनेजा ने कई बार डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजय खन्ना से इस बात की शिकायत की कि संजीव रस्तोगी असिस्टेंट गवर्नर पद का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं । मुकेश अरनेजा को संजय खन्ना लेकिन कोई कार्रवाई करते हुए नहीं दिखे, तो उन्होंने संजीव रस्तोगी से खुद ही निपटने का फैसला किया ।
मुकेश अरनेजा जिससे नाराज होते हैं, उससे निपटने का उनका अपना एक स्टाइल है - अपने इस स्टाइल से वह गाजियाबाद में योगेश गर्ग, राजीव वशिष्ट, उमेश चोपड़ा, रवींद्र सिंह, दीपक गुप्ता, आलोक गुप्ता आदि को अलग-अलग तरीके से बेइज्जत और 'अकेला' कर चुके हैं । इन लोगों के बारे में मुकेश अरनेजा का 'अनुभव' चूँकि यह रहा है कि यह लोग भले किस्म के लोग हैं, इन्हें मुकेश अरनेजा ने कैसे भी अपमानित और परेशान किया हो, किंतु अब जब मुकेश अरनेजा इनकी खुशामद करेंगे और इनसे माफी माँगेंगे - तो यह अपना पिछला अपमान और परेशानी भूल भी जायेंगे । 'पहले गाली, फिर माफी' वाले अपने स्टाइल से मुकेश अरनेजा को लेकिन संजीव रस्तोगी से निपटना चूँकि मुश्किल लगा, इसलिए संजीव रस्तोगी से निपटने के लिए उन्होंने दूसरे तरीकों पर विचार किया । यह विचार करना उन्हें इसलिए भी जरूरी लगा क्योंकि संजीव रस्तोगी ने उनकी राजनीतिक सत्ता को सीधी चुनौती दी हुई थी । संजीव रस्तोगी इस बात को खूब धड़ल्ले से कहा करते हैं कि उन्हें डिस्ट्रिक्ट में मुकेश अरनेजा की चौधराहट और गुंडागर्दी खत्म करनी है ।
मुकेश अरनेजा को समस्या या खतरा इस बात से नहीं है कि संजीव रस्तोगी क्या करना चाहते हैं; उन्हें समस्या इस बात से है कि संजीव रस्तोगी की बातें उनकी नकारात्मक छवि को बनाये रखने का काम कर रही हैं । डिस्ट्रिक्ट में कई लोगों ने इस बात पर गौर किया है कि मुकेश अरनेजा अपनी नकारात्मक छवि से छुटकारा पाने का प्रयास कर रहे हैं; हालाँकि कई लोग यह भी मानते और कहते हैं कि मुकेश अरनेजा प्रयास चाहें जितना करें, लेकिन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ सकते हैं । लोगों के ऐसा मानने और कहने के बीच, संजीव रस्तोगी की बातें मुकेश अरनेजा को अपने प्रयासों में बाधा बनती हुईं दिखीं । मुकेश अरनेजा के लिए तकलीफ की बात यह थी कि जो लोग संजीव रस्तोगी की बातों और उनकी गतिविधियों के खिलाफ भी थे, वह भी यही कहते सुने जा रहे थे कि संजीव रस्तोगी 'दूसरे मुकेश अरनेजा' बनने की कोशिश कर रहे हैं । मुकेश अरनेजा के लिए समस्या की बात यह हुई कि संजीव रस्तोगी तो उनकी ऐसीतैसी करने के अभियान में लगे हुए थे ही, संजीव रस्तोगी का जो विरोध हो रहा था उसमें भी मुकेश अरनेजा की ही किरकिरी हो रही थी । इस तरह मुकेश अरनेजा को संजीव रस्तोगी दोनों तरफ से काट रहे थे । इससे, डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच स्थापित अपनी नकारात्मक छवि को बदलने का मुकेश अरनेजा का प्रयास बाधित हो रहा है ।
मुकेश अरनेजा के खिलाफ संजीव रस्तोगी ने जो अभियान छेड़ा हुआ है, उसने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद के लिए प्रस्तुत शरत जैन की उम्मीदवारी के अभियान का भी पूरी तरह कबाड़ा किया हुआ है । शरत जैन को हर जगह मुकेश अरनेजा तथा रमेश अग्रवाल की कारस्तानियों को लेकर तथा उनके साथ अपने संबंधों को लेकर सफाई ही देनी पड़ती है । इससे अपनी उम्मीदवारी के बारे में बात करने का उनका उत्साह न तो बन पाता है और न ही वह बना पाते हैं । शरत जैन को चूँकि मुकेश अरनेजा तथा रमेश अग्रवाल के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जाता है, इसलिए मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल के प्रति लोगों के बीच जो रोष है उसका खामियाजा शरत जैन को भुगतना पड़ रहा है । स्थिति को सँभालने के लिए मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल ने अपने आप को पीछे भी किया किंतु - संजीव रस्तोगी के आक्रामक प्रचार अभियान के चलते - उन दोनों की बदनामी चूँकि उनसे आगे चल रही है, इसलिए उसका भी कोई फायदा शरत जैन को नहीं मिल पा रहा है । मुकेश अरनेजा और रमेश अग्रवाल की बदनामी शरत जैन की उम्मीदवारी पर एक बोझ की तरह लद गई है, जिससे उबर पाना न शरत जैन के लिए संभव हो पा रहा है और न मुकेश अरनेजा व रमेश अग्रवाल जैसे उनके समर्थक नेताओं के लिए । ऐसे में, संजीव रस्तोगी के अभियान ने उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है ।
इसीलिए मुकेश अरनेजा के लिए संजीव रस्तोगी का 'ईलाज' करना जरूरी हो गया । मुकेश अरनेजा को जब यह पता चला कि संजीव रस्तोगी की अपने क्लब में ही खटपट चल रही है, तो उन्हें संजीव रस्तोगी का 'ईलाज' करने का आसान रास्ता भी मिल गया । मुकेश अरनेजा ने खुद ही लोगों को बताया कि वह संजीव रस्तोगी का ऐसा हाल कर देंगे कि संजीव रस्तोगी न अपने क्लब में रह पायेंगे और न रोटरी में ही रह पायेंगे । संजीव रस्तोगी ने जब यह देखा/पहचाना कि मुकेश अरनेजा ने उनके क्लब के कुछेक प्रमुख सदस्यों के साथ मिल कर उनके खिलाफ षड्यंत्र करने और उन्हें फँसाने की तैयारी कर ली है तो उन्होंने पहले ही क्लब को छोड़ दिया । इससे मुकेश अरनेजा और उनके गिरोह के लोगों की संजीव रस्तोगी को रोटरी से आउट करने की योजना फ़िलहाल तो फेल हो गई है । संजीव रस्तोगी ने अभी भले ही मुकेश अरनेजा की योजना को फेल कर दिया दिया हो, लेकिन सभी लोग जानते/समझते हैं कि मुकेश अरनेजा चुप बैठने वाले नहीं हैं - इसलिए उम्मीद की जा रही है कि इस मामले में अभी और पटाखे फूटेंगे ।